अध्िगम उद्देश्य इस अध्याय के अध्ययन के पश्चात् आप - ऽ वित्त बाशार के अथर् की व्याख्या कर सवेंफगेऋ ऽ ध्न या मुद्रा बाशार के अथर् की व्याख्या तथा उसके उपकरणों ;साध्योंद्ध का वणर्न कर सवेंफगेऋ ऽ पूँजी बाशार की प्रकृति एवं प्रकारों की व्याख्या कर सवेंफगेऋ ऽ मुद्रा/ध्न बाशार एवं पूँजी बाशार के बीच अंतर स्पष्ट कर सवेंफगेऋ ऽ स्टाॅक एक्सचंेज/शेयर बाशार का तात्पयर् एवं कायो± की व्याख्या कर सवेंफगेऋ ऽ एन. एस. इर्. आइर्. तथा ओ. टी. सी. इर्. आइर्के कायो± की व्याख्या कर सवेंफगेऋ ऽ निवेशक की संरक्षा में सेबी ;ैम्ठप्द्ध की भूमिका का वणर्न कर सवेंफगे। वित्तीय बाशार आइडिया सेल्युलर बाशार संवेग से लाभ उठाने को तत्पर अपने उपभोक्ताओं की विस्पफोटक वृि के आधार के साथ सभी दूर संचार वंफपनियाँ अपनी नििायों के वध्र्न हेतु पूँजी बाशार की ओर देख रही हंै ताकि अपनी विस्तार योजनाओं को ऊजार् प्रदान करें। देश के भीतर पाँचवीं विशाल संचालक वंफपनी आइडिया सेल्युलर जो कि आदित्य बिरला समूह का ध्वज - वाहक अथार्त् अग्रणी दूरसंचार उद्यम है, ने तय किया है कि वह पूँजी बाशार में उतरे और 1,700 से 2,000 करोड़ रुपए के बीच पूँजी उगाहे। इस वंफपनी ने अपने प्रस्तावित इनीश्िायल पब्िलक आॅपफर ;आरंभ्िाक सावर्जनिक प्रस्तावद्ध ;प्च्व्द्ध के लिए जे. एम. मोगर्न स्टैनले, मेरिललिंच के साथ अन्य ऐसी ही खाता दलाल ;बुक रनसर्द्ध पफमर् को नियुक्त किया है, जिसे जनवरी के अंत तक निगर्मन हेतु तैयार होने की अपेक्षा है। भारत के शेयर बाशार नियामक ;सेबी - ैम्ठप्द्ध नियमों के अनुसार, चूँकि न्यूनतम फ्रलोट ;चलपूँजीद्ध आकार 10 प्रतिशत का हो। अतः वंफपनी 10 से 12 प्रतिशत का फ्रलोट उतारेगी फ्प्रवतकों ;प्रोमोटरोंद्ध द्वारा किया गया पिछला निजी नियोजन बाशार से पूँजी के परिण्िात के रूप में 15,000 करोड़ रु. का थाय् यह प्रस्तावित चल निजी प्रवतर्क मूल्य के 10 से 20 प्रतिशत प्रीमियम ;बढ़ोतरीद्ध के साथ आने की उम्मीद है। आदित्य बिरला समूह ने हाल ही में एक वंफपनी में 35 प्रतिशत साझेदारी के अिाकार प्राप्त कर एक निजी इक्िवटी पफमर् को पकड़ा है। हालाँकि शेयरों का यह नवीनतम निगर्मन है जहाँ प्राप्ितयों को पूँजी व्यय हेतु आइडिया सेल्युलर द्वारा उपयोग किया जाएगा। प्रस्तावित निगमर्न के बाद प्रवतकों की साझेदारी लगभग 58 प्रतिशत तक आ जाएगी। ड्डोत - ूूूण् ीपदकनेजंदजपउमेण्बवउ विषय प्रवेश आप सभी जानते हैं कि एक व्यवसाय के लिए वित्त की तब आवश्यकता होती है जब एक उद्यमी उसे प्रारंभ करने का निणर्य लेता है। उसे दोनों प्रकार के वित्त की आवश्यकता होती है, चालू पूँजी के द्वारा वह कच्चे माल एवं कमर्चारियों के वेतन आदि का भुगतान जैसे कायर् करता है जबकि स्िथत पूँजी से मशीनरी व संयंत्रा अथवा भवन खरीदता है या पिफर वंफपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसा काम करती है उपयुर्क्त उदाहरण एक स्पष्ट तस्वीर पेश करता है कि वैफसे एक वंफपनी को पूँजी बाशार से निध्ि उगाहने की आवश्यकता पड़ती है। आइडिया सेल्युलर ने भी अपनी विस्तार आवश्यकता के लिए भारतीय पूँजी बाशार में प्रवेश करने का निणर्य लिया है। इस अध्याय में आप ‘निजी नियोजन’ आरंभ्िाक सावर्जनिक प्रस्ताव ;प्च्व्द्ध तथा पूँजी बाशार की अवधरणाओं के बारे में पढ़ेंगे जो कि आइडिया सेल्युलर के उदाहरण में आप पढ़ चुके हैं। एक व्यवसाय ऐसी निध्ियों को विभ्िान्न ड्डोतों एवं विभ्िान्न तरीकों से वित्तीय बाशार के माध्यम से पैदा कर सकता है। यह अध्याय उस प्रक्रम के बारे में संक्ष्िाप्त वणर्न प्रदान करता है जिसके माध्यम से एक व्यावसायिक संगठन द्वारा अल्पकालिक एवं दीघर्कालिक दोनों ही प्रकार की आवश्यकताओं के लिए वित्त संचालित करता है। इसके साथ ही इसमें औद्योगिक संरचना ;ढाँचाद्ध तथा विभ्िान्न वित्तीय बाशारों के नियामक मापदंडों की व्याख्या की गइर्। वित्तीय बाशार की संकल्पना ;अवधरणाद्ध एक व्यवसाय एक अथर्व्यवस्था का एक हिस्सा होता है, जिसमें दो मुख्य क्षेत्रा समाहित होते हैं घरेलू जो कि निध्ियों को बचाता है और व्यावसायिक पफमे± जो इन निध्ियों को निवेश्िात करती हंै। एक वित्तीय बाशार इन दोनों के बीच निध्ियों को संचालित करने के द्वारा बचतकतार् तथा निवेशक को जोड़ने में मदद करता है। ऐसा करते हुए यह जो निस्पादन करता है उसे एक विनियोजित व्यवसाय या कायर् कहते हैं। यह निवेशकों के लिए उपलब्ध् निध्ियों को उनके सवार्ध्िक उत्पादक निवेश अवसर में विनियोजित या प्रवतिर्त करता है। जब यह विनियोजन कायर् सवोर्त्तम निस्पादित होता है तो दो परिणाम आते हैं - ऽ घरों ;हाउसहोल्डद्ध को प्रस्तावित वापसी दर उच्च होती है ऽ उन पफमो± के लिए दुलर्भ संसाध्नों का विनियोग किया जाता है जो अथर्व्यवस्था ;इकोनाॅमीद्ध के लिए उच्च उत्पादकता करते हैं। यहाँ पर दो प्रमुख वैकल्िपक प्रक्रम हैं जिनके माध्यम से निध्ि का विनियोजन बैंक के द्वारा या वित्तीय बाशार के द्वारा किया जा सकता है। घराने ;हाउसहोल्डद्ध अपनी अध्िशेष निध्ियों को जमा करा सकते हैं जो बदले में इन निध्ियों को )ण के रूप में व्यावसायिक पफमर् को दे सकते हैं। दूसरे रूप में, वित्तीय बाशार का उपयोग करने वाले एक व्यवसाय द्वारा प्रस्तावित शेयर एवं )ण पत्रा डिबेंचसर् खरीद सकते हैं। जिस प्रिया द्वारा निध्ियों का वित्तीय बाशार वित्तीय व्यवस्था या प्रणाली में मध्यस्थकों ;मिडियेटरद्ध से प्रतिस्पधार् कर रहे हैं और वे घर ;हाउसहोल्डद्ध को एक चुनाव देते हैं कि वे अपनी बचत कहाँ लगाना चाहते हैं। वित्तीय बाशार वित्तीय परिसंपिायों के विनिमय एवं सजर्न के लिए एक बाशार है। वित्तीय बाशार वहीं अस्ितत्व में आता है जहाँ एक वित्तीय लेन - देन स्थान लेता है। ये वित्तीय लेन - देन वित्तीय परिसंपिा की रचना के स्वरूप में हो सकते हंै, जैसे कि एक पफमर् द्वारा शेयर या डिबेंचसर् ;)ण पत्रोंद्ध के आरंभ्िाक निगर्मन अथवा विद्यमान वित्तीय परिसंपिायों, जैसे कि इक्िवटी शेयरों, )ण - पत्रों वित्तीय बाशार के प्रकायर् वित्तीय बाशार एक अथर्व्यवस्था ;इकोनाॅमीद्ध में दुलर्भ संसाध्नों के विनियोजन में महत्त्वपूणर् भूमिका निभाते हैं जिसके लिए वे निम्नलिख्िात चार महत्त्वपूणर् प्रकायर् निस्पादित करते हैं। 1. बचतों को गतिशील बनाना तथा उन्हें अिाकािाक उत्पादक उपयोग में सरण्िात करना - वित्त बाशार बचतकतार् से बचतों को निवेशकों तक अंतरित करने को सुसाध्य ;सुविधपूणर्द्ध बनाते हैं। यह बचतकतार्ओं को विभ्िान्न निवेशकों का चुनाव ;विकल्पद्ध देते हैं और इस प्रकार से अध्िशेष नििायों को सवार्ध्िक उत्पादक उपयोग में सरण्िात करने में मदद करते हैं। 2. मूल्य खोज को सुसाध्य बनाना - जैसा कि आप सभी जानते हैं कि माँग एवं आपूतिर् की ताकतें बाशार में किसी सामान या सेवा की एक कीमत स्थापित करने में मदद करती हैं। वित्त बाशार में भी घरों की ;हाउसहोल्डद्ध निध्ियों के आपूतिर्कतार् तथा व्यावसायिक पफमे± माँग का प्रतिनिध्ित्व करती हैं। इन दोनों के बीच परस्पर िया उस वित्तीय परिसंपिा की कीमत या मूल्य तय करने में मदद करती है जिसका उस विश्िाष्ट बाशार में व्यापार किया जाना है। 3. वित्तीय परिसंपिायों हेतु द्रवता उपलब्ध् कराना - वित्तीय बाशार एक वित्तीय परिसंपिा को आसानी से बेचने व खरीदने को सुकर बनाता है। ऐसा करते हुए वे वित्तीय परिसंपिायों को द्रवता प्रदान करते हैं ताकि उन्हें आवश्यकतानुसार आसानी से रोकड़ ;नकदद्ध में परिवतिर्त किया जा सके। परिसंपिायों के धरक वित्तीय बाशार के प्रक्रम के माध्यम से अपनी वित्तीय परिसपंिा को हाथों - हाथ ;त्वरितद्ध आसानी से बेच सवेंफ। 4. लेन - देन की लागत को घटाना - वित्तीय बाशार में व्यापार की जाने वाली प्रतिभूतियों के बारे में बहुमूल्य सूचनाएँ उपलब्ध् कराते हैं। यह एक वित्तीय परिसंपिा के क्रय एवं विक्रय में खरीदने तथा बेचने वाले दोनों ही के समय, प्रयासों एवं ध्न को बचाता है, अन्यथा उन्हें प्रयास करने व खोजने पर खचार् करना पड़ता। इस प्रकार से वित्तीय बाशार वह साझा या सामान्य मंच है जहाँ व्रेफयता एवं विक्रेता अपनी वैयक्ितक आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। वित्तीय बाशारों का वगीर्करण, उनमें, व्यापार किए जाने वाले वित्तीय प्रपत्रों की परिपक्वता के आधर पर किया जाता है। एक वषर् से कम परिपक्वता वाले प्रपत्रों का मुद्रा बाशार में व्यापार किया जाता है और एक वषर् से अध्िक परिपक्वता वाले प्रपत्रों का व्यापार पूँजी बाशार में किया जाता है। वित्तीय बाशार का वगीर्करण वित्तीय बाशार द्रव्य/मुद्रा बाशार पूँजी बाशार प्राथमिक बाशार द्वितीयक बाशार इक्िवटी )ण )ण इक्िवटी द्रव्य या मुद्रा बाशार द्रव्य या मुद्रा बाशार एक छोटी अवध्ि की निध्ियों का बाशार है जो ऐसे द्रव्य संपिायों का निपटान करता है जिनकी परिपक्वता अवध्ि एक वषर् तक की होती है। ये परिसंपिायाँ द्रव्य के लिए निकट विकल्प होती हैं। यह ऐसा बाशार है जहाँ कम जोख्िाम, आरक्ष्िात तथा लघुकालिक )ण प्रपत्रा होते हैं जो कि उच्च तरल दैनिक निगर्मित तथा सिय तिशारती ;व्यापार योग्यद्ध होते हैं। इनकी कोइर् भौतिक स्थानिकता नहीं होती है परंतु यह ऐसी ियाविध्ि है जो टेलीपफोन ;दूरभाषद्ध व इंटरनेट के माध्यम से संपादित की जाती है। यह अस्थायी रोकड़ की कमी एवं देनदारियों के निपटाने की जरूरतों को पूरा करने हेतु अल्पकालिक निध्ि उगाहने में सक्षम होते हैं तथा आय वापसी के लिए अध्िक या बेशी निध्ियों के अस्थाइर् पैफलाव के लिए उपयुक्त होते हैं। बाशार के प्रमुख प्रतिभागी भारतीय रिजवर् बैंक, कमश्िार्यल बैंक, गैर बैविंफग वित्त वंफपनियाँ, राज्य सरकारें, वृहद औद्योगिक घराने तथा म्युचुअल पंफड आदि हैं। मुद्रा बाशार के अंग/तत्व 1. द्रव्य बाशार प्रपत्रा ;इंस्ट्रूमेंटद्ध - ट्रेजरी ;राजकोषद्ध बिल मूलतः एक वषर् से कम अवध्ि में परिपक्व होने वाले भारत सरकार के द्वारा )णदान के रूप में दिया जाने वाला एक लघुकालिक प्रपत्रा होता है। इन्हें शून्य वूफपन बंध्पत्रा के नाम से भी जाना जाता है जिन्हें वेंफद्रीय सरकार के पक्ष में भारतीय रिजवर् बैंक द्वारा निध्ि की लघुकालिक जरूरतों के लिए जारी किया जाता है। ये राजकोष बिल एक वचनपत्रा के स्वरूप में जारी किया जाता है। ये उच्च तरल तथा सुनिश्िचत वापसी या लब्िध् प्राप्ित युक्त तथा अदायगी के वित्तीय बाशार जोख्िाम से नगण्य हंै। इन्हें ऐसे मूल्य पर जारी किया जाता है, जो अपने अंकित मूल्य से कम के होते हैं और इनका भुगतान उसके बराबर तक किया जाता है। जिस मूल्य पर राजकोष बिल जारी हुआ है तथा उस पर प्राप्य ब्याज के साथ उसका मोचन मूल्य के बीच अंतर होता है जिसे बटाð ;डिस्काउंटद्ध कहते हैं। राजकोष बिल 25,000 रु. के न्यूनतम मूल्य और इसके बाद बहु गुणन में प्राप्त होते हैं। उदाहरण - मान लीजिए एक निवेशक 91 दिनों के लिए 1,00,000 रु. अंकित मूल्य के राजकोष बिल 96,000 रु. में खरीदता है। परिपक्वता तिथ्िा तक अपने पास रखने के बाद निवेशक बिल के बदले 1,00,000 रु. प्राप्त करता है। यहाँ भुगतान की गइर् राश्िा तथा परिपक्वता के बाद प्राप्त की गइर् राश्िा के बीच 4000 रु. का अंतर है। यह राश्िा बिल की खरीद पर निवेशक को ब्याज के रूप में प्राप्ित का प्रतिनिध्ित्व करती है। 2. वाण्िाज्ियक ;या तिजारतीद्ध पत्रा - वाण्िाज्ियक पत्रा एक अल्पकालिक, आरक्ष्िात वचन पत्रा होता है जो बेचान के द्वारा अंतरणीय एवं परक्राम्य ;बेचनीयद्ध है तथा परिपक्व अवध्ि के बाद एक सुनिश्िचत ;स्िथरद्ध अंतरण या सुपुदर्गी होती है। यह विशाल एवं उधर पात्राता वंफपनियों द्वारा अल्पकालिक बाशार दर से कम दर पर निध्ि उगाहने के लिए जारी करती हैं। इनकी परिपक्वता अवध्ि प्रायः 15 दिन से लेकर एक वषर् तक होती है। बड़ी वंफपनियों के लिए वाण्िाज्ियक पत्रों का प्रचालन बैंक से उधर लेने की अपेक्षा एक विकल्प है जिन्हें सामान्यतः वित्तीय रूप से सुदृढ़ माना जाता है। इसे बट्टðे के साथ बेचा एवं सममूल्य पर मोचित किया जाता है। वाण्िाज्ियक पत्रों का वास्तविक उद्देश्य अल्पकालिक मौसमी एवं कायर् पूँजी की जरूरतों हेतु निध्ि उपलब्ध् कराना था। उदाहरण के लिए वंफपनियाँ इस प्रपत्रा को सेतु वित्तीयता ;बि्रजोपफाइनेंसद्ध जैसे उद्देश्य के लिए उपयोग करती हंै। उदाहरण - मान लीजिए एक निध्ि वंफपनी को मशीन खरीदने के लिए दीघर्कालिक वित्त की आवश्यकता है। पूँजी बाशार से दीघर्कालिक निध्ि उगाहने के क्रम में वंफपनी को फ्रलोटेशन कास्ट ;चल पूँजीद्ध उठानी पड़ेगी। ;इस लागत में एक चल पूँजी के निगमर्न जैसे ब्रोकरेज ;दलालीद्ध कमीशन, आवेदन पत्रों की छपाइर् तथा विज्ञापन आदि के खचर् आते हैंद्ध। वाण्िाज्ियक पत्रों के माध्यम से अस्थायी पूँजी उगाह करके फ्रलोटेशन की लागत जुटाइर् जाती है। इसे सेतु वित्तीयता ;बि्रजपफाइनेंसद्ध कहते हैं। 3. शीघ्रावध्ि द्रव्य - शीघ्रावध्ि द्रव्य एक लघुकालिक माँग पर पुनर्भुगतान वित्त है जिसकी परिपक्वता अवध्ि एक दिन से 15 दिन तक की होती है तथा अंतर बैंक अंतरण के लिए उपयोग किया जाता है। वाण्िाज्ियक बैंकों को एक न्यूनतम रोकड़ शेष अनुरक्ष्िात करना होता है जिसे रोकड़/नकदी आरक्षण या नकदी रिजवर् अनुपात कहा जाता है। भारतीय रिजवर् बैंक समय - समय पर नकदी रिजवर् अनुपात परिवतिर्त करता रहता है जो बदले में वाण्िाज्ियक बैंकों द्वारा दिए गए )णों की उपलब्ध् निध्ियों को प्रभावित करता है। शीघ्रावध्ि द्रव्य वह उपाय है जिसके द्वारा एक दूसरे से नकदी उधर लेकर नकदी आरक्षण अनुपात अनुरक्ष्िात रखने में सक्षम होते हैं। शीघ्रावध्ि )ण पर चुकाया जाने वाले ब्याज को शीघ्रावध्ि दर के नाम से जानते हैं। यह दर बहुत ही चंचल ;अस्िथरद्ध होती है दिन प्रतिदिन और कभी - कभी घंटों के अनुसार बदलती है यहाँ पर शीघ्रावध्ि दर ;काल रेट्सद्ध और मुद्रा बाशार से अन्य अल्प कालिक प्रपत्रों जैसे कि बचत प्रमाणपत्रा तथा वाण्िाज्ियक पत्रा आदि के बीच बिल्वुफल विपरीत संबंध् होता है। शीघ्रावध्ि द्रव्य में वृि अन्य ड्डोतों से वित्त, जैसे कि वाण्िाज्ियक पत्रों या बचत प्रमाण पत्रों से जुटाते हैं। इन ड्डोतों की निध्ि बैंक द्वारा पैदा की गइर् निध्ियों की अपेक्षा सस्ती होती हैं। 4. बचत प्रमाण पत्रा - बचत प्रमाण पत्रा ;सी.डी.द्ध अरक्ष्िात, पारक्रम्य ;बेचनीयद्ध, धरक रूप में लघुकालिक प्रपत्रा आदि वाण्िाज्ियक बैंकों तथा विकास वित्त संस्थानों द्वारा जारी किए जाते हैं। यह वैयक्ितक रूप से उद्यमों/निगमों तथा वंफपनियों को उनकी कठिन स्टरलाइट इंडस्ट्रीज स्टरलाइट इंडस्ट्रीज लंदन में सूचीकृत वेदांता रिसोर्स ग्रुप का एक हिस्सा है तथा न्यूयावर्फ शेयर बाशार में लगभग 2 बिलियन पाउंड के प्रारंभ्िाक पब्िलक आॅपफरिंग ;सावर्जनिक प्रस्तावद्ध ;प्च्व्द्ध के माध्यम से सूचीब( किए जाने की अनुसूची में है। इससे उत्पन्न पूँजी उड़ीसा में ग्रीनपफील्ड विद्युत परियोजना के अंतगर्त 1.9 बिलियन निध्ि प्रयुक्त की जाएगी और इसे इसकी एल्यूमिनियम एवं तांबा सुसाध्यों के विस्तार में प्रयुक्त किया जाएगा। यह आइ.पी.ओ. स्टरलाइट द्वारा पारित संकल्प को समथर् करने का एक हिस्सा है जिसके लिए 12,500 करोड़ रु. अमरीकन डिपोजिटरी शेयर ;।क्ैद्ध के माध्यम से उगाहने हंै। परिणामस्वरूप वंफपनी ने अपनी अध्िकृत पूँजी 150 करोड़ रु. बढ़ाकर 185 करोड़ रु. कर दी जिसके लिए 2 रु. प्रति इक्िवटी शेयर से एक अतिरिक्त 17.5 करोड़ रुपए की पूँजी तैयार की। स्टरलाइट के शेयर न्यूयावर्फ शेयर बाशार ;छन्ैम्द्ध में सूचीब( होना है जो भारत से पहली धातु पफमर् होगी। जो घोषणा वाले दिन मुंबइर् शेयर बाशार में 1.4 प्रतिशत बढ़कर 545.2 रु. पर बंद हुआ और सूचकांक उछाल प्रदान किया। ड्डोत - दि इकोनाॅमिक टाइम्स द्र्रवता की अवध्ि के दौरान तब जारी किए जा सकते हैं जब बैंकों में बचत दर मंद हो, लेकिन कजर् के लिए माँग उच्च हो। यह लघु अवध्ि के लिए भारी मात्रा में द्रव्य संचारित करने में सहायक होते हैं। 5. वाण्िाज्ियक बिल - वाण्िाज्ियक बिल विनिमय का एक बिल है जो व्यावसायिक पफमो± की कायर् पूँजी की आवश्यकता के लिए वित्तीयन में प्रयुक्त होता है। यह एक लघुकालिक, पारक्रम्य ;बेचनीयद्ध स्वयं द्रवीकृत प्रपत्रा है जो एक पफमर् की उधर बिक्री को वित्तीयन करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। जब माल को साख ;उधरीद्ध पर बेचा जाता है तब खरीददार देनदार बन जाता है जिसे भविष्य में एक निश्िचत तिथ्िा पर भुगतान करना है। विव्रेफता उस विश्िाष्ट ;या निश्िचतद्ध तिथ्िा तक प्रतीक्षा कर सकता है या विनिमय के एक बिल का उपयोग करें। माल का विक्रेता ;आदेशक या आहरकद्ध बिल का आहरण करता है और खरीददार ;अदाकतार्/आदेश्िातीद्ध इसे स्वीकार करता है। स्वीकार किए जाने पर, यह बिल एक पण्य या विक्रेय ;मावेर्फटेबलद्ध प्रपत्रा बन जाता है और इसे व्यापारिक बिल कहा जाता है। यदि विव्रेफता को बिल के परिपक्व होने से पहले निध्ियों की जरूरत पड़ती है तो एक बैंक द्वारा ये बिल बटाð कटा ;डिस्काउंटेडद्ध कर लिए जा सकते हंै। जब एक व्यापारिक बिल बैंक द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है तो इसे एक वाण्िाज्ियक बिल के नाम से जाना जाता है। पूँजी बाशार यहाँ वैफपिटल मावेर्फट ;पूँजी बाशारद्ध शब्द सुसाध्यता और सांस्थानिक व्यवस्था या प्रबंध् को संदभ्िार्त करता है जिसके माध्यम से दीघर्कालिक निध्ि, वित्तीय बाशार )ण एवं इक्िवटी दोनों ही, उगाहे या वध्िर्त एवं निवेश्िात किए जा सकते हैं। इसके अंतगर्त सारण्िायों ;प्रणालीद्ध की एक शृंखला समाहित होती है जिसके माध्यम से एक समुदाय की बचतों को औद्योगिक एवं वाण्िाज्ियक उद्यमों तथा सामान्यतः राजकीय उपयोग के लिए उपलब्ध् कराया जाता है। यह इन बचतों को उनके सवार्ध्िक उत्पादक उपयोग में प्रवतिर्त कर देश के विकास एवं वृि की ओर जाता है। पूँजी बाशार के अंतगर्त विकास बैंक, वाण्िाज्ियक बैंक तथा स्टाॅक एक्सचेंज या शेयर बाशार समाहित होते हैं। एक आदशर् पूँजी बाशार वह है जहाँ उचित लागत ;मूल्यद्ध पर वित्त उपलब्ध् होता है। आथ्िार्क विकास की प्रिया एक बेहतर कायर्शील पूँजी बाशार की विद्यमानता या उपस्िथति के द्वारा सुसाध्य होती है। वास्तव मेंऋ एक वित्तीय प्रणाली के विकास को आथ्िार्क वृि के लिए एक अनिवचर्नीय स्िथति के रूप में देखा जाता है। इसलिए यह आवश्यक है कि वित्तीय संस्थाएँ पयार्प्त विकसित हों और यह भी कि बाशार की कायार्त्मकता मुक्त, निष्पक्ष, प्रतिस्पधीर् तथा पारदशीर् होनी चाहिए। इसके साथ ही पूँजी बाशार उन सूचनाओं को सम्मान देने में भी सक्षम होना चाहिए जो कि वह अंतरित करे, लेन - देन की लागत न्यूनतम हो तथा सवार्ध्िक उत्पादकतापूणर् ढंग से पूँजी विनियोग करें। पूँजी बाशार को दो भागों में बाँटा जा सकता है ;कद्ध प्राथमिक बाशार ;खद्ध द्वितीयक बाशार पूंजी बाशार एवं मुद्रा बाशार में अंतर इन दो बाशारों में प्रमुख अंतर इस प्रकार हैं: ;पद्ध भाग लेने वाले: पूंजी बाजार में भाग लेने वाले हैं वित्तीय संस्थान, बैंक, निगर्मित इकाइयां, विदेशी निवेशक एवं जनता में से साधारण पुफटकर विनियोजक। मुद्रा बाशार में अिाकांश भाग लेने वाले रिजवर् बैंक आॅपफ इंडिया, वित्तीय संस्थान एवं वित्त वंफपनियों जैसे संस्थान हैं। यद्यपि व्यक्ित भी निजी तौर पर द्वितीय बाशार से लेन - देन कर सकते हैं लेकिन सामान्यतः वह ऐसा करते नहीं हैं। ;पपद्ध प्रलेख: पूंजी बाशार में जिन प्रलेखों में लेन देन किया जाता है उनमें प्रमुख हैं: मुद्रा बाशार में जिन प्रपत्रों में व्यापार होता है उनमें प्रमुख हैं लघु अवध्ि के )ण प्रपत्रा जैसे - टी.बिल, व्यापार बिल वाण्िाज्ियक पेपर एवं जमा प्रमाण पत्रा। ;पपपद्ध निवेश राश्िा: पूंजी बाशार में प्रतिभूतियों में निवेश के लिए बहुत बड़ी मात्रा में वित्त का होना आवश्यक नहीं है। प्रतिभूति की इकाइयों का मूल्य साधारणतया कम ही होता है जैसे 10 रु. या पिफर 100 रु। इसी प्रकार से शेयरों के व्यापार के लिए न्यूनतम संख्या छोटी ही रखी जाती है जो 50 अथवा 100 हो सकती है। इससे नियोक्ता अपनी छोटी बचत से इन प्रतिभूतियों को खरीद सकते हैं। मुद्रा बाशार में सौदों के लिए बड़ी मात्रा में धन की आवश्यकता होती है। ;पअद्धअविा: पूंजी बाशार के दीघर् अविा एवं मध्य अविा की प्रतिभूतियों के सौदे होते हैं जैसे समता अंश एवं )ण पत्रा। मुद्रा बाशार में प्रपत्रा अिाकतम एक वषर् के लिए होते हैं। कभी - कभी तो यह एक दिन के लिए भी जारी किए जाते हैं। ;अद्धतरलता: पूंजी बाशार की प्रतिभूतियों कोू तरल निवेश माना जाता है क्योंकि इनका स्टाॅक एक्सचेंज में क्रय - विक्रय हो सकता है। यह अलग बात है कि कोइर् शेयर में व्यापार सिय रूप से नहीं हो रहा है अथार्त् उसका कोइर् व्रेफता नहीं है। मुद्रा बाशार प्रपत्रा अिाक तरल होते हैं क्योंकि इसके लिए औपचारिक व्यवस्था की हुइर् होती है। क्थ्भ्प् की स्थापना का उद्देश्य ही मुद्रा बाशार के प्रपत्रों के लिए तैयार बाशार प्रदान करना है। ;अपद्धसुरक्षा: पूंजी बाशार में प्रपत्रों के मूल्य की वापसी एवं उन पर प्रतिपफल दोनों का जोख्िाम है। निगर्म करने वाली वंफपनी हो सकता है कि घोष्िात योजना के अनुरूप कायर् न कर सके तथा प्रवतर्क निवेशकों के साथ धोखा कर सकते हैं। मुद्रा बाशार कहीं अिाक सुरक्ष्िात है इसमें गड़बड़ी की संभावना न्यूनतम है। इसका कारण निवेश की छोटी अविा तथा निगर्नकतार्ओं की सुदृढ़ वित्तीय स्िथति का होना है। ये निगर्मनकतार् हैं सरकार, बैंक एवं उच्च श्रेणी वंफपनियां होती हैं। ;अपपद्ध संभावित प्रतिपफल: पूंजी बाशार में विनियोजित राश्िा पर नियोजकों को मुद्रा बाशार की तुलना में अिाक ऊँची दर में प्रत्याय मिलता है। ये प्रतिभूतियां यदि लंबी अविा की होंगी तो इन पर आय की संभावना अिाक होती है। प्रथम तो समता अंशों पर पूंजीगत लाभ की संभावना होती है। दूसरे लंबी अविा में वंफपनी की समृि में उच्च लाभांश एवं बोनस निगर्म रूप से शेयरधारकों की भी भागीदारी होती है। प्राथमिक बाशार प्राथमिक बाशार को नए निगर्मन बाशार के रूप में भी जानते हैं। यह नइर् प्रतिभूतियों से निपटता है जो कि पहली बार निगर्मित ;या जारीद्ध होते हैं एक प्राथमिक बाशार का आवश्यक प्रकायर् बचत कतार्ओं से निवेश योग्य निध्ियों को नए उद्यम स्थापित करने की जरूरत वाले उद्यमियों तक या पिफर जो पहली बार प्रतिभूतियों को जारी करके अपने विद्यमान व्यवसाय का विस्तार करना चाहता है उस तक पहुँचाना है। इस बाशार के निवेशक बैंक, वित्तीय संस्थान, बीमा वंफपनियाँ, म्युचुअल पंफड तथा वैयक्ितक रूप में होते हंै। प्राथमिक बाशार से एक वंफपनी मुद्रा ध्न को इक्िवटी शेयरों, अध्िमान ;पि्रपेफरेंसद्ध शेयरों, )णपत्रों, )णों तथा बचतों के रूप में उगाह सकती है। इन उगाही गइर् निध्ियों को वंफपनी नइर् परियोजनाओं के लगाने, विस्तारण, वैविध्यीकरण, विद्यमान परियोजनाओं का नवीनीकरण, विलय तथा अध्िकार में लेने ;खरीदनेद्ध आदि के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं। अस्थायी पूँजी ;फ्रलोटेशनद्ध की विध्ियाँ प्राथमिक बाशार में अस्िथर पूँजी ;फ्रलोटेशनद्ध के नए निगर्मन की विध्ियाँ - 1. विवरण पत्रिाका के माध्यम से प्रस्ताव - विवरण पत्रिाका के माध्यम से प्रस्ताव प्राथमिक बाशार में सावर्जनिक वंफपनियों द्वारा निध्ि उगाहने की एक सवार्ध्िक लोकपि्रय विध्ि है। इसके अंतगर्त विवरण पत्रिाका जारी करने के माध्यम से जनता से अंशदान आमंत्रिात करते हैं। एक विवरण पत्रिाका पूँजी उगाहने के लिए निवेशकों से प्रत्यक्ष अपील करती है जिसके लिए अखबारों एवं पत्रिाकाओं के माध्यम से विज्ञापन जारी किए जाते हैं। यह निगर्मन हामीदारी ;जोख्िाम अवंफनद्ध और कम से कम एक शेयर बाशार में सूचीब( किए जाने की अपेक्षा रखने वाला हो सकता है। विवरण पत्रिाका की विषयवस्तु वंफपनी अिानियम तथा सेबी के प्रावधनों के अनुरूप होनी चाहिए तथा सेबी की प्रकटन एवं निवेश संरक्षा मागर्दश्िार्यों से युक्त होना चाहिए। 2. विक्रय के लिए प्रस्ताव - इस विध्ि के अंतगर्त प्रतिभूतियों को सीध्े जनता से नहीं निगर्मित किया जाता है, बल्िक निगर्मन/जारीकतार् गृहों या स्टाॅक दलाल ;ब्रोकसर्द्ध जैसे माध्यकों के द्वारा बिक्री के लिए प्रस्तावित किए जाते हैं। इस मामले में प्रभूतियों को एक वंफपनी उन ब्रोकसर् को सहमति मूल्य पर खंडों में बेचती है जो आगे इन्हें निवेशक जनता में पुनः विक्रय कर सके। वित्तीय बाशार 295 3. निजी नियोजन या विनियोग - निजी विनियोग भी एक वंफपनी द्वारा संस्थागत निवेशकों तथा वुफछ चयनित वैयक्ितक निवेशकों को प्रतिभूतियों का आवंटन है। यह एक सावर्जनिक निगर्मन की अपेक्षा अिाक तीव्रता से पूँजी उगाहने में मदद करता है। प्राथमिक बाशार में पहुँच कइर् बार अनेक आवश्यक और अनावश्यक खचो± के खातों ;लेखाद्ध पर महँगा हो सकता है। इसलिए वुफछ वंफपनियाँ एक सावर्जनिक निगर्मन वहन नहीं कर सकती, पफलतः वे निजी विनियोग का इस्तेमाल करती हैं। 4. अध्िकार निगर्म - यह एक विशेषाध्िकार है जो विद्यमान शेयर धरकों को वंफपनी शतो± एवं नियमों के अनुसार नए निगर्मों को पूवर् क्रय करने का अवसर देता है। शेयर धरकों को पहले से कब्जे वाले शेयरों के अनुपात में नए शेयरों को खरीदने का अध्िकार प्रस्तावित किया जाता है। 5. इलेक्ट्राॅनिक आरंभ्िाक सावर्जनिक निगर्म ;इर् - आइर्.पी.ओज.द्ध - एक वंफपनी जब शेयर बाशार की आॅन लाइन प्रणाली ;सिस्टमद्ध के माध्यम से सावर्जनिक पूँजी निगर्म प्रस्तावित करती है तो उसे शेयर बाशार के साथ एक अनुबंध् में प्रविष्ट होना पड़ता है। यहाँ पर वंफपनी के द्वारा सेबी ;ैम्ठप्द्ध में पंजीकृत दलालों ;ब्रोकसर्द्ध को आवेदन स्वीकारने तथा आदेश नियोजन हेतु नियुक्त करना पड़ता है। निगर्मन हेतु निगर्मक वंफपनी को एक रजिस्ट्रार ;पंजीयकद्ध को नियुक्त करना चाहिए जो एक्सचेंज के साथ इलेक्ट्राॅनिक संयोजकता ;संब(ताद्ध रखता हो। निगर्मक ;जारीकतार्द्ध वंफपनी किसी भी एक्सचेंज में प्रतिभूतियों के सूचीब(ता हेतु आवेदन कर सकती है जो कि उस एक्सचेंज से भ्िान्न हो सकता है जिसके माध्यम से उसने अपनी प्रतिभूतियाँ प्रस्तावित की हैं। प्रमुख प्रबंध्क उन सभी माध्यकों ;मध्यस्थोंद्ध के साथ समन्वय रखता है जो इस निगर्म से जुड़े होते हैं। द्वितीयक बाशार द्वितीयक बाशार को स्टाॅक एक्सचेंज या स्टाॅक बाशार ;या शेयर बाशारद्ध के नाम से भी जाना जाता है। यह विद्यमान प्रतिभूतियों के लिए क्रय एवं विक्रय का बाशार है। यह विद्यमान निवेशकों को विनिवेश तथा नए निवेशकों का प्रवेश करने में सहायता प्रदान करता है। इसके साथ ही यह वतर्मान प्रतिभूतियों को द्रवता एवं विव्रेफयता उपलब्ध् कराता है। इसके साथ ही यह निध्ियों का अध्िक उत्पादक निवेशों में विनिवेश एवं पुननिर्वेश के माध्यम से निध्ियों को सरण्िात करके आथ्िार्क प्रगति में हाथ बँटाता है। प्रतिभूतियों को सेबी ;ैम्ठप्द्ध द्वारा प्रदिष्ट नियामक ढाँचे के अंतगर्त खरीद - पफरोख्त, चुकाइर् या निकासित एवं निपटाया जाता है। सूचना तकनीक की प्रगति ने शेयर बाशार स्टाॅक एक्सचेंज के माध्यम से ट्रेडिंग टमिर्नलों के द्वारा देश भर में कहीं भी व्यापार के लिए पहुँच को आसान बना दिया है। देश में प्राथमिक बाशार की वृि के साथ - साथ, पिछले दस वषो± के दौरान द्वितीयक बाशार भी महत्त्वपूणर् रूप से आगे बढ़ा है। आप इस अध्याय में आगे स्टाॅक एक्सचेंज ;शेयर बाशारद्ध के बारे में और अिाक विस्तार से पढ़ेंगे। स्टाॅक एक्सचेंज या शेयर बाशार स्टाॅक एक्सेचेंज एक संस्थान है जो विद्यमान प्रतिभूतियों के क्रय एवं विक्रय के लिए एक मंच प्रदान करता है। एक बाशार के रूप में, शेयर बाशार एक प्रतिभूति ;शेयर, )ण पत्रा आदिद्ध को द्रव्य में विनिमय की या विपरीत विनि मय को सुसाध्य बनाता है। स्टाॅक एक्सचेंज अथार्त् शेयर बाशार वंफपनियों को वित्त उगाहने, द्रवता उपलब्ध् कराने तथा निवेशकों के निवेश को संरक्षा प्रदान करता है तथा वैयक्ितक वंफपनियों की )ण ;साखद्ध योग्यता बढ़ाता है। प्राथमिक एवं द्वितीयक बाशार - एक तुलना प्राथमिक बाशार ;नए निगर्मों का बाशारद्ध द्वितीयक बाशार ;स्टाॅक एक्सचेंजद्ध ऽ इसमें नयी वंफपनियों द्वारा प्रतिभूतियों का विक्रय होता ऽ इसमें केवल निवतर्मान शेयरों का ही व्यापार होता है। है अथवा निवर्तमान वंफपनियों द्वारा निवेशकों को नइर् प्रतिभूतियों का निगर्मन। ऽ इसमें प्रतिभूतियों को वंफपनी सीधे नियोजक को बेचती ऽ निवतर्मान प्रतिभूतियों का निवेशकों के बीच विनिमय है ;अथवा किसी मध्यस्थ के द्वाराद्ध। होता है। इसमें वंफपनी की कोइर् भूमिका नहीं होती। ऽ इसमें कोष बचतकतार्ओं से निवेशकों को जाता है। ऽ यह शेयरों की रोकड़ में परिवतर्नीयता ;तरलताद्ध को अथार्त प्राथमिक बाशार प्रत्यक्ष रूप से पूंजी निमार्ण बढ़ाती है। अथार्त् द्वितीय बाशार परोक्ष रूप से पूंजी को बढ़ावा देता है। निमार्ण को बढ़ावा देता है। ऽ प्राथमिक बाशार में प्रतिभूतियों का केवल क्रय होता ऽ स्टाॅक एक्सचेंज में प्रतिभूतियों का क्रय एवं विक्रय दोनों है इनको बेचा नहीं जा सकता। होता है। ऽ इसमें मूल्य का निधर्रण एवं उसके संबंध् में निणर्य ऽ इसमें मूल्यों का निधर्रण प्रतिभूति की मांग एवं पूतिर् के वंफपनी का प्रबंध लेता है। द्वारा होता है। ऽ कोइर् स्थायी भौगोलिक स्थान निश्िचत नहीं है। ऽ स्थान निश्िचत होता है। भारत में शेयर बाशार का इतिहास भारत में शेयर बाशार का इतिहास बहुत पहले अठारहवीं शताब्दी के अंत में जाता है, जब पहली बार दीघर्कालिक बेचनीय प्रतिभूतियों को जारी किया गया था। वषर् 1850 में पहली बार वंफपनी अध्िनियम लाया गया जिसके अंतगर्त सीमित देनदारियों तथा निगमित प्रतिभूतियों में निवेशकों की रुचि पैदा करने जैसी विश्िाष्टताएँ उसके साथ थी। भारत में पहला स्टाॅक एक्सचेंज ;शेयर बाशारद्ध 1875 में बंबइर् ;मुंबइर्द्ध नेटिव शेयर एवं स्टाॅक ब्रोकसर् एसोसिएशन के रूप में स्थापित किया गया था। आज इसे बाम्बे स्टाॅक एक्सचेंज ;मंुबइर् शेयर बाशारद्ध ;ठैम्द्ध के नाम से जाना जाता है। इस का अनुगमन करते हुए अहमदाबाद ;1894द्ध, कलकत्ता ;1908द्ध तथा मद्रास ;1937द्ध एक्सचेंजों का विकास हुआ। यह ध्यान देने योग्य रोचक बात है कि शेयर बाशारों की स्थापना प्रमुख व्यापार एवं वाण्िाज्य वेंफद्रों पर हुइर्।1990 दशक के प्रारंभ तक भारतीय द्वितीयक बाशार क्षेत्राीय स्थानीय शेयर बाशार तक ही सीमित थे और बी.एस.इर्. इस सूची में अग्रणी था। वषर् 1991 के सुधरों के पश्चात् भारतीय द्वितीयक बाशार ने तीन स्तरीय स्वरूप प्राप्त किया। इसमें शामिल था। ऽ क्षेत्राीय शेयर बाशारए ऽ राष्ट्रीय शेयर बाशारए ऽ ओवर द काउंटर एक्सचेंज आॅपफ इंडिया ;व्ज्ब्म्प्द्ध मुंबइर् स्टाॅक एक्सचेंज शेयर बाशार ;स्टाॅक एक्सचेंजद्ध का तात्पयर् प्रतिभूति संपवर्फ ;नियामकद्ध अध्िनियम 1956 के अनुसार शेयर बाशार का तात्पयर् व्यवसाय में प्रतिभूतियों की खरीद - पफरोख्त या निपटान हेतु सहायता, नियमन एवं नियंत्राण उद्देश्य के लिए, एक ऐसे वैयक्ितक निकाय का गठन किया जाना है, पिफर चाहे वह निगमित ;इनकापोर्रेटेडद्ध हो अथवा नहीं। वित्तीय बाशार एक शेयर बाशार के ियाकलाप एक शेयर बाशार की सक्षम ियाशीलता नए निगर्मों के लिए एक सिय एवं वृि कारक प्राथमिक बाशार के लिए एक प्रेरक वातावरण पैदा करता है। विद्यमान प्रतिभूतियों में एक सिय एवं स्वस्थ द्वितीयक बाशार निवेशकों के बीच एक सकारात्मक पयार्वरण को नेतृत्व देता है। एक शेयर बाशार के वुफछ महत्त्वपूणर् ियाकलाप निम्नलिख्िात हैं - 1. विद्यमान प्रतिभूतियों को द्रवता एवं विनियोग उपलब्ध् कराना - एक शेयर बाशार की आधरभूत ियाशीलता एक सातव्य बाशार तैयार करना है जहाँ प्रतिभूतियाँ लाइर् और बेची जा सवेंफ। यह निवेशकों का विनिवेश एवं पुननिर्वेश के अवसर देता है। यह बाशार में पहले से ही विद्यमान प्रतिभूतियों को द्रवता एवं आसान विनियोग या नियोजन दोनों ही उपलब्ध् कराता है। 2. प्रतिभूतियों का मूल्यन/भाव - एक शेयर बाशार में शेयर का मूल्य ;या भावद्ध माँग एवं आपूतिर् की ताकतों के द्वारा निधर्रित होता है। एक शेयर बाशार सतत् मूल्यन या मूल्य निधर्रण का एक प्रक्रम है जिसके माध्यम से प्रतिभूतियों के मूल्य निधर्रित होते हैं। इस प्रकार का मूल्यन व्रेफता एवं विव्रेफता दोनों को ही पफटापफट महत्त्वपूणर् सूचनाएँ उपलब्ध् कराता है। 3. लेन - देन की सुरक्षा - एक शेयर बाशार की सदस्यता बेहतर ढंग से नियंत्रिात होती है और इसके कायर् - व्यापार ;डीलिंगद्ध को विद्यमान कानूनी ढाँचे के अनुसार सुस्पष्टीकृत किया गया है। यह सुनिश्िचत कराता है कि निवेशक जनता बाशार में एक सुरक्ष्िात एवं निष्पक्ष लेन - देन ;निपटानद्ध पाती है। 4. आथ्िार्क प्रगति हेतु भागीदारी - एक शेयर बाशार ऐसा बाशार है, जहाँ विद्यमान प्रतिभूतियों को पुनः बेचा या खरीद - पफरोख्त की जाती है। हालाँकि विनिवेशन एवं पुननिर्वेशन की इस प्रिया में बचतों को सवार्ध्िक उत्पादक निवेश पथों में सरण्िात किया जाता है। यही पूँजी गठन एवं आथ्िार्क वृि की ओर अगुवाइर् करता है। 5. इक्िवटी संप्रदाय का प्रसार - शेयर बाशार नए निगर्मों को विनियमित करके, बेहतर व्यापार व्यवहारों ;आचरणोंद्ध तथा जनता को निवेश के बारे में श्िाक्ष्िात करने हेतु उत्तम प्रभावी चरण उठाने के द्वारा विस्तृत शेयर स्वामित्व को सुनिश्िचत करने में एक महत्त्वपूणर् भूमिका निभा सकता है। 6. सट्टðेबाजी के लिए अवसर उपलब्ध् कराना - शेयर बाशार कानूनी प्रावधन के अंतगर्त प्रतिबंिात एवं नियंत्रिात तरीके से सट्टðा संबंध्ी ियाकलापों के लिए पयार्प्त अवसर उपलब्ध् कराता है। सामान्य तौर पर यह माना जाता है कि एक निश्िचत अंश तक स्वस्थ - सट्टðेबाजी आवश्यक है जो शेयर बाशार की द्रवता एवं मूल्य निरंतरता को सुनिश्िचत करती है। व्यापारिक तथा निपटान कायर्विध्ि प्रतिभूतियों के व्यापार का निष्पादन अब स्वमागीर्य, स्व्रफीन आधरित इलैक्ट्रॅानिक व्यापार तंत्रा के माध्यम से होता है। साधरण शब्दों में, अंशों एवं ट्टणपत्रों का समस्त व्रफय तथा विव्रफय एक कम्प्यूटर ट£मनल के माध्यम से किया जाता है। एक समय था जब शेयर बाशार के मंच पर प्रतिभूतियों का व्रफय तथा विव्रफय खुली बोली प्रणाली से होता था। इस नीलामी तंत्रा के अंतगर्त लेन - देन दलालों के बीच होते थे, वे चिल्लाकर मूल्य बताते थे तथा उच्चतम बोली लगाने वाले को अंश बेच दिए जाते थे। यद्यपि, अब लगभग सभी शेयर बाशार इलैक्ट्राॅनिक हो गये हैं तथा व्यापार दलालों के कायार्लयों में कम्प्यूटर ट£मनलों के माध्यम से होता है। एक शेयर बाशार की एक मुख्य कम्प्यूटर प्रणाली होती है जिसके कइर् ट£मनल देश भर में विभ्िान्न स्थानों पर स्िथत होते हैं। प्रतिभूतियों में व्यापार, दलालों के माध्यम से होता है जो शेयर बाशार के सदस्य होते हैं। व्यापार, शेयर बाशार के मंच से स्थानांतरित होकर दलालों के कायार्लय मे पहुँच गया है। प्रत्येक दलाल की एक कम्प्यूटर ट£मनल तक पहुँच होती है जो मुख्य शेयर बाशार से संब( होता है। इस स्व्रफीन आधरित व्यापार में, एक सदस्य वेबसाइट पर लाॅग आॅन करता है तथा उन अंशों के बारे में कोइर् जानकारी ;कम्पनी, सदस्य इत्यादिद्ध जिन्हें वह खरीदना या बेचना चाहता है, तथा उनका मूल्य कम्प्यूटर पर भरता है। साॅफ्रटवेयर इस तरह से रूप - रेख्िात किया गया है कि जैसे ही प्रतिपक्ष से मिलान आदेश पाया जाता है, लेन - देन निष्पादित हो जाता है। दोनों पक्ष लेन - देन होने के दौरान सभी शेयरों के मूल्यों के उतार - चढ़ाव सहित समस्त लेन - देन को कम्प्यूटर स्व्रफीन पर, शेयर बाशार के व्यावसायिक घण्टों के दौरान, देख सकते हैं। दलाल के कायार्लय में कम्प्यूटर निरंतर सवोर्त्तम बोली तथा प्रस्तावित मूल्यों के आदेशों का मिलान करता है। जिनका मिलान नहीं हो पाता वे स्व्रफीन पर ही उस दिन के भावी मिलानों हेतु खुले रहते हैं। इलैक्ट्राॅनिक व्यापार प्रणाली अथवा स्व्रफीन आधारित व्यापार के निम्नलिख्िात गुण हैं। 1.यह पारद£शता सुनिश्िचत करता है क्योंकि यह प्रतिभागियों को व्यावसायिक लेन - देन के दौरान समस्त प्रतिभूतियों के मूल्यों को देखने की सुविध देता है वे वास्तविक समय के दौरान पूरे शेयर बाशार को देख सकते हैं। 2.यह शेयर बाशार की सूचनाओं की प्रभावशीलता को बढ़ाता है जिससे सही मूल्यों के निधर्रण में सहायता मिलती है। कम्प्यूटर स्व्रफीन अंशों के मूल्यों को प्रभावित करने वाली जानकारी तथा पूंजी बाशार में होने वाले परिवतर्नों को दशार्ती है। वित्तीय बाशार 299 3.यह प्रचालन की कायर्वुफशलताओं में वृि करता है क्योंकि इससे समय, लागत तथा त्राुटि के जोख्िाम मंे कमी आती है। 4.देश भर के लोग तथा यहाँ तक विदेशी भी, जो शेयर बाशार में लेन - देन करना चाहते हैं, दलालों अथवा सदस्यों के माध्यम से, एक - दूसरे को जाने बिना, प्रतिभूतियों का व्रफय अथवा विव्रफय कर सकते हैं। अथार्त् वे दलाल के कायार्लय में बैठकर अथवा कम्प्यूटर पर लाॅग आॅन करके प्रतिभूतियों का व्रफय अथवा विव्रफय कर सकते हैं। यह प्रणाली बड़ी संख्या में प्रतिभागियों को एक - दूसरे से व्यापार में सक्षम बनाती है जिससे शेयर बाशार में तरलता बढ़ती है। 5.इसमें एक साथ सभी व्यापारिक वेंफद्रों में लेन - देन किए जाते हैं इसलिए यह एकल व्यापारिक प्लेटपफामर् उपलब्ध् कराता है। अतः देश भर में पैफले हुए सभी व्यापारिक वेंफद्र, कम्प्यूटर पर एक व्यापारिक प्लेटपफामर्, अथार्त् शेयर बाजार के अंतगर्त लाए गए हैं। अब, स्व्रफीन आधरित व्यापार अथवा स्वमागीर्य व्यापार ही एक मात्रा तरीका है जिसमें अंशों का व्रफय अथवा विव्रफय किया जा सकता है। अशं भौतिक रूप में, व इलैक्ट्राॅनिक बहीखाता प्रविष्िट रूप मंे रखे जा सकते हैं तथा इसी रूप में हस्तांतरित भी किये जा सकते हैं। इस इलैक्ट्राॅनिक रूप को विभौतिकीय ;डीमैटिरियलाइज्ड़द्ध कहते हैं। व्यापारिक एवं निपटान प्रवि्रफया के चरण वषर् 2003 से व्यापार की तिथ्िा से 2 दिन के भीतर सभी लेन - देनों का निपटान होना अनिवायर् है, अथार्त् ज़्2 आधरित है। सुधरों से पूवर् प्रतिभूतियाँ खरीदी तथा बेची जाती थीं और उनका निपटान साप्ताहिक/पाक्ष्िाक निपटान चव्रफ से होता था, चाहे वह अंशों की सुपुदर्गी हो अथवा रोकड़ का भुगतान। यह प्रणाली एक लंबे समय तक चलती रही क्योंकि इससे शेयर बाशार में व्यापार की मात्रा बढ़ी तथा प्रतिभूतियों में तरलता आयी। यद्यपि व्यापारिक सौदे विश्िाष्ट तिथ्िायों पर निपटाये जाने होते थे, इससे सट्टðेबाजी को बढ़ावा मिला तथा दलालों द्वारा जानबूझकर अंशों के मूल्यों में उतार - चढ़ाव किए गए। 2000 में एक नइर् प्रणाली, अथार्त् चल निपटान ;रोलिंग सैटलमैंटद्ध प्रारंभ की गइर् जिसमें कोइर् भी लेन - देन होने के वुफछ दिन बाद उसका निपटान हो जाएगा। सन् 2003 से ज़्2 के आधर पर चल निपटान के अंतगर्त सभी अंश सम्िमलित किए गए थे, अथार्त् सौदे की तिथ्िा से 2 दिन के भीतर प्रतिभूतियों के लेनदेन निपटाए जाते हैं। क्योंकि चल निपटान मंे अंशों की तीव्र गतिशीलता निहिताथर् है, इसलिए इसके प्रभावी कायार्न्वयन हेतु इलैक्ट्राॅनिक निध्ि अंतरण तथा अंशों के विभौतिकीकरण की आवश्यकता है। प्रतिभूतियों के व्रफय तथा विव्रफय हेतु स्व्रफीन आधरित व्यापार में निम्नलिख्िात चरण सम्िमलित हैं - 1.यदि कोइर् निवेशक कोइर् प्रतिभूति खरीदना अथवा बेचना चाहता है तो उसे एक दलाल अथवा उप - दलाल से एक समझौता ;एग्रीमैंटद्ध करना होगा। प्रतिभूतियों के व्रफय अथवा विव्रफय का आदेश देने से पूवर् एक निवेशक को ‘दलाल - ग्राहक समझौते’ तथा ‘ग्राहक - पंजीकरण पफामर्’ पर हस्ताक्षर करने होते हैं। उसे वुफछ विश्िाष्ट अन्य विवरण तथा जानकारी भी उपलब्ध् करानी होती है। इसमें सम्िमलित हैं - ऽ पैन ;च्।छद्ध नबंर ;यह अनिवायर् हैद्ध ऽ जन्म तिथ्िा व पता ऽ शैक्ष्िाक योग्यता तथा व्यवसाय ऽ आवासीय स्िथति ;भारतीय/एन.आर.आइर्.द्ध ऽ बैंक खाता विवरण ऽ डिपोिाटरी खाता विवरण ऽ किसी अन्य दलाल का नाम जिसके साथ पंजीवृफत हैं। ऽ ग्राहक पंजीकरण पफाॅमर् में ग्राहक कोड संख्या तत्पश्चात् दलाल, निवेशक के नाम से व्यापारिक खाता खोलता है। 2.विभौतिकीय ;डीमैटद्ध रूप में प्रतिभूतियों को रखने तथा स्थानातंरित करने हेतु निवेशक को डिपोिाटरी प्रतिभागी के पास एक ‘डीमैट खाता’ अथवा ‘लाभप्रद स्वामी खाता’ खोलना होता है। प्रतिभूति बाशार में रेाकड़ लेन - देनों हेतु उसे एक ‘बैंक खाता’ भी खोलना होता है। 3.तत्पश्चात् अंशों के व्रफय अथवा विव्रफय हेतु निवेशक दलाल को आदेश देता है। अंशों की संख्या तथा, मूल्य, जिस पर अंश खरीदे अथवा बेचे जाने हैं, के बारे में स्पष्ट अनुदेश दिए जाने चाहिए। तब दलाल अनुदेश्िात मूल्य अथवा सवोर्त्तम उपलब्ध् मूल्य पर लेन - देन का आदेश प्राप्त कर लेता है। दलाल निवेशक को आदेश पुष्िट पचीर् जारी कर देता है। 4.जब दलाल स्वमागर् ;आॅनलाइनद्ध पर शेयर बाशार से संपवर्फ स्थापित करता है तथा अंश व सवोर्त्तम उपलब्ध् मूल्य का मिलान करता है। 5. तब अंश उल्लेख्िात मूल्य पर व्रफय अथवा विव्रफय हो जाते हैं तो इसकी सूचना दलाल के ट£मनल पर पहुँच जाती है और आदेश इलैक्ट्राॅनिक रूप से निष्पादित हो जाता है। तब दलाल निवेशक को लेन - देन पुष्िट पचीर् जारी कर देता है। 6.लेन - देन निष्पादित होने के 24 घंटे के भीतर दलाल एक संविदा नोट ;काॅन्ट्रैक्ट नोटद्ध जारी कर देता है। इस नोट में खरीदे अथवा बेचे गए अंशों की संख्या, लेन - देन की तिथ्िा तथा समय एंव दलाली व्ययों का विवरण आदि सम्िमलित होता है। यह एक महत्त्वपूणर् प्रपत्रा है क्योंकि यह कानूनी रूप से प्रवतर्नीय है तथा यह निवेशक तथा दलाल के बीच विवादों/दावों के निपटान में सहायक होता है। शेयर बाशार द्वारा प्रत्येक लेन - देन को एक अनन्य आदेश कोड ;यूनिक आॅडर्र कोडद्ध नियत किया जाता है और इसे संविदा नोट पर छापा जाता है। 7.अब, निवेशक बेचे गए अंशों की सुपुदर्गी देगा अथवा खरीदे गए अंशों हेतु रोकड़ का भुगतान करेगा। यह संविदा नोट की प्राप्ित के तुरंत बाद अथवा दलाल द्वारा शेयर बाशार को भुगतान अथवा अंशों की सुपुदर्गी किए जाने वाले दिन से पूवर् कर देना चाहिए। इसे जमा - दिवस ;पे - इन - डेद्ध कहा जाता है। 8.जमा - दिवस पर रोकड़ का भुगतान अथवा प्रतिभूतियों की सुपुदर्गी की जाती है, इसे ज़्2 वाले दिन से पूवर् किया जाता है क्योंकि ज़्2 वाले दिन सौदे का पूणर् रूप से निपटान कर दिया जाता है। 1 अप्रैल 2003 से निपटान चव्रफ ज़्2 वाले दिन को चल निपटान आधर पर लागू है। 9.ज़्2 वाले दिन शेयर बाशार दूसरे दलाल को अंश सुपुदर् अथवा राश्िा का भुगतान कर देगा। इसे भुगतान दिवस ;पे - आउट - डेद्ध कहा जाता है। दलाल द्वारा निवेशक को भुगतान दिवस के 24 घंटे के भीतर भुगतान करना होता है क्योंकि शेयर बाशार से वह भुगतान पहले ही प्राप्त कर चुका होता है। 10.दलाल निवेशक के डी - मैट खाते में अंशों की सुपुदर्गी डी - मैट रूप में प्रत्यक्ष रूप से कर सकता है, निवेशक को अपने डी - मैट खाते का विवरण देना होता है तथा अपने डिपोशटरी प्रतिभागी को यह अनुदेश देना होता है कि वह उसके लाभप्रद स्वामी खाते में प्रतिभूतियों की सुपुदर्गी प्राप्त कर ले। विभौतिकीकरण तथा निक्षेपागार ;डिमैटीरियलाइजेशन तथा डिपोिाटरीशद्ध प्रतिभूतियों में सारा व्यापार अब कम्प्यूटर ट£मनल के माध्यम से होता है। संपूणर् प्रणाली के कम्प्यूटरीवृफत होने के कारण प्रतिभूतियों के व्रफय तथा विव्रफय इलैक्ट्राॅनिक बहीखाता प्रविष्िट रूप में निपटाया जाता है। यह मुख्य रूप से समस्याओं, चोरी, नकली/जाली अंतरण, अंतरण में देरी तथा भौतिक रूप में रखे गए अंश प्रमाण - पत्रों अथवा ट्टणपत्रों संबंध्ी कागशी कायर् के उन्मूलन हेतु किया जाता है। यह एक ऐसी प्रवि्रफया है जिसमें निवेशक द्वारा भौतिक रूप में रखी गयी प्रतिभूतियां रद्द हो जाती हैं तथा निवेशक को एक इलैक्ट्राॅनिक प्रविष्िट अथवा संख्या दे दी जाती है जिससे वह एक खाते में इलैक्ट्राॅनिक शेष के रूप में प्रतिभूतियाँ रख सकता है। इलैक्ट्राॅनिक रूप में प्रतिभूतियाँ रखने की यह प्रवि्रफया विभौतिकीकरण कहलाती है। इसके लिए निवेशक को एक संगठन जिसे निक्षेपागार ;डिपेािाटरीद्ध कहा जाता है, के पास एक डिमैट खाता खोलना होता है वस्तुतः, अब सभी प्रांरभ्िाक सावर्जनिक निगर्म ;प्च्व्ेद्ध विभौतिकीय रूप में जारी किए जाते हैं तथा 99» से अध्िक आवतर् का निपटान डिमैट रूप में सुपुदर्गी द्वारा किया जाता है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोडर् ने अध्िकांश प्रतिभूतियों की निपटान प्रवि्रफया ‘डी मैट’ के रूप में करनी अनिवायर् कर दी है। डी मैट रूप में अंशों को रखना कापफी सुविधजनक है क्योंकि यह बिल्वुफल एक बैंक खाते की तरह है। भौतिक अंश इलैक्ट्राॅनिक रूप में परिव£तत किये जा सकते हैं अथवा इलैक्ट्राॅनिक धरितों ;होल्िडंग्सद्ध को भी भौतिक प्रमाण पत्रों ;डिमैटीरियलाइजेशनद्ध में पुनः परिव£तत किया जा सकता है। विभौतिकीयकरण से अंशों को रोकड़ की भांति किसी अन्य खाते में अंतरित किया जा सकता है तथा एकल खाते के माध्यम से अंशों के लेन - देनों का निपटान सुनिश्िचत किया जा सकता है। इन डी मैट प्रतिभूतियों को ट्टण लेने हेतु गिरवी अथवा बध्ंक रखा जा सकता है। अंश प्रमाणपत्रों की हानि, चोरी अथवा जालसाजी का कोइर् खतरा नहीं है निवेशक के खाते में अंशों की सही संख्या की जमा करना दलाल का उत्तरदायित्व है। डीमैट प्रणाली की कायर्विध्ि 1.एक निक्षेपागार प्रतिभागी ;डी पीद्ध, जो एक बैंक, दलाल अथवा वित्तीय सेवा कंपनी हो सकती है, की पहचान करनी चाहिए। 2.एक खाता खोलने का पफामर्, प्रलेखन ;डोक्यूमैन्टेशनद्ध ;पैन काडर् का विवरण, पफोटो, मुख्तारनामाद्ध पूणर् कर लेना चाहिए। 3.डी पी को भौतिक प्रमाण पत्रा के साथ विभौतिकीयकरण अनुरोध् पफामर् जमा करना चाहिए। 4.यदि सावर्जनिक प्रस्ताव में अंश आवेदित किए जाएं तो डी पी तथा डीमैट खाते का सरल विवरण दिया जाना होता है तथा अंशों का आंबटन स्वतः ही डीमैट खाते में जमा हो जाता है। 5.यदि अंश किसी दलाल के माध्यम से बेचे जाने हैं तो डी पी को खाते में डेबिट किए जाने वाले अंशों की संख्या के बारे में अनुदेशन करना होता है। 6.शेयर बाशार को अंशों की सुपुदर्गी हेतु दलाल अपने डी पी को अनुदेश देता है। 7.तब दलाल भुगतान प्राप्त करके अंश बेचने वाले व्यक्ित को भुगतान कर देता है। 8.ये सभी लेन - देन 2 दिन में पूरे होने होते हैं अथार्त् अंशों की सुपुदर्गी तथा व्रेफता से भुगतान ज़्2 प्राप्ित की निपटान अवध्ि के आधर पर होता है। निक्षेपागार ;डिपोिाटरीद्ध जिस प्रकार बैंक अपने ग्राहकों के ध्न को सुरक्ष्िात अभ्िारक्षा में रखता है, उसी प्रकार एक निक्षेपागार निवेशक की ओर से प्रतिभूतियों को इलैक्ट्राॅनिक रूप में रखता है। निक्षेपागार में एक प्रतिभूति खाता खोला जाता है, सभी अंश, निकाले जा सकते हैं या किसी भी समय बेचे जा सकते हैं। निवेशक की ओर से अंशों की सुपुदर्गी अथवा प्राप्ित हेतु अनुदेश दिए जा सकते हैं। यह एक तकनीक प्रेरित इलैक्ट्राॅनिक भण्डारण प्रणाली है। इसमें अंश प्रमाण - पत्रों, अंतरणों, पफामो± इत्यादि से संबंध्ित कागशी कायर्वाही नहीं होती। निवेशकों के सभी लेन - देन अध्िक गति, कायर्वुफशलता तथा उपयोग के साथ निपट जाते हैं क्योंकि सभी प्रतिभूतियाँ बहीखाता प्रविष्िट रीति में प्रविष्ट की जाती हैं। भारत में दो निक्षेपागार हैं। नैशनल सिक्योरिटीश डिपोिाटरीश लिमिटेड ;एन.एस.डी.एल.द्ध, भारत में वतर्मान में प्रचालित प्रथम तथा सबसे बड़ी निक्षेपागार है। इसे आइर्.डी.बी.आइर्., यू.टी.आइर्. तथा नेशनल स्टाॅक एक्सचेंज द्वारा एक संयुक्त उपव्रफम के रूप में प्रव£तत किया गया था। वित्तीय बाशार शेयर बाशार सूचकांक एक शेयर बाशार सूचकांक बाशार - व्यवहार? का एक बैरोमीटर ;वायुदाब मापीद्ध होता है। यह स्टाॅक ;शेयरोंद्ध के एक सेट के माध्यम से वुफल मिलाकर बाशार के उतार - चढ़ाव को मापता है जो कि बाशार का प्रतिनिध्ित्व करते हैं। यह बाशार की दिशाओं को प्रतिबिंबित करता है तथा स्टाॅक मूल्यों के दिन - प्रतिदिन के उतार चढ़ावों का संकेत देता है। एक आदशर् सूचकांक को निश्िचत रूप से प्रतिभूतियों के मूल्य में बदलावों को प्रस्तुत करना चाहिए तथा बेहतर बाशार पुनः प्रस्तुतीकरण हेतु विश्िाष्ट शेयर की मूल्य गतिशीलता को ¯बबित करना चाहिए। भारतीय बाशार में बी. एस. इर्संवेदी सूचकांक तथा एन.एस. इर्., निफ्रटी महत्त्वपूणर् सूचकांक हैं। वुफछ महत्त्वपूणर् वैश्िवक शेयर बाशार सूचक ये हैं - ऽ संयुक्त राज्य अमेरिका में डाउजोंस इंडस्िट्रयल एवरेज सबसे पुराना कोटेड ;भावब(द्ध बाशार सूचकांक है। ऽ नैसडेक शेयर बाशार में सूचीब( शेयरों के लिए मूल्य के भारित बाशार पूँजीकरण के लिए नैसडेक संयुक्त सूचकांक है। ऽ एस एंड पी 500 सूचकांक यू.एस. की 500 विशालतम सावर्जनिक व्यापार वंफपनियों से निमिर्त है। यू. एसशेयर बाशार के लिए प्रायः एस एंड पी 500 को एक छद्मावरण के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। ऽ एपफ. टी. एस. इर्. 100 के अंतगर्त लंदन शेयर बाशार में सूचीब( पूणर् बाशार मूल्य की 100 विशालतम वंफपनियों को समाहित किए हुए है। यह यूरोपीय बाशार का न्यायिक सूचकांक है। सैंट्रल डिपोिाटरी स£वसिस लिमिटेड प्रचालन प्रारंभ करने वाली दूसरी निक्षेपागार है। इसे बाम्बे स्टाॅक एक्सचेंज तथा बैंक आॅपफ इडिंया द्वारा प्रव£तत किया गया था। राष्ट्र स्तर के ये दोनों निक्षेपागार मध्यव£तयों के माध्यम से प्रचालन करते हैं, जो इलैक्ट्राॅनिक रूप से डिपोिाटरी से जुड़े रहते हैं तथा निवेशकों के साथ संपवर्फ बिंदु के रूप में कायर् करते हैं और डिपोिाटरी प्रतिभागी के नाम से जाने जाते हैं। निक्षेपागार प्रतिभागी ;डी. पी.द्ध निवेशक तथा निक्षेपागार ;एन. एस. डी. एल. अथवा सी. डीएस. एल.द्ध जो विभौतिकीय अंशों के खातों के रखरखाव हेतु अध्िवृफत हैं, के बीच मध्यवतीर् के रूप में कायर् करता है। वित्तीय संस्थान, बैंक, समाशोध्न निगम, शेयर दलाल तथा गैर - बैंविंफग वित्तीय निगमों को निक्षेपागार प्रतिभागी बनने की अनुमति प्राप्त है। यदि कोइर् निवेशक प्रतिभूतियों का व्रफय तथा विवि्रफय दलाल अथवा बैंक अथवा गैर - बैंविंफग वित्तीय निगम के माध्यम से करता है तो वह निवेशक के लिए एक डी.पी. के रूप में कायर् करता है और सभी औपचारिकताएं पूरी करता है। भारत का राष्ट्रीय शेयर बाशार ;नेशनल स्टाॅक एक्सचेंज आॅपफ इंडियाद्ध भारत का राष्ट्रीय शेयर बाशार बिल्वुफल नया, अति अध्ुनातन एवं तकनीकी संचालित एक्सचेंज ;शेयर बाशारद्ध है। इसे 1992 में निगमित किया गया था और अप्रैल 1993 में शेयर बाशार के रूप में मान्यता दी गइर् थी। इसने 1994 में कायर् - व्यापार शुरू किया जिसमें थोक )ण बाशार सेगमेंट ;खंडद्ध का व्यापार था। परिणामतः इसने 1994 नवंबर में इक्िवटीज के लिए व्यापार मंच की शुरुआत की तथा जून 2000 में विभ्िान्न व्युत्पादित प्रपत्रों के लिए भावी एवं वैकल्िपक सेगमेंट ;खंडद्ध का प्रारंभ किया। एन.एसइर्. ने राष्ट्रव्यापी पूणर्तः स्वचालित स्क्रीन आधरित व्यापार प्रणाली की स्थापना की। राष्ट्रीय शेयर बाशार अग्रणी वित्तीय सस्थानों, बैंकों, बीमा वंफपनियों तथा अन्य वित्तीय मध्यस्थों द्वारा स्थापित किया गया था। यह व्यावसायिकांे द्वारा प्रबंध्ित किया जाता है जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से एक्सचेंज पर व्यापार नहीं करते हैं। व्यापार अध्िकार वुफछ सामान्य शेयर बाशार शब्दावली जब आप किसी समाचार पत्रा या पत्रिाका में शेयर बाशार के बारे में पढ़ते हैं तब प्रायः आपका सामना इस प्रकार के शब्दों से होगा। बूसेर्स - यह शेयर बाशार के लिए अन्य शब्द है बुल एवं बीयसर् - यहाँ पर यह शब्द पशुओं ;साड़ एवं भालूद्ध के बारे में नही संदभ्िार्त करते हैंऋ बल्िक शेयर बाशार में निवेशकों के मनोभावों का प्रतीक है। एक बुलिश चरण आशावादिता ;उछालद्ध की अवध्ि को संदभ्िार्त करता है तथा बीयरिश चरण बूसेर्स ;शेयर बाशारद्ध की निराशावादिता ;गिरावटद्ध को संदभ्िार्त करता है। बदला - यह निपटारे ;भुगतानद्ध को अग्रनयन ;या आगे बढ़ाने कीद्ध प्रणाली को संदभ्िार्त करता है, विशेष रूप से बी.एस.इर्. में होता है। यह एक ऐसी सुविध है जो एक निपटान अवध्ि से दूसरे में एक लेन - देन की भुगतान या डिलीवरी ;देयताद्ध को रोकने की अनुमति देता है। ओड लाट ट्रेडिंग या न्यून खेप व्यापार - 100 शेयर या उससे कम के गुणकों में व्यापार। पेन्नी स्टाॅक्स ;शेयरद्ध - ये वे प्रतिभूतियाँ हैं जिनकी शेयर बाशार में कोइर् कीमत नहीं होती है, परंतु उनका व्यापार स‘ेबाजी में भागीदारी निभाता है। व्यापारिक सदस्यों के साथ है जो अपनी सेवाओं को निवेशकों को उपलब्ध् कराते हैं। एन.एस.इर्. के प्रबंध् क मंडल में उन्नयन संस्थानों के वरिष्ठ कायर्कारी तथा विख्यात व्यावसायिक संघटित हैं जो कि व्यापार सदस्यों से प्रतिनिध्ित्व नहीं रखते हंै। राष्ट्रीय शेयर बाशार ;छैम्द्ध के उद्देश्य एन.एस.इर्. की स्थापना निम्नलिख्िात उद्देश्यों के साथ हुइर् थी - ;कद्ध सभी प्रकार की प्रतिभूतियों हेतु राष्ट्रव्यापी व्यापार सुविध स्थापित करना। ;खद्ध एक औचित्यपूणर् संचार नेटववर्फ के द्वारा पूरे देश भर में निवेशकों की समान पहुँच सुनिश्िचत करना। ;गद्ध इलेक्ट्राॅनिक व्यापार प्रणाली का उपयोग करते हुए एक निष्पक्ष, सक्षमतापूणर् तथा पारदशीर् प्रतिभूति बाशार उपलब्ध् कराना। ;घद्ध लघु भुगतान चक्र तथा बुक ;पुस्तकद्ध प्रविष्िट निपटान के योग्य बनाना। ;घद्ध अंतरार्ष्ट्रीय ऊँचाइयों एवं मानकों को पूरा करना। दस वषर् की समय सीमा के अंदर एन.एस.इर्उन उद्देश्यों को प्राप्त करने के योग्य हो गया है जिसके लिए इसकी स्थापना की गइर् थी। यह भारतीय पूँजी बाशार के रूपांतरण में एक बदलाव अभ्िाकतार् ;एजेंटद्ध के रूप में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। एन.एस.इर्. इस योग्य हुआ है कि वह निवेशकों के द्वारा तक शेयर बाशार को ले जाए। इसने यह सुनिश्िचत किया है कि तकनीकी से पूरे देश भर में निवेशकों को न्यूनतम लागत में सेवाएँ पहुँचाने में कामयाबी प्राप्त हुइर् है। इसने राष्ट्रव्यापी विस्तृत स्क्रीन आधरित स्वचालित व्यापार प्रणाली उच्च अंश की पारदश्िार्ता एवं समान पहुँच से उपलब्ध् कराइर् है, बिना किसी भू - भौगोलिक स्िथति की सीमा में बँधे हुए। राष्ट्रीय शेयर बाशार ;एन.एस.इर्.द्ध के बाशार खंड यह शेयर बाशार निम्नलिख्िात तीन खंडों को बाशार उपलब्ध् कराता है। ;पद्ध थोक विक्रय )ण बाशार खंड ;होल सेल डेब्ट मावेर्फट सेगमेंटद्ध - यह खंड व्यापक दायरे की स्िथर आय प्रतिभूतियों के लिए एक व्यापार मंच प्रदान करता है जिसके अंतगर्त वेंफद्रीय सरकार की प्रतिभूतियाँ, राजकोष बिल, राज्य विकास )ण सावर्जनिक क्षेत्रा के निगमों द्वारा जारी बंध्पत्रा ;बांड्सद्ध अस्थाइर्/चल पूँजी दर ;फ्रलोटिंग रेटद्ध बंध्पत्रा, शून्य वूफपन बंध्पत्रा, सूचकांक बांड ;बंध्पत्राद्ध, वाण्िाज्ियक पत्रा, बचत प्रमाण - पत्रा, निगमों के )ण पत्रा तथा म्युचुअल पंफड आते हैं। वित्तीय बाशार 305 ;पपद्ध पूँजी बाशार खंड - एन.एस.इर्. का पूँजी बाशार खंड इक्िवटी, अध्िमान ;शेयरद्ध, )णपत्रा, एक्सचेंज व्यापार पंफड के साथ - साथ पुफटकर सरकारी प्रतिभूतियों के लिए सक्षम एवं पारदशीर् मंच उपलब्ध् कराता है। भारतीय अध्िप्रतिदावा पटल शेयर बाशार ;ओ.टी.सी.इर्.आइर्.द्ध ओ.टी.सी.इर्.आर. ;व्ज्ब्म्प्द्ध भारतीय वंफपनी अध्िनियम 1956 के अंतगर्त निगमित एक वंफपनी है। इसे लघु एवं मध्यम वंफपनियों की पूँजी बाशार में पहुँच बनाने तथा लागत प्रभावी ढंग से पूँजी बाशार हेतु वित्त उगाहने के लिए सुविध उपलब्ध् कराने हेतु स्थापित किया गया था। इसका यह भी उद्देश्य था कि यह निवेशकों को पूँजी बाशार हेतु एक सुविधजनक, पारदशीर् तथा सक्षम पथ संवेदी सूचकांक - मुंबइर् शेयर बाशार का संवेदी सूचकांक क्या आपने पिछले वुफछ दिनों या हफ्रतों में कितनी बार समाचार पत्रों के प्रमुख समाचारों में संवेदी सूचकांक के बारे में हो हल्ला मचाते हुए देखा है? यह हर समय ऊपर व नीचे जाता रहता है और यह व्यवसाय एवं आथ्िार्क समाचारों का एक अति महत्त्वपूणर् हिस्सा सा लगता है। क्या इसने कभी आपको आश्चयर्चकित किया है कि वस्तुतः यह संवेदी सूचकांक है क्या? सवेदी सूचकांक बी. एस. इर्. को सूचकांक का निदेर्श ;या तलद्ध चिÉ है। चूँकि बी. एस. इर्. भारतीय द्वितीयक बाशार का एक अग्रणी शेयर बाशार बन चुका है, इसलिए संवेदी सूचकांक भी भारतीय शेयर बाशार का एक महत्त्वपूणर् संकेतक बन चुका है। शेयर बाशार की स्िथति के बारे में रिपोर्ट करने के लिए यह बहुत जल्दी - जल्दी प्रयुक्त किए जाने वाला संकेतक बन चुका है। एक सूचकांक का केवल एक काम होता है मूल्य गतिशीलता को पकड़ना। इस तरह से एक शेयर सूचकांक शेयरों की मूल्य गतिशीलता को प्रदश्िार्त करेगा जबकि बंध्पत्रा ;बांडद्ध सूचकांक उस ढंग को पकड़ता है जिस ढंग से बंध्पत्रा के मूल्य ऊपर या नीचे जाते हैं। यदि संवेदी सूचकांक चढ़ता ;उठताद्ध है तो यह संकेत देता है कि बाशार बढि़या कर रहा है। चूँकि यह माना जाता है कि शेयर यही प्रतिबिंबित करते हंै जो वंफपनी भविष्य में अजिर्त करने की अपेक्षा रखती है। अतः एक ऊपर उठता सूचकांक वह संकेत देता है कि निवेशकों को वंफपनियों से बेहतर कमाइर् की उम्मीद हैं, इसके साथ ही यह भारतीय अथर्व्यवस्था को भी मापता है। यदि भारतीय वंफपनियों से अच्छा करने की उम्मीद की जाती है तो निश्िचत ही अथर्व्यवस्था को भी अच्छा ही करना चाहिए। संवेदी सूचकांक ;सेंसेक्सद्ध को 1986 में, शेयर बाशार 30 सवार्ध्िक सियता से व्यापार किए जाने वाले शेयरों से बनाकर प्रारंभ किया गया था, वस्तुतः वे बी. एस. इर्. बाशार पूँजीकरण का आध हिस्सा रखते हैं। वे अथर्व्यवस्था के 13 क्षेत्रों का प्रतिनिध्ित्व करते हैं और अपने संबंध्ित उद्योगों के अग्रणी है। उपलब्ध् कराया जाए। यह पूणर्तः वंफप्यूटरीकृत, पारदशीर्, सिंगल विंडो ;एकल गवाक्षद्ध एक्सचेंज है जिसने 1992 से व्यापार प्रारंभ किया था। इस एक्सचेंज की स्थापना नैसडेक ;नेशनल एसोसिएशन आॅपफ सिक्योरटीज डीलसर् आटोमेटेड कोटेशंसद्ध, ओ.टी.सी. एक्सचेंज, यू.एस.एके तजर् पर हुइर्। इसे यू.टी.आइर्., आइर्.सी.आइर्. सी.आइर्, आइर्.डी. बी.आइर्., आइर्.एपफ.सी.आइर्., एल.आइर्.सी., जी.आइर्. सी., एस.बी.आइर्. पूँजी बाशार तथा वैफन बैंक पफाइनेंसियल सविर्सेज के द्वारा प्रोत्साहित किया गया है। बह्र्पटल ;ओवर द काउंटरद्ध बाशार को एक ऐसी जगह के रूप में पारिभाष्िात किया जा सकता है जहाँ व्रेफता या खरीददार विवे्रफता की तलाश में रहता है या इसकी विपरीत स्िथति भी होती है, इसके बाद दोनों ही पाटिर्यों - व्रेफता एवं विवे्रफता के लिए स्वीकायर् खरीद पफरोख्त के नियम वे शते± व्यवस्िथत करता है। यह एक पराक्रम्य ;बेचनीयद्ध बाशार स्थल है। यह कहीं भी विद्यमान हो सकता है जो नीलामी बाशार का उल्टा होता है और प्रतिभूति विनियमों की ियाकलापों द्वारा प्रतिनििात्व किया जाता है। इस प्रकार से ओ.टी.सी. एक्सचेंज में व्यापार तब होता है जब एक व्रेफता या विव्रेफता एक ओ.टी.सीइर्.आइर्. पटल पर आता है और वंफप्यूटर स्क्रीन ;पदेर्द्ध पर खोजकर भावों को देखता है और अपने पैसों के लक्ष्य के हिसाब से खरीद या पफरोख्त करता है। भौगोलिक अथो± में कोइर् विश्िाष्ट बाशार स्थल नहीं है। ओ.टी.सी.इर्.आइर्. का उद्देश्य कम व्यापार की जानेवाली प्रतिभूतियों को एक सुस्िथर एवं निष्पक्ष मूल्य पर प्रतिभूतियों हेतु त्वरित द्रवता प्रदान करना है। या पिफर छोटी वंफपनियों को क्रय एवं विक्रय की सरलीकृत प्रिया तथा नए निगर्मों हेतु एक सरल एवं सस्ता प्रकार का सावर्जनिक स्थल उपलब्ध् कराना है। यद्यपि अब ओ.टी.सी.इर्आइर्. को समाप्त कर दिया गया है। ओ. टी. सी. बाशार के लाभ 1.यह छोटी एवं कम द्रवता वाली वंफपनियों को एक व्यापार मंच उपलब्ध् कराता है, चूँकि वे एक नियमित शेयर बाशार में सूचीब( के लिए योग्य नहीं होती है। 2.यह निगमों के लिए एक लागत प्रभावी उपाय है चूँकि नए निगमों की लागत कम होती है तथा निवेशकों को सेवा देने हेतु कम खचार् आता है। 3.यह परिवार संब( है तथा निकटब( वंफपनियाँ ओ.टी.सी. के माध्यम से सावर्जनिक की जा सकती हैं। 4.डीलसर् ;व्यापारीद्ध नए निगर्मों तथा द्वितीयक बाशार के लिए अपने विकल्पों के अनुसार दोनों को संचालित कर सकते हैं। 5.यह निवेशक को व्यापक स्वतंत्राता देता है, वे प्राथमिक एवं द्वितीयक बाशार, दोनों ही के लिए बाशार बनाने हेतु व्यापारियों ;डीलरोंद्ध से स्टाॅक चयनित कर लेते हैं। 6.यह एक पारदशीर् व्यापार प्रणाली है जिसे खराब या अध्ूरी ;सीमितद्ध डिलीवरी की समस्या नहीं है। 7.बाशार निमार्ताओं से स्वतंत्रा एवं अध्िक प्रत्यक्ष सूचनाएँ ग्राहकों तक प्रवाहित होती हंै, चूँकि यहाँ दोनों के बीच अध्िक निकट संपवर्फ रहता है। बी.एस.इर्. ;पूवर् में बाॅम्बेस्टाॅक एक्सचेंज लिमिटेडद्ध बी.एस.इर्.लि. ;पूवर् में बाॅम्बेस्टाॅक एक्सचेंज लिमिटेडद्ध, 1875 में स्थापित हुआ था यह एश्िाया का प्रथम स्टाॅक एक्सचेंज है। इसे प्रतिभूति संविदा ;विनियमद्ध अध्िनियम 1956 के अंतगर्त स्थायी मान्यता दी गइर्। पूँजी प्राप्त करने हेतु एक मंच उपलब्ध् कराकर यह निगमित क्षेत्रा की संवृि में योगदान करता है। यह बी.एस.इर्.लि. के रूप में जाना जाता है जबकि 1875 में इसकी स्थापना नेटिव शेयर स्टाॅक ब्रोकसर् एसोसिएसन के रूप में हुइर् थी। वास्तविक विधन के अध्िनियमित होने से पूवर् ही, प्रतिभूति बाशार में सुव्यवस्िथत संवृि सुनिश्िचत करने हेतु बी.एस.इर्लि. ने नियम एवं विनियम निधर्रित कर लिए थे। जैसा कि पहले बताया गया है, सदस्यों अथवा अंशधारियों के रूप में विभ्िान्न व्यक्ितयों ;जो दलाल नहीं हैंद्ध के साथ एक निगमित इकाइर् के रूप में स्टाॅक एक्सचेंज की स्थापना की जा सकती है। बीएस.इर्. एक ऐसा शेयर बाशार है जिसकी स्थापना विस्तृत अंशधरी आधर के साथ एक निगमित इकाइर् के रूप में हुइर् है। इसके उद्देश्य निम्नलिख्िात हैं - ;कद्ध समता, ट्टणप्रपत्रों, व्युत्पन्नों तथा मुचुअल पंफडों में व्यापार हेतु वुफशल एवं पारदशीर् बाशार उपलब्ध् कराना। ;खद्ध लघु तथा मध्यम उपव्रफमों की समताओं हेतु व्यापार मंच उपलब्ध् कराना। ;गद्ध इलैक्ट्राॅनिक रूप से चालित एक्सचेंज के माध्यम से सवि्रफय व्यापार तथा सुरक्ष्िात बाशार उपलब्ध् कराना। ;घद्ध पूँजी बाशार प्रतिभागियों को अन्य सेवाएँ उपलब्ध् कराना जैसे - जोख्िाम प्रबंध्न समाशोध्न, निपटान, बाशार आंकडे़ तथा श्िाक्षा। ;घद्ध अंतरार्ष्ट्रीय मानकों के समनुरूप बनाना। राष्ट्रव्यापी उपस्िथति के साथ - साथ बी.एस.इर्की पूरी दुनिया के ग्राहकों तक वैश्िवक पहुँच है। सभी बाशार खण्डों में यह नवप्रवतर्न तथा प्रतिस्पधार् को बढ़ावा देता है। इसने बी.एस.इर्. इंस्टीच्यूट लि. के नाम से एक पूँजी बाशार संस्थान की स्थापना की है जो शेयर दलालों के पास रोशगार चाहने वाले कापफी वित्तीय बाशार 307 लोगों को वित्तीय बाशार तथा व्यावसायिक प्रश्िाक्षण पर श्िाक्षा उपलब्ध् कराता है। इस एक्सचेंज में देश भर से, तथा विदेशों से भी लगभग पाँच हजार कम्पनियाँ सूचीब( हैं तथा इसका बाशार पूँजीकरण भारत मंे सवार्ध्िक है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोडर् ;सेबीद्ध भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोडर् ;सेबीद्ध की स्थापना भारत सरकार द्वारा 12 अप्रैल 1988 एक अंतरिम प्रशासनिक निकाय के रूप में की गइर् थी जो प्रतिभूति बाशार के क्रमब( ;नियमितद्ध एवं स्वस्थ वृि तथा निवेशकों की संरक्षा को बढ़ावा प्रदान करे। यह भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अध्ीन संपूणर् प्रशासकीय नियंत्राण में कायर्रत था। 30 जनवरी 1992 को सेबी को एक आडिर्नंेस ;अध्यादेशद्ध के द्वारा वैधनिक निकाय का दजार् दिया गया। बाद में यह शासनादेश या अध्यादेश से हटाकर संसद के अध्िनियम के रूप में, भारतीय प्रत्याभूति एवं विनिमय बोडर् अध्िनियम 1992 में बदला गया। सेबी ;ैम्ठप्द्ध की स्थापना के कारण पूँजी बाशार ने 1980 दशक के दौरान एक आश्चयर्जनक वृि देखी, जिसे विशेष रूप से जनता की बढ़ती भागीदारी के रूप में विश्िाष्टीकृत किया जा सकता है। निवेशकों की लगातार तीव्रता से बढ़ती जनसंख्या एवं बाशार पूँजीकरण के विस्तार के कारण वंफपनियों, दलालों, मचे±ट बंैकरों, निवेश परामशर्कों तथा प्रतिभूति बाशार में सम्िमलित अन्य लोगों के साथ एक अंग के रूप में विभ्िान्न प्रकार के अपराधों ;दुराचारोंद्ध ने जगह ली। इन दुराचारों के सुस्पष्ट उदाहरणों में स्व - निमिर्त मचे±ट बंैकसर्, अनध्िकृत रूप से निजी नियोजन, मूल्य की कृत्रिाम वृि, नए निगर्मों पर अनावश्यक अध्िशुल्क, वंफपनी अध्िनियम के प्रावधानों की अवहेलना, स्टाॅक एक्सचेंज के नियमों एवं विनियमों को तोड़ना तथा सूचीब(ता की जरूरत न पूरी करना तथा शेयरों की डिलीवरी ;पहुँचनेद्ध में देरी आदि शामिल है। इन व्यापार दुराचारों या अपराधों तथा बहुसंख्या निवेशकों की श्िाकायतों ने निवेशकों के विश्वास को तोड़ डाला और निवेशकों की समस्याओं से निपटने में सरकार तथा शेयर बाशार बिना कागजी एवं कानूनी प्रावधानों के खुद को लाचार महसूस करते थे। उपयुक्त दृष्िटकोणों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने यह निणर्य लिया कि एक नियंत्राक निकाय स्थापित किया जाना चाहिए जिसे भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोडर् के नाम से जाना गया। सेबी की भूमिका एवं उद्देश्य सेबी का मूल उद्देश्य एक ऐसे पयार्वरण को पैदा करना है जो प्रतिभूति बाशारों के माध्यम से संसाध्नों को नियोजन एवं सक्षम गतिशीलता को सुसाध्य बनाए। इसके साथ ही इसका उद्देश्य प्रतिस्पधर् के उत्प्रेरित करना तथा नवाचारों को प्रोत्साहित करना है। इस पयार्वरण के अंतगर्त नियम एवं विनियम, संस्थान एवं उनके अंतर - संबंध्, प्रपत्रा, व्यवहार, बाह्य संरचना एवं नीतिगत ढाँचा आदि सम्िमलित हंै। ऽ इस माहौल या पयार्वरण का उद्देश्य तीन समूहों की जरूरतों को पूरा करना है जो कि मूलतः बाशार का गठन करते हैं अथार्त् प्रतिभूतियों के निगर्मकतार् ;जारीकतार्द्ध निवेशक तथा बाशार मध्यस्थ। ऽ निगर्मकतार् या जारीकतार् हेतु - इसका उद्देश्य एक बाशार उपलब्ध् कराना है जिसे वे वित्त उगाहने हेतु विश्वास के साथ आगे बढ़कर देख सकते हैं जहाँ वे अपनी आवश्यकता को आसानी से, बिना भेदभाव ;निष्पक्षद्ध एवं सक्षम तरीके से प्राप्त कर सकते हंै। ऽ निवेशकों हेतु - इसका उद्देश्य उनके अध्िकारों एवं हितों को औचित्यपूणर्, परिपूणर् एवं अध्िकृत सूचनाएँ तथा निरंतरता के आधर पर सूचनाएँ प्रदान कर संरक्ष्िात करना है। ऽ मध्यस्थों हेतु इसका उद्देश्य यह है कि इन लोगों को चाहिए कि पयार्प्त एवं सक्षम बाह्य संरचना प्रतियोगितात्मक, व्यावसायिकतापूणर् एवं व्यापक बाशार को प्रस्तावित करें, ताकि वे निवेशकों एवं निगर्मकों को सवोर्त्तम सेवाएँ उपलब्ध् करा सवेंफ। सेबी के उद्देश्य वुफल मिलाकर सेबी के उद्देश्य निवेशकों के हितों को संरक्ष्िात करना तथा उनके विकास को प्रोत्साहित करना तथा प्रतिभूति बाशार का विनियमित करना है। इन्हें निम्नलिख्िात रूप से स्पष्ट किया जा सकता है - 1.शेयर बाशार तथा प्रतिभूति उद्योग को विनियमित करना ताकि क्रमब( ढंग से उनकी ियाशीलता को बढ़ावा मिले। 2.निवेशकों के अध्िकारों और हितों की रक्षा करना विशेष रूप से वैयक्ितक निवेशकों को तथा उन्हें मागर्दश्िार्त एवं श्िाक्ष्िात करना। 3.व्यापार कदाचारों ;दुराचारोंद्ध को रोकना तथा प्रतिभूति उद्योग के स्व नियामन द्वारा एवं इसके वैधानिक विनियमन के बीच एक संतुलन प्राप्त करना। 4.मध्यस्थों जैसे कि दलाल ;ब्रोकसर्द्ध, मचे±ट ;श्रेष्ठीद्ध बैंकसर् आदि के द्वारा एक आचार संहिता एवं निष्पक्ष व्यवहार को, उन्हें प्रतियोगी एवं व्यावसायिक बनाने के दृष्िटकोण के साथ विकसित एवं विनियमित करना। सेबी के कायर् भारत में प्रतिभूति बाशार की उभरती प्रकृति को ध्यान में रखते हुए सेबी को विनियमन तथा प्रतिभूति बाशार का विकास - दोनों कायो± की सुपुदर्गी सौंपी गइर् थी। सेबी के कायो± की निकासी इसके उद्देश्य से होती है। इसलिए कह सकते हैं कि इसके तीन प्रकार के कायर् हैं: ;पद्ध सुरक्षात्मक ;पपद्ध नियमनकतार् और ;पपपद्ध विकासपूणर् इनमें से वुफछ इस प्रकार हैं - सुरक्षात्मक कायर् ;पद्ध सेबी प्रतिभूति बाशार में धेखा - ध्ड़ी एवं अनुचित कायो± पर प्रतिबंध् लगाती है। अनुचित व्यापारिक कायो± में निम्न सम्िमलित हैं - ऽ प्रतिभूतियों के बाशार मूल्यों में वृि अथवा घटोत्राी के एक मात्रा उद्देश्य के लिए हेरापेफरी करना। इन ियाओं पर कानून ने रोक लगा दी है क्योंकि वे निवेशकों के साथ धोखा - धड़ी कर सकते हैं। इसके लिए मूल्य में हेरापेफरी शब्द का प्रयोग किया है। ;देखें बाॅक्सद्ध ऽ ऐसे झूठे कथन जिससे किसी भी व्यक्ित को प्रतिभूतियों के क्रय - विक्रय के लिए उकसाया जा सके। ;पपद्ध सेबी शेयरों के भीतरी व्यापार पर रोक लगा रखी है। आंतरिक व्यक्ित वह व्यक्ित होता है जो वंफपनी से जुड़ा होता है। उसे वंफपनी की प्रतिभूतियों के प्रभावित करने वाली सूचना प्राप्त होती हैं जो जन साधारण को प्राप्त नहीं होती हैं। ;पपपद्ध सेबी निवेशकों को श्िाक्ष्िात करने के लिए कदम उठाती है। ;पअद्ध प्रतिभूति बाशार में उचित कायो± एवं आधार संहिता को बढ़ावा देती है। वित्तीय बाशार ऽ सेबी ने )ण पत्राधारियों के हितों के रक्षाथर् दिशा निदेर्श दिए हैं जिन के अनुसार वंफपनी स्वयं से )ण पत्राधारियों के कोषों को कहीं अन्यत्रा निवेश नहीं कर सकती तथा शतो± को बीच में ही नहीं बदल सकती। नियमन कत्तार् कायर् 1.दलालों एवं उपदलालों तथा बाशार के अन्य ख्िालाडि़यों का पंजीकरण। 2.सामूहिक निवेश योजनाओं तथा म्युचुअल पंफडों का पंजीकरण। 3.शेयर दलालों तथा पफोटर्पफोलियो एक्सचेंजेस ;पफाइल विनिमयद्ध तथा मचे±ट बंैकसर् का पंजीकरण। 4. धेखेबाजी एवं अनुचित व्यापारों की रोकथाम। 5.आंतरिक व्यापार एवं नियंत्राणकारी बोलियों पर नियंत्राण तथा ऐसे व्यवहारों के ऊपर दंड लगाना। 6.उद्यमों में पयर्वेक्षण करना, जाँच - पड़ताल आयोजित करने के द्वारा जानकारी ;सूचनाद्ध माँगना और शेयर बाशारों तथा मध्यस्थों की लेखा - परीक्षा करना। 7.अध्िनियम के उद्देश्यों के बाहर किए जाने वाली गतिविध्ियों पर अध्िशुल्क या कोइर् अन्य प्रभार लगाना। 8.एस.सी.आर. अध्िनियम 1956 के तहत दिए गए अध्िकारों को निष्पादित एवं ियान्िवत करना, जैसा कि भारत सरकार द्वारा सौंपे जा सकते हैं। विकासपूणर् कायर् 1.निवेशक श्िाक्षा। 2.मध्यस्थों को प्रश्िाक्षण। सेबी नियमों के उल्लंघनकतार् सेबी ने गुरुवार को आइर्.डी.एपफ.सी. के आरंभ्िाक सावर्जनिक प्रस्ताव ;आइर्. पी. ओ.द्ध के लिए आइर्. पी. ओनियमों के दुरुपयोग को उद्घाटित किया है, जहाँ वुफछ निवेशकों ने वंफपनी के भारी संख्या में शेयरों के बाशार समेटने के लिए 14,000 से अध्िक विद्रव्यीकृत खातों को खोला है। यह इस प्रकार की दूसरी घटना है, जबकि ठीक ऐसी ही उल्लंघनताएँ इस बैंक के आइर्.पी.ओ. में पकड़ी गइर् थीं। सेबी ने बताया कि आइर्. डी. एपफ. सी. के आइर्. पी. ओ. में भी, चार निवेशकों ने 14,807 विद्रव्यीकृत खाते कावीर् - डी.पी. और ‘स्ट्रेन्जेली’ के साथ खोले, इन सभी खाता धरकों के बैंक खाते भारत ओवरसीज बैंक लिमिटेड, अहमदाबाद में खोले गए हंै। सेबी का आदेश कहता है, फ्प्रणालीगत ;सिस्टेमिकद्ध असपफलता के लिए और अध्िक जाँच पड़ताल की आवश्यकता है, और क्या वुफछ कावीर् - आर.टी.आइर्. अथार्त् कावीर् वंफप्यूटर शेयसर् प्रा. लि. तथा कोटक महिन्द्रा वैफपिटल वंफपनी, डी.एस.पी. मेरिल लिंच लिमिटेड तथा एस.वी.आइर्. वैफपिटल लिमिटेड जैसे अग्रणी प्रबंध्कों में बेनामी आवेदन पहचानने और छँटाइर् में पाए जाते हैं।य् आर.बी.आइर्. को यह संदभ्िार्त किया जा चुका है कि वह बी.एच.ओ.बी., एच.डी.एपफ.सी. बैंक, इंडियन ओरवरसीज बैंक आइ.एन.जी. वैश्या बैंक तथा विजया बैंक में इन बेनामी बैंक खाता के अस्ितत्वों को एवं स्पष्ट रूप इन्हें पंफडिग करने वालों की भूमिका की जाँच की जाए। ड्डोत - दि इकोनाॅमिक टाइम्स 3.उचित आचरणों ;व्यवहारोंद्ध तथा सभी एस.आरओज के लिए सहिता को बढ़ावा देना। 4.अनुसंधन आयोजित करना तथा बाशार के सभी भागीदारों के लिए उपयोगी सूचनाओं का प्रकाशन। सेबी का संगठनात्मक ढाँचा जैसा कि सेबी एक वैधनिक निकाय है अतः यहाँ पर इसके ियाकलाप का दायरा एवं विस्तार बहुत व्यापक है। सेबी के प्रत्येक ियाकलाप अब अिाक सावधनी, निकटता, समन्वय एवं सघन ध्यान की माँग करते हंै ताकि इसके उद्देश्यों को पाने के योग्य हो जाएँ। इसके अनुसार, सेबी को पुनर्गठित एवं विस्तार क्षेत्रा के अनुसार तालमेल हेतु तवर्फ संगत बनाया गया है। इसने अपने कायर्कलापों को पाँच कायार्त्मक विभागों में करने का निणर्य लिया है। प्रत्येक विभाग की अगुवाइर् एक कायर्कारी निदेशक करता है। इसके मुंबइर् मुख्यालय के अलावा, सेबी ने अपने क्षेत्राीय कायार्लय कोलकाता, चेन्नइर् तथा दिल्ली में भी खोले हंै जिससे कि संबंध्ित क्षेत्रा के निगर्मनकतार्, मध्यस्थों तथा शेयर बाशारों के साथ निवेशक की श्िाकायतों एवं संब( अनुचितों को देखा जाए। इसके साथ ही सेबी ने दो सलाहकार समितियाँ गठित की हंै। ये प्राथमिक बाशार सलाहकार समिति तथा द्वितीयक बाशार सलाहकार समिति हैं। इस समिति में बाशार के ख्िालाड़ी ;या पात्राद्ध तथा सेबी द्वारा मान्यता प्राप्त निवेशक संगठन तथा पूँजी बाशार की नामी - गिरामी हस्ितयाँ शामिल हैं। ये सेबी की नीतियों हेतु महत्त्वपूणर् निवेश/विचार देते हैं। इन दो समितियों के उद्देश्य निम्नानुसार हंै - ;कद्ध प्राथमिक बाशार में निवेशों के हितों की रक्षा सुनिश्िचत हेतु मध्यस्थों के विनियमन से संबंिात मामलों पर सलाह देना। ;खद्ध भारत में प्राथमिक बाशार के विकास से संबंिात मुद्दों पर सेबी को सलाह देना। वित्तीय बाशार ;गद्ध वंफपनियों के लिए अपेक्ष्िात प्रकटन पर सेबी हालाँकि, इन समितियों की प्रकृति गैर को सलाह देना। वैधनिक है और सेबी इनकी सलाहों से बाध्य ;घद्ध प्राथमिक बाशार में सरलीकरण एवं पारदश्िार्ता नहीं हैं ये कमेटियाँ सेबी के उन सतत् प्रयासों को प्रस्तुत करने हेतु कानूनी ढाँचे में बदलाव का हिस्सा हैं जिसे पूरा करने हेतु, बाशार के हेतु सलाह देना। विकास एवं विनियमन से जुड़े मुद्दों पर विभ्िान्न बाशार के ख्िालाडि़यों से एक प्रतिप्रेषण;घद्ध देश में द्वितीयक बाशारों के विनियमन एवं ;पफीडबैकद्ध प्राप्त हो।विकास से संबंध्ित मामलों के लिए बोडर् को सलाह देना। मुख्य शब्दावली वित्तीय बाशार मुद्रा बाशार राजकोष बिल वाण्िाज्ियक पत्रा शीघ्रावध्ि द्रव्य आर.इर्.पी.ओ बचत प्रमाण - पत्रा वाण्िाज्ियक बिल प्राथमिक बाशार म्युचुअल पंफड पूँजी बाशार सेबी द्वितीयक बाशार स्टाॅक एक्सचेंज एन.एस.इर् ओ.टी.सी.इर्.आइर् सारांश वित्तीय बाशार - वित्तीय परिसंपिायों के विनिमय एवं रचना करने का बाशार है। यह बचतों को सवार्िाक उत्पादक उपयोगों में सरण्िात एवं संचारित ;गतिशीलद्ध करने में मदद करता है। वित्तीय बाशार वित्तीय परिसंपिायों हेतु द्र्रवता उपलब्ध् कराने तथा मूल्य खोजने में भी मदद करता है। मुद्रा बाशार - अल्पकालिक निध्ियों के लिए बाशार है। यह उन मौिक ;मुद्रात्मकद्ध परिसंपिायों का निपटान करता है जिनकी परिपक्वता अवध्ि एक वषर् से कम की है। मुद्रा या द्रव्य बाशार के प्रपत्रों ;उपस्करोंद्ध में राजकोष बिल, वाण्िाज्ियक पत्रा, शीघ्रावध्ि द्रव्य, रेपोज, बचत - प्रमाण पत्रा वाण्िाज्ियक बिल, प्रतिभागिता प्रमाण पत्रा तथा द्रव्य बाशारीय म्युचुअल पंफड शामिल होते हैं। पूँजी बाशार - वह जगह है जहाँ दीघर् कालिक निध्ियों को सरकारों तथा निगमित उद्यमों द्वारा संचारित किया जाता है। पूँजी बाशार को प्राथमिक बाशार एवं द्वितीयक बाशार में बाँटा जा सकता है। प्राथमिक बाशारों द्वारा उन नइर् प्रतिभूतियों से निपटता है जो पहले सावर्जनिक रूप से व्यापारीकृत नहीं थीं। द्वितीयक बाशार वह जगह है जहाँ विद्यमान प्रतिभूतियों को खरीदा और बेचा जाता है। स्टाॅक एक्सचेंज ;शेयर बाशारद्ध - वे संगठन हंै जो विद्यमान प्रतिभूतियों को बेचने व खरीदने का एक मंच प्रदान करते हैं। शेयर बाशार प्रतिभूतियों को एक सातत्य ;निरंतरद्ध बाशार, मूल्य खोजने में सहायता, शेयर स्वामित्व व्यापकता उपलब्ध् करते हैं तथा सट्टðेबाजी के लिए अवसर प्रदान करते हैं। भारतीय राष्ट्रीय शेयर बाशार ;छैम्द्ध नवीनतम, अति अध्ुनातन तथा तकनीकी संचालित एक्सचेंज है और इसे 1992 में निगमित किया गया था। ओ.टी.सी.इर्.आइर्. को 1992 में निगमित किया गया था जो 3 करोड़ या इससे कम पूँजी राश्िा की छोटी वंफपनियों को सूचीकृत करने की सुविधा उपलब्ध् कराता है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोडर् ;ैम्ठप्द्ध सेबी की स्थापना 1988 में की गइर् थी और इसे 1992 में वैधनिक निकाय का दजार् प्रदान किया गया था। सेबी की स्थापना निवेशकों के हितों की संरक्षा तथा प्रतिभूति बाशार के विकास एवं विनियमन के लिए की गयी थी। अभ्यास बहुविकल्पीय प्रश्न 1. प्राथमिक एवं द्वितीयक बाशार - ;कद्ध एक दूसरे से प्रतिस्पधर् करते है ;खद्ध एक दूसरे को सहयोग देते ;संपूरकद्ध हैं ;गद्ध स्वतंत्रा रूप से कायर् करते है ;घद्ध एक - दूसरे को नियंत्रिात करते हैं। 2.भारत में वुफल स्टाॅक एक्सचेंज ;शेयर बाशारोंद्ध की संख्या है - ;कद्ध 20 ;खद्ध 21 ;गद्ध 22 ;घद्ध 23 3.राष्ट्रीय शेयर बाशार ;छैम्द्ध का निपटान ;उधर चुकताद्ध चक्र है - ;कद्धटी $ 5 ;खद्धटी $ 3 ;गद्धटी $ 2 ;घद्ध टी $ 1 4. भारतीय राष्ट्रीय शेयर बाशार ;छैम्द्ध को स्टाॅक एक्सचेंज ;शेयर बाशारद्ध के रूप में मान्यता किस वषर् में मिली थी - ;कद्ध 1992 ;खद्ध 1993 ;गद्ध 1994 ;घद्ध 1955 5.एन. एस. इर्. ;छैम्द्ध के भावी व्यापार की शुरुआत किस वषर् में हुइर् - ;कद्ध 1999 ;खद्ध 2000 ;गद्ध 2001 ;घद्ध 2002 6.एन. एस. इर्. ;छैम्द्ध के क्िलयरिंग एवं निपटारा ियाकलाप किसके द्वारा वहन किए जाते हंै - ;कद्ध एन. एस. डी. एल.;खद्ध एन. एस. सी. सी. एल;गद्ध एस. बी. आइर्.;घद्ध सी. डी. एल. एल 7.ओ.टी.सी.इर्.आइर्. ;व्ज्ब्म्प्द्ध का प्रारंभ किसकी तजर् पर हुआ था - ;कद्ध नैसडेक ;खद्ध एन. एस. वाइर् .इर्;गद्धनासाक ;घद्ध एन. एस. इर्.8.ओ.टी.सी.इर्.आइर्. ;व्ज्ब्म्प्द्ध में सूचीब( होने के लिए कितनी न्यूनतम पूँजी की आवश्यकता है - ;कद्ध 5 करोड़ रुपए ;खद्ध 3 करोड़ रुपए ;गद्ध 6 करोड़ रुपए ;घद्ध 1 करोड़ रुपए 9.राजकोष बिल मूलतः होते हैं - ;कद्ध अल्प कालिक पंफड उधर के प्रपत्रा ;खद्ध दीघर् कालिक पंफड उधर के प्रपत्रा ;गद्ध पूँजी बाशार के एक प्रपत्रा ;घद्ध उपयुर्क्त वुफछ भी नहीं वित्तीय बाशार लघु उत्तरीय प्रश्न 1.एक वित्त बाशार के क्या प्रकायर् हैं? 2.चचार् करें - फ्मुद्रा अनिवायर्तः अल्प कालिक निध्ियों के लिए बाशार है।य् 3.एक राजकोष ;ट्रेजरीद्ध बिल क्या है? 4.रेपो और रक्ष्िात ;रिजवर्द्ध रेपो क्या है? 5.पूँजी बाशार तथा मुद्रा बाशार के बीच अंतर करें। 6.एक स्टाॅक एक्सचेंज ;शेयर बाशारद्ध के क्या प्रकयर् हैं? 7.सेबी ;ैम्ठप्द्ध के क्या उद्देश्य हैं? 8.नेशनल स्टाॅक ऐक्सचेंज ;छैम्द्ध के क्या उद्देश्य हैं? 9.ओ. टी. सी. इर्. आइर्. ;व्ज्ब्म्प्द्ध क्या है? दीघर् उत्तरीय प्रश्न 1.विभ्िान्न द्रव्य बाशार प्रपत्रों की व्याख्या करें। 2.प्राथमिक बाशार में फ्रलोटेशन ;अस्िथर पूँजीद्ध की क्या विध्ियाँ हैं। 3.भारत में पूँजी बाशार के सुधर की व्याख्या करें। 4.सेबी ;ैम्ठप्द्ध के प्रकायो± एवं उद्देश्यों की व्याख्या करें। 5.एन. एस. इर्. ;छैम्द्ध के विभ्िान्न खंडों की व्याख्या करें। परियोजना एवं निदिर्ष्ट कायर् 1.उन वंफपनियों के बारे में जानकारी एकत्रा करें जिन्होंने प्राथमिक बाशार के माध्यम से संसाध्नों को संचारित ;गतिशीलद्ध किया हो। 2.सेबी द्वारा उठाए गए उन उपायों के बारे में जानकारी एकत्रा करें जो उसने अपने प्रारंभ से निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए उठाए हैं। 3.अपने शहर के व्यापार वेंफद्र पर अपने छात्रों के एक समूह को भेजंे ताकि प्रतिभूतियों के व्यापार संबंधी प्राथमिक जानकारियाँ प्राप्त कर लाभ उठाएं और एक रिपोटर् तैयार करें। 4.संवेदी सूचकांक ;सेंसेक्सद्ध और निफ्रटी ;छप्थ्ज्ल्द्ध के गतिविध्ियों के बारे में पिछले माह के सभी आँकड़े एकत्रा करें। इसमें पता करें एक ही दिशा में या विपरीत दिशा में दो संचालन ;मूवद्ध हुए हों। 5.सेबी की उन कायर्वाहियों की जानकारी एकत्रा करें जो उसने पिछले दो वषो± में निवेशकों की संरक्षा में संपन्न की हों। 6.भारतीय बाशार में पिछले एक वषर् में इर्. आर. पी. ओ. के बारे में जानकारी एकत्रा करें। प्रयास कीजिए और इस वगर् पहेली को हल कीजिए संकेत आर पार 1.कमीशन एजेंट वह है जो सदस्य या गैर सदस्य के बदले में प्रतिभूतियों की लेन - देन ;अंतरणद्ध करे;6द्ध 2.शेयर बाशार ;स्टाॅक मावेर्फटद्ध में प्रतिभूतियों के मूल्य में परिवतर्न ;12द्ध 4.स्टाक मावेर्फट ;शेयर बाशारद्ध में प्रतिभूतियों की अध्िकृत व्यापार सूची में प्रतिभूतियों का सम्मेलन;7द्ध 8.व्यापार प् प्रतिभूतियों का स्थान ;6द्ध 9.शेयर को खरीद मूल्य से कम मूल्य पर बेचने का परिणाम ;4द्ध 13.प्रतिभूतियों में एक स्वतंत्रा डीलर ;व्यापारीद्ध ;6द्ध 15.शेयर, स्िव्रफप्ट्स, बंध्पत्रा ;बांडद्ध )णपत्रा सम्िमलित हैं ;10द्ध 16.सट्टðेबाज - जो यह आशा करता है कि मूल्य नीचे जाएँगे ;4द्ध 17.बाशार को प्रतिभूतियों के क्रय व विक्रय से प्रभावित ;परिचालितद्ध करना ;7द्ध 18.सट्टðेबाज जो केवल नइर् प्रतिभूतियों में निपटान करता है ;4द्ध अधेगामी 1.मूल्य में बढ़ोतरी ;उछालद्ध की उम्मीद करने वाला सट्टðेबाज ;4द्ध 3.साध्य/साध्न सहित ;3द्ध 5.पूँजी का विखंडन या साध्न का हिस्सा ;6द्ध 6.लाभ का विखंडन सरकार को प्रदत्त ;3द्ध 7.गैर कानूनी, अवसर पर आधरित खेल ;8द्ध 9.शेयर बाशार में प्रतिभूतियों पर अध्िकृत बयान ;5द्ध वित्तीय बाशार 10.जो लाभ के उद्देश्य से प्रतिभूतियों को बेचते व खरीदते हैं ;10द्ध 11.व्यवसाय में निवेश्िात ध्न/द्रव्य ;7द्ध 12.लाभ के अतिरिक्त शेयर पर वापसी ;8द्ध 14.एक )ण को अभ्िास्वीकृत करने वाला प्रपत्रा ;9द्ध 16.एक )ण को अभ्िास्वीकृत करने वाला सरकारी अभ्िालेख ;5द्ध 19.लाभ या प्राप्ित ;4द्ध समस्या प् ‘आर’ लिमिटेड एक रीयल स्टेट वंफपनी है जो 1950 में स्थापित की गइर् थी। अपने 56 वषो± की विद्यमानता से वंफपनी ने इस क्षेत्रा में अपना एक अलग स्थान बनाया है बाद में इस क्षेत्रा में एक तेजी दिखाइर् पड़ी जो कि भारतीय अथर्व्यवस्था के ऊपर उठने का नतीजा है। मध्य वित्त वगर् परिवारों की आय बढ़ रही है। अब वे आसानी से )ण प्राप्ित की सुविध तथा आयकर में छूट जुड़े होने के कारण अपने लिए घर खरीदना वहन कर सकते हैं। वंफपनी अपने काम को भारत और विदेशों में विस्तारित करने के लिए द्रव्य जुटाने के अनेक विकल्प तोल रही है। वे इक्िवटी या )ण बाशार में जाएँ या पिफर घरेलू बाशार में या अंतरार्ष्ट्रीय बाशार या दोनों में संयुक्त रूप से द्रव्य उगाहें। क्या वह अपनी पूँजी मुद्रा बाशार से जुटाएं या पिफर पूँजी बाशार से। इसके साथ ही वे यह भी योजना बना रहे हैं कि खुद को न्यूयावर्फ स्टाॅक एक्सचेंज में सूचीब( कर ए. टी. आरके माध्यम से ध्न उगाहना चाहते हंै। वे अपने प्रस्ताव को आकषर्क बनाने के लिए यह योजना बना रहे हंै कि पणधरियों एवं निवेशकों वित्तीय योजनाओं को प्रस्ताव का झुंड ;समूहद्ध प्रदान करें, इसके साथ ही वे सेबी के विनियमनों को पूरा करने के बाद एन. एस. इर्. में सूचीब( करा कर विस्तार करें। ;पद्ध वंफपनी एन. एस. इर्. में सूचीब( करने से क्या लाभ प्राप्त करेगी? ;पपद्ध सेवी के विनियमन क्या हंै जो वंफपनी का निश्िचत रूप से पालन करते हैं? ;पपपद्ध निवेशकों के हित में सेबी आर लिमिटेड के ऊपर वैफसे नियंत्राण निस्पादित करती है? समस्या प्प् एन.एस.सी. इंडिसेस विश्व बाशार सूचकांक सूचकांक वतर्मान पूवर् :परिवतर्न सूचकांक वतर्मान पूवर् :परिवतर्न एस.एंड पी. सी.एन.एक्स. निफ्रटी 3641ण्1 3770ण्55 .3ण्43ः एन.वाइर्.एस.इर्. काॅमपोसिट 8926ण्88 9120ण्93 .2ण्13ः सी.एन.एक्स. निफ्रटी जूनियर 6458ण्55 6634ण्85 .2ण्66ः नैस्डेक काॅमपोसिट 2350ण्57 2402ण्29 .2ण्15ः सी.एन.एक्स. आइर्.टी 5100ण्5 5314ण्05 .4ण्02ः डो जोन्स आइर्.ऐ 12076 12318ण्6 .1ण्97ः बैंक निफ्रटी 5039ण्05 5251ण्55 .4ण्05ः एस. एंड पी. 500 1377ण्95 1406ण्6 .2ण्04ः सी.एन.एक्स. 100 3519ण्35 3640ण्35 .3ण्32ः निक्की 225 16676ण्9 17178ण्8 .2ण्92ः अतिरिक्त अंतिम अपडेट माचर् 14ए 2007 12रू00रू00 बजे आइर्.एस.टी.ड्डोत - ूूूण्देमपदकपंण्बवउ 14 माचर्, 2007 उपरोक्त आँकडे़ भारतीय नेशनल स्टाॅक एक्सचेंज की वैबसाइट से लिए गए हैं। ये आंकडे एन.सी.सी के इंडिसेस के साथ - साथ विश्व स्टाॅक के परिवतर्न को भी समय तिथ्िा पर प्रद£शत करते हैं। प्रश्न 1.इंडेक्स सूचकांक से आप क्या समझते हैं? इसकी गणना वैफसे की जाती है? 2.एन.एस.सी. स्टाॅक इंडिसेस की विभ्िान्न गतियों से आप क्या निष्कषर् निकाल सकते हैं? 3.वह कौन से कारक हैं जो स्टाॅक इंडिसेस की गति को प्रभावित करते हैं? इन कारकों की प्रवृफति की व्याख्या कीजिए। 4.विश्व बाशार के इंडिसेस और एन.एस.सी. इंडिसेस के बीच आप क्या संबंध् पाते हैं? 5.उपरोक्त सभी दिए गए इंडिसेस का वणर्न कीजिए। आप वैब द्वारा या बिशनेस पत्रिाकाओं से जानकारी हासिल कर सकते हैं। ;अध्यापक को विद्या£थयों की इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़ने में मदद करनी चाहिए। वह दी गइर् वैबसाइट और सेबी की वैबसाइट ूूूण्ेमइपण्हवअण्पद द्वारा श्िाक्षा सामग्री प्राप्त कर सकते हैं। यह अभ्यास विद्य£थयों को शेयर बाशार को स्पष्ट रूप से समझने और उसके प्रति रुचि पैदा करने में भी मददगार साबित होगीद्ध परियोजना कायर् 1.मुंबइर् स्टाॅक एक्सचेंज की वैबसाइट का अध्ययन कीजिए ;ूूूण्इेमपदकपंण्बवउद्ध और उपयोगी सूचनाओं को इकऋा कीजिए। इस पर अपनी कक्षा में विचार - विमशर् कीजिए और पता लगाइये कि किस प्रकार यह आपको मदद करेगा कि आपको शेयर बाशार में निवेश करना चाहिए। अपने अध्यापक की सहायता से अपनी उपलब्िधयों की एक रिपोटर् तैयार कीजिए। 2.सेबी द्वारा भारतीय शेयर बाशार के नियमन में उसकी भूमिका पर एक रिपोटर् तैयार कीजिए। आप इस जानकारी को वैबसाइट जिसका पता है - ूूूण्ेमइपण्हवअण्पद पर भी प्राप्त कर सकते हैं। क्या आप समझते हैं कि किसी अन्य प्रकार से शेयर बाशार में निवेशकों की संख्या में वृि की जा सकती है? वगर् पहेली का हल आर पार 1ण् ठतवामत 2ण् थ्सनबजनंजपवदे 4ण् स्पेजपदह 8ण् डंतामज 9ण् स्वेे 13ण् श्रवइइमत 15ण् ैमबनतपजपमे 16ण् ठमंत 17ण् त्पहहपदह 18ण् ैजंह अधोगामी 1ण् ठनसस 3ण् ब्नउ 5ण् ैजवबो 6ण् ज्ंग 7ण् ळंउइसपदह 9ण् स्पेजे 10ण् ैचमबनसंजवत 11ण् ब्ंचपजंस 12ण् क्पअपकमदक 14ण् क्मइमदजनतम 16ण् ठवदके 19ण् ळंपद

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