अध्िगम उद्देश्य इस अध्याय के अध्ययन के पश्चात् आप - ऽ विपणन के अथर् को समझा सवेंफगेऋ ऽ ‘विपणन’ एवं ‘विक्रय’ में अंतर कर सवेंफगेऋ ऽ विपणन के महत्त्वपूणर् कायो± को सूचीब( कर सवेंफगेऋ ऽ अथर्व्यवस्था के विकास में विपणन की भूमिका पर विचार कर सवेंफगे एवंऋ ऽ विपणन मिश्रण के घटक को समझा सवेंफगेऋ ऽ उत्पादों को विभ्िान्न वगो± में वगीर्करण कर सवेंफगेऋ ऽ मूल्य निधर्रण के तत्व का विश्लेषण कर सवेंफगेऋ ऽ वितरण प्रणाल के विभ्िान्न प्रकारों का सूची बना सवेंफगेऋ ऽ प्रवतर्न मिश्र के तकनीकों - विज्ञापन वैयक्ितक विक्रय, विकास संवध्र्न एवं प्रचार को समझा सवेंफगे। विपणन वंफपनियाँ अपना व्यवसाय कहाँ करती हैं? बाशार में अथवा समाज में? यह एक निविर्वाद सत्य है कि वंफपनी केवल अपने उपभोक्ताओं के कारण ही जीवित नहीं रहती बल्िक सरकार, धमिर्क नेता, सामाजिक कायर्कतार्, एन.जी.ओमीडिया आदि पर भी निभर्र करती है। इसलिए इन पक्षों की संतुष्िट भी अपरिहायर् है क्योंकि यह मौख्िाक प्रचार से ब्रांड शक्ित में वृि करती हैं। समाज का ध्यान रखने से ब्रांड की शक्ित में वृि होती है। जिन वंफपनियों ने गहनतम सामाजिक मूल्यों को अपनाया है वह एक सशक्त ब्रांड के निमार्ण में सपफल रहे हैं तथा अंत में उनके बड़ी संख्या में ग्राहक बने हैं। निगमत सामाजिक न्याय के क्षेत्रा को दो वगो± में बाँटा जा सकता है। पहले वगर् में बच्चों का पोषण, उनकी देखभाल, बुजुगो± के लिए घर, भूख को समाप्त करना, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करना आदि जैसी समस्याएँ आती हैं, मानवीयता के तौर पर जिन पर तुरंत ध्यान देना आवश्यक है। समस्याएँ जो समाज को एक लंबी अवध्ि में रहने का एक सुंदर स्थान बनाती हैं दूसरे वगर् में आती हैं। स्वास्थ्य के संबंध् में जागरुकता तथा सहायता, श्िाक्षा, पयार्वरण संरक्षण, महिलाओं को रोशगार एवं उन्हें सशक्त बनाना, गैर न्यायोचित भेदभाव ;जाति, समुदाय, ध्मर्, वफौम वगर् - भेद लिंग के आधर परद्ध को रोकना, रोशगार के माध्यम से गरीबी को दूर करना, संस्कृति की सुरक्षा मूल्य, नैतिकता, अनुसंधान में योगदान आदि दूसरे वगर् में आते हैं। साॅफ्रटवेयर सलाह सेवा प्रदान करने वाली अग्रणी वंफपनी इनपफोसिस टेक्नोलाॅजीस प्ैव् 14001 द्वारा प्रमाण्िात है। डैट नोस्र्के वैरीटास इसके पूणे, चेन्नइर्, बैंगलोर, भुवनेश्वर, हैदराबाद, मंगलौर, मोहाली तथा मैसूर स्िथत इसके ‘ओजोन की पहल’ के लिए समथर्न दिया है। प्रोक्टर एंड गैंबल्स ;च् - ळद्ध का दशर्न है कि इसे वैश्िवक पयार्वरण कायर्क्रम के ियान्वयन में उद्योग जगत को नेतृत्व प्रदान करना चाहिए। च् - ळ दुनिया की उन पहली वंफपनियों में से एक है जो उपभोक्ता पदाथो± के पयार्वरण पर प्रभाव के अध्ययन में सिय है तथा जिसने उत्पाद, प्लास्िटक की शीश्िायों के पुनः क्रमण रावं पुनः भरावन पैकेजों से उद्योग का परिचित कराया है। प्रति पेटी पैकेजिंग में औसतन 27 प्रतिशत कमी की है तथा 1990 से निरंतर हवा, वूफड़ा करकट तथा पानी की निकासी में 37 प्रतिशत की कमी की है। च् - ळ विकास को बनाए रखने में योगदान देता है तथा अपने उत्पाद एवं सेवाओं से संबंिात पयार्वरण एवं सामाजिक समस्याओं का समाधन करता है। ड्डोत - ‘इपेफक्िटव एक्िजक्यूटिव,’ पफरवरी 2006 आइए अपने जीवन के विशेष दिन पर ध्यान दें। प्रातः उठने से लेकर रात को सोने के लिए जाने तक अपनी विभ्िान्न आवश्यकताओं की पूतिर् के लिए हम अनेक उत्पादों का उपयोग करते हैं। नाश्ते से प्रारंभ करें तो हम डबल रोटी, मक्खन, दूध् एवं चावल का उपभोग करते हैं जिससे हमारी भूख मिटती है। अपने विद्यालय अथवा कायर् स्थल तक पहुँचने के लिए हम बस अथवा आॅटो या पिफर साइर्कल का प्रयोग करते हैं। अपने आपको विभ्िान्न सूचनाओं से अवगत कराने तथा ज्ञान प्राप्ित के लिए पुस्तक, पत्रिाकाएँ एवं समाचार पत्रा पढ़ते हैं। संप्रेषण/मनोरंजन के लिए वंफप्यूटर, सैल पफोन, टेलीविजन तथा अन्य गजट का प्रयोग करते हैं। इसी प्रकार से अपनी अन्य दूसरी आवश्यकताओं की पूतिर् हेतु बाशार से उपहार, जूते, कपड़े, पफनीर्चर आदि खरीदते हैं। इन उत्पादों को कौन बनाता है तथा क्यों बनाता है? इन उत्पादों का विनिमार्ण तथा इनका विपणन अलग - अलग पफमे± करती हंै। जैसे ¯हदुस्तान लीवर लाइपफबाॅय साबुन, क्लोजअप टूथपेस्ट, सपर्फ डिटजे±ट पाउडर बनाती हैऋ प्रोक्टर एंड गैंबल ऐरियल डिटजे±ट पाउडर, नैसले डेरीमिल्क चाॅकलेट, एटलस साइर्कल वंफपनी एटलस साइर्कलऋ क्वालिटी बाल्स क्वालिटी आइसक्रीम, एल. जी. इलेक्ट्राॅनिक्स, एल.जी. टेलीविजन का निमार्ण करती हैं। उदाहरण और भी हैं। इन व्यावसायिक इकाइयों को ‘विपणनकतार्’ कहते हैं। यह पफमेर् अपने उत्पादों की माँग में वृि के लिए तथा ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा कर लाभ कमाने के लिए अनेक ियाएँ करती हैं। लोग इन उत्पादों को इसलिए खरीदते हैं क्योंकि यह उनकी वुफछ आवश्यकताओं की पूतिर् करती हैं। इन वस्तुओं के उत्पादनकतार् एवं उपभोग कतार्ओं के बीच वस्तु एवं सेवाओं के विनिमय के लिए विपणनकतार् कइर् ियाएँ करते हैं। इन ियाओं को विपणन ियाएँ कहते हैं। विपणन के अथर् को सही रूप से समझने के लिए कइर् प्रश्नों का उत्तर देना आवश्यक है ये हैं - आप बाशार से क्या समझते हैं? किस चीज का विपणन किया जा सकता है? वस्तुएँ क्या हैं अथवा सेवाएँ या पिफर वुफछ और? विपणनकतार् कौन होता है? विपणन प्रबंध् क्या है? इन सब पर चचार् आगे के अनुभागों में की जाएगी। फ्व्यवसाय वित्तीय विज्ञान न होकर, व्यापार, क्रय एवं विक्रय है। इसका संबंध् ऐसी श्रेष्ठ वस्तु एवं सेवाओं के उत्पादन से हैं जिनके लोग भुगतान करने को तत्पर हो जाएँगे।य् एंटा रोडिक फ्विपणन को एक दिन में सीखा जा सकता है। लेकिन दुभार्ग्यवश इसमें दक्षता प्राप्त करने के लिए समय लगता है।य् पिफलिप कोटलर बाशार का अथर् प्रचलित रूप से बाशार से अभ्िाप्राय उस स्थान से है जहाँ व्रेफता एवं विव्रेफता वस्तु एवं सेवाओं के विनिमय संबंध्ी लेन - देन करते हैं। आज भी आम बोलचाल की भाषा में बाशार शब्द को इसी रूप में प्रयोग किया जाता है। दूसरे रूप में इस शब्द का प्रयोग इनके संदभर् में किया जाता है - उत्पाद बाशार ;रुइर् मंडी, स्वणर् अथवा शेयर बाशारद्ध, भौगोलिक बाशार ;राष्ट्रीय एवं अंतरार्ष्ट्रीय बाशारद्ध, उपभोक्ता के प्रकार ;पुफटकर बाशार एवं थोक बाशारद्ध लेकिन आध्ुनिक रूप में बाशार शब्द का व्यापक अथर् है। इससे अभ्िाप्राय किसी वस्तु अथवा सेवा के वास्तविक एवं संभावित व्रेफताओं के समूह से है। उदाहरण के लिए माना एक पैफशन डिशाइनर ने नए डिशाइन की पोशाक तैयार की है तथा वह इसका विनिमय करना चाहती है। वह सभी लोग जो इस पोशाक का क्रय करना चाहते हैं तथा इसका मूल्य चुकाने को तैयार हैं वह सभी मिलकर इस पोशाक का बाशार कहे जा सकते हैं। इसी प्रकार से पंखों का बाशार, साइर्कलों का बाशार, बिजली के बल्बों का बाशार अथवा शैम्पू का बाशार से अभ्िाप्राय इन सभी उत्पादों के वास्तविक एवं संभावित व्रेफताओं से है। विपणन क्या है? विपणन शब्द की व्याख्या अलग - अलग लोगों ने अलग - अलग ढंग से की है। वुफछ लोगों का मानना है कि वस्तुओं का क्रय और विपणन एक ही है। जब भी वह बाशार में वुफछ वस्तु अथवा सेवाओं की खरीददारी करने जाते हैं तो वह इसे विपणन कहते हैं। वुुफछ लोगों को भ्रांति है कि विक्रय ही विपणन है तथा उनका मानना है कि विपणन की िया किसी उत्पाद अथवा सेवा के उत्पादन के पश्चात् शुरू होती है। वुफछ लोग इसकी व्याख्या वस्तु के व्यापार अथवा उनके रूपांकन के रूप में करते हैं। यह सभी व्याख्याएँ आंश्िाक रूप से सही हो सकती हैं लेकिन विपणन बहुत व्यापक अवधरणा है जिसका वणर्न नीचे किया गया है - परंपरागत रूप से विपणन की व्याख्या इसके कायर् अथवा ियाओं के रूप में की गइर् है। इस अथर् में विपणन को उन व्यावसायिक ियाओं का निष्पादन माना जाता है जिनके कारण वस्तु एवं सेवाएँ उत्पादक से उपभोक्ता तक पहुँचती हैं। हम जानते हैं कि अध्िकांश विनिमार्ण में लगी पफमे± वस्तुओं का उत्पादन अपने स्वयं के उपभोग के लिए नहीं करती हैं बल्िक दूसरे लोगों के उपभोग के लिए करती हैं। इसीलिए वस्तु एवं सेवाओं को उत्पादक से उपभोक्ता तक ले जाने के लिए कइर् प्रियाएँ करनी होती हैं, जैसे उत्पाद का रूपांकन अथवा व्यापार, पैकेजिंग भंडारण, परिवहन, ब्रांडिग, विक्रय, विज्ञापन एवं मूल्य निधर्रण। इन सभी ियाओं को विपणन िया कहते हैं। अतः हम कह सकते हैं कि विक्रय, खरीददारी, क्रय - विक्रय किसी पफमर् की बड़ी संख्या में की जाने वाली प्रियाएँ हैं जिनको मिलाकर विपणन कहते हैं। यहाँ ध्यान देने की बात है कि विपणन मात्रा उत्पादन के बाद की िया नहीं है। इसमें कइर् वे ियाएँ सम्िमलित हैं जो वस्तुओं के वास्तविक उत्पादन से पूवर् की जाती हैं तथा उनके विक्रय के पश्चात् भी जारी रहती हैं। उदाहरण के लिए उपभोक्ता की आवश्यकताओं की पहचान करना, उत्पादन के विकास के लिए सूचना एकत्रिात करना, उपयुक्त उत्पाद पैकेज का रूपांकन करना तथा ब्रांड नाम देना ऐसी प्रियाएँ हैं जिन्हें वास्तविक उत्पादन को प्रारंभ करने से पहले किया जाता है। इसी प्रकार से बिक्री की पुनरावृिा के लिए ग्राहकों से अच्छे संबंधें के लिए कइर् प्रियाएँ की जाती हैं। वतर्मान में इस पर जोर है कि विपणन एक सामाजिक िया है। यह एक ऐसी प्रिया है जिसमें लोग वस्तु एवं सेवाओं का मुद्रा अथवा किसी ऐसी वस्तु में विनिमय करते हैं जिसका उनके लिए वुफछ मूल्य है। पिफलिपकोटलर ने विपणन की परिभाषा इस प्रकार दी है, फ्यह एक सामाजिक प्रिया है जिसके अनुसार लोगों के समूह उत्पादों का सृजन कर उन वस्तुओं को प्राप्त करते हैं जिनकी उनको आवश्यकता है तथा उन वस्तु एवं सेवाओं का स्वतंत्राता से विनिमय करते हैं जिनका कोइर् मूल्य है।य् इस प्रकार से विपणन एक सामाजिक प्रिया है जिसको लोग बातचीत कर दूसरों को एक विशेष प्रकार से व्यवहार के लिए प्रेरित करते हैं, जैसे किसी उत्पाद अथवा सेवा को क्रय करना। वह उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डालते। परिभाषा का ध्यान से विश्लेषण करने पर विपणन की निम्न विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं - 1. अपेक्षा एवं आवश्यकता - विपणन प्रिया व्यक्ित एवं समूह को वह जो वुफछ चाहते हैं उसे प्राप्त करने में सहायक होती हैं। अतः लोगों को विपणन प्रिया में लगने के लिए प्रेरित करने का प्राथमिक कारण उनकी वुफछ न वुफछ आवश्यकताओं की पूतिर् करना है। दूसरे शब्दों में विपणन प्रिया का पूरा ध्यान लोगों की एवं संगठनों की आवश्यकताओं पर होता है। आवश्यकता एक स्िथति है जिसमें व्यक्ित किसी चीज से वंचित हो जाता है अथवा उसे लगता है कि वह वंचित रह गया है। यदि इसकी पूतिर् नहीं होती है तो व्यक्ित असंतुष्ट एवं असहज हो जाता है। उदाहरण के लिए जब हमें भूख लगती है तो हम असहज और व्यग्र हो जाते हैं तथा उन चीजों की ओर देखने लगते हैं जो हमारी भूख को शांत करेगी। अपेक्षाएँ मनुष्य के लिए आधरभूत होती हैं तथा यह किसी वस्तु विशेष के लिए नहीं होती हैं। दूसरी ओर आवश्यकताएँ शालीनतापूवर्क परिभाष्िात वे उद्देश्य हैं जो अपेक्षाओं की संतुष्िट कर सकती हैं। दूसरे शब्दों में जिन मानवीय अपेक्षाओं को संस्कृति, व्यक्ितत्व एवं ध्मर् जैसे तत्व ढालते हैं उन्हें आवश्यकता कहते हैं। उदाहरण के लिए खाने की मूलभूत अपेक्षा के कइर् रूप हो सकते हैं जैसे दक्ष्िाणी भारतीय के लिए डोसा एवं चावल तथा उत्तरी भारतीय के लिए चपाती एवं सब्िजयाँ। एक विपणनकतार् का कायर् किसी संगठन में लक्ष्िात ग्राहकों की आवश्यकताओं की पहचान करना तथा उन उत्पाद एवं सेवाओं का विकास करना है जो इन अपेक्षाओं/अभावों की पूतिर् करते हैं। 2. उत्पाद का सृजन - विपणनकतार् बाशार के लिए उत्पाद का निमार्ण करता है। बाशार उत्पाद से अभ्िाप्राय किसी वस्तु के अथवा सेवा के संपूणर् प्रस्तावना से है जिनके लक्षण है - आकार, गुणवत्ता, रुचि आदि जो एक निश्िचत मूल्य पर, निश्िचत दुकान अथवा स्थान पर उपलब्ध् है। उदाहरण के लिए प्रस्तावित वस्तु एक सैल पफोन है जो कि चार विभ्िान्न प्रकार में उपलब्ध् हैं जिनकी विशेषताएँ उनके संचय की क्षमता, टेलीविजन देखने की सुविध, इंटरनेट वैफमरा आदि हैं। जिनका मूल्य 5,000 रुपए एवं 20,000 रुपए के बीच है ;जो माॅडल पर निभर्र करता है। जो देश के महानगरों में तथा उनके आस - पास विश्िाष्ट दुकानों पर उपलब्ध् हैं। बाशार में बेची जाने वाली वह श्रेष्ठ वस्तु है जिसका विकास संभावित व्रेफताओं की आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं के विश्लेषण के पश्चात् किया जाता है। 3. ग्राहक के योग्य मूल्य - विपणन प्रिया व्रेफता एवं विव्रेफता के बीच वस्तु एवं सेवाओं के विनिमय को सुगम बनाती है। व्रेफता किसी वस्तु के क्रय का निणर्य लेते समय यह देखता है कि वह उनकी लागत की तुलना में उनकी आवश्यकताओं की पूतिर् कितने मूल्य तक करती है। किसी वस्तु का वह क्रय तभी करेगा जबकि उन्हें लगेगा कि उनके खचर् राश्िा का अध्िकतम लाभ अथवा मूल्य प्राप्त होगा। एक विपणनकतार् का, इसीलिए यह कायर् है कि वह उत्पाद को अध्िक मूल्यवान बनाए जिससे कि ग्राहक अन्य प्रतियोगी वस्तुओं की तुलना में इनको पसंद करें तथा इनके क्रय का निणर्य लंे। 4. विनिमय प(ति - विपणन प्रिया विनिमय प(ति के माध्यम से कायर् करती है। लोग ;व्रेफता एवं विव्रेफताद्ध विनिमय प्रिया के माध्यम से अपनी इच्िछत तथा आवश्यक वस्तुओं को प्राप्त करते हैं। दूसरे शब्दों में विपणन प्रिया, मुद्रा अथवा लोग जिसे मूल्यवान समझते हंै, के बदले में वस्तु एवं सेवाओं को प्राप्त करना है। विनिमय से अभ्िाप्राय उस प्रिया से है जिसके माध्यम से दो या दो से अध्िक पक्ष किसी अन्य पक्ष से इच्िछत वस्तु अथवा सेवा प्राप्त करने के लिए एक जुट हो जाते हैं जो वुफछ किसी अन्य वस्तु के बदले में देना चाहता है। उदाहरण के लिए माना एक व्यक्ित भूखा है उसे खाना वुफछ राश्िा अथवा अन्य कोइर् वस्तु अथवा सेवा के बदले उस व्यक्ित से प्राप्त हो जाएगा जो खाने के बदले यह सब वुफछ स्वीकार करने का इच्छुक है। आध्ुनिक जगत में वस्तुओं का उत्पादन अलग - अलग स्थानों पर होता है तथा उनका वितरण विभ्िान्न मध्यस्थों के माध्यम से एक विस्तृत क्षेत्रा में किया जाता है जिसमें वितरण के विभ्िान्न स्तरों पर विनिमय होता है। विनिमय को इसीलिए विपणन का सार कहा गया है। किसी भी विनिमय के लिए निम्न शतो± को पूरा करना महत्त्वपूणर् है - ;पद्ध इसमें कम - से - कम दो पक्षों का होना आवश्यक है अथार्त् व्रेफता एवं विव्रेफताऋ ;पपद्ध प्रत्येक पक्ष दूसरे पक्ष को मूल्य चुकाने की क्षमता रखता होऋ ;पपपद्ध प्रत्येक पक्ष संप्रेषण एवं वस्तु अथवा सेवा की आपूतिर् के योग्य होना चाहिए। कोइर् भी विनिमय संभव नहीं है यदि व्रेफता एवं विव्रेफता का एक दूसरे से संप्रेषण नहीं है या पिफर वह दूसरे को कोइर् ऐसी वस्तु नहीं दे सकते जिसका कोइर् मूल्य हो। ;पअद्ध प्रत्येक पक्ष को दूसरे पक्ष के प्रस्ताव को स्वीकार करने अथवा उसे अस्वीकार करने की स्वतंत्राता होनी चाहिएऋ तथा ;अद्ध विभ्िान्न पक्ष एक दूसरे से लेन - देन करने के लिए इच्छुक होने चाहिए। इस प्रकार से प्रस्ताव की स्वीकृति अथवा अस्वीकृति स्वैच्िछक होती है न कि किसी दबाव में। उपरोक्त बातें विनिमय की आवश्यक शते± हैं। विनिमय का होना या न होना दोनों पक्षों के विनिमय िया की उपयुक्तता पर निभर्र करता है पिफर भले ही इससे पक्षों को लाभ होता है या पिफर कम - से - कम उनको कोइर् हानि नहीं होनी चाहिए। विपणन के संबंध् में एक महत्त्वपूणर् बात है कि यह मात्रा व्यावसायिक घटना नहीं है या पिफर व्यावसायिक संगठनों तक ही सीमित नहीं है। विपणन ियाएँ गैर लाभ संगठन जैसे अस्पताल, स्वूफल, स्पोटर््स क्लब एवं सामाजिक तथा धमिर्क संगठनों में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। यह इन संगठनों को अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता प्रदान करता है। ये उद्देश्य हैं परिवार नियोजन के संदेश का प्रसार करना, लोगों के श्िाक्षा के स्तर में सुधर तथा बीमारों को इलाज की सुविध की व्यवस्था करना। विपणन किसका किया जा सकता है? भौतिक पदाथर् : डीवीडी प्लेयर, मोटर साइर्कल, आइर् पौंड्स, सेलपफोन, पुफटवीयर, टेजीविशन, रेपफरीजरेटर। सेवाएँ : बीमा, हैल्थ केयर, व्यावसायिक प्रिया का बाह्य ड्डोतीकरण, सुरक्षा, सुगम बिल सेवा, वित्तीय सेवाएँ ;निवेशद्ध, वंफप्यूटर श्िाक्षा, आॅनलाइन व्यापार। विचार : पोलियो टीकाकरण, हैल्पेज, परिवार नियोजन, रक्तदान ;रेडक्रासद्ध, झंडा दिवस पर ध्न चंदा, ;सामुदायिक सद्भाव, संस्थानद्ध। व्यक्ित : किन्हीं पदों के लिए प्रत्याश्िायों के चुनाव हेतु आमंत्रिात हैं - स्थान : आगरा - प्रेम नगर, उदयपुर - झीलों का शहर, मैसूर - बागों का शहर, जब उड़ीसा में समारोह होता है तो भगवान भी सम्िमलित होते हैं। अनुभव : सवर्मान्य अनुभव जैसे िकेट ख्िालाड़ी ;मानो धेनीद्ध के साथ रात्रिा भोजनऋ गणमान्य व्यक्ित के साथ भोजन ;जैसे बिल गेट्स या ऐश्वयार् रायद्ध अथवा गुब्बारे की सैर पवर्तारोहण आदि का अनुभव। संपिायाँ : वित्तीय संपिा में विनिमार्ण क्षेत्रा के अमूतर् मालिकाना अध्िकार। ;शेयर, डिबेंचरद्ध घटनाएँ : खेल आयोजन ;जैसे कि ओलंपिक िकेट शृंखला, दीपावली मेला, पैफशन शो, संगीत समारोह पिफल्म उत्सव, हाथी दौड़ ;केरल पयर्टनद्ध सूचना : संगठन ;जैसे विश्वविद्यालयद्ध द्वारा उत्पादों का पैकेजिंग एवं सूचना वितरण, अनुसंधन संगठन, बाशार सूचना के रूप में सूचना प्रदान करना ;विपणन अनुसंधन एजेंसियाँद्ध, प्रौद्योगिकी सूचना। संगठन : ¯हदुस्तान लीवर, रेनबैक्सी, डाबर, प्रोक्टर एंड गैंबल जैसे संगठन अपनी जन छवि को बढ़ावा देने के लिए लोगों से संवाद करते हैं। जैसे, ‘आइए चीजों को बेहतर बनाएँ।’ विपणन किसका किया जा सकता है? साधरणतया मस्ितष्क में एक बात आती है कि वह क्या है जिसका विपणन किया जा सकता है? क्या यह एक उत्पाद वस्तु है अथवा सेवा या पिफर और वुफछ? आइए पहले उत्पाद के संबंध् में जानें। उत्पाद उपयोगिताओं का समूह है अथवा संतुष्िट का ड्डोत है। जिसे मानवीय इच्छाओं एवं आवश्यकताओं की पूतिर् के लिए उपयोग में लाया जाता है। यह केवल मोटर साइर्कल, बिस्वुफट, बल्ब एवं पेंसिल जैसे भौतिक पदाथो± तक ही सीमित नहीं रहता है बल्िक अन्य दूसरी चीजें जैसे सेवाएँ, विचार, स्थान आदि जिन्हें संभावित ग्राहकों को बेचा जा सकता है, भी इसमें सम्िमलित हैं। विपणन साहित्य में कोइर् भी चीज जो व्रेफता के लिए वुफछ मूल्य रखती है उत्पाद कहलाती है। यह भौतिक हो सकती है अथार्त् जिसको अनुभव किया जा सकता है, देखा जा सकता है एवं भौतिक रूप से छूआ जा सकता है जैसे पेंसिल, साइर्कल या पिफर अभौतिक हो सकती हंै जैसे एक डाॅक्टर अथवा वकील की सेवाएँ। उत्पाद के अतिरिक्त जिन अन्य चीजों का विपणन हो सकता है वे हैं सेवा, व्यक्ित ;जैसे राजनैतिक पाटिर्याँ किसी उम्मीदवार विशेष को वोट देने के लिए राजी करते हैंद्ध या कोइर् विचार ;जैसे रेडक्रास रक्तदान के लिए प्रेरित करता है।द्ध या स्थान ;जैसे केरल पयर्टन लोगों से आग्रह कर रहे हैं कि स्वास्थ्य के लिए केरल की यात्रा करें।द्ध अतः कहा जा सकता है कि किसी भी चीज का विपणन किया जा सकता है यदि इसका दूसरों के लिए वुुफछ मूल्य है। यह एक उत्पाद हो सकता है अथवा सेवा, या पिफर एक व्यक्ित, स्थान, विचार, घटना, संगठन या पिफर अनुभव या संपिा। ;देखें बाॅक्सद्ध विपणनकतार् कौन है? - विपणनकतार् से अभ्िाप्राय उस व्यक्ित से है जो विनिमय प्रिया में सिय रूप से भाग लेता है। सामान्यतः इस विनिमय प्रिया में विव्रेफता ही अध्िक सिय होता है, क्योंकि वह संभावित व्रेफताओं की आवश्यकताओं का विश्लेषण करता है, बाशार में संभावनाओं का विकास करता है तथा व्रेफताओं को वस्तु के क्रय के लिए प्रोत्साहित करता है। लेकिन कभी - कभी ऐसे अवसर भी आते हैं जब विनिमय प्रिया में व्रेफता अध्िक सिय भूमिका निभाता है। हम कह सकते हैं कि आपूतिर् की अपूवर् स्िथत में व्रेफता स्वयं करें किसी समाचार पत्रा अथवा पत्रिाका से विचार एवं स्थान के विपणन के पाँच - पाँच विज्ञापन एकत्रिात करें। अपनी नोटबुक में लिखें कि इनके माध्यम से क्या संदेश मिलता है तथा कक्षा में इस पर विचार करें कि इनमें से कौन सा संदेश आपको अध्िक भा रहा है। अपने उत्तर के पक्ष में कारण दें। विव्रेफता को उसे अपना माल बेचने के लिए तैयार करने के लिए अतिरिक्त परिश्रम करता है। ऐसा रक्षा उत्पादों के लेन देन में होता है। एक और स्िथति लें। माना कि एक देश ने आण्िवक संयंत्रा स्थापित किया है तथा उसे आण्िवक ईंध्न अथवा ‘भारी जल’ की आवश्यकता है। उसे आपूतिर्कतार् को यह विश्वास दिलाना होगा कि इसका उपयोग केवल शांति पूणर् उद्देश्यों के लिए होगा इसलिए उसे इसकी आपूतिर् कर देनी चाहिए। इस मामले में व्रेफता को विपणनकतार् माना जाएगा। अतः हम कह सकते हैं कि कोइर् भी व्यक्ित जो विनिमय प्रिया में अध्िक सिय भूमिका निभाता है उसे विपणनकतार् माना जाएगा। विपणन प्रबंध् विपणन प्रबंध् का अथर् है विपणन कायर् का प्रबंध्न। दूसरे शब्दों में विपणन प्रबंध् से अभ्िाप्राय उन ियाओं के नियोजन, संगठन, निदेशन एवं नियंत्राण से है जो उत्पादक एवं उपभोक्ता अथवा उत्पाद एवं सेवा के उपयोगकतार् के बीच वस्तु एवं सेवाओं के विनिमय को सुगम बनाते हैं। विपणन प्रबंध् बाशार में विपणन से इच्िछत परिणाम प्राप्त करने पर वेंफित रहता है। प्रबंध् के परिप्रेक्ष्य में देखें तो विपणन की परिभाषा अमरीकन मैनेजमेंट ऐसोसियेशन ने इस प्रकार दी है, फ्यह विचार, वस्तु एवं सेवाओं की अवधारणा, मूल्य निधर्रण, प्रवतर्न एवं वितरण की नियोजन एवं ियान्वयन प्रिया है जो विनिमय के लिए होती हैं जिससे व्यक्ितगत एवं संगठनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ित होती है।य् पिफलिप कोटलर के शब्दों में, फ्विपणन प्रबंध् बाशार का चयन करने एवं प्रबंध् की अध्िक श्रेष्ठ ग्राहक मूल्य पैदा करने, सुपुदर्गी करने एवं संप्रेषण करने के माध्यम से ग्राहकों को पकड़ना, उन्हें अपना बनाए रखना एवं उनमें वृि करने की कला एवं विज्ञान है।य् विपणन की परिभाषाा का यदि ध्यान से विश्लेषण करें तो हम पायेंगे कि विपणन प्रबंध् प्रिया में निम्न सम्िमलित हैं - ;पद्ध बाशार का चयन जैसे एक विनिमार्ता 5 वषर् तक की आयु के बच्चों के लिए तैयार सिले सिलाए वस्त्रों को तैयार करना तय करता हैऋ ;पपद्ध बाशार के चयन में प्रबंध् प्रिया ग्राहक बनाने उन्हें अपना बनाए रखने एवं उनकी संख्या में वृि पर वेंफित होती है, इसका अथर् हुआ विपणनकतार् को अपने उत्पाद के लिए माँग पैदा करनी होती है जिससे कि ग्राहक उत्पाद का क्रय करें, उन्हें पफमर् के उत्पादों से संतुष्ट करना होता है तथा और नए ग्राहक बनाने होते हैं जिससे कि पफमर् और ऊँचा उठे। ;पपपद्ध उद्देश्यों की प्राप्ित के लिए तंत्रा ग्राहकों के लिए अध्िक श्रेष्ठ मूल्यों का निमार्ण, विकास एवं संप्रेषण माध्यम है। इसका अथर् हुआ कि विपणन प्रबंध्क का प्राथमिक कायर् वस्तुओं को अध्िक उपयोगी बनाना है जिससे कि ग्राहक वस्तु एवं सेवाओं की ओर आकष्िार्त हों, संभावित ग्राहकों को इनके संबंध् में बताएँ तथा उन्हें इन उत्पादों को खरीदने के लिए तैयार करें। विपणन प्रबंध् विभ्िान्न कायर् करता है जैसे विपणन गतिविध्ियों का विश्लेषण एवं नियोजन करना विपणन नियोजन का ियान्वयन तथा नियंत्राण तंत्रा की स्थापना करना। यह कायर् इस प्रकार से किए जाते हैं कि संगठन के उद्देश्यों को न्यूनतम लागत पर प्राप्त किया जा सके। सामान्य रूप से विपणन प्रबंध् का संबंध् माँग के निमार्ण से है। वुफछ स्िथतियों में प्रबंध् की माँग को सीमित रखना होता है। उदाहरण के लिए आपूतिर् से भी अध्िक माँग की स्िथति अथार्त् वह स्िथति जिसमें वंफपनी जितनी माँग को पूरा कर सकती है अथवा करना चाहती है से माँग अध्िक है। जैसे हमारे देश में 90 के दशक में उदारीकरण एवं वैश्वीकरण की नीति को अपनाने से पहले आॅटोमोबाइल अथवा इलेक्ट्रोनिक वस्तुओं या पिफर स्थाइर् उत्पादों जैसे उपभोक्ता वस्तुओं की स्िथति थी। इन स्िथतियों में विपणन प्रबंध्कों का कायर् अस्थाइर् रूप से माँग को घटाने के रास्ते ढूँढ़ना है जैसे प्रवतर्न पर व्यय को कम करना या पिफर मूल्यों में वृि करना। इसी तरह से माँग अनियमित हो सकती है जैसे मौसमी उत्पादों ;पंखे, ऊनी वस्त्राद्ध के मामले में विपणनकतार्ओं का कायर् व्रेफताओं को छोटी अवध्ि के देने जैसे उपायों के माध्यम से माँग के समय स्वरूप में परिवतर्न करना होता है। अतः विपणन प्रबंध् का संबंध् केवल माँग पैदा करना ही नहीं है बल्िक बाशार की स्िथति के अनुसार माँग का प्रभावी प्रबंध्न भी है। विपणन एवं विक्रय कइर् लोग विपणन का अथर् विक्रय से लगाते हैं। वह इन दोनों को एक ही मानते हैं। विपणन बड़ी संख्या में ियाओं का समूह है तथा विक्रय उसका एक भाग है। उदाहरण के लिए टेलीविजन का विपणनकतार्, विक्रय से पहले कइर् कायर् करता है, जैसे टेलीवीजन के उत्पादन के लिए उसके प्रकार, एवं माॅडल की योजना तैयार करना, इसके विक्रय मूल्य को तय करना, उन वितरण वेंफद्रों का चयन करना जिन पर ये उपलब्ध् होंगे तथा अन्य। संक्षेप में कह सकते हैं कि विपणन में बहुत बड़ी संख्या में विभ्िान्न ियाएँ सम्िमलित हैं जिनका संबंध् उन उत्पादों के नियोजन, मूल्य निधर्रण, प्रवतर्न एवं वितरण से है जो ग्राहकों की आवश्यकताओं की पूतिर् करते हैं। दूसरी ओर विक्रय का कायर्, विक्रय कला, विज्ञापन एवं प्रचार तथा लघु अवध्ि प्रलोभन के माध्यम से, वस्तु एवं सेवाओं के प्रवर्तन तक सीमित है। इससे उत्पाद का स्वामित्व विव्रेफता से व्रेफता को हस्तांतरित हो जाता है। दूसरे शब्दों में उत्पाद के बदले में रोकड़ प्राप्त हो जाती है। विक्रय एवं विपणन में प्रमुख अंतर निम्नलिख्िात हैं - ;पद्ध प्रिया का भाग बनाम व्यापक अथर् - विक्रय विपणन प्रिया का एक अंग मात्रा है तथा इसमें वस्तुओं का अध्िग्रहण एवं स्वामित्व विव्रेफता से व्रेफता को हस्तांतरित होता है। विपणन इससे कहीं अिाक व्यापक शब्द है जिसमें कइर् ियाएँ सम्िमलित हैं, जैसे ग्राहकों की आवश्यकताओं की पहचान करना, इनकी पूतिर् के लिए उत्पाद को विकसित करना, मूल्यों का निधर्रण करना एवं तथा संभावित वे्रफताओं को इनके क्रय के लिए तैयार करना। इस प्रकार से विक्रय विपणन का केवल एक भाग है। ;पपद्ध स्वामित्व अध्िकार हस्तांतरण बनाम ग्राहकों की आवश्यकताओं की संतुष्िट - विक्रय का वेंफद्र बिंदु प्रमुखतः वस्तुओं को स्वामित्व अध्िकार एवं अध्िग्रहण का विव्रेफता से उपभोक्ता एवं उपयोगकतार् को हस्तांतरण होता है। इसके विपरीत विपणन का अध्िक जोर ग्राहकों की इच्छाओं एवं आवश्यकताओं की अध्िकतम संतुष्िट करने पर होता है। ;पपपद्ध अध्िकतम विक्रय से लाभ बनाम ग्राहक संतुष्िट - विक्रय की सभी ियाएँ अध्िकतम विक्रय के लिए होती हैं जिससे कि पफमर् के लाभ भी अध्िकतम होते हैं। दूसरे शब्दों में जोर अिाकतम विक्रय के द्वारा अध्िकतम लाभ अजिर्त करने पर होता है। दूसरी ओर विपणन में ग्राहक की संतुष्िट तथा उसके माध्यम से लंबी अवध्ि में लाभ में वृि पर ध्यान दिया जाता है। इस प्रकार से विपणन संगठन ग्राहक की संतुष्िट के माध्यम से अध्िकतम लाभ प्राप्त करने को सवार्ध्िक महत्त्वपूणर् मानता है। ;पअद्ध ियाओं का प्रारंभ एवं अंत - विक्रय ियाएँ उत्पाद के विकसित कर लेने के पश्चात् प्रारंभ होती हैं जबकि विपणन ियाएँ वस्तु के उत्पादन से कापफी पहले प्रारंभ हो जाती हंै तथा वस्तुओं के विक्रय के पश्चात् भी चलती रहती हैं। ;अद्ध महत्त्व में अंतर - विक्रय में ग्राहक को उत्पाद के अनुसार ढालने पर जोर दिया जाता है जबकि विपणन में ग्राहक की आवश्यकतानुसार उत्पाद एवं अन्य रणनीतियों के विकास का प्रयत्न किया जाता है। ;अपद्ध रणनीति में अंतर - विक्रय में प्रवतर्न तथा तैयार करने के प्रयत्न सम्िमलित हैं जबकि विपणन में एकीकृत विपणन कायो± को किया जाता है कि उत्पाद के संबंध् में रणनीति, प्रवतर्न मूल्य निधर्रण तथा वस्तुओं का वितरण। विपणन प्रबंध् दशर्न बाशार से विनिमय के इच्िछत परिणाम प्राप्त करने के लिए यह निणर्य लेना महत्त्वपूणर् है कि किसी संगठन के विपणन संबंध्ी कायो± को कौन - सा दशर्न अथवा विचारधरा दिशा प्रदान करे। जिस दशर्न अथवा अवधरणा को अपनाना है उसकी समझ का बहुत महत्त्व है क्योंकि यह संगठन के उद्देश्यों को प्राप्त करने में विभ्िान्न तत्वों पर बल देने अथवा महत्त्व देने का निधर्रण करता है। उदाहरण के लिए संगठन की विपणन ियाएँ उत्पाद के रूपांकन अथवा विक्रय की प(तियाँ या पिफर ग्राहक की आवश्यकताओं या सामाजिक अपेक्षाओं पर अध्िक बल देंगी। विपणन की अवधरणा अथवा दशर्न का विकास एक लंबे समय में हुआ है तथा इसका वणर्न नीचे किया गया है - उत्पादन की अवधरणा औद्योगिक क्रांति के प्रारंभ्िाक दिनों में औद्योगिक उत्पादों की माँग तो बढ़ने लगी थी लेकिन उत्पादकों की संख्या सीमित थी। परिणामस्वरूप पूतिर् से माँग अध्िक थी। माल का विक्रय करना कोइर् समस्या नहीं थी। जो भी व्यक्ित यदि वस्तुओं का उत्पादन करता तो वह बिक जाती थीं। इसलिए व्यावसायिक ियाएँ वस्तुओं के उत्पादन पर वेंफित थीं। यह विश्वास किया जाता था कि वस्तुओं का बड़ी मात्रा में उत्पादन कर अध्िकतम लाभ कमाया जा सकता था। इससे उत्पादन की औसत लागत को कम किया जा सकता था। यह भी धरणा थी कि ग्राहक उन वस्तुओं को खरीदेंगे जिनका मूल्य उनकी सामथर् के अनुसार होगा। इस प्रकार से किसी व्यावसायिक की इकाइर् की सपफलता की वंुफजी उत्पाद की उपलब्ध्ता एवं सामथर् में होना मानी जाती थीं। उत्पाद की अवधरणा प्रारंभ के दिनों में उत्पादन क्षमता पर अध्िक जोर दिया गया परिणामस्वरूप आगे चलकर पूतिर् में वृि हुइर्। बिक्री में वृि के लिए उत्पाद की उपलब्ध्ता तथा कम मूल्य ही पयार्प्त नहीं थे और न ही इन कारणों से इकाइर् का अस्ितत्व में बने रहना तथा उसका विकास सुनिश्िचत नहीं था। जैसे - जैसे पूतिर् में वृि हुइर् ग्राहक उन वस्तुओं की माँग करने लगा जो गुणवत्ता, आवश्यकता पूतिर् तथा लक्षण की दृष्िट से श्रेष्ठ थीं। अतः इकाइयाँ उत्पादन की मात्रा के स्थान पर उत्पाद की गुणवत्ता को अध्िक महत्त्व देने लगी। व्यावसायिक िया का वेंफद्र बिंदु अब निरंतर गुणवत्ता में सुधर तथा वस्तु को नया स्वरूप प्रदान करना हो गया। इस प्रकार से उत्पाद मूलक अवधरणा में उत्पाद में सुधर पफमर् के अध्िकतम लाभ की वंुफजी बन गइर्। बिक्री की अवधरणा जैसे - जैसे समय बीतता गया विपणन पयार्वरण में पिफर परिवतर्न आया। व्यवसाय अब और बड़े पैमाने पर होने लगा जिससे पूतिर् में और वृि हुइर् जिससे विव्रेफताओं के बीच प्रतियोगिता भी बढ़ी। अब क्योंकि बड़ी संख्या में विव्रेफता अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तुओं का विक्रय कर रहे थे इसलिए उत्पाद की उपलब्ध्ता एवं गुणवत्ता पफमर् के अस्ितत्व एवं इसके विकास को सुनिश्िचत करने के लिए अपयार्प्त थे। परिणामस्वरूप वस्तु को क्रय करने के लिए ग्राहक को आकष्िार्त करना तथा उस पर जोर देना अिाक महत्त्वपूणर् हो गया। व्यवसाय की पूरी सोच ही बदल गइर्। अब यह धरणा बन गइर् कि ग्राहक तब तक वस्तु का क्रय नहीं करेगा या पिफर पयार्प्त मात्रा में क्रय नहीं करेगा जब तक कि उसे इसके लिए भली - भाँति प्रभावित एवं अभ्िाप्रेरित न किया जाए। ग्राहक उनके उत्पादों का क्रय करें इसके लिए अब व्यवसायों के लिए आक्रमिक विक्रय एवं प्रवतर्न करना अनिवायर् हो गया है। उत्पादों की बिक्री के लिए विज्ञापन, व्यक्ितगत विक्रय एवं विक्रय प्रवतर्न जैसे विक्रय संवध्र्न तकनीकों का प्रयोग आवश्यक माना जाने लगा। अब व्यावसायिक इर्काइयाँ अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए आक्रामक विक्रय प(तियों पर अध्िक ध्यान देने लगी जिससे कि ग्राहकों को वस्तुओं के क्रय के लिए प्रोत्साहित, लुभाया एवं तैयार किया जा सके। यह अध्िक महत्त्वपूणर् हो गया कि किसी भी तरह से वस्तुओं की बिक्री की जाए। यह मान लिया गया कि व्रेफताओं का येन केन प्रकेण माल बेचा जा सकता है लेकिन यह भूल गए कि दीघर् अवध्ि में केवल उपभोक्ताओं की संतुष्िट ही उपयोगी होती है। विपणन की अवधरणा विपणनमुखी का अथर् है बाशार में किसी भी संगठन की सपफलता की वंुफजी उपभोक्ता की आवश्यकताओं की संतुष्िट है। इसमें यह माना जाता है कि दीघर् अवध्ि में कोइर् भी संगठन यदि अपने अध्िकतम लाभ के उद्देश्य को प्राप्त करना चाहता है तो उसे अपने वतर्मान तथा संभावित व्रेफताओं की आवश्यकताओं की पहचान कर उनकी प्रभावी रूप से संतुष्िट करनी होगी। किसी भी पफमर् व्यवसाय अध्ययन 328 विपणन प्रबंध् दशर्न में अंतर दशर्न/आधर उत्पादन उत्पाद विक्रय विपणन समाज मूलक अवधरणा अवधरणा अवधरणा अवधरणा अवधरणा 1.प्रारंभ बिंदु कारखाना कारखाना कारखाना बाशार बाशार/समाज 2.मुख्य वेंफद्र उत्पाद की उत्पाद की गुणवत्ता, उत्पाद में उपभोक्ता उपभोक्ता की बिंदु मात्रा निष्पादन उत्पाद वृि की आवश्यकताएँ तथा का स्वरूप आवश्यकताएँ समाज कल्याण 3.साध्न उत्पाद की उत्पाद में विक्रय एवं एकीकृत एकीकृत उपलब्ध्ता सुधर विक्रय प्रवतर्न विपणन विपणन एवं क्रय क्षमता समाप्ित उत्पादन की उत्पाद की विक्रय की ग्राहक की उपभोक्ता मात्रा द्वारा गुणवत्ता से मात्रा से संतुष्िट से लाभ संतुष्िट एवं लाभ अजर्न लाभ प्राप्ित लाभ प्राप्ित प्राप्ित कल्याण से लाभ प्राप्ित में सभी निणर्य ग्राहकों के ध्यान में रख कर लिए पर निभर्र करेगा कि ग्राहक क्या चाहते हैं। माना जाते हैं। दूसरे शब्दों में संगठन में सभी निणर्यों का ग्राहक रेपफरीजरेटर में दो पल्ले का दरवाजा चाहता है वेंफद्र बिंदु ग्राहकों की संतुष्िट होता है। उदाहरण के या पानी ठंडा करने के लिए अलग से प्रावधन लिए किस वस्तु का उत्पादन किया जाएगा, इस चाहता है तो विनिमार्ता इन विशेषताओं के साथ अपनी समझ परख्िाए प् बताएँ कि निम्नलिख्िात कथन सत्य हैं अथवा असत्य - ;पद्ध विपणन ियाओं का वेंफद्र बिंदु वस्तुओं को उत्पादक से उपभोक्ता अथवा उपयोगकतार् के बीच विनिमय को सरल बनाना हैऋ ;पपद्ध आध्ुनिक विपणन में बाशार से अभ्िाप्राय उस स्थान से है जहाँ व्रेफता एवं विव्रेफता वस्तु एवं सेवाओं के विनिमय के लिए एकत्रिात होते हैंऋ ;पपपद्ध विपणन तथा वस्तु एवं सेवाओं का क्रय एक ही चीज हैऋ ;पअद्ध विपणन उत्पादन के पश्चात की िया हैऋ ;अद्ध विपणन गैर लाभ संगठनों के लिए भी समान रूप से उपयुक्त हैऋ ;अपद्ध विपणन साहित्य में ‘इच्छा’ एवं ‘आवश्यकता’ को समान अथो± में प्रयुक्त किया जाता हैऋ ;अपपद्ध विपणन प्रबंध् का अथर् है विपणन कायर् का प्रबंध्नऋ ;अपपपद्ध उत्पाद का स्वरूप रचना विपणन ियाओं के अंतगर्त नहीं आता है। रेपफरीजरेटर बनाएगा, इसका इतना मूल्य रखेगा जिसे व्रेफता देना चाहता है। यदि सभी विपणन संबंध्ी निणर्य इस संदभर् में लिए जाएँगे तो विक्रय में कोइर् समस्या नहीं आएगी। पफमर् की मूल भूमिका तब आवश्यकता की पहचान कर उसकी पूतिर् करनी होगी। इस अवधरणा का आधर है कि उत्पाद एवं सेवाएँ उनके गुण, पैकिंग अथवा ब्रांड के कारण नहीं खरीदी जाती बल्िक यह ग्राहक की वुफछ विशेष आवश्यकताओं की पूतिर् करती हैं इसलिए खरीदी जाती हैं। किसी भी संगठन की सपफलता की पहली आवश्यकता ग्राहक की आवश्यकताओं को समझ कर उसके अनुसार कायर् करना है। संक्षेप में हम कह सकते हैं कि विपणन की आवधरणा के निम्न स्तम्भ हैं - ;पद्ध बाशार अथवा ग्राहकों का विपणन के लक्ष्यों के रूप में चयन करनाऋ ;पपद्ध लक्ष्िात बाशार के ग्राहकों की इच्छा एवं आवश्यकताओं को समझनाऋ ;पपपद्ध लक्ष्िात बाशार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद एवं सेवाओं का विकास करनाऋ ;पअद्ध लक्ष्िात बाशार की आवश्यकताओं को अपने प्रतियोगियों की तुलना में अध्िक श्रेष्ठता से पूरा करनाऋ एवं ;अद्ध यह सभी वुफछ लाभ के लिए करना। इस प्रकार से विपणन की अवधरणा का वेंफद्र बिंदु ग्राहक की चाहत है तथा व्यावसायिक इकाइर् के अध्िकतम लाभ के उद्देश्य की प्राप्ित ग्राहक की संतुष्िट से प्राप्त की जा सकती है। विपणन का उद्देश्य ग्राहक को आकृष्ट कर लाभ कमाना है। विपणन विपणन की सामाजिक अवधरणा आगे के अनुभागों में विपणन की अवधरणा का जो वणर्न किया गया है वह अपयार्प्त रहेगा यदि हम पयार्वरण प्रदूषण, जंगलों की कटाइर्, संसाध्नों की कमी, जनसंख्या विस्पफोट तथा मुद्रा स्पफीति जैसी सामाजिक समस्याओं की चुनौतियों पर ध्यान दें क्योंकि कोइर् भी कायर् जो मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करती हों लेकिन समाज के अध्िकांश हितों के विरु( हो तो उसे न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए व्यवसाय की दूरदश्िार्ता की कमी मानी जाएगी। यदि यह केवल उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं की पूतिर् करती है। इसे दीघर् अवध्िक समाज कल्याण की बड़ी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। जैसा कि ऊपर उदाहरण दिया गया है। समाज मूलक विपणन अवधरणा की धरणा है कि किसी भी संगठन का कायर् बाशार की आवश्यकताओं की पहचान कर उनकी प्रभावी ढंग से तथा भली - भाँति संतुष्िट करना है जिससे कि उपभोक्ता एवं समाज का दीघर् आवध्िक कल्याण हो सके। इस प्रकार से समाज मूलक विपणन अवधारणा विपणन की अवधारणा का विस्तार है जिसमें दीघर् अवध्ि समाज कल्याण का भी ध्यान रखा जाता है। ग्राहक की संतुष्िट के अतिरिक्त इसमें विपणन का सामाजिक, नैतिक एवं प्राकृतिक पक्षों पर भी ध्यान दिया जाता है। ऐसी अनेक समस्याएँ हैं जिन पर ध्यान देना आवश्यक है। विपणन के कायर् विपणन का संबंध् वस्तु एवं सेवाओं के उत्पादक तथा उपभोक्ता अथवा उपयोगकतार् के बीच इस प्रकार से विनिमय से है जो उपभोक्ता की आवश्यकताओं की अध्िकतम संतुष्िट प्रदान करता है। प्रबंध् के कायर् के रूप में इसकी अनेक ियाएँ हैं जिनका वणर्न नीचे किया गया है - 1. बाशार संबंध्ी सूचना एकत्रिात करना तथा उसका विश्लेषण करना - एक विपणनकतार् के महत्त्वपूणर् कायो± में से एक कायर् बाशार संबंध्ी सूचना एकत्रिात करना तथा उसका विश्लेषण करना है। ग्राहकों की आवश्यकताओं की पहचान करना तथा वस्तु एवं सेवाओं के सपफल विपणन के लिए वैश्िवक ब्रांड का भविष्य डिजीटल रिश्तों का संबंध् एवं उपभोक्ता सहयोग चीन एवं भारत में सिय मध्यम वगर् एवं तेजी से बढ़ती व्यय योग्य आय ने उपभोक्ता संस्कृति का निमार्ण किया है। डिजीटल रिश्तों एवं उपभोक्ता सहयोग की ब्रांड निमार्ण शक्ित के संबंध् में जो हमने सीखा है उसे भूलना नहीं चाहिए। जब से इंटरनेट की खोज हुइर् है तब से साइट जिससे लोगों में पारस्परिक बातचीत तथा संबंध् बनते हैं, हमारे डिजीटल क्रांति के अग्रणी रहे हैं जिसने उपभोक्ता एक दूसरे से और अंत में ब्रांड से वैफसे व्यवहार की आशा करते हैं इसको नया रूप प्रदान किया है। उदाहरण के लिए आॅनलाइन विक्रय साइट इर् - बे पहले उन साइट्स में से एक है जिसने हमें सिखाया है कि आप आॅनलाइन पर लोगों का विश्वास कर सकते हंै तथा एक मित्रा भाव रखने वाले पड़ोसी पर भी विश्वास कर सकते हैं। सामाजिक आदान प्रदान ने प्रैंफडस्टर माइर् स्पेस एवं यू टयूब का एक सामाजिक नैटववि±फग औशार के स्वरूप के लिए मागर् प्रशस्त किया है जिसने पिछले वषर् ही उपभोक्ताओं को यह अध्िकार दिए हैं कि वह अपनी विषय वस्तु का निमार्ण कर विश्व भर में श्रोताओं को भेज सकते हैं। इस प्रकार के मंच के वास्तविक बाशार क्षमता पर यदि किसी को शंका है तो उसे अक्टूबर की सबसे बड़े व्यवसाय संबंधी शीषर्क को देख लेना चाहिए कि गूगल ने $ 16.5 खरब में साइट को खरीदा। एच.एस.बी.सी.;भ्ैठब्द्ध का भी यही लक्ष्य था अथार्त् उपभोक्ताओं को पारस्परिक संवाद का मंच प्रदान करना और प्वाइंट आॅपफ व्यू.लवनत चवपदजवअिपमूण्बवउ पर 76 देशों के उपभोक्ता जाकर। क्लोनिंग, पैफशन, विंड पफामर् एवं वीडियो गेम जैसे विषयों पर अपने विचार प्रकट कर सकते हैं। बिजनेस वीक के अनुसार चीन को शहरों में युवा वगर् एक सप्ताह में 5.1 घंटे वैब सपर्फ करता है तथा पिछले तीन वषर् में आॅनलाइन विज्ञापन बाशार में 75 प्रतिशत वाष्िार्क से भी अध्िक वृि हुइर् है। मोबाइल पफोन सबसे अध्िक पसंदीदा तकनीक है। 17.5 मिलियन ब्लाॅगसर् ;जिनके 75 मिलियन पढ़ने वाले हैंद्ध, जिनमें से अध्िकांश 18 से 25 के आयु वगर् में हैं चीन में उपभोक्ताओं की पसंद को अमरीका की तुलना में अध्िक गहनता से नया स्वरूप प्रदान कर रहे हैं। इंटरनेट युग ने विज्ञापनकतार् तथा ब्रांड विशेषज्ञों एवं सशक्त उपभोगता को आमने - सामने लाकर खड़ा कर दिया है। यह उपभोक्ता तब तक प्रसन्नता से हमारे संदेश को सुनते हैं जब तक कि हम उनकी बात को सुनना चाहते हैं। ड्डोत - ब्रांड इक्वीटी, 1, नवंबर 2006 विभ्िान्न निणर्य लेना आवश्यक है। संगठन के अवसर एवं कठिनाइयाँ तथा उसकी सुदृढ़ता एवं कमजोरियों का विश्लेषण करना तथा यह निणर्य लेना कि किन अवसरों का लाभ उठाने के लिए कायर् किया जाए यह अध्िक महत्त्वपूणर् है। उदाहरण के लिए भारतीय अथर्व्यवस्था के वुफछ क्षेत्रा हैं जैसे इंटरनेट का प्रयोग, सैल पफोनों का बाशार आदि जिनमें तीव्र विकास की संभावनाएँ हैं। किसी संगठन को किस क्षेत्रा में कायर् करना चाहिए या पिफर अपनी गतिविध्ियों का विस्तार करना चाहिए इसका निणर्य लेने के लिए संगठन की शक्ितयों एवं कमजोरियों की ध्यान से जाँच करनी होती है जिसे बाशार के विश्लेषण की सहायता से किया जा सकता है। वंफप्यूटर के विकास के कारण बाशार के संबंध् में सूचना एकत्रिात करने की नइर् प्रवृति पैदा हुइर् है। अिाक से अध्िक वंफपनियाँ इंटरनेट पर ऐसे साइट का उपयोग कर रही हैं जहाँ वे पारस्परिक विचार के द्वारा महत्त्वपूणर् व्यावसायिक निणर्य लेने से पहले ग्राहकों के विचार एकत्रिात करते हैं। टेलीवीजन के लोकपि्रय समाचार चैनलों ;हिंदीद्ध में से एक दशर्कों के विचार माँगते हैं ;एस.एमएस. के माध्यम सेद्ध कि दिन भर के चार अथवा पाँच मुख्य समाचारों में से किसी कहानी का प्राइम टाइम पर प्रसारण किया जाए। इससे दशर्क अपनी पसंद की कहानी सुन सकते हैं। 2. विपणन नियोजन - संगठन के विपणन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए एक विपणनकतार् का एक और महत्त्वपूणर् कायर् अथवा क्षेत्रा उचित विपणन योजना का विकास करना है। उदाहरण के लिए माना रंगीन टी.वी. का विपणनकतार् जिसकी देश के बाशार में वतर्मान में 10 प्रतिशत की भागीदारी है अगली तीन वषर् में इस भागीदारी को 20 प्रतिशत तक बढ़ाना चाहता है। इसके लिए उसे एक पूरी विपणन योजना तैयार करनी होगी जिसमें उत्पादन के स्तर में वृि, वस्तुओं का प्रवर्तन आदि जैसे महत्त्वपूणर् पक्ष सम्िमलित किए जाएँगे तथा इन उद्देश्यों की प्राप्ित के लिए ियान्वयन कायर्क्रम का निधार्रण भी होगा। 3. उत्पाद का रूपांकन एवं विकास - विपणन का एक और महत्त्वपूणर् कायर् अथवा निणर्य क्षेत्रा विपणन उत्पाद का रूपांकन एवं विकास है। उत्पाद का रूपांकन लक्ष्िात उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद को और अध्िक आकष्िार्त बनाने में सहायक होता है। एक अच्छा स्वरूप उत्पाद की उपयोगिता को बढ़ा सकता है तथा बाशार में इसे और अध्िक प्रतियोगी बना सकता है। उदाहरण के लिए जब हम किसी उत्पाद के क्रय का मन बनाते हैं जैसे मोटर साइर्कल, तब हम न केवल इस की लागत, प्रति मीटर दूरी तय करना आदि विशेषताओं को देखते हैं बल्िक इसके डिशाइन पक्ष को भी देखते हैं जैसे आकार, स्टाइल आदि। 4. प्रमापीकरण ;मानकीकरणद्ध एवं ग्रेड तय करना - प्रमापीकरण का अथर् है पूवर् निधर्रित विश्िाष्टताओं के अनुरूप वस्तुओं का उत्पादन करना जिससे उत्पाद में एकरूपता तथा अनुवूफलता आती है प्रमापीकरण व्रेफताओं को यह सुनिश्िचत करता है कि वस्तुएँ पूवर् निधर्रित गुणवत्ता, मूल्य एवं पैकेजिंग के मानकों के अनुसार हैं। इससे उत्पादों के निरीक्षण, जाँच एवं मूल्यांकन की आवश्यकता कम हो जाती है। ग्रेड निधर्रण उत्पाद का गुणवत्ता, आकार आदि महत्त्वपूणर् विशेषताओं के आधर पर विभ्िान्न समूहों में वगीर्कृत करना है। श्रेणीकरण विशेष रूप से उन उत्पादों के लिए आवश्यक है जिनका पूवर् निधार्रित विश्िाष्टताओं के अनुसार उत्पादन नहीं किया जाता जैसे गेहूँ, संतरे आदि। श्रेणीकरण यह सुनिश्िचत करता है कि वस्तुएँ एक विशेष गुणवत्ता वाली हैं तथा उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों को ऊँचे मूल्य पर बेचने में सहायक होता है। 5. पैकेजिंग एवं लेबलिंग - पैकेजिंग का अथर् है उत्पाद के पैकेज का रूपाकंन करना। लेबलिंग में पैकेज पर जो लेबल लगाए जाते हैं उनका रूपांकन किया जाता है। लेबल साधरण पफीता से लेकर जटिल ग्रापिफक्स तक अनेक प्रकार के होते हैं। पैकेजिंग एवं लेबलिंग वतर्मान विपणन में इतने महत्त्वपूणर् हो गए हैं कि इन्हें विपणन का स्तंभ माना जाने लगा है। पैकेजिंग न केवल वस्तु को सुरक्ष्िात रखता है बल्िक यह वस्तु प्रवतर्न के साध्न का कायर् भी करता है। कभी - कभी व्रेफता पैकेजिंग से ही उत्पाद की गुणवत्ता का आकलन करते हैं। आज के समय में ‘लेस’ अथवा ‘अंकल चिप्पस’ आलू के वैपफसर्, क्लीनिक प्लस शैम्पू तथा काॅलगेट टूथपेस्ट आदि उपभोक्ता ब्रांड की सपफलता में पैकेजिंग की महत्त्वपूणर् भूमिका है। 6. ब्रांडिंग - अध्िकांश उपभोक्ता उत्पादों के विपणन के लिए एक महत्त्वपूणर् निणर्य यह लिया जाता है कि क्या उत्पाद को इसके वगर् विशेष के नाम ;उत्पाद किस वगर् का है जैसे पंखे, पैन आदिद्ध से बेचा जाए अथवा इनकी बिक्री ब्रांड के नाम ;जैसे पोलर पंखे अथवा रोटोमेक पेनद्ध से की जाए। ब्रांड का नाम उत्पाद को अन्य उत्पादों से भ्िान्न बनाता है, जो किसी पफमर् के उत्पाद को प्रतियोगी के उत्पाद से अंतर का आधर बन जाता है जिससे उत्पाद के लिए उपभोक्ता का लगाव पैदा होता है तथा इससे बिक्री संवध्र्न में सहायता मिलती है। ब्रांडिग के संबंध् में जो निणर्य लिए जाते हैं उनमें एक तो ब्रांडिग की रणनीति के संबंध् में है जैसे क्या प्रत्येक उत्पाद के लिए अलग - अलग ब्रांड नाम दिए जाएँ या पिफर वंफपनी के सभी उत्पादों के लिए एक ही ब्रांड नाम हो जैसे पिफलिप्स बल्ब, ट्यूब एवं टेलीविजन या पिफर वीडियोकाॅन कपड़े धेने की मशीन, टेलीवीजन एवं रेपफरीजरेटर। किसी उत्पाद की सपफलता सही ब्रांड नाम का चयन महत्त्वपूणर् भूमिका निभाता है। 7. ग्राहक समथर्न सेवाएँ - विपणन प्रबंध् का एक महत्त्वपूणर् कायर् ग्राहक समथर्क सेवाओं का विकास करना है जैसे बिक्री के बाद की सेवाएँ, ग्राहकों की श्िाकायत को दूर करना एवं समायोजनों को देखना साख सेवाएँ, रख - रखाव सेवाएँ, तकनीकी सेवाएँ प्रदान करना एवं उपभोक्ता सूचनाएँ देना। ये सभी सेवाएँ ग्राहकों को अध्िकतम संतुष्िट प्रदान करती हैं जो आज के समय में विपणन की सपफलता की वुंफजी है। ग्राहक समथर्क सेवाएँ ग्राहकों द्वारा बार - बार क्रय करने एवं उत्पाद के ब्रांड के प्रति स्वामी भक्ित विकसित करने में अत्यध्िक प्रभावी सि( होती हैं। 8. उत्पाद का मूल्य निधर्रण - उत्पाद का मूल्य वह राश्िा है जिसका भुगतान उत्पाद को प्राप्त करने के लिए ग्राहक को करना होता है। मूल्य एक महत्त्वपूणर् तत्व है जो बाशार में किसी उत्पाद की सपफलता अथवा असपफलता को प्रभावित करता है। किसी वस्तु अथवा सेवा की माँग का उसके मूल्य से सीध संबंध् है। सामान्यतः यदि मूल्य कम है तो उत्पाद की माँग अध्िक होगी इसके विपरीत मूल्य के अध्िक होने पर माँग कम हो जाती है। विपणनकतार्ओं को मूल्य निधर्रक तत्वों का ठीक से विश्लेषण करना होता है तो इस संबंध् में कइर् महत्त्वपूणर् निणर्य लेने होते हैं जैसे मूल्य निधर्रण के उद्देश्यों का निधार्रण मूल्य के संबंध् में रणनीति का निधर्रण मूल्यों का निधर्रण करना तथा उनमें परिवतर्न लाना। 9. संवध्र्न - वस्तु एवं सेवाओं के संवध्र्न में उपभोक्ताओं को पफमर् के उत्पाद एवं उसकी विशेषताओं के संबंध् में सूचना देना तथा उन्हें इन उत्पादों को क्रय करने के लिए प्रेरित करना सम्िमलित होता है। बिक्री प्रवतर्न की चार महत्त्वपूणर् प(तियाँ हैं विज्ञापन, व्यक्ितगत विक्रय, प्रचार एवं विक्रय संवध्र्न। वस्तु एवं सेवाओं के प्रवतर्न के संबंध् में विपणनकतार् को कइर् महत्त्वपूणर् निणर्य लेने होते हैं जैसे प्रवतर्न बजट, प्रवतर्न मिश्र अथार्त् उन सभी प्रवतर्न की विध्ियों का समिश्रण जिनका उपयोग करना है, प्रवतर्न बजट आदि। 10. वितरण - वस्तु एवं सेवाओं के विपणन का एक और महत्त्वपूणर् कायर् भौतिक वितरण का प्रबंधन है। इस कायर् में दो के संबंध् में निणर्य लिए जाते हैं ;पद्ध वितरण के माध्य अथार्त् विपणन मध्यस्थ ;थोक विव्रेफता, पुफटकर विव्रेफताद्ध एवं ;पपद्ध उत्पादों को उनके उत्पाद स्थलों से ग्राहक के उपभोग या उपयोग स्थल तक ले जाना। वस्तुओं के वितरण के संबंध् में जो निणर्य लिए जाते हैं वे हैं संग्रहित माल का प्रबंध्न ;माल के स्टाॅक का स्तरद्ध, माल का गोदाम में भंडारण एवं वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाना ले जाना। 11. परिवहन - परिवहन का अथर् है माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना। सामान्यतः उत्पादों के उपयोगकतार् विशेषतः उपभोग की वस्तुओं के उपयोगकतार् दूर - दूर तक पैफले हुए होते हैं तथा इनके उत्पादन स्थल से अलग स्थानों पर होते हैं। इसीलिए इन्हें उन स्थानों को ले जाया जाता है जहाँ इनकी उपभोग अथवा उपयोग के लिए आवश्यकता है। उदाहरण के लिए असम में जिस चाय का उत्पादन होता है उसके न केवल राज्य के भीतर परिवहन की आवश्यकता है बल्िक दूर - दूर स्थान जैसे तमिलनाडु, पंजाब, जम्मू - कश्मीर, हरियाणा तथा राजस्थान में भी पहुँचाया जाता है। विपणन विपणन की पफमर् को अपनी परिवहन की आवश्यकताओं का विश्लेषण के समय कइर् तत्वों को ध्यान में रखना होता है जैसे उत्पाद की प्रकृति, बाशार, जहाँ बेचना है, की लागत तथा स्थान तथा परिवहन के साध्न तथा इससे जुड़े अन्य पहलुओं के संबंध् में भी निणर्य लेना होता है। 12. संग्रहण अथवा भंडारण - साधरणतया वस्तुओं के उत्पादन अथवा जुटाने तथा उनकी बिक्री अथवा उपयोग के बीच समय का अंतर होता है। इसका कारण एक ओर अनियमित माँग जैसे ऊनी कपड़े अथवा बरसाती या पिफर अनियमित पूतिर् जैसे कृष्िा उत्पाद ;गन्ना, चावल, गेहूँ, कपास आदिद्ध हो सकता है। बाशार में उत्पादों का प्रवाह बना रहे इसके लिए उत्पादों के उचित भंडारण की आवश्यकता है। माल की सुपुदर्गी में ऐसी देरी हो सकती है जिससे बचा नहीं जा सकता या पिफर अचानक ही वस्तु की माँग की पूतिर् करनी हो सकती है इस सबके लिए भी पयार्प्त मात्रा में माल का संग्रहण आवश्यक है। विपणन के इस संग्रहण के कायर् को जो विभ्िान्न एजेंसियाँ करती हैं वे हैं विनिमार्ता, थोक विव्रेफता तथा पुफटकर विव्रेफता। विपणन की भूमिका सभी विपणन संगठन या तो लाभ कमाने के लिए कायर् करते हैं या पिफर अन्य लक्ष्यों की प्राप्ित के लिए कायर् करते हैं जैसे समुदाय की सेवा, जीवन गुणवत्ता में सुधर या किसी भलाइर् के कायर् को संवध्र्न जैसे यूनीसेपफ ;न्दपबमद्धि बच्चों के कल्याण के लिए कायर् कर रहा है, हैल्पेज ;भ्मसचंहमद्ध बुजुगो± की भलाइर् के लिए कायर् कर रहा है। संगठन चाहे लाभ अजर्न करने वाला हो अथवा गैर लाभ वाला विपणन की इनके उद्देश्यों की प्राप्ित में महत्त्वपूणर् भूमिका होती है। विपणन उपभोक्ताओं के लिए भी महत्त्वपूणर् होता है। यह उन वस्तु एवं सेवाओं को उपभोक्ताओं को उपलब्ध् कराता है जो उनकी आवश्यकताओं की पूतिर् करती हैं। इससे उनके जीवन स्तर में वृि होती है। इसकी देश के आथ्िार्क विकास में महत्त्वपूणर् भूमिका होती है। विभ्िान्न परिस्िथतियों में विपणन की भूमिका का संक्षेप में नीचे वणर्न किया गया है - व्यावसायिक इकाइर् में भूमिका विपणन की आध्ुनिक अवधरणा की किसी व्यावसायिक इकाइर् के उद्देश्यों की प्राप्ित में अहम भूमिका होती है यह इसका विश्वास है कि समकालीन विपणन पयार्वरण में उपभोक्ता की संतुष्िट किसी संगठन के अस्ितत्व एवं विकास की वुंफजी है। संगठन चाहे लाभ अजर्न के लिए है अथवा गैर लाभ वाले विपणन के माध्यम से उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सकते हैं। इसकी सहायता से संगठन की ियाएँ ग्राहकों की आवश्यकताओं पर वेंफित रहती हंै। उदाहरण के लिए कोइर् पफमर् किस उत्पाद या सेवा की बिक्री करे यह ग्राहकों की आवश्यकता पर निभर्र करेगा। इसलिए इसका पैफसला लेने के लिए कि किस वस्तु का उत्पादन किया जाए अथवा बिक्री की जाए, ग्राहकों की आवश्यकताओं का विश्लेषण करना होगा। उत्पाद का अनुरूपण संभावित ग्राहकों की आवश्यकतानुसार किया जाएगा। इनको उन वितरण वेंफद्रों के माध्यम से उपलब्ध् कराया जाएगा जो ग्राहकों के लिए सुविधजनक है तथा इनका मूल्य भी ग्राहक की क्रय शक्ित के अनुसार होगा। दूसरे शब्दों में विपणन व्यवसाय का वह आदशर् है जो उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं की पूतिर् कर उनकी सहायता करता है। यह एक सवर्मान्य सत्य है कि एक संतुष्ट ग्राहक किसी पफमर् की सवार्ध्िक मूल्यवान संपिा है। इस प्रकार से विपणन का किसी पफमर् के अस्ितत्व एवं विकास में महत्त्वपूणर् योगदान रहता है। अथर्व्यवस्था में भूमिका किसी भी अथर्व्यवस्था में विपणन की महत्त्वपूणर् भूमिका होती है। यह देश के आथ्िार्क विकास में एक उत्प्रेरक का कायर् करती है तथा लोगों के जीवन स्तर को उठाने में सहायक होती है। किसी देश के विकास को लोगों के जीवन स्तर से आंका जा सकता है। इससे संबंिात एक और महत्त्वपूणर् मापदंड देश के औसत नागरिक की प्रति व्यक्ित आय है। इसके आधर पर एक अविकसित देश उसे कहा जा सकता है जिसकी विश्िाष्टताएँ गरीबी, वस्तु एवं सेवाओं का अभाव तथा कृष्िा का वचर्स्व आदि तत्व हैं। विपणन किसी देश के आथ्िार्क विकास में एक महत्त्वपूणर् भूमिका निभाता है। यह लोगों को नए - नए कायर् करने तथा ग्राहकों की आवश्यकता की वस्तुओं के उत्पादन के लिए उद्यम लगाने के लिए प्रेरित करता है। विपणन उत्पादन एवं उपभोग के स्तर में असमानता के कारण उत्पन्न उच्च मूल्य के कारण पैदा कठिनाइयों को दूर करने में सहायता करता है। यह वुफशल वितरण व्यवस्थाओं के द्वारा वस्तुओं के सुगम प्रवाह को सुनिश्िचत करता है। अपनी समझ परख्िाए प्प् बताएँ कि निम्नलिख्िात कथन सत्य हैं अथवा असत्य - ;पद्ध पैकेजिंग प्रवतर्न की एक विध्ि हैऋ ;पपद्ध संग्रहण उत्पाद के समय मूल्य में वृि करती हैऋ ;पपपद्ध वित्तीयन केवल उच्च कीमती उत्पादों के विपणन के लिए ही महत्त्वपूणर् हैऋ ;पअद्ध विपणन एक अकेले उपभोक्ता की दृष्िट से ही भूमिका निभाता हैऋ ;अद्ध विपणन देश के आथ्िार्क विकास में उत्प्रेरक का कायर् करता है। दूसरे शब्दों में विपणन सही प्रकार के उत्पाद एवं सेवाओं जिनका एक पफमर् को उत्पादन करना चाहिए, मूल्य जिन पर उत्पादों को बेचना चाहिए तथा माध्य जिनके द्वारा उत्पादों को अंतिम उपभोग अथवा उपयोग के स्थान तक पहुँचाना चाहिए का पता करने में सहायता करता है। व्यवसाय एवं उपभोग के वेंफद्रों की संध्ि आथ्िार्क गतिविध्ि को गति प्रदान करती है जिससे आय में वृि होती है, उपभोग अध्िक होता है तथा बचत एवं निवेश में वृि होती है। विपणन मिश्र जैसा कि पिछले अनुभाग में बताया जा चुका है कि विपणन प्रिया में वतर्मान एवं संभावित व्रेफताओं की आवश्यकताओं की पूतिर् के लिए बाशार संभावनाओं की रचना की जाती है। वास्तविक प्रश्न यह है कि रचना वैफसे की जाए। माना कि एक पफमर् को पेय पदाथो± के उत्पादन के क्षेत्रा में लाभप्रद व्यवसाय का अवसर दिखाइर् देता है। इसके लिए एक पेय पदाथर् के नए ब्रांड के विकास एवं उसके विक्रय के कइर् महत्त्वपूणर् निणर्य लेने होंगे। उदाहरण के लिए क्या उसे किसी विदेशी पेय पदाथर् निमार्ता से सहयोग करना चाहिए? क्या उसे स्थानीय बाशार अथवा विस्तृत बाशार के लिए उत्पादन करना चाहिए? उसके नए उत्पाद की क्या विशेषताएँ होंगी? आदि। ऐसे अनेक तत्व हैं जो विपणन संबंध्ी निणर्यों को प्रभावित करते हैं। इन्हें मोटे तौर पर दो भागों में बाँटा जा सकता है ;पद्ध नियंत्राण योग्य तत्व एवं ;पपद्ध गैर नियंत्राण योग्य तत्व। नियंत्राण योग्य तत्व वे तत्व हैं जो पफमर् के स्तर पर प्रभाव डाल सकते हैं जैसे पिछले उदाहरण में पफमर् के विपणन प्रबंध्क के स्तर पर जो निणर्य लिए जाएँगे वह इस प्रकार हैं - पेय पदाथो± को काँच की शीश्िायों में भरा जाएगा अथवा प्लास्िटक के जारों में पेय का ब्रांड नाम क्या होगाऋ इसे किस मूल्य पर बेचा जाएगा। ;अन्य प्रतियोगी ब्रांड के विक्रय मूल्य के बराबर, उससे कम अथवा उससे अध्िक परद्धऋ उत्पाद को व्रेफताओं को उपलब्ध् कराने के लिए कौन से विरणत तंत्रा का उपयोग किया जाएगा, ;जैसा कि होटल, रेस्टोरेंट, किराने की दुकानें, सिगरेट पान बेचने वाले कि दुकान आदिद्ध, क्या नए पेय के प्रवतर्न के लिए समाचार पत्रा, पत्रिाकाएँ, रेडियो या पिफर टेलीविजन पर विज्ञापन दिया जाएगा। यदि समाचार पत्रा में विज्ञापन देना है, तो क्या यह स्थानीय समाचार पत्रा होगा अथवा राष्ट्रीय दैनिकऋ समाचार पत्रा क्षेत्राीय भाषा का होगा अथवा अंग्रेजी दैनिक आदि। अन्य दूसरे तत्व भी हैं जो निणर्यों को प्रभावित करते हैं लेकिन जिन पर पफमर् का कोइर् नियंत्राण नहीं होता। इन्हें पयार्वरण संबंध्ी विभ्िान्नताएँ कहते हैं। उदाहरण के लिए राजनैतिक तत्व जैसे पेय पदाथो± के क्षेत्रा में तकनीकी अथवा वित्तीय सहयोग की छूट देने संबंध्ी सरकारी नीति, आथ्िार्क अथवा उत्पादन संबंधी तत्व जैसे किसी अवध्ि में मूल्य वृि की दर अथवा बाशार में वुफल मुद्रा की उपलब्ध्ता को प्रभावित करने वाली वेंफद्रीय बैंक की नीति। यह सभी तत्व किसी भी उत्पाद के विक्रय को प्रभावित करते हैं लेकिन इन पर न तो पफमर् का नियंत्राण हो सकता है और न ही वह इन्हें प्रभावित कर सकती हैं। सपफलता के लिए नियंत्राण योग्य तत्वों के संबंध् में निणर्य पयार्वरण से संबंध्ित विभ्िान्नताओं को ध्यान में रखा जाता है। नियंत्राण योग्य विभ्िान्नताएँ विपणन के यंत्रा बन जाते हैं। विपणन में सपफलता के लिए विपणन प्रबंधक इनको निरंतर स्वरूप प्रदान करते हैं और उसमें परिवतर्न करते रहते हैं। उदाहरण के लिए एक पफमर् बाशार संभावना की पुनरर्चना अपने नियंत्राण के वुफछ घटकों में परिवतर्न लाकर कर सकती हंै जैसे मूल्य अथवा प्रवतर्न उत्पाद की विश्िाष्टताएँ या वितरण के माध्यों में परिवतर्न। पफमर् के पास जो भी विकल्प हैं, विपणन उत्पाद के विकास के लिए पफमर् एक विशेष मिश्रण का चयन कर लेती है। विपणन उत्पाद को तैयार करने के लिए पफमर् जिन चारों के मिश्रण का चयन करती हैं उसे विपणन मिश्र कहते हैं। अतः कह सकते हैं कि विपणन मिश्र विपणन माध्यों का समूह है पफमर् लक्ष्िात बाशार में विपणन के उद्देश्यों की प्राप्ित के लिए प्रयोग करती है। विपणन मिश्र - घटक उत्पाद मूल्य उत्पाद मिश्र मूल्य स्तर उत्पाद की गुणवत्ता लाभ की सीमा नए उत्पाद मूल्य नीति अनुरूपण एवं विकास मूल्य रणनीति पैकेजिंग मूल्य परिवतर्न लेबलिंग ब्रांडिग स्थान प्रवतर्न माध्यम नीति प्रवतर्न मिश्र माध्यम का चयन विज्ञापन माध्यम में अंतः विरोध् व्यक्ितगत विक्रय माध्यम सहयोग विक्रय प्रवतर्न वितरण प्रचार जन संपवर्फ विपणन मिश्र के तत्व/घटक विपणन मिश्र विभ्िान्न दरों से मिलकर बनता है जिनको मुख्यतः चार वगो± में विभक्त किया गया है। यह चार च्े के नाम से प्रसि( है। जो इस प्रकार हैं - ;पद्ध उत्पाद ;पपद्ध मूल्य ;पपपद्ध स्थान एवं ;पअद्ध प्रवतर्न। इनका वणर्न नीचे किया गया है - 1. उत्पाद - उत्पाद का अथर् है वस्तु, सेवाएँ अथवा अन्य कोइर् पदाथर् जिसका मूल्य है, जिन्हें बाशार में बिक्री के लिए प्रस्तावित किया जाता है। उदाहरण के लिए हिंदुस्तान लीवर वंफपनी कइर् उपभोग की वस्तुएँ बिक्री करना चाहता है जैसे शृंगार प्रसाध्न ;क्लोज अप टूथपेस्ट, लाइपफबाॅय साबुन आदिद्ध, डिटरजेंट पाउडर ;सपर्फ, व्हीलद्ध, खाद्य उत्पाद ;रिपफाइंड वैजीटेबल तेलद्धऋ टाटा प्रस्तावित करता है, टाटा स्टील, ट्रक, नमक तथा बड़ी संख्या में अन्य उत्पाद. एल. जी. इलेक्ट्राॅनिक्स बेच रहे हैं टेलीविजन, रेपफरीजरेटर, वंफप्यूटर के रंगीन मोनीटर आदिऋ अमूल भी लेकर आए हैं कइर् खाद्य उत्पाद ;अमूल दूध्, घी, मक्खन, पनीर, चाॅकलेट आदिद्ध। उत्पाद से अभ्िाप्राय ऊपर वण्िार्त स्थूल उत्पादों से ही नहीं हैं बल्िक उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर उनको प्रदान करने के लिए वुफछ लाभों से भी है जैसे टूथपेस्ट दांतों को सपेफद चमकाता है, मसूढ़ों को मजबूत करता हैऋ उत्पाद में इसका विस्तार भी सम्िमलित है अथार्त् ग्राहक को बिक्री के बाद की सेवाएँ, श्िाकायतों को दूर करना, अतिरिक्त मशीनी पुजो± को उपलब्ध् कराना आदि की सुविधाएँ। यह सभी बहुत महत्त्व रखती हैं विशेषतः उपभोक्ता स्थाइर् उत्पादों के विपणन में जैसे आॅटोमोबाइल, रेपफरीजरेटर आदि के विपणन विपणन में। उत्पाद के संबंध् में लिए जाने वाले निणर्य रूप - आकार, गुणवत्ता, पैकेजिंग, लेबल एवं ब्रांड के संबंध् में होते हैं। 2. मूल्य - मूल्य वह राश्िा है ग्राहक उत्पाद को प्राप्त करने के लिए जिसका भुगतान करना चाहते हैं। अध्िकांश उत्पादों के माँग की मात्रा को उसका मूल्य प्रभावित करता है। विपणनकतार्ओं के न केवल मूल्य निधर्रण के उद्देश्यों के संबंध् में निणर्य लेना होता है बल्िक मूल्य निधर्रक तत्वों का विश्लेषण कर पफमर् के उत्पादों का मूल्य भी निधर्रित करना होता है। ग्राहकों एवं व्यापारियों को दी जाने वाली छूट एवं उधर की शतो± का पैफसला भी लेना होता है जिससे कि ग्राहक समझ सके कि कीमत उत्पाद की उपयोगिता से मेल खाती है। 3. स्थान - स्थान अथार्त् वस्तुओं का वितरण में निदिर्ष्ट उपभोक्ताओं को पफमर् के उत्पादों को उपलब्ध् कराने की ियाएँ सम्िमलित हैं। इस संबंध् में जो महत्त्वपूणर् निणर्य लिए जाते हैं, वे हैं उपभोक्ताओं तक पहुँचने के लिए वितरक अथवा मध्यस्थ का चयन, मध्यस्थों को छूट, प्रवतर्न अभ्िायान आदि के द्वारा समथर्न प्रदान करना। इसके बदले में मध्यस्थ पफमर् के उत्पादों का संग्रह करते हैं, उन्हें संभावित ग्राहकों को दिखाते हैं, ग्राहकों से मूल्य तय करते हैं, विक्रय को अंतिम रूप प्रदान करते हैं तथा बिक्री के पश्चात् की सेवाएँ प्रदान करते हैं। अन्य क्षेत्रा जिनके संबंध् में निणर्य लिए जाते हैं, वे हैं स्टाॅक का प्रबंध्न, संग्रहण एवं भंडारण तथा वस्तुओं का उनके उत्पादन के स्थान से उपभोक्ता के स्थान को ले जाना। 4. प्रवतर्न - वस्तु एवं सेवाओं के प्रवतर्न में जो ियाएँ सम्िमलित हैं, वे हैं उत्पाद की उपलब्ध्ता, रंग रूप, गुण आदि को लक्ष्िात उपभोक्ता के समक्ष रखना तथा उसे इसके क्रय के लिए प्रोत्साहित करना। अध्िकांश विपणन संगठन कइर् प्रकार की बिक्री प्रवतर्न ियाएँ करते हैं तथा इस पर भारी राश्िा व्यय करते हैं। इसके कइर् माध्य हैं जैसे विज्ञापन, व्यक्ितगत विक्रय एवं बिक्री संवध्र्न की विध्ियाँ जैसे मूल्य में कटौती, मुफ्रत नमूने आदि। उपयुर्क्त क्षेत्रों में प्रत्येक के संबंध् में कइर् निणर्य लिए जाते हैं। उदाहरण के लिए विज्ञापन के लिए संदेश, माध्य ;जैसे समाचार पत्रा, पत्रिाकाएँ आदिद्ध, ग्राहकों की श्िाकायत आदि को तय करना होता है। विपणन की सपफलता इस पर निभर्र करेगी कि इन तत्वों को कितनी भली - भाँति मिश्रण किया जाए कि ग्राहक के लिए इनका महत्त्व बढ़ जाए तथा साथ ही उनकी बिक्री तथा लाभ कमाने के उद्देश्य की भी पूतिर् हो जाए। जैसे एक पफमर् उतनी मात्रा में उस लागत पर बिक्री करना चाहेगी। जो एक इच्िछत लाभ दिला सके। ऐसे में पफमर् के सामने समस्या इस बात की होगी कि दिए गए उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए तत्वों का प्रभावी योग कौन - सा होगा। उत्पाद सामान्य भाषा में उत्पाद शब्द को उत्पाद की भौतिक विशेषताओं के रूप में उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए हम कह सकते हैं कि हमने कार खरीदी है, पेन, सैल पफोन या ट्रैक्टर खरीदा है। हमसे किसी उत्पाद के क्रय करने के निणर्य न केवल इसके भौतिक गुणों से प्रभावित होते हंै बल्िक वुफछ अभौतिक एवं मनोवैज्ञानिक तत्वों, जैसे ब्रांड, प्रसिि, गारंटी, पैकेजिंग आदि से भी पेप्सीको की नशर नए उत्पाद, अभ्िाग्रहण पर गैटोरेड एवं अन्य गैर काबोर्नेट पेय के लिए उत्पादन क्षमता में वृि लक्ष्य सोमवार को पेप्सीको ने कहा कि यह अगले वषर् नए स्वास्थ्यवध्र्क उत्पाद बाशार में लाने जा रही है तथा नए बाशारों में वृि पर ध्यान देगी। यह उस रणनीति को जारी रखते हुए जिसने दुनिया की नं. 2 की पेय उत्पादक वंफपनी को लाभ की स्िथति को बनाए रखने में सहायता की थी जबकि इसके सहयोगी पेय की बिक्री में वृि ध्ीमी गति से हो रही है। पेप्सीको को नइर् मुख्य कायर्कारी अध्िकारी ब्म्व् इंदिरा नूइर् जिसने 1 अक्टूबर को कमान संभाली है, ने भी कहा कि वंफपनी अपने मात्रा एवं आगम के एक अंक के मध्य की वृि तथा प्रति शेयर आय की द्विअंक के नीचे स्तर की वृि के वाष्िार्क लक्ष्य के प्राप्त करने की लाइन पर है। पेप्सीको जो कि सोडा एवं नमकीन नाश्ते की मदों की बिक्री के लिए जानी जाती थी अब 33 बिलियन यू.एस. डाॅलर की खाद्य पदाथर् की वंफपनी बन गइर् है तथा अब यह स्वास्थ्यवध्र्क पदाथर् जैसे ट्राॅपीकाना रस, एक्वापफीना पानी एवं संपूणर् अनाज क्वाकर ओट्स सीरीयल में प्रवेश कर गइर् है। वंफपनी का कहना है कि प्रगति करते हुए इसका पूँजीगत व्यय का बिक्री के प्रतिशत के रूप में वृि होगी तथा बढ़ा हुआ अध्िकांश व्यय नए विकसित हो रहे तथा बन रहे बाशारों के विस्तार तथा गैटोरेड एवं अन्य गैर काबोर्नेटेड पेय की उत्पादन क्षमता में वृि पर किया जाएगा। ड्डोत - इकोनाॅमिक टाइम्स 25, अक्टूबर 2006 प्रभावित होता है। अथार्त् जब एक व्यक्ित कार खरीदता है तब वह कोइर् पेंच या बोल्ट इंजन या केवल चार पहिए नहीं खरीद रहा है बल्िक वह परिवहन का साध्न, सम्मान का प्रतीक, उत्पाद की गारंटी, वारंटी, वंफपनी की छवि तथा ऐसे ही अन्य विश्िाष्टताएँ भी खरीद रहा है। इस प्रकार से विपणन में उत्पाद मूतर् एवं अमूतर् दोनों प्रकार की विश्िाष्टताओं का मिश्रण है, जिनका मूल्य देकर विनिमय किया जा सकता है तथा जो ग्राहक की आवश्यकताओं की संतुष्िट कर सकता है। उत्पाद में भौतिक पदाथो± के साथ - साथ सेवा विचार, व्यक्ित, स्थान भी सम्िमलित हैं। अतः उत्पाद को इस प्रकार परिभाष्िात कर सकते हैं कि वुफछ भी जो आवश्यकताओं की पूतिर् के लिए बाशार में बिक्री के लिए प्रस्तावित किया जा सकता है उत्पाद कहलाता है। इसको प्रस्तावित करने का उद्देश्य ध्यान आकषर्ण, अध्िग्रहण एवं उपभोग के लिए उपयोग करना है। ग्राहक की दृष्िट से देखें तो उत्पाद अनेक उपयोगिताओं का समूह है जिसका क्रय उसकी वुफछ आवश्यकताओं की संतुष्िट की क्षमता के कारण किया जाता है। एक व्रेफता किसी वस्तु अथवा सेवा का क्रय इसलिए करता है क्योंकि यह उसके लिए उपयोगी है अथवा उसे यह वुफछ लाभ पहुँचाता है। किसी उत्पाद के क्रय से ग्राहक को तीन प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं - ;पद्ध क्रायार्त्मक लाभ ;पपद्ध मनोवैज्ञानिक लाभ एवं ;पपपद्ध सामाजिक लाभ। उदाहरण के लिए एक मोटर साइर्कल का क्रय परिवहन के रूप में कायार्त्मक उपयोगिता प्रदान करता है, लेकिन इसके साथ ही प्रतिष्ठा एवं सम्मान की आवश्यकता की पूतिर् करता है तथा मोटर साइर्कल की सवारी के कारण वुफछ लोगों द्वारा सम्मान की दृष्िट से देखा जाना सामाजिक लाभ पहुँचाता है। इसीलिए किसी भी उत्पादन के लिए योजना तैयार करते समय इन सभी पहलुओं को देखना चाहिए। उत्पाद उपभोक्ता वस्तुएँ औद्योगिक उत्पाद टिकाऊ क्रय करने में श्रम गैर टिकाऊटिकाऊसेवाएँसुविधाउत्पादव्रफयउत्पाद विश्िाष्टउत्पाद उत्पादों का वगीर्करण अपने वतर्मान उत्पादों की प्रगति का पुनरावलोकन तथा नए - नए क्षेत्रों, अवसरों की निरंतर तलाश वंफपनियों में एक चलन है। ;देखें बाॅक्स पेप्सीकोद्ध आइए करके देखें व्यक्ितगत/निजी वंफप्यूटर, रंगीन टेलीविजन एवं हाथ घड़ी के क्रय से मिलने वाले कायार्त्मक, मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक लाभों की सूची बनाइए। उत्पादों का वगीर्करण उत्पादों को दो वगो± में बाँटा जा सकता है - ;पद्ध औद्योगिक उत्पाद एवं ;पपद्ध उपभोक्ता उत्पाद। उपभोक्ता पदाथो± को पिफर से विभ्िान्न वगो± में बाँटा जा सकता है जिनका विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है। उपभोक्ता वस्तुएँ वे उत्पाद जिन्हें अंतिम उपभोक्ता अथवा उपयोगकतार् अपनी निजी आवश्यकताओं एवं इच्छाओं की पूतिर् के लिए क्रय करता है उपभोक्ता उत्पाद कहलाते हैं। उदाहरण के लिए साबुन, खाना पकाने का तेल, खाने की वस्तुएँ, कपड़ा, टूथपेस्ट, पंखे आदि ऐसे पदाथर् हैं जिन्हें हम अपने एवं गैर व्यावसायिक उपयोग में लाते हैं। यह उपभोक्ता वस्तुएँ कहलाती हैं। उपभोक्ता वस्तुओं को दो तत्वों के आधर पर वगीर्कृत किया जा सकता है - ;पद्ध क्रय के प्रयत्नों की सीमा ;पपद्ध उत्पाद की टिकाऊपन। इनको निम्न रूप में समझाया गया है - ;कद्ध क्रय के प्रयत्नों की सीमा किसी वस्तु के क्रय करने में व्रेफता कितना समय लगाता है एवं श्रम करता है इस आधर पर उपभोक्ता उत्पादों को निम्न तीन श्रेण्िायों में विभक्त किया जा सकता है - 1. सुविध उत्पाद - वे उपभोक्ता वस्तुएँ जिन्हें उपभोक्ता बार - बार खरीदता है, तुरंत खरीदता है सुविध उत्पाद तथा बिना अिाक समय एवं श्रम के खरीदता है सुविध उत्पाद कहलाती हैं। ऐसे उत्पादों के उदाहरण हंै सिगरेट, आइसक्रीम, दवाइयाँ, समाचार पत्रा, स्टेशनरी का सामान, टूथपेस्ट आदि। इन उत्पादों का प्रति इकाइर् मूल्य कम होता है तथा इन्हें थोड़ी विपणन 28 रुपए प्रति दजर्न से बेचे जाते हैं तथा इन्हें थोड़ी मात्रा में खरीदा जाता है। ;घद्ध सुविध उत्पादों का मानक मूल्य होता है क्योंकि यह अध्िकांश उत्पाद ब्रांड उत्पाद होते हैं। क्रय योग्य उत्पाद मात्रा में खरीदा जाता है। इन उत्पादों की वुफछ महत्त्वपूणर् विशेषताएँ निम्न हैं - ;कद्ध इन उत्पादों को सुविधजनक स्थलों से खरीदा जाता है तथा इसमें कम - से - कम समय एवं श्रम लगता है। ;खद्ध सुविध उत्पादों की माँग नियमित एवं निरंतर होती है क्योंकि यह अनिवायर् उत्पाद वगर् में आते हैं। ;गद्ध ये उत्पाद छोटी इकाइर् एवं कम कीमत पर उपलब्ध् होते हैं। उदाहरण के लिए अंडे ;घद्ध इन उत्पादों में उच्च प्रतियोगिता होती है क्योंकि इनकी पूतिर् माँग से अध्िक होती है। विपणनकतार् इसीलिए इन उत्पादों का भारी विज्ञापन करते हैं एवं ;चद्ध इन उत्पादों के विपणन में विक्रय प्रतियोगिताएँ छूट आदि विक्रय संवध्र्न योजनाएँ अथवा लघु अवध्ि प्रोत्साहन की महत्त्वपूणर् भूमिका होती है। 2. क्रय योग्य वस्तुएँ - क्रय योग्य उत्पाद वे उपभोक्ता वस्तुएँ हैं जिनके क्रय के लिए व्रेफता का अंतिम निणर्य लेने से पहले कइर् दुकानों पर जाकर गुणवत्ता, मूल्य, बनावट, उपयुक्तता आदि की तुलना में कापफी समय लगाता है। बाशारी वस्तुओं के वुफछ उदाहरण हैं कपड़े, गहने, पफनीर्चर, रेडियो, टेलीविजन आदि। बाशारी उत्पादों की महत्त्वपूणर् विशेषताएँ निम्न हैं - ;कद्ध बाशारी उत्पाद सामान्यतः टिकाऊ होते हैं अथार्त् बार - बार उपयोग में लाए जा सकते हैं। ;खद्ध बाशारी उत्पाद का प्रति इकाइर् मूल्य एवं लाभ की मात्रा सामान्यतः अध्िक होती है। ;गद्ध क्योंकि इन उत्पादों का प्रति इकाइर् मूल्य ऊँचा होता है ग्राहक चयन करने से पहले विभ्िान्न वंफपनियों के उत्पादों की तुलना करता है। ;घद्ध बाशारी उत्पादों का क्रय पूवर् नियोजित होता है तथा इन उत्पादों के क्रय के लिए प्रोत्साहन की कम आवश्यकता होती है। ;घद्ध बाशारी वस्तुओं के विक्रय में पुफटकर व्यापारियों की भूमिका बड़ी महत्त्वपूणर् होती है क्योंकि ग्राहकों को क्रय के लिए तैयार करने के लिए कापफी प्रयत्न करना होता है। 3. विश्िाष्ट उत्पाद - विश्िाष्ट उत्पाद वे उत्पाद होते हैं जिनके वुफछ विशेष लक्षण होते हैं जिसके कारण इनको विशेष रूप से खरीदना चाहते हैं। इनके ब्रांड को अत्यध्िक पसंद करते हैं तथा इनके व्रेफता भी बड़ी संख्या में होते हैं। ऐसे उत्पादों के क्रम में व्रेफता भी अध्िक समय एंव श्रम लगाने को तैयार रहते हैं। उदाहरण के लिए माना कोइर् दुलर्भ कलाकृति अथवा प्राचीन वस्तु है वुफछ लोग उनको खरीदने के लिए कापफी श्रम करने तथा दूर - दूर की यात्रा तक करने को तैयार रहते हैं। प्रतिदिन के जीवन में भी हम देखते हैं कि वुफछ लोग नाइर् विशेष, जलपान अथवा दजीर् विशेष के यहाँ जाते हैं। ऐसी वस्तुओं की माँग तुलना में विश्िाष्ट उत्पाद बेलोच होती है अथार्त् यदि मूल्य में वृि भी होती है तो भी माँग घटती नहीं है। विश्िाष्ट उत्पादों की वुफछ विशेषताएँ इस प्रकार हैं - ;कद्ध विश्िाष्ट उत्पादों की माँग सीमित होती है क्योंकि कम संख्या में ही लोग इन का क्रय करते हैं। ;खद्ध ये उत्पाद मँहगे होते हैं तथा इनका मूल्य बहुत ऊँचा होता है। ;गद्ध इस तरह के उत्पाद कम ही स्थानों पर बिक्री के लिए उपलब्ध् होते हैं क्योंकि इनके ग्राहकों की संख्या कम होती है तथा वे इनको खरीदने के लिए अतिरिक्त प्रयत्न करने को तैयार रहते हैं। ;घद्ध विश्िाष्ट उत्पादों की बिक्री के लिए भारी संवध्र्न की आवश्यकता होती है क्योंकि लोगों को इनकी उपलब्ध्ता एवं गुण आदि के संबंध् में अवगत कराना होता हैऋ एवं ;घद्ध बहुत से विश्िाष्ट उत्पादों के लिए बिक्री के पश्चात् की सेवाओं का बहुत महत्त्व है। ;खद्ध उत्पादों का टिकाऊपन टिकाऊपन के आधर पर उपभोक्ता वस्तुओं को तीन वगो± में विभक्त किया जा सकता है - टिकाऊ, गैर - टिकाऊ एवं सेवाएँ। 1. गैर - टिकाऊ उत्पाद - ऐसे उपभोक्ता उत्पाद जिनका उपयोग एक बार अथवा वुफछ ही बार में हो जाता है गैर - टिकाऊ उत्पाद कहलाते हैं। उदाहरण सेवाओं का विपणन भारतीय डाॅक की विपणन में भागीदारी 28 प्रतिशत है जबकि ब्लू डाॅटर् की 20 प्रतिशत स्पीड पोस्ट शीघ्र डाॅक सेवा की दौड़ में सबसे आगे है डाक विभाग एवं भारतीय सरकार द्वारा कराए गए अध्ययन से पता लगता है कि वुफल मात्रा का 27.55 प्रतिशत भागीदारी के साथ स्पीड पोस्ट शीघ्र डाक सेवा वगर् में बाशार के अग्रणी बन कर उभरी है। अध्ययन के अनुसार वषर् 05 - 06 में 46.67 प्रतिशत करोड़ की वस्तुओं को शीघ्र डाॅक सेवा के द्वारा भेजा गया था। अध्ययन के अनुसार द्रुतगति डाक उद्योग ही ;लोजिस्िटक और कारगो एवं माल को छोड़कर जो कि निजी पफमो± के आवतर् का 35 - 40 प्रतिशत हैद्ध 1500 करोड़ रुपए का है। मूल्य की दृष्िट से देखें तो स्पीड पोस्ट यदि अग्रणी है तो ब्लूडाटर् बाशार की 20 प्रतिशत भागीदारी के कारण द्वितीय स्थान पर, 11.91 प्रतिशत भागीदारी लेकर डी.टी.डी.सी. का स्थान उसके पश्चात् तथा उसके भी बाद भी 10.98 प्रतिशत अंश के साथ पफसर््ट फ्रलाइट आता है। यह सब प्रतियोगी मूल्य के कारण संभव हुआ है। श्री सैमूअल का कहना है कि हम वही सेवाएँ, समान कौशल के साथ प्रदान कर रहे हैं जो निजी कूरियर प्रदान कर रहे हैं लेकिन यह सब आधी दरों पर। स्पीड पोस्ट की मात्रा में ‘एक भारत एक दर’ लागू होने के पश्चात् 30 - 40 प्रतिशत तक की वृि हुइर् है। द्रुतगामी वंफपनियों का विश्वास है कि विशेष आथ्िार्क क्षेत्रा ैम्र्े की स्थापना एवं विनिमार्ण क्षेत्रा के बढ़ते उत्पाद के कारण देश में बढ़ती आथ्िार्क ियाएँ इस बाशार का और भी विकास होगा। ड्डोत - इकोनाॅमिक्स टाइम्स 20 अक्टूबर, 2006 के लिए वुफछ उत्पाद हैं जिन्हें हम खरीदते हैं जैसे टूथपेस्ट, डिटजे±ट, नहाने का साबुन तथा स्टेशनरी का सामान आदि। विपणन की दृष्िट से इन उत्पादों पर लाभ कम मिलता है, इन्हें अध्िकाध्िक स्थानों पर उपलब्ध् कराया जाता है तथा इनका भारी विज्ञापन करना होता है। 2. टिकाऊ उत्पाद - सभी मूतर् उपभोक्ता उत्पाद जिनको बार - बार उपयोग में लाया जा सकता है टिकाऊ उत्पाद कहलाते हैं। इनके उदाहरण हैं रेपफरीजरेटर, रेडियो, साइर्कल, सिलाइर् मशीन एवं रसोइर् उपकरण। इन वस्तुओं का उपयोग लंबे समय तक किया जाता है। इन पर लाभ भी अध्िक मिलता है तथा इनके विव्रेफताओं को बिव्रफी में अध्िक परिश्रम करना होता है तथा गारंटी एवं बिव्रफी के बाद की सेवाएँ प्रदान करनी होती हैं। 3. सेवाएँ - टिकाऊ एंव गैर - टिकाऊ वस्तुएँ मूतर् होती हैं क्योंकि इनका भौतिक अस्ितत्व होता है। इन्हें देखा एवं छूआ जा सकता है। सेवाएँ अमूतर् होती हैं। सेवाओं से अभ्िाप्रायः उन ियाओं लाभ अथवा संतुष्िट से है जिनकी बिक्री की जा रही है जैसे ड्राइर्क्लीन करना, घड़ी मरम्मत, बाल काटना, डाक सेवाएँ, डाॅक्टर, आकीर्टेक्ट एवं वकील की सेवाएँ। सेवा की वुफछ विशेषताएँ नीचे दी गइर् हैं - ;कद्ध प्रकृति से सेवाएँ अमूतर् होती है अथार्त् उन्हें हम देख, छू अथवा स्पशर् का अनुभव नहीं कर सकते। ;खद्ध सेवा को इसके ड्डोत से अलग नहीं किया जा सकताऋ ;गद्ध सेवाओं को संग्रहित नहीं किया जा सकता। यह शीघ्र नष्ट प्राय होती है। उदाहरण के लिए यदि एक दजीर् एक सप्ताह कायर् नहीं करता है तो, जो सेवाएँ वह इस अवध्ि में प्रदान कर सकता था अब व्यथर् गईं एवं ;घद्ध सेवाएँ उच्च स्तर की भ्िान्नता लिए होती हैं क्योंकि यह कइर् प्रकार की हैं तथा इनकी गुणवत्ता इनके प्रदानकतार् पर निभर्र करती है। इसीलिए अलग - अलग लोगों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं से अलग - अलग संतोष प्राप्त होता है। औद्योगिक उत्पाद औद्योगिक उत्पाद वे उत्पाद होते हैं जिनका अन्य वस्तुओं के उत्पादन के लिए आगत के रूप में प्रयोग किया जाता है। कच्चा माल, इंजन, ग्रीज, मशीन, औशार आदि इस प्रकार के उत्पादों के उदाहरण हैं। दूसरे शब्दों में औद्योगिक उत्पाद दूसरी वस्तुओं के उत्पादन में प्रयोग के लिए गैर व्यक्ितगत एवं व्यावसायिक प्रयोग के लिए होते हैं। औद्योगिक उत्पादों के बाशार के भाग हैं विनिमार्ता परिवहन एजेंसियाँ बैंक एवं बीमा वंफपनियाँ, खनन वंफपनियाँ एवं सावर्जनिक सेवाएँ। औद्योगिक उत्पादों की महत्त्वपूणर् विशेषताएँ नीचे दी गइर् हैं - 1. व्रेफताओं की संख्या - उपभोक्ता उत्पादों की तुलना में औद्योगिक उत्पादों के व्रेफताओं की संख्या सीमित होती है। उदाहरण के लिए गन्ने को चंद ही चीनी उत्पादक खरीदते हैं जबकि चीनी जो कि एक उपभोक्ता वस्तु है को देश में करोड़ों की संख्या में लोग खरीदते हैं। 2. माध्य स्तर - सीमित संख्या में व्रेफताओं के कारण औद्योगिक उत्पादों की बिक्री सामान्यतः छोटे वितरण माध्यों के द्वारा की जाती है अथार्त् प्रत्यक्ष विक्रय या पिफर एक स्तरीय माध्य के द्वारा। 3. भौगोलिक रूप से वेंफित - उद्योग ध्ंध्े किसी एक स्थान अथवा क्षेत्रा में स्िथत होते हैं इसलिए औद्योगिक उत्पादों के बाशार एक ही स्थान पर वेंफित हो जाते हैं। उदाहरण के लिए पावरलूम की माँग मुम्बइर्, शोलापुर, बंगलौर में अध्िक है, क्योंकि हमारे देश में वस्त्रा उद्योग इन्हीं स्थानों में वेंफित है। 4. व्यत्पुन्न माँग - औद्योगिक उत्पादों की माँग उपभोक्ता की वस्तुओं की माँग से उत्पन्न होती हैं। जैसे चमड़े की माँग इसलिए है क्योंकि बाशार में जूते एवं चमड़े से बनी वस्तुओं की माँग है। 5. प्रौद्योगिकी की भूमिका - औद्योगिक उत्पाद जटिल प्रकृति के उत्पाद होते हैं। इन्हें व्यवसाय परिचालन के लिए खरीदा जाता है इसलिए इन उत्पादों के क्रय में तकनीकी बातों का बहुत महत्त्व है। 6. बदले में क्रय - आधरभूत उद्योगों जैसे तेल, स्टील, रबर, एवं दवाइर् आदि में लगी वंफपनियाँ बदले में क्रय की नीति अपनाती हैं। उदाहरण के लिए अशोक लेलैंड, एपफ.एम.आर.एल. से टायर एवं टयूब खरीदती है तो एम.आर.एपफ. अशोक लेलैंड से आवश्यकता पड़ने पर ट्रक खरीदती है। 7. प‘े पर देना - औद्योगिक उत्पादों के बाशार में एक नइर् प्रवृति जन्म ले रही है। उत्पादों का क्रय न करके उन्हें पट्टðे पर ले लिया जाता है क्योंकि इन उत्पादों का मूल्य बहुत अध्िक होता है। वगीर्करण औद्योगिक उत्पादों को निम्न श्रेण्िायों में वगीर्कृत किया जा सकता है - ;पद्ध माल एवं पुजे± - इनमें वे वस्तुएँ सम्िमलित हैं जो पूरी तरह से विनिमार्ताओं के उत्पादों के भाग बन जाते हैं। ये वस्तुएँ दो प्रकार की होती हैं ;कद्ध कच्चा माल - इनमें सम्िमलित वस्तुएँ है - रूइर्, गन्ना, तेलहन एवं प्राकृतिक आपूतिर् एवं व्यावसायिक सेवाएँ उपकरण रखरखाव परिचालन एवं मरम्मत सहायक की वस्तुएँ आपूतिर् कृष्िा प्राकृतिक घटक घटक उत्पाद उत्पाद वस्तुएँ पुजेर् औद्योगिक वस्तुओं का वगीर्करण उत्पाद जैसे खनिज पदाथर् ;कच्चा पैट्रोल, कच्चा लोहाद्ध, मछली एवं काठ - कबाड़ एवं ;खद्ध निमिर्त वस्तुएँ एवं पुजे±। ये भी दो प्रकार के होते हैं - घटक पदाथर् जैसे काँच, लोहा, प्लास्िटक एवं घटक पुजे± जैसे टायर, बिजली हैं ;कद्ध रख रखाव एवं मरम्मत की वस्तुएँ जैसे रंगरोगन, कीलें आदि तथा ;खद्ध परिचाल आपूतिर्याँ जैसे स्नेहक, वंफप्यूटर, स्टेशनरी, लिखने के लिए कागज आदि। उपभोक्ता वस्तुओं एवं औद्योगिक उत्पादों की अपनी समझ परख्िाए प्प्प् देखें कि निम्न कथन सत्य अथवा असत्य - ;पद्ध अंतिम उपभोक्ताओं द्वारा अपनी निजी आवश्यकताओं की संतुष्िट के लिए खरीदी गइर् वस्तुएँ औद्योगिक उत्पाद कहलाते हैं। ;पपद्ध विश्िाष्ट उत्पाद सामान्यतः कीमती होते हैं एवं इनका मूल्य अत्यध्िक ऊँचा होता है। ;पपपद्ध सुविध वस्तुओं का क्रय पूवर् नियोजित होता है। ;पअद्ध खरीददारी की वस्तुओं का क्रय बार - बार तुरंत एवं कम श्रम से किया जाता है। ;अद्ध विक्रय संवध्र्न योजनाओं की औद्योगिक उत्पादों की बिक्री में महत्त्वपूणर् भूमिका होती है। ;अपद्ध वुफछ भी जिसे बाशार में आवश्यकता की पूतिर् के लिए लाया जाता है उत्पाद कहलाता है। ;अपपद्ध टिकाऊ उत्पाद साधरणतया एक या वुफछ बार ही उपयोग में आते हैं। ;अपपपद्ध सेवाओं का संग्रहण नहीं हो सकता। ;पगद्ध पफनीर्चर एक गैर टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद का उदाहरण है। ;गद्ध टूथपेस्ट उपभोक्ता उत्पाद का उदाहरण है। के बल्ब, स्टीयरिंग एवं बैटरी। ;पपद्ध पूँजीगत वस्तुएँ - ये वे वस्तुएँ हैं जिनका प्रयोग तैयार माल के उत्पादन में किया जाता है। ये हैं ;कद्ध प्रतिस्थापित जैसे उत्तोलक मुख्य वंफप्यूटर एवं ;खद्ध उपकरण जैसे हाथ के औशार, व्यक्ितगत उपयोग के वंफप्यूटर, पैफक्स मशीन आदि। ;पपपद्ध आपूतिर् एवं व्यावसायिक सेवाएँ - ये कम समय तक टिकने वाली वस्तु एवं सेवाएँ होती हैं जो तैयार वस्तुओं को विकसित करने अथवा उनके प्रबंध्न में सहायक होती हैं। इनमें सम्िमलित प्रकृति में अंतर महत्त्व रखता है क्योंकि इन दोनों के व्रेफताओं का उद्देश्य, दृष्िटकोण अलग - अलग है तथा इनके इन उत्पादों के क्रय के कारण भी भ्िान्न हैं। जैसे एक औद्योगिक व्रेफता अध्िक विवेकी होता है। वह विभ्िान्न उपलब्ध् ब्रांड की लागत, तकनीकी पहलू एवं आपूतिर्कतार् की साख का अध्ययन करेगा जबकि उपभोक्ता वस्तुओं के व्रेफता अिाक स्वेच्छाचारी एवं संवेदशील होते हैं जो विज्ञापन एवं विभ्िान्न बिक्री संवध्र्न योजनाओं से प्रभावित हो जाते हैं। ब्रां¯डग उत्पाद के संबंध् में किसी भी विपणनकतार् को जो सवार्ध्िक महत्त्वपूणर् निणर्य लेना होता है वह ब्रांड के संबंध् में होता है। उसे यह निणर्य लेना होता है कि पफमर् के उत्पादों का विपणन किसी ब्रांड के नाम से किया जाए या पिफर सामान्य नाम से किया जाए। उदाहरण के लिए एक पुस्तक, घड़ी, टायर वैफमरा, नहाने का साबुन आदि। हम जानते हैं वैफमरा एक लैंस होता है जिसके चारों ओर प्लास्िटक अथवा स्टील का प्रेफम होता है तथा इसके साथ अन्य विशेषताएँ जैसे फ्रलैशगन आदि होती है। इसी प्रकार से एक पुस्तक वुफछ कागजों का बंडल होता है जिसका परिबंध्न कर दिया गया है। इस पर किसी विषय विशेष के संबंध् में उपयोगी सूचना छपी हुइर् होती है। ये सभी वस्तुएँ इनके लाक्षण्िाक नाम, जैसे वैफमरा अथवा पुस्तक, से पुकारी जाती हैं। यदि उत्पादों को उनके लाक्षण्िाक नाम से बेचा जाता है तो विपणनकतार्ओं को अपने प्रतियोगियों के उत्पादों से अंतर करना कठिन हो जाता है। इसीलिए अध्िकांश विपणनकतार् अपने उत्पादों को कोइर् खास नाम दे देते हैं जिससे कि उनके उत्पादों को अलग से पहचाना जा सकता है तथा प्रतियोगी उत्पादों से भी उनका अंतर किया जा सकता है। किसी उत्पाद को नाम, चिह्न अथवा कोइर् प्रतीक ब्रांड एवं ब्रां¯डग ब्रांडिग उपभोक्ता के लिए निगमित ब्रांड अस्ितत्व का निमार्ण करना एवं इस ब्रांड का उपभोक्ता के मस्ितष्क में छाप डालना है तथा इसके लिए ब्रांड की स्िथति बनाने एवं इसके प्रबंध्न की आवश्यकता होती है। ब्रांड का आज एक अपना अस्ितत्व है ;उत्पाद, सेवा, वंफपनी, व्यक्ित तकनीक आदिद्ध जो स्वामी/बाशार को चाहिए तथा इसके लिए जो मूल्य वह चुकाना चाहता है के बीच मूल्य विनिमय मापन का कायर् करता है। मुझे सदा ऐसा लगा है कि ब्रांड मूलतः निमार्ण वंफपनी अपने लिए क्या कहती है से नहीं बल्िक वंफपनी क्या करती है से होता है। - जैपफ बीजोस उत्पाद वह है जिसको कारखाने में बनाया जाता है जबकि ब्रांड वह है जिसे ग्राहक खरीदता है। कोइर् प्रतियोगी किसी उत्पाद की नकल कर सकता है जब कि ब्रांड अपने आप में विश्िाष्ट होता है। एक उत्पाद शीघ्र ही पुराना हो सकता है जबकि एक सपफल ब्रांड अमर होता है। - स्टीपफन विंफग आपके ब्रांड की शक्ित उसके प्रभुत्व में है। किसी एक बाशार पर 50 प्रतिशत अध्िकार 5 बाशारों के 10 प्रतिशत की तुलना में कहीं श्रेष्ठ होता है। - अल रीस आपके ब्रांड की छवि मूलतः संवेदनशीलता का निमार्ण है। लोगों की पसंद को बदलने में तवर्फ की तुलना में संवेदनशीलता सदा अध्िक शक्ितशाली होती है लेकिन लोग पसंद करते हैं कि उनका चयन विवेकपूणर् हो। - ड्रेटन बडर् ड्डोत - इपैफक्िटव एक्जीक्यूटिव, 2006 से साभार आदि देने की प्रिया को ब्रांडिंग कहते हैं। ब्रांडिंग से जुड़े वुफछ शब्द निम्नलिख्िात हैं - 1. ब्रांड - ब्रांड नाम, शब्द, चिह्न, प्रतीक अथवा इनमें से वुफछ का मिश्रण है जिसका प्रयोग किसी एक विव्रेफता अथवा विव्रेफता समूह के उत्पादों वस्तु एवं सेवाओं की पहचान बनाने के लिए किया जाता है तथा इससे इन वस्तु एवं सेवाओं का प्रतियोगियों के उत्पादों से अंतर किया जा सकता है। उदाहरण के लिए वुफछ प्रचलित ब्रांड हैं बाटा, लाइपफबाॅय, डनलप, हाॅट शाॅट एवं पारकर। ब्रांड एक व्यापक शब्द है जिसके दो घटक है - ब्रांड नाम एवं ब्रांड चिह्न। उदाहरण के लिए एश्िायन पंेट का चिह्न है इसके पैकेज पर बना गट्टू है जो कि इसका ब्रांड चिह्न है। 2. ब्रांड नाम - ब्रांड का वह भाग जिसे बोला जा सकता है ब्रांड नाम कहलाता है। दूसरे शब्दों में ब्रांड नाम एक ब्रांड का मौख्िाक भाग है। उदाहरण के लिए एश्िायन पेंट, सपफोला, मैगी, लाइपफबाॅय, डनलप एवं अंकल चिप्स ब्रांड के नाम हैं। 3. ब्रांड चिह्न - ब्रांड का वह भाग जिसे पुकारा नहीं जा सकता लेकिन जिसे पहचाना जा सकता है ब्रांड चिÉ कहलाता है। यह एक प्रतीक, आकार, अलग रंग अथवा शब्दों की बनावट के रूप में होता है। उदाहरण के लिए एश्िायन पेंट का गट्टू, ओनिडा का प्रेतऋ जीवन बीमा निगम का योग क्षमा या पिफर एनासिन का हथेली तथा चार उंगलियाँ सभी ब्रांड चिह्न हैं। 4. ट्रेड मावर्फ - ब्रांड अथवा उसके किसी भाग को यदि कानूनी संरक्षण प्राप्त हो जाता है उसे ट्रेड मावर्फ कहते हैं। यह संरक्षण किसी अन्य पफमर् द्वारा इसके प्रयोग के विरु( मिलता है। अथार्त् जिस पफमर् ने अपने ब्रांड का पंजीयन करा लिया है उसे इसके उपयोग करने का एकाध्िकार प्राप्त हो जाता है। ऐसी स्िथति में देश में कोइर् अन्य पफमर् इस नाम अथवा चिÉ का प्रयोग नहीं कर सकती। यद्यपि ब्रां¯डग के कारण, पैकेजिंग, लेबल, कानूनी संरक्षण आदि की लागत के कारण, वस्तु की लागत में वृि हो जाती है, पिफर भी इसके विव्रेफता एवं उपभोक्ता दोनों को अनेक लाभ हंै। विपणनकतार्ओं को लाभ ;पद्ध उत्पाद में अंतभेर्द करने में सहायक - ब्रांडिग किसी भी पफमर् को अपने उत्पादों को अपने प्रतियोगियों के उत्पादों से भ्िान्न दशर्न में सहायक होता है। इससे पफमर् अपने उत्पादों के बाशार को सुरक्ष्िात रखने एवं नियंत्रिात कर सकती है। ;पपद्ध विज्ञापन एवं प्रदशर्न कायर्क्रमों में सहायक - ब्रांड पफमर् को अपने विज्ञापन एवं प्रदशर्न कायर्क्रमांे में सहायता प्रदान करती है। ब्रांड नाम के बिना विज्ञापनकतार् उत्पाद वगर् के संबंध् में तो जानकारी दे सकता है लेकिन अपने उत्पादों की बिक्री के लिए आश्वस्त नहीं हो सकता। ;पपपद्ध विभेदात्मक मूल्य निधर्रण - ब्रांडिग के कारण पफमर् उस मूल्य पर अपना माल बेच सकता है जो उसके प्रतियोगियों के उत्पादों के मूल्य से भ्िान्न हो सकता है क्योंकि यदि ग्राहक किसी ब्रांड को पसंद करने लगते हैं तो वह इसके आदी हो जाते हैं तथा वे इसके लिए थोड़ा अध्िक भुगतान करने के लिए भी तैयार रहते हैं। ;पअद्ध नए उत्पादों से परिचित कराना सरल - यदि पहले से ही प्रचलित ब्रांड के नाम से कोइर् नया उत्पाद बाशार में लाया जाता है तो इसको ब्रांड को प्राप्त गौरव का लाभ मिलता है तथा इसके अद्भुत प्रारंभ की संभावना बन जाती है। इसीलिए अनेक वंफपनियाँ जिनके पूणर् स्थापित ब्रांड नाम हैं अपने नए उत्पादों को इसी ब्रांड नाम से बाशार में लाते हैं। उदाहरण के लिए पूफड स्पैश्िायलिटीश लिका मैगी ;नूडल्सद्ध एक सपफल ब्रांड है। इसने यही ब्रांड नाम अपने कइर् नए उत्पादों को बाशार में लाने में प्रयोग किया जैसे कि टोमेटो वैफचअप, सूप आदि। इसी प्रकार से सैमसंग ने टेलीविजन, कपड़े धेने की मशीन तथा माइक्रोवेव जैसे उत्पादों को भी यही ब्रांड नाम दिया। ग्राहकों के लाभ ;पद्ध उत्पाद की पहचान करने में सहायक - ब्रांडिग के कारण ग्राहक उत्पादों की अलग - अलग पहचान कर सकता है। उदाहरण के लिए यदि कोइर् व्यक्ित उत्पाद के किसी विशेष ब्रांड से संतुष्ट है जैसे चाय पत्ती, डिटजे±ट साबुन तो इनको खरीदते समय उसे हर बार इनकी जाँच करने की आवश्यकता नहीं है। विपणन इस प्रकार से ब्रांडिग के कारण उत्पाद को ग्राहक बार - बार खरीदता है। ;पपद्ध गुणवत्ता सुनिश्िचत करना - ब्रांडिग गुणवत्ता के एक विशेष स्तर को सुनिश्िचत करता है। जब भी ग्राहक गुणवत्ता में अंतर पाता है तो वह विनिमार्ता अथवा विपणनकतार् को इसकी श्िाकायत कर सकता है। इससे ग्राहक में विश्वास पैदा होता है इससे उसकी संतुष्िट में वृि होती है। उत्पाद ऐसा होना चाहिए कि इसे उपभोक्ता सरलता से खोल सवेंफ, एक स्थान से दूसरे स्थान ले जा सवेंफ एवं इसका उपयोग कर सवेंफ। प्रसाध्न की वस्तुएँ, दवाइयाँ, टूथपेस्ट की ट्यूब इसके सही उदाहरण हैं। ;पपपद्ध सामाजिक सम्मान का प्रतीक - वुफछ ब्रांड अपनी गुणवत्ता के परिणामस्वरूप सम्मान का प्रतीक माने जाते हैं। इन ब्रांड उत्पादों के उपभोक्ता इनके प्रयोग करने में गौरव का अनुभव करते हैं तथा इससे उनकी संतुष्िट के स्तर में वृि होती है। एक अच्छे ब्रांड नाम की विशेषताएँ एक उचित ब्रांड के नाम का चयन करना सरल नहीं होता है। इस संबंध् में निणर्य लेते समय महत्त्वपूणर् बात ध्यान में रखनी चाहिए कि एक स्वयं करें अपने क्षेत्रा के पुफटकर विव्रेफता की दुकान पर जाएं तथा एक सूची तैयार करें जिसमें सम्िमलित करें ;पद्ध कौन - कौन से ब्रांड उपलब्ध् हैं ;पपद्ध प्रत्येक ब्रांड का मूल्य एवं ;पपपद्ध आपके परिवार में उपयोग में आने वाले किन्हीं ऐसे तीन उपभोक्ता अस्थाइर् उत्पाद जैसे नहाने का साबुन, डिटजे±ट पाउडर, खाना पकाने का तेल, टूथ - पेस्ट, चाय आदि जो सबसे अध्िक मात्रा में बिकते हों। आपके घर में इन चुने गए उत्पादों के ब्रांड में से कौन - से ब्रांड का उपयोग किया जाता है। बार किसी ब्रांड नाम का चयन कर लिया जाता है एवं उत्पाद को इस नाम से बाशार में उतार दिया जाता है तो इसके पश्चात् इसको बदलना कठिन हो जाता है। इसीलिए प्रथम बार में ही सही ब्रांड का चयन करना आवश्यक है। ब्रांड के नाम का चयन करते समय जिन बातों को ध्यान में रखना चाहिए वह निम्नलिख्िात हैं - ;पद्ध ब्रांड नाम संक्ष्िाप्त होना चाहिए। इसका उच्चारण करना, बोलना, पहचान करना एवं याद करना, सरल होना चाहिए। जैसे पौंड्स, वी.आइर्.पी., रिन, विम, आदि। ;पपद्ध ब्रांड ऐसा हो इससे उत्पाद के लाभ एवं गुणों का पता लगे। यह उत्पाद के कायो± के अनुरूप होना चाहिए। जैसे रसिका, जेंटील, प्रोमिस, माइर् पेफयरलेडी एवं बूस्ट। ;पपपद्ध ब्रांड नाम भ्िान्नता लिए होना चाहिए जैसे लिरिल, स्िप्ररिट, सपफारी, जोडियक। ;पअद्ध ब्रांड नाम ऐसा हो कि उसे पैकिंग, लेबलिंग की आवश्यकताओं, विज्ञापन के विभ्िान्न माध्यम एवं विभ्िान्न भाषाओं में अपनाया जा सके। ;अद्ध ब्रांड का नाम पयार्प्त लोच वाला हो जिससे कि उत्पाद शृंखला में जिन नए उत्पादों को जोड़ा जाए उनके लिए भी इसे उपयोग में लाया जा सके। जैसे - मैगी, कोलगेट। ;अपद्ध इसका पंजीयन कराया जा सके तथा इसको कानूनी संरक्षण मिल सके। ;अपपद्ध चयन किया गया नाम टिकाऊ होना चाहिए अथार्त् यह सदाबहार होना चाहिए। पैकेजिंग हाल ही के वषो± में सबसे महत्त्वपूणर् परिवतर्न जिसने व्यावसायिक जगत को प्रभावित किया है वह पैकेजिंग के क्षेत्रा में हुआ है। ऐसे अनेक उत्पाद हैं जिनके संबंध् में हम सोचते थे कि इनकी प्रवृति इस प्रकार की है कि इनका सपफल पैकेजिंग संभव नहीं है लेकिन उनकी भी पैंकिग अब सपफलतापूवर्क की जाती है जैसे - दालें, घी, दूध्, नमक, शीतल पेय आदि। पैकेजिंग का अथर् है किसी उत्पाद के डब्बे के आवरण को डिशाइन करना एवं उसका उत्पादन कायर्। पैकेजिंग की कइर् उत्पादों के सपफल विपणन अथवा इसकी असपफलता में महत्त्वपूणर् भूमिका होती है विशेषतः उपभोक्ता अस्थाइर् उत्पाद। सत्य यह है कि बीते वषो± में वुफछ सपफल उत्पादों की सपफलता के कारणों का विश्लेषण करें तो पता लगेगा कि इसमें पैकेजिंग की भी भूमिका है। उदाहरण के लिए मैगी नूडल, अंकल चिप्स एवं व्रैफक्स वैपफसर् जैसे पदाथो± की सपफलता का यह एक महत्त्वपूणर् कारण रहा है। पैकेजिंग के स्तर पैकेजिंग के तीन स्तर होते हैं। ये इस प्रकार हैं - 1. प्राथमिक पैकेज - इसका अभ्िाप्राय उत्पाद की सीध्ी पैकेजिंग से है। वुफछ मामलों में प्राथमिक पैकेज में ही वस्तुओं को तब तक रखा जाता है जब तक कि उपभोक्ता उनका उपभोग न करे ;जैसे मोजों के लिए प्लास्िटक के पैकेटद्ध जबकि वुफछ मामलों में उत्पाद के समाप्त होने तक उसे इन्हीं में रखा जाता है जैसे टूथपेस्ट की ट्यूब, माचिस की डब्बी आदि। विपणन पैकेजिंग के स्तर 2. द्वितीयक पैकेजिंग - यह सुरक्ष्िात रखने के लिए एक अतिरिक्त परत होती है जिसे उस समय तक रखा जाता है जब तक कि इसका उपयोग प्रारंभ न हो जाए जैसे शेविंग क्रीम की ट्यूब साधरणतया गत्ते के बक्से में रखी होती है। जब उपभोक्ता शेविंग क्रीम को प्रयोग करना प्रारंभ करता है तो वह बाॅक्स को तो पेंफक देता है लेकिन प्राथमिक ट्यूब को रखे रखता है। 3. परिवहन के लिए पैकेजिंग - इससे अभ्िाप्राय एक और पैकेजिंग से है जो संग्रहण, पहचान अथवा परिवहन के लिए आवश्यक है। उदाहरण के लिए एक टूथपेस्ट निमार्ता वस्तुओं को पुफटकर विव्रेफता को 10, 20 अथवा 30 की इकाइर् की तह लगाकर बक्सों में भेजता है। पैकेजिंग का महत्त्व वस्तु एवं सेवाओं के विपणन में पैकेजिंग का बड़ा महत्त्व रहा है। इसके निम्न कारण हैं - ;पद्ध ;पपद्ध स्वास्थ्य एवं स्वच्छता बनाए रखने का ऊँचा होता स्तर - देश में लोगों का जीवन स्तर ऊँचा होता जा रहा है जिसके कारण अध्िक से अध्िक लोग अब पैक की हुइर् वस्तुएँ ही खरीदते हैं। इससे वस्तुओं में मिलावट की संभावना कम से कम रहती है। स्वयं सेवा दुकानें - स्वयं सेवा पुफटकर दुकानें आजकल बहुत लोकपि्रय हो रही हैं विशेषतः बड़े शहरों एवं कस्बों में। इसके कारण व्यक्ितगत विक्रय के माध्यम से बिक्री संवध्र्न की पारंपरिक भूमिका अब पैकेजिंग निभा रहा है। ;पपपद्ध नवीनता के अवसर - पैकेजिंग के क्षेत्रा में हाल ही में हुए परिवतर्नों ने देश के विपणन परिदृश्य को पूरी तरह से ही बदल दिया है। जैसे अब ऐसे पैकेजिंग को विकसित कर लिया गया है जिसमें दूध् को बिना रेप्रफीजरेटर के भी 4 - 5 दिन तक सुरक्ष्िात रखा जा सकता है। इसी प्रकार से औषध्ि, पेय पदाथर् आदि के क्षेत्रा में भी पैकेजिंग में कापफी नवीनता आइर् है। परिणामस्वरूप ऐसे उत्पादों के विपणन की संभावनाओं में वृि हुइर् है। ;पअद्ध उत्पादों का विभेदीकरण - पैकेजिंग उत्पादों में अंतर करने का एक महत्त्वपूणर् माध्यम है। पैकेज का रंग, आकार, पदाथर् आदि के कारण ग्राहक उत्पाद की गुणवत्ता में अंतर को सही रूप में समझ पाता है। उदाहरण के लिए किसी उत्पाद के पैकेज को देखकर, जैसे रंग रोगन, अथवा बालों का तेल, इसमें रखे उत्पाद की गुणवत्ता का वुफछ अंदाजा लगाया सकता है। पैकेजिंग के कायर् जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है पैकेजिंग वस्तुओं के विपणन में कइर् कायर् करता है। इनमें से वुफछ महत्त्वपूणर् कायर् इस प्रकार हैं - ;पद्ध उत्पाद की पहचान करना - पैकेजिंग उत्पादों की पहचान करने में बहुत सहायता करता है। उदाहरण के लिए, लाल रंग में कोलगेट या पिफर पौंड्स क्रीम का जार इनके पैकेज आसानी से पहचाने जाते हैं। ;पपद्ध उत्पाद संरक्षण - पैकेजिंग वस्तु को नष्ट होने, रिसने, चोरी चले जाने, नुकसान पहुँचाने, जलवायु के प्रभाव से सुरक्षा प्रदान करता है। वस्तुओं के संग्रहण, वितरण एवं परिवहन के दौरान इस प्रकार की सुरक्षा की आवश्यकता होती है। ;पपपद्ध उत्पाद के उपयोग में सरल - पैकेज का आकार एवं स्वरूप। ;पअद्ध उत्पाद प्रवतर्न - प्रवतर्न के उद्देश्य से भी पैकेजिंग का उपयोग किया जाता है। चकाचैंध् करने वाली रंग योजना, पफोटो या पिफर छपी हुइर् पफोटो का उपयोग क्रय के समय ध्यानाकषर्ण के लिए किया जा सकता है। कभी - कभी यह विज्ञापन से अच्छा कायर् कर जाती है। स्वयं सेवी स्टोर में पैकेजिंग की यह भूमिका और अध्िक महत्त्वपूणर् हो जाती है। लेबलिंग वस्तुओं के विपणन में सरल सा दिखने वाला लेकिन एक महत्त्वपूणर् कायर् पैकेज पर लगाने के लिए लेबल के स्वरूप को तय करना है। लेबल उत्पाद पर एक सरल सी पचीर् लगाने ;जैसे कि स्वयं करें अपने नशदीक की किराने की दुकान पर जाएँ तथा किन्ही ऐसे दो उत्पादों का पता लगाएँ जो पैकेज एवं खुले ;बिना पैकेज किएद्ध दोनों प्रकार से बेचे जा रहे हैं तथा पता लगाएँ ;पद्ध जो उत्पाद पैकेज कर बेचा जा रहा है वह अध्िक श्रेष्ठ है ;पपद्ध जो उत्पाद खुले रूप में बेचा जा रहा है वह अध्िक श्रेष्ठ है ;पपपद्ध पुफटकर विव्रेफता के लिए पैकेज किए हुए माल को बेचने में लाभ है अथवा बिना पैकेज के बेचे जाने में लाभ है। स्थानीय गैर ब्रांड उत्पाद चीनी, गेहूँ, दालें आदिद्ध जो गुणवत्ता या मूल्य जैसी वुफछ सूचनाएँ दिखाती हैं, से लेकर जटिल ग्रापिफक्स जो ब्रांड उत्पादों के पैकेज पर होते हैं ;शेव के पश्चात् के एक लोकपि्रय ब्रांड के पैकेज पर नाव एवं पतवार का चित्रा या एक डिटजे±ट पाउडर के लेबल पर उपभोक्ताओं के विचार जानने के लिए एक स्त्राी द्वारा पेन को पेश करनाद्ध लेबल उत्पाद के संबंध् में विस्तृत जानकारी देते हैं जैसे उत्पाद के घटक, उपयोग प(ति आदि। लेबल के विभ्िान्न कायर् नीचे दिए गए हैं - 1. उत्पाद का विवरण एवं विषय वस्तु - आइए दिन प्रतिदिन के उपयोग में आने वाले वुफछ उत्पादों के लेबलों पर नशर डालें। एक स्थानीय चाय वंफपनी के उत्पाद के लेबल पर लिखा है ‘मोहिनी चाय वंफपनी, प्ैव् 9001ः200ब् द्वारा प्रमाण्िात वंफपनीऋ एक लोकपि्रय ब्रांड झुलसा देने वाली गमीर् का पाउडर का वणर्न है कि पाउडर किस प्रकार झुलसा देने वाली गमीर् से बचाव करता है एवं बैक्टीरिया तथा संक्रामक रोग नियंत्रिात करता है। इसमें इस पाउडर को घाव या कटे हुए पर नहीं लगाने के लिए सावधान भी किया जाता है। तैयार खाद्य वस्तुओं के पैकेट जैसे तैयार डोसा, इडली, नूडल के पैकेटों पर इन उत्पादों को तैयार की विध्ि का भी वणर्न किया होता है। टूथपेस्ट के पैकेज पर दाँतों एवं मसूढ़ों विपणन की दस समस्याओं की सूची दी हुइर् होती है, उत्पाद के पूणर् जीवाणु अवरोध्क पफामूर्ला से इनसे लड़ने का दावा किया जाता है। नारियल तेल के एक ब्रांड के पैकेज पर घोषणा होती है कि यह शु( नारियल का तेल है जिसमें मेंहदी आँवला एवं नींबू मिला है तथा बताता है कि यह किस प्रकार से बालों के लिए उपयोगी है। इस प्रकार से लेबल का एक महत्त्वपूणर् कायर् उत्पाद इसकी उपयोगिता, उपयोग करने में सावधनियाँ तथा इसके घटकों का वणर्न होता है। 2. उत्पाद अथवा ब्रांड की पहचान कराना - लेबल का दूसरा महत्त्वपूणर् कायर् उत्पाद अथवा ब्रांड की पहचान कराना है। उदाहरण के लिए किसी उत्पाद का ब्रांड नाम उसके पैकेज पर छपा है जैसे बिस्वुफट, पोटेटो चिप्स। इससे अनेक पैकेजों में से अपने पसंद के ब्रांड की पहचान की जा सकती है। अन्य सामान्य समान सूचनाएँ जो लेबलों पर दी जाती हैं वे हैं निमार्ता का नाम, पता, पैक करते समय वशन, उत्पादन तिथ्िा अध्िकतम पुफटकर मूल्य एवं बैच संख्या। 3. उत्पादों का श्रेणीकरण - एक और महत्त्वपूणर् कायर् जो लेबल करते हैं वह है उत्पाद को विभ्िान्न श्रेण्िायों में वगीर्कृत करना। कभी - कभी विपणनकतार् उत्पाद को विश्िाष्टताओं अथवा गुणवत्ता के आधार पर विभ्िान्न वगो± में बांट देते हैं। उदाहरण के लिए स्वयं करें 1.घर में क्रय किए ब्रांड उत्पादों में से किन्ही तीन के पैकेज पर लगे लेबलों की जाँच करें तथा इन पर लिखी सूचनाओं की सूची बनाएँ। 2.अपनी पसंद के किन्हीं तीन उपभोक्ता उत्पादों के पैकेज पर दिए बिक्री संवध्र्न संदेशों को देखें और अपनी प्रतििया व्यक्त करें कि यह इन उत्पादों की बिक्री में किस प्रकार से सहायक हो सकती हैं। बालों के कंडीशनर का एक लोकपि्रय ब्रांड अलग - अलग प्रकार के बालों के लिए अलग - अलग प्रकार का है जैसे ‘सामान्य बाल’ एवं अन्य वगर्। चाय की विभ्िान्न किस्मों के वुफछ ब्रांड पीले, लाल एवं हरे लेबल वगो± में बाँटकर बेचे जाते हैं। 4. उत्पाद के प्रवतर्न में सहायता लेबल का एक और महत्त्वपूणर् कायर् है - सही रूप से अनुरूपित लेबल ध्यान आकष्िर्ात करता है एवं इसके कारण भी लोग वस्तु का क्रय करते हैं। हम कइर् उत्पादों के लेबल पर बिक्री संवध्र्न संदेश देखते हैं जैसे कि एक प्रसि( आँवला बालों के तेल के पैक पर लिखा होता है, फ्बालों में दम लाइपफ में पफनय्। डिटजे±ट पाउडर के एक ब्रांड के पैकेज पर लिखा होता है, फ्अपने कपड़ों को चमकदार और मशीन को ठीक रखें।य् वंफपनियाँ जब विक्रय संवधर्न योजना प्रारंभ करती हैं तो लेबल उसमें महत्त्वपूणर् भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए एक शेविंग क्रीम के पैकेज के लेबल पर लिखा होता है, ‘40 प्रतिशत अतिरिक्त मुफ्रत’ या पिफर एक ‘टूथपेस्ट के पैकेट पर लिखा होता है, इसके भीतर टूथब्रश बिल्वुफल मुफ्रत’ अथवा ‘15 रु. बचाएँ’। 5. कानून सम्मत जानकारी देना - लेबलिंग का एक और महत्त्वपूणर् कायर् कानूनी रूप से अनिवायर् सूचना देना है। जैसे सिगरेट अथवा पान मसाले के पैकेटों पर संवैधनिक चेतावनी, फ्सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।य् इस प्रकार की से सूचना की आवश्यकता प्रियाणीत खाद्य, नशीले पदाथर् एवं तंबावूफ उत्पादों में देनी होती है। खतरनाक अथवा जहरीले पदाथो± में लेबल पर उचित सुरक्षा संबंध्ी चेतावनी की आवश्यकता होती है। इस प्रकार से लेबल संभावित व्रेफताओं से संप्रेषण एवं उत्पादों की बिव्रफी संवध्र्न के संबंध् में कइर् महत्त्वपूणर् कायर् करते हैं। मूल्य निधर्रण जब भी किसी उत्पाद को खरीदा जाता है तो इसके लिए वुफछ राश्िा का भुगतान किया जाता है। यह राश्िा वह वुफल मूल्य है जो उपभोक्ता उत्पाद को प्राप्त करने अथवा उसका उपभोग करने के बदले में चुकाता है। इसे उत्पाद का मूल्य कहते हैं। इसी प्रकार से सेवाओं के बदले में जो राश्िा चुकता की जाती है वहाँ से उन सेवाओं का मूल्य होता है। जैसे परिवहन सेवा के बदले भाड़ा, बीमा पाॅलिसी का प्रीमियम, डाॅक्टर की बीमारी से संबंध्ित सलाह के बदले पफीस। मूल्य की परिभाषा इस प्रकार से दी जाती है, यह व्रेफता द्वारा भुगतान की गइर् अथवा विव्रेफता द्वारा प्राप्त की गइर् वह राश्िा है जो वह उत्पाद अथवा सेवा के क्रय के बदले में देता है। किसी भी पफमर् द्वारा वस्तु एवं सेवाओं के विपणन में निधर्रण का महत्त्वपूणर् स्थान है। किसी भी उत्पाद का बिक्री के लिए बिना मूल्य के अथवा मूल्य के संबंध् में बिना किसी दिशानिदेर्श के बाशार अवतरण नहीं हो सकता। मूल्य निधर्रण कइर् बार उत्पाद की माँग के नियामक का कायर् करता है। सामान्यतः देखा गया है कि किसी उत्पाद की कीमत में वृि से उसकी माँग घट जाती है और कीमत के घटने से माँग में वृि हो जाती है। मूल्य निधर्रण प्रतियोगिता के लिए एक प्रभावी हथ्िायार माना जाता है। पूणर् प्रतियोगिता की स्िथति में अध्िकांश पफमर् इसी तत्व के आधर पर एक दूसरे से प्रतियोगिता कर लेती हैं पफमर् की आयगत प्राप्ित एवं लाभ को प्रभावित करने वाला यह एक मात्रा महत्त्वपूणर् तत्व होता है। अध्िकांश विपणनकतार् अपनी वस्तु एवं सेवाओं के मूल्य निश्िचत करने को बहुत अध्िक महत्त्व देते हैं। मूल्य/कीमत निधर्रण के निधर्रक तत्व ऐसे कइर् तत्व हैं जो किसी उत्पाद के मूल्य के निधर्रण को प्रभावित करते हैं। इनमें से वुफछ महत्त्वपूणर् तत्वों का नीचे वणर्न किया गया है - 1. वस्तु की लागत - किसी वस्तु अथवा सेवा के मूल्य को प्रभावित करने वाले तत्वों में से एक महत्त्वपूणर् तत्व इसकी लागत है। इस लागत में वस्तु के उत्पादन, वितरण एवं विक्रय की लागत सम्िमलित होती है। लागत वह न्यूनतम अथवा आधर मूल्य होता है जिस पर वस्तु को बेचा जा सकता है। साधारणतया सभी विपणन इकाइयाँ अपनी पूरी लागत को अवश्य वसूलना चाहती हैं कम - से - कम दीघर् अवध्ि में तो अनिवायर् रूप से। इसके अतिरिक्त वह लागत से ऊपर लाभ भी कमाना चाहते हैं। वुफछ परिस्िथतियों में जैसे नए उत्पाद को बाशार में लाने अथवा नए बाशार में वस्तु को बेचा जा सकता है। लेकिन दीघर् अवध्ि में कोइर् भी पफमर् अस्ितत्व में नहीं रह सकती जब तक कि वह अपनी पूरी लागत को न वसूलती हो। लागत तीन प्रकार की हो सकती है - स्थाइर् लागत, परिवतर्नशील लागत एवं अध्र् परिवतर्नशील लागत। स्िथर लागत वह लागत है जो पफमर् की ियाओं के स्तर, जैसे उत्पादन विक्रय की मात्रा के परिवतर्न के साथ नहीं बदलती। उदाहरण के लिए सप्ताह में चाहे 1,000 इकाइयों का उत्पादन विपणन हो अथवा 10 इकाइयों का भवन का किराया या विक्रय प्रबंध्क का वेतन समान ही रहेगा। जो लागत व्यवसाय की मात्रा के अनुपात में बढ़ती घटती है, उसे परिवतर्नशील लागत कहते हैं। उदाहरण के लिए कच्चे माल, श्रम एवं बिजली पर लागत का माल के उत्पादन की मात्रा से प्रत्यक्ष संबंध् है। जैसे यदि एक वुफसीर् के लिए 100 रुकी लकड़ी की आवश्यकता होती है तो 10 वुफसिर्यों के लिए 1,000 रुपए की आवश्यकता होगी। स्वभाविक है कि यदि कोइर् वुफसीर् नहीं बनाइर् जा रही है तो लकड़ी पर शून्य खचर् किया जाएगा। अध्र्परिवतर्नीय लागत वे लागत हैं जो उत्पादन की मात्रा के साथ बढ़ती घटती तो है लेकिन समान अनुपात में नहीं। उदाहरण के लिए माना एक विक्रयकतार् के 10,000 रुपए स्थाइर् रूप से वेतन के दिए जाते हैं जबकि वुफल बिक्री पर अलग से 5 प्रतिशत कमीशन भी दिया जाता है। बिक्री की मात्रा के साथ वुफल प्रतिपफल तो बढ़ेगा लेकिन बिक्री की मात्रा के अनुपात में नहीं। एक निधर्रित व्यवसाय स्तर जैसे बिक्री की मात्रा अथवा उत्पादन की मात्रा पर स्थाइर्, अधर् - स्थाइर् एवं परिवतर्नशील लागतों को मिलाकर वुफल लागत बनती है। 2. उपयोगिता एवं माँग - व्रेफता जो मूल्य देना चाहता है उसका निचला स्तर उत्पाद की लागत पर निभर्र करता है जबकि उत्पाद की उपयोगिता एवं माँग की तीव्रता उसके ऊपर के स्तर का निधर्रण करेगी। वास्तव में मूल्य में लेन - देन के दोनों पक्ष व्रेफता एवं विव्रेफता के हित परिलक्ष्िात होने चाहिए। व्रेफता अिाक - से - अध्िक उतना भुगतान करने को तैयार होगा जितनी कि कम से कम मूल्य के बदले में प्राप्त उत्पाद की उसके लिए उपयोगिता है। उध्र विव्रेफता कम से कम लागत की वसूली करना चाहेगा। माँग के नियम के अनुसार उपभोक्ता ऊँची कीमत की तुलना में कम मूल्य पर अध्िक मात्रा में क्रय करते हैं। किसी वस्तु का मूल्य उसकी माँग की लोच पर निभर्र करता है। माँग लोचपूणर् मानी जाएगी यदि मूल्य में थोड़ा परिवतर्न होने पर भी माँग में भारी परिवतर्न आता है। संख्यात्मक रूप में मूल्य लोच इकाइर् से अध्िक है। यदि माँग बेलोच है तो मूल्य में वृि पर वुफल प्राप्ित कम हो जाएगी। यदि माँग बेलोच है तो पफमर् ऊँची मूल्य निधर्रण करने की श्रेष्ठतर स्िथति में होती है। 3. बाशार में प्रतियोगिता की सीमा - न्यूनतम एवं अध्िकतम मूल्य सीमा के बीच में मूल्य कहाँ निश्िचत किया जाएगा? यह प्रतियोगिता की प्रकृति एवं उसकी तीव्रता पर निभर्र करेगा। यदि प्रतियोगिता कम है तो मूल्य ऊँचा होगा और यदि स्वतंत्रा प्रतियोगिता है तो मूल्य कम होगा। किसी उत्पाद का मूल्य तय करने से पहले प्रतियोगियों के मूल्य एवं उनकी संभावित प्रतििया को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। मूल्य निधर्रण से पहले प्रतियोगी उत्पादों का मूल्य ही नहीं बल्िक उनकी गुणवत्ता एवं अन्य लक्षणों को भी ध्यान में रखना चाहिए। 4. सरकार एवं कानूनी नियम - मूल्य निधर्रण में अनुचित व्यवहार के विरु( जन साधरण के हितों की रक्षा के लिए, सरकार हस्तक्षेप कर वस्तुओं के मूल्यों का नियमन कर सकती है। किसी भी उत्पाद को सरकार आवश्यक वस्तु घोष्िात कर उसके मूल्य का नियमन कर सकती है। उदाहरण के लिए किसी वंफपनी द्वारा निमिर्त दवा, जिस पर उसका एकाध्िकार है, प्रति दस इकाइयों के पत्ते की लागत 20 रुपया है और व्रेफता उसका वुफछ भी मूल्य चुकाने को तैयार है जैसे 200 रुपया। प्रतियोगी के न होने पर विव्रेफता चाहेगा कि 200 रुपए का अध्िकतम मूल्य वसूला जाए ऐसी स्िथति में साधरणतया सरकार इतना अध्िक मूल्य वसूली की अनुमति नहीं देगी तथा वह दवा के मूल्य के नियमन के लिए हस्तक्षेप करेगी। सरकार इसके लिए दवा को अनिवायर् वस्तु घोष्िात कर मूल्य का नियमन करेगी। 5. मूल्य निधर्रण का उद्देश्य - किसी भी वस्तु अथवा सेवा का मूल्य निश्िचत करने को प्रभावित तत्व मूल्य निधर्रण के उद्देश्य हैं। साधरणतया माना जाता है कि इसके उद्देश्य अध्िकतम लाभ कमाना है। लेकिन अल्प अवध्ि में लाभ कमाना और दीघर् अवध्ि में लाभ कमाने में अंतर है। यदि पफमर् पैफसला लेती है कि अल्प अवध्ि में अध्िक लाभ कमाया जाए तो यह अपने उत्पादों का अध्िकतम मूल्य लेगी। लेकिन यह चाहती है कि दीघर् अवध्ि में अध्िकतम वुफल लाभ प्राप्त किया जाए तो यह प्रति इकाइर् कम मूल्य रखेगी जिससे कि यह बाशार को बड़े भाग पर कब्जा कर सके तथा बढ़ी हुइर् बिव्रफी द्वारा अध्िक लाभ कमा सके। अध्िकतम लाभ कमाने के अतिरिक्त पफमर् के द्वारा कीमत निधर्रण के अन्य उद्देश्य निम्न हो सकते हैं - ;कद्ध बाशार में भागीदारी में अग्रणी - यदि किसी पफमर् का उद्देश्य बाशार में बड़ी हिस्सेदारी़प्राप्त करना है तो यह अपने उत्पादों के एन.पी.पी.ए. ने दवा के मूल्य की वृि की अध्िकतम सीमा 20 प्रतिशत वाष्िार्क निश्िचत की दवा के मूल्य पर निगरानी रखने वाला राष्ट्रीय औषध् मूल्य निधर्रण प्राध्िकरण ;छच्च्।द्ध ने दवा कानून की ‘जनहित’ धरा का प्रयोग करने का निणर्य लिया जिससे कि वंफपनियों पर उन दवाओं के मूल्यों को कम करने का दबाव डाला जा सके। जिनमें 20 प्रतिशत से वाष्िार्क से भी अध्िक वृि हो रही है। इर्.टी. को बताया गया कि मूल्य निणार्यक प्राध्िकरण ने यह भी निणर्य लिया है वह वंफपनियों को केवल एक ही बार स्मरण पत्रा भेजेगी जिसमें उनसे कारण बताओं नोटिस का जवाब माँगा जाएगा कि दवा विशेष की मूल्य नियंत्राण के लिए संस्तुति क्यों न कर दी जाए। एन.पी.पी.ए.;छच्च्।द्ध ने प्रत्येक माह 48,600 दवाओं के पैकेज के पुफटकर विव्रेफताओं से लिए जा रहे मूल्यों में परिवतर्न की जाँच प्रारंभ कर दी है। प्रतिमाह दो या तीन पफामूर्ला की दवाओं के पकड़ में आने की संभावना है। अब तक छच्च्। ने रसायन मंत्रालय को 45 ऐसे मामले में उचित कायर्वाही के लिए संस्तुति की है जिनमें कथ्िात रूप से असाधरण मूल्य वृि की गइर् है। मंत्रालय ने 11 वंफपनियों को नोटिस जारी कर कहा है कि या तो मूल्य घटाएँ अथवा मूल्य नियंत्राण का सामना करें। ड्डोत - इकोनाॅमिक टाइम्स 3 नवंबर, 2006 मूल्य को नीचे स्तर पर रखेगी जिससे कि ग्राहकों की संख्या अध्िक हो। ;खद्ध प्रतियोगी बाशार में टिके रहना - यदि पफमर् घनी प्रतियोगिता के कारण अथवा प्रतियोगी द्वारा एक अच्छे पूरक के ले आने के कारण बाशार में टिके रहने में कठिनाइर् अनुभव कर रही है तो यह अपने उत्पादों पर छूट दे सकती है अथवा प्रवर्तन योजना चला सकती है जिससे कि अपने संगृहित माल को निकाल सके। एवं ;गद्ध उत्पाद गुणवत्ता में अगि्रम स्थान पाना - इस स्िथति में साधरणतया उच्च गुणवत्ता एवं अनुसंधान एवं विकास पर किए गए उच्च व्यय को पूरा करने के लिए ऊँचे मूल्य पर माल बेचा जाता है। इस प्रकार से हमने देखा कि पफमर् की वस्तु एवं सेवा मूल्य उसके मूल्य निधर्रण उद्देश्यों से प्रभावित होता है। 6. विपणन की प(तियाँ - मूल्य निधर्रण प्रिया पर विपणन के अन्य घटक, जैसे वितरण प्रणाली, विव्रफयकतार्ओं की गुणवत्ता, विज्ञापन की गुणवत्ता एवं कितना विज्ञापन किया गया है, विव्रफय संवध्र्न के कायर्, पैकेजिंग किस प्रकार की है, उत्पाद की अन्य उत्पादों से भ्िान्नता, उधर की सुविध एवं ग्राहक सेवा, का भी प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए यदि वंफपनी निःशुल्क घर पहुँचाने की सुविध प्रदान करती है तो इसे मूल्य निधर्रण में वुफछ छूट मिल जाती है इसी प्रकार से उपयुर्क्त तत्वों में किसी भी एक में विश्िाष्टता प्राप्त करने पर वंफपनी को प्रतियोगिता को ध्यान में रखकर अपने उत्पादों की कीमत निश्िचत करने में स्वतंत्राता मिल जाती है। भौतिक वितरण विपणन मिश्र का चैथा महत्त्वपूणर् घटक वस्तु एवं सेवा का वितरण है। इसका संबंध् वस्तु एवं सेवाओं को उचित स्थान पर उपलब्ध् कराना है जिससे कि लोग इसको खरीद सवेंफ। इस संबंध् में दो महत्त्वपूणर् निणर्य लिए जाते हैं। पहला वस्तुओं को उत्पादक से उपभोक्ता अथवा उपयोगकतार् तक पहुँचाने के संबंध् में एवं दूसरा वितरण प्रिया में माध्य अथवा मध्यस्थों के संबंध् में। इनका वणर्न इस प्रकार से किया गया है - वितरण माध्य अध्िकांश उपभोक्ता उत्पादों के ग्राहक बड़े भौगोलिक क्षेत्रा में पैफले हुए हैं। इन लोगों को सीधे संपवर्फ करना बहुत खचीर्ला होता है एवं कठिन भी, इसीलिए इन लोगों की वुफशलता से एवं प्रभावी ढंग से संपवर्फ करने के लिए मध्यस्थों की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए गुजरात का एक डिटजेर्ंट पाउडर निमार्ता दिल्ली, तिरुवनंतपुरम, भुवनेश्वर, हैदराबाद, श्रीनगर तथा अन्य दूर दराज के स्थानों में बैठे ग्राहकों तक सीध्े पहुँचना बहुत कठिन होगा। इसीलिए वह बड़ी मात्रा में किसी बड़े व्यापार को माल की आपूतिर् करेगा जैसे हैदराबादके व्यापारीको। यह बड़ा व्यापारी पिफर डिटजे±ट पाउडर को हैदराबाद के विभ्िान्न कस्बों में बैठे छोटे पुफटकर विव्रेफताओं को आपूतिर् करेगा। यह व्यापारी माल को ग्राहकों को बेचेंगे। इस प्रकार से वस्तुओं को वितरण के स्थान से उपभोक्ता के स्थान पर वितरित किया जाएगा। वितरण कायर् में भाग लेने वाले ये लोग, संस्थान व्यापारी एवं अन्य कायर् करने वाले वितरण माध्य कहलाते हैं। वितरण माध्य पफमर् एवं व्यक्ितयों का वह वगर् है जो उस वस्तु एवं सेवाओं के स्वामित्व को ग्रहण करते हैं अथवा उसके हस्तांतरण में सहायता करते हैं जो उत्पादक से उपभोक्ताओं तक ले जाइर् जाती हैं। दूसरे शब्दों में माध्य से अभ्िाप्राय उन व्यापारियों, एजेंट एवं व्यावसायिक संस्थानों के दल से है जो उत्पादों को भौतिक रूप से एवं उनके स्वामित्व को मिलाकर निदिर्ष्ट स्थानों तक पहुँचाते हैं। अध्िकांश वस्तु एवं सेवाओं का विपणन माध्यों के तंत्रा के माध्यम से वितरण किया जाता है। उदाहरण के लिए हम अपनी जरूरत की वस्तुओं, जैसे नमक, बल्ब, चाय, चीनी, साबुन, कागज, किताबें, आटा आदि को पुफटकर विव्रेफता से खरीदते हैं। वितरण माध्य से श्रम की बचत होती है। इसको उदाहरण की सहायता से भली - भाँति समझा जा सकता है। माना कि आपने चार वस्तुएँ खरीदनी हैं अथार्त् चीनी, बल्ब, काॅपफी एवं स्याही। शायद आप एक जनरल मरचेंट की दुकान में जाएँगे तथा सभी चीजों को एक ही स्थान से खरीद लेंगे। कल्पना करें कि यदि कोइर् मध्यस्थ नहीं है अथवा जनरल मचे±ट नहीं है तो क्या होगा। ऐसे में इन वस्तुओं को सीधे निमार्ताओं से खरीदना होगा। आपको चार अलग - अलग उत्पादकों से संपवर्फ करना होगा अथार्त् चीनी, बल्ब, काॅपफी एवं स्याही के उत्पादक। इसके विपरीत जब सभी वस्तुओं को एक ही जनरल मचे±ट से खरीदा जाए तो एक ही से संपवर्फ करना होगा। अब हम यह मानकर चलते हैं कि चार ग्राहक हैं और सभी को इन वस्तुओं की आवश्यकता है। इसका अथर् हुआ वुफल सोलह संपवर्फ करने होंगे। यदि मध्यस्थ हैं तो, जैसा कि चित्रा में दिखाया गया है, केवल आठ संपको± विपणन की आवश्यकता होगी। इस प्रकार से हम देखते हैं कि मध्यस्थ श्रम की बचत करते हैं। श्रम की बचत के साथ मध्यस्थ बहुत बड़े क्षेत्रा में विस्तार में सहायक होते हैं तथा परिवहन, संग्रहण एवं विनिमय सहित वितरण की वुफशलता बनाते हैं। यह विभ्िान्न वस्तुओं को एक ही दुकान पर उपलब्ध् कराते हैं जिससे ग्राहकों को सुविध मिलती है। क्योंकि ये ग्राहकों के सीध्े संपवर्फ में रहते हैं इसलिए इनकी बाशार संबंध्ी सूचना अध्िक विश्वसनीय होती है। वितरण माध्यों के कायर् अध्िकार उपयोगिता, स्थान उपयोगिता एवं समय उपयोगिता का निमार्ण कर वितरण माध्य वस्तुओं के प्रवाह को सुगम बनाते हैं। यह निमार्ता एवं उपभोक्ता के बीच की विभ्िान्न समय, स्थान एवं अध्िकार बाधओं को दूर कर वस्तुओं के आवागमन को संभव बनाते हैं। मध्यस्थों के वुफछ महत्त्वपूणर् कायर् इस प्रकार हैं - वितरण माध्यों का उपयोग कर श्रम की बचत 1. छाँटना - मध्यस्थ कइर् ड्डोतों से माल एकत्रिात करते हैं जो सदा समान गुणवत्ता, प्रकृति अथवा आकार के नहीं होते। उदाहरण के लिए एक काजू का थोक विव्रेफता बड़ी मात्रा में काजू अलग - अलग काजू उत्पादन क्षेत्रों से एकत्रिात कर सकता है जिनमें दाने अलग - अलग गुणवत्ता एवं आकार वाले हो सकते हैं। वह इनको समान आकार अथवा गुणवत्ता के आधर पर विभ्िान्न ढेरीयों में छाँटेगा। 2. इकऋा करना - इस कायर् में एक जैसे माल को बड़ी मात्रा में संगृहित किया जाता है। जिससे आपूतिर् के प्रवाह में निरंतरता बनी रहती है। 3. बँटवारा करना - आवंटन में एक वगर् के स्टाॅक को छोटे विपणन योग्य भागों में विभक्त कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए एक बार यदि काजुओं को विभ्िान्न श्रेणीयों में बाँटकर बड़ी मात्रा में इकट्टòा कर लिया गया है तो अब इन्हें अलग - अलग वगर् के व्रेफताओं को बेचने के ;पद्ध प्रत्यक्ष माध्यम ;शून्य स्तरीयद्ध ग्राहक अप्रत्यक्ष माध्यम;पपद्ध एक स्तरीय माध्यम लिए 1 किलोग्राम, 500 ग्राम एवं 250 ग्राम के पैकेटों में बाँट दिया जाएगा। 4. वगीर्कृतकरण - मध्यस्थ पुनः बिव्रफी हेतु वस्तुओं को वगीर्कृत करते हैं निमार्ता जिस प्रकार की वस्तुएँ रखते हैं तथा वस्तुओं का जो मिश्रण उपभोक्ता चाहते हैं उनमें अंतर पाया जाता है। उदाहरण के लिए एक वि्रफकेट के ख्िालाड़ी को बल्ला, गेंद, विकेट, ग्लव्श, हैलमेट, टी - शटर् एवं एक जोड़ी जूतों की आवश्यकता होती है। शायद कोइर् भी एक निमार्ता इन सभी को मिलाकर उत्पादन नहीं करता। मध्यस्थ ही इन विभ्िान्न प्रकार की वस्तुओं को अलग - अलग जगह से जुटाकर लाता है तथा इन्हें ग्राहक को उसकी पसंद के अनुसार मिलाकर देता है। 5. उत्पाद प्रवतर्न - अध्िकांश विज्ञापन एवं अन्य बिक्री संवध्र्न ियाओं की व्यवस्था निमार्ता ही करते हैं। वस्तुओं की बिक्री बढ़ाने के लिए मध्यस्थ ग्राहक ;पपपद्ध द्विस्तरीय माध्यम ;पअद्ध तीन स्तरीय माध्यम माध्य के प्रकारभी प्रदशर्न, विश्िाष्ट प्रदशर्न, प्रतियोगिता आदि ियाओं में भाग लेते हैं। 6. सौदा करना - वितरण माध्य के प्रचालन में एक छोर पर निमार्ता हैं तो दूसरे पर ग्राहक। मध्यस्थ का एक महत्त्वपूणर् कायर् इन दोनों पक्षों में इस प्रकार से सौदा कर देना है कि दोनों ही संतुष्ट हो जाएँ। वह ग्राहक से मूल्य, गुणवत्ता, गारंटी एवं अन्य संबंध्ित बातों का सौदा करते हैं। 7. जोख्िाम उठाना - वस्तुओं के वितरण की प्रिया में व्यापारी मध्यस्थ वस्तुओं को अपने नाम से लेते हैं। इससे मूल्य एवं माँग में उतार चढ़ाव, टूट - पूफट, नष्ट हो जाना आदि के जोख्िाम को वही उठाता है। माध्यों के प्रकार निमार्ता प्रत्यक्ष वितरण एवं अप्रत्यक्ष वितरण तथा छोटी शंृखला जिसमें कम मध्यस्थ होते हैं एवं लंबी शंृखला जिसमें बड़ी संख्या में मध्यस्थ होते हैं में से किसी का भी चयन कर सकते हैं। हर प्रकार का शृंखला तंत्रा में मध्यस्थों की संख्या एवं प्रकार के आधार पर अंतर होता है। प्रमुख वितरण माध्य निम्न हैं - प्रत्यक्ष माध्य ;शून्य स्तरीयद्ध सबसे सरल एवं सबसे छोटा वितरण का माध्यम प्रत्यक्ष वितरण है जिसमें बिना किसी मध्यस्थ को सम्िमलित कर वस्तुओं को सीध्े निमार्ता से ग्राहक को उपलब्ध् कराया जाता है। इसे शून्य स्तरीय शृंखला भी कहते हैं। इसमें निमार्ता एवं ग्राहक के बीच सीधा संबंध् बन जाता है। उदाहरण के लिए जब कोइर् निमार्ता अपने स्वयं की पुुफटकर दुकानों के माध्यम से बेचता है तो इसे भी प्रत्यक्ष माध्य विपणन 361 कहते हैं। मैकडोनाल्ड, बाटा इसके उदाहरण हैं। इसी प्रकार से डाक द्वारा आदेश विव्रफय, इंटरनेट द्वारा विव्रफय तथा अपने स्वयं के विव्रफयकतार्ओं के माध्यम से विव्रफय ;जैसे यूरेकापफोब्सर्द्ध प्रत्यक्ष बिक्री अथवा शून्य स्तरीय माध्यम के उदाहरण हैं। अप्रत्यक्ष माध्यम जब एक निमार्ता उत्पादन बिंदु से उपभोक्ता बिंदु तक वस्तुओं को ले जाने के लिए एक या एक से अध्िक मध्यस्थों की नियुक्ित करता है तो विरतण तंत्रा को अप्रत्यक्ष माध्य कहते हैं। इसके निम्न स्वरूप हो सकते हैं - 1. पुफटकर विव्रेफता - उपभोक्ता ;एक स्तरीय माध्यमद्ध - इस व्यवस्था में निमार्ता एवं ग्राहक के बीच एक मध्यस्थ अथार्त् पुफटकर विव्रेफता होता है। अथार्त् वस्तुएँ निमार्ता से पुफटकर व्यापारी को जाती हैं जो आगे उन्हें अंतिम उपभोक्ता को बेच देते हैं। उदाहरण के लिए मारुति उद्योग अपनी कार और वैन को अपने अध्िकृत पुफटकर विव्रेफताओं के माध्यम से बेचते हैं। यह एक ऐसा वितरण तंत्रा होता है जिसके कारण निमार्ता माध्यमों पर नियंत्राण हुए विस्तृत बाशार क्षेत्रा में कायर् करता है। 2. निमार्ता - थोक विव्रेफता - पुफटकर विव्रेफता - उपभोक्ता ;द्विस्तरीय माध्यमद्ध - साबुन, तेल, कपड़े, चावल, चीनी, दाल जैसे अध्िकांश उपभोक्ता वस्तुओं के लिए अपनाया जाने वाला वितरण तंत्रा है। इसमें थोक विव्रेफता एवं पुुफटकर विव्रेफता निमार्ण एवं उपभोक्ता के बीच की कड़ी का काम करते हैं। वितरण के माध्यम तंत्रा में दो माध्यस्थों के होने के कारण अध्िक विस्तृत बाशार क्षेत्रा में कायर् हो पाता है। 3. निमार्ता - एजेंट - थोक विव्रेफता - पुफटकर विव्रेफता - उपभोक्ता ;तीन स्तरीय माध्यमद्ध - इस शृंखला में निमार्ता के पास अपने विव्रफय एजेंट अथवा दलाल होते हैं जो उन्हें थोक व्यापारी और इसके पश्चात् पुफटकर व्यापारी से जोड़ते हैं। अतः पिछली व्यवस्था में वण्िार्त स्तरों में एक और स्तर जोड़ दिया गया है। यह विशेषतः तब किया जाता है जब निमार्ता सीमित उत्पादों में व्यापार करता है तथा उसका बाशार क्षेत्रा भी विस्तृत होता है। प्रत्येक बड़े क्षेत्रा में एक एजेंट की नियुक्ित की जाती है जो थोक विव्रेफता से संपवर्फ साध्ता है। वितरण माध्य के चयन के निधर्रक तत्व एक उचित वितरण के माध्यम का चयन एक महत्त्वपूणर् विपणन संबंध्ी निणर्य होता है जो संगठन के निष्पादन पर प्रभाव डालता है। संगठन प्रत्यक्ष विपणन माध्यम अपनाएगा अथवा लंबी शृंखला जिसमें कइर् मध्यस्थ होंगे यह रणनीति संबंधी निणर्य होता है। माध्यमों का चयन कइर् तत्वों पर निभर्र करता है जिनका वणर्न नीचे दिया गया है - 1. उत्पाद संबंध्ी तत्व - माध्यम के निणर्य लेते समय उत्पाद से संबंध्ित महत्त्वपूणर् ध्यान देने योग्य बाते हैं कि उत्पाद औद्योगिक अथवा उपभोक्ता वस्तु है, शीघ्र नष्ट होने वाली है अथवा टिकाऊ है, उत्पाद का मूल्य क्या है तथा इसकी जटिलताएँ क्या हैं। औद्योगिक उत्पाद तकनीकी होते हैं। यह आदेश पर बनाए जाते है, महँगे होते हैं तथा इनके व्रेफता भी गिनती के होते हैं। इन उत्पादों के लिए छोटी शृंखला की आवश्यकता होती है अथार्त् प्रत्यक्ष माध्यम जिसमें मध्यस्थ बहुत थोड़े होेते हैं। दूसरी उपभोक्ता वस्तुएँ मानकीकृत कम खचीर्ली, हल्की, सरल एवं बार - बार खरीदी जाने वाली होती हैं। इनका अनेक मध्यस्थों वाले माध्यमों के भारत में विभ्िान्न हर माल 99 रुपये वाले स्टोर यह एक सस्ती एवं खुशी प्रदान करने वाली अवधरणा है जो पूरे विश्व में कारगर नहीं है। अब इसका आपके समीप के माल में पदापर्ण हो रहा है लेकिन पुफटकर विव्रेफता इसके लिए एक या दो सप्ताह का समय माँग रहे हैं। आइए इस अवधरणा का खुलासा करें जो कि भारतीय बाशार के लिए लगभग नइर् है। पुफटकर विव्रेफता क्षेत्रा के कम लागत वाले प्रति दिन प्रयोग में आने वाले पुुफटकर वगर् पर कब्जा करने का भरसक प्रयत्न कर रहे हैं। भावना यह है कि ग्राहक कइर् वस्तुओं को मिलाकर 99 रुपए अथवा इससे भी कम में खरीद सवेंफ। इस धरणा को लेकर पुफटकर विव्रेफताओं ने अपने - अपने व्यावसायिक नमूनों की स्थापना की। इनमें खान - पान, हेल्थकेयर एवं अन्य उत्पादों के स्टोर शामिल हैं। घरेलू दुकानें एक मूल्य की दुकान के मूल विचार में दिलचस्प सुधर कर एक कदम और आगे बढ़ गए हैं। हमारा मानना है कि एक दाम 99 रुपए पर सभी उत्पादों की मूल्य रखना बेलोच मागर् है। इसको और अिाक आकषर्क बनाने के लिए तथा बड़ी संख्या में ग्राहक बनाने के लिए हमने चार अलग - अलग मूल्य वगर् रखे हैं। ग्रह उत्पादक समूह ने इस विचार को और भी परिष्कृत किया है। उसे दो अंकों में मूल्य की परिध्ि में अपने उत्पादों के लिए मोल - भाव कर कीमत तय करना प्रारंभ किया है। इसलिए जो ग्राहक ग्रह उत्पादक की दुकानों पर जाएँगे उनको वस्तुएँ न केवल 10 रुपए से लेकर 99 रुपए के बीच मिलेंगी बल्िक उनके सामने मूल्य देने के अध्िक विकल्प मिलेंगे। ड्डोत - इकोनाॅमिक टाइम्स 16 दिसंबर, 2005 लंबे तंत्रा के द्वारा वितरण किया जाता है। शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुएँ जैसे पफल, सब्िजयाँ एवं दूध् से बनी वस्तुओं को छोटी वितरण शृंखला के माध्यम से बेचा जाता है जबकि टिकाऊ वस्तुएँ जैसे कि प्रसाध् न वस्तुएँ ;साबुन, टूथपेस्ट, बालों में लगाने वाला तेलद्ध, किराने का सामान ;वनस्पति तेल, चाय आदिद्ध, सिले सिलाए कपड़ों के लिए लंबीशृंखला की आवश्यकता होती है जिससे कि दूर - दूर तक पैफले ग्राहकों तक पहुँचा जा सके। यदि वस्तु कम कीमत वाली है जैसे अध्िकांश सुविध उत्पाद, तो लंबी शृंखला उचित रहेगी लेकिन यदि उत्पाद मँहगा है तो छोटा माध्य को प्रयोग किया जाएगा। जटिलताओं वाले उत्पाद के लिए जिनमें तकनीकियाँ अध्िक हैं जैसे अध्िकांश औद्योगिक अथवा इंजीनियरिंग उत्पाद, लघु शृंखला को प्राथमिकता दी जाती है लेकिन यदि उत्पाद सरल है तो इसको कइर् मध्यस्थों वाली लंबी शृंखला के माध्यम से बेचा जाएगा। 2. वंफपनी की विशेषताएँ - वंफपनी की जो महत्त्वपूणर् विशेषताएँ वितरण माध्यम के चयन को प्रभावित करती हैं वह है वंफपनी की वित्तीय शक्ित तथा शृंखला के अन्य सदस्यों पर किस सीमा तक नियंत्राण रखना चाहती है। प्रत्यक्ष विव्रफय में कापफी बड़ी मात्रा में पूँजी स्थाइर् संपिायों में लगानी होती है जैसे अपनी स्वयं की पुफटकर दुकानें अथवा बड़ी संख्या में विव्रफयकतार्ओं की नियुक्ित। मध्यस्थों के माध्यम से अप्रत्यक्ष बिक्री में इन सबके लिए भारी राश्िा की आवश्यकता नहीं होती है। अतः यदि किसी पफमर् के पास पयार्प्त पूँजी है तो वह प्रत्यक्ष वितरण कर सकती है। यदि अतिरिक्त ध्न की कमी है तो यह अप्रत्यक्ष माध्यम प्रयोग कर सकती है। विपणन 363 इसी प्रकार से यदि प्रबंध् माध्यमों पर अध्िक नियंत्राण चाहता है तो छोटा मागर् अपनाया जाएगा और यदि मध्यस्थों पर नियंत्राण नहीं चाहता है तो बड़ी संख्या में मध्यस्थों वाली शृंखला का प्रयोग किया जा सकता है। 3. प्रतियोगी तत्व - माध्यम के चुनाव पर प्रतियोगियों के माध्यों का प्रभाव भी पड़ता है। यदि प्रतियोगी ने कोइर् माध्यम चुना है जैसे ;बालों के तेल जैसे सौंदयर् प्रसाध्न उत्पादों की बिक्री के लिएद्ध दवा विक्रय की दुकान तो दूसरी पफमर् भी उसी प्रकार के माध्यम को चुनेंगी। वुफछ मामलों में उत्पादक प्रतियोगियों द्वारा अपनाए जाने वाले माध्यमों से बचना होगा। उदाहरण के लिए यदि सौंदयर् प्रसाध्न के दूसरे उत्पादनकतार् अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बड़े पुफटकर स्टोर चुनते हैं तो अन्य कोइर् उत्पादकतार् घर - घर जाकर बिक्री का मागर् अपना सकता है। यह पफमर् की नीति पर निभर्र करेगा कि वह प्रतियोगियों का अनुसरण करना चाहती है अथवा उनसे भ्िान्न मागर् अपनाना चाहती है। बदलते हुए वैश्िवक विपणन पयार्वरण के कारण नए माध्यम अपनाए जा रहे हैं। 4. बाशार तत्व - जो बाशार तत्व वितरण माध्य के चयन करने को प्रभावित करते हैं उनमें से वुफछ महत्त्वपूणर् तत्व हैं - बाशार का आकार, संभावित ग्राहकों का भौगोलिक रूप से वेंफित होना एवं खरीद की मात्रा। यदि व्रेफता कम संख्या में हैं जैसा औद्योगिक उत्पादों के लिए होता है तो छोटी शृंखला प्रयोग की जाती है। लेकिन यदि व्रेफताओं की संख्या अध्िक है जैसा उपभोक्ता वस्तुओं में होता है, शीतलपेय, टूथपेस्ट आदि में भी लंबी वितरण शृंखला जिसमें कइर् मध्यस्थ होते हैं, को अपनाया जाता है। यदि व्रेफता छोटी जगह में वेंफित हैं तो छोटी शृंखला अपेक्ष्िात है और यदि व्रेफता बड़े क्षेत्रा में पैफले हैं तो लंबी वितरण शृंखला का उपयोग किया जा सकता है। इसी प्रकार से यदि क्रय आदेश छोटा है तो उपभोक्ता वस्तुओं का होता है बड़ी संख्या में मध्यस्थ कायर् करेंगे। लेकिन यदि क्रय आदेश बड़ा है तो प्रत्यक्ष माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। 5. पयार्वरण संबंध्ी तत्व - वितरण के माध्यमों के चयन में अन्य तत्व ध्यान में रखे जाते हैं वह हैं पयार्वरण संबंध्ी तत्व जैसे आथ्िार्क स्िथति एवं कानूनी दवाब। जब अथर्व्यवस्था मंदी से गुजर रही हो तो छोटी शृंखला उचित रहती है क्योंकि इससे माल का वितरण कम लागत पर किया जा सकता है। भौतिक वितरण वस्तुओं के उत्पाद पैकेज किए जाने, ब्रांड किए जाने, मूल्य निधर्रण एवं प्रवतर्न के पश्चात् इनको सही स्थान पर, सही मात्रा में एवं सही समय पर ग्राहक को उपलब्ध् कराना आवश्यक होता है। उदाहरण के लिए माना डिटजे±ट टिकिया का एक ग्राहक उसकी गुणवत्ता से संतुष्ट है तथा वह इसे खरीदना चाहता है। वह एक पुफटकर विव्रेफता के पास जाता है तथा इस उत्पाद को माँगता है। यदि यह उत्पाद उपलब्ध् नहीं है तो वह इसके ही कोइर् दूसरा ब्रांड खरीदेगा। इससे माल की बिक्री कम होगी क्योंकि वस्तुएँ उस स्थान पर उपलब्ध् नहीं थीं जिस स्थान पर ग्राहक उसे खरीदना चाहता था। इसलिए यह विपणन कतार्ओं का दायित्व है कि वस्तुओं को उस स्थान पर उपलब्ध् कराया जाए जहाँ ग्राहक उन्हें खरीदना चाहता है। वस्तुओं को उनके उत्पादन के स्थल से वितरण स्थल तक पहुँचाना भौतिक वितरण कहलाता है जो कि विपणन मिश्र का एक महत्त्वपूणर् तत्व है। भौतिक वितरण में वे सभी ियाएँ आती हैं जो वस्तुओं को निमार्ता से ले जाकर ग्राहक तक पहुँचाने के लिए आवश्यक हैं। भौतिक वितरण में सम्िमलित महत्त्वपूणर् ियाएँ हैं परिवहन, भंडारण, माल का रख - रखाव एवं स्वंफध् नियंत्राण। ये ियाएँ भौतिक वितरण के प्रमुख घटक हैं। भौतिक वितरण के घटक वस्तुओं के भौतिक रूप से वितरण के प्रमुख घटकों को नीचे समझाया गया है - 1. आदेश का प्रियण - व्रेफता विव्रेफता संबंधें में आदेश देना पहला चरण है। उत्पाद का प्रवाह वितरण के विभ्िान्न माध्यमों से ग्राहक की ओर होता है जबकि आदेश इसके विपरीत दिशा में चलता है अथार्त् ग्राहक से निमार्ता की ओर। एक अच्छी वितरण प्रणाली वह है जिसमें आदेश की पूतिर् सटीक एवं शीघ्र होती है। ऐसा न होने पर वस्तुएँ ग्राहक के पास देर से पहुँचेंगी या पिफर गलत मात्रा में वणर्न के अनुसार नहीं होंगी। इससे ग्राहक असंतुष्ट होगा जिससे व्यवसाय को हानि होगी तथा ख्याति की क्षति होगी। 2. परिवहन - परिवहन वस्तु एवं कच्चेमाल को उत्पादन बिंदु से बिक्री तक ले जाने का माध्यम है। यह वस्तुओं के भौतिक वितरण के प्रमुख तत्त्वों में से एक है। यह इसलिए महत्त्वपूणर् है कि वस्तुओं के भौतिक रूप से उपलब्ध् कराए बिना बिक्री कायर् संपूणर् नहीं हो सकता। 3. भंडारण - भंडारण वस्तुओं को संग्रहण एवं वगो± में विभक्त करने का कायर् है जिससे समय भारत में मौख्िाक अभ्िाव्यक्ित का कोइर् सानी नहीं। भारतीय व्रेफता के चुनाव को उसके परिचितों द्वारा विश्वास दिलाने से अध्िक और वुफछ भी प्रभावित नहीं करता। आजकल दमदार मीडिया प्रचार भी यह कायर् करता है। ऐसी नैलसन के विश्वव्यापी आॅनलाइन सवेर्क्षण के अनुसार उपभोक्ताओं पर उनके द्वारा खरीद पर परंपरागत विज्ञापन की तुलना में मौख्िाक संप्रेषण एवं संदभर् का सबसे अध्िक प्रभाव पड़ता है। अध्ययन के अनुसार कार, मोबाइल पफोन एवं घरेलू )ण जैसे मँहगे सौदों में भारत में लगभग 50 प्रतिशत उपभोक्ता निणर्य लेने में अपने मित्रा एवं सगे संबंध्ियों की सलाह पर अिाक निभर्र करते हैं। विकसित देशों में कहानी इससे वुफछ भ्िान्न है। मोटर वाहनों को ही लें। अमरीका, कनाडा एवं जापान के बाशारों में अध्िक - से - अध्िक लोग मोटर वाहन वंफपनियों के परंपरागत विज्ञापनों द्वारा अिाक प्रभावित होते हैं। भारत, मलेश्िाया एवं थाइर्लैंड जैसे विकासशील देशों के बाशारों में पैफसले की दिशा को पड़ोसी अथवा साथी द्वारा दी गइर् सलाह बदल देती है। विलासिता की वस्तुओं के संबंध् में भारतीयों की सोच सदा अलग रही है। कार खरीदना परिवार का निणर्य होता है इसलिए स्वभाविक है कि परिवार के सभी सदस्य, अपने - अपने उन परिचितों से बात करते हैं जो उस वस्तु को प्रयोग में ला रहे हैं।य् यह कहना है जनरल मोटर इंडिया के निदेशक पी. बालेन्द्र का। आश्चयर् नहीं कि भारत में बड़ी संख्या में मोटर वाहन निमार्ता उतना ही उपभोक्ता की संतुष्िट पर व्यय करते हैं जितना कि विज्ञापन पर। इसीलिए जे.डी. पावर कस्टमर सैटिसपैफक्शन के पुरस्कार जैसे अन्य सम्मान को बड़ी गंभीरता से लेते हैं। जबकि पूरा विश्व इंटरनेट एवं मोबाइल द्वारा विपणन के पीछे पागल हो रहा है, यह आश्चयर् की बात है कि भारतीयों की पसंद को आज भी परंपरागत विज्ञापन एवं मौख्िाक प्रचार ही अध्िक प्रभावित करते हैं। पश्िचम के विपरीत भारतीय एक घनिष्ट रूप से एक दूसरे से जुड़े समाज में रहते हैं जहाँ लोगों पर उनके बुजुगो±, सगे संबंध्ियों एवं स्थानीय सम्मानित व्यक्ितयों का अध्िक प्रभाव होता है। एसी नैलसन ;पश्िचमी एश्िायाद्ध के कायर्कारी निदेशक सांरग पंचाल का कहना है कि, फ्लोग किसी भी ब्रांड को स्वीकार करने को तुरंत तैयार हो जाते हैं यदि इसका अनुमोदन उनका पसंदीदा सुपर स्टार कर रहा है अथवा उसका कोइर् करीबी दोस्त संस्तुति कर रहा है।य् लेकिन अमरीका के बाशार में उत्पाद के इस्तेमाल का पुराने अनुभव का ही सवार्ध्िक प्रभाव पड़ता है विशेषतः कार के क्रय ;49 प्रतिशतद्ध के मामलों में। वशन घटाने के उत्पाद एवं मोबाइल पफोन को खरीदते समय अवश्य दूसरों की सलाह को महत्त्व दिया जाता है। ड्डोत - इकोनाॅमिक टाइम्स 24 अक्टूबर, 2006उपयोगिता का सृजन होता है। भंडारण का मुख्य उद्देश्य वस्तुओं को उचित स्थान पर रखना एवं उनके संग्रहण की व्यवस्था करना है। क्योंकि वस्तु के उत्पादन के समय और उसके उपभोग के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए भंडारण की आवश्यकता होती है। अपने ग्राहकों की सेवा के संबंध् में किसी पफमर् की कायर् वुफशलता इस पर निभर्र करती है कि भंडारगृह कहाँ स्िथत हैं तथा वस्तुओं की सुपुदर्गी किस स्थान पर करनी है। साधरणतया किसी पफमर् के जितने अध्िक भंडारगृह होंगे ग्राहकों के पास विभ्िान्न स्थानों पर माल पहुँचाने में उतना ही कम समय लगेगा लेकिन भंडारण की उतनी ही लागत बढ़ जाएगी और भंडार - गृह यदि कम संख्या में होंगे तो इसके विपरीत होगा। अतः व्यावसायिक इकाइर् को भंडारण की लागत तथा ग्राहक की सेवा स्तर में संतुलन रखना होगा। जिन उत्पादों के लंबी अवध्ि के लिए संग्रहण की आवश्यकता है जैसे कृष्िा उत्पाद उनके लिए भंडारगृह उत्पादन समीप ही स्िथत होते हैं। इससे वस्तुओं के परिवहन की लागत कम आती है। दूसरी ओर जो उत्पाद भारी होते हैं तथा जिन्हें ढोना कठिन होता है ;जैसे मशीनें, मोटर वाहन तथा शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुएँ जैसे बेकरी का सामान, मांस, सब्िजयों, को बाशार के समीप के वेंफद्रों पर रखा जाता है। 4. संगृहित माल पर नियंत्राण - भंडारण संबंध्ित निणर्य से स्टाॅक में रखे माल के संबंध् में निणर्य जुड़ा है जो कइर् निमार्ताओं की सपफलता की वुंफजी है विशेषतः उन मामलों में जिनमें प्रति इकाइर् लागत बहुत ऊँची है। स्टाॅक में रखे माल के संबंध् में महत्त्वपूणर् निणर्य इस संबंध् में लेना है कि इसका स्तर क्या हो। जितनी अध्िक मात्रा स्टाॅक में रखे माल की होगी उतनी ही अच्छी सेवा ग्राहक कर पायेंगे लेकिन माल को स्टाॅक में रखने की लागत एवं ग्राहक सेवा में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है। वंफप्यूटर एवं सूचना तकनीकी के क्षेत्रा में तरक्की के कारण अध्िक माल के संग्रहण की आवश्यकता कम हो रही है तथा अध्िक से अध्िक वंफपनियों में समय की आवश्यकतानुसार माल के संग्रह संबंध्ी निणर्य की अवधरणा लोकपि्रय हो रही है। संगृहित माल के स्तर का निणर्य इस पर निभर्र करता है कि उत्पाद की माँग कितनी होगी। माँग का यदि सही अनुमान लगा लिया गया तो इससे संबंध् एवं लागत के स्तर को न्यूनतम स्तर पर रखा जा सकता है। इससे न केवल पफमर् रोकड़ प्रवाह को बल्िक उत्पादन क्षमता को एक समान स्तर पर बनाए रखने में सहायक होती है। इंवेंट्री स्तर के प्रमुख तत्व ;कद्ध ग्राहक को दी जाने वाली सेवा के संबंध् में पफमर् की नीति क्या होनी चाहिए। जितनी उच्च श्रेणी की सेवा देना चाहते हैं उतनी ही अध्िक की आवश्यकता होगी। ;खद्ध बिक्री के अनुमान की शु(ता का स्तर। यदि अनुमान अध्िक शु( होंगे तो स्कंध् का स्तर भी नीचा रखा जा सकेगा। ;गद्ध वितरण प्रणाली कितनी कारगर है अथार्त् स्कंध् की आवश्यकता कारखाने को संचारित करने तथा उत्पादों को बाशार में लाने की प्रणाली। यदि उत्पाद की अतिरिक्त माँग की पूतिर् में समय अध्िक लगेगा तो उच्च स्कंध् की आवश्यकता है। लेकिन यदि अतिरिक्त माँग की पूतिर् कम समय में की जा सकती है तो कम स्कंध् की आवश्यकता होगीऋ एवं ;घद्ध स्कंध् की लागत इसमें रोके रखने की लागत जैसे भंडारण की लागत, पूँजी का लग जाना एवं उत्पादन व्यय। प्रवतर्न एक वंफपनी अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तु का उत्पादन कर सकती है, इसकी उचित कीमत निधार्रित कर सकती है इन्हें ऐसे बिक्री वेंफद्रों पर उपलब्ध् करा सकती है जो ग्राहकों के लिए सुगम हो। लेकिन इस पर भी हो सकता है कि बाशार में माल की बिक्री अच्छी न हो। बाशार से उचित संप्रेषण की आवश्यकता है। यदि उचित संप्रेषण नहीं है तो ग्राहक को उत्पाद के संबंध् में या पिफर यह किस प्रकार से उसकी आवश्यकताओं की संतुष्िट करेगा इसका ज्ञान नहीं होगा। वह इसकी उपयोगिता अथवा लाभों के संबंध् में भी संतुष्ट नहीं होगा। दो उद्देश्य ग्राहकों को वस्तु के संबंध् में सूचित करने तथा उन्हें इसको खरीदने के लिए तैयार करने के लिए संप्रेषण का उपयोग करना प्रवतर्न कहलाता है। दूसरे शब्दों में प्रवतर्न विपणन मिश्र का एक महत्त्वपूणर् तत्व है जिसके माध्यम से विपणनकतार् बाशार में वस्तु एवं सेवाओं के विनिमय को बढ़ावा देने के लिए विभ्िान्न तकनीकों का प्रयोग करते हैं। प्रवतर्न मिश्र प्रवतर्न मिश्र से अभ्िाप्राय संगठन द्वारा अपने संप्रेषण के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सभी प्रवतर्न तकनीकों को मिला कर प्रयोग करना है। विपणनकतार् अपनी पफमर् के उत्पादों के संबंध् में ग्राहकों को सूचित करने एवं खरीदने के लिए तैयार करने के लिए संप्रेषण के विभ्िान्न तकनीकों का प्रयोग करता है। ये तकनीक हैं ;पद्ध विज्ञापन ;पपद्ध वैयक्ितक विक्रय ;पपपद्ध विक्रय संवध्र्न एवं ;पअद्ध प्रचार। इन विपणन 367 तकनीकों को प्रवतर्न मिश्र के तत्व भी कहा जाता है तथा प्रवतर्न के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इनके विभ्िान्न मिश्रणों का उपयोग किया जा सकता है। उदाहरण के लिए जो इकाइयाँ उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन कर रही हैं वह विज्ञापन का अध्िक प्रयोग कर सकती हैं जबकि जो पफमर् औद्योगिक वस्तुओं का विव्रफय कर रही हैं वह व्यक्ितगत विव्रफय का अध्िक प्रयोग कर सकती हैं। पफमर् इन तत्वों को किस प्रकार से समावेश कर उपयोग करेगी यह अनेक तत्वों पर निभर्र करेगा जैसे बाशार की प्रकृति, वस्तु की प्रकृति, प्रवतर्न का बजट, प्रवतर्न के उद्देश्य आदि। आइए पहले इन तत्वों के संबंध् में विस्तार से जानें। विज्ञापन हम प्रतिदिन सैंकड़ों विज्ञापन संदेश देखते हैं जो हमें अनेक उत्पादों जैसे नहाने का साबुन, डिटजे±ट पाउडर, शीतल पेय एवं सेवाओं जैसे होटल, बीमा पालिसियाँ आदि के संबंध् में बताते हैं। शायद विज्ञापन प्रवतर्न के लिए सबसे सामान्य रूप से उपयोग में आने वाला तकनीक है। यह अव्यक्ितक संप्रेषण होता है जिसका भुगतान विपणनकतार् ;प्रायोजकद्ध वुफछ वस्तु एवं सेवाओं के प्रवतर्न के लिए करते हैं। विज्ञापन के सवर्साधरण माध्यम समाचार पत्रा, पत्रिाकाएँ, टेलीविजन एवं रेडियो हैं। विपणन संप्रेषण विज्ञापन फ्यदि आप लोगों को वुफछ करने या वुफछ खरीदने के लिए प्रोत्साहित करते हैं तो आपको उनकी ही भाषा का प्रयोग करना चाहिए, जिसमें कि वे सोचते हैं।य् - डेविड ओगिल्वी फ्हम यह पाते हैं कि विज्ञापन कायर् ठीक वैसा ही है जैसे घास का बढ़ना जिसे आप कभी नहीं देख सकते, लेकिन प्रत्येक सप्ताह आप लाॅन में घास को बढ़ा हुआ पाते हैंय् - एंडी ट्रेवीस विज्ञापन की महत्त्वपूणर् विशेषताएँ निम्नलिख्िात हैं - ;पद्ध भुगतान स्वरूप - विज्ञापन संप्रेषण का वह स्वरूप है जिसमें उसके लिए भुगतान किया जाता है। अथार्त् विज्ञापनकतार् जनता के साथ संप्रेषण की लागत को वहन करता है। ;पपद्धअव्यक्ितक - व्यक्ितयों एवं विज्ञापनकत्तार् प्रत्यक्ष रूप से एक दूसरे के संपर्क में नहीं आते हैं। इसीलिए इसे प्रवतर्न की अव्यक्ितक प(ति कहते हैं। विज्ञापन स्वयं से बातचीत पैदा करता है न कि संवाद। ;पपपद्ध चिह्नित विज्ञापनदाता - विज्ञापन निश्िचत व्यक्ित अथवा वंफपनियाँ करती हैं जो विज्ञापन में श्रम करती हैं तथा इसकी लागत को भी वहन करती हैं। विज्ञापन के लाभ विज्ञापन संप्रेषण का माध्यम है। इसके लाभ निम्नलिख्िात हैं - ;पद्ध बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचना - विज्ञापन एक ऐसा माध्यम जिसके माध्यम से दूर - दूर पैफले बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचा जा सकता है। उदाहरण के लिए राष्ट्रीय दैनिक में दिया गया विज्ञापन इसके लाखों पाठकों तक पहुँचता है। ;पपद्ध ग्राहक संतुष्िट एवं विश्वास में वृि - विज्ञापन संभावित व्रेफताओं में विश्वास पैदा करता है क्योंकि इससे वे अध्िक सहजता का अनुभव करते हैं। यह उत्पाद की गुणवत्ता को सुनिश्िचत करता है इसलिए अध्िक संतोष का अनुभव करते हैं। ;पपपद्ध स्पष्टता - कला, वंफप्यूटर डिजाइन एवं ग्रापिफक्स में विकास के साथ विज्ञापन संप्रेषण का सशक्त माध्यम में विकसित हो चुका है। विशेष प्रभावोत्पादन के कारण सरल उत्पाद एवं संदेश भी बहुत आकषर्क लगने लगते हैं। ;पअद्ध मितव्ययता - विज्ञापन बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचने के लिए कम खचीर्ला संपे्रषण का साध्न है। व्यापकता के कारण विज्ञापन का वुफल खचर् संप्रेषण द्वारा बनाए संबंधें में बड़ी संबंधें में बाँट दिया जाता है। इसके परिणामस्वरूप प्रति लक्ष्िात इकाइर् लागत कम हो जाती है। विज्ञापन की सीमाएँ एक प्रवतर्न तकनीक के रूप में विज्ञापन की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिख्िात हैं - मूल्य ए.डीसरकार जगमगा रही है यह एपफ.एम.सी.जी. क्षेत्रा के बाहुबली नहीं हैं जो टेलीविजन पर सवोर्च्च श्िाखर के विज्ञापनकतार् के रूप में शासन कर रहे हंै। आश्चयर् की बात है कि इस स्िथति में तो सरकारी विभाग एवं सावर्जनिक क्षेत्रा की इकाइयाँ हैं। टेलीविजन एवं समाचारपत्रों, विज्ञापनकतार्ओं की सूची में सवोर्च्च प्रोक्टर एंड गैंबल, बजाज वंफज्यूमर केयर, जाॅयको एवं आइर्सर मोटसर् के साथ - साथ सरकारी संगठन हावी हैं जो विशाल मीडिया के माध्यम से जनसंपर्क के लिए नइर् उत्पन्न आतुरता को दशार् रहे हैं। टेलीविजन पर पाँच उच्च विज्ञापनकतार् विज्ञापन अवध्ि ;000 सैवेंफडों मेंद्ध प्रोक्टर एंड गैंबल होम प्रोडक्ट्स 799 वेंफद्रीय सीमा शुल्क विभाग 375 पश्िचमी बंगाल सूचना एवं संस्कृति 275 जाॅयको इंडिया लि 227 बजाज वंफज्यूमर केयर लि 165 पत्रा/पत्रिाकाएँ विज्ञापन मात्रा ;000 काॅलम मेंद्ध सिक्िकम/भूटान की शाही सरकार 416 रतन आयुवेर्दिक संस्थान 388 मिजोरम सरकार 251 पैट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय 209 आइर्सर मोटसर् लि 157 ड्डोत - इकोनाॅमिक टाइम्स ;पद्ध कम सशक्त - विज्ञापन संप्रेषण का गैरवैयक्ितक स्वरूप है। यह व्यक्ितक विव्रफय की तुलना में कम सशक्त माध्यम है। क्योंकि लोगों पर संदेश पर ध्यान देने के लिए किसी प्रकार का दबाव नहीं हेाता। ;पपद्ध प्रति पोषण की कमी - विज्ञापन का संदेश कितना प्रभावी रहा इसका मूल्यांकन करना कठिन है क्योंकि इसमें प्रसारित संदेश की तुरंत एवं सही प्रति पोषण की व्यवस्था नहीं है। ;पपपद्ध लोचपूणर्ता की कमी - संदेश क्योंकि निधर्रित मानक का होता है एवं विभ्िान्न ग्राहक समूहों की आवश्यकता के अनुसार नहीं ढाला जा सकता इसलिए विज्ञापन में लोच की कमी होती है। ;पअद्ध कम प्रभावी - जैसे - जैसे विज्ञापन की संख्या में वृि होती जा रही है वैसे - वैसे यह कठिन होता जा रहा है कि लक्ष्िात लोग विज्ञापन के संदेश को ग्रहण करें। इससे विज्ञापन की प्रभावोत्पादकता प्रभावित होती जा रही है। विज्ञापन के उद्देश्य पिछले अनुभागों में आपने विज्ञापन के गुण एवं सीमाओं को देखा। यद्यपि विज्ञापन वस्तु एवं सेवाओं के प्रवतर्न का बार - बार उपयोग में लाए जाने वाले माध्यमों में से एक है इसकी कापफी आलोचना भी की गइर् है। विज्ञापन के विरोध्ियों का कहना है कि विज्ञापन पर किया गया व्यय एक सामाजिक अपव्यय है क्योंकि इससे लागत में वृि होती है, लोगों की आवश्यकताओं में वृि होती है तथा इससे सामाजिक मूल्यों में गिरावट आती है। लेकिन विज्ञापन के समथर्कों का तवर्फ है कि विज्ञापन बहुत उपयोगी है क्योंकि इससे अध्िक लोगों तक पहुँचा जा सकता है प्रति इकाइर् उत्पादन लागत को कम करता है तथा अथर्व्यवस्था के विकास में सहायक होता है। इसीलिए यह आवश्यक है कि विज्ञापन के प्रमुख आलोचना बिंदुओं की जाँच की जाए तथा देखा जाए कि इनमें कितनी सत्यता है। यह आलोचना बिंदु निम्नलिख्िात हैं - 1. लागत में वृि - विज्ञापन के विरोध्ियों का तवर्फ है कि विज्ञापन के कारण उत्पादन की लागत में अनावश्यक रूप से वृि होती है जो अंतोगत्वा बढ़े हुए मूल्य के रूप में व्रेफता को ही वहन करनी होती है। उदाहरण के लिए टेलीविजन पर वुफछ सैवंफड के विज्ञापन पर विपणनकतार् को लाखों रुपए की लागत आती है। इसी प्रकार से छपाइर् के माध्यम अथार्त् समाचार पत्रा, पत्रिाका में विज्ञापन पर भी विपणनकतार् को भारी व्यय करना होता है। जो इसपर ध्न व्यय किया जाता है उससे लागत में वृि होती है उत्पाद की कीमत निधर्रण में जो एक महत्त्वपूणर् तत्व होता है। यह ठीक है कि किसी वस्तु के विज्ञापन पर कापफी लागत आती है लेकिन इसके कारण बड़ी संख्या में संभावित व्रेफताओं को उत्पाद की उपलब्ध्ता इसकी विशेषताओं आदि संबंध् में पता लगता है तथा इसे खरीदने के लिए वे प्रेरित होते हैं इससे उत्पाद की माँग में वृि होती है। माँग के बढ़ने से उत्पादन में वृि होती है जिससे बड़े पैमाने के उत्पादन के लाभ मिलते हैं। परिणामस्वरूप प्रति इकाइर् उत्पादन लागत कम हो जाती है क्योंकि वुफल लागत को इकाइयों की बड़ी संख्या में बाँट दिया जाता है। इस प्रकार से विज्ञापन पर किए गए खचर् से वुफल लागत में वृि होती है लेकिन प्रति इकाइर् लागत कम हो जाती है इससे उपभोक्ताओं पर भार कम हो जाता है बढ़ता नहीं है। 2. सामाजिक मूल्यों में कमी - विज्ञापन की एक और आलोचना है कि इससे सामाजिक मूल्यों की अवहेलना होती है तथा भौतिकवाद को बढ़ावा मिलता है इससे लोगों में असंतोष पैदा होता है क्योंकि लोगों को नए - नए उत्पादों के संबंध् में ज्ञान होता है तब वह अपनी वतर्मान स्िथति से असंतुष्ट हो जाते हैं। वुफछ विज्ञापन नइर् जीवन शैली दशार्ते हैं जिनको सामाजिक मान्यता नहीं मिलती। यह आलोचना भी पूरी तरह से सत्य नहीं है। विज्ञापन लोगों को नए उत्पादों के संबंध् में सूचना देकर उनकी सहायता करता है। हो सकता है कि यह उत्पाद पूवर् के उत्पादों से श्रेष्ठतर है। यदि व्रेफता को इन उत्पादों के संबंध् में कोइर् जानकारी नहीं है तो हो सकता है कि वह अवुफशल उत्पादों का प्रयोग कर रहे हैं। वैसे भी विज्ञापन का कायर् सूचना देना है। वस्तु को खरीदना है अथवा नहीं इसका अंतिम निणर्य तो व्रेफता को ही करना है। यदि विज्ञापित उत्पाद उनकी आवश्यकताओं की पूतिर् करता है तो वह उसे खरीदेंगे। इस उत्पाद को खरीदने के लिए और अध्िक परिश्रम के लिए अभ्िाप्रेरित होंगे। 3. व्रेफताओं में असमंजस - विज्ञापन में एक और दोष बताया जाता है कि इतने अध्िक उत्पादों का विज्ञापन होता है और सभी समान दावा करते हैं जिससे व्रेफता असमंजस में पड़ जाता है कि इनमें से कौन सत्य है तथा किस पर विश्वास किया जाए। उदाहरण के लिए डिटजे±ट पाउडर के जितने भी प्रतियोगी ब्रांड हैं वह सभी सपेफदी अथवा दाग नामीगिरामी लोगों का ब्रांड के निष्पादन पर प्रभाव ऐसे विज्ञापनों का उदाहरण जिसमें नामीगिरामी लोग दिखाए गए हैं। जिसके परिणामस्वरूप ब्रांड बने हैं तथा इससे बिव्रफी की मात्रा में वृि हुइर् है। वैफडबरी एवं अमिताभ बच्चन - एक ऐसा वाण्िाज्ियक विज्ञापन जिसमें बच्चन कारखाने की यात्रा कर प्रशंसा करते हंै, का अवतरण ब्रांड में पुनः विश्वास पैदा करने के लिए किया गया। प्रचार प्रारंभ करने के बारह सप्ताह पश्चात् बिव्रफी संकट के पहले की वुफल बिव्रफी के 90 प्रतिशत तक पहुँच गइर्। बिग ‘बी’ की उपस्िथति के कारण मीडिया में वंफपनी के संबंध् में समाचार को स्थान मिला जिससे प्रचार के प्रभाव को बल मिला। सैंट्रो एवं शाहरुख खान - सैंट्रो के विज्ञापन के लिए शाहरुख खान को अनुबंध्ित किया गया जिससे उपभोक्ता में तुरंत रिश्ता स्थापित हो गया। शाहरुख खान लीक से हटकर महानायक है जिसकी दमदार अभ्िानय शैली सैंट्रो की छवि से मेल खाती है। टाइर्टन एवं आमिर खान - दोनों ही भारतीय हस्ती माने जाते हैं तथा अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाइर् है। दोनों ही की विस्तृत वणर्न तथा शैली के प्रति संवेदशीलता कमजोरी है। मंगल पांडे का प्रतिरूप जो कि गैर परंपरागत था, के कारण विज्ञापन को अद्भुत बना दिया। जबकि तथ्य यह है कि आमिर अन्य प्रसि( व्यक्ितयों की तुलना में कम ही सामने आते हैं। मंच एवं रानी मुखजीर् - मंच का टेलीविजन पर प्रचार करने के लिए रानी मुखजीर् को लिया गया जिससे कि इसके संबंध् में एक बड़े ब्रांड का अनुभव हो। बदले में वंफपनी को आश्चयर्जनक अच्छे परिणाम मिले तथा यह विज्ञापन बच्चों में बहुत अध्िक लोकपि्रय हो गया। रानी को एक पिफल्म स्टार के रूप में नहीं बल्िक एक उपभोक्ता के रूप में प्रस्तुत किया गया। सचिन तेंदुलकर एवं बूस्ट - अनुसंधन से स्पष्ट हुआ कि ब्रांड को सचिन से जोड़ने से ब्रांड के मूल आकषर्ण को बल मिला तथा इससे ब्रांड की गरिमा में वृि हुइर्। बच्चे सचिन को सही अथो± में नायक मानते हैं। वह उसके हर कायर् की नकल करना चाहते हैं तब भी उस जैसा नहीं कर पाते हैं। ड्डोत - इंडियन जरनल आॅपफ माकेटिंग, 5 अक्टूबर, 2006 को मिटा देने का दावा करते हैं अथवा टूथपेस्ट के विभ्िान्न ब्रांड दांतों को सपेफदी अथवा ताशगी का अहसास का दावा करते हैं। इससे असमंजस की स्िथति पैदा हो जाती है कि किसको खरीदा जाए। विज्ञापन के समथर्कों का तवर्फ है कि हम सभी विवेकशील हैं तथा किसी भी उत्पाद को व्रफय करते समय मूल्य, बनावट, आकार आदि तत्वों को ध्यान में रखते हैं। अतः व्रेफता किसी उत्पाद का व्रफय करने से पहले विज्ञापन में दी गइर् सूचना एवं दूसरे स्रोतों से प्राप्त सूचना का विश्लेषण कर अपनी शंका को दूर कर सकते हैं वैसे इस दोष को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। 4. घटिया उत्पादों की बिव्रफी को प्रोत्साहन - विज्ञापन श्रेष्ठ एवं घटिया वस्तुओं में अंतर नहीं करता है तथा लोगों को घटिया वस्तुओं को खरीदने के लिए प्रेरित करता है। वास्तव में श्रेष्ठता एवं घटियापन गुणवत्ता पर निभर्र करती है जो कि एक तुलनात्मक अवधारणा है। इच्िछत गुणवत्ता का स्तर लक्ष्िात ग्राहकों को आथ्िार्क स्िथति एवं पसंद पर निभर्र करता है। विज्ञापन दी गइर् गुणवत्ता वाली वस्तुओं की बिव्रफी करता है और ग्राहक इसे तभी खरीदता है यदि यह उनकी आवश्यकताओं की पूतिर् करता है। कोइर् भी विज्ञापन उत्पाद की गुणवत्ता का झूठा वादा नहीं कर सकता। यदि पफमर् झूठा दावा करती है तो उस पर मुकदमा किया जा सकता है। 5. वुफछ विज्ञापन अरुचिकर होते हैं - विज्ञापन की एक और आलोचना इसके अरुचिकर होने की है। ये वे दिखाते हैं जिसे लोग पसंद नहीं करते हैं जैसे विज्ञापन जिसमें एक स्त्राी नाच रही है जबकि विज्ञापन में इसकी माँग नहीं है या स्त्राी एक पुरुष के पीछे भाग रही है क्योंकि उसने एक विशेष सूट पहन रखा है या पिफर एक विशेष इत्रा लगा रखी है। यह किसी भी प्रकार से ठीक नहीं है। वुफछ विज्ञापन संबंधें को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करते हैं जो कि आक्रमक होते हैं जैसे नियोक्ता कमर्चारी संबंध। हमने विज्ञापन के पक्ष एवं विपक्ष में बोलने वालों के विचार जाने। कभी - कभी विज्ञापन के एक तकनीक के रूप में दुरुपयोग की संभावना रहती है जिसके विरु( कानून सुरक्षा प्रदान कर सकता है या पिफर विज्ञापनकतार् स्वयं नियमन आचार संहिता तैयार कर सकते हैं। वैसे विज्ञापन के विरु( अध्िकांश आलोचना पूरी तरह से सत्य नहीं है। वैश्वीकरण के बदलते आथ्िार्क पयार्वरण में विज्ञापन को विपणन का एक महत्त्वपूणर् साध्न माना जाता है। यह व्यावसायिक इकाइर् को लक्ष्िात बाशार के साथ प्रभावी रूप से संप्रेषण में सहायता वैयक्ितक विव्रफय फ्अध्िकांश लोग सोचते हैं कि विव्रफय एवं बात करना एक ही होते हैं। लेकिन सवार्ध्िक प्रभावी विव्रफयकतार् जानते हैं कि सुनना उनके कायर् का सबसे महत्त्वपूणर् भाग है।य् - राॅय बारटैल फ्यदि आप दीघर् अवध्ि के लिए सपफल उद्यम का निमार्ण करना चाहते हैं तो आप बिव्रफी को बंद नहीं समझें बल्िक संबंधें की शुरुआत समझें।य् - पैट्रीश्िाया पि्रफप करता है। बिव्रफी में वृिकर उत्पाद की प्रति इकाइर् लागत को कम करता है। यह सामाजिक अपव्यय नहीं है बल्िक उत्पादन में वृि कर एवं रोशगार के अवसर पैदा कर सामाजिक कारण को मूल्यवान बनाता है। वैयक्ितक विक्रय वैयक्ितक विव्रफय में बिव्रफी के उद्देश्य से एक या एक से अध्िक संभावित ग्राहकों से बातचीत के रूप में संदेश का मौख्िाक प्रस्तुतिकरण समाहित है। यह संप्रेषण का वैयक्ितक स्वरूप है वंफपनियाँ बिव्रफी के उद्देश्य से संभावित ग्राहकों से संपवर्फ के लिए, उत्पाद के संबंध् में जागरुकता पैदा करने के लिए तथा उत्पाद की पसंद विकसित करने के लिए विव्रफयकतार्ओं की नियुक्ित करती हैं। वैयक्ितक विव्रफय की विशेषताएँ ;पद्ध व्यक्ितगत स्वरूप - वैयक्ितक विव्रफय में आमने - सामने बातचीत होती है इससे विव्रेफता एवं व्रेफता के बीच पारस्परिक संबंध् बनते हैं। ;पपद्ध संबंधें का विकास - वैयक्ितक विव्रफय में विव्रफयकतार् संभावित ग्राहक से व्यक्ितगत संबंध् बनाता है जो बिव्रफी में सहायक होता है। वैयक्ितक विव्रफय के लाभ ;पद्ध लोचपूणर्ता - वैयक्ितक विव्रफय में बड़ी सीमा तक लोच होती है। विव्रफय का प्रस्तुतीकरण एक - एक ग्राहक की आवश्यकतानुसार समायोजित किया जा सकता है। ;पपद्ध प्रत्यक्ष प्रत्युत्तर - वैयक्ितक विव्रफय में सीध संवाद होता है इससे ग्राहक से सीध्े ही विपणन प्रत्युत्तर प्राप्त कर सकते हैं तथा ग्राहकों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया जा सकता है। ;पपपद्ध न्यूनतम अपव्यय - ग्राहक से संपवर्फ करने से पहले वंफपनी निणर्य ले लेती है। किन ग्राहकों पर ध्यान देना है इससे श्रम के व्यथर् जाने को न्यूनतम किया जा सकता है। वैयक्ितक विव्रफय की भूमिका वस्तुओं एवं सेवाओं के विपणन में वैयक्ितक विव्रफय की महत्त्वपूणर् भूमिका होती है। वैयक्ितक विव्रफय के व्यवसायी, ग्राहक एवं समाज के लिए महत्त्व को इस प्रकार से वणर्न किया जा सकता है - व्यवसायी को लाभ किसी भी पफमर् के उत्पादों की माँग पैदा करने एवं उनकी बिव्रफी बढ़ाने का वैयक्ितक विव्रफय एक सशक्त माध्यम है। व्यवसायी के लिए वैयक्ितक विव्रफय के महत्त्व का नीचे वणर्न किया गया है - ;पद्ध संवध्र्न की प्रभावी प(ति - यह संवध्र्न का बहुत प्रभावी तकनीक है। यह संभावित ग्राहकों को उत्पाद के गुण बताकर प्रभावित करता है। जिससे बिव्रफी बढ़ती है। ;पपद्ध लोचपूणर् तकनीक - प्रवतर्न की अन्य तकनीक जैसे विज्ञापन, विव्रफय संवध्र्न की तुलना में वैयक्ितक विव्रफय अध्िक लोचपूणर् है। इसके कारण व्यवसायी व्रफय की अलग - अलग स्िथतियों में अलग - अलग तरह के प्रस्ताव रख सकता है। ;पपपद्ध श्रम का न्यूनतम अपव्यय - वैयक्ितक विव्रफय में बिव्रफी प्रवतर्न की अन्य तकनीकों की तुलना में श्रम के व्यथर् जाने की संभावना न्यूनतम होती है। इससे व्यवसायी की बिव्रफी के प्रयत्नों में मितव्ययता आती है। ;पअद्ध ग्राहक को प्रेरित करना - वैयक्ितक विव्रफय ग्राहकों को नए उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित करता है इससे वह अपनी आवश्यकताओं की पूतिर् और अच्छे ढंग से कर सकता है। तथा अपने जीवन स्तर को और ऊँचा उठा सकता है। ;अद्ध स्थाइर् संबंध् - वैयक्ितक विक्रय विक्रयकत्तार् एवं ग्राहक के बीच स्थाइर् संबंध् विकसित करने में सहायक होता है जो व्यवसाय के उद्देश्यों की प्राप्ित के लिए बहुत महत्त्वपूणर् हैं। ;अपद्ध व्यक्ितगत तालमेल - ग्राहकों से व्यक्ितगत तालमेल बैठने से व्यवसाय की प्रतियोगी शक्ित में वृि होती है। ;अपपद्ध परिचय के समय भूमिका - नए उत्पाद को परिचित करते समय वैयक्ितक विक्रय की महत्त्वपूणर् भूमिका होती है क्योंकि यह ग्राहकों को उत्पादक के गुणों से परिचित कराती है। ;अपपपद्ध ग्राहकों से संबंध् - विक्रयकत्तार् तीन अलग - अलग भूमिका निभाते हैं - प्रेरित करना, सूचना प्रदान करना तथा व्यावसायिक इकाइर् को ग्राहकों से जोड़ना। ग्राहकों के लिए महत्त्व वैयक्ित विक्रय की भूमिका अश्िाक्ष्िात एवं ग्रामीण क्षेत्रा के लिए और भी अध्िक महत्त्वपूणर् है क्योंकि इनके पास उत्पादों के संबंध् में सूचना पाने के अन्य कोइर् माध्य नहीं होता है - वैयक्ितक विक्रय का ग्राहकों को निम्न लाभ है - ;पद्ध आवश्यकताओं की पहचान में सहायक - वैयक्ितक विव्रफय ग्राहकों को उनकी आवश्यकताओं की पहचान करने एवं इनकी किस प्रकार से सवोर्त्तम ढंग से संतुष्िट की जा सकती है इसका ज्ञान प्रदान करने में सहायता प्रदान करता है। ;पपद्ध बाशार के संबंध् में नवीनतम जानकारी - ग्राहकों को मूल्यों में परिवतर्न, उत्पादों की उपलब्ध्ता एवं कमी एवं नए उत्पादों के संबंध् में नवीनतम जानकारी प्राप्त होती है जिसके कारण क्रय के संबंध् में वह अध्िक उचित निणर्य ले सकते हैं। ;पपपद्ध विश्िाष्ट सलाह - ग्राहकों को विभ्िान्न वस्तु एवं सेवाओं के संबंध् विशेषज्ञों की सलाह एवं दिशा निदेर्श प्राप्त होता है, जिससे वह और अच्छा क्रय कर सकते हैं। ;पअद्ध ग्राहकों को प्रेरित करना - वैयक्ितक विव्रफय ऐसे नए उत्पादों के क्रय के लिए प्रेरित करता है जो उनकी आवश्यकताओं को और अच्छे ढंग से पूरा कर सकती हैं जिसके परिणामस्वरूप उनके जीवन स्तर में और अध्िक सुधर होता है। समाज के लिए महत्त्व वैयक्ितक विव्रफय समाज के आथ्िार्क विकास में बहुत उत्पादक भूमिका निभाता है। वैयक्ितक विव्रफय से समाज को वुफछ विश्िाष्ट लाभ इस प्रकार हैं - ;पद्ध संभावित माँग में परिवतर्न - वैयक्ितक विव्रफय दबी हुइर् माँग को मूतर्रूप प्रदान करता है। इस चव्रफ के कारण ही समाज की आथ्िार्क वि्रफयाओं का पोषण होता है जिससे अध्िक रोशगार के अवसर पैदा होते हैं, आय में वृि होती है, और अध्िक वस्तु एवं सेवाओं का उत्पादन होता है। इस रूप में वैयक्ितक विव्रफय आथ्िार्क विकास पर प्रभाव डालता है। ;पपद्ध रोशगार के अवसर - वैयक्ितक विव्रफय बेरोशगार नवयुवकों को अध्िक आय एवं रोशगार के अवसर प्रदान करता है। ;पपपद्ध जीवनवृिा के अवसर - वैयक्ितक विव्रफय नौजवान एवं महिलाओं के लिए आकषर्क जीवन - वृिा का क्षेत्रा है जिसमें यह उन्नति के अवसर, कायर् संतुष्िट, सुरक्षा, सम्मान, विभ्िान्नता, रुचि एवं स्वतंत्राता के अवसर प्रदान करता है। ;पअद्ध विव्रफयकतार्ओं का स्थानांतरण - विव्रफयकतार्ओं में स्थान परिवतर्न बहुत अध्िक होता है जिससे देश में यात्रा एवं पयर्टन को बढ़ावा मिलता है। ;अद्ध उत्पाद का मानकीकरण - वैयक्ितक विव्रफय विभ्िान्नता लिए हुए समाज में उत्पाद के मानकीकरण एवं उपभोग में एकरूपता में वृि करता है। विव्रफय संवध्र्न विव्रफय संवध्र्न से तात्पयर् लघु अवध्ि प्रेरणाओं से है, जो व्रेफताओं को वस्तु अथवा सेवाओं के तुरंत व्रफय करने के लिए होती हंै। इनमें विज्ञापन, व्यक्ितक विव्रफय एवं प्रचार को छोड़कर वंफपनी द्वारा अपनी बिव्रफी बढ़ाने की अन्य सभी प्रवतर्न तकनीक सम्िमलित होती हंै। विव्रफय संवध्र्न वि्रफयाओं में नकद छूट, विपणन बिव्रफी प्रतियोगिताएँ, मुफ्रत तोहपेफ एवं मुफ्रत नमूनों का वितरण। विव्रफय संवध्र्न अन्य प्रवतर्न के प्रयत्न जैसे विज्ञापन, व्यक्ितक विव्रफय पूरक के रूप में प्रयोग किए जाते हैं। वंफपनियाँ विशेष रूप से तैयार विव्रफय प्रवतर्न तकनीक का उपयोग ग्राहकों के लिए ;जैसे मुफ्रत नमूने, छूट एवं प्रतियोगिताएँद्ध, व्यापारी अथवा मध्यस्थ ;जैसे सहकारी विज्ञापन, व्यापारिक छूट व्यापारी अभ्िाप्रेरणा एवं प्रतियोगिताएँद्ध एवं विव्रफयकतार् के लिए जैसे बोनस, विव्रफयकतार् प्रतियोगिताएँ, विशेष छूटद्ध करते हैं। विव्रफय प्रवतर्न में केवल वही वि्रफयाएँ सम्िमलित हैं जो पफमर् की बिव्रफी को बढ़ावा देने के लिए कम अवध्ि के प्रोत्साहन के लिए की जाती हैं। विव्रफय संवध्र्न के लाभ ;पद्ध ध्यानाकषर्ण मूल्य - विव्रफय संवध्र्न ियाएँ प्रोत्साहन कायर्क्रमों का उपयोग कर लोगों का ध्यान आकष्िार्त करती हैं। ;पपद्ध नए उत्पाद के अवतरण में उपयोगी - जब भी किसी उत्पाद को बाशार में लाया जाता है तब विव्रफय संवध्र्न यंत्रा बहुत प्रभावी हो सकते हैं। यह लोगों को अपने नियमित खरीद से हटाकर नए उत्पाद का उपयोग करने के लिए प्रेरित करती है। ;पपपद्ध सभी प्रवतर्न विध्ियों में तालमेल - विव्रफय प्रवतर्न ियाओं को इस प्रकार संवारा जाता है कि यह पफमर् के व्यक्ितक विव्रफय एवं विज्ञापन कायो± के पूरक का कायर् करें तथा पफमर् के वुफल मिलाकर प्रवतर्न कायो± को प्रभावोत्पादकता में वृि करें। विव्रफय संवध्र्न की सीमाएँ ;पद्ध संकट का सूचक - यदि पफमर् बार - बार विव्रफय संवध्र्न का सहारा लेती है तो ऐसा प्रतीत होगा कि या तो पफमर् आपनी बिव्रफी का प्रबंध्न भली - भाँति नहीं कर पा रही है या पिफर इसके उत्पादों को कोइर् खरीदना ही नहीं चाहता है। ;पपद्ध उत्पाद की छवि को बिगाड़ना - विव्रफय संवध्र्न तकनीकों का प्रयोग उत्पाद की छवि को प्रभावित करता है। व्रेफताओं को ऐसा लगने लगता है कि शायद उत्पाद अच्छी गुणवत्ता वाला नहीं है अथवा इसका मूल्य उचित नहीं है। विक्रय संवध्र्न विव्रफय संवध्र्न की सामान्य रूप से प्रयोग में आने वाली वि्रफयाएँ 1. छूट - यह उत्पादों को पफालतू अतिरिक्त माल को निकालने के लिए, विशेष मूल्य पर बेचता है। उदाहरण एक कार निमार्ता द्वारा एक विशेष ब्रांड की कार को एक सीमित अवध्ि के लिए 10,000 रुपए की छूट पर बेचने का प्रस्ताव। 2. कटौती - यह उत्पाद को सूची में दिए गए मूल्य से कम मूल्य पर बेचता है। उदाहरण - एक जूता बनाने वाली वंफपनी द्वारा 50 प्रतिशत तक की छूट अथवा एक कमीज निमार्ता द्वारा ‘50$40 प्रतिशत की छूट’। 3. वापसी - मूल्य के वुफछ भाग को व्रेफता को व्रफय के प्रमाण प्रस्तुत करने पर लौटाना। जैसे खाली पफाॅइल्स अथवा रैपर। यह विध्ि साधरण तथा खाद्य पदाथर् उत्पादन वंफपनियों द्वारा अपनी बिव्रफी को बढ़ाने के लिए अपनाइर् जाती है। 4. उत्पादों का मिश्रण - किसी एक उत्पाद के व्रफय करने पर दूसरे उत्पाद को उपहार स्वरूप देना जैसे 1/2 किलोग्राम चावल के पैकेट का एक बोरी आटा ;गेहूँ का आटाद्ध के व्रफय करने पर देना। अथवा 128 के.बी. मैमोरी काडर् डिग्री वैफम के साथ मुफ्रत प्राप्त करें अथवा 25$ एक टी.वी खरीदें और एक वैक्यूम क्लीनर मुफ्रत प्राप्त करें अथवा 1 किलोग्राम डिटजे±ट के साथ 100 ग्राम साॅस की बोतल मुफ्रत। 5. अतिरिक्त मात्रा उपहार स्वरूप - उत्पाद की अतिरिक्त मात्रा उपहार में देना यह सामान्यतः सौंदयर् प्रसाधन निमार्ता उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए एक शेविंग क्रीम पर 40 प्रतिशत अतिरिक्त देना अथवा किसी होटल द्वारा फ्2 रात तीन दिन विपणन का पैकेज लेने पर 500 रुपए भुगतान कर एक और रात रुकने का प्रस्तावय् अथवा एक कमीज निमार्ता द्वारा ‘‘दो खरीदें एक मुफ्रत प्राप्त करें।’’ 6. तुरंत ड्रा एवं घोष्िात उपहार - उदाहरण के लिए टी.वी. खरीदने पर काडर् खुरचें अथवा ‘पटाखा छोड़ें’ तथा उसी समय रेप्रफीजेरेटर, टी शटर्, वंफप्यूटर जीतें। 7. लक्की ड्रा/किस्मत आशमाएँ - उदाहरण के लिए लक्की ड्रा वूफपन पर एक नहाने का साबुन खरीदने पर सोने का सिक्का जीतें। एक पैट्रोल पंप विशेष से एक निधर्रित मात्रा में पैट्रोल खरीदने पर लक्की ड्रा वूफपन प्राप्त करने पर मुफ्रत पेट्रोल मिलेगा अथवा आराम देय अधेवस्त्रा खरीदने पर लक्की ड्रा वूफपन प्राप्त करें और इनाम में कार जीतें। 8. उपयोग योग्य लाभ - 3,000 रुपए का सामान खरीदें एवं 3,000 रुपए का छु‘ि याँ मनाने का पैकेज मुफ्रत प्राप्त करें अथवा 1,000 रुपए से अध्िक की पोषाक खरीदने पर अतिरिक्त के लिए छूट का वाउचर प्राप्त करें। 9. शून्य प्रतिशत पर पूरा वित्तीयन - इलेक्ट्राॅनिक वस्तुएँ, आॅटोमोबाइल आदि उपभोक्ता की टिकाऊ वस्तुओं के कइर् विपणनकतार्ओं की सरल वित्तीयन योजनाएँ होती हैं जैसे 24 आसान किस्तें, आठ किस्तें तुरंत और 16 का भुगतान आगे की तिथ्िा के चैकों द्वारा। लेकिन इसमें पफाइल के खचो± के संबंध् में चैकन्ना रहना चाहिए क्योंकि कइर् बार यह और वुफछ नहीं बल्िक पूवर् में ही ब्याज की वसूली होती है। 10. नमूनों का वितरण - किसी नए ब्रांड को बाशार में लाते समय संभावित ग्राहकों को वस्तु मुफ्रत नमूनों का वितरण जैसे डिटजे±ट पाउडर अथवा टूथपेस्ट। विज्ञापन एवं वैयक्ितक विक्रय में अंतर क्रम विज्ञापन सं. वैयक्ितक विक्रय 1विज्ञापन संदेश वाहन का अव्यक्ितक स्वरूप है वैयक्ितक विक्रय संदेश वाहन का व्यक्ितगत स्वरूप है 2विज्ञापन में मानक संदेश प्रसारित होता है अथार्त् वैयक्ितक विक्रय में ग्राहक की पृष्ठ - भूमि एवं बाशार के किसी भाग में सभी ग्राहकों को समान आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बातचीत को संदेश भेजना ढाला जाता है। 3विज्ञापन बेलोच होता है क्योंकि संदेश को व्रेफता वैयक्ितक विक्रय बहुत अध्िक लोचपूणर् होता है क्योंकि की आवश्यकतानुसार ढाला जा सकता है। इसमें संदेश को आवश्यकतानुसार बदला जा सकता है। 4इसकी जनसाधरण तक पहुँच होती है अथार्त् समय एवं लागत के कारण सीमित लोगों से ही इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचा संपवर्फ इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों तक जा सकता है। साध जा सकता है, पहुँचा जा सकता है। 5विज्ञापन में प्रति लक्ष्िात व्यक्ित व्यय बहुत कम वैयक्ितक विक्रय में प्रति व्यक्ित लागत कापफी अध्िक होता है। होती है। 6विज्ञापन में बाशार तक पहुँच में कम समय वैयक्ितक विक्रय में पूरे बाशार के लिए बहुत समय लगता है। लगता है। 7विज्ञापन में जन साधरण समाचार माध्यम जैसे वैयक्ितक विक्रय में विक्रय कमर्चारियों को रखा कि टेलीवीजन, रेडियो, समाचार पत्रा, एवं पत्रिाकाएँ जाता जिनकी पहुँच सीमित होती है एवं पत्रिाकाओं को अपनाया जाता है। को अपनाया जाता है। 8विज्ञापन में प्रत्यक्ष प्रत्युत्तर की कमी होती है। विज्ञापन वैयक्ितक विक्रय प्रत्यक्ष एवं तुरंत प्रत्युत्तर मिलता है। के संबंध् में ग्राहकों की प्रतििया की जांच के लिए विक्रयकतार् ग्राहकों की प्रतििया के संबंध् में तुरंत विपणन अन्वेषण की आवश्यकता होती है। जान जाते हैं। 9विज्ञापन पफमर् के उत्पादों में ग्राहक की रुचि पैदा वैयक्ितक विक्रय के निणर्य लेते समय महत्त्वपूणर् करने में अध्िक उपयोगी है। भूमिका होती है। 10.विज्ञापन अंतिम उपभोक्ता को माल बेचने में वैयक्ितक विक्रय उत्पादों के उद्योगों से जुड़े व्रेफताओं अध्िक उपयोगी होता है जो कि बड़ी संख्या में अथवा मध्यस्थों को बेचने में अध्िक सहायक है जैसे होता है। कि व्यापारी एवं पुफटकर विव्रेफता जो कि संख्या में कम होते हैं। 11. प्रतियोगिता - प्रतियोगिताओं का आयोजन जिनमें कौशल अथवा किस्मत आशमाइर् समाहित होती है जैसे किसी पहेली को हल करना अथवा वुफछ प्रश्नों का उत्तर देना। प्रचार प्रचार इस रूप में विज्ञापन के समान है कि यह भी गैर व्यक्ितक संप्रेषण है। लेकिन विज्ञापन के विपरीत यह बिना किसी भुगतान के संप्रेषण है। जब भी किसी उत्पाद अथवा सेवा के संबंध् में जन समाचार माध्यमों में पक्ष में समाचार आता है तो इसे प्रचार कहते हैं। उदाहरण के लिए माना एक विनिमार्ता ऐसा कार इंजन विकसित करने में सपफलता प्राप्त कर लेता है जो पेट्रोल के स्थान पर पानी से चलने लगे और टेलीविशन, रेडियो अथवा समाचार पत्रा समाचार के रूप में प्रसारित अथवा प्रकाश्िात करें तो इसे प्रचार कहेंगे क्योंकि इंजन का निमार्ता समाचार माध्यमों द्वारा इस उपलब्िध् की सूचना देने से लाभांवित होगा लेकिन उसे इसकी कोइर् कीमत नहीं चुकानी होगी। इस प्रकार से प्रचार की दो महत्त्वपूणर् विशेषताएँ हैं - ;पद्ध प्रचार एक बिना भुगतान का संप्रेषण है। इसमें विपणन इकाइर् का प्रयत्क्ष रूप से कोइर् खचर् नहीं होताऋ तथा ;पपद्ध इसके संचार का कोइर् निदिर्ष्ट सौजन्यकतार् नहीं होता क्योंकि इसमें संदेश एक समाचार के रूप जाता है। प्रचार में क्योंकि सूचना एक स्वतंत्रा स्रोत के माध्यम से दी जाती है जैसे कि प्रेस द्वारा समाचार कहानी अथवा झलकी के रूप में संदेश विज्ञापन में दिए गए संदेश की तुलना में अध्िक विश्वसनीय माना जाता है। विपणन संदेश क्योंकि प्रत्यक्ष विक्रय संप्रेषण के स्थान पर समाचार के रूप में दिया जाता है इसलिए यह उन लोगों तक भी पहुँचता है जो अन्यथा भुगतान द्वारा संप्रेषण पर ध्यान नहीं देते है। लेकिन प्रचार की एक सीमा है कि प्रवतर्न के माध्यम के रूप में यह विपणन पफमर् के नियंत्राण में नहीं होता है। समाचार माध्यम सूचना के केवल उस भाग का प्रसार करते हैं जो समाचार के योग्य होते हैं जो निश्िचत क्षेत्रा में किसी प्रकार की उपलब्िध् माने जाते हैं। इसलिए कोइर् पफमर् प्रचार को अपने उत्पादों के सिय प्रवतर्न के रूप में प्रयोग नहीं कर सकती। जनसंपवर्फ एक संगठन के जनमत का प्रबंध्न करना एक महत्त्वपूणर् कायर् है जो विपणन विभाग द्वारा निष्पादित किया जाता है। व्यवसाय को अपने ग्राहकों, आपू£तकतार्ओं तथा व्यापारियों से प्रभावी संप्रेषण करना होता है क्योंकि विव्रफय तथा लाभ में वृि करने हेतु ये साध्न हैं। संगठन अथवा उसके उत्पादों के प्रत्यक्ष संपवर्फ में आने वालों के अलावा सामान्य जनता के अन्य सदस्य भी हैं, जिनकी आवाश अथवा मत समान रूप से महत्त्वपूणर् है। ये जनता, कंपनी और उसके उत्पाद में रूचि ले सकती है तथा उसके उद्देश्य को प्राप्त करने की व्यवसाय क्षमता पर प्रभाव डाल सकती है। अतः यह आवश्यक हो जाता है कि जनमत तथा जनता के साथ कंपनी के संबंधें का नियमित आधर पर प्रबंध्न किया जाए। इसलिए जनता की नशरों में कंपनी की छवि तथा व्यक्ितगत उत्पादों के प्रवतर्न तथा संरक्षण हेतु कइर् प्रकार के कायर्व्रफम जनसंपको± में शामिल होते हैं। व्यवसाय कइर् समूहों से संबंध्ित होता है जिसमें आपू£तकतार्, अंशधरी, मध्यवतीर्, सवि्रफय समूह तथा सरकार सम्िमलित हैं। उदाहरणाथर् यदि एक पफमर् प्रतिस्पधर्त्मक विव्रफय वातावरण में टिके रहना चाहती है तो उसे मध्यस्थों का सवि्रफय समथर्न आवश्यक है। उसी प्रकार, उपभोक्ता सवि्रफय समूहों को संतुष्ट करने की आवश्यकता है क्योंकि वे ग्राहकों को उकसाकर उत्पाद खरीदने से मना करके प्रत्यक्षतः पफमर् के उत्पादों की बिव्रफी में कमी ला सकते हैं। वे ऐसा कानून को लागू करवाकर भी कर सकते हैं। आजकल अध्िकांश संगठनों तथा व्यवसायों में जनसपंवर्फ प्रबंध्न हेतु अलग विभाग बनाए गए हैं। वे किसी बाहरी जनसंपवर्फ एजेंसी की सेवाओं का भी उपयोग कर सकते हैं। उनका मुख्य कायर् व्यवसाय के बारे में सूचना का प्रसार करना तथा ख्याति का निमार्ण करना है। सामान्य जनता की अभ्िावृिा को माॅनीटर करने तथा सकारात्मक प्रचार करने हेतु मूतर् कदम उठाए जाने होते हैं। जब कंपनी अथवा उसके उत्पादों के बारे में नकारात्मक प्ररचार हो तो यह विशेष रूप से उपयोगी है। उस समय सावर्जनिक छवि सुधरने हेतु आपातकाल की तरह स्िथति से निपटा जाता है। तब जनसंपवर्फ विभाग को कंपनी की छवि को हुइर् हानि को नियंत्रिात तथा न्यूनतम करने हेतु वुफछ कठोर कायर्वाही करनी पड़ती है। वे वुफछ नियत कायर्व्रफम अपनाने हेतु उच्च स्तरीय प्रबंध् को परामशर् भी देते हैं जिससे उनकी सावर्जनिक छवि में सुधर होता है और यह सुनिश्िचत होता है कि नकारात्मक प्रचार न हो। जनसंपवर्फ की भूमिका जन संपवर्फ की भूमिका की चचार् उन कायो± के संदभर् में की जा सकती है जो जन संपवर्फ विभाग द्वारा किये जाते हैं। विपणन विभाग के हाथों में जनसंपवर्फ अपने - आप में एक महत्त्वपूणर् उपकरण है जिसे व्यवसाय के लाभ के लिए उपयोग किया जा सकता है। जनसंपवर्फ विभाग द्वारा निम्नलिख्िात पांच कायर् किये जाते हंै - 1.प्रैस संपवर्फ - संगठन के बारे में सूचना को प्रैस में सकारात्मक तरीके से प्रस्तुत किए जाने की आवश्यकता है समाचार बनाने हेतु एक कहानी का विकास तथा अनुसंधन कौशल आवश्यक है तथा जनसंचार माध्यमों को प्रैस प्रकाशनी स्वीवृफत कराना एक कठिन कायर् है। जनसंपवर्फ विभाग कंपनी के बारे में सही तथ्य तथा सही तस्वीर प्रस्तुत करने हेतु जनसंचार माध्यमों के संपवर्फ में रहता है अन्यथा यदि समाचार अन्य स्त्रोतों से लिए जाएं तो वे विवृफत हो सकते हैं। 2.उत्पाद प्रचार - नये उत्पादों के प्रचार हेतु विशेष प्रयास आवश्यक होते हैं तथा कंपनी को ऐसे कायर्व्रफम प्रायोजित करने होते हैं। जनसंपवर्फ विभाग ऐसी घटनाओं के प्रायोजनों का प्रबंध् करता है। समाचार सम्मेलनों, संगोष्िठयों तथा प्रदशर्नियों जैसी खेल - वूफद तथा सांस्वृफतिक घटनाओं के आयोजन द्वारा कंपनी अपने नये उत्पादों के प्रति ध्यान आक£षत कर सकती है। 3.निगमित सम्प्रेषण - जनता तथा संगठन में कमर्चारियों के साथ सम्प्रेषण के माध्यम से संगठन को अपनी छवि को संव£ध्त करने की आवश्यकता होती है यह सामान्यतः संवादपत्रों, वा£षक प्रतिवेदनों, विवरण्िाकाओं, लेखों तथा दृश्य - श्रव्य सामग्री की सहायता से किया जाता है। लक्ष्य बाशारों तक उनकी पहुँच तथा प्रभाव हेतु वंफपनियाँ इन साध्नों पर विश्वास करती हैं। व्यापार संघों अथवा व्यापार मेलों की सभाओं में वंफपनियों के कायर्कारियों द्वारा दिए भाषणों से वंफपनी की छवि व£ध्त होती है। यहाँ तक कि टी.वी. चैनलों के साथ साक्षात्कार तथा जनसंचार द्वारा पूछताछ के प्रत्युत्तर देना जनसंपवर्फ बढ़ाने का एक अच्छा तरीका है। 4.लाॅबी प्रचार - व्यवसाय तथा अथर्व्यवस्था से संबंध्ित नीतियों के बारे में संगठन को सरकारी कमर्चारीयों, कंपनी मामलों के मंत्राी उद्योग तथा वित्त से व्यवहार करना पड़ता है। औद्योगिक, दूरसंचार तथा कराधन नीयिों के निमार्ण के समय सरकार मुख्य हित धरिकों के विचार आमंत्रिात करती है तथा वाण्िाज्य एवं व्यापार संघों के साथ स्वस्थ संबंध् रखना चाहती है। जनसंपवर्फ विभाग उन विनियमों का संवध्र्न अथवा विरोध् करने में वास्तव में वि्रफयाशील होता है जो उस कंपनी/संगठन को प्रभावित करते हैं। 5.परामशर् - जनसंपवर्फ विभाग प्रबंध्न को उन सामान्य मामलों में परामशर् देता है जो जनता को प्रभावित करते हैं। तथा किसी विशेष मामले पर कंपनी की स्िथति को प्रभावित करते हैं। पयार्वरण, वन्यजीवन, बाल - अध्िकार, श्िाक्षा इत्यादि जैसे कारणों में समय एवं ध्न का योगदान देकर वंफपनी ख्याति बना सकती है। ये कारण - संबंध्ी वि्रफयाएँ जनसंपवर्फ बढ़ाने तथा ख्याति निमार्ण में सहायता करते हैं। इसके अतिरिक्त, अच्छे जनसंपवर्फ रखने से निम्नलिख्िात विपणन उद्देश्यों को प्राप्त करने मे सहायता मिलती है - ;कद्धजागरूकता पैदा करना - जनसंपवर्फ विभाग द्वारा जनसंचार में उत्पाद को कहानियों तथा नाटकों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। बाशार में उत्पाद के पहुँचने से पूवर् अथवा जनसंचार में विज्ञापन से पूवर् इससे बाशार में स्थान बनाया जा सकता है। यह सामान्यतः लक्ष्िात ग्राहकों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। ;खद्ध विश्वास पैदा करना - यदि जनसंचार माध्यमों, चाहे वह पि्रंट हो अथवा इलैक्टाॅनिक, में एक उत्पाद के बारे में कोइर् समाचार आता है तो वह सदैव विश्वसनीय माना जाता है तथा लोग उस उत्पाद पर विश्वास करते हैं क्योंकि वह समाचारों में है। ;गद्धविव्रफय - क£मयों को प्रेरणा - यदि उत्पाद के प्रमोचन ;लाॅन्चद्ध से पूवर् उसके बारे में पुफटकर विव्रेफताओं तथा डीलरों ने पहले से सुन रखा हो तो, विव्रफय क£मयों के लिए उनसे सौदा करना आसान हो जाता है। पुफटकर विव्रफताओं तथा डीलरों द्वारा भी यह महसूस किया जाता है कि इससे अंतिम उपभोक्ताओं को उत्पाद बेचना आसान हो जाता है। ;दद्धसवं(र्न लागतों मंे कमी - अच्छे जनसंपवर्फ बनाये रखने की लागत विज्ञापन तथा प्रत्यक्ष डाक से कापफी कम होती है। जनसपंवर्फ माध्यमों को संगठन तथा उसके उत्पाद के बारे में स्थान अथवा समय के लिए सहमत करने हेतु सम्प्रेषण, तथा अंतरवैयक्ितक कौशलों की आवश्यकता होती है। मुख्य शब्दावली विपणन ट्रेड मावर्फ बाशार ब्रांड चिÉ विपणन प्रबंध् पैकेजिंग विपणन मिश्र वितरण प्रणाली लेबलिंग बाशार संभावनाएँ वितरण माध्य उपभोक्ता उत्पाद भौतिक वितरण औद्योगिक उत्पाद प्रवतर्न सुविध उत्पाद विज्ञापन व्रफय योग्य उत्पाद प्रवतर्न मिश्र विश्िाष्टता लिए हुए उत्पाद वैयक्ितक विव्रफय सामान्य नाम प्रचार ब्रांड विव्रफय प्रवतर्न ब्रांड नाम सारांश परंपरागत रूप से बाशार से अभ्िाप्राय उस स्थान से है जहाँ व्रेफता एवं विव्रेफता लेन - देन करने के लिए एकत्रिात होते हैं जिसमें वस्तु एवं सेवाओं का विनिमय होता है। लेकिन आध्ुनिक अथो± में इसका तात्पयर् उत्पाद अथवा सेवा के वास्तविक एवं संभावित व्रेफताओं से है। विपणन क्या है - विपणन शब्द की व्याख्या उन व्यावसायिक ियाओं के निष्पादन के रूप में की जा सकती है जो वस्तु एवं सेवाओं के उत्पादक से उपभोक्ता के प्रवाह को दिशा देती हैं। विपणन मात्रा उत्पादन के पश्चात् की वि्रफया नहीं है। इसमें ऐसी कइर् ियाएँ सम्िमलित हैं जिन्हें वस्तुओं के उत्पादन से पूवर् किया जाता है तथा वस्तुओं के विव्रफय के पश्चात् भी चलती हैं। आध्ुनिक समय में - विपणन एक सामाजिक प्रवि्रफया है जिसके द्वारा समूह अपनी आवश्यकता की वस्तु प्राप्त करते हैं। यह उन वस्तुओं का उत्पादन कर तथा वस्तु एवं सेवाओं को दूसरों से स्वतंत्रा रूप से विनिमय द्वारा करते हैं। विपणन केवल विपणन का ही तत्व नहीं है या पिफर व्यावसायिक संगठनों तक ही सीमित नहीं है। विपणन ियाएँ समान रूप से गैर - लाभ संगठनों के लिए भी उतने ही प्रासंगिक हैं। विपणन किस चीज का हो सकता है - उन सबका विपणन हो सकता है जो दूसरों के लिए उपयोगी है। यह एक उत्पाद अथवा सेवा, व्यक्ित अथवा स्थान या कोइर् अवधरणा हो सकती है। यह अनुभव, संपिा, घटना, सूचना अथवा संगठन भी हो सकती है। विपणन प्रबंध् का अथर् है विपणन कायर् का प्रबंध्न। फ्यह लक्ष्िात बाशारों का चयन, एवं प्रबंध् की श्रेष्ठतर ग्राहकमूलक उपयोगिता का सृजन, सुपुदर्गी एवं संप्रेषण के माध्यम से ग्राहक बनाना, उन्हें बनाए रखना तथा उनमें वृि करने की कला एवं विज्ञान है।य् विपणन एवं विव्रफय - कइर् लोग विव्रफय एवं विपणन में अंतर नहीं करते। विव्रफय वास्तव में विपणन प्रवि्रफया का ही एक भाग है। विव्रफय का मुख्य बिंदु वस्तुओं के स्वामित्व एवं अध्िकार करना, विव्रेफता से उपयोगकतार् को हस्तांतरण करना है। विपणन ियाएँ उपभोक्ता की अध्िकतम संतुष्िट पर अध्िक जोर देती हैं। विपणन प्रबंध् दशर्न - विपणन कायर् को दिशा देने वाले विभ्िान्न दशर्न अथवा अवधरणाएँ इस प्रकार हैं - ;पद्ध उत्पादन अवधारणा जिसका मानना है कि उत्पादन की उपलब्ध्ता एवं लोगों की पहुँच के अंदर होना किसी व्यावसायिक इकाइर् की सपफलता की वुंफजी है तथा यह पफमर् की उत्पादन एवं उसके वितरण की कायर् क्षमता में सुधर पर अध्िक जोर देती है। ;पपद्ध उत्पादन अवधरणा यह भी मानती है कि उत्पाद में सुधर पफमर् के अध्िकतम लाभ अजर्न की वुंफजी है। ;पपपद्ध विक्रय अवधरणा मे माना जाता है कि जब तक कि व्रेफताओं को इसके लिए पयार्प्त रूप से प्रभावित एवं अभ्िाप्रेरित न किया जाए वह वस्तुओं का क्रय ही नहीं करेंगे या पिफर पयार्प्त मात्रा में क्रय नहीं करेंगे। ऐसा माना जाता है कि उत्पादन को ग्राहक खरीदें इसके लिए विक्रय एवं प्रवतर्न पर बहुत अध्िक जोर देना होगा। ;पअद्ध विपणन अवधरणा के अनुसार उपभोक्ता की आवश्यकताओं की संतुष्िट पर ही ध्यान वेंफित करने से ही किसी भी संगठन को बाशार में सपफलता मिल सकती है। ;अद्ध समाजोन्मुखी विपणन अवधरणा विपणन अवधरणा का ही विस्तार है जिसमें समाज की दीघर् अवध्ि के कल्याण को ध्यान में रखना अतिरिक्त है। विपणन के कायर् - विपणन के प्रमुख कायो± में सम्िमलित हैं - बाशार संबंध्ी सूचना को एकत्रिात करना एवं उसका विश्लेषण करना, विपणन नियोजन, उत्पाद निरूपण एवं विकास, मानकीकरण एवं श्रेणीकरण, पैकेजिंग एवं लेबलिंग, ब्रांडिंग, ग्राहक समथर्न सेवाएँ, उत्पादों का मूल्य निधर्रण, प्रवतर्न, वितरण, परिवहन, संग्रहण अथवा भंडारण। विपणन की भूमिका - विपणन की वस्तु स्िथति को अपना कर कोइर् भी संगठन चाहे वह लाभ कमाने वाला हो अथवा गैर लाभ कमाने वाला अपने लक्ष्यों को सवार्ध्िक प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सकता है। विपणन देश के विकास को गति प्रदान करता है तथा लोगों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने में सहायक होता है। विपणन मिश्र - विपणन वह उपकरण है जिनका कोइर् भी इकाइर् निदिर्ष्ट बाशार में अपने विपणन के उद्देश्यों की प्राप्ित के लिए उपयोग में लाती है। विपणन मिश्र को अथवा तत्व को चार वगो± में विभक्त किया गया है जो विपणन के चार च् के नाम से प्रसि( हैं, ये हैं - उत्पाद ;प्रोडक्शनद्ध, मूल्य ;प्राइसद्ध, स्थान ;प्लेसद्ध एवं प्रवतर्न ;प्रमोशनद्ध। माल की माँग पैदा करने के लिए इन चार तत्वों को एक साथ मिलाया जाता है। उत्पाद - सामान्य अथो± में उत्पाद शब्द से अभ्िाप्राय उत्पाद के भौतिक एवं मूतर् गुणों से है। विपणन में उत्पाद मूतर् एवं अमूतर् गुणों का मिश्रण होता है जिनका मूल्य के बदले में विनिमय हो सकता है तथा जो उपभोक्ता की आवश्यकताओं की संतुष्िट के योग्य है। इसमें वह सब वुफछ होता है जिसे बाशार में आवश्यकताओं की संतुष्िट के लिए बिव्रफी हेतु लाया जाता है। उत्पादों को दो वगो± में बाँटा जा सकता है। औद्योगिक उत्पाद एवं उपभोक्ता उत्पाद। उत्पाद जिन्हें अंतिम उपभोक्ता अथवा उपयोगकतार् अपनी निजी आवश्यकताओं की पूतिर् हेतु व्रफय करते हैं उन्हें उपभोक्ता उत्पाद कहते हैं। खरीददारी के आधार पर उत्पादों को सुविध उत्पाद, प्रतिदिन उपयोग में आने वाली वस्तुएँ एवं विश्िाष्ट उत्पाद वगो± में बाँटा जा सकता है। वस्तुओं के स्थायित्व के आधर पर इन्हें टिकाऊ, गैर टिकाऊ एवं सेवाओं में वगीर्कृत किया जा सकता है। वे वि्रफयाएँ, लाभ अथवा संतुष्िट ;जैसे ड्राइर्क्लीन करना, घडि़यों की मरम्मत, बाल काटनाद्ध का विव्रफय किया जाता है इन्हें सेवा कहते हैं। औद्योगिक उत्पाद उन उत्पादों को कहते हैं जिन्हें दूसरे उत्पादों के उत्पादन के लिए आगत के रूप में उपयोग में लाया जाता हैं इन्हें ;पद्ध माल एवं पुजे± ;पपद्ध पूँजीगत वस्तुएँ एवं ;पपपद्ध वस्तुएँ एवं व्यावसायिक सेवाएँ। सामान्य नाम - उत्पादन के पूरे वगर् के लिए उपयोग में आता है। इसके उदाहरण हैं पुस्तक, हाथ घड़ी एवं टायर। ब्रांड एक नाम, शब्द, चिह्न, प्रतीक डिजाइन अथवा इनका कोइर् मिश्रण होता है जिसका प्रयोग विव्रेफता अथवा विव्रेफता समूह के उत्पाद - वस्तु अथवा सेवाओं की पहचान करने एवं प्रतियोगियों के उत्पादों से उनका अंतर करने के लिए किया जाता है। ब्रांड का वह भाग जिसे बोला जा सकता है ब्रांड नाम कहलाता है। ब्रांड का वह भाग जिसकी पहचान संभव है लेकिन जिसका उच्चारण संभव नहीं है ट्रेड मावर्फ कहलाता है। ब्रांड का चिह्न प्रतीक, डिजाइन, अलग रंग विन्यास अथवा अक्षरों का स्वरूप के रूप में दिया होता है। ब्रांड अथवा उसके किसी भाग को विध्िक संरक्षण मिल जाता है तो उसे ‘ट्रेड मावर्फ’ कहते हैं। एक अच्छा ब्रांड नाम संक्ष्िाप्त, उच्चारण वणर् विन्यास, पहचान करने एवं याद करने में सरल होना चाहिए। यह उत्पाद के लाभों एवं गुणों को बताने वाला, अन्य से भ्िान्न पैविंफग अथवा लेबलिंग आवश्यकताओं को पूरा करने वाला, पयार्प्त रूप से बहुमुखी होना चाहिए जो नए उत्पादों को भी समायोजित कर सके। पंजीयन के योग्य होना चाहिए। इसे कानूनी संरक्षण प्राप्त होना चाहिए तथा यह टिकाऊ होना चाहिए अथार्त् जो प्रचलन बाहर न हो जाए। पैकेजिंग - किसी उत्पाद के अनुरूपण एवं डब्बे अथवा आवरण के उत्पादन को पैकेजिंग कहते हैं। पैकेजिंग के तीन भ्िान्न स्तर हो सकते हैं अथार्त् प्राथमिक, द्वितीयक एवं परिवहन पैकेजिंग। पैकेजिंग वस्तुओं के विपणन में कइर् कायर् करते हैं। वुफछ महत्त्वपूणर् कायर् हैं उत्पाद अभ्िाज्ञान, उत्पाद संरक्षण, उत्पाद के प्रयोग को सुगम बनाना एवं वस्तु एवं सेवाओं का प्रवतर्न। लेबलिंग - वस्तुओं के विपणन देखने में सरल परंतु महत्त्वपूणर् कायर् पैकेज पर चिपकाने वाले लेबल का अनुरूपण है। लेबल उत्पादन पर टांगे गए पफीते से जटिल लेखा चित्रा तक हो सकते हैं जो पैकेज का भाग होते हैं। लेबल के सवार्ध्िक महत्त्वपूणर् कायर् हैं - ;पद्ध उत्पाद का विवरण देना ;पपद्ध उत्पाद अथवा ब्रांड की पहचान करने में सहायता करना ;पपपद्ध उत्पाद को विभ्िान्न वगो± में श्रेणीब( करने में सहायक होता है एवं उत्पाद के प्रवतर्न में सहायता करता है। विपणन मूल्य निधर्रण - मूल्य वह राश्िा है जिसका उत्पाद अथवा सेवा को व्रफय के प्रतिपफल के रूप व्रेफता द्वारा भुगतान किया जाता है अथवा विव्रेफता द्वारा प्राप्त किया जाता है। यदि उत्पाद के मूल्य में वृि की गइर् है तो सामान्यतः इसकी माँग कम हो जाएगी और इसमें कमी होने पर इसके विपरीत होगा। मूल्य निधार्रण को प्रतियोगियों के विरु( एक प्रभावी हथ्िायार माना जाता है। यह एक मात्रा तत्व है जो पफमर् के आगम एवं लाभ को प्रभावित करता है। मूल्य निधर्रण को प्रभावित करने वाले तत्व हैं - ;पद्ध उत्पाद की लागत ;पपद्ध उपयोगिता एवं माँग ;पपपद्ध प्रतियोगिता ;पअद्ध सरकार एवं विध्िक नियमन एवं ;अद्ध विपणन विध्ियाँ भौतिक वितरण - इस पक्ष के संबंध् में दो महत्त्वपूणर् निणर्य हंै - पहला वस्तुओं के भौतिक संचलन के संबंध् में और दूसरा माध्यम के संबंध् में। वितरण माध्य पफमर् एवं व्यक्ितयों के वे समूह होते हैं जो स्वामित्व ग्रहण करते हैं अथवा इसके हस्तांतरण में सहायक होते हैं ;उन विश्िाष्ट उत्पाद अथवा सेवाओंद्ध जिनको उत्पादक से उपभोक्ता तक ले जाइर् जाती हैं। वितरण के माध्यम, अध्िकार, स्थान एवं समय उपयोगिता का निमार्ण कर वस्तुओं के प्रवाह को सुगम बनाते हैं। मध्यस्थ जिन महत्त्वपूणर् कायो± को करते हैं वे हैं - ;पद्ध छंटाइर् करना ;पपद्ध इकट्टòा करना ;पपपद्ध बंटवारा करना ;पअद्ध वगीर्कृत करना ;अद्ध उत्पाद प्रवतर्न ;अपद्ध विनिमय सहायता, एवं ;अपपद्ध जोख्िाम उठाना। माध्यम के प्रकार - 1. प्रत्यक्ष वितरण माध्यम वे होेते हैं जिनमें मध्यस्थ के बगैर वस्तुओं को निमार्ता से ग्राहक को सीध उपलब्ध् कराया जाता है। 2. अप्रत्यक्ष वितरण माध्यम में सम्िमलित हैं - ;पद्ध निमार्ता - पुुफटकर विव्रेफता - उपभोक्ता ;एक स्तरीय माध्यमद्ध ;पपद्ध निमार्ता - थोक विव्रेफता - पुफटकर विव्रेफता - उपभोक्ता ;दो स्तरीय माध्यमद्ध ;पपपद्ध निमार्ता - एजेंट - पुफटकर विव्रेफता - उपभोक्ता ;तीन स्तरीय माध्यमद्ध वितरण के चयन के निधर्रक तत्वों में सम्िमलित हैं - ;पद्ध उत्पाद से संबंध्ित तत्व ;पपद्ध वंफपनी की विशेषताएँ ;पपपद्ध प्रतियोगी तत्व ;पअद्ध बाशार संबंध्ी तत्व एवं ;अद्ध पयार्वरण तत्व। भौतिक वितरण में वस्तुओं को निमार्ता से ग्राहकों तक भौतिक रूप से ले जाने के लिए आवश्यक ियाएँ सम्िमलित हंै। वितरण के प्रमुख घटक हैं - ;पद्ध आदेश प्रियण ;पपद्ध परिवहन ;पपपद्ध भंडारण एवं ;पअद्ध संचित माल नियंत्राण प्रवतर्न - प्रवतर्न समय रहते संचित माल दो उद्देश्यों को लेकर संप्रेषण का उपयोग करना ;पद्ध संभावित ग्राहकों को उत्पाद के संबंध् में सूचित करना एवं ;पपद्ध इनका क्रय करने के लिए तैयार करना। चार बड़े यंत्रा अथवा प्रवतर्न मिश्र के घटक होते हैं जो इस प्रकार हैं - ;पद्ध विज्ञापन, ;पपद्ध वैयक्ितक विव्रफय ;पपपद्ध विव्रफय संवध्र्न एवं ;पअद्ध प्रचार। इन यंत्रों को प्रवतर्न के उद्देश्यों की प्राप्ित के लिए विभ्िान्न समुच्चयों में प्रयुक्त किया जाता है। विज्ञापन प्रवतर्न की बहुत सामान्य रूप से प्रयुक्त विध्ि है। यह संप्रेषण का गैर व्यक्ितक स्वरूप है जिसके लिए विपणनकतार् वस्तु एवं सेवा के प्रवतर्न के लिए भुगतान करते हैं। संपे्रषण के माध्यम के रूप में विज्ञापन के गुण हैं - ;पद्ध व्यापक पहुँच ;पपद्ध ग्राहक की संतुष्िट एवं विश्वास में वृि ;पपद्ध अभ्िाव्यजंकता ;पअद्ध मितव्ययता विज्ञापन की सीमाएँ हैं - ;पद्ध कम सशक्त ;पपद्ध प्रत्युत्तर की कमी ;पपपद्ध लोच हीनता ;पअद्ध कम प्रभावी। विज्ञापन के विरु( आपिायाँ हैं - ;पद्ध लागत में वृि करता है ;पपद्ध समाजिक मूल्यों का हनन करता है ;पपपद्ध व्रेफताओं को असमंजस में डालता है एवं ;पअद्ध घटिया उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देता है। विज्ञापन के विरु( अध्िकांश आलोचनाएँ पूरी तरह से सत्य नहीं हंै। इसीलिए विज्ञापन को विपणन का आवश्यक कायर् माना गया है। व्यक्ितक विव्रफय में बिव्रफी के उद्देश्य से एक या एक से अध्िक संभावित ग्राहकों से वातार्लाप के रूप में मौख्िाक रूप से संदेश दिया जाता है। वैयक्ितक विव्रफय व्यवसायी एवं समाज दोनों के लिए महत्त्वपूणर् भूमिका निभाता है। विव्रफय संवध्र्न से अभ्िाप्राय लघु आवध्िक प्रेरणाएँ हैं जो वस्तु एवं सेवाओं के तुरंत क्रय के लिए व्रेफता को प्रोत्साहित करती हैं। इनमें बिव्रफी बढ़ाने के लिए वंफपनी जिन प्रवतर्न वििायों का प्रयोग करती है जैसे विज्ञापन, व्यक्ितक विव्रफय एवं प्रचार को छोड़कर अन्य विध्ियाँ सम्िम्मलित हैं। सामान्य रूप से प्रयुक्त विव्रफय प्रवतर्न ियाएँ हैं छूट, कटौती, वापसी, उत्पाद मिश्रण, मात्रा पर उपहार, तुरंत आहरण एवं निध् ार्रित उपहार, लक्की ड्रा, उपयोगी लाभ, 0 प्रतिशत की दर से वुफल वित्त, नमूने एवं प्रतियोगिताएँ। प्रचार विज्ञापन के समान है क्योंकि यह संप्रेषण का गैर - व्यक्ितक स्वरूप है। लेकिन विज्ञापन से इतर संप्रेषण का गैर व्यक्ितक स्वरूप है। प्रचार में सूचना एक स्वतंत्रा ड्डोत द्वारा दी जाती है। लेकिन प्रचार की एक महत्त्वपूणर् सीमा है कि यह प्रवतर्न का माध्यम है तथा यह विपणन पफमर् के नियंत्राण में हैं। अभ्यास अति लघु उत्तरीय प्रश्न 1.वस्तु एवं सेवाओं के विपणनकतार्ओं के लिए ब्रां¯डग के लाभों का वणर्न कीजिए। 2.एक अच्छे ब्रांड नाम की विशेषताओं को सूचीब( कीजिए। 3.विपणन की सामाजिक अवधरणा क्या है? 4.सुविध उत्पादों की विशेषताओं को बताइए। 5.उपभोक्ता वस्तुओं के पैकेजिंग के लाभों की सूची तैयार कीजिए। 6.प्रवतर्न विध्ि के रूप में विज्ञापन की सीमाएँ क्या हंै? 7.पिछले वुफछ महीनों में आपने या आपके परिवार ने दिन प्रतिदिन के उपयोग की जिन वस्तुओं का व्रफय किया है उनमें से किन्हीं पाँच को सूचीब( कीजिए। 1.विपणन क्या है? वस्तु एवं सेवाओं की विनिमय प्रवि्रफया में इसके क्या कायर् है? समझाइए। 2.विपणन की उत्पाद अवधरणा एवं उत्पादन अवधरणा में अंतर बताइए। 3.‘उत्पाद उपयोगिताओं का समूह होता है।’ क्या आप इससे सहमत हैं? विवेचना कीजिए। 4.औद्योगिक उत्पाद क्या हंै? यह उपभोक्ता उत्पादों से किस प्रकार भ्िान्न हंै? समझाए। 5.सुविध उत्पाद एवं प्रतिदिन के उपयोगी उत्पादों में अंतर कीजिए। 6.‘उत्पाद मूतर् एवं अमूतर् विशेषताओं का मिश्रण होते हैं’ समझाइए। 7.उत्पादों के विपणन में लेबलिंग के कायो± का वणर्न कीजिए। 8.उपभोक्ता एवं गैर टिकाऊ उत्पादों के वितरण में मध्यस्थों की भूमिका का वणर्न कीजिए। 9.वितरण के माध्यमों के चयन में निधर्रक तत्वों को समझाइए। 10.भौतिक वितरण के घटकों को संक्षेप में समझाइए। 11.विज्ञापन की परिभाषा दीजिए। इसवफी मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? समझाइए। 12.प्रवतर्न मिश्र के तत्व के रूप में विव्रफय प्रवतर्न की भूमिका का वणर्न कीजिए। 13.निम्न पर संक्षेप में लिख्िाए - विपणन उत्पाद विपणन मिश्र विश्िाष्टता लिए हुए उत्पाद उत्पाद की लागत मूल्य निधर्रण के तत्व के रूप में शून्य स्तरीय माध्यम वितरण माध्यमों के चयन में वंफपनी की विशेषताओं की भूमिका भंडारण प्रवतर्न मिश्र प्रचार लेबलिंग दीघर् उत्तरीय प्रश्न 1.विपणन की परिभाषा दीजिए। यह विव्रफय से किस प्रकार भ्िान्न है? वणर्न कीजिए। 2.विपणन की अवधरणा क्या है? यह वस्तु एवं सेवाओं के प्रभावी विपणन में किस प्रकार सहायक है? 3 विपणन मिश्र क्या है? इसके प्रमुख तत्व कौन - कौन से हैं? समझाइए। 4 उत्पादों में अंतर करने में ब्रांडिंग किस प्रकार से सहायक होती है? क्या यह वस्तु एवं सेवाओं के विपणन में भी सहायता करती है? समझाइए। 5 किसी वस्तु अथवा सेवा की कीमत निधर्रण को प्रभावित करने वाले तत्व कौन - कौन से हैं? समझाइए। 6 ‘वितरण के माध्यम’ से आप क्या समझते हैं? वस्तु एवं सेवाओं के वितरण में इनके कायर् हैं। समझाइए। 7 उत्पादों के भौतिक वितरण में लगी प्रमुख वि्रफयाओं का वणर्न कीजिए। 8 ‘विज्ञापन पर व्यय एक सामाजिक अपव्यय है।’ क्या आप इससे सहमत हंै? 9 विज्ञापन एवं वैयक्ितक विव्रफय में अंतर कीजिए। परियोजना कायर् 1.चार अथवा पाँच विद्याथीर् मिलकर अपने क्षेत्रा के विपणन संगठनों ;पुफटकर विव्रेफता, थोक विव्रेफता, वितरक आदिद्ध के पास जाएँ। उनकी विपणन संबंध्ी ियाओं के संबंध् में पता करें। जो भी अंतर इन संगठनों में आपको दिखाइर् दे तथा इनमें समान वि्रफयाएँ दिखाइर् दें उन पर रिपोटर् तैयार करें। 2.अपनी पसंद की वुफछ टिकाऊ अथवा गैर टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं के संबंध् में हाल ही में समाचार पत्रा, पत्रिाकाओं आदि में प्रकाश्िात की गइर् विव्रफय प्रवतर्न योजनाओं के कोइर् दस विज्ञापन एकत्रिात कीजिए। इन उत्पादों के पैकेज ;रैपर, शीशी आदिद्ध पर लिखे गए प्रवतर्न संबंध्ी सूचनाओं को एकत्रिात कीजिए तथा अपनी नोट बुक में योजना के वुफछ महत्त्वपूणर् विशेषताओं को लिख्िाए। कक्षा में विव्रफय प्रवतर्न योजनाओं पर चचार् कीजिए। अनुप्रयोगात्मक प्रश्न 1.एक महत्त्वपूणर् पयर्टन स्थल में स्िथत बड़े होटल के विपणन प्रबंध्क के रूप में आपको किन सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा तथा इनसे निपटने के लिए आप क्या कदम उठाएँगे? समझाइए। 2.माना कि आप एक बीमा वंफपनी में उप विपणन प्रधन हैं तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए नइर् मेडिक्लेम पाॅलिसी की योजना बना रहे हैं। आप इस कायर् को करने के लिए क्या सूचना एकत्रिात करेंगे? वणर्न कीजिए। 3.आपने/आपके परिवार ने पिछले छः महीनों में किन वस्तुओं की खरीददारी की है उनकी सूची बनाइए तथा उन प्रत्येक वस्तु के क्रम को प्रभावित करने वाले तत्वों का निधर्रण कीजिए। 4.किसी खाने के उत्पाद के पैकेज पर सामान्यतः क्या सूचना दी हुइर् होती है। अपनी पसंद के किसी एक खाने की वस्तु के लेबल का रूपांकन तैयार कीजिए। 5.टिकाऊ उपभोक्ता उत्पादों के व्रेफताओं के लिए आप नए ब्रांड की मोटर साइर्कल का विपणन करने वाली पफमर् के प्रबंध्क के रूप में आप ग्राहकों की सेवा की क्या योजना बनाएँगे। समझाइए। समस्या नोकिया चार उपायों के मागर् से ग्राहकों तक पहुँचती है टाइम्स न्यूश नेटववर्फ, 20 जनवरी 2003 नयी दिल्ली - भारत में मोबाइल हैंड सेट के 15,000 करोड़ रुपए में 79 प्रतिशत की विशाल भागीदारी के पश्चात् नोकिया या इंडिया ने लोगों को जोड़ने का एक नया तरीका निकाला है। मोेबाइल हैंड सेट विनिमार्ता ने पुफटकर बिक्री की एक बिल्वुफल नइर् रणनीति तैयार की है जिसके अनुसार इसने अपने ग्राहकों को प्रयोग, आय स्तर एवं जीवन शैली के आधर बाँटते हुए चार प्रमुख वगो± में बाँटा है। यह वगीर्करण नोकिया विखंडन अध्ययन नामक विस्तृत सवेर्क्षण पर आधरित है। यह सवर्ेक्षण 16 देशों से 42,000 उपभोक्ताओं पर दो वषोे± तक किया गया। इसमें उपभोक्ता जब मोबाइल उपकरण खरीदता है तो इस पर पसंद की जीवन शैली तथा उसके प्रति दृष्िटकोण के प्रभाव तथा इनके उपयोग के तरीके का अध्ययन किया गया। जिस रणनीति की विश्व स्तर पर पिछले वषर् जून में घोषणा की गइर् भारत में उसका खुलासा अब हुआ है। नइर् रणनीति की बारीकियों को अभी तय करना बाकी है लेकिन संभावना है कि चार खंडों के लिए वंफपनी अलग - अलग विपणन रणनीति अपनाएगी। अलग - अलग खंडों के लिए विपणन द्वारा प्रचार भी भ्िान्न होगा। नोकिया के सभी उत्पादों को इन्हीं चार समूहों को ध्यान में रखकर पुनः वगीर्वृफत किया है जिससे कि प्रत्येक वगर् के उपभोेक्ता की विश्िाष्ट आवश्यकता की पूतिर् की जा सके। इनमें से पहला खंड स्पअम है जिसमें प्रथम बार के उपयोगकतार्ओं को लक्ष्य में रखा गया है, इनकी आवश्यकता बातचीत है और यह ही इनकी मूल पसंद है। इनके लिए प्राथमिक हैंड सेट चाहिए जिनमें कम कायर् तथा जिनकी कम कीमत हो। नोकिया इंडिया विपणन के मुख्िाया देवेन्द्र वुफमार का कहना है कि दूसरा खंड है कनेक्ट ;बवददमबजद्ध। यह उन बड़ी संख्या में बिखरे उपयोगकतार्ओं पर ध्यान देता है, जिन्हें कइर् प्रकार के कायर् करने वाले तथा अनेक विशेषता वाले एवं अध्िक लोगों से जोड़ने वाले पफोन चाहिए। अतः इस वगर् के पफोन में ळच्त्ै, वैफमरा, एवं सगीत की क्षमता होनी चाहिए। फ्यह कायार्त्मक पफोन ही होते हैं लेकिन इनका लक्ष्य ैम्ब्ब् ;निचला सामाजिक आथ्िार्क वगर्द्ध से लेकर ैम्ब्।1़ ;अत्यध्िक उच्च सामाजिक आथ्िार्क वगर्द्ध तक होते हैं। अलगे दो वगर् अचीव ;।बीपमअमद्ध एवं एक्सप्लोर ;म्गचसवतमद्ध के वेंफद्र में वह उपयोगकतार् हैं जो मोबाइल में कइर् कायर् चाहते हैं तथा जिनके पास वह हैंडसेट हैं जो कइर् कायर् कर सकते हैं। उदाहरण के लिए उद्यमी को लें तो वह चाहते हैं कि उनके पफोन व्यवसाय संबंध्ी कायार्त्मकता लिए होने चाहिए। नोकिया की नइर् इर् - शंृखला को इस वगर् में रखा गया है। जिनके हैंडसेट में फॅम्त्ज्ल् की बोडर् है एवं जो इंटरनेट का पूरा कायर् कर सकते हैं। उच्च स्तरीय जीवन शैली वगर् के ग्राहकों को ध्यान में रखने वाले बहुउद्देशीय वगर् ;म्गचसवतमद्ध आने वाले वषो± में वंफपनी का सबसे प्रमुख वगर् होगा। नोकिया इंडिया मल्टीमीडिया, व्यवसाय के निदेशक विनीत तनेजा का कहना है कि फ्आने वाले वषो± में इस खंड में सवार्ध्िक विकास होगा। यह पाँच भ्िान्न - भ्िान्न क्षेत्रों पर ध्यान देगा - उपयोग, पफोटो, मोबाइल, टेलीविशन, संगीत एवं खेल। हम इन क्षेत्रों की सहायताथर् तेशी से कम मूल्य के उत्पाद को विकसित कर रहे हैं।य् नोकिया ने संगीत की सुविध एवं विभ्िान्न प्रकार के कायर् करने वाले भागों की व्यवस्था करने वाली लाउड आइर् ;स्वनक म्लमद्ध एवं ळच्ै की सुविध देने वाली गेट 5 ;ळंजम 5द्ध वंफपनियों को खरीद लिया है। यह अपने सवार्िाक उच्च श्रेणी के हैंडसेट को पफरवरी में बाशार में उतारने के लिए तैयार है जिसमें 5 मेगा पिक्सेल वैफमरा लगा है तथा जीपीएस की क्षमता लिए है जो आइर् पोड की गुणवत्ता वाले संगीत के अतिरिक्त है। तनेजा का कहना है, फ्महंगे हैंडसेट में एक ही बहुत वुफछ तथा कइर् करने की मांग में वृि हो रही है। छ शृंखला इस मांगों को पूरा करने की कोश्िाश करेगी।य् नोकिया का मानना है कि नइर् मंचीय रणनीति जिसमें एक ही मंच से विभ्िान्न प्रकार के हैंडसैटों का अवतरण किया जा रहा है जैसेकि छ शृंखला एक सम्मान एवं शैली का प्रतीक बन जाएगा। जिससे संख्या में वृि होगी। ड्डोत - ूूूण्मबवदवउपबजपउमेण्पदकपंजपउमेण्बवउ प्रश्न 1ण् उपयुर्क्त समाचार रिपोटर् के अनुसार उन चार बाशार खंडों की पहचान कीजिए जिन पर नोकिया ध्यान वेंफदि्रत करने जा रही है। 2ण् वंफपनी ने बाशार का वगीर्करण किस आधर पर किया है? 3ण् उत्पाद समूह के पुनः वगीर्करण से क्या अभ्िाप्राय है? उपयुर्क्त घटना को लेकर समझाइए। 4ण् उन बिंदुओं की पहचान कीजिए जिनकी विपणन प्रचार में प्रमुखता दी जा सकती है। 5ण् जैसा कि ऊपर घटना में दिया गया है मोबाइल पफोन के क्रय के समय प्रत्येक वगर्/खंड का उपभोक्ता किन - किन बातों को ध्यान में रखता है?

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