अध्िगम उद्देश्य इस अध्याय के अध्ययन के पश्चात् आप - ऽ उपभोक्ता संरक्षण के महत्त्व को बता सवेंफगेऋ ऽ भारत में उपभोक्ता संरक्षण के कानूनी ढाँचे का संक्षेप में वणर्न कर सवेंफगेऋ ऽ भारत में उपभोक्ता के अध्िकारों का वणर्न कर सवेंफगेऋ ऽ उपभोक्ता दायित्वों का उल्लेख कर सवेंफगेऋ ऽ उपभोक्ता संरक्षण की विध्ियों का संक्षेप में वणर्न कर सवेंफगेऋ ऽ उपभोक्ता के हितों के संरक्षण में उपभोक्ता संगठनों और गैर सरकारी संगठनों की भूमिका का वणर्न कर सवेंफगे। उपभोक्ता संरक्षण महाराष्ट्र के उपभोक्ता कमीशन ने कोका कोला पर एक लाख रुपए का जुमार्ना लगाया। महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता कमीशन ने अंतरार्ष्ट्रीय शीतल पेय निमार्ता, कोका कोला, इसके शीश्िायों में भरने वाले एवं वितरक को, उपभोक्ता को, जिसकी क्रय की गइर् बोतल में गंदगी पाइर् गइर्, एक लाख रुपया क्षतिपूतिर् के रूप में भुगतान का आदेश दिया। शंकर नगर क्षेत्रा का निवासी चंद्रशेखर पारदकर ने एक शीतल पेय की सील की गइर् बोतल के अंदर वुफछ गंदगी पाइर्। उसने नागपुर जिला उपभोक्ता श्िाकायत पफोरम में श्िाकायत की तथा क्षतिपूतिर् के रूप में चार लाख रुपए का दावा किया। उसने अपने घर के पास की एक दुकान से माजा, कोका कोला एवं स्प्राइट शीतल पेय के ब्रांड की प्रति दो बोतल के हिसाब से वुफल छः बोतल क्रय की। इस श्िाकायत के आधर पर जिला पफोरम ने कोका कोला इसके बोतल भरने वाले सुपीरियर डिंªक्स प्रा.लि. एवं वितरक बालाजी सेल्स को मानवीय उपभोग के लिए सवर्था अयोग्य पेय की आपूतिर् करने का दोषी पाया जिस पर उसने जो पैफसला दिया उसको राज्य उपभोक्ता कमीशन ने बनाए रखा। जिला पफोरम को सील हुइर् शीश्िायांे में वुफछ पदाथर् मिले जो मच्छर भगाने की टिकिया के टुकड़े थे। जब जनस्वास्थ्य अनुसंधनशाला में उनकी जाँच कराइर् गइर् तो पेय को मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाया गया। जिला पफोरम ने वंफपनी से कड़े शब्दों में कहा कि बहुराष्ट्रीय विशाल वंफपनियों को घटिया स्तर के उत्पादों के उत्पादन एवं विपणन की भारत जैसे गरीब देश में उसके शोषण के लिए खुली छूट नहीं दी जा सकती। उपयुर्क्त घटना उन अनेक समस्याओं में से एक है जिनका उपभोक्ता वस्तु एवं सेवाओं का क्रय कर उपयोग एवं उपभोग के समय सामना करते हैं। यह घटना उपभोक्ताओं को विव्रेफता के विभ्िान्न प्रकार से शोषण से संरक्षण प्रदान करने के लिए समुचित कानूनी संरक्षण प्रदान करने पर प्रकाश डालती है। क्या आपने कभी सोचा है कि यदि उपभोक्ताओं को संरक्षण प्रदान नहीं किया गया तो उनकी क्या दुदर्शा होगी? क्या आज व्यवसाय उपभोक्ता हितों की अनदेखी कर सकता है? उपभोक्ता संरक्षण अध्ययन का एक महत्त्वपूणर् क्षेत्रा बनकर उभरा जो उपभोक्ता एवं व्यवसाय दोनों के समान रूप से उपयोगी है। विषय प्रवेश स्वतंत्रा बाशार अथर्व्यवस्थाओं में ‘उपभोक्ता बादशाह होता है।’ पहले के वैफविट एम्पटर अथार्त् ‘वे्रफता स्वयं चैकन्ना रहे’ के सि(ांत का स्थान अब वैफविट वैंडिटर अथार्त् ‘विव्रेफता को सावधान रहना चाहिए’ ने ले लिया है। जैसे - जैसे प्रतियोगिता में वृि हो रही है एवं बिक्री तथा बाशार में हिस्सा बढ़ाने का प्रयत्न हो रहा है वैसे - वैसे निमार्ता एवं सेवा प्रदत्तकतार् दोषपूणर् एवं असुरक्ष्िात उत्पाद, मिलावट, झूठा एवं गुमराह करने वाला विज्ञापन, जमाखोरी, कालाबाशारी आदि चालाकी, शोषण एवं व्यापार के अनुचित तरीके अपनाने का लालच कर सकते हैं। इसका अथर् हुआ कि उपभोक्ता को असुरक्ष्िात उत्पादों से जो जोख्िाम हो सकती है, मिलावटी खाने के सामान से स्वास्थ्य खराब हो सकता है, गुमराह करने वाले विज्ञापन अथवा नकली उत्पादों के द्वारा धेखाध्ड़ी हो सकती है तथा विव्रेफताओं द्वारा अध्िक कीमत वसूलने, जमाखोरी अथवा कालाबाशारी आदि के कारण उँफची कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसीलिए उपभोक्ताओं को विव्रेफताओं के इन कायो± से पयार्प्त सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता है। आइए अब उपभोक्ता संरक्षण के महत्त्व पर चचार् करें उपभोक्ता संरक्षण का महत्त्व उपभोक्ता संरक्षण की कायर् सूची बहुत विस्तृत है। इसमें उपभोक्ताओं को उनके अध्िकार एवं उत्तरदायित्वों के संबंध् में श्िाक्ष्िात करना ही सम्िमलित नहीं है बल्िक उनकी श्िाकायतों के निवारण में सहायता प्रदान करना भी सम्िमलित है। इसके लिए उपभोक्ता के हितों को सुरक्षा के लिए केवल कानूनी व्यवस्था ही पयार्प्त नहीं है बल्िक आवश्यकता इसकी भी है कि उपभोक्ता अपने हितों की रक्षा एवं प्रवतर्न के लिए एकजुट हो जाएँ एवं उपभोक्ता समितियों का गठन करें। वैसे उपभोक्ता संरक्षण का व्यवसाय के लिए भी विशेष महत्त्व है। शीतल पेय में अशु(ता के लिए हजार्ना उपभोक्ताओं का दृष्िटकोण उपभोक्ताओं की दृष्िट से, उपभोक्ता संरक्षण के महत्त्व को निम्न बिंदुओं के आधर पर समझा जा सकता है - ;पद्ध उपभोक्ता की अज्ञानता - उपभोक्ताओं में व्यापक रूप से अपने अिाकारों की अज्ञानता एवं उनको प्राप्त सहायता को ध्यान में रखते हुए उनको इन सबके संबंध् में श्िाक्षा देना आवश्यक हो जाता है जिससे कि उनमें जागरुकता पैदा हो। ;पपद्ध असंगठित उपभोक्ता - उपभोक्ताओं को उपभोक्ता संगठन के रूप में संगठित हो जाना चाहिए जो उनके हितों का ध्यान रखेंगे। यद्यपि भारत में इस दिशा में कायर्रत उपभोक्ता संगठन हैं लेकिन जब तक यह संगठन उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने एवं उनके प्रवतर्न के लिए पयार्प्त सक्षम न हो जाएँ उन्हें संरक्षण की आवश्यकता है। ;पपपद्ध उपभोक्ताओं का चैतरपफा शोषण - उपभोक्ताओं का दोषपूणर् एवं असुरक्ष्िात वस्तुओं में मिलावट, झूठा एवं गुमराह करने वाला विज्ञापन, जमाखोरी, कालाबाशारी जैसे झूठे, शोषण करने वाले एवं अनुचित व्यापार व्यवहार के द्वारा शोषण किया जा सकता है। उपभोक्ताओं का विवे्रफताओं की इन गलत तरीकों के विरु( संरक्षण की आवश्यकता है। व्यवसाय की दृष्िट से व्यवसाय के उपभोक्ताओं के संरक्षण एवं उनकी पयार्प्त संतुष्िट पर जोर देने की आवश्यकता है। निम्न कारणों से इसका महत्त्व है - ;पद्ध व्यवसाय का दीघर् अवध्िक हित - आज का जागरूक व्यवसायी यह भली - भाँति समझता है कि उपभोक्ता की संतुष्िट दीघर् अवध्ि में उन्हीं के हित में है। ग्राहक यदि संतुष्ट है तो वह न केवल बार - बार माल खरीदेगा बल्िक संभावित ग्राहकों के लिए भी प्रतिपोषक का कायर् करेगा जिससे व्यवसाय के ग्राहकों की संख्या में वृि होगी। इसीलिए व्यावसायिक पफमो± को ग्राहक की संतुष्िट के द्वारा लम्बी अवध्ि में अध्िकतम लाभ प्राप्त करने का लक्ष्य सामने रखना चाहिए। ;पपद्ध व्यवसाय समाज के संसाध्नों का उपयोग करता है - व्यावसायिक संगठन उन संसाधनों का उपयोग करते हैं जिनपर समाज का अध्िकार है। इसीलिए ऐसे उत्पादों की आपूतिर् एवं उन सेवाओं को प्रदान करने का दायित्व है जो जनता के हित में है तथा जिससे जनता के विश्वास को ठेस नहीं पहुँचे। ;पपपद्ध सामाजिक उत्तरदायित्व - व्यवसाय का विभ्िान्न हिताथीर् समूहों के प्रति सामाजिक दायित्व है। व्यवसायिक संगठन ग्राहकों को माल की बिव्रफी कर एवं सेवाएँ प्रदान कर ध्न कमाता है। इस प्रकार से उपभोक्ता व्यवसाय में हित रखने वाले बहुत से समूहों में से एक महत्त्वपूणर् समूह है और दूसरे हित रखने वाले समूहों के समान इनके हितों का भी ध्यान रखना आवश्यक है। ;पअद्ध नैतिक औचित्य - उपभोक्ता के हितों का ध्यान रखना तथा उनके किसी भी प्रकार का शोषण न करना व्यवसाय का नैतिक कतर्व्य है। इसीलिए व्यवसाय को दोषपूणर् एवं असुरक्ष्िात उत्पाद, मिलावट, झूठे एवं गुमराह करने वाले विज्ञापन, जामखोरी, कालाबाशारी आदि जैसे झूठे, शोषण करने वाले एवं अनुचित व्यापार ियाओं से बचना चाहिए। ;अद्ध सरकारी हस्तक्षेप - यदि कोइर् व्यवसाय शोषण करने वाला व्यापार कर रहा है तो वह सरकारी हस्तक्षेप एवं कायर्वाही को आमंत्राण दे रहा है। इससे वंफपनी की छवि को हानि पहँुचती है और छवि पर ध्ब्बा लगता है। इसीलिए उचित यही रहेगा कि व्यावसायिक संगठन स्वेच्छापूवर्क ग्राहकों की आवश्यकताओं एवं हितों का भली - भाँति ध्यान रखने वाला कायर् करें। उपयुर्क्त बातों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उपभोक्ताओं को संरक्षण देने वाले कइर् कानून बनाए हैं। अब हम इनमें से वुफछ कानूनों पर चचार् करेंगे। उपभोक्ताओं को कानूनी संरक्षण भारत के कानूनी ढाँचे में ऐसे कइर् कानून हैं जो उपभोक्ताओं को संरक्षण प्रदान करते हैं। इनमें से वुफछ का वणर्न नीचे किया गया है। 1. उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम, 1986 - उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम, 1986 उपभोक्ता के हितों की सुरक्षा करता है एवं उनका प्रवतर्न करता है। यह अिानियम उपभोक्ताओं को दोषपूणर् वस्तुओं, घटिया स्तर की सेवाओं, अनुचित व्यापार ियाओं तथा अन्य प्रकार के शोषण के विरु( सुरक्षा प्रदान करता है। इस अध्िनियम के अंतर्गत तीन स्तरीय तंत्रा की स्थापना का प्रवधान है जिसमें जिला पफोरम, राज्य कमीशन एवं राष्ट्रीय कमीशन सम्िमलित हैं। इसमें प्रत्येक जिला, राज्य एवं सवोर्च्च स्तर पर उपभोक्ता संरक्षण परिषदों के गठन का प्रावधन है। 2. प्रं्रसविदा अध्िनियम, 1982 - यह अध्िनियम शते± निधर्रित करता है जिनके अनुसार किसी अनुबंध् के पक्षों में जो वायदे किए हैं उनको पूरा करने के लिए वे बाध्य होंगे। यह अध्िनियम अनुबंध् को तोड़ने पर इससे जुड़े पक्षों को उपलब्ध् प्रतिकार का निधर्रण करता है। 3. वस्तु विक्रय अध्िनियम, 1930 - यह अिानियम व्रेफताओं को उस स्िथति में वुफछ संरक्षण प्रदान करता है जबकि उन्होंने जो वस्तुएँ खरीदी हैं वह घोष्िात अथवा गभ्िार्त शतर् अथवा आश्वासन के अनुरूप न हों। 4. आवश्यक वस्तु अध्िनियम, 1955 - यह अिानियम आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूतिर् एवं वितरण पर नियंत्राण, इनके मूल्यों की वृि की प्रवृति को रोकने तथा इनके समान वितरण को सुनिश्िचत करता है। इस कानून में अनुचित लाभ कमाने वाले जमाखोर एवं कालाबाशारियों की समाज विरोधी कायर्वाहियों के विरु( कायर्वाही करने का भी प्रावधन है। 5. वृफष्िा उत्पाद ;श्रेणीकरण एवं चिÉांकनद्ध अध्िनियम, 1937 - यह अध्िनियम वृफष्िा उत्पादों एवं पशुओं के लिए उत्पादों की श्रेण्िायों के मानक निधर्रित करता है। यह मानकांे के उपयोग को शासित करने के लिए शते± तय करता है तथा वृफष्िा उत्पादों के श्रेणीकरण, चिÉांकन एवं पैकिंग के लिए प्रिया भी तय करता है। इस अध्िनियम के अंतगर्त जो गुणवत्ता का चिÉ निधार्रित किया है उसे ‘एगमावर्फ’ कहते हैं जो कि वृफष्िा विपणन का एक संक्ष्िाप्त नाम है। 6. खाद्य मिलावट अवरोध् अध्िनियम, 1954 - यह अध्िनियम खाद्य पदाथो± में मिलावट पर अंवुफश लगाता है एवं जनसाधरण के स्वास्थ्य के हित में शु(ता सुनिश्िचत करता है। 7. माप तौल मानक अध्िनियम, 1976 - इस अध्िनियम की धराएँ उन वस्तुओं पर लागू नहीं होती हैं जिनका वशन, माप, संख्यानुसार विक्रय अथवा वितरण किया जाता है। यह उपभोक्ताओं को कम तौलने अथवा मापने के अनुचित आचरण के विरु( संरक्षण प्रदान करता है। 8. ट्रेड मावर्फ अध्िनियम, 1999 - इस अिानियम ने व्यापार एवं वाण्िाज्य चिÉ अध्िनियम 1958 को समाप्त कर उसका स्थान ले लिया है। यह अध्िनियम उत्पादों पर धेखा ध्ड़ी वाले चिÉों के उपयोग पर रोक लगाता है। इस प्रकार से उपभोक्ताओं को ऐसे उत्पादों से संरक्षण प्रदान करता है। 9. प्रतियोगिता अध्िनियम, 2002 - यह अिानियम एकाध्िकार एवं प्रतिरोध् व्यापार व्यवहार अिानियम, 1969 को भंग कर उसका स्थानापन्न करता है। यह अध्िनियम व्यावसायिक इकाइयों द्वारा बाशार में प्रतियोगिता में अड़चनें डालने वाले कायर् करने पर उपभोक्ताओं को संरक्षण प्रदान करता है। 10. भारतीय मानक ब्यूरो अध्िनियम, 1986 - भारतीय मानक ब्यूरो की स्थापना इस अिानियम के अंतगर्त की गइर् है। ब्यूरो की दो मुख्य ियाएँ हैं - वस्तुओं के लिए गुणवत्ता मानक निश्िचत करना एवं बी.आइर्.एस. प्रमाणीकरण योजना के माध्यम से उनका प्रमाणीकरण करना। निमार्ता अपने उत्पादों पर आइर्.एस.आइर्. ;प्ैप्द्ध चिÉ तभी प्रयोग कर सकते हैं जबकि यह सुनिश्िचत कर लिया जाए कि वस्तुएँ निधर्रित गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप हैं। ब्यूरो ने एक श्िाकायत प्रकोष्ठ की भी स्थापना की है जहाँ उपभोक्ता उन वस्तुओं की गुणवत्ता की श्िाकायत कर सकते हैं जिन पर आइर्.एस.आइर् ;प्ैप्द्ध चिÉ अंकित है। इन सभी कानूनों में सवार्ध्िक महत्त्वपूणर् उपभोक्ता संरक्षण अिानियम है जिसमें उपभोक्ता के छः अिाकारों का प्रावधन है तथा उपभोक्ताओं को क्रय की गइर् वस्तुओं एवं लाभ उठाइर् गइर् सेवाओं में यदि कोइर् कमी है तो उसकी श्िाकायत को दूर करने में सहायता करता है। उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम, 1986 यह अध्िनियम उपभोक्ता के हितों को उनकी श्िाकायतों के शीघ्र एवं बिना किसी व्यय के निवारण कर संरक्षण एवं प्रवतर्न की व्यवस्था करता है। अध्िनियम का क्षेत्रा बहुत व्यापक है। ये व्यावसायिक इकाइयाँ बड़ी हैं अथवा छोटी, निजी क्षेत्रा में हैं अथवा सावर्जनिक क्षेत्रा में अथवा सहकारी क्षेत्रा में, उत्पादक हैं अथवा व्यापारी तथा वस्तुओं की आपूतिर् करती हैं अथवा सेवाएँ प्रदान करती हैं यह सभी पर लागूू होता है। यह अध्िनियम उपभोक्ताओं को शक्ित प्रदान करने एवं उनके हितों की रक्षाथर् वुफछ अध्िकार प्रदान करता है। उपभोक्ताओं के अध्िकार उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम में उपभोक्ताओं के लिए छः अध्िकारों का प्रावधन है इस अध्िनियम के अंतगर्त स्थापित उपभोक्ता संरक्षण परिषदों की स्थापना उपभोक्ताओं के विभ्िान्न अध्िकारों के प्रवतर्न एवं संरक्षण के लिए की जाती हैं। यह अध्िकार निम्नलिख्िात हैं - 1. सुरक्षा का अध्िकार - उपभोक्ता को उन वस्तु एवं सेवाओं के विरु( संरक्षण का अिाकार है जो उसके जीवन एवं स्वास्थ्य के लिए खतरा हंै। उदाहरण के लिए जो बिजली उपकरण अवस्तरीय उत्पादों से बनाए जाते हैं अथवा जो सुरक्षा के मानकों के अनुरूप नहीं हैं, गंभीर रूप से चोट पहुँचा सकते हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को श्िाक्ष्िात किया जाता है कि वह आइर्.एस.आइर्;प्ैप्द्ध माकार् बिजली उपकरणों का ही प्रयोग करें क्योंकि इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि यह उत्पाद गुणवत्ता के मानदंडों को पूरा कर रहा है। 2. सूचना का अध्िकार - उपभोक्ता को उस वस्तु के संबंध् में पूरा जानकारी प्राप्त करने का अध्िकार है जिसका वह क्रय करना चाहता है जिसमें उसके घटक, निमार्ण तिथ्िा मूल्य, मात्रा, उपयोग के लिए दिशानिदेर्श आदि सम्िमलित हैं। उपभोक्ता संरक्षण 397 इसी कारण भारत में कानूनन निमार्ताओं को सभी सूचनाएँ उत्पाद के पैकेज एवं लेबल पर देनी होती हैं। 3. चयन का अध्िकार - उपभोक्ता को प्रतियोगी मूल्य पर उपलब्ध् विभ्िान्न उत्पादों में से चयन का अध्िकार है इसका अथर् है कि विपणनकतार्ओं को अलग - अलग गुणवत्ता, ब्रांड मूल्य एवं आकार की वस्तुओं को बाशार में बिक्री हेतु लाना चाहिए तथा उपभोक्ता को इनमें से अपनी पसंद की वस्तु के चयन का अध्िकार होना चाहिए। 4. श्िाकायत का अध्िकार - उपभोक्ता यदि वस्तु एवं सेवा से संतुष्ट नहीं है तो उसे श्िाकायत दजर् कराने तथा उसकी सुनवाइर् का अध्िकार है। इसी के कारण कइर् समझदार व्यावसायिक इकाइयों ने अपने स्वयं के श्िाकायत एवं उपभोक्ता सेवा कक्ष की स्थापना कर ली है। कइर् उपभोक्ता संगठन भी इस दिशा में कायर् कर रहे हैं तथा उपभोक्ताओं को उनकी श्िाकायतें दूर करने में सहायता कर रहे हैं। 5. क्षतिपूतिर् का अध्िकार - यदि वस्तु अथवा सेवा अपेक्षा के अनुरूप नहीं निकलती तो उपभोक्ता को उससे मुक्ित पाने का अध्िकार है। उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम में उपभोक्ता को कइर् प्रकार से क्षतिपूतिर् का प्रावधन है जैसे वस्तु को बदल देना, उत्पाद के दोषों को दूर करना, हानि अथवा क्षति पहुँचने पर उसकी पूतिर् करना आदि। 6. उपभोक्ता श्िाक्षा का अध्िकार - उपभोक्ता को पूरे जीवन ज्ञान प्राप्ित एवं पूरी सूचना प्राप्त करने का अध्िकार है उसे इसका ज्ञान होना चाहिए कि यदि वस्तु अथवा सेवा आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं है तो उसकी किस प्रकार से क्षतिपूतिर् की जाएगी तथा उसके क्या अध्िकार होंगे? कइर् बोतलबंद पानी की अिाक कीमत वसूलने पर जुमार्ना पूवीर् दिल्ली के एक रेस्टोरेंट के मालिक को एक ग्राहक को 5,000 रुपए जुमार्ने के रूप में भुगतान करने का निदेर्श दिया गया है। इस ग्राहक से बोतलबंद पानी के 34 रुपए वसूले गये जबकि इसकी अध्िकतम पुफटकर कीमत 12 रुपए थी। यह जुमार्ना ऐसे समय पर लगाया गया है जबकि उपभोक्ता अदालतें उन दुकानदारों की खबर ले रही हैं जो निधर्रित मूल्य से अध्िक वसूल कर रहे हैं। हाल ही के एक अहम पैफसले में राज्य उपभोक्ता कमीशन ने इसी प्रकार के मामले में सिनेमा घरों पर 50,000 रुपए का जुमार्ना लगाया। पूवीर् जिला उपभोक्ता पफोरम के अध्यक्ष ए.के.जैन. तथा सदस्य मीना सक्सेना एवं मुकेश मिश्रा ने मालिक की क्षतिपूतिर् का यह पैफसला दिया। इसमें कड़कड़डूमा काॅम्पलैक्स में शायका बाशार को निधर्रित कीमत से अध्िक कीमत वसूलने पर क्षतिपूतिर् का निदेर्श दिया । पफोरम ने कहा फ्वतर्मान श्िाकायत निरूलाश बनाम अंकित जैन के मामले में राज्य उपभोक्ता कमीशन के पैफसले की सीमा में आता है। जिसमें कहा गया है कि कोइर् भी व्यापारी अथवा सेवा प्रदान करने वाला किसी भी पैक की गइर् वस्तु पर छपे हुए अिाकतम पुफटकर मूल्य ;डत्च्द्ध से अध्िक वसूल नहीं कर सकता यदि वस्तु पैक की हुइर् ही बेची गइर् है।य् रेस्टोरेंट के मालिक को इस गलत आचरण को समाप्त करने का आदेश देते हुए पफोरम ने कहा कि पैक की हुइर् वस्तु का ;डत्च्द्ध एम.आर.पी. से अध्िक राश्िा वसूलना देश के कानून के विरु( है। गोयल ने पिछले वषर् नवम्बर में एक रेस्टोरंेट से एक्वापिफना बोतलबंद पानी खरीदा जिसका उसे 34 रुपए जिसमें चार रुपए वैट ;ट।ज्द्ध के सम्िमलित थे भुगतान करने को कहा गया जबकि बोतल पर ;डत्च्द्ध 12 रुपए छपा हुआथा। ड्डोत - ूूूण्बवतमबमदजतमण्वतह उपभोक्ता संगठन एवं वुफछ समझदार व्यवसाय इस संबंध् में उपभोक्ताओं को श्िाक्ष्िात करने में सिय रूप से कायर् कर रहे हैं। उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम उपभोक्ताओं को यह अध्िकार प्रदान कर उन्हें बेइर्मान/चालाक, शोषणकतार् एवं अनुचित व्यापार आचरण करने वाले विवे्रफताओं से लड़ने के लिए सशक्त बनाता है। प्रदशर् में दिखाया गया है कि किस प्रकार से एक जलपान गृह के स्वामी पर एक पानी की बोतल की अध्िक कीमत वसूलने पर जुमार्ना किया गया था। उपभोक्ता अध्िकार, उपभोक्ता संरक्षण के उद्देश्य को प्राप्त करने में स्वयं में प्रभावी सि( नहीं हो सकते। उपभोक्ता संरक्षण तभी हो सकता है जबकि उपभोक्ता अपने दायित्वों को समझें। उपभोक्ता के दायित्व एक उपभोक्ता को वस्तु एवं सेवाओं का क्रय, उपयोग एवं उपभोग करते समय निम्न उत्तदायित्वों को ध्यान में रखना चाहिए - ;पद्ध बाशार में उपलब्ध् विभ्िान्न वस्तु एवं सेवाओं के संबंध् में जानकारी रखें जिससे कि बुिमत्तापूणर् चुनाव किया जा सके। ;पपद्ध केवल मानक वस्तुओं को ही खरीदें क्योंकि यह गुणवत्ता का विश्वास दिलाता है। इसीलिए विभ्िान्न उत्पादों की गुणवत्ता बताने वाले चिÉ बिजली के सामान पर ;प्ैप्द्ध चिÉ, खाद्य उत्पादों पर ;थ्च्व्द्ध तथा आभूषणों पर ;भ्ंससउंताद्ध हाॅलमावर्फ देखें। ;पपपद्ध वस्तु एवं सेवाओं से जुड़ी जोख्िामों के संबंध् में जाने, निमार्ता के दिशा निदेर्शो± का पालन करें तथा उत्पादों का ध्यान से उपयोग करें। ;पअद्ध मूल्य, शु( वशन, उत्पादन एवं उपयोग करने योग्य अंतिम तिथ्िा की सूचना के लिए लेबल को ध्यान से पढे़ं। ;अद्ध यह सुनिश्िचत करने के लिए कि आपके साथ सही व्यवहार हो अपनी दृढ़ता का परिचय दें। ;अपद्ध लेन - देन में इर्मानदारी बरतें। केवल कानून सम्मत वस्तु एवं सेवाओं को ही खरीदें तथा कालाबाशारी, जमाखोरी जैसे अनुचित आचरणों को निरुत्साहित करें। ;अपपद्ध वस्तु एवं सेवाओं के खरीदने पर नकद प्राप्ित रसीद माँगे। ;अपपपद्ध यदि क्रय की गइर् वस्तुओं अथवा सेवाओं की गुणवत्ता में कमी है तो उचित उपभोक्ता पफोरम में श्िाकायत दजर् कराएँ। ;पगद्ध उपभोक्ता परिषद् का गठन करें जो उपभोक्ता श्िाक्षण उनके हितों को सुरक्ष्िात रखने में सिय रूप से भाग लेंगे। ;गद्ध पयार्वरण का ध्यान रखें। वूफड़ा कचरा पैफलाने एवं प्रदूषण पैफलाने से बचें। उपभोक्ता की अपने अध्िकार एवं दायित्वों के प्रति जागरूकता उन कइर् रास्तों में से एक रास्ता है जिसके द्वारा उपभोक्ता संरक्षण संभव है। वैसे इस उद्देश्य की प्राप्ित के दूसरे मागर् भी हैं। उपभोक्ता संरक्षण के तरीके एवं साध्न ऐसी कइर् विध्ियाँ हैं। जिनके द्वारा उपभोक्ता संरक्षण के उद्देश्य को प्राप्त किया जा सकता है। 1. व्यवसाय द्वारा स्वयं नियमन - विकसित व्यावसायिक इकाइयाँ यह समझती हैं कि उपभोक्ताओं को भली - भाँति सेवा प्रदान करना उनके अपने दीघर्कालीन हित में है। सामाजिक उत्तरदायित्व को मानने वाली इकाइयाँ अपने ग्राहकों से लेन - देन करते समय नैतिक मानक एवं व्यवहार का पालन करती हैं। कइर् पफमो± ने अपने ग्राहक की श्िाकायत एवं समस्याओं के समाधान के लिए अपनी स्वयं की उपभोक्ता सेवा एवं श्िाकायत कक्षों की स्थापना की हैं। 2. व्यावसायिक संगठन - व्यापार, वाण्िाज्य एवं व्यवसाय संगठनों जैसे भारतीय वाण्िाज्य एवं औद्योगिक महासंघ ;थ्प्ब्ब्प्द्ध एवं भारतीय उद्योगों का संगठन ;ब्प्प्द्ध ने अपनी आचार संहिता बनायी हुइर् है जिनमें अपने सदस्यों के लिए दिशानिदेर्श होते हैं कि वह अपने ग्राहकों से वैफसे व्यवहार करें। उपभोक्ता जागरूकता 3. उपभोक्ता जागरूकता - एक उपभोक्ता जो अपने अध्िकार एवं उपलब्ध् राहत के संबंध में भली - भाँति जानता है वह इस स्िथति में होगा कि किसी भी प्रकार के अनुचित आचरण अथवा आवांच्छनीय रूप से शोषण के विरु( अपनी आवाज उठा सके। इसके साथ - साथ यदि वह अपने दायित्वों को समझता है तो इससे वह अपने हितों की रक्षा कर सकेगा। 4. उपभोक्ता संगठन - उपभोक्ता संगठन उपभोक्ताओं को उनके अध्िकारों के संबंध् में श्िाक्ष्िात करने तथा उन्हें संरक्षण प्रदान करने में महत्त्वपूणर् भूमिका निभाते हैं। यह संगठन व्यावसायिक इकाइयों को अनुचित आचरण एवं उपभोक्ताओं के शोषण से दूर रहने के लिए बाध्य कर सकते हैं। 5. सरकार - सरकार विभ्िान्न कानून बना कर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा कर सकती हैं। भारत के कानूनी ढाँचे में ऐसे कइर् कानून हैं जो उपभोक्ताओं को संरक्षण प्रदान करते हैं। इनमें सबसे महत्त्वपूणर् कानून उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम 1986 है। इस कानून में उपभोक्ताओं की श्िाकायतों को दूर करने के लिए तीन स्तरीय तंत्रा का प्रावधन है जो इस प्रकार हैं - जिला स्तर, राज्य स्तर एवं राष्ट्रीय स्तर। इन तीन स्तरीय तंत्रा के अंतगर्त श्िाकायत निवारण प(ति का नीचे वणर्न किया गया है। उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम के अंतगर्त श्िाकायत निवारण एजेंसियाँ उपभोक्ताओं की श्िाकायतों के निवारण के लिए कायर्वाही करने के लिए उपभोक्ता संरक्षण अिानियम के अनुसार जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर तीन स्तरीय तंत्रा की स्थापना की व्यवस्था है जिन्हें 401 क्रमशः जिला उपभोक्ता विवाद निवारण पफोरम, राज्य उपभोक्ता निवारण कमीशन एवं राष्ट्रीय उपभोक्ता निवारण कमीशन कहते हैं। इन्हें संक्षेप में जिला पफोरम, राज्य कमीशन कहते हैं। इन्हें संक्षेप में जिला पफोरम, राज्य कमीशन एवं राष्ट्रीय कमीशन के संक्ष्िाप्त नामों से पुकारा जाता है। राष्ट्रीय कमीशन की स्थापना वेंफद्रीय सरकार करती है, तो राज्य कमीशन एवं जिला पफोरम की स्थापना प्रत्येक राज्य एवं जिलों में संबंध्ित राज्य सरकार द्वारा की जाती है। इन निदान एजेंसियों की संरचना एवं कायर्प्रणाली के अध्ययन से पहले आइए देखें कि उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम ने उपभोक्ता की क्या परिभाषा दी है तथा कौन इस अध्िनियम के अंतगर्त श्िाकायत दजर् करा सकता है। उपभोक्ता - सामान्यतः एक उपभोक्ता का अथर् उस व्यक्ित से लगाया जाता है जो वस्तुओं का उपयोग करता है अथवा उपभोग करता है या पिफर सेवाओं का लाभ उठाता है। उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम के अनुसार उपभोक्ता को इस प्रकार से परिभाष्िात किया गया है - ;कद्ध वह व्यक्ित जो प्रतिपफल के बदले कोइर् माल खरीदता है जिसका भुगतान कर दिया हो अथवा भुगतान का वचन दिया हो अथवा उसका आंश्िाक भुगतान कर दिया हो तथा आंश्िाक भुगतान का वचन दिया हो अथवा उसका भुगतान अस्थगित या विलंबित भुगतान विध्ि के अनुसार करने का वचन दिया हो। ;खद्ध वह व्यक्ित जो प्रतिपफल के बदले किन्हीं सेवाओं को भाडे़ पर प्राप्त करता है या उपयोग करता है तथा जिसका भुगतान कर जिला पफोरम उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम के अंतगर्त विवाद निवारण एजेंसियाँ दिया हो अथवा करने का वचन दिया हो अथवा उसका आंश्िाक भुगतान कर दिया हो तथा आंश्िाक भुगतान का वचन दिया हो अथवा उसका भुगतान स्थगित या विलंबित विध्ि के अनुसार करने का वचन दिया हो। इसमें ऐसी सेवाओं से लाभान्िवत होने वाला व्यक्ित भी सम्िमलित है, जिसने पहले वाले व्यक्ित की अनुमति से सेवाओं का उपयोग किया है लेकिन इसमें वह व्यक्ित सम्िमलित नहीं है जो इन सेवाओं को किसी व्यापार के उद्देश्य से प्राप्त करता है। श्िाकायत कौन कर सकता है - किसी भी उपयुक्त उपभोक्ता पफोरम के समक्ष श्िाकायत निम्न के द्वारा की जा सकती है - ;पद्ध कोइर् भी उपभोक्ताऋ ;पपद्ध कोइर् पंजीवृफत उपभोक्ताऋ ;पपपद्ध वेंफद्रीय सरकार अथवा कोइर् भी राज्य सरकारऋ ;पअद्ध उन अनेक समान हित रखने वाले उपभोक्ताओं की ओर से कोइर् एक अथवा एक से अध्िक उपभोक्ता एवं ;अद्ध किसी मृतक उपभोक्ता के कानूनी उत्तराध्िकारी अथवा प्रतिनिध्ि। आइए अब देखें कि उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम के अंतगर्त तीन स्तरीय व्यवस्था किस प्रकार से उपभोक्ताओं की श्िाकायतों का निवारण करती है। 1. जिला पफोरम - जिला पफोरम में एक प्रधन तथा दो दूसरे सदस्य होते हैं जिनमें से एक महिला होनी चाहिए। इन सभी की नियुक्ित संबंध्ित राज्य सरकार करती है। श्िाकायत किसी भी उपयुक्त जिला पफोरम के पास की जा सकती है यदि वस्तु एवं सेवाओं का मूल्य क्षतिपूतिर् के दावे की राश्िा सहित 20 लाख रुपए से अध्िक नहीं है। श्िाकायत प्राप्ित के पश्चात् जिला पफोरम श्िाकायत को उस पक्ष को भेजेगा जिसके विरु( श्िाकायत की गइर् है। यदि आवश्यक हुआ तो वस्तु अथवा उसके नमूने को परीक्षण हेतु प्रयोगशाला को भेजा जायेगा। जिला पफोरम प्रयोगशाला से प्राप्त जाँच रिपोटर् को ध्यान में रखकर तथा संबंध् विरोध्ी पक्षकार का तवर्फ सुनकर आदेश पारित करेगा। यदि पीडि़त पक्षकार जिला पफोरम के आदेश से संतुष्ट नहीं है तो वह आदेश पारित होने के पश्चात् तीस दिन के भीतर राज्य कमीशन के समक्ष अपील कर सकता है। 2. राज्य कमीशन - प्रत्येक राज्य स्तरीय आयोग में एक प्रधन तथा कम - से - कम दो सदस्य जिनमें एक महिला होनी चाहिए। इनकी नियुक्ित संबं( राज्य सरकार करती है। उपयुक्त राज्य कमीशन को श्िाकायत की जा सकती है यदि वस्तु एवं सेवाओं का मूल्य क्षतिपूतिर् के दावे की राश्िा सहित 20 लाख रुपए से अध्िक हो लेकिन 1 करोड़ से अध्िक न हो। जिला पफोरम के आदेश के विरु( अपील भी राज्य कमीशन के समक्ष की जा सकती है। श्िाकायत प्राप्ित के पश्चात् राज्य स्तरीय आयोग श्िाकायत को उस पक्षकार को भेजेगी जिसके विरु( श्िाकायत की गइर् है। यदि आवश्यक हुआ तो वस्तु अथवा उसका नमूना प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु भेजा जाएगा। राज्य कमीशन प्रयोगशाला की जाँच रिपोटर् का अध्ययन कर तथा विरोध्ी पक्षकार का तवर्फ सुनकर आदेश पारित करेगा। यदि पीडि़त पक्ष राज्य कमीशन के आदेश से संतुष्ट नहीं है तो वह आदेश के पश्चात् 30 दिन के भीतर राष्ट्रीय कमीशन के समक्ष अपील कर सकता है। 3. राष्ट्रीय कमीशन - राष्ट्रीय कमीशन का एक प्रधन होता है तथा कम से कम चार दूसरे सदस्य होते हैं जिनमें से एक महिला होनी चाहिए। इनकी नियुक्ित वेंफद्रीय सरकार करती है। राष्ट्रीय कमीशन में श्िाकायत तभी की जा सकती है जबकि वस्तु एवं सेवाओं का मूल्य क्षतिपूतिर् के दावे की राश्िा सहित 1 करोड़ रुपए से अध्िक हो। राष्ट्रीय कमीशन के समक्ष राज्य कमीशन के आदेश के विरु( भी अपील की जा सकती है। राष्ट्रीय कमीशन श्िाकायत को विरोध्ी पक्षकार को भेजेगा। यदि आवश्यक हुआ तो वस्तु अथवा उसके नमूने को प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु भेजा जाएगा। प्रयोगशाला की जाँच रिपोटर् का अध्ययन तथा विरोध्ी पक्षकार का तवर्फ सुनकर पारित करेगा। राष्ट्रीय कमीशन द्वारा पारित आदेश उसके मूल अिाकार क्षेत्रा में आता है तथा इसकी अपील उच्चतम न्यायालय में की जा सकती है। इसका अथर् हुआ कि केवल तब ही अपील भारत के उच्चतम न्यायालय में की जा सकती है जबकि वस्तु एवं सेवाओं का मूल्य क्षतिपूतिर् के दावे की राश्िा को मिलाकर 1 करोड़ रुपए से अध्िक हो तथा पीडि़त पक्षकार राष्ट्रीय कमीशन के आदेश से संतुष्ट नहीं हो। जिस मामले पर पैफसला जिला पफोरम ने लिया है उसकी अपील राज्य स्तरीय आयोग के समक्ष की जा सकती है उसके पश्चात् राज्य आयोग के आदेश को राष्ट्रीय आयोग के समक्ष चुनौती दी जा सकती है लेकिन उसके पश्चात् कोइर् विकल्प नहीं है। उपलब्ध् राहत उपभोक्ता अदालत यदि श्िाकायत की यथाथर्ता से संतुष्ट है तो यह विरोध्ी पक्ष को निम्न में से एक अथवा एक से अध्िक निदेर्श दे सकती है। ;पद्ध वस्तु के दोष अथवा सेवा में कमी को दूर करना। ;पपद्ध दोषपूणर् वस्तुओं के स्थान पर दोषमुक्त नयी वस्तु देना। ;पपपद्ध वस्तु अथवा सेवाओं के लिए किए गए भुगतान की वापसी करना। वुफछ पैफसले उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम के अंतगर्त एक उपभोक्ता किसी भी दोषपूणर् वस्तु की आपूतिर् करने पर अथवा अपयार्प्त सेवा प्रदान करने पर निमार्ता अथवा विवे्रफता के विरु( श्िाकायत कर सकता है। जोस पिफलिप मैम्पीलिल बनाम सवर्श्री प्रीमियर आॅटोमोबाइल्स लि. एवं अन्य में अपीलकतार् ;उपभोक्ताद्ध ने एक डीजल कार खरीदी थी। जो दोषपूणर् पायी गइर्। प्रतिवादी ;निमार्ता एवं व्यापारीद्ध ने कार के दोषों को दूर नहीं किया। जिला पफोरम द्वारा नियुक्त कमीशनर को कार में अनेक दोष मिले। परिणामस्वरूप जिला पफोरम ने बिना लागत के कार की मरम्मत करने एवं इंजन बदलने का आदेश दिया। राज्य आयोग ने इंजन बदलने के निदेर्श को छोड़कर शेष आदेश को बरकरार रखा। शश्िाकांत वृफषनयी डोल बनाम श्िाकशन प्रसारक मंडली में राष्ट्रीय आयोग ने माना कि तरणताल में सुरक्षा के मूल उपाय का न होना सेवा की अपयार्प्तता है। एक विद्यालय का तरणताल था तथा जनसाधरण उसका उपयोग वुफछ पफीस देकर कर सकते थे। विद्यालय ने शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन प्रश्िाक्षण श्िावरों का आयोजन किया ;लड़कों को तैराकी का प्रश्िाक्षण देने के लिएद्ध तथा इसके लिए एक प्रश्िाक्षक की भी व्यवस्था की। दोषारोपण यह था कि प्रश्िाक्षक की लापरवाही से लड़का डूब गया तथा उसकी मृत्यु हो गइर्। विद्यालय ने इसका उत्तरदायित्व लेने से इंकार कर दिया। प्रश्िाक्षक का कहना था कि युवा लड़कों को तैराकी का प्रश्िाक्षण देने का उसको पयार्प्त अनुभव था। मृतक के डूबने पर प्रश्िाक्षक ने उसे तुरंत पानी से निकाला, उसके पेट से पानी निकाला तथा उसे वृफत्रिाम संास दी और उसके पश्चात् उसे डाॅक्टर के पास ले गया। डाॅक्टर ने उसे नजदीक के अस्पताल ले जाने के लिए सलाह दी जहाँ लड़के की मृत्यु हो गइर्। राज्य आयोग ने विद्यालय एवं प्रश्िाक्षक को मृतक को सेवा प्रदान करने में कमी के लिए दोषी माना। अपील करने पर राष्ट्रीय आयोग ने आदेश को बरकरार रखा। ड्डोत - ूूूण्पदकपंपदविसपदमण्बवउ ;पअद्ध विरोध्ी पक्ष की लापरवाही के कारण उपभोक्ता को होने वाली हानि अथवा चोट के लिए क्षतिपूतिर् के रूप में उचित राश्िा का भुगतान करना। ;अद्ध उचित परिस्िथतियों में दंडस्वरूप क्षति का भुगतान करना। ;अपद्ध अनुचित या प्रतिबंध्ित व्यापारिक ियाओं को रोकना तथा उनकी पुनरावृिा न होने देना। ;अपपद्ध खतरनाक वस्तुओं की बिक्री न करना। ;अपपपद्ध विक्रय के लिए रखी गइर् हानिकारक वस्तुओं को वापस लेना। ;पगद्ध खतरनाक वस्तुओं का उत्पादन नहीं करना तथा हानिकारक सेवाएँ प्रदान करने से बचना। ;गद्ध कोइर् राश्िा ;जो कि दोषपूणर् वस्तु अथवा अपयार्प्त सेवाओं के मूल्य के 5 प्रतिशत से कम न होद्ध का भुगतान करना जो कि उपभोक्ता कल्याण कोष अथवा अन्य किसी संगठन/व्यक्ित के पास जमा की जाए जिसका प्रयोग निधर्रित रूप में हो। ;गपद्ध गुमराह करने वाले विज्ञापन के प्रभाव को समाप्त करने के लिए संशोिात विज्ञापन जारी करना। ब्म्त्ै ने रेलवे के विरु( मुकदमा जीता उपभोक्ता श्िाक्षण एवं अनुसंधन समिति ;ब्म्त्ैद्ध, अहमदाबाद एवं एक वरिष्ठ युगल द्वारा दायर मुकदमें मंे उपभोक्ता विवाद निवारण पफोरम, अहमदाबाद शहर ने रेलवे को लापरवाही के लिए उत्तरदायी ठहराया तथा युगल को 2,000 रुपए का भुगतान मानसिक कष्ट के लिए एवं 3,000 रुपए का भुगतान लागत के लिए करने का निदेर्श दिया। मनमोहन सिंह एवं उनकी पत्नी कमलेश ने 2 दिसंबर 2001 को नइर् दिल्ली से कानपुर सेंट्रल शताब्दी एक्सप्रेस की यात्रा के लिए अहमदाबाद से रेलवे यात्रा एवं आरक्षण टिकट खरीदी। टिकट पर विस्तृत वणर्न जैसे कोच संख्या, यात्रा तिथ्िा आदि पढ़ने में नहीं आ रही थी। इसीलिए मजबूरन उन्होंने नइर् दिल्ली से कानपुर की यात्रा के लिए एक और टिकट खरीदी। उन्होंने पहली टिकट की राश्िा वापिस माँगी। लेकिन, जैसा पफोरम ने लिखा, इसके लिए उन्हें बहुत कष्ट सहना पड़ा। यद्यपि युगल ने वापसी के भुगतान को उनके अहमदाबाद के घर के पते पर भेजने के लिए लिखा था पिफर भी रेलवे ने उसे उनके दिल्ली के पते पर भेज दिया। उन्होंने सी.इर्.आर.एस. ;ब्म्त्ैद्ध से सहायता माँगी। सी.इर्.आर.एस. ;ब्म्त्ैद्ध ने उपभोक्ता विवाद निवारण पफोरम अहमदाबाद शहर में रेलवे के विरु( उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम, 1986 की धरा 2 ;1द्ध ;जीद्ध एवं 2 ;1द्ध ;0द्ध के अंतगर्त श्िाकायत की। सी.इर्.आर.एस;ब्म्त्ैद्ध का दावा था कि दो वरिष्ठ नागरिकों को रेलवे द्वारा प्रदत्त अपयार्प्त सेवा के कारण मानसिक उत्पीड़न हुआ। रेलवे का तवर्फ था कि अन्य बातों के अतिरिक्त टिकट के रद्द कर दिये जाने के पश्चात् यह पफोरम के अध्िकार क्षेत्रा से बाहर हो गया, कानून की दृष्िट से युगल उपभोक्ता नहीं थे, श्िाकायत समय अवरु( थी तथा राश्िा की वापसी के लिए श्िाकायत को सुनने के लिए रेलवे क्लेम टिªब्यूनल उचित पफोरम है। लेकिन पफोरम का मानना था कि युगल को जो कष्ट सहना पड़ा वह रेलवे की अपयार्प्त सेवा है तथा आदेश दिया कि युगल ने जो मानसिक कष्ट सहा है उसके लिए 2,000 रुपए तथा 3,000 रुपए लागत के रूप में भुगतान किया जाए। पफोरम ने राश्िा की वापसी के संबंध् में कोइर् निणर्य नहीं लिया जिसके लिए उसने कहा कि, फ्इसका पैफसला केवल रेलवे क्लेम टिªब्यूनल करेगा।य् ड्डोत - ूूूण्बवतमबमदजतमण्वतह ;गपपद्ध उचित पक्ष को पयार्प्त लागत का भुगतान करना। प्रदशर् में वुफछ ऐसे मामले से संबंध्ित पैफसले दिए हैं जिनमें उपभोक्ता अदालत में दोषपूणर् वस्तु एवं अपयार्प्त सेवाओं के विरु( श्िाकायत की गइर् थी। उपभोक्ता संगठनों एवं गैर सरकारी संगठनों ;छळव्ेद्ध की भूमिका भारत में उपभोक्ता के संरक्षण एवं प्रवतर्न के लिए कइर् उपभोक्ता संगठन एवं गैर सरकारी संगठनों ;छळव्े द्ध की स्थापना की गइर् है। गैर सरकारी संगठन ऐसे गैर लाभ संगठन हैं जो लोगों के कल्याण के प्रवतर्न के लिए हैं। इनका अपना संविधन होता है तथा सरकारी हस्तक्षेप नहीं होता। उपभेक्ता संगठन एवं गैर सरकारी संगठन उपभोक्ताओं के हितों की रक्षाथर् कइर् कायर् करते हैं। ये इस प्रकार हैं - ;पद्ध प्रश्िाक्षण कायर्क्रम, सैमीनार एवं कायर्शालाओं का आयोजन कर जनसाधारण को उपभोक्ताओं के अध्िकारों के संबंध् मंे श्िाक्ष्िात करना। ;पपद्ध उपभोक्ता की समस्याओं, कानूनी रिपोटर् देना, राहत तथा हित में कायो± के संबंध् में ज्ञान प्रदान करने के लिए पाक्ष्िाक एवं अन्य प्रकाशनों का प्रकाशन करना। ;पपपद्ध प्रतियोगी ब्रांड के गुणों की तुलनात्मक जाँच के लिए प्रमाण्िात प्रयोगशालाओं में उपभोक्ता उत्पादों की जाँच कराना तथा उपभोक्ताओं के लाभ के लिए इनके परिणामों को प्रकाश्िात करना। ;पअद्ध बेइर्मान, शोषणकतार् एवं अनुचित व्यापारिक ियाएँ करने वाले विव्रेफताओं का प्रतिवाद करना एवं उनके विरु( कायर्वाही करने के लिए उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करना। ;अद्ध सहायता प्रदान कर, कानूनी सलाह देकर कानूनी निदान के लिए उपभोक्ता को कानूनी सहायता प्रदान करना। ;अपद्ध उपभोक्ताओं की ओर से उपयुक्त उपभोक्ता अदालत में श्िाकायत दजर् कराना। ;अपपद्ध उपभोक्ता अदालतों में किसी व्यक्ित के हित में नहीं बल्िक जनसाधरण के हित में मुकदमा करने मंे पहल करना। वुफछ महत्त्वपूणर् उपभोक्ता संगठन एवं गैर - सरकारी संघटन ;छळव्ेद्ध उपभोक्ताओं के हितों को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं अथवा उनका प्रवतर्न कर रहे हैं वे निम्नलिख्िात हैं - ;पद्ध उपभोक्ता समंवय परिषद्, दिल्ली। ;पपद्ध काॅमन काॅज, दिल्ली। ;पपपद्ध उपभोक्ता श्िाक्षण हिताथर् स्वयंसेवी संगठन ;टव्प्ब्म्द्ध, दिल्ली। ;पअद्ध उपभोक्ता श्िाक्षण एवं अनुसंधन वेेंफद्र ;ब्म्त्ब्द्ध, अहमदाबाद। ;अद्ध उपभोक्ता संरक्षण परिषद् ;ब्च्ब्द्ध, अहमदाबाद। ;अपद्ध वंफज्यूमर गाइडंैस सोसाइटी आॅपफ इंडिया, ;ब्ळैप्द्ध मुंबइर्। ;अपपद्ध मुंबइर् ग्राहक पंचायत, मुंबइर्। ;अपपपद्ध कनार्टक उपभोक्ता सेवा समिति, बैंगलोर। ;पगद्ध उपभोक्ता संगठन, कोलकाता। ;गद्ध वंफज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसाइटी, ;ब्न्ज्ैद्ध जयपुर प्रदशर् दशार्ता है कि किस प्रकार से एक ब्म्त्ै युगल एक उपभोक्ता संगठन की सहायता से रेलवे द्वारा अपयार्प्त सेवा प्रदान करने पर उसके विरु( मुकदमें में जीत प्रदान करने में सपफल रहा। मुख्य शब्दावली उपभोक्ता संरक्षण उपभोक्ता अध्िकार उपभोक्ता दायित्व निवारण श्रेणी ;ग्रेडद्ध मानक सारांश उपभोक्ता संरक्षण का महत्त्व - उपभोक्ताओं के लिए उपभोक्ता संरक्षण का महत्त्व इसलिए है क्योंकि उपभोक्ता अज्ञानी हैं, असंगठित हैं एवं विव्रेफता उनका शोषण करते हैं। उपभोक्ता व्यवसाय के लिए संरक्षण इसलिए भी महत्त्वपूणर् है क्योंकि ;पद्ध यह दीघर् अवध्ि में भी व्यवसाय के हित में है, ;पपद्ध व्यवसाय समाज के संसाध्नों का उपयोग करते हैं ;पपपद्ध यह व्यवसाय का सामाजिक उत्तरदायित्व है ;पअद्ध इसका नैतिकता की दृष्िट से औचित्य है ;अद्ध इससे व्यवसाय के कायर् संचालन में सरकारी हस्तक्षेप से बचा जा सकता है। उपभोक्ताओं को कानूनी संरक्षण - भारतीय कानूनी ढाँचा में उपभोक्ताओं को संरक्षण देने के लिए कइर् कानून सम्िमलित हैं। वे हैं ;पद्ध उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम, 1986, ;पपद्ध प्रसंविदा अध्िनियम, 1982 ;पपपद्ध वस्तु विक्रय अध्िनियम, 1930 ;पअद्ध आवश्यक वस्तु अिानियम, 1955 ;अद्ध वृफष्िा उत्पाद ;श्रेणीकरण एवं चिÉांकनद्ध अध्िनियम, 1937 ;अपद्ध खाद्य मिलावट अिानियम, 1954 ;अपपद्ध भार एवं माप मानक अिानियम, 1976 ;अपपपद्ध ट्रेडमावर्फ अध्िनियम, 1999 ;पगद्ध प्रतियोगिता अध्िनियम, 2002 ;गद्ध भारतीय मानक ब्यूरो अध्िनियम 1986 । उपभोक्ता के अध्िकार - उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम में उपभोक्ता को छः अध्िकार दिए गए हैं। ये हैं - ;पद्ध सुरक्षा का अध्िकार ;पपद्ध सूचना का अध्िकार ;पपपद्ध चयन का अध्िकार ;पअद्ध श्िाकायत का अिाकार ;अद्ध श्िाकायत निवारण का अध्िकार ;अपद्ध उपभोक्ता श्िाक्षण का अिाकार। उपभोक्ता के दायित्व - वस्तु एवं सेवाओं के क्रय - विक्रय एवं उपभोग के समय अध्िकारों के साथ - साथ उपभोक्ता को अपने दायित्वों को भी ध्यान में रखना चाहिए। उपभोक्ता संरक्षण के मागर् एवं माध्यम - उपभोक्ता संरक्षण के उद्देश्य को पाने के लिए कइर् तरीके हैं, इनमें सम्िमलित हैैं - ;पद्ध व्यवसाय का स्वयं नियमन ;पपद्ध व्यवसाय संगठन ;पपपद्ध उपभोक्ता जागरुकता ;पअद्ध उपभोक्ता संगठन ;अद्ध सरकार। उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम के अंतगर्त निवारण एजेंसियाँ - उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम में जिला स्तर, राज्य स्तर एवं राष्ट्रीय स्तर पर तीन स्तरीय प्रवतर्न व्यवस्था का प्रावधन है। इन्हें जिला पफोरम, राज्य आयोग एवं राष्ट्रीय आयोग कहा जाता है। इस अध्िनियम द्वारा उपभोक्ता को कइर् प्रकार की राहत दी गइर् है। उपयुर्क्त उपभोक्ता अदालत वस्तुओं के दोषों को दूर करने में, दोषपूणर् उत्पाद के स्थान पर दूसरी वस्तु देने, वस्तु के मूल्य को लौटाने का आदेश दे सकती है। उपभोक्ता संगठन एवं गैर सरकारी संगठन छळव्े - भारत में कइर् उपभोक्ता संगठन एवं गैर - सरकारी संगठन ;छळव्ेद्ध उपभोक्ताओं के संरक्षण एवं उनके हितों की रक्षा के लिए सिय भूमिका निभाते हैं। अभ्यास सत्य/असत्य बताइए कि निम्न कथन सत्य हैं अथवा असत्य - 1 व्यवसाय के लिए उपभोक्ता संरक्षण का नैतिक औचित्य है। 2 अध्िकारों के साथ उपभोक्ता के वुफछ दायित्व भी हैं। 3 वस्तु एवं सेवाओं का मूल्य तथा क्षति की राश्िा मिलाकर 20 लाख रुपए से अध्िक होने पर श्िाकायत जिला पफोरम को भेजी जाती है। 4 उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम में छः उपभोक्ता अध्िकारों की व्याख्या है। 5 प्ैप् गुणवत्ता प्रमानीकरण च्िाÉ है जिसे खाद्य पदाथो± के लिए प्रयुक्त किया जाता है। 6 उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम के अंतगर्त उपभोक्ता दोषपूणर् वस्तु एवं अपयार्प्त सेवाओं के लिए श्िाकायत की जा सकती है। लघु उत्तरीय प्रश्न 1.व्यवसाय की दृष्िट से उपभोेक्ता संरक्षण के महत्त्व को समझाइए। 2.उपभोक्ता के हितों की रक्षा में सहायता के लिए भारत सरकार ने कइर् कानून बनाए हैं। गणना कीजिए। 3.उपभोक्ता के दायित्व कौन - कौन से हैं? 4.उपभोक्ता अदालत में कौन श्िाकायत कर सकता है? 5.राज्य आयोग के पास किस प्रकार के मामलों का दावा किया जा सकता है? 6.उपभोेक्ता के हितों के संरक्षण एवं प्रवतर्न में उपभोक्ता संगठन एवं छळव्े की भूमिका को समझाइए। 1.उपभोक्ता के अध्िकार एवं उत्तरदायित्वों को समझाइए। 2.उपभोक्ता को संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य की प्राप्ित के कौन - कौन से तरीके हैं? इस संबंध् में उपभोक्ता संगठन एवं छळव्े की भूमिका को समझाइए। 3.उपभोक्ता संरक्षण अध्िनियम, 1986 के अंतगर्त उपभोक्ताओं को उपलब्ध् निवारण तंत्रा को समझाइए। अनुप्रयोगात्मक प्रश्न 1.अपने शहर के उपभोक्ता संगठन मंे जाइए। इसके विभ्िान्न कायो± की सूची तैयार कीजिए। 2.उपभोक्ता मामलों तथा उनसे संबंध्ित पैफसलों को समाचार पत्रों से काट कर इकट्टòा करें। समस्या क्िलक कीजिए और श्िाकायत दजर्ः शोभा मेनन टाइम्स न्यूज नेटववर्फ - रविवार 11 माचर् 2007 प्रातः 12ः42ः35 नयी दिल्ली - इस वषर् के अंत तक उपभोक्ता अदालत में श्िाकायत दजर् कराना बहुत सरल हो जायेगा। आप चाहे देश के किसी भी भाग में रहते हैं माउस से क्िलक करें और श्िाकायत दजर् हो गइर्। कोनपफोनैट ;उपभोक्ता पफोरा का वंफयूटराइजेशन एवं वंफम्प्यूटर नैटववि±फगद्ध नाम से परियोजना नेशनल इंपफोरमेंटिक्स सैंटर द्वारा एक दम तैयार आधर पर कायार्न्िवत की जा रही है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक अध्िकारी ने कहा, फ्सरकार को आशा है कि श्िाकायत के आॅन लाइन पंजीयन से इर् - प्रशासन, पारदश्िार्ता, कायर् वुफशलता एवं उपभोक्ता मंच को चुस्त दुरुस्त होगाय् अध्िकारी ने कहा कि इस परियोजना के लिए 48.64 करोड़ की राश्िा रखी गइर् थी जिसमें से सरकार ने अब तक 30.56 करोड़ की राश्िा प्रदान कर दी है। अध्िकारी ने कहा, फ्साॅफ्रटवेयर के विकास एवं जाँच, नेट ववि±फग, परियोजना के ियान्वयन, एकीकरण एवं साइट तैयार करने के अतिरिक्त इसमें सभी 583 जिला मंच, 35 राज्य कमीशन एवं राष्ट्रीय कमीशन के लिए वंफप्यूटरों का क्रय भी सम्िमलित है। अब तक वंफप्यूटर सिस्टम एवं सिस्टम के साॅफ्रटवयेर 25 राज्य कमीशन एवं 300 जिला पफोरम को भेजे जा चुके हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि कइर् बार वंफप्यूटर मशीनों की पैविंफग को खोल कर उन्हें लगाने के लिए कापफी इंतजार करना होता है। वैसे कमर्चारियों को कक्षा में तथा इर् - अध्ययन सत्रा के माध्यम से प्रश्िाक्षण पूरे जोरो पर है। अध्िकारी का कहना है, फ्आॅन लाइन श्िाकायत दजर् कराने की प(ति निश्िचत करने से ही देश में एक मजबूत उपभोक्ता सरक्षण आंदोलन सुनिश्िचत नहीं हो जायेगा इसके लिए हम आने वाली पीढ़ी पर कायर् कर रहे हैं और इसका सवोर्त्तम तरीका है विद्यालय से सम्पवर्फ साध्ना।य् इसीलिए सरकार उपभोक्ता क्लब बनाने में स्वूफल के विद्याथ्िार्यों को सम्िमलित कर रही है जिससे कि उन्हें विभ्िान्न उपभोक्ता कल्याण गतिविध्ियों में सम्िमलित किया जा सके।य् क्लब को चलाने के लिए वुफछ राश्िा विभ्िान्न राज्य सरकारों से आनी है तथा उतनी ही राश्िा वेंफद्र से ग्रांट के रूप में मिलेगी। वैसे वुफछ राज्य सरकारों ने अभी कोष का अनुमोदन नहीं किया है उनमें से हैं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, एवं केरल। स्रोत - ूूूण्मबवदवउपबजपउमेण्पदकपंजपउमेण्बवउ प्रश्न 1.श्िाकायत दजर् कराने के वििा को सरल बनाने के लिए उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय क्या नये कदम उठा रहा है? 2.उपभोक्ता संरक्षण योगदान के लिए एक विद्याथीर् के रूप में आपकी क्या भूमिका हो सकती है? 3.उपयुर्क्त समाचार रिपोटर् में प्रस्तावित उपायों के ियान्वयन के पश्चात् उपभोक्ता संरक्षण का क्या स्वरूप आपको दिखाइर् दे रहा है? ;अध्यापकों को सलाह दी जाती है कि वह विद्या£थयों को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण कमीशन सहित विभ्िान्न उपभोक्ता पफोरम के पैफसलों का अध्ययन करने में सहायता करें। इस प्रकार की पहल विद्या£थयों को भारत में उपभोक्ता सरंक्षण की भूमिका और अच्छी तरह से समझने में सहायक होगी। विभ्िान्न प्रकाश्िात सामग्री का भी प्रयोग किया जा सकता है। विद्यालयों में इस संबंध में उपभोक्ता क्लब भी विद्या£थयों की सहायता कर सकते हैंद्ध।

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