प्ण् बहुविकल्प प्रश्न ;प्ररूप.प्द्ध 1ण् निम्नलिख्िात में से कौन - सी परिस्िथति किसी पदाथर् की ठोस अवस्था के अस्ितत्व के लिए अनुवूफल है? 2ण् निम्नलिख्िात में से कौन - सा अभ्िालक्षण वि्रफस्टलीय ठोस का नहीं है? ;पद्ध निश्िचत एवं अभ्िालक्षण्िाक संगलन उफष्मा ;पपद्ध समदैश्िाक प्रवृफति ;पपपद्ध संपूणर् वि्रफस्टल में अवयवी कणों की व्यवस्था का एक नियमित एवं पुनरावृत्त पैटनर् ;पअद्ध एक वास्तविक ठोस 3ण् निम्नलिख्िात में से कौन - सा एक अवि्रफस्टलीय ठोस है? ;पद्ध गै्रपफाइट ;़ब्द्ध ;पपद्ध क्वाटर््श काँच ;ैपव्द्ध;पद्ध उच्च ताप ;पपद्ध निम्न ताप ;पपपद्ध उच्च उफष्मीय उफजार् ;पअद्ध दुबर्ल ससंजक बल 2;पपपद्ध व्रफोम ऐलम ;पअद्ध सिलिकन काबार्इड ;ैपब्द्ध 4ण् निम्नलिख्िात में से कौन - सी व्यवस्था प्रतिलोहचुंबकीय पदाथर् के चुंबकीय आघूणर् के व्यवस्िथत संरेखण को प्रदश्िार्त करती है? 5ण् क्वाटर््श काँच के आपवतर्नांक के मान के संदभर् में निम्नलिख्िात में से कौन - सा सत्य है? ;पद्ध सभी दिशाओं में समान होता है। ;पपद्ध भ्िान्न - भ्िान्न दिशाओं में भ्िान्न होता है। ;पपपद्ध मापा नहीं जा सकता। ;पअद्ध हमेशा शून्य होता है। 6ण् अवि्रफस्टलीय ठोसों के विषय में निम्नलिख्िात में से कौन - सा कथन सही नहीं है? ;पद्ध गरम करने से किसी एक ताप पर ये वि्रफस्टलीय बन सकते हैं। ;पपद्ध लम्बे समय तक रखने से ये वि्रफस्टलीय बन सकते हैं। ;पपपद्ध अवि्रफस्टलीय ठोसों को गरम करके साँचे में ढाला जा सकता है। ;पअद्ध यह विषमदैश्िाक प्रवृफति के होते हैं। 7ण् वि्रफस्टलीय ठोसों के निश्िचत गलनांक का कारण है ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ। ;पद्ध वि्रफस्टलीय जालक में अवयवी कणों की नियमित व्यवस्था लघु परास तक प्रेक्ष्िात होना। ;पपद्ध वि्रफस्टलीय जालक में अवयवी कणों की नियमित व्यवस्था दीघर्परास तक प्रेक्ष्िात होना। ;पपपद्ध विभ्िान्न दिशाओं में अवयवी कणों की समान व्यवस्था। ;पअद्ध विभ्िान्न दिशाओं में अवयवी कणों की भ्िान्न व्यवस्था। 8ण् वि्रफस्टल जालक में आयोडीन के अणु ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ द्वारा बंध्े रहते हैं। ;पद्ध लण्डन बल ;पपद्ध द्विध्ु्रव - द्विध्ु्रव अन्योन्य वि्रफया ;पपपद्ध सहसंयोजक आबंध् ;पअद्ध वूफलाॅम बल 9ण् निम्नलिख्िात में से कौन - सा जालक ;नेटववर्फद्ध ठोस है? ;पद्ध ैव्;ठोसद्ध2 ;पपद्ध प्2 ;पपपद्ध हीरा ;पअद्ध भ़्व् ;बपर्फद्ध210ण् निम्नलिख्िात में से कौन - सा ठोस विद्युत् का चालक नहीं है? ;।द्ध डह ;ेद्ध;ठद्ध ज्पव् ;ेद्ध;ब्द्ध प्;ेद्ध;क्द्ध भ्व् ;ेद्ध2 2;पद्ध केवल ;।द्ध ;पपद्ध केवल ;ठद्ध ;पपपद्ध;ब्द्ध एवं ;क्द्ध ;पअद्ध;ठद्धए ;ब्द्ध एवं ;क्द्ध 11ण् निम्नलिख्िात में से कौन - सा आयनिक ठोसों का अभ्िालक्षण नहीं है? ;पद्ध गलित अवस्था में विद्युत् चालकता का बहुत कम मान ;पपद्ध भंगुर प्रवृफति ;पपपद्ध अन्योन्य िया में अत्यिाक प्रबल बल ;पअद्ध विषमदैश्िाक प्रवृफति 12ण् गै्रप़्ाफाइट ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ की उपस्िथति के कारण विद्युत्् का सुचालक है? ;पद्ध एकाकी इलेक्ट्राॅन युगल ;पपद्ध मुक्त संयोजी इलेक्ट्राॅन ;पपपद्ध ध्नायन ;पअद्ध )णायन 13ण् निम्नलिख्िात मे ंसे कौन - से आॅक्साइड का विद्युत् सुचालक अथवा विद्युत्रोध्ी होना ताप पर निभर्र करता है? ;पद्ध ज्पव् ;पपद्ध ैपव्2 ;पपपद्ध ज्पव्3 ;पअद्ध डहव् 14ण् निम्नलिख्िात में से कौन - सा आॅक्साइड धतुओं के समान वैद्युतीय गुण प्रदश्िार्त करता है? ;पद्ध ैपव्2 ;पपद्ध डहव् ;पपपद्ध ैव् ;ेद्ध2;पअद्ध ब्तव्2 15ण् किसी शु( वि्रफस्टल में जालक स्थल ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ द्वारा अध्यासित नहीं हो सकता? ;पद्ध अणु ;पपद्ध आयन ;पपपद्ध इलेक्ट्राॅन ;पअद्ध परमाणु 3 ठोस अवस्था 16ण् ग्रैपफाइट को किस रूप में वगीर्वृफत़नहीं कर सकते? ;पद्ध चालक ठोस ;पपद्ध जालक ठोस ;पपपद्ध सहसंयोजक ठोस ;पअद्ध आयनिक ठोस 17ण् ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ में ध्नायन अन्तरकाशी स्थल में उपस्िथत होते हैं। ;पद्ध प्रेंफकेल दोष ;पपद्ध शाॅट्की दोष ;पपपद्ध रिक्ितका दोष ;पअद्ध धतु न्यूनता दोष 18ण् वि्रफस्टलों में शाॅट्की दोष तब प्रेक्ष्िात होता है जबऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ। ;पद्ध वुफछ ध्नायन अपने जालक स्थानों से निकलकर अन्तराकाशी स्थानों में अध्यासित हो जाते हैं। ;पपद्ध जालक से समान संख्या में ध्नायन एवं )णायन अनुपस्िथत होते हैं। ;पपपद्ध वुफछ जालक स्थल इलेक्ट्राॅनों द्वारा अध्यासित होते हैं। ;पअद्ध जालक में कोइर् अशुि उपस्िथत होती है। 19ण् च.प्रकार के अध्र्चालक द्वारा उपाजिर्त आवेश के बारे में निम्नलिख्िात में से क्या सही है? ;पद्ध ध्नात्मक ;पपद्ध उदासीन ;पपपद्ध )णात्मक ;पअद्ध च अशुि की सांद्रता पर निभर्र करता है 20ण् सिलिकन से द.प्रकार का अध्र्चालक प्राप्त करने के लिए, किस संयोजकता वाले पदाथर् को इसमें अपमिश्रित करना चाहिए? ;पद्ध 2 ;पपद्ध 1 ;पपपद्ध 3 ;पअद्ध 5 21ण् पफलक वेंफदि्रत एकक कोष्िठका में चतुष्पफलकीय रिक्ितयों की वुफल संख्या ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ होती है। ;पद्ध 6 ;पपद्ध 8 ;पपपद्ध 10 ;पअद्ध 12 22ण् ।हठत;ेद्ध वि्रफस्टल द्वारा निम्नलिख्िात में से कौन - से बिन्दु दोष प्रदश्िार्त किए जाते हैं? ;।द्ध शाॅट्की दोष ;ठद्ध प्रेंफकेल दोष ;ब्द्ध धतु आध्िक्य दोष ;क्द्ध धतु न्यूनता दोष ;पद्ध;।द्ध एवं ;ठद्ध ;पपद्ध;ब्द्ध एवं ;क्द्ध ;पपपद्ध;।द्ध एवं ;ब्द्ध ;पअद्ध;ठद्ध एवं ;क्द्ध 23ण् किस युगल में सवार्ध्िक संवुफलन क्षमता है? ;पद्ध ीबच तथा इबब ;पपद्ध ीबच तथा बबच ;पपपद्ध इबब तथा बबच ;पअद्ध इबब तथा सरल घनीय कोष्िठका 24ण् अंतःवेंफदि्रत घनीय व्यवस्था में रिक्त स्थान का प्रतिशत ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ होता है। ;पद्ध 74 ;पपद्ध 68 ;पपपद्ध 32 ;पअद्ध 26 25ण् षट्कोणीय निविड संवुफलन के लिए निम्नलिख्िात में से कौन - सा कथन असत्य है? ;पद्ध उपसहसंयोजन संख्या 12 होती है। ;पपद्ध इसमें संवुफलन क्षमता 74ः होती है। ;पपपद्ध द्वितीय परत की चतुष्पफलकीय रिक्ितकाएँ, तृतीय परत के गोलों द्वारा आच्छादित रहती हैं। ;पअद्ध इस प्रकार की व्यवस्था में चतुथर् परत के गोले, प्रथम परत के गोलों से पूणर्तः संरेख्िात होते हैं। 26ण् निम्नलिख्िात में से किस संवुफलित संरचना में ध्नायन तथा )णायन के लिए उपसहसंयोजन संख्या समान होगी? ;पद्ध ब्सदृ आयन बिब जालक बनाते हैं और छं़ आयन एकक कोष्िठका की सभी अष्टपफलकीय रिक्ितकाओं में उपस्िथत हैं। ;पपद्ध ब्ं2़ आयन बिब जालक बनाते हैं और थ्दृ आयन एकक कोष्िठका की सभी आठ चतुष्पफलकीय रिक्ितकाओं में उपस्िथत हैं। ;पपपद्ध व्2दृ आयन बिब जालक बनाते हैं और छं़ आयन एकक कोष्िठका की सभी आठ चतुष्पफलकीय रिक्ितकाओं में उपस्िथत हैं। ;पअद्ध ै2दृ आयन बिब जालक बनाते हैं और र्द2़ आयन एकक कोष्िठका की एकांतर चतुष्पफलकीय रिक्ितका में स्थान लेते हैं। 27ण् द्विविमीय वगर् निविड संवुफलित संरचना में उपसहसंयोजन संख्या क्या होती है? ;पद्ध 2 ;पपद्ध 3 ;पपपद्ध 4 ;पअद्ध 6 28ण् अपमिश्रण से किस प्रकार का दोष उत्पन्न होता है? ;पद्ध प्रभ्रंश दोष ;पपद्ध शाॅट्की दोष ;पपपद्ध पें्रफकेल दोष ;पअद्ध इलेक्ट्राॅनीय दोष 29ण् सिलिकन में इलेक्ट्राॅन ध्नी अशुि को अपमिश्रित करने पर ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ बनता है। ;पद्ध च.प्रकार का अध्र्चालक ;पपद्ध द.प्रकार का अध्र्चालक ;पपपद्ध आंतर - अध्र्चालक ;पअद्ध वुफचालक 30ण् निम्नलिख्िात में से कौन - सा कथन सत्य नहीं है? ;पद्ध चुम्बकीय क्षेत्रा में अनुचुम्बकीय पदाथो± का क्षीण आकषर्ण होता है। ;पपद्ध लोहचुम्बकीय पदाथो± को स्थायी रूप से चुम्बकत्व प्रदान नहीं किया जा सकता। ;पपपद्ध प्रतिलोहचुम्बकीय पदाथो± में डोमेन परस्पर विपरीत अभ्िाविन्यासित रहते हैं। ;पअद्ध प्रतिचुम्बकीय पदाथो± में इलेक्ट्राॅनों का युग्मन उनके चुम्बकीय आघूणर् को आपस में निरस्त कर देता है। 31ण् आयनिक ठोसों के लिए निम्नलिख्िात में से कौन - सा कथन सत्य नहीं है? ;पद्ध बड़े आयन निविड संवुफलित संरचना बनाते हैं। ;पपद्ध छोटे आयन अपने आकार के अनुसार चतुष्पफलकीय अथवा अष्टपफलकीय रिक्ितयों में अध्यासित होते हैं। ;पपपद्ध सभी रिक्ितयाँ अध्यासित होना आवश्यक नहीं होता। ;पअद्ध चतुष्पफलकीय तथा अष्टपफलकीय रिक्ितयों का अध्यासित अंश, रिक्ितयों में अध्यासित होने वाले आयनों की त्रिाज्या पर निभर्र करता है। 32ण् लोहचुम्बकीय पदाथर् चुम्बकीय क्षेत्रा में रखे जाने पर स्थायी चुम्बक बन जाता है क्योंकिऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ। ;पद्ध सभी डोमेन चुम्बकीय क्षेत्रा की दिशा में अभ्िाविन्यासित हो जाते हैं। ;पपद्ध सभी डोमेन चुम्बकीय क्षेत्रा के विपरीत दिशा में अभ्िाविन्यासित हो जाते हैं। ;पपपद्ध डोमेन यादृच्िछक रूप से अभ्िाविन्यासित हो जाते हैं। ;पअद्ध डोमेन चुम्बकीय क्षेत्रा द्वारा प्रभावित नहीं होते। 33ण् 34ण् 35ण् 36ण् 37ण् विभ्िान्न प्रकार की एकक कोष्िठकाओं में संवुफलन क्षमता का सही व्रफम ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ है। ;पद्ध बिब ढ इबब ढ सामान्य घनीय ;पपद्ध बिब झ इबब झ सामान्य घनीय ;पपपद्ध बिब ढ इबब झ सामान्य घनीय ;पअद्ध इबब ढ बिब झ सामान्य घनीय निम्नलिख्िात में से कौन - सा दोष प्रभंश दोष भी कहलाता है? ;पद्ध प्रेंफकेल दोष ;पपद्ध शाॅट्की दोष ;पपपद्ध नाॅन - स्टाॅइकियोमीट्री दोष ;पअद्ध सामान्य अन्तराकाशी दोष घनीय निविड संवुफलन की एकक कोष्िठका में ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ। ;पद्ध चार चतुष्पफलकीय रिक्ितयाँ होती हैं जो चार समीपवतीर् एकक कोष्िठकाओं द्वारा सहभाजित होती हैं। ;पपद्ध एकक कोष्िठका के भीतर चार चतुष्पफलकीय रिक्ितयाँ होती हैं। ;पपपद्ध आठ चतुष्पफलकीय रिक्ितयाँ होती हैं जो चार समीपवतीर् एकक कोष्िठकाओं द्वारा सहभाजित होती हैं। ;पअद्ध एकक कोष्िठका के भीतर आठ चतुष्पफलकीय रिक्ितयाँ होती हैं। बिबएइबब तथा सामान्य घनीय एकक कोष्िठका में गोलों की त्रिाज्या के रूप में एकक कोष्िठका के किनारे की लम्बाइर् व्रफमशः ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ होती है। 4त ;पद्ध 22ए त ए2 त 3 4त ;पपद्ध 3ए 2 2ए2 तत 4त ;पपपद्ध 2ए 22ए 3 तत 4त ;पअद्ध 2एत 3ए2 2 त ;पद्ध κ झझ κ ढ κ;पपद्ध κढढ κ ढ κनिम्नलिख्िात में से ठोसों में चालकता का सही व्रफम कौन - सा है? धतुवुफचालक अध्र्चालक धतु वुफचालकअध्र्चालक ;पपपद्ध κझ κ त्र शून्यधतु κअध्र्चालकवुफचालक;पअद्ध κढ κझ κ≠ शून्यधतु अध्र्चालक वुफचालक प्प्ण् बहुविकल्प प्रश्न ;प्ररूप.प्प्द्ध नोट - निम्नलिख्िात प्रश्नों में दो या इससे अध्िक विकल्प सही हो सकते हैं। 38ण् त्रिाविमीय षट्कोणीय निविड संवुफलित संरचना में बनाने वाली रिक्ितकाओं के बारे में कौन - से कथन सही नहीं हैं। ;पद्ध जब प्रथम परत की त्रिाकोणीय रिक्ित के उफपर द्वितीय परत के गोले उपस्िथत होते हैं तो चतुष्पफलकीय रिक्ित बनती है। ;पपद्ध सभी त्रिाकोणीय रिक्ितयाँ, द्वितीय परत के गोलों द्वारा आच्छादित नहीं होतीं। ;पपपद्ध जब द्वितीय परत की त्रिाकोणीय रिक्ितयाँ, प्रथम परत की त्रिाकोणीय रिक्ितयों के ठीक उफपर हों और इन रिक्ितयों की त्रिाकोणीय आवृफतियाँ अतिव्यापित न हों तो चतुष्पफलकीय रिक्ितयाँ बनती हैं। ;पअद्ध जब द्वितीय परत की त्रिाकोणीय रिक्ितयाँ प्रथम परत की समान रिक्ितयों के साथ अतिव्यापन करती हैं तो अष्टपफलकीय रिक्ितयाँ बनती हैं। 39ण् प्रतिलोहचुम्बकीय पदाथर् के लिए चुम्बकीय आघूणर् का मान शून्य होता है। क्योंकि डोमेनऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ। ;पद्ध प्रयुक्त चुम्बकीय क्षेत्रा की दिशा में अभ्िाविन्यासित हो जाते हैं। ;पपद्ध प्रयुक्त चुम्बकीय क्षेत्रा की विपरीत दिशा में अभ्िाविन्यासित हो जाते हैं। ;पपपद्ध चुम्बकीय क्षेत्रा के अनुप्रयोग के बिना एक - दूसरे के विपरीत अभ्िाविन्यासित हो जाते हैं। ;पअद्ध एक - दूसरे के चुम्बकीय आघूणर् को निरस्त कर देते हैं। 40ण् निम्नलिख्िात में से कौन - से कथन सत्य नहीं हैं? ;पद्ध रिक्ितका दोष से पदाथर् का घनत्व कम होता है। ;पपद्ध अंतराकाशी दोष से पदाथर् का घनत्व बढ़ता है। ;पपपद्ध अशुि दोष का पदाथर् के घनत्व पर कोइर् प्रभाव नहीं पड़ता। ;पअद्ध पें्रफकेल दोष से पदाथर् का घनत्व बढ़ता है। 41ण् धतु के बारे में निम्नलिख्िात में से कौन - से कथन सही हैं? ;पद्ध संयोजकता बैंड, चालन बैंड के साथ अतिव्यापित होता है। ;पपद्ध संयोजकता बैंड और चालन बैंड के बीच अंतराल नगण्य होता है। ;पपपद्ध संयोजकता बैंड तथा चालन बैंड के बीच के अंतराल को निधर्रित नहीं किया जा सकता। ;पअद्ध संयोजकता बैंड आंश्िाक रूप में भी भरा हो सकता है। 42ण् विद्युत् क्षेत्रा के प्रभाव में, च.प्रकार के अध्र्चालक के लिए, इलेक्ट्राॅनों तथा छिद्रों के गमन के बारे में निम्नलिख्िात में से कौन - से कथन सत्य हैं? ;पद्ध इलेक्ट्राॅन, इलेक्ट्राॅन छिद्र में से होकर ध्नावेश्िात प्लेट की ओर गमन करता है। ;पपद्ध इलेक्ट्राॅन छिद्र का गमन )णावेश्िात प्लेट की ओर प्रतीत होता है। ;पपपद्ध इलेक्ट्राॅन तथा छिद्र तथा दोनों ध्नावेश्िात प्लेट की दिशा में गमन करते प्रतीत होते हैं। ;पअद्ध इलेक्ट्राॅनों के गमन तथा छिद्रों के गमन में कोइर् संबंध् नहीं होता। 43ण् अध्र्चालकों के बारे में निम्नलिख्िात में से कौन - से कथन सही हैं। ;पद्ध इलेक्ट्राॅन ध्नी अशुि से अपमिश्रित सिलिकन एक च.प्रकार का अध्र्चालक होता है। ;पपद्ध इलेक्ट्राॅन ध्नी अशुि से अपमिश्रित सिलिकन द.प्रकार का अध्र्चालक होता है। ;पपपद्ध विस्थानीवृफत इलेक्ट्राॅन अपमिश्रित सिलिकन की चालकता बढ़ाते हैं। ;पअद्ध इलेक्ट्राॅन रिक्ितका द.प्रकार के अध्र्चालकों की चालकता बढ़ाती है। 44ण् ज्ञब्स वि्रफस्टल में पोटैश्िायम आयनों का आध्िक्य उसमें बैंगनी अथवा वुफमुदनी रंग उत्पन्न करता है क्योंकि ;पद्ध वुफछ )णायनी स्थल एक अयुगलित इलेक्ट्राॅन द्वारा घ्िारे रहते हैं। ;पपद्ध वुफछ )णायनी स्थल, एक इलेक्ट्राॅन युगल द्वारा घ्िारे रहते हैं। ;पपपद्ध वुफछ )णायनी स्थलों पर रिक्ितकाएँ होती हैं। ;पअद्ध थ् - वेंफद्र बनते हैं जो वि्रफस्टल को रंग प्रदान करते हैं। 45ण् छंब्स वि्रफस्टल की एकक कोष्िठका में चतुष्पफलकीय रिक्ितकाओं की संख्या ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ होती है। ;पद्ध 4 ;पपद्ध 8 ;पपपद्ध अष्टपफलकीय रिक्ितका से दुगनी ;पअद्ध अष्टपफलकीय रिक्ितका से चार गुनी 46ण् अवि्रफस्टलीय ठोसों को ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ कह सकते हैं। ;पद्ध छद्म ठोस ;पपद्ध वास्तविक ठोस ;पपपद्ध अतिशीतित द्रव ;पअद्ध अतिशीतित ठोस 47ण् सिलिकन के आदशर् वि्रफस्टल ;चित्रा 1ण्1द्ध में वुफछ तत्व डोपित किए गए जैसा कि विकल्पों में दशार्या गया है। इनमें से कौन - से विकल्प द - प्रकार के अध्र्चालक दशार्ते हैं? चित्रा 1ण्1 ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध ;पअद्ध 48ण् निम्नलिख्िात में से कौन - से कथन सही हैं? ;पद्ध लोहचुंबकीय पदाथर् गरम करने से लोहचुंबकत्व त्याग देते हैं और अनुचंुबकीय बन जाते हैं। ;पपद्ध लोहचुंबकीय पदाथर् गरम करने से लोहचुंबकत्व नहीं छोड़ते और लोहचुंबकीय बने रहते हैं। ;पपपद्ध प्रतिलोहचुंबकीय पदाथो± की डोमेन संरचनाएँ लोहचुंबकीय पदाथो± के समान होती हैं और उनके चुंबकीय आघूणर् परस्पर निरस्त नहीं होते। ;पअद्ध लोहचुंबकीय पदाथो± में सभी डोमेन चुंबकीय क्षेत्रा की ओर अभ्िाविन्यासित हो जाते हैं और चुंबकीय क्षेत्रा हटाने पर भी वैसे ही बने रहते हैं। 49ण् क्वाटर््श काँच के निम्नलिख्िात में से कौन से अभ्िालक्षण नहीं होते? ;पद्ध यह एक वि्रफस्टलीय ठोस होता है। ;पपद्ध सभी दिशाओं में इसका अपवतर्नांक समान होता है। ;पपपद्ध इसकी गलन की उफष्मा निश्िचत होती है। ;पअद्ध इसे अतिशीतित द्रव भी कहते हैं। 50ण् निम्नलिख्िात में से किन्हें आण्िवक ठोस नहीं माना जा सकता? ;पद्ध ैपब् ;सिलिकन काबार्इडद्ध ;पपद्ध ।सछ ;पपपद्ध हीरा ;पअद्ध प्2 51ण् निम्नलिख्िात में से किस व्यवस्था में अष्टपफलकीय रिक्ितका बनती है? ;पद्ध ीबच ;पपद्ध इबब ;पपपद्ध सामान्य घनीय ;पअद्ध बिब 52ण् प्रेंफकेल दोष को यह भी कहते हैं - ;पद्ध स्टाॅइकियोमीट्री दोष ;पपद्ध प्रभं्रश दोष ;पपपद्ध अशुि दोष ;पअद्ध नाॅन - स्टाॅइकियोमीट्री दोष 53ण् निम्नलिख्िात में से कौन - से दोषों से घनत्व घटता है? ;पद्ध अन्तराकाशी दोष ;पपद्ध रिक्ितका दोष ;पपपद्ध पें्रफकेल दोष ;पअद्ध शाॅट्की दोष प्प्प्ण् लघु उत्तर प्रश्न 54ण् द्रवों तथा गैसों को तरल के रूप में वगीर्वृफत क्यों किया गया है? 55ण् ठोस असम्पीड्य क्यों होते हैं? 56ण् कणों का दीघर् परास व्यवस्था व्रफम होने पर भी सामान्यतः वि्रफस्टल आदशर् क्यों नहीं होते? 57ण् सामान्य लवण, छंब्सए कभी - कभी पीला क्यों दिखाइर् देता है? 58ण् थ्मव् ;ेद्ध इस स्टाॅइकियोमीट्री संघटन में क्यों नहीं मिलता? 59ण् गरम करने पर श्वेत र्दव् ;ेद्ध पीला क्यों हो जाता है? 60ण् अध्र्चालकों की चालकता ताप बढ़ाने के साथ - साथ क्यों बढ़ती जाती है? 61ण् गैलियम से डोपित ;अपमिश्रितद्ध करने पर जमेर्नियम वि्रफस्टलों की चालकता क्यों बढ़ जाती है? 62ण् एक यौगिक में नाइट्रोजन ;छद्धके परमाणु घनीय निविड संवुफलित संरचना बनाते हैं और धतु के परमाणु ;डद्ध एक तिहाइर् चतुष्पफलकीय रिक्ितकाआंे में उपस्िथत हैं। ड एवं छ द्वारा बने यौगिक का सूत्रा ज्ञात कीजिएघ् 63ण् अवि्रफस्टलीय ठोस किन परिस्िथतियों में वि्रफस्टलीय ठोस में परिवतिर्त हो जाता है? प्टण् सुमेलन प्ररूप प्रश्न नोट - निम्नलिख्िात प्रश्नों में काॅलम प् और काॅलम प्प् के मदों को सुमेलित कीजिए। वुफछ प्रश्नों में काॅलम प् और काॅलम प्प् के एक से अध्िक मदों में सुमेलन संभव हो सकता है। 64ण् काॅलम प् में दिए गए दोषों को काॅलम प्प् में दिए गए कथनों से सुमेलित कीजिए - काॅलम प् काॅलम प्प् ;पद्ध सामान्य रिक्ितका दोष ;ंद्ध आयन रहित ठोसों द्वारा दशार्या जाता है और ठोस के घनत्व में वृि होती है। ;पपद्ध सामान्य अन्तराकाशी दोष ;इद्धआयनिक ठोसों द्वारा दशार्या जाता है और ठोस के घनत्व में कमी आती है। ;पपपद्ध प्रेंफकेल दोष ;बद्ध आयन रहित ठोसों द्वारा दशार्या जाता है और ठोस का घनत्व कम हो जाता है। ;पअद्ध शाॅट्की दोष ;कद्धआयनिक ठोसों द्वारा दशार्या जाता है और ठोस का घनत्व समान बना रहता है। 65ण् काॅलम प् में दिए गए एकक कोष्िठका के प्रकारों को काॅलम प्प् में दिए गए गुणों से सुमेलित कीजिए - काॅलम प् काॅलम प्प् ;पद्ध आद्य घनीय एकक कोष्िठका ;ंद्ध तीनों लम्बवत कोरों की कोर लम्बाइर् अनिवायर्तः भ्िान्न होती है यानी ं≠इ≠ब ;पपद्ध अंतः वेंफदि्रत घनीय एकक कोष्िठका ;इद्धप्रति एकक कोष्िठका में परमाणुओं की संख्या एक होती है। ;पपपद्ध पफलक वेंफदि्रत घनीय एकक कोष्िठका ;बद्ध तीनों लम्बवत कोरों की कोर लम्बाइर् अनिवायर्तः एकसमान होती है यानी ं त्र इ त्र ब ;पअद्ध अंत्य वेंफदि्रत विषमलंबाक्ष एकक कोष्िठका ;कद्धकोनों पर स्िथत परमाणुओं के योगदान के अतिरिक्त एक एकक कोष्िठका में उपस्िथत परमाणुओं की संख्या एक होती है। ;मद्ध कोनों पर स्िथत परमाणुओं के योगदान के अतिरिक्त एक एकक कोष्िठका में उपस्िथत परमाणुओं की संख्या तीन होती है। 66ण् काॅलम प् में दिए गए दोषों के प्रकारों को काॅलम प्प् में दिए गए कथनांे से सुमेलित कीजिए - काॅलम प् काॅलम प्प् ;पद्ध अशुि दोष ;ंद्ध वह छंब्स जिसमें थ्.वेंफद्र नामक )णायनिक स्थल उपस्िथत हों ;पपद्ध धतु आध्िक्य दोष ;इद्धथ्म3़ युक्त थ्मव् ;पपपद्ध धतु न्यूनता दोष ;बद्ध ैत2़ युक्त छंब्स जिसमें वुफछ ध्नायनी स्थल रिक्त हों 67ण् काॅलम प् और काॅलम प्प् में दिए गए मदों को सुमेलित कीजिए - काॅलम प् काॅलम प्प् ;पद्ध ठोस अवस्था में डह ;ंद्ध च.प्रकार का अध्र्चालक ;पपद्ध गलित अवस्था में डहब्स;इद्ध द.प्रकार का अध्र्चालक2 ;पपपद्धपफाॅस्प़़्ाफोरस युक्त सिलिकन ;बद्ध विद्युत्अपघटनी चालक ;पअद्ध बोराॅन युक्त जमेर्नियम ;कद्ध इलेक्ट्राॅनिक चालक 68ण् काॅलम प् में दिए गए संवुफलन के प्रकारों को काॅलम प्प् में दिए गए मदों से सुमेलित कीजिएμ काॅलम प् काॅलम प्प् ;पद्ध द्विविमा में वगीर्य निविड संवुफलन ;ंद्ध त्रिाकोणीय रिक्ित ;पपद्ध द्विविमा में षट्कोणीय निविड संवुफलन ;इद्धप्रत्येक चैथी परत में गोलों का पैटनर् पुनरावृत्त होता है। ;पपपद्ध त्रिाविमा में षट्कोणीय निविड संवुफलन ;बद्ध उपसहसंयोजन संख्या 4 ;पअद्ध त्रिाविमा में घनीय निविड संवुफलन ;कद्धएकान्तर परत में गोलों का पैटनर् पुनरावृत्त होता है। टण् अभ्िाकथन एवं तवर्फ प्ररूप प्रश्न नोट - निम्नलिख्िात प्रश्नों में अभ्िाकथन के पश्चात संगत तवर्फ का कथन दिया है। निम्नलिख्िात विकल्पोंमें से कथन का चयन करके सही उत्तर दीजिए। ;पद्ध अभ्िाकथन और तवर्फ दोनों सही हैं और तवर्फ अभ्िाकथन का सही स्पष्टीकरण है। ;पपद्ध अभ्िाकथन और तवर्फ दोनों सही कथन हैं परन्तु तवर्फ अभ्िाकथन का स्पष्टीकरण नहीं है। ;पपपद्ध अभ्िाकथन सही है परन्तु तवर्फ गलत कथन है। ;पअद्ध अभ्िाकथन गलत है परन्तु तवर्फ सही कथन है। 69ण् अभ्िाकथन - सरल घनीय संरचना की एकक कोष्िठका से वुफल एक परमाणु संबंध्ित होता है। तवर्फ - सरल घनीय एकक कोष्िठका में परमाणु कोनों पर होते हैं जो कि प्रत्येक आठ निकटवतीर् एकक कोष्िठकाओं से सहभाजित रहते हैं। 70ण् अभ्िाकथन - ग्रैप़्ाफाइट विद्युत्् का चालक होता है जबकि हीरा वुफचालक होता है। तवर्फ - ग्रैप़्ाफाइट मुलायम होता है जबकि हीरा बहुत कठोर एवं भंगुर होता है। 71ण् अभ्िाकथन - घनीय निविड संवुफलन की एकक कोष्िठका में काय वेंफद्र में उपस्िथत एक रिक्ित सहित वुफल अष्टपफलकीय रिक्ितयों की संख्या चार होती है। तवर्फ - काय वेंफद्र के अतिरिक्त एकक कोष्िठका के प्रत्येक छः पफलकों के वेंफद्र में एक अष्टपफलकीय छिद्र होता है जो कि दो निकटवतीर् एकक कोष्िठकाओं के द्वारा सहभाजित रहता है। 72ण् अभ्िाकथन - बिब की संवुफलन क्षमता अध्िकतम होती है। तवर्फ - बिब संरचना में उपसहसंयोजन संख्या 12 होती है। 73ण् अभ्िाकथन - अध्र्चालक, 10दृ6 से 104 वीउदृ1उदृ1 मध्यवतीर् परास की चालकता युक्त ठोस होते हैं। तवर्फ - अध्र्चालकों की मध्यवतीर् चालकता आंश्िाक रूप से भरे संयोजकता बैंड के कारण होती है। टप्ण् दीघर् उत्तर प्रश्न 74ण् नामांकित चित्रा की सहायता से दशार्इए कि घनीय निविड संवुफलित संरचना में प्रत्येक एकक कोष्िठका में अष्टपफलकीय रिक्ितयों की संख्या चार होती है। 75ण् दशार्इए कि घनीय निविड संवुफलित संरचना में प्रति एकक कोष्िठका आठ चतुष्पफलकीय रिक्ितयाँ उपस्िथत होती हैं। 76ण् डोपिंग से अध्र्चालकों की चालकता क्यों बढ़ जाती है? 77ण् पेफरस आॅक्साइड के एक नमूने का वास्तविक सूत्रा थ्मव्है। इस नमूने में थ्म2़ धतु आयनों का0ण्931ण्00 अंश कितना है? इसमें किस प्रकार का नाॅनस्टाॅइकियोमितीय दोष है? प्ण् बहुविकल्प प्रश्न ;प्ररूप - प्द्ध 1ण् ;पपद्ध 2ण् ;पपद्ध 3ण् ;पपद्ध 4ण् ;पअद्ध 5ण् ;पद्ध 6ण् ;पअद्ध 7ण् ;पपद्ध 8ण् ;पद्ध 9ण् ;पपपद्ध 10ण् ;पपपद्ध 11ण् ;पद्ध 12ण् ;पपद्ध 13ण् ;पपपद्ध 14ण् ;पअद्ध 15ण् ;पपपद्ध 16ण् ;पअद्ध 17ण् ;पद्ध 18ण् ;पपद्ध 19ण् ;पपद्ध 20ण् ;पअद्ध 21ण् ;पपद्ध 22ण् ;पद्ध 23ण् ;पपद्ध 24ण् ;पपपद्ध 25ण् ;पअद्ध 26ण् ;पद्ध 27ण् ;पपपद्ध 28ण् ;पअद्ध 29ण् ;पपद्ध 30ण् ;पपद्ध 31ण् ;पअद्ध 32ण् ;पद्ध 33ण् ;पपद्ध 34ण् ;पद्ध 35ण् ;पअद्ध 36ण् ;पद्ध 37ण् ;पद्ध प्प्ण् बहुविकल्प प्रश्न ;प्ररूप - प्प्द्ध 38ण् ;पपपद्धए ;पअद्ध 39ण् ;पपपद्धए ;पअद्ध 40ण् ;पपपद्धए ;पअद्ध 41ण् ;पद्धए ;पपद्धए ;पअद्ध 42ण् ;पद्धए ;पपद्ध 43ण् ;पपद्धए ;पपपद्ध 44ण् ;पद्धए ;पअद्ध 45ण् ;पपद्धए ;पपपद्ध 46ण् ;पद्धए ;पपपद्ध 47ण् ;पद्धए ;पपपद्ध 48ण् ;पद्धए ;पअद्ध 49ण् ;पद्धए ;पपपद्ध 50ण् ;पद्धए ;पपद्धए ;पपपद्ध51ण् ;पद्धए ;पअद्ध 52ण् ;पद्धए ;पपद्ध 53ण् ;पपद्धए ;पअद्ध प्प्प्ण् लघु उत्तर प्रश्न 54ण् द्रवों तथा गैसों में बहने का गुण होता है अथार्त अणु एक - दूसरे से स्वतंत्रा गमन और उलटने - पलटने के लिए स्वतंत्रा होते हैं अतः इन्हें तरल के रूप में वगीर्वृफत किया गया है। 55ण् ठोसों के अवयवी कणों ;परमाणु, आयन अणु आदिद्ध के मध्य दूरी बहुत कम होती है। इन्हें और अध्िक पास लाने पर इन कणों के इलेक्ट्राॅन अभ्रों में प्रतिकषर्ण प्रारंभ हो जाएगा। अतः इन्हें और अध्िक पास नहीं लाया जा सकता। 56ण् वि्रफस्टलीय ठोसों के अवयवी कणों की व्यवस्था में दीघर् परास नियमितता पाइर् जाती है। वि्रफस्टलीकरण के दौरान आदशर् व्यवस्था से वुफछ भ्िान्नता ;यानी दोषद्ध आ सकती है इसलिए वि्रफस्टल आदशर् नहीं होते। 57ण् सोडियम क्लोराइड का पीला रंग, उसके )णायनी स्थल पर उपस्िथत अयुगलित इलेक्ट्राॅनों के कारण होता है। इन स्थलों को थ्.वेंफद्र कहते हैं। ये इलेक्ट्राॅन उत्तेजित होने के लिए दृश्य प्रकाश से उफजार् का अवशोषण करते हैं जिससे वि्रफस्टल पीला दिखाइर् देता है। 58ण् थ्मव् के वि्रफस्टल में वुफछ थ्म2़ आयन थ्म3़ आयन द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं। ध्नावेश की हानि की पूतिर् के लिए तीन थ्म2़ आयन दो थ्म3़ आयनों से प्रतिस्थापित हो जाते हैं। पफलस्वरूप, स्टाॅइकियोमीट्री अनुपात की तुलना में धतु की मात्रा कम होगी। 59ण् गरम किए जाने पर र्दव् निम्नलिख्िात अभ्िावि्रफया के अनुसार आॅक्सीजन खोता है। गरम 2़1 दृ र्दव् ⎯⎯⎯→ र्द ़ व् ़2म 22 र्द2़ आयन तथा इलेक्ट्राॅन अन्तराकाशी स्थानों में चले जाते हैं तथा थ्.वेंफद्र बन जाते हैं ;जिसके कारण र्दव् पीला हो जाता है।द्ध 60ण् अध्र्चालकों में चालकता बैंड और संयोजकता बैंड के बीच में अंतराल कम होता है ;चित्रा 1ण्2द्ध, अतः ताप बढ़ने पर इलेक्ट्राॅन, संयोजकता बैंड से चालन बैंड में जा सकते हैं इसीलिए ताप बढ़ाने से अध्र्चालकों की चालकता बढ़ जाती है। 61ण् जमेर्नियम को गैलियम से डोपित ;अपमिश्रितद्ध करने पर गैलियम वुफछ जालक स्थलों से जमेर्नियम को प्रतिस्थापित कर देता है। गैलियम में केवल तीन संयोजी इलेक्ट्राॅन होते हैं। अतः निकटवतीर् जमेर्नियम परमाणु की चैथी संयोजकता संतुष्ट नहीं होती। यह स्थान रिक्त रह जाता है। इस स्थान पर इलेक्ट्राॅनों की कमी हो जाती है। अतः इसे इलेक्ट्राॅन छिद्र कहते हैं। निकटवतीर् परमाणु से इलेक्ट्राॅन आकर इस अन्तराल को भरते हैं पफलतः मूल स्िथति में एक छिद्र उत्पन्न हो जाता है। विद्युत्् क्षेत्रा के प्रभाव में इलेक्ट्राॅन इस छिद्र से होते हुए ध्न आवेश्िात प्लेट की ओर जाते हैं इसके कारण छिद्र इलेक्ट्राॅनों के गमन की विपरीत दिशा चित्रा 1ण्2: अध्र्चालकमें गमन करते हुए प्रतीत होते हैं। 62ण् ड2छ3 63ण् एन.सी.इर्.आर.टी. की कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक का पृष्ठ 3 देखें। प्टण् सुमेलन प्ररूप प्रश्न 64ण् ;पद्ध → ;बद्ध;पपद्ध → ;ंद्ध;पपपद्ध → ;कद्ध;पअद्ध → ;इद्ध 65ण् ;पद्ध → ;इद्ध, ;बद्ध;पपद्ध → ;बद्ध, ;कद्ध;पपपद्ध → ;बद्ध, ;मद्ध;पअद्ध → ;ंद्ध, ;कद्ध 66ण् ;पद्ध → ;बद्ध;पपद्ध → ;ंद्ध;पपपद्ध → ;इद्ध 67ण् ;पद्ध → ;कद्ध;पपद्ध → ;बद्ध;पपपद्ध → ;इद्ध;पअद्ध → ;ंद्ध 68ण् ;पद्ध → ;बद्ध;पपद्ध → ;ंद्ध;पपपद्ध → ;कद्ध;पअद्ध → ;इद्ध टण् अभ्िाकथन एवं तवर्फ प्ररूप प्रश्न 69ण् ;पद्ध 70ण् ;पपद्ध 71ण् ;पपपद्ध 72ण् ;पपद्ध 73ण् ;पपपद्ध टप्ण् दीघर् उत्तर प्रश्न 74ण् ख्संकेत - संरचना दशार्इए एवं व्याख्या कीजिए।, 75ण् ख्संकेत - संरचना दशार्इए एवं व्याख्या कीजिए।, 76ण् एन.सी.इर्.आर.टी. की कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक का पृष्ठ 26 देखें। 77ण् माना नमूने का सूत्रा ;थ्म2़द्ध;थ्म3़द्धल व् है।।गयौगिक के सूत्रा के अनुसार ग़ लत्र 0ण्93 ण्ण्ण् ;1द्ध पेफरस तथा पेफरिक आयनों का वुफल आवेश, आॅक्सीजन के दो )ण आवेशों से संतुलित होना चाहिए। अतः 2ग़ 3लत्र 2 ण्ण्ण् ;2द्ध 3⇒ ग़ लत्र 1 ण्ण्ण् ;3द्ध2 समीकरण ;3द्ध में से समीकरण ;1द्ध को घटाने पर 3 ललत्र− ण्− 1093 2 1⇒ लत्र 007 ण् 2 ⇒ लत्र 0ण्14 समीकरण ;1द्ध में लका मान रखने पर, हम पाते हैं, ग़ 0ण्14 त्र 0ण्93 ⇒ गत्र 0ण्93 दृ 0ण्14 गत्र 0ण्79 ण्079 081 नमूने में उपस्िथत थ्म2़ आयनों का अंश त्र 093 त्र ण् ण् नमूने में धतु न्यूनता दोष है क्योंकि इसमें आयरन की मात्रा स्टाॅइकियोमितीय संघटन के लिए आवश्यक मात्रा से कम है।

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