अध्याय ऽ व्दम ेीवनसक ेजनकल डंजीमउंजपबे इमबंनेम पज पे वदसल जीतवनही डंजीमउंजपबे जींज दंजनतम बंद इम बवदबमपअमक पद ींतउवदपवने वितउण् दृ ठप्त्ज्ञभ्व्थ्थ् ऽ 8ण्1 भूमिका ;प्दजतवकनबजपवदद्ध ज्यामिति में, हमने त्रिाभुजों आयतों, समलंब चतुभुर्जों एवं वृत्तों सहित विभ्िान्न ज्यामितीय आवृफतियों के क्षेत्रापफल के परिकलन के लिए सूत्रों का अध्ययन किया है। वास्तविक जीवन की अनेक समस्याओं के लिए गण्िात के अनुप्रयोग में इस प्रकार के सूत्रा मूल होते हैं। प्रारंभ्िाक ज्यामिति के सूत्रों की सहायता से हम अनेक साधरण आवृफतियों के क्षेत्रापफल का परिकलन कर सकते हैं। यद्यपि ये सूत्रा वक्रों द्वारा घ्िारे क्षेत्रापफल के परिकलन के लिए अपयार्प्त हैं इसके लिए हमें समाकलन गण्िात की वुफछ संकल्पनाओं की आवश्यकता होगी। पिछले अध्याय में हमने योगपफल की सीमा के रूप में निश्िचत समाकलनों का परिकलन करते समय वक्र ल त्र ि;गद्धए कोटियों ग त्र ंए ग त्र इ एवं ग.अक्ष से घ्िारे क्षेत्रापफल को ज्ञात करने का अध्ययन किया है। इस अध्याय में हम साधरण वक्रों के अंतगर्त, सरल रेखाओं एवं वृत्तों, परवलयों, तथा दीघवृत्तों ;केवल मानक रूपद्ध की चापों के बीच घ्िारे क्षेत्रापफल को ज्ञात करने के लिए समाकलनों के एक विश्िाष्ट अनुप्रयोग का अध्ययन करेंगे। उपरोक्त वक्रों से घ्िारे क्षेत्रापफल को भी ज्ञात करेंगे। 8ण्2 साधरण वक्रों के अंतगर्त क्षेत्रापफल ;।तमं न्दकमत ैपउचसम ब्नतअमेद्ध पिछले अध्याय में हमने, योगपफल की सीमा के रूप में निश्िचत समाकलन एवं कलन की आधरभूत प्रमेय का उपयोग करते हुए निश्िचत समाकलन का परिकलन वैफसे किया जाए, का अध्ययन किया है। अब हम वक्र ल त्र ि;गद्धए ग.अक्ष एवं कोटियाँ ग त्र ं तथा ग त्र इ से घ्िारे क्षेत्रापफल को ज्ञात करने की आसान एवं अंतज्ञार्न से प्राप्त विध्ि की चचार् करते हैं। आवृफति 8.1 से हम वक्र के अंतगर्त क्षेत्रापफल को बहुत सी पतली एवं उध्वार्ध्र बहुत सी पटि्टयों से निमिर्त मान सकते हैं। ल उँचाइर् एवं कग चैड़ाइर् वाली एक स्वेच्छ पट्टी पर विचार कीजिए, इसमें क। ;प्रारंभ्िाक पट्टी का क्षेत्रापफलद्ध त्र लकगए जहाँ ल त्र ि;गद्ध है। यह क्षेत्रापफल प्रारंभ्िाक क्षेत्रापफल कहलाता है जो कि क्षेत्रा के भीतर किसी स्वेच्छ स्िथति पर स्थापित है एवं ं तथा इ के मध्य ग के किसी मान से विनिदिर्ष्ट है। वक्र ल त्र ि;गद्धए कोटियों ग त्र ंए ग त्र इ एवं ग - अक्ष से घ्िारे क्षेत्रा के वुफल क्षेत्रापफल । को, क्षेत्रा च्फत्ैच्में सभी पतली पटि्टयों के क्षेत्रापफलों के योगपफल के परिणाम के रूप में देख सकते हैं। सांकेतिक भाषा में हम इसे इस प्रकार अभ्िाव्यक्त करते हैंः इइ इ । त्र । त्र लकग त्र ि;द्ध कग कग∫ं ∫ं ∫ं वक्र ग त्र ह ;लद्धए ल.अक्ष एवं रेखाएँ ल त्र बए ल त्र क से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल निम्नलिख्िात सूत्रा द्वारा प्राप्त किया जाता है। ∫बक ∫बक । त्र गकल त्र हल कल ;द्ध यहाँ हम क्षैतिज पटि्टयों पर विचार करते हैं जैसा कि आवृफति 8.2 में दशार्या गया है। टिप्पणी यदि चचिर्त वक्र की स्िथति गया है, जहाँ ग त्र ं से ग त्र इ तक ि;गद्धढ 0 इसलिए दिए हुए वक्र, ग.अक्ष एवं कोटियों ग त्र ंए ग त्र इ से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल )णात्मक हो जाता है, परंतु हम क्षेत्रापफल के केवल संख्यात्मक मान की ही चचार् करते हैं। इसलिए यदि क्षेत्रापफल )णात्मक है तो हम इसके निरपेक्ष मान, अथार्त् ∫ंइ को लेते हैं।ि;द्ध ग कग आवृफति 8.2 ग.अक्ष के नीचे है, तो जैसा कि आवृफति 8.3 में दशार्या आवृफति 8.3 सामान्यतः ऐसा हो सकता है कि वक्र का वुफछ भाग ग.अक्ष के ऊपर है तथा वुफछ भाग ग.अक्ष के नीचे है, जैसा कि आवृफति 8.4 में दशार्या गया है। यहाँ ।1 ढ 0 तथा ।2 झ 0 है, इसलिए वक्र ल त्र ि;गद्धए ग.अक्ष एवं कोटियों ग त्र ं तथा ग त्र इ से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल । सूत्रा । त्र ।1़ । द्वारा प्राप्त किया जाता है। आवृफति 8.4 22उदाहरण 1 वृत्त ग ़ ल त्र ं 2 का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। हल आवृफति 8.5 में दिए हुए वृत्त से घ्िारे हुए क्षेत्रा का वुफल क्षेत्रापफल त्र 4 ;दिए हुए वक्र, ग.अक्ष एवं कोटियों ग त्र 0 तथाग त्र ं से घ्िारे क्षेत्रा ।व्ठ।का क्षेत्रापफलद्ध ख्क्योंकि वृत्त ग.अक्ष एवं ल.अक्ष दोनों के परितः सममित है, त्र 4 ∫ ं लकग ;उध्वार्ध्र पटि्टयाँ लेते हुएद्ध0 ∫0 ं 22 त्र 4 ं − ग कग ए 22क्योंकि ग ़ ल त्र ं 2 से लत्र± ं 2 − ग 2 प्राप्त होता है। जैसा कि क्षेत्रा ।व्ठ। प्रथम चतुथा±श में सम्िमलित है इसलिए ल को ध्नात्मक लिया जाता है। समाकलन करने पर दिए हुए वृत्त से घ्िारा क्षेत्रापफल निम्नलिख्िात रूप में प्राप्त होता हैः आवृफति 8.5 2 ंग ⎤ं ⎡⎛ ं 2 ⎞⎤⎡ ग 22 दृ1 −1 त्र 4 ं − ग ़ ेपद ⎥ त्र 4 ⎢×0 ़ ेपद 1 − 0⎥⎢ ⎜⎟22 ं ⎝ 22 ⎠⎣⎦0 ⎣⎦⎛ ं 2 ⎞ ⎛ π⎞ 2 त्र ⎜ ⎟⎜ 4 त्रπं ⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠ विकल्पतः जैसा कि आवृफति 8.6 में दशार्या गया है क्षैतिज पटि्टयों की चचार् करते हुए वृत्त द्वारा घ्िारे क्षेत्रा का वुफल क्षेत्रापफल 22 त्र 4 ∫ं गकल त्र 4∫ंं − ल कल ;क्योंघ्द्ध0 0 2 ं ं⎡ ल 22 −1 ल⎤ त्र 4 ं − ल ़ ेपद ⎢ ⎥ ⎣ 22 ं ⎦0 2 ं⎡⎛ −1 ⎞⎤ त्र 4 ⎢⎜ ×0 ़ ेपद 1 − 0⎟⎥⎝ 22 ⎠⎣ 2 π 2ं त्र 4 त्रπं 22 आवृफति 8.6 गलउदाहरण 2 दीघर्वृत्त 2 ़ 2 त्र1 से घ्िारे क्षेत्रा का ं 2 इ2 क्षेत्रापफल का ज्ञात कीजिए। हल आवृफति 8ण्7 में दीघर्वृत्त से घ्िारे क्षेत्रा ।ठ।′ठ′। का क्षेत्रापफल ⎛दिएहएु वक्र, ग − अक्ष, कोि टयोंग त्र 0ए ग त्र ंद्वारापथमचतथ््रुााश्±ामें ⎞ त्र 4 ⎜⎟⎜⎟घ्िारे क्षत्रेा ।व्ठ। का क्षेत्रापफल ⎝⎠ ;क्योंकि दीघर्वृत्त ग.अक्ष एवं ल.अक्ष दोनों के परितः सममित हैद्ध ं त्र 4 ∫ लकग ;उध्वाध्र् र पट्िटयाँलतेेहएु द्ध 0 22 इ 22 अब ग 2 ़ल 2 त्र 1से लत्र± ं − ग प्राप्त होता है, परंतु क्षेत्रा।व्ठ।प्रथम चतुथा±श में है ंइ ं इसलिए ल ध्नात्मक लिया जाता है, इसलिए अभीष्ट क्षेत्रापफल त्र 4 ं 2 − ग 2 कग ∫ ंइ 0 ं ं 4इ ⎡ ग 22 ं 2 दृ1 ग⎤ त्र ं − ग ़ ेपद ⎢ ⎥ ;क्योंघ्द्धं 22 ं⎣⎦0 4इ ⎡⎛ ं 2 −1 ⎞⎤ त्र ⎢⎜×0 ़ ेपद 1⎟− 0⎥ ं 22⎢⎥⎣⎝ ⎠ 4इं 2 π त्र त्रπ ंइ है। ं 22 आवृफति 8.7 विकल्पतः जैसा कि आवृफति 8.8 में दशार्या गया है क्षैतिज पटि्टयों की चचार् करते हुए दीघर्वृत्त का क्षेत्रापफल इ 22 8ण्2ण्1 एक वक्र एवं एक रेखा से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ;ज्ीम ंतमं व िजीम तमहपवद इवनदकमक इल ं बनतअम ंदक ं सपदमद्ध इस उपपरिच्छेद में, हम एक रेखा और एक वृत्त, एक रेखा और एक परवलय, तथा एक रेखा और एक दीघर्वृत्त से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात करेंगे उपरोक्त चतिर्त वक्रों के समीकरण केवल प्रामाण्िाक रूप में ही अध्ययन किए जाएँगे क्योंकि अन्य रूपों वाले समीकरण का उपयोग इस पाठ्यपुस्तक के अध्ययन क्षेत्रा से बाहर हैं। उदाहरण 3 वक्र ल त्र ग2 एवं रेखा ल त्र 4 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। हल क्योंकि दिए हुए समीकरण ल त्र ग 2 द्वारा निरूपित वक्र ल.अक्ष के परितः सममित एक परवलय है। इसलिए आवृफति 8.9 से क्षेत्रा ।व्ठ। का अभीष्ट क्षेत्रापफल निम्नलिख्िात रूप में प्राप्त होता हैः 2∫ 4 गकल त्र2 ;दिए हुए वक्र, ल दृ अक्ष एवं0 रेखाओं ल त्र 0 तथा ल त्र 4 से घ्िारे क्षेत्रा ठव्छक् का क्षेत्रापफलद्ध ∫04 त्र2 लकल ;क्योंघ्द्ध ⎡ 3 ⎤4 2 432 त्र2 ×⎢ल 2 ⎥त्र ×8 त्र 3 33⎢⎥⎣⎦0 यहाँ हमने क्षैतिज पटि्टयाँ ली हैं जैसा कि आवृफति 8.9 में दशार्या गया है। आवृफति 8.9 विकल्पतः क्षेत्रा ।व्ठ। का क्षेत्रापफल प्राप्त करने के लिए हम च्फ जैसी उफध्वार्ध्र पटि्टयाँ ले सकते हैं जैसा कि आवृफति 8.10 में दशार्या गया है। इसके लिए हम समीकरणों ग2 त्र ल एवं ल त्र 4 को हल करते हैं जिससे ग त्र दृ2 एवं ग त्र 2 प्राप्त होता है। इस प्रकार क्षेत्रा।व्ठ। को वक्रों ल त्र ग2ए ल त्र 4 एवं कोटियों ग त्र दृ2 तथा ग त्र 2 से घ्िारा क्षेत्रा परिभाष्िात किया जा सकता है। इसलिए क्षेत्रा ।व्ठ। का क्षेत्रापफल आवृफति 8.10 त्र लकग ख् ल त्र ;¯बदु फ का ल निदे±शांक दृ ¯बदु च् का ल निदेर्शांकद्ध त्र 4 दृ ग 2,∫− 22 त्र 2 ∫ 2; 4 − ग 2 द्ध कग ;क्योंघ्द्ध0 3⎡ ग ⎤2 ⎡ 8 ⎤ 32 त्र 24 ⎢ ग − ⎥त्र 24 ×2 −त्र⎢⎥ ⎣ 3 ⎦0 ⎣ 3 ⎦ 3 टिप्पणी उपरोक्त उदाहरणों से यह निष्कषर् निकलता है कि किसी क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात करने के लिए हम उफध्वार्ध्र अथवा क्षैतिज पटि्टयों में से किसी को भी ले सकते हैं। इससे आगे हम इन दोनों पटि्टयों में से किसी एक की चचार् करेंगे, उफध्वार्ध्र पटि्टयों को सामान्यतः अध्िक प्राथमिकता दी जाएगी। 2उदाहरण 4 प्रथम चतुथा±श में वृत्त ग ़ ल 2 त्र 32ए रेखा ल त्र गए एवं ग.अक्ष से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। हल दिए हुए समीकरण हैंः ल त्र ग ण्ण्ण् ;1द्ध 22और ग ़ ल त्र 32 ण्ण्ण् ;2द्ध समीकरण ;1द्ध तथा ;2द्ध को हल करने पर हम पाते हैं कि दिया हुआ वृत्त एवं दी हुइर् रेखा एक दूसरे को प्रथम चतुथा±श में ठ;4ए 4द्धपर मिलते हैं ;आवृफति 8.11द्ध। ग.अक्ष के ऊपर ठड लम्ब खींचिए। इसलिए, अभीष्ट क्षेत्रापफल त्र क्षेत्राव्ठडव् का क्षेत्रापफल ़ क्षेत्रा ठड।ठ का क्षेत्रापफल आवृफति 8.11 अब, क्षेत्रा व्ठडव् का क्षेत्रापफल 4 4 124 त्र ल कग त्र ग कग त्र ⎡ ग ⎤ त्र 8 ण्ण्ण् ;3द्ध∫0 ∫02 ⎣⎦0 पुनः क्षेत्रा ठड।ठ का क्षेत्रापफल 42 42 त्र लकग त्र 32 − ग 2 कग ∫4 ∫4 ⎡1 42 1 ग ⎤ त्र ग 32 − ग 2 ़× 32 × ेपद दृ1 ⎢ ⎥⎣ 2 242 ⎦4 ⎛ 1 1 ⎞⎛ 4 11 ⎞ त्र ⎜ 42 × 0 ़× 32 × ेपद दृ1 1 − 32 −16 ़× 32 × ेपद दृ1 ⎟⎜ ⎟⎝ 22 ⎠⎝ 22 2 ⎠ त्र 8 π दृ ;8 ़ 4πद्ध त्र 4π दृ 8 ण्ण्ण् ;4द्ध समीकरण ;3द्ध एवं ;4द्ध का योगपफल ज्ञात करने पर हम अभीष्ट क्षेत्रापफल । त्र 4π पाते हैं। 22 गलउदाहरण 5 दीघर्वृत्त 2 ़ 2 त्र1 एवं कोटियों ग त्र 0 और ग त्र ंमए से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात ंइ 2कीजिए, जहाँ इ2 त्र ं ;1 दृ म 2द्ध एवं म ढ 1 है। हल क्षेत्रा ठव्ठ′त्थ्ैठ का अभीष्ट क्षेत्रापफल दिए हुए दीघर्वृत्त एवं रेखाओं ग त्र 0 तथा ग त्र ंम से घ्िारा हुआ है;आवृफति 8.12द्ध। ध्यान दीजिए कि क्षेत्रा ठव्ठ′त्थ्ैठ का क्षेत्रापफल ंम इ 22 त्र 2 ∫ंम लकग त्र 2 ं − ग कग 0 ∫0ं ंम 2इ ⎡ ग 22 ं 2 दृ1 ग ⎤ ं − ग ़ ेपद ⎥त्र ⎢ ं 22 ं⎣⎦0 2इ 2 22 2दृ1 ⎡ ⎤ त्र ंम ं −ंम ़ ं ेपद म⎢ ⎥⎣ ⎦2ं ⎡ ⎤ त्र ंइ म 1 − म 2 ़ेपद दृ1 म⎥ आवृफति 8.12⎢⎣ ⎦ प्रश्नावली 8.1 21ण् वक्रल त्र गए रेखाओं ग त्र 1ए ग त्र 4 एवं ग.अक्ष से घ्िारे क्षेत्रा का प्रथम पाद में क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 2ण् प्रथम चतुथा±श में वक्र ल 2 त्र 9गए ग त्र 2ए गत्र 4 एवं ग.अक्ष से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 3ण् प्रथम चतुथा±श मेंग 2 त्र 4लए ल त्र 2ए ल त्र 4 एवं ल.अक्ष से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 2 2 ग ल4ण् दीघर्वृत्त ़त्र1 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 16 9 2 2 ग ल5ण् दीघर्वृत्त ़त्र1 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 4 9 6ण् प्रथम चतुथा±श में वृत्तग2 ़ ल2 त्र 4ए रेखा ग त्र3 ल एवं ग.अक्ष द्वारा घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। ं ग त्र 227ण् छेदक रेखा द्वारा वृत्त ग ़ ल त्र ं 2 के छोटे भाग का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए।2 8ण् यदि वक्रग त्र ल 2 एवं रेखा ग त्र 4 से घ्िारा हुआ क्षेत्रापफल रेखा ग त्र ं द्वारा दो बराबर भागों में विभाजित होता है तो ं का मान ज्ञात कीजिए। 9ण् परवलय ल त्र ग एवं ल त्र 2गसे घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 10ण् वक्र ग2 त्र 4ल एवं रेखा ग त्र 4ल दृ 2 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 11ण् वक्र ल2 त्र 4ग एवं रेखा ग त्र 3 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। प्रश्न 12 एवं 13 में सही उत्तर का चयन कीजिएः 12ण् प्रथम चतुथा±श में वृत्त ग ़ ल 2 त्र 4 एवं रेखाओं ग त्र 0ए ग त्र 2 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल हैः 2ππ π ;।द्ध π ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध23 4 13ण् वक्र ल2 त्र 4गए ल.अक्ष एवं रेखा ल त्र 3 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल हैः 99 9 ;।द्ध 2 ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध43 2 8ण्3 दो वक्रों के मध्यवतीर् क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ;।तमं ठमजूममद ज्ूव ब्नतअमेद्ध लैबनिश की चेतना एवं अंतज्ञार्न की सच्चाइर् के पफलस्वरूप किसी क्षेत्रा को प्रारंभ्िाक क्षेत्रापफल की बृहत् संख्या में पटि्टयाँ काटकर और इन प्रारंभ्िाक क्षेत्रापफलों का योगपफल ज्ञात कर, क्षेत्रापफल के परिकलन की िया समाकलन कहलाती है। कल्पना कीजिए, हमें दो वक्र ल त्र ि;गद्ध और ल त्र ह ;गद्ध दिए हुए हैं जहाँ ख्ंए इ,में ि;गद्ध ≥ ह;गद्ध जैसा कि आवृफति 8.13 में दशार्या गया है। दिए हुए वक्रों के समीकरण से ल का उभयनिष्ठ मान लेते हुए इन दोनों वक्रों के प्रतिच्छेदक ¯बदु ग त्र ं तथा ग त्र इ द्वारा देय हैं। समाकलन के सूत्रा का स्थापन करने के लिए प्रारंभ्िाक क्षेत्रापफल को उफध्वार्ध्र पटि्टयों के रूप में लेना सुविधजनक है। जैसा कि आवृफति 8.13 में दशार्या गया है। प्रारंभ्िाक पट्टी की उँफचाइर् ;िगद्ध दृ ह ;गद्ध एवं चैड़ाइर् कग है, इसलिए प्रारंभ्िाक क्षेत्रापफल आवृफति 8.13 गिक। त्रख्;िगद्ध दृ ह;गद्ध, कगए तथा वुफल क्षेत्रापफल । त्र ∫ इ ख्; द्ध ग − ह; द्ध, कग ं विकल्पतः । त्रख्वक्र ल त्र ि;गद्धए ग.अक्ष तथा रेखाओं ग त्र ंए ग त्र इ से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल, दृ ख्वक्र ल त्र ह ;गद्धए ग.अक्ष एवं रेखाओं ग त्र ंए ग त्र इ से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल, इइ इ गि ग ;द्ध ग कग त्र ;द्ध कग − ह;द्ध कग त्र ख् गि − ह;द्ध , जहाँ ख्ंए इ, में ि;गद्ध ≥ ह ;गद्ध∫ं ∫ं ∫ं यदि ख्ंए ब, में ि;गद्ध ≥ ह ;गद्ध तथा ख्बए इ, में ि;गद्ध ≤ ह ;गद्ध जहाँ ं ढ ब ढ इ जैसा कि आवृफति 8.14 में दशार्या गया है, तो वक्रों से घ्िारे क्षेत्रों का क्षेत्रापफल निम्नलिख्िात प्रकार लिखा जा सकता हैःक्षेत्रापफल त्र क्षेत्रा ।ब्ठक्। का क्षेत्रापफल ़ क्षेत्रा ठच्त्फठ का क्षेत्रापफल बग ;द्ध , इग − ि;द्ध ,कग त्र ख् ि;द्ध − हग कग ़ख्ह ;द्ध ग∫ं ∫ ब आवृफति 8.14 2उदाहरण 6 दो परवलयों ल त्र ग 2 एवंल त्र ग से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। हल जैसा कि आवृफति 8.15 में दशार्या गया है, इन दोनों परवलयों के प्रतिच्छेदक ¯बदु व् ;0ए 0द्ध एवं । ;1ए 1द्ध है। 22यहाँ ल त्र ग अथवा ल त्र ग त्र ;िगद्ध और ल त्र ग त्र ह ;गद्धए जहाँ ख्0ए 1, में ि;गद्ध ≥ ह ;गद्ध है। इसलिए छायांविफत क्षेत्रा का अभीष्ट क्षेत्रापफल 1 आवृफति 8.15त्र ख् ि;द्ध − ह;द्ध कग गग ,∫0 3 1 ⎡ ⎡2 ग ⎤1 21 1 त्र ग − ग 2 ⎤ कग त्र⎢ ग2 −⎥ त्र −त्र∫ 3 0 ⎣ ⎦⎢33 ⎥ 33 3⎣⎦0 2 2उदाहरण 7 ग.अक्ष के ऊपर तथा वृत्त ग ़ ल त्र 8ग एवं परवलय ल 2 त्र 4ग के मध्यवतीर् क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 22हल वृत्त का दिया हुआ समीकरण ग ़ ल त्र 8गए ;ग दृ 4द्ध2 ़ ल 2 त्र 16 के रूप में अभ्िाव्यक्त किया 2जा सकता है। इस वृत्त का वेंफद्र ¯बदु ;4ए 0द्ध है तथा त्रिाज्या 4 इकाइर् है। परवलय ल त्र 4ग के साथ इसके प्रतिच्छेद से प्राप्त होता हैः ग2 ़ 4ग त्र8ग अथवा ग2 दृ 4ग त्र0 अथवा ग ;ग दृ 4द्ध त्र 0 अथवा ग त्र 0ए ग त्र4 इस प्रकार इन दो वक्रों के प्रतिच्छेद ¯बदु व्;0ए 0द्ध एवं ग.अक्ष से ऊपर च्;4ए4द्ध हैं। आवृफति 8.16 से ग.अक्ष से उपर इन दोनों वक्रों के मध्य सम्िमलित क्षेत्रा व्च्फब्व् का क्षेत्रापफल त्र ;क्षेत्रा व्ब्च्व् का क्षेत्रापफलद्ध ़ ;क्षेत्रा च्ब्फच् का क्षेत्रापफलद्ध ∫04 ∫48 त्र लकग ़ लकग त्र 2 4 ग कग ़ 42 − ;ग− 4द्ध 2 कग ;क्यों?द्ध आवृफति 8.16∫0 ∫48 ⎡ 3 ⎤44 2 222 ∫त्र 2 ×⎢ग ⎥़ 4 −ज कज ए जहाँ ग − 4 त्रज 3 ⎣⎦00⎢⎥ 4 32 ⎡ ज 2212 दृ1 ज ⎤ त्र ़ 4 −ज ़× 4 × ेपद ⎢ ⎥3 ⎣22 4 ⎦0 32 ⎡41 ⎤ 32 ⎡ π⎤ 32 4 त्र ़× 0 ़× 42 × ेपद दृ1 1 त्ऱ 0 ़ 8 ×त्ऱ 4π त्र ;8 ़3πद्ध⎢ ⎥⎢⎥3 ⎣22 ⎦ 3 ⎣ 2 ⎦33 2उदाहरण 8 आवृफति 8.17 में ।व्ठ। प्रथम चतुथा±श में दीघर्वृत्त 9ग ़ ल 2 त्र 36 का एक भाग है जिसमें व्। त्र 2 इकाइर् तथा व्ठ त्र 6 इकाइर् है। लघु चाप ।ठ एवं जीवा ।ठ के मध्यवतीर् क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। हल दीघर्वृत्त का दिया हुआ समीकरण 9ग2 ़ ल2 त्र 36ए अथार्त् 22 22 गल गल़त्र1 अथवा ़त्र1 के रूप में अभ्िाव्यक्त किया जा 4 36 22 62 सकता है और इसलिए इसका आकार आवृफति 8.17 में दिए हुए आकार जैसा है। इसके अनुसार, जीवा ।ठ का समीकरण हैः 6 − 0 ल दृ 0 त्र ;ग −2द्ध 0 − 2 अथवा ल त्रदृ 3 ;ग दृ 2द्ध आवृफति 8.17 अथवा ल त्रदृ 3ग ़ 6 आवृफति 8.17 में दशार्ये छायांविफत क्षेत्रा का क्षेत्रापफल त्र3 24 − ग 2 कग − 2 ;6 − 3द्ध ग कग ;क्यों?द्ध∫0 ∫0 2⎡ 24 दृ1 ग⎤⎡ 3ग 2 ⎤2 ग त्र3 4 − ग ़ ेपद −⎢6 ग −⎥⎢ ⎥⎣ 2 22 ⎦02⎣⎦0 ⎡ 2 दृ1 ⎤⎡ 12 ⎤ π त्र3 × 0 ़ 2 ेपद ;1द्ध − 12 −त्र 3 × 2 ×−6 त्र 3π दृ 6⎢ ⎥⎢⎥⎣ 2 ⎦⎣ 2 ⎦ 2 उदाहरण 9 समाकलन का उपयोग करते हुए एक ऐसे त्रिाभुज का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए जिसके शीषर् ;1ए 0द्धए ;2ए 2द्ध एवं ;3ए 1द्ध हैं। हल मान लीजिए ।;1ए 0द्धए ठ ;2ए 2द्ध एवं ब् ;3ए 1द्ध त्रिाभुज ।ठब् के शीषर् हैं ;आवृफति 8.18द्ध Δ ।ठब् का क्षेत्रापफलत्र Δ ।ठक् का क्षेत्रापफल ़ समलंब चतुभुर्ज ठक्म्ब् का क्षेत्रापफल दृ Δ ।म्ब् का क्षेत्रापफल आवृफति 8.18अब भुजाएँ ।ठए ठब् एवं ब्। के समीकरण क्रमशः 1 ल त्र 2;ग दृ 1द्धए ल त्र 4 दृ गए ल त्र ;ग दृ 1द्ध हैं। 2अतः Δ ।ठब् का क्षेत्रापफल 2 33 ग −1 त्र 2; ग −1द्ध कग ़ ;4 − गद्ध कग − कग ∫ 1 ∫2 ∫ 12 23 32 22⎡ ग ⎤⎡ ग ⎤ 1 ⎡ ग ⎤ त्र2 ⎢− ग⎥ ़⎢4ग − ⎥−⎢ − ग⎥⎣ 2 ⎦1 ⎣ 2 ⎦22 ⎣ 2 ⎦1 2 22⎡⎛ 2 ⎞⎛ 1 ⎞⎤ ⎡⎛ 3 ⎞⎛ 2 ⎞⎤ त्र2 ⎢⎜ − 2 ⎟−⎜ −1⎟⎥़ ⎢⎜ 4 ×3 − ⎟−⎜ 4 ×2 − ⎟⎥ ⎣⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠⎦ ⎣⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠⎦ 21 ⎡⎛ 3 ⎞⎛ 1 ⎞⎤ 3 दृ − 3 −−1 त्र⎢⎜ ⎟⎜⎟⎥ 2 ⎣⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠⎦2 2उदाहरण 10 दो वृत्तों ग2 ़ ल त्र 4 एवं ;ग दृ 2द्ध2 ़ ल2 त्र 4 के मध्यवतीर् क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। हल दिए हुए वृत्तों के समीकरण हैंः ग 2 ़ ल 2 त्र 4 ण्ण्ण् ;1द्ध और ;ग दृ 2द्ध2 ़ ल2 त्र 4 ण्ण्ण् ;2द्ध समीकरण ;1द्ध ऐसा वृत्त है जिसका वेंफद्र मूल ¯बदु व् पर है ओर जिसकी त्रिाज्या 2 इकाइर् है। समीकरण ;2द्ध एक ऐसा वृत्त है जिसका वेंफद्र ब्;2ए व्द्ध है और जिसकी त्रिाज्या 2 इकाइर् है। समीकरण ;1द्ध और ;2द्ध को हल करने पर हम पाते हैंः ;ग दृ2द्ध2 ़ ल2 त्र ग2 ़ ल2 अथवा ग 2 दृ 4ग ़ 4 ़ ल 2 त्र ग 2 ़ ल 2 अथवा ग त्र 1 जिससे ल त्र ±3 प्राप्त होता है। अतः दिए हुए वृत्तों के प्रतिच्छेदन ¯बदु ।;1ए 3द्ध और ।′;1ए दृ 3द्ध है, जैसा आवृफति 8.19 में दशार्या गया है। वृत्तों के मध्यवतीर् क्षेत्रा व्।ब्।′व् का अभीष्ट क्षेत्रापफल त्र 2 ख्क्षेत्रा व्क्ब्।व् का क्षेत्रापफल, ;क्योंघ्द्ध त्र 2 ख्क्षेत्रा व्क्।व् का क्षेत्रापफल ़ क्षेत्रा क्ब्।क् का क्षेत्रापफल, ⎡ 12 ⎤ त्र 2 ल कग ़ ल कग ⎢∫0 ∫1 ⎥⎣⎦ आवृफति 8.19 त्र 2 ⎡ 14 − ; ग − 2द्ध 2 कग ़ 4 − ग 2 कग ⎤ ;क्योंघ्द्ध⎢∫0 ∫12 ⎥⎦⎣ ⎡1 21 दृ1 ⎛ ग − 2 ⎞⎤1 त्र 2 ;ग − 2द्ध 4 − ;ग − 2द्ध ़× 4ेपद ⎜⎟⎢ ⎥ ़ ⎣22 ⎝ 2 ⎠⎦0 ⎡11 ग ⎤2 2 ग 4 − ग 2 ़×4 ेपद दृ1 ⎢ ⎥⎣2 22 ⎦1 त्र ⎡ 2 दृ1 ⎛ ग − 2 ⎞⎤1 ⎡ 2 दृ1 ग⎤2 ;ग − 2द्ध 4 − ;ग − 2द्ध ़ 4 ेपद ⎜ ⎟़ ग 4 − ग ़ 4ेपद ⎢ ⎥⎢ ⎥⎣⎝ 2 ⎠⎦0 ⎣ 2 ⎦1 ⎡⎛ दृ1 ⎛−1⎞⎞ −1 ⎤⎡ दृ1 −11 ⎤− 3 ़ 4 ेपद ⎜ ⎟− 4ेपद ;−1द्ध ़ 4 ेपद 1 − 3 − 4 ेपद त्र ⎢⎜ ⎟ ⎥⎢ ⎥⎣⎝ ⎝ 2 ⎠⎠ ⎦⎣ 2 ⎦ ⎡⎛ π⎞ π⎤⎡π π⎤ त्र ⎢⎜− 3 − 4 ×़ 4 ×़ 4 ×− 3 − 4 ×⎟ ⎥⎢ ⎥⎣⎝ 6 ⎠ 2 ⎦⎣ 26 ⎦ 2π ⎞⎛ 2π⎞⎛− 3 −़ 2π़ 2π− 3 −त्र ⎜ ⎟⎜ ⎟⎝ 3 ⎠⎝ 3  8π त्र − 23 3 प्रश्नावली 8.2 1ण् परवलय ग 2 त्र 4ल और वृत्त 4ग 2 ़ 4ल 2 त्र 9 के मध्यवतीर् क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 2ण् वक्रों ;ग दृ 1द्ध2 ़ ल 2 त्र 1 एवं ग 2 ़ ल 2 त्र 1 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 3ण् वक्रोंल त्र ग2 ़ 2ए ल त्र गए ग त्र 0 एवं ग त्र 3 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 4ण् समाकलन का उपयोग करते हुए एक ऐसे त्रिाभुज का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए जिसके शीषर् ;दृ 1ए 0द्धए ;1ए 3द्ध एवं ;3ए 2द्ध हैं। 5ण् समाकलन का उपयोग करते हुए एक ऐसे त्रिाकोणीय क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए जिसकी भुजाओं के समीकरण ल त्र 2ग ़ 1ए ल त्र 3ग ़ 1 एवं ग त्र 4 हैं। प्रश्न 6 एवं 7 में सही उत्तर का चयन कीजिएः 26ण् वृत्त ग ़ ल 2 त्र 4 एवं रेखा ग ़ ल त्र 2 से घ्िारे छोटे भाग का क्षेत्रापफल हैः;।द्ध 2 ;π दृ 2द्ध ;ठद्ध π दृ 2 ;ब्द्ध2π दृ 1 ;क्द्ध 2 ;π ़ 2द्ध 7ण् वक्रोंल 2 त्र 4ग एवं ल त्र 2ग के मध्यवतीर् क्षेत्रा का क्षेत्रापफल हैः 2 113 ;।द्ध ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध3 344 विविध् उदाहरण उदाहरण 11 परवलय ल2 त्र 4ंग और उसके नाभ्िालंब से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। हल आवृफति 8ण्20 से, परवलय ल 2 त्र 4ंग का शीषर् मूल ¯बदु पर है। नाभ्िालंब जीवा स्ैस्′ का समीकरण ग त्र ं है। दिया हुआ परवलय ग.अक्ष के परितः सममित है। क्षेत्रा व्स्स्′व् का अभीष्ट क्षेत्रापफल त्र 2 ;़क्षेत्रा व्स्ैव् का क्षेत्रापफलद्ध त्र2 लकग त्र2 4ंग कग ∫0 ं ∫0 ं त्र2 × 2 ं ं गकग ∫0 2 ⎡ 3 ⎤ ं 8 ⎡ 3 ⎤ 822त्र4 ं ×⎢ग ⎥ त्र ं ⎢ं 2 ⎥ त्र ं 3 ⎢⎥ 3 ⎢⎣ ⎥⎦3 आवृफति 8.20 ⎦0 उदाहरण 12 रेखा ल त्र 3ग ़ 2ए ग.अक्ष एवं कोटियों ग त्र दृ1 एवं ग त्र 1 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। हल जैसा कि आवृफति 8.21 में दशार्या गया है, रेखा −2 ल त्र 3ग ़ 2ए ग.अक्ष को ग त्र पर मिलती है और3 ⎛−2 ग∈⎜ −1ए ⎟⎠ के लिए इसका आलेख ग.अक्ष के नीचे है ⎝ 3 ⎛−2 ⎞ तथा ग∈⎜ ए1 ⎠⎟ के लिए इसका आलेख ग.अक्ष से⎝ 3 ऊपर है। आवृफति 8.21 अभीष्ट क्षेत्रापफल त्र क्षेत्रा ।ब्ठ। का क्षेत्रापफल ़ क्षेत्रा ।क्म्। का क्षेत्रापफल −2 ∫ 1 3 ;3 ग ़ 2द्ध कग ़ ;3 ग ़ 2द्ध कग त्र ∫−1 −2 3⎡3ग 2 ⎤ ⎢़ 2ग⎥ ⎣ 2 ⎦−1 त्र −2 3 2⎡3ग ⎤1 125 13 ़⎢ ़ 2ग⎥ त्र ़त्र 2 −2 66 3⎣⎦3 उदाहरण 13 ग त्र 0 एवं ग त्र 2π के मध्य वक्र ल त्र बवे ग से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। हल आवृफति 8.22 से, अभीष्ट क्षेत्रापफल त्र क्षेत्रा व्।ठव् का क्षेत्रापफल ़ क्षेत्रा ठब्क्ठ का क्षेत्रापफल ़ क्षेत्रा क्म्थ्क् का क्षेत्रापफल इसलिए अभीष्ट क्षेत्रापफल आवृफति 8.22 3π π 2π ∫ π2 त्र 2 बवे गकग ़ बवे गकग ़ बवे ग कग ∫ 3π ∫0 2 2 π 3π 2 2 त्र ख्ेपद ग,़ ख्ेपद ग,π ़ख्ेपद ग,23 ππ त्र 1 ़ 2 ़ 1 त्र 4 0 2 2 उदाहरण 14सि( कीजिए कि वक्र ल2 त्र 4ग एवं ग2 त्र 4लए रेखाओं ग त्र 0ए ग त्र 4ए ल त्र 4 एवं ल त्र 0 से घ्िारे वगर् के क्षेत्रापफल को तीन बराबर भागों में विभाजित करते हैं। हल ध्यान दीजिए कि परवलयों ल 2 त्र 4ग एवं ग 2 त्र 4ल के प्रतिच्छेद ¯बदु ;0ए0द्ध एवं ;4ए4द्ध हैं जैसा कि आवृफति 8.23 में दशार्या गया है। अब वक्रों ल 2 त्र 4ग एवं ग 2 त्र 4ल से घ्िारे क्षेत्रा व्।फठव् का आवृफति 8.23 क्षेत्रापफल 2 33 4 ⎛ ग ⎞⎡ 2 ग ⎤4 त्र2 ग − कग त्र ⎢2 × ग −⎥∫0 ⎜ ⎟ 2 ⎝ 4 ⎠ 3 12 ⎢⎣ ⎦⎥0 32 16 16 त्र −त्र ण्ण्ण् ;1द्ध333 पुनः वक्रों ग 2 त्र 4लए ग त्र 0ए ग त्र 4 एवं ग.अक्ष से घ्िारे क्षेत्रा व्च्फ।व् का क्षेत्रापफल 4 ग 2 1 416 त्र कग त्र ⎤त्र ण्ण्ण् ;2द्ध∫0 ⎡⎣ग 3 ⎦0412 3 इसी प्रकार वक्र ल 2 त्र 4गए ल.अक्षए ल त्र 0 एवं ल त्र 4 से घ्िारे क्षेत्रा व्ठफत्व् का क्षेत्रापफल 244 ल 1 416 त्र गकल त्र कल त्र⎡ल 3 ⎤त्र ण्ण्ण् ;3द्ध∫0 ∫ 0 ⎣⎦0412 3 समीकरणों ;1द्ध, ;2द्ध तथा ;3द्ध से यह निष्कषर् निकलता है कि क्षेत्रा व्।फठव् का क्षेत्रापफल त्र क्षेत्रा व्च्फ।व् का क्षेत्रापफल त्र क्षेत्रा व्ठफत्व् का क्षेत्रापफल अथार्त्, परवलयों ल 2 त्र 4ग एवंग 2 त्र 4ल से घ्िारा क्षेत्रापफल दिए हुए वगर् के क्षेत्रापफल को तीन बराबर भागों में विभाजित करता है। उदाहरण 15 क्षेत्रा क्ष्;गए लद्ध रू 0 ≤ ल ≤ ग 2 ़ 1ए 0 ≤ ल ≤ ग ़ 1ए 0 ≤ ग ≤ 2द्वका क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। हल आइए सवर्प्रथम हम उस क्षेत्रा का रेखाचित्रा तैयार करें जिसका हमें क्षेत्रापफल ज्ञात करना है। यह क्षेत्रा निम्नलिख्िात क्षेत्रों का मध्यवतीर् क्षेत्रा हैः । त्रक्ष्;गए लद्ध रू 0 ≤ ल ≤ ग2 ़ 1द्व1।2 त्रक्ष्;गए लद्ध रू 0 ≤ ल ≤ ग ़ 1द्व और ।3 त्रक्ष्;गए लद्ध रू 0 ≤ ग ≤ 2द्व वक्रोंल त्र ग2 ़ 1 एवं ल त्र ग ़ 1 के प्रतिच्छेद ¯बदु च्;0ए 1द्ध एवं फ;1ए 2द्ध हैं। आवृफति 8.24 से, अभीष्ट क्षेत्रा, छायांकित क्षेत्रा व्च्फत्ैज्व् है जिसका क्षेत्रापफल त्र क्षेत्रा व्ज्फच्व् का क्षेत्रापफल ़ क्षेत्रा ज्ैत्फज् का क्षेत्रापफल त्र ∫01;ग 2 ़1द्ध कग ़∫12;ग ़ 1द्ध कग ;क्योंघ्द्ध 32⎡⎛ ग ⎞⎤1 ⎡⎛ ग ⎞⎤2 त्र ⎢⎜ ़ ग⎟⎥़⎢⎜ ़ ग⎟ ⎣⎝ 3 ⎠⎦0 ⎣⎝ 2 ⎠⎦1 ⎡⎛ 1 ⎞⎤⎡ ⎛ 1 ⎞⎤ 23 ़1 − 0 ़;2 ़ 2द्ध− ़ 1त्र ⎜⎟ ⎜⎟ त्र⎢⎥ ⎥⎣⎝ 3 ⎠⎦⎣ ⎝ 2 ⎠⎦ 6 आवृफति 8.24 अध्याय 8 पर विविध् प्रश्नावली 1ण् दिए हुए वक्रों एवं रेखाओं से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ल त्र ग 2य ग त्र 1ए ग त्र 2 एवं ग.अक्ष ;पपद्ध ल त्र ग4य ग त्र 1ए ग त्र 5 एव ग.अक्ष 2ण् वक्रोंल त्र ग एवं ल त्र ग 2 के मध्यवतीर् क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 3ण् प्रथम चतुथा±श में सम्िमलित एवंल त्र 4ग ए ग त्र 0ए ल त्र 1 तथा ल त्र 4 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 2ग ़ 34ण् ल त्र ग ़ 3 का ग्राप़फ खींचिए एवं 0 कग का मान ज्ञात कीजिए।∫− 6 5ण् ग त्र 0 एवंग त्र 2π तथा वक्र ल त्र ेपद ग से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 6ण् परवलय ल 2 त्र 4ंग एवं रेखा ल त्र उग से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 7ण् परवलय 4ल त्र 3ग2 एवं रेखा 2ल त्र 3ग ़ 12 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 2 2 ग ल गल8ण् दीघर्वृत्त ़त्र 1 एवं रेखा ़त्र1 से घ्िारे लघु क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए।9 4 32 2 2 ग ल गल9ण् दीघर्वृत्त 2 ़ 2 त्र1 एवं रेखा ़त्र1 से घ्िारे लघु क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। ं इ ंइ 10ण् परवलयग2 त्र लए रेखा ल त्र ग ़ 2 एवं ग.अक्ष से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 11ण् समाकलन विध्ि का उपयोग करते हुए वक्र ग ़ ल त्र1 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। ख्संकेत रू आवश्यक क्षेत्रा, रेखाओं ग ़ ल त्र 1ए गदृ ल त्र 1ए दृ ग ़ ल त्र 1 एवं दृ ग दृ ल त्र 1 से घ्िारा है, 12ण् वक्रों क्ष्;गए लद्ध रू ल ≥ ग 2 तथा ल त्र ग द्व से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 13ण् समाकलन विध्ि का उपयोग करते हुए एक ऐसे त्रिाभुज।ठब्ए का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए जिसके शीषो± के निदेर्शांक ।;2ए 0द्धए ठ ;4ए 5द्ध एवंब् ;6ए 3द्ध हैं। 14ण् समाकलन विध्ि का उपयोग करते हुए, रेखाओं 2ग ़ ल त्र 4ए 3ग दृ 2ल त्र 6 एवं ग दृ 3ल ़ 5 त्र 0 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 15ण् क्षेत्रा क्ष्;गए लद्ध रू ल 2 ≤ 4गए 4ग 2 ़ 4ल 2 ≤ 9द्वका क्षेत्रापफल ज्ञात कीजिए। 16 से 20 तक प्रश्नों में सही उत्तर का चयन कीजिएः 16ण् वक्र ल त्र ग ए ग.अक्ष एवं कोटियों ग त्र दृ 2ए ग त्र 1 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल हैः −15 15 17 3;।द्ध दृ 9 ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध44 4 17ण् वक्र ल त्र ग द्यग द्यए ग.अक्ष एवं कोटियों ग त्र दृ 1 तथा ग त्र 1 से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल हैः 12 4 ;।द्ध 0 ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध33 3 2ख्संकेतरू ल त्र ग यदि ग झ 0 एवं ल त्र दृ ग 2 यदि ग ढ 0, 218ण् क्षेत्रा ल 2 ≥ 6ग और वृत्त ग ़ ल 2 त्र 16 में सम्िमलित क्षेत्रा का क्षेत्रापफल हैः 4 4 4 4 ;।द्ध ;4 π− 3द्ध ;ठद्ध ;4 π़ 3द्ध ;ब्द्ध ;8 π− 3द्ध ;क्द्ध ;8 π़ 3द्ध 3 333 π 19ण् ल.अक्षए ल त्र बवे ग एवं ल त्र ेपद गए0 ≤ ग ≤ से घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल हैः2 ;।द्ध 2; 2 −1द्ध ;ठद्ध 2 − 1 ;ब्द्ध 2 ़ 1 ;क्द्ध 2 सारांश वक्र ल त्र ि;गद्धए ग.अक्ष एवं रेखाओं ग त्र ं तथा ग त्र इ ;इ झ ंद्ध से घ्िारे क्षेत्रा के क्षेत्रापफल काऽ सूत्रारू क्षत्रापफलत्र इ लकग त्र इ ि;द्ध े ग कग है।∫ ं ∫ं ऽ वक्र ग त्र φ ;लद्धए ल.अक्ष एवं रेखाओं ल त्र बए ल त्र क से घ्िारे क्षेत्रा के क्षेत्रापफल का सूत्रा रू ापफल त्र क गकल त्र क φ ;द्ध हैक्षत्रे ल कल ।∫ ब ∫ब ऽ दो वक्रों ल त्र ि;गद्धए ल त्र ह ;गद्ध एवं रेखाएँ ग त्र ंए ग त्र इ के मध्य घ्िारे क्षेत्रा का क्षेत्रापफल निम्नलिख्िात सूत्रा द्वारा देय है घ् ∫ ंइ क्षत्रापफल त्र ख् ि;द्ध − हग ,कग ए जहाँ ख्ंए इ, में ि;गद्ध ≥ ह ;गद्धे ग ;द्ध ऽ यदि ख्ंए ब, में ि;गद्ध ≥ ह ;गद्ध एवं ख्बए इ, में ि;गद्ध ≤ ह ;गद्ध ए ं ढ ब ढ इए तो हम क्षेत्रापफल को निम्नलिख्िात प्रकार से लिखते हैंः क्षेत्रापफल त्र ब ख् ि;द्ध − ह;द्ध कग ़ इ ख्ह ;द्ध ग − गिगग , ;द्ध , कग ∫ं ∫ ब

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