Consumers Hindi अध्याय 5- उपभोक्ता अधिकार यह अध्याय हमारे देश में बाजार की कार्यविधि के संदर्भ लोगों में बाँटने का बेहतर तरीका हो सकती हैं। सम्मिलित में उपभोक्ता अधिकारों के मुद्दे पर विचार करता है। बाजार रूप से इश्तहार बनाना इन मुद्दों पर विचार करने का दूसरा में असमान स्थितियों के बहुत से पहलू हैं तथा नियमों और तरीका है। इस अध्याय में कई गतिविधियों को रखा गया कानूनों को लागू करने की स्थिति असंतोषप्रद है। इसलिए, है, जिनको पूरा करने के लिए विभिन्न संस्थाओं से संपर्क नये उपभोक्ताओं को वास्तविकता से परिचित कराने और करने की आवश्यकता पड़ेगी। यात्राओं की जरूरत पड़ेगी। उपभोक्ता आंदोलन में भाग लेने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करने ये संस्थाएँ उपभोक्ता संरक्षण परिषदें, उपभोक्ता संस्थाएँ, की जरूरत है (नये उपभोक्ताओं को उपभोक्ता के रूप में उपभोक्ता अदालतों, खुदरा दुकानें, बाज़ारों आदि की हो सावधान और जानकार नागरिक बनना है)। यह अध्याय सकती हैं। छात्रों के अधिकाधिक अनुभवों को प्राप्त करने कुछ घटनाओं के उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे के लिए संपर्को का आयोजन करें। संपर्को के उद्देश्यों के वास्तविक जीवन में कुछ उपभोक्ता शोषण का शिकार बारे में उनसे परिचर्चा करें, काम शुरू करने से पहले की हए थे और कैसे वैध संस्थाओं ने उनके उपभोक्ता सावधानी, अन्य जरूरी चीजें और कार्य (रिपोर्ट, प्रस्ताव, अधिकारों की रक्षा की हैं और क्षतिपूर्ति प्राप्त करने में नियमावली, सामान आदि) जो उन्हें यात्रा के बाद प्राप्त उन्हें सहायता प्रदान की। इन घटनाओं का विवरण छात्रों होंगी, उन पर चर्चा करें। इस अध्याय में छात्र पत्र लेखन को उनके जीवन अनुभवों को आसपास की घटनाओं से और वार्तालाप में हिस्सा ले सकते हैं। हमें इस अध्याय के जोड़ने में समर्थ बनाएगा। हमें छात्रों को इस योग्य बनाना अभ्यासों की भाषा के प्रति संवेदनात्मक होना पड़ेगा। है कि वे समझदार उपभोक्ता के रूप में जागरूक होकर उपभोक्ता आंदोलन को नयी दिशा में और अपने लंबे इस अध्याय में प्रामाणिक वेबसाइटों, पुस्तकों, समाचार संघर्षों द्वारा लोगों की सक्रिय भागीदारी बढाएँ। यह -पत्रों और पत्रिकाओं से सामग्री संकलित की गई है। अध्याय कछ ऐसे संगठनों के बारे में भी जानकारी देता उदाहरण के लिए, केंद्रीय है, जो विभिन्न प्रकार से उपभोक्ताओं की मदद करते हैं। सरकार की उपभोक्ता मामले के मंत्रालय की वेबसाइट है। अध्याय के अंत में भारत में उपभोक्ता आंदोलन के कुछ। दूसरी वेबसाइट upu0uD.Cuts-international.orgजो भारत गंभीर मुद्दों को बताया गया है। में बीस वर्षों से अधिक समय से काम कर रही उपभोक्ता संगठन की वेबसाइट है। यह भारत में उपभोक्ता को शिक्षण के तरीके/सूचना के स्रोत जागरूक बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की सामग्री इस अध्याय में प्रश्नों, संदर्भ अध्ययनों और गतिविधियों को प्रकाशित करती है। इसे छात्रों के बीच साझेदारी की शामिल किया गया है। इन मुद्दों पर छात्रों का समूहों में आवश्यकता है ताकि वे भी अपने कार्यकलापों में हिस्से के रूप में संकलित कर सकें। इसलिए, वे कार्यकलापों से विचार-विमर्श करना बेहतर होगा। इनमें से कुछ का उत्तर व्यक्तिगत रूप से लिख कर दिया जा सकता है। प्राप्त सामग्री को भी इकट्ठा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, विभिन्न घटनाओं की जानकारी समाचार-पत्रों के आप प्रत्येक क्रियाकलाप का आरंभ उस पर एक गहन अंशों और उपभोक्ता अदालतों में संघर्ष कर रहे उपभोक्ताओं परिचर्चा–सत्र के साथ कर सकते हैं। साथ ही, इस अध्याय से ली जा सकती है। छात्र उपभोक्ता संरक्षण परिषदों, में आपकी भूमिका निर्धारित करने के लिए अनेक संभावनाएँ उपभोक्ता अदालतों और इंटरनेट जैसे विभिन्न स्रोतों से हैं, जो मुद्दों को गहराई से समझने और अपने अनुभवों को सामग्री को संकलित करें और पढ़ें। आर्थिक विकास की समझ उपरोक्त संग्रह उपभोक्ता न्यायालय के निर्णयों के पाने के लिए तरसते रहे? इससे भी अधिक कुछ समाचारों के नमूने हैं। इन मामलों में लोग महत्त्वपूर्ण यह है कि जब उन्हें लगा कि उनके उपभोक्ता अदालत में क्यों गये? ये निर्णय इस साथ गलत हुआ है, तो विक्रेताओं से यथोचित लिए दिये गये क्योंकि कुछ लोग न्याय पाने के व्यवहार प्राप्त करने के लिए वे अपने उपभोक्ता लिए दृढ़ एवं संघर्षरत रहे। किस तरह वे न्याय को अधिकार का प्रयोग कैसे कर सकते हैं? बाज़ार में हमारी भागीदारी उत्पादक और उपभोक्ता जिन्होने यह सुनिश्चित करने के लिए लम्बा संघर्ष दोनों रूपों में होती है। वस्तुओं एवं सेवाओं के किया है कि इन नियमों का अनुपालन हो। उत्पादक के रूप में, हम पहले वर्णित कृषि, बाजार में भी उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए उद्योग या सेवा जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हो सकते हैं। | नियम एवं विनियमों की आवश्यकता होती है, उपभोक्ताओं की भागीदारी बाज़ार में तब होती है, क्योंकि अकेला उपभोक्ता प्रायः स्वयं को कमजोर जब वे अपनी आवश्यकतानुसार वस्तुओं या सेवाओं स्थिति में पाता है। खरीदी गयी वस्तु या सेवा के को खरीदते हैं। उपभोक्ता के रूप में लोगों द्वारा | बारे में जब भी कोई शिकायत होती है, तो विक्रेता उपभोग किए जानेवाली ये अंतिम वस्तुएँ होती हैं। सारा उत्तरदायित्व क्रेता पर डालने का प्रयास करता। पिछले अध्यायों में हमने विकास को बढ़ावा है। सामान्यतः उनकी प्रतिक्रिया होती है: "आपने देने के लिए जरूरी नियमों और नियंत्रणों या इसके जो खरीदा है अगर वह पसंद नहीं है तो कहीं और लिए उठाये गए कदमों की आवश्यकता का वर्णन जाइए।" मानो, बिक्री हो जाने के बाद विक्रेता की किया है। इनका महत्त्व असंगठित क्षेत्र के मजदूरों कोई जिम्मेदारी नहीं रह जाती। उपभोक्ता आंदोलन, की सुरक्षा के लिए उसी तरह हो सकता है, जिस जिसके बारे में हम आगे बात करेंगे, इस स्थिति तरह साहूकारों द्वारा लगाए जाने वाले उच्च ब्याज को बदलने का एक प्रयास है। दर से लोगों को बचाने के लिए नियमों और नियंत्रणों की जरूरत होती है। इसी प्रकार से। बाज़ार में शोषण कई रूपों में होता है। उदाहरणार्थ, पर्यावरण की सरक्षा के लिए नियमों एवं विनियमों कभी-कभी व्यापारी अनुचित व्यापार करने लग की आवश्यकता है। जाते हैं, जैसे दुकानदार उचित वजन से कम वजन तौलते हैं या व्यापारी उन शुल्कों को जोड़ देते हैं, उदाहरण के लिए, अनौपचारिक क्षेत्रों के जिनका वर्णन पहले न किया गया हो या साहुकार जिनके बारे में आप पहले के अध्याय 3 मिलावटी दोषपर्ण वस्तएँ बेची जाती हैं। में पढ़ चुके हैं, कर्जदार पर बंधन डालने के लिए। तरह-तरह के दाँव-पेच अपनाते हैं। सामयिक जब उत्पादक थोड़े और शक्तिशाली होते हैं। ऋण के कारण वे उत्पादक को उत्पाद निम्न दर और उपभोक्ता कम मात्रा में खरीददारी करते हैं। पर बेचने के लिए मजबूर कर सकते हैं। वे स्वप्ना और बिखरे हुए होते हैं, तो बाजार उचित तरीके से । जैसी महिला को ऋण चुकाने के लिए अपनी कार्य नहीं करता है। विशेष रूप से यह स्थिति तब जमीन बेचने को विवश कर सकते हैं। इसी प्रकार, होती है, जब इन वस्तुओं का उत्पादन बड़ी असंगठित क्षेत्र में काम करनेवाले बहुत से लोगों कंपनियाँ कर रही हों। अधिक पूँजीवाली, को निम्न वेतन पर कार्य करना पड़ता है और उन शक्तिशाली और समृद्ध कंपनियाँ विभिन्न प्रकार परिस्थितियों को झेलना पड़ता है, जो न्यायोचित से चालाकीपूर्वक बाजार को प्रभावित कर सकती नहीं होती हैं और प्रायः उनके स्वास्थ्य के लिए हैं। उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए वे हानिकारक भी होती हैं। ऐसे शोषण को रोकने के समय-समय पर मीडिया और अन्य स्रोतों से गलत लिए और उनकी सुरक्षा हेतु हमने नियमों एवं सूचना देते हैं। उदाहरण के लिए, एक कंपनी ने विनियमों की बात की है। ऐसी कई संस्थाएँ हैं। यह दावा करते हुए कि माता के दूध से हमारा उन्होंने जानबूझकर इसे ऐसा बनाया कि कुछ महीनों में ये बेकार हो जाए, ताकि मुझे नया खरीदना पड़े। आर्थिक विकास की समझ उत्पाद बेहतर है, सर्वाधिक वैज्ञानिक उत्पाद के ) : रूप में शिशुओं के लिए दूध का पाउडर पूरे लोगों की जान लेता है, पर विश्व में कई वर्षों तक बेचा। कई वर्षों के लगातार कौन कहे कि तम्बाकू कंपनियों संघर्ष के बाद कंपनी को यह स्वीकार करना पड़ा । को तम्बाकू बेचने की छूट नहीं देनी चाहिए। यही पूँजीवाद है। कि वह झूठे दावे करती आ रही थी। इसी तरह, सिगरेट उत्पादक कंपनियों से यह बात मनवाने के लिए कि उनका उत्पाद कैंसर का कारण हो सकता है, न्यायालय में लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। अत: उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियम और विनियमों की आवश्यकता है। 1. वे कौन-से विभिन्न तरीके हैं, जिनके द्वारा बाज़ार में लोगों का शोषण हो सकता है? 2. अपने अनुभव से एक ऐसे उदाहरण पर विचार करें, जहाँ आपको यह लगा हो कि बाज़ार में धोखा' दिया जा रहा था। कक्षा में चर्चा करें। 3. आपकी राय में उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए सरकार की क्या भूमिका होनी चाहिए? उपभोक्ता आंदोलन का प्रारंभ उपभोक्ताओं के भारत में 'सामाजिक बल' के रूप में उपभोक्ता असंतोष के कारण हुआ, क्योंकि विक्रेता कई आंदोलन का जन्म, अनैतिक और अनुचित व्यवसाय अनुचित व्यावसायिक व्यवहारों में शामिल होते थे। कार्यों से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और बाजार में उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता के साथ हुआ। कोई कानूनी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। लम्बे अत्यधिक खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी, समय तक, जब एक उपभोक्ता एक विशेष ब्रांड खाद्य पदार्थों एवं खाद्य तेल में मिलावट की वजह उत्पाद या दुकान से संतुष्ट नहीं होता था तो से 1960 के दशक में व्यवस्थित रूप में उपभोक्ता सामान्यतः वह उस ब्रांड उत्पाद को खरीदना बंद । कर देता था या उस दुकान से खरीददारी करना बंद उपभोक्ता संस्थाएँ वृहत् स्तर पर उपभोक्ता अधिकार कर देता था। यह मान लिया जाता था कि यह से संबंधित आलेखों के लेखन और प्रदर्शनी का उपभोक्ता की जिम्मेदारी है कि एक वस्तु या सेवा आयोजन का कार्य करने लगीं थीं। उन्होंने सड़क को खरीदते वक्त वह सावधानी बरते। संस्थाओं को यात्री परिवहन में अत्यधिक भीड़-भाड़ और लोगों में जागरुकता लाने में, भारत और पूरे विश्व । राशन दुकानों में होने वाले अनुचित कार्यों पर में कई वर्ष लग गए। इसने वस्तुओं और सेवाओं नज़र रखने के लिए उपभोक्ता दल बनाया। हाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी में, भारत में उपभोक्ता दलों की संख्या में भारी विक्रेताओं पर भी डाल दिया। वृद्धि हुई है। उपभोक्ता अधिकार उपभोक्ता इंटरनेशनल 1985 में संयुक्त राष्ट्र ने उपभोक्ता सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों को अपनाया। यह उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए उपयुक्त तरीके अपनाने हेतु राष्ट्रों के लिए और ऐसा करने के लिए अपनी सरकारों को मजबूर करने हेतु उपभोक्ता की वकालत करने वाले समूह' के लिए, एक हथियार था। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह उपभोक्ता आंदोलन का आधार बना। आज उपभोक्ता इंटरनेशनल 115 से भी अधिक देशों के 220 संस्थाओं का एक संरक्षक संस्था बन गया है। इन सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप, यह आंदोलन वृहत् स्तर पर उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ और अनुचित व्यवसाय शैली को सुधारने के लिए व्यावसायिक कंपनियों और सरकार दोनों पर दबाव डालने में सफल हुआ। 1986 में भारत सरकार द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया। यह उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 कानून का बनना था, जो COPRA के नाम से प्रसिद्ध है। आप COPRA के बारे में आगे पढ़ेंगे। 1. उपभोक्ता दलों द्वारा कौन-कौन से उपाय अपनाए जा सकते हैं? 2. नियम एवं कानून होने के बावजूद उनका अनुपालन नहीं होता है। क्यों? विचार-विमर्श करें। सुरक्षा सबका अधिकार है। रेजी का कष्ट रेजी मेथ्यू, कक्षा 9 का एक स्वस्थ लड़का, केरल के एक निजी चिकित्सालय में टॉन्सिल निकलवाने के लिए भर्ती हुआ। एक ई.एन.टी. सर्जन ने सामान्य बेहोशी की दवा देकर टॉन्सिल निकालने के लिए ऑपरेशन किया। अनुचित बेहोशी के कारण रेजी में दिमागी असामान्यता के लक्षण आ गए, जिसकी वजह से वह जीवन भर के लिए अपंग हो PITI उसके पिता ने सेवा में चिकित्सा की गलती और लापरवाही के लिए राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण समिति में 5,00,000 के मुआवजे का दावा किया। राज्य समिति ने यह कह कर मामला खारिज कर दिया कि सबूत पर्याप्त नहीं है। रेजी के पिता ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण समिति में पुनः अपील की। मामले की जाँच करने के बाद राष्ट्रीय समिति ने अस्पताल को चिकित्सा में लापरवाही का दोषी पाया और हर्जाना देने का निर्देश दिया। रेजी की व्यथा यह साबित करती है कि कैसे एक अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मचारियों द्वारा बेहोश करने में लापरवाही के कारण एक छात्र जिन्दगी भर के लिए अपंग हो जाता है। जब हम एक उपभोक्ता के रूप में बहुत-सी वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग करते हैं, तो हमें वस्तुओं के बाजारीकरण और सेवाओं की प्राप्ति के खिलाफ सुरक्षित रहने का अधिकार होता है, क्योंकि ये जीवन और संपत्ति के लिए खतरनाक होते हैं। उत्पादकों के लिए आवश्यक है कि वे सुरक्षा नियमों और विनियमों का पालन करें। ऐसी बहत सी वस्तुएँ और सेवाएँ हैं, जिन्हें हम खरीदते हैं तो सुरक्षा की दृष्टि से खास सावधानी की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए, प्रेशर कूकर में एक सेफ्टी वॉल्व होता है, जो यदि खराब हो तो भयंकर दुर्घटना का कारण हो सकता है। सेफ्टी वॉल्व के निर्माता को इसकी उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करनी चाहिए। आपको सार्वजनिक या सरकारी कार्यवाहियों को देखकर यह सुनिश्चित करना होगा कि गुणवत्ता का पालन किया गया है या नहीं? फिर भी हमें बाजार में निम्न गुणवत्तावाले उत्पाद प्राप्त होते हैं, क्योंकि इन नियमों का पर्यवेक्षण उचित रूप से नहीं हो रहा है और उपभोक्ता आंदोलन भी बहुत ज्यादा मजबूत नहीं है। 1. निम्नलिखित उत्पादों/सेवाओं (आप सूची में नया नाम जोड़ सकते हैं) पर चर्चा करें कि इनमें उत्पादकों द्वारा किन सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए? (क) एल.पी.जी. सिलिंडर (ख) सिनेमा थिएटर (ग) सर्कस (घ) दवाइयाँ (च ) खाद्य तेल (छ) विवाह पंडाल (ज) एक बहुमंजिली इमारत 2. आपने आसपास के लोगों के साथ हुई किसी दुर्घटना या लापरवाही की किसी घटना का पता कीजिए, जहाँ आपको लगता हो कि उसका जिम्मेदार उत्पादक है। इस पर विचार-विमर्श करें। उपभोक्ता अधिकार वस्तुओं और सेवाओं के बारे में। तो हम उसे बदलने के बारे में कह सकते हैं। यदि जानकारी वस्तु खराब होने की अन्तिम समय-सीमा उस पर नहीं छपी है, तब विनिर्माता दुकानदार पर आरोप जब आप कोई वस्तु खरीदेंगे तो उसके पैकेट पर लगा देगा और अपनी जिम्मेदारी नहीं मानेगा। यदि कुछ खास जानकारियाँ पाएँगे। ये जानकारियाँ उस लोग अंतिम तिथि समाप्त हो गई दवाओं को बेचते वस्तु के अवयवों, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण की हैं, तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जा सकती तारीख, खराब होने की अंतिम तिथि और वस्तु है। इसी तरह से यदि, कोई व्यक्ति मुद्रित मूल्य से बनाने वाले के पते के बारे में होती है। जब हम अधिक मूल्य पर वस्तु बेचता है तो कोई भी कोई दवा खरीदते हैं तो उस दवा के उचित प्रयोग उसका विरोध और शिकायत कर सकता है। यह के बारे में निर्देश' और उस दवा के प्रयोग के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के द्वारा इंगित अन्य प्रभावों और खतरों से संबंधित जानकारी प्राप्त किया हुआ होता है। वस्तुतः उपभोक्ता, विक्रेता से कर सकते हैं। जब आप वस्त्र खरीदेंगे तो ‘धुलाई अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से कम दाम पर संबंधी निर्देश प्राप्त करेंगे। वस्तु देने के लिए मोल-भाव कर सकते हैं। आखिर ऐसे नियम क्यों बनाये गए हैं कि वस्तु आज सरकार प्रदत्त विविध सेवाओं को उपयोगी बनाने वाले को ये जानकारियाँ देनी पड़ती हैं? यह बनाने के लिए सूचना पाने के अधिकार को बढ़ा इसलिए कि उपभोक्ता जिन वस्तुओं और सेवाओं दिया गया है। सन् 2005 के अक्टूबर में भारत को खरीदता है, उसके बारे में उसे सूचना पाने सरकार ने एक कानून लागू किया जो RTI (राइट का अधिकार है। तब उपभोक्ता वस्तु की किसी टू इनफॉरमेशन) या सूचना पाने का अधिकार के भी प्रकार की खराबी होने पर शिकायत कर नाम से जाना जाता है और जो अपने नागरिकों को सकता है, मुआवजे पाने या वस्तु बदलने की माँग सरकारी विभागों के कार्य-कलापों की सभी सूचनाएँ कर सकता है। उदाहरण के लिए, यदि हम एक पाने के अधिकार को सुनिश्चित करता है। उत्पाद खरीदते हैं और उसके खराब होने की आर.टी.आई. एक्ट के प्रभाव को निम्नलिखित अन्तिम तिथि के पहले ही वह खराब हो जाता है, केसों के द्वारा समझा जा सकता है- इंतज़ार ... अमृता नाम की एक इंजीनियरिंग स्नातक ने नौकरी पाने के लिए अपने सभी प्रमाणपत्रों को जमा करने तथा इंटरव्यू देने के बाद भी एक सरकारी विभाग में कोई रिजल्ट नहीं प्राप्त किया। कर्मचारियों ने भी उसके प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार कर दिया। तब उसने एक्ट का प्रयोग करते हुए एक प्रार्थना पत्र दिया और यह कहा कि एक उचित समय तक परिणाम की जानकारी पाना उसका अधिकार था, जिससे कि वह अपने भविष्य की योजना बना सके। उसको न केवल रिजल्ट की घोषणा में देरी के कारणों के बारे में सूचित किया गया बल्कि उसको नियुक्ति के लिए बुलावे का पत्र मिल गया क्योंकि उसने इंटरव्यू अच्छा दिया था। आर्थिक विकास की समझ 1. "जब हम वस्तुएँ खरीदते हैं तो पाते हैं कि कभी-कभी पैकेट पर छपे मूल्य से अधिक या कम मूल्य | लिया जाता है। इसके संभावित कारणों पर बात करें। क्या उपभोक्ता समूह इस मामले में कुछ कर सकते। हैं? चर्चा करें। 2. कुछ डिब्बाबंद वस्तुओं के पैकेट को लें, जिन्हें आप खरीदना चाहते हैं और उन पर दी गई जानकारियों का परीक्षण करें। देखें, कि वे किस प्रकार उपयोगी हैं। क्या आप सोचते हैं कि उन डिब्बाबंद वस्तुओं पर कुछ ऐसी जानकारियाँ दी जानी चाहिए, जो उन पर नहीं हैं? चर्चा करें। 3. लोग नागरिकों की समस्याओं जैसे- खराब सड़कों या दूषित पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में शिकायतें करते हैं, लेकिन कोई नहीं सुनता। अब RTI कानून आपको प्रश्न पूछने का अधिकार देता है। क्या आप इससे सहमत हैं? विचार कीजिये? चयन के अधिकार का उल्लंघन | पैसे लौटाए गए अंसारी नगर के अबिरामी नामक एक चुनने का अधिकार है। संस्थान ने छात्रा ने दिल्ली में व्यावसायिक पाठ्यक्रम पुनः राज्य उपभोक्ता आयोग में में पढ़ने के लिए एक क्षेत्रीय कोचिंग अपील की। राज्य उपभोक्ता आयोग संस्थान के दो वर्षीय पाठ्यक्रम में ने जिला न्यायालय के निर्देश को नामांकन कराया। पाठ्यक्रम में भाग लेने सुरक्षित रखते हुए आगे संस्थान को के समय, पूरे दो वर्ष के अध्ययन के बेकार की अपील करने के लिए लिए करीब 61,020 रुपये जमा किए। 25,000 का दंड लगाया। उसने लेकिन उसने यह पाया कि पढ़ाई का संस्थान को 7,000 रूपये मुआवजे स्तर वहाँ ठीक नहीं है, इसीलिए उसने और याचिका खर्च के रूप में छात्रा साल के अंत में पाठ्यक्रम को छोड़ देने का निश्चय को देने के लिए कहा। किया। जब उसने एक साल का पैसा लौटाने की बात राज्य आयोग ने सभी शिक्षा संस्थानों और व्यावसायिक की, तो उसे मना कर दिया गया। संस्थाओं को विद्यार्थियों से पूरे साल की फीस को जब उसने जिला उपभोक्ता न्यायालय में मुकदमा दायर एडवांस में लेने से भी मना किया। आयोग के किया, तो न्यायालय ने संस्था को यह कहते हुए अनुसार, इस आदेश का उलंघन करने पर दंड शुल्क 28,000 रुपया लौटाने का आदेश दिया कि छात्रा को भरना पड़ सकता है साथ ही जेल भी हो सकती है। हम इस घटना से क्या समझते हैं? किसी भी इच्छुक नहीं हैं, तब आपके चुनने के अधिकार उपभोक्ता को जो कि किसी सेवा को प्राप्त करता का उलंघन हुआ है। ठीक इसी तरह, कभी-कभी है, चाहे वह किसी भी आयु या लिंग का हो और जब आप नया गैस कनेक्शन लेते हैं तो गैस डीलर किसी भी तरह की सेवा प्राप्त करता हो, उसको उसके साथ एक चूल्हा भी लेने के लिए दबाव सेवा प्राप्त करते हुए हमेशा चुनने का अधिकार डालता है। इस प्रकार कई बार हमें उन वस्तुओं को होगा। मान लीजिए, आप एक दंतमंजन खरीदना खरीदने के लिए भी दबाव डाला जाता है, जिनको चाहते हैं और दुकानदार कहता है कि वह केवल खरीदने की हमारी इच्छा बिलकुल नहीं होती और दंतमंजन तभी बेचेगा, जब आप दंतमंजन के साथ तब आपके पास चुनाव के लिए कोई विकल्प एक ब्रश भी खरीदेंगे। अगर आप ब्रश खरीदने के नहीं होता। उपभोक्ता अधिकार यहाँ कुछ ऐसी वस्तुओं के लुभाने वाले विज्ञापन दिए गए हैं, जिन्हें हम बाजार से खरीदते हैं। इनमें वास्तव में क्या कोई ऐसा विज्ञापन है, जो सचमुच में उपभोक्ताओं को लाभ पहुँचाता हो? इस पर विचार विमर्श कीजिए। • • प्रत्येक 500 ग्राम के पैक पर 15 ग्राम की अतिरिक्त छूट। अखबार के ग्राहक बनें, साल के अंत में उपहार पायें। खुरचिये और 10 लाख तक का इनाम जीतिए। 500 ग्राम ग्लूकोज डिब्बे के भीतर एक दूध का चाकलेट। पैकेट के भीतर एक सोने का सिक्का। 2000 रुपये तक का जूता खरीदें और 500 रुपये तक का एक जोड़ी जूता मुफ्त पाएँ। • • • इन उपभोक्ताओं को न्याय पाने के है, तो क्षति की मात्रा के आधार पर उसे क्षतिपूर्ति लिए कहाँ जाना चाहिए? पाने का अधिकार होता है। इस कार्य को पूरा करने के लिए एक आसान और प्रभावी जन-प्रणाली रेजी मैथ्यू और अबिरामी के प्रकरणों को पुनः बनाने की आवश्यकता है। पढ़ें, जो पिछले अध्यायों में दिया जा चुका है। | आप यह जानने के लिए इच्छुक होंगे कि कैसे ये कुछ उदाहरण हैं, जिनमें उपभोक्ताओं के एक पीड़ित व्यक्ति अपनी क्षतिपूर्ति प्राप्त करता अधिकारों की अवहेलना की गई है। ऐसी घटनाएँ है। अब हम श्री प्रकाश के मामले को लेते हैं। अक्सर हमारे देश में घटित होती रहती हैं। इस इन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए अपने गाँव स्थिति में, इन उपभोक्ताओं को न्याय पाने के लिए एक मनीऑडर भेजा। उनकी बेटी को जब इन कहाँ जाना चाहिए? पैसों की ज़रूरत थी, तब पैसे नहीं प्राप्त हुए। यहाँ तक कि महीनों बाद भी नहीं पहुँचे। प्रकाश ने उपभोक्ताओं को अनुचित सौदेबाजी और शोषण नयी दिल्ली के एक जिला स्तर के उपभोक्ता के विरुद्ध क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार है। अदालत में मुकदमा दर्ज किया। उन्होंने जो कदम यदि एक उपभोक्ता को कोई क्षति पहुँचाई जाती उठाए, वे सभी विस्तार से नीचे दिए जा रहे हैं। अपनी बेटी के लिए प्रकाश मनीऑर्डर भेजने पोस्ट-ऑफिस जाता है। प्रकाश को यह पता चला कि रुपये उसकी बेटी को नहीं मिले हैं। आर्थिक विकास की समझ • प्रकाश ने पोस्ट-ऑफिस में मनीऑर्डर के बारे में पूछताछ की। पोस्ट-ऑफिस द्वारा प्रकाश के प्रश्नों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। 6. प्रकाश तब एक नजदीकी उपभोक्ता अदालत में मुकदमा दर्ज करने जाते हैं और अदालत के ऑफिस से रजिस्ट्रेशन फार्म लेते हैं। प्रकाश क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद् में सलाह लेने जाते हैं। वे अदालत में मुकदमें , • पर स्वयं बहस करते हैं। अदालत के जज दस्तावेजों 0• का सत्यापन करते हैं। जज अदालत का फैसला सुनाते हैं। उपभोक्ता अधिकार भारत में उपभोक्ता आंदोलन ने विभिन्न संगठनों कोपरा के अंतर्गत उपभोक्ता विवादों के निपटारे के निर्माण में पहल की है, जिन्हें सामान्यतया के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर एक उपभोक्ता अदालत या उपभोक्ता संरक्षण परिषद् त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र स्थापित किया गया है। के नाम से जाना जाता है। ये उपभोक्ताओं का जिला स्तर का न्यायालय 20 लाख तक के दावों मार्गदर्शन करती हैं कि कैसे उपभोक्ता अदालत में से संबंधित मुकदमों पर विचार करता है, राज्य मुकदमा दर्ज कराएँ। बहुत से अवसरों पर ये स्तरीय अदालतें 20 लाख से एक करोड़ तक और उपभोक्ता अदालत में व्यक्ति विशेष (उपभोक्ता) राष्ट्रीय स्तर की अदालतें 1 करोड़ से उपर की का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। ये स्वयंसेवी संगठन दावेदारी से संबंधित मुकदमों को देखती हैं। यदि जनता में जागरूकता पैदा करने के लिए सरकार से कोई मुकदमा जिला स्तर के न्यायालय में खारिज वित्तीय सहयोग भी प्राप्त करते हैं। कर दिया जाता है, तो उपभोक्ता राज्य स्तर के न्यायालय में और उसके बाद राष्ट्रीय स्तर के यदि आप एक आवासीय कॉलोनी में रहते हैं। न्यायालय में भी अपील कर सकता है। तो आपने निवासी कल्याण संघ' का नामपट्ट अवश्य देखा होगा। यदि उनके किसी सदस्य के | इस प्रकार, अधिनियम ने उपभोक्ता के रूप में साथ कोई अनुचित व्यावसायिक कार्रवाई होती है, उपभोक्ता न्यायालय में प्रतिनिधित्व का अधिकार तो उनकी तरफ से संस्था मामले को देखती है। देकर हमें समर्थ बनाया है। निम्नलिखित को सही क्रम में रखें- (क) अरिता जिला उपभोक्ता अदालत में एक मुकदमा दायर करती है। (ख) वह शिकायत के लिए पेशेवर व्यक्ति से मिलती है। (ग) वह महसूस करती है कि दुकानदार ने उसे दोषयुक्त सामग्री दी है। (घ) वह अदालती कार्यवाहियों में भाग लेना शुरू कर देती है। (ड.) वह शाखा कार्यालय जाती है और डीलर के विरुद्ध शिकायत दर्ज करती है, लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ता। (च) अदालत के समक्ष पहले उससे बिल और वारंटी प्रस्तुत करने को कहा RII (छ) वह एक खुदरा विक्रेता से दीवाल घड़ी खरीदती है। (ज) कुछ ही महीनों के भीतर, न्यायालय ने खुदरा विक्रेता को आदेश दिया कि उसकी पुरानी दीवाल घड़ी की जगह बिना कोई अतिरिक्त मूल्य लिए उसे एक नयी घड़ी दी जाए। जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए आवश्यक बातें जब हम विभिन्न वस्तुएँ और सेवाएँ खरीदते वक्त, उपभोक्ता के रूप में अपने अधिकारों के प्रति सचेत होंगे, तब हम अच्छे और बरे में फर्क करने तथा श्रेष्ठ चुनाव करने में सक्षम होंगे। एक जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए निपुणता और ज्ञान प्राप्त करने की जरूरत होती है। हम अपने आर्थिक विकास की समझ अधिकारों के प्रति सचेत कैसे हों? निम्नलिखित पृष्ठ और पहले के पृष्ठों के विज्ञापनों को देखें। आप क्या सोचते हैं? कोपरा (COPRA) अधिनियम ने केंद्र और राज्य सरकारों में उपभोक्ता मामले के अलग विभागों को स्थापित करने में मुख्य भूमिका अदा की है। आप जो विज्ञापन देख चुके हैं, वह एक उदाहरण है, जिसके द्वारा सरकार कानूनी प्रक्रिया के बारे में नागरिकों को अवगत कराती है, जिसका वे प्रयोग कर सकें। आपने टेलीविजन चैनलों पर भी ऐसे विज्ञापन देखे होंगे। आई.एस.आई और एगमार्क विभिन्न वस्तुएँ खरीदते समय आपने आवरण पर लिखे अक्षरों- आई.एस.आई, एगमार्क या हॉलमार्क के शब्दचिन्ह (लोगो) को अवश्य देखा होगा। जब उपभोक्ता कोई वस्तु या सेवाएँ खरीदता है, तो ये शब्दचिह्न (लोगो) और प्रमाणक चिह्न उन्हें अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित कराने में मदद करते हैं। ऐसे संगठन जो कि अनुवीक्षण तथा प्रमाणपत्रों को जारी करते हैं, उत्पादकों को उनके द्वारा श्रेष्ठ गुणवत्ता पालन करने की स्थिति में शब्दचिह्न (लोगो को) प्रयोग करने की अनुमति देते हैं। यद्यपि ये संगठन बहुत से उत्पादों के लिए गुणवत्ता का मानदंड विकसित करते हैं, लेकिन सभी उत्पादकों का इन मानदण्डों का पालन करना जरूरी नहीं होता। फिर भी, कुछ उत्पाद जो उपभोक्ता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं या जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर होता है, जैसे कि, एल.पी.जी. सिलिंडर्स, खाद्य रंग एवं उसमें प्रयुक्त सामग्री, सीमेंट, बोतलबंद पेयजल आदि। इनके उत्पादन के लिए यह अनिवार्य होता है। कि उत्पादक इन संगठनों से प्रमाण प्राप्त करें। 1. इस अध्याय के पोस्टरों के कार्टूनों को देखें - एक उपभोक्ता के दृष्टिकोण से किसी वस्तु विशेष की उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार करें। इसके लिए एक पोस्टर बनाएँ। 2. अपने क्षेत्र के निकटतम उपभोक्ता अदालत का पता करें। 3. उपभोक्ता संरक्षण परिषद् एवं उपभोक्ता अदालत में क्या अंतर है। 4. उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 एक उपभोक्ता को निम्नलिखित अधिकार प्रदान करता है- (क) चयन का अधिकार (घ) प्रतिनिधित्व का अधिकार (ख) सूचना का अधिकार । (च) सुरक्षा का अधिकार (ग) निवारण का अधिकार (छ) उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार निम्नलिखित मामलों को उनके सामने दिए गए खानों में अलग शीर्षक और चिह्न के साथ श्रेणीबद्ध करें- (क) लता को एक नये खरीदे गए आयरन-प्रेस से विद्युत का झटका लगा। उसने तुरन्त दुकानदार से शिकायत की। ( ) (ख) जॉन विगत कुछ महीनों से एम.टी.एन.एल. / बी.एस.एन.एल. / टाटा इंडीकॉम द्वारा दी गई सेवाओं से असंतुष्ट है। उसने जिला स्तरीय उपभोक्ता फोरम में मुकदमा दर्ज किया। () 1) तुम्हारे मित्र ने एक दवा खरीदी, जो समाप्ति तारीख (एक्सपायरी डेट) पार कर चुकी है और तुम उसे शिकायत दर्ज करने की सलाह दे रहे हो। ( ) (घ) इकबाल कोई भी सामग्री खरीदने से पहले उसके आवरण पर दी गई सारी जानकारियों की जाँच करता है। ( ) (च) आप अपने क्षेत्र के केबल ऑपरेटर द्वारा दी जाने वाली सेवाओं से असंतुष्ट हैं, लेकिन आपके पास | कोई विकल्प नहीं है। ( ) । (छ) आपने ये महसूस किया कि दुकानदार ने आपको खराब कैमरा दे दिया है। आप मुख्य कार्यालय में दृढ़ता से शिकायत करते हैं। ( ) 5. यदि मानकीकरण वस्तुओं की गुणवत्ता को सुनिश्चित करता है, तो क्यों बाजार में बहुत सी वस्तुएँ बिना आई.एस.आई. अथवा एगमार्क प्रमाणन के मौजूद हैं? 6. हॉलमार्क या आई.एस.ओ. प्रमाणन उपलब्ध कराने वालों के बारे में जानकारी प्राप्त करें। 24 दिसंबर को भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस कुछ तरक्की की है। आज देश में 700 से अधिक के रूप में मनाया जाता रहा है। 1986 में इसी दिन उपभोक्ता संगठन हैं, जिनमें से केवल 20-25 ही भारतीय संसद ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम अपने कार्यों के लिए पूर्ण संगठित और मान्यता पारित किया था। भारत उन देशों में से एक है, प्राप्त हैं। जहाँ उपभोक्ता संबंधित समस्याओं के निवारण के फिर भी, उपभोक्ता निवारण प्रक्रिया जटिल, लिए विशिष्ट न्यायालय हैं। खर्चीली और समय साध्य साबित हो रही है। कई भारत में उपभोक्ता आंदोलन ने संगठित समूहों बार उपभोक्ताओं को वकीलों का सहारा लेना की संख्या और उनकी कार्य विधियों के मामले में पड़ता है। ये मुकदमें अदालती कार्यवाहियों में शामिल होने और आगे बढ़ने आदि में काफी समय लागू होने के बावजूद, खास तौर से असंगठित क्षेत्र लेते हैं। अधिकांश खरीददारियों के समय रसीद नहीं हैं ये कमजोर हैं। इस प्रकार, बाजारों के कार्य दी जाती हैं, ऐसी स्थिति में प्रमाण जुटाना आसान करने के लिए नियमों और विनियमों का प्रायः नहीं होता है। इसके अलावा बाज़ार में अधिकांश पालन नहीं होता। खरीददारियाँ छोटे फुटकर दुकानों से होती हैं। फिर भी, उपभोक्ताओं को अपनी भूमिका और दोषयुक्त उत्पादों से पीड़ित उपभोक्ताओं को अपना महत्त्व समझने की जरूरत है। यह अक्सर क्षतिपूर्ति के मुद्दे पर मौजूदा कानून भी बहुत स्पष्ट कहा जाता है कि उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी नहीं है। कोपरा के अधिनियम के 25 वर्ष बाद भी से ही उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी हो सकता है। भारत में उपभोक्ता ज्ञान बहुत धीरे-धीरे फैल रहा इसके लिए स्वैच्छिक प्रयास और सबकी साझेदारी है। श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनों के से युक्त संघर्ष की जरूरत है। 1. बाज़ार में नियमों तथा विनियमों की आवश्यकता क्यों पड़ती है? कुछ उदाहरणों के द्वारा समझाएँ। 2. भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत किन कारणों से हुई? इसके विकास के बारे में पता लगाएँ। 3. दो उदाहरण देकर उपभोक्ता जागरूकता की ज़रूरत का वर्णन करें। 4. कुछ ऐसे कारकों की चर्चा करें, जिनसे उपभोक्ताओं का शोषण होता है? 5. उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 के निर्माण की ज़रूरत क्यों पड़ी? । 6. अपने क्षेत्र के बाज़ार में जाने पर उपभोक्ता के रूप में अपने कुछ कर्तव्यों का वर्णन करें। 7. मान लीजिए, आप शहद की एक बोतल और बिस्किट का एक पैकेट खरीदते हैं। खरीदते समय आप कौन-सा लोगो या शब्द चिह्न देखेंगे और क्यों? 8. भारत में उपभोक्ताओं को समर्थ बनाने के लिए सरकार द्वारा किन कानूनी मानदंडों को लागू करना चाहिए? 9. उपभोक्ताओं के कुछ अधिकारों को बताएँ और प्रत्येक अधिकार पर कुछ पंक्तियाँ लिखें। 10. उपभोक्ता अपनी एकजुटता का प्रदर्शन कैसे कर सकते हैं? 11. भारत में उपभोक्ता आंदोलन की प्रगति की समीक्षा करें। 12. निम्नलिखित को सुमेलित करें- (1) एक उत्पाद के घटकों का विवरण (क) सुरक्षा का अधिकार (2) एगमार्क (ख) उपभोक्ता मामलों में संबंध (3) स्कूटर में खराब इंजन के कारण हुई दुर्घटना (ग) अनाजों और खाद्य तेल का प्रमाण (4) ज़िला उपभोक्ता अदालत (घ) उपभोक्ता कल्याण संगठनों की विकसित करने वाली एजेंसी अंतर्राष्ट्रीय संस्था (5) उपभोक्ता इंटरनेशनल (ङ) सूचना का अधिकार (6) भारतीय मानक ब्यूरो (च) वस्तुओं और सेवाओं के लिए मानक उपभोक्ता अधिकार 13. सही या गलत बताएँ । (क) कोपरा केवल सामानों पर लागू होता है। (ख) भारत विश्व के उन देशों में से एक है, जिसके पास उपभोक्ताओं की समस्याओं के निवारण के लिए विशिष्ट अदालते हैं। (ग) जब उपभोक्ता को ऐसा लगे कि उसका शोषण हुआ है, तो उसे जिला उपभोक्ता अदालत में निश्चित रूप से मुकद्दमा दायर करना चाहिए। (घ) जब अधिक मूल्य का नुकसान हो, तभी उपभोक्ता अदालत में जाना लाभप्रद होता है। (ड) हॉलमार्क, आभूषणों की गुणवत्ता बनाए रखनेवाला प्रमाण है। (च) उपभोक्ता समस्याओं के निवारण की प्रक्रिया अत्यंत सरल और शीघ्र होती है। (छ) उपभोक्ता को मुआवजा पाने का अधिकार है, जो क्षति की मात्रा पर निर्भर करती है। 1. आपका विद्यालय उपभोक्ता जागरूकता सप्ताह का आयोजन करता है। उपभोक्ता जागरूकता फोरम के सचिव के रूप में सभी उपभोक्ता अधिकारों बिन्दुओं को शामिल करते हुए एक पोस्टर तैयार करें। इसके लिए आप पृष्ठ 84 एवं 85 पर दिए गए विज्ञापन के विचारों और संकेतों का उपयोग कर सकते हैं। ये कार्य आपके अंग्रेजी शिक्षक के सहयोग से करें। 2. श्रीमती कृष्णा ने 6 महीने की वारंटी वाला रंगीन टेलीविजन खरीदा। तीन महीने बाद टी.वी. ने काम करना | बंद कर दिया। जब उन्होंने उस दुकान पर शिकायत की, जहाँ से टी.वी. खरीदा था तो उसने सही करने के लिए एक इंजीनियर भेजा। टी.वी. बार-बार खराब होता रहा और श्रीमती कृष्णा का दुकानदार से शिकायतों का कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने अपने क्षेत्र के उपभोक्ता फोरम से शिकायत करने का निर्णय लिया। आप उनके लिए एक पत्र लिखिए। आप लिखने से पहले अपने सहयोगी/समूह सदस्यों से चर्चा कर सकते हैं। 3. अपने विद्यालय में उपभोक्ता क्लब स्थापित करें। बनावटी उपभोक्ता जागरूकता कार्यशाला आयोजित करें और उसमें अपने विद्यालय क्षेत्र के पुस्तक केंद्रों, भोजनालयों और दुकानों के नियंत्रण जैसे मुद्दों को शामिल करें। 4. आकर्षक नारों वाले विज्ञापन तैयार करें, जैसे- - सतर्क उपभोक्ता ही सुरक्षित उपभोक्ता है। - ग्राहक, सावधान - सचेत उपभोक्ता - अपने अधिकारों को पहचानो - उपभोक्ता के रूप में, अपने अधिकारों की रक्षा करें। - उठो, जागो और तब तक मत रुको •••••" (पूरा करें) 5. अपने आसपास के चार-पाँच लोगों का साक्षात्कार लें, कि कैसे वे शोषण का शिकार बने और उनकी प्रतिक्रियाओं एवं विभिन्न अनुभवों को इकट्ठा करें। 6. निम्नलिखित प्रश्नावली को वितरित कर अपने क्षेत्र का एक सर्वेक्षण करें और जानें कि वे उपभोक्ता के रूप में कितने जागरूक हैं। आर्थिक विकास की समझ प्रत्येक प्रश्न के लिए किसी एक पर निशान लगाएँ हमेशा कभी-कभी कभी नहीं (क) (ख) (ग) 1. जब आपने कोई सामान खरीदा, तो आपने रसीद की माँग की? 2. क्या आपने रसीद को सुरक्षित रखा? 3. जब आपको ऐसा लगा कि आप दुकानदार द्वारा ठगे गए हैं, तो आपने उसकी शिकायत की? 4. क्या आप उसे यह बताने में सफल हुए कि आप छले गए हैं? 5. क्या आप खुद को यह समझा कर संतुष्ट हो जाते हैं कि यह आपका दुर्भाग्य है कि अक्सर आप ठगे जाते हैं और इसमें नया कुछ भी नहीं है? 6. क्या आप आई.एस.आई. चिह्न, समाप्ति तिथि आदि की जाँच करते हैं? 7. अगर समाप्ति तिथि मात्र एक महीना या उसके आसपास हो तो क्या आप ताजे पैकेट की माँग करते हैं? 8. क्या आप नये गैस सिलेंडर या पुराने अखबारों को खरीदने/बेचने से पहले खुद वजन की जाँच करते हैं? 9. जब सब्जी विक्रेता वास्तविक बाट के स्थान पर पत्थरों का उपयोग करता। | है, तो क्या आप विरोध करते हैं? 10. क्या अत्यधिक चटकीले रंगों वाली सब्ज़ियाँ आपके संदेह को बढ़ाती हैं? 11. क्या आप ब्रांड की जानकारी रखते हैं? 12. क्या आप अधिक कीमत को उच्च गुणवत्ता का मानक मानते हैं। (इससे आपको लगता है कि अंततः आपने बहुत ज्यादा भुगतान नहीं किया)? 13. क्या आप आकर्षक प्रस्तावों पर बेहिचक प्रतिक्रिया करते हैं? 14. आपने किसी वस्तु के लिए जो मूल्य दिया, उसकी तुलना दूसरों के द्वारा उसके लिए दिए गए मूल्य से करते हैं? 15. क्या आप को पूरा यकीन है कि आपका दुकानदार आप जैसे स्थाई ग्राहकों को कभी नहीं ठगता? 16. क्या आप उचित भार आदि की किसी शंका के बगैर प्रस्तावित सामान की होम डिलिवरी का समर्थन करते हैं? 17. आटो से यात्रा करते समय आप 'मीटर से चलने' की माँग करते हैं? टिप्पणी - (क) यदि प्रश्न 5,12,13,15 और 16 के लिए आपका उत्तर 'ग' और शेष के लिए 'क' है, तो आप उपभोक्ता के रूप में पूरी तरह जागरूक हैं। (ख) अगर प्रश्न 5,12,13,15 और 16 के लिए आपका उत्तर 'क' और शेष के लिए 'ग' है, तो आपको उपभोक्ता के रूप में जागरूक होने की ज़रूरत है। (ग) यदि सभी प्रश्नों के लिए आपका उत्तर 'ख' है, तो आप आंशिक रूप से जागरूक हैं। उपभोक्ता अधिकार सुझावात्मक पाठ पुस्तकें अमित भादुरी, डेवलपमेंट विद डिग्निटी: द केस फॉर फुल इम्प्लायमेंट, नेशनल बुक ट्रस्ट, नयी दिल्ली, 2005 अमित भादुरी एंड दीपक नायर, इंटेलिजेंट पर्सन्स गाइड टु लिबरलाइजेशन, पेंगुइन बुक्स, नयी दिल्ली, 2005 अमित भादुरी, मैक्रोइकोनॉमिक्स: द डॉयनामिक्स ऑफ कमोडिटी प्रोडक्शन, मैकमिलन, लंदन, 1986 अविजित विनायक बनर्जी, रोलैंड बेनाबो, दिलिप मुखर्जी (सं.) (2006), अंडरस्टैंडिंग पोवर्टी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, न्यूयार्क, 2006 बिमल जालान (सं.), इंडियन इकोनॉमी, पेंगुइन बुक्स, नयी दिल्ली, 2002 सी.यू.टी.एस., इज इट रियली सेफ, कंज्यूमर यूनिटी ट्रस्ट सोसाइटी, जयपुर, 2004 सी.यू.टी.एस. स्टेट ऑफ द इंडियन कंज्यूमरः एनालसिस ऑफ द इम्प्लीमेंटेशन ऑफ द यूनाइटेड नेशन्स गाइडलाइंस फॉर कंज्यूमर प्रोटेक्शन, 1985 इन इंडिया, कंज्यूमर यूनिटी ट्रस्ट सोसाइटी, जयपुर, 2001 इन्द्राणी मजूमदार, वीमेन एंड ग्लोबलाइजेशन: द इम्पैक्ट ऑन वीमेन वर्कर्स इन द फॉर्मल सेक्टर्स इन इंडिया, स्त्री, दिल्ली, 2007 जगदीश भगवती, इन डीफेन्स ऑफ ग्लोबलाइजेशन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, नयी दिल्ली, 2004 जान ब्रेमन एंड पार्थिव शाह, वर्किग इन द मिल नो मोर, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, नयी दिल्ली, 2005 जान ब्रेमन, फूटलूस लेबरः वर्किंग इन इंडियाज इनफॉर्मल इकोनॉमी, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, कैम्ब्रिज, 1996 जॉन के. गालब्रेथ, मनी: हेन्स इट केम, ह्वेन्स इट वेन्ट, इंडियन बुक कंपनी, नयी दिल्ली, 1975 जीन ट्रेज एंड अमर्त्य सेन, इंडिया: डेवलपमेंट एंड पार्टीसिपेशन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, नयी दिल्ली, थर्ड इम्प्रेशन, 2007 जोसेफ स्टीगलिज, ग्लोबलाइजेशन एंड इट्स डिसकन्टेन्ट्स, पेंगुइन बुक्स इंडिया, नयी दिल्ली, 2003 नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्सल कमीशन, लैंडमार्क जजमेंट्स ऑन कंज्यूमर प्रोटेक्शन, यूनिवर्सल लॉ | पब्लिशिंग कं, दिल्ली, 2005 तीर्थंकर राय, द इकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया, 1875-1947, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, सेकेंड एडिशन, 2006 आर्थिक विकास की समझ सरकारी प्रकाशन वित्त मंत्रालय, आर्थिक सर्वेक्षण, भारत सरकार को रिजल्ट्स ऑफ इम्प्लायमेंट-अनइम्प्लायमेंट राउंड्स, नेशनल सैम्पल सर्वे अर्गेनाइजेशन, मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया, नयी दिल्ली राष्ट्रीय मानव विकास रिपोर्ट 2001, योजना आयोग, भारत सरकार, नयी दिल्ली अन्य रिपोर्टों रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, हैंडबुक ऑफ स्टैटिस्टिक्स ऑन इंडियन इकॉनमी, मुंबई यूएनडीपी मानव विकास रिपोर्ट 2014, यूनाइटेड नेशन्स डेवलपमेंट प्रोग्राम, जेनेवा वर्ल्ड बैंक, वल्र्ड डेवलपमेंट इंडिकेटर्स, द वर्ल्ड बैंक, वाशिंगटन उपभोक्ता अधिकार टिप्पणियाँ

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