चुप तुम रहो, चुप हम रहें चलो, एक खेल खेलें। इस खेल में सब को बिना बोले अपनी बात दूसरों तक पहुँचानी है। सभी बच्चे सात - सात के गुटों में बँट जाओ। इस खेल में तुम्हारी टीचर सभी गुटों को एक - एक कागश की पचीर् देगी। हर पचीर् में वुफछ लिखा होगा। सभी अपने - अपने गुट में पचीर् पढ़ेंगे। सभी गुटों को पचीर् के अनुसार मूक - नाटक तैयार करना है। इस बात का ध्यान रखना है कि बिना बोले ही सभी को अपनी बात दूसरों तक पहुँचानी है। तुम्हें अपने शरीर के अलग - अलग अंगों से ही अपनी बात कहनी है, जैसे μ आँखों से, चेहरे के हाव - भाव से, हाथ के इशारों से। जब सबका नाटक तैयार हो जाए तब सभी गुट एक - एक करके आएँ और सबके सामने अपना मूक - नाटक करंे। सभी देखने वालों को यह बूझना होगा कि नाटक में क्या हो रहा है। वैफसा लगा यह खेल? क्या बिना बोले नाटक करने में मुश्िकल आइर्? अगले पृष्ठ पर दिए गए चित्रा को देखो। चित्रा में बच्चे इशारों से बातें कर रहे हैं। ❉ क्या तुमने कभी किसी को इशारों से बातें करते देखा है? ❉ लोगों को इशारों में बात करने की शरूरत कब पड़ती है? हम में से श्यादातर लोग बोल और सुन सकते हैं। पर वुफछ ऐसे भी लोग हैं जो बोल और सुन नहीं सकते। ऐसे लोग दूसरों को अपनी बातें इशारों से समझाते हैं। दूसरों की बातें वे उनके होठों को देखकर समझने की कोश्िाश करते हैं। हम सब भी तो सब वुफछ नहीं कर पाते। हममें से कोइर् गाता अच्छा है, तो कोइर् कविता अच्छी लिखती है। वुफछ बच्चे झट से पेड़ पर चढ़ जाते हैं, तो वुफछ बहुत तेश दौड़ते हैं। कोइर् चित्रा अच्छे बनाता है, तो कोइर् सुर में गा पाती है। हम सब अपनी - अपनी तरह से खास हैं। स्वूफल इसीलिए तो हैं कि सभी को एक - दूसरे से वुफछ - न - वुफछ सीखने का मौका मिले। सबकी तरह जो बच्चे बोल - सुन नहीं सकते, वे भी स्वूफल जाकर पढ़ते - लिखते हैं। इन बच्चों को स्वूफल में इशारों से बातें करने की भाषा सिखाइर् जाती है। आओ, अब एक बच्ची के बारे में पढं़े जो सुन नहीं सकती। वह बच्ची पिफर भी कितना वुफछ कर पाती है। मेरी बहन सुन नहीं सकती मेरी एक बहन है। मेरी बहन सुन नहीं सकती। मेरी बहन अनूठी है। बहुत कम लोगों की बहनें ही मेरी बहन की तरह होंगी। मेरी बहन पियानो बजा सकती है। वो पियानो के सुरों को महसूस कर सकती है। वो उंगलियों से छूकर पता कर लेती है कि रेडियो चल रहा है या वो बंद है। वूफदने, उछलने और कलाबािायां लगाने मंेउसे बड़ा आनंद आता है। मेरी बहन अब मेरे ही स्वूफल में जाने लगी है। वैसे माँ, उसे घर पर बोलने की और होंठ पढ़ने की ट्रेनिंग देती हैंै। क्लास में टीचर और अन्य बच्चे मेरी बहन के कहे सभी शब्दों को समझ नहीं पाते हैं। वो जो वुफछ कहना चाहती है उसे वो अच्छी तरह नहीं कह पाती है। कल मैंने ध्ूप का चश्मा पहन रखा था। उसका प्रेफम कापफी बड़ा था। ़उसके काँच भी एकदम काले थे। जब मैं बोल रही थी तो मेरी बहन ने मुझ से चश्मा उतारने को कहा। मेरी भूरी आँखंे, उसकी भूरी आँखों से, न जाने क्या - क्या कहती हैं? μ जीन वाइटहाउस पीटरसन की कविता के वुफछ अंश ;अनुवाद: अरविंद गुप्ताद्ध इस पाठ से चचार् हो सकती है कि हम सब में अलग - अलग तरह की क्षमताएँ हैं। बच्चों के अपने अनुभवों को शामिल करते हुए ़ाइर् हम अपनी आँखों से बहुत वुफछ कहते हैं। छोटे बच्चे तो बोलना सीखने से पहले ही कितना वुफछ कहते हैं μ चेहरे से, हाथों से। वे कितना वुफछ समझते भी हैं। चेहरा है आइर्ना अपने आस - पास के छोटे बच्चों ;करीब 6 - 8 महीने केद्ध को देखो। वे अपनी बात बिना बोले वैफसे कहते हैं? तुम सोच रहे होगे कि ये वैफसे चेहरे हंै? न इनमें आँखंे हैं, न नाक और न ही मुँह। ये सब तो तुम्हें बनाने हैं, पर साथ में जो लिखा है, उसे पढ़कर। यह आप़्ाफताब है। उसका ख्िालौना गिर कर टूट गया है। वह दुखी है। वैफसा होगा उसका चेहरा? यह यामिनी की अम्मा है। आज यामिनी ने जब रसोइर् से अचार की शीशी निकाली, शीशी ंिगर कर टूट गइर्। अम्मा का चेहरा बनाओ। यह जूली है। कल ही उसकी छोटी बहन पैदा हुइर् है। वह बहुत खुश है। उसका चेहरा बनाओ। यह रेहाना है। रेहाना को वुफत्तों से बहुत डर लगता है। वह खेल रही थी। अचानक उसके सामने एक वुफत्ता आ गया। वैफसा होगा रेहाना का चेहरा? चेहरे को देखकर हमें पता चल जाता है कि कौन दुखी है, कौन खुश है और कौन गुस्से में। तुम्हारे साथ कभी ऐसा हुआ है कि तुमने कोइर् शरारत की हो और माँ को तुम्हारा चेहरा देखकर ही समझ में आ गया हो? नाच से भी हम अपनी बात दूसरों तक पहुँचा सकते हैं। नाच में इशारों और चेहरे के हाव - भाव का इस्तेमाल करते हैं। इन्हें मुद्राएँ कहते हैं। चित्रा को देखकर, अपने मन से कहानी बनाओ, अपने साथ्िायों को सुनाओ, और उस पर बात - चीत भी करो। 1 2 3 4 49

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