आओ बनाएँ बतर्न एक थी चिडि़या, नाम था पुफदगुदी। एक था कौआ, नाम था भनाते। दोनों में गहरी दोस्ती थी। एक दिन भनाते ने कहा μ अरे ओ पुफदगुदी! अगर पहले तूने अंडे दिए तो मैं खाउँफगा और अगर मैंने पहले अंडे दिए तो तू खा लेना। वफबूल? पुफदगुदी बोली μ वफबूल। वुफछ दिन बाद पुफदगुदी ने अंडा दिया। भनाते बोला μ दे - दे अंडा, खाउँफ अंडा, दे - दे, दे - दे, दे - दे। पुफदगुदी गइर् डर। बोली μ ठीक, भाइर् ठीक। पर पहले चोंच धे आओ नदी मे।ंभनाते गया नदी तट पर। बोला μ हे नदी! नदी बोली μ क्या भाइर् भनाते? भनाते बोला μ नदी - नदी पानी दे - दे। ठंडा पानी लाउँफगा, चोंच धेकर आउँफगा, पिफर मैं अंडा खाउँफगा। नदी बोली μ पानी भरेगा वैफसे? वुफल्हड़ तो ला। भनाते गया वुफम्हार के पास। बोला μ रे वुफम्हार! 96 वुफम्हार बोला μ क्या भाइर् भनाते? भनाते बोला μ मुझे एक वुफल्हड़ दे - दे। वुफल्हड़ लेकर जाउँफगा, ठंडा पानी लाउँफगा, चोंच धेकर आउँफगा, पिफर मैं अंडा खाउँफगा। वुफम्हार बोला μ वुफल्हड़ बने वैफसे? पहले ला मिट्टðी खदान से। भनाते गया मिट्ट ðी की खदान पर। बोलाμरे मिट्टðी - खदान। मिट्टðी - खदान बोला μ क्या भाइर् भनाते? भनाते बोला μ मिट्टðी - खदान मुझे मिट्टðी दे - दे। मिट्टðी लेकर जाउँफगा, वुफल्हड़ मैं बनवाउँफगा, ठंडा पानी लाउँफगा, चोंच धेकर आउँफगा, पिफर मैं अंडा खाउँफगा। मिट्टððैेी - खदान बोला μ खोदें मिट्टी वफस? लोहार बोला μ क्या भाइर् भनाते? भनाते बोला μ लोहार मुझे एक खुरपी दे - दे। खुरपी लेकर जाउँफगा, मिट्टðी मैं खुदवाउँफगा, वुफल्हड़ मैं बनवाउँफगा, ठंडा पानी लाउँफगा, चोंच धेकर आउँफगा, पिफर मैं अंडा खाउँफगा। लोहार बोला μ ले - ले खुरपी प्यार से, पर लाना वापिस याद से। खुरपी लेकर भनाते गया खदान पर। चिकनी मिट्टðी खोदी और वुफम्हार को दे दी। वुफम्हार ने वुफल्हड़ बनाया। कौए ने उसमें पानी भरा और धे ली अपनी चोंच। पिफर दौड़ लगाइर् पुफदगुदी का अंडा खाने को। इसी बीच पुफदगुदी चिडि़या का अंडा पूफट कर चूशा बाहर आ गया था और बच्चा पुफरर् हो गया था पहले ला खुरपी लोहार से। भनाते कौए की पहँुचभनाते गया लोहार के पास। से बहुत दूर।बोला μ रे लोहार! ;अन्नपूणार् सिन्हा द्वारा भोजपुरी में रचित कहानी का हिंदी रूपांतरद्ध इस कहानी पर नाटक करने में बच्चों को बहुत मशा आएगा और वि्रफयाओं का व्रफम समझने में भी सहायता मिलेगी। ❉ कौए को वुफल्हड़ की शरूरत क्यों पडी? ़❉ एक वुफल्हड़ बनाने में किन - किन लोगों ने कौए की मदद की? ❉ वुफल्हड़ बनाने के लिए वुफम्हार को किस - किस सामान की शरूरत पड़ी? ❉ क्या तुम्हारे घर में मिट्टी के बतर्न हंै? कौन - कौन से?ðअगर तुम्हें कोइर् चिकनी मिट्टðी दे, तो क्या तुम कोइर् बतर्न बना पाओगे? ❉का लड्डू , लड्डू से कटोरी चिकनी मिट्टðóी को गूँध् कर एक बड़ा - सा लîू बनाओ। इस लîó óमें गîा बनाकर उसे कटोरी जैसाूरूप दो। अपनी कटोरी को सुखाओ और सजाओ। इसमें अपने मन की चीशें रखो। ❉का साँप, साँप का बतर्न चिकनी म्िाट्टð ाी को पानी से गूँध् लो। थोड़ी म्िाट्ट ðी के पानी में घोल कर अलग रख लो। यह घोल म्िाट्टी के दो टुकड़ों को आपस में जोड़ने के काम आएगा। गुँध्ी हुइर् म्िाट्टðी का वुफछ भाग लेकर उसे मोटी रोटी की तरह चपटा कर लो। यह बतर्न का तला बन गया। बाकी गुँध्ी हुइर् म्िाट्टी को साँप जैसा लंबा बना लो। चित्रा में देखो और म्िाट्टी से बने साँप को तले पर चिपकाकर बतर्न बनाओ। ❉ की रोटी, रोटी का बतर्न चित्रा को देखकर इस तरह से बतर्न बनाओ। ❉ अगर इन बतर्नों में पानी डालकर रातभर रखो, तो क्या होगा? ❉ हम अपने घर या स्वूफल में मटके में पानी रखते हंै। वह मटका पानी से गल क्यों नहीं जाता? ❉ क्या तुमने कभी इर्ं ðट या बतर्नों को भट्टी में पकाते देखा है? अगर हम सबके पास केवल मिट्ट ðी के बतर्न होते और सारे टूट या गल जाते, तब हम क्या करते? मिट्टðी से बतर्न बनाते हुए कपड़े तो गंदे होंगे पर बच्चों को करके सीखने का आनंद भी मिलेगा। ❉ यदि हमारे पास म्िाट्टी के बतर्न हों और वे सभी टूट जाएँ अथवा खराबðहो जाएँ तो हम क्या करेंगे। ❉ बहुत साल पहले जब बतर्न नहीं थे, तब लोग क्या करते थे? ❉ लोगों ने बतर्न क्यों बनाए होंगे? मान लो, एक दिन दुनिया से सारे बतर्न गायब हो जाएँ, तो तुम्हारे घर में क्या होगा? बहुत, बहुत, बहुत साल पहले एक समय ऐसा था, जब लोगों के पास बतर्न ही नहीं थे। पर लोगों को खाने - पीने की चीशों को पकाने और सामान रखने के लिए बतर्न की शरूरत पड़ने लगी। बहुत कोश्िाश करने और दिमाग लगाने वेफ बाद, लोग बतर्न बनाना सीख गए। शुरू में बनाए गए बतर्न पत्थर और मिट्टððी के थे। पत्थर के बतर्न हाथों से खोदकर या वुफरेद कर और मिट्टी के बतर्न गूँध् कर हाथों से बनाए गए थे। लोगों ने यह भी खोज लिया कि मिट्टðी के बतर्नों को मशबूत बनाने के लिए उन्हें आग में पकाना चाहिए।

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