कठपुतली ठपुतली गुस्से से उबली बोलीμये धागे क्यों हैं मेरे पीछे - आगे? इन्हें तोड़ दोऋ मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो। सुनकर बोलीं और - और कठपुतलियाँ कि हाँ, बहुत दिन हुए हमें अपने मन के छंद छुए। मगर..पहली कठपुतली सोचने लगीμ ये वैफसी इच्छा मेरे मन में जगी? ऽभवानीप्रसाद मिश्र 2.कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती? 3.पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी लगी? 4.पहली कठपुतली ने स्वयं कहा किμ‘ये धागे/क्यों हैं मेरे पीछे - आगे?/इन्हें तोड़ दोऋ / मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।’μतो पिफर वह ¯चतित क्यों हुइर् किμ‘ये वैफसी इच्छा / मेरे मन में जगी?’ नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपने विचार व्यक्त कीजिएμ ऽ उसे दूसरी कठपुतलियों की िाम्मेदारी महसूस होने लगी। ऽ उसे शीघ्र स्वतंत्रा होने की ¯चता होने लगी। ऽ वह स्वतंत्राता की इच्छा को साकार करने और स्वतंत्राता को हमेशा बनाए रखने के उपाय सोचने लगी। ऽ वह डर गइर्, क्योंकि उसकी उम्र कम थी। कविता से आगे 1.‘बहुत दिन हुए / हमें अपने मन के छंद छुए।’μइस पंक्ित का अथर् और क्या हो सकता है? अगले पृष्ठ पर दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अथर् 20 लिख्िाएμ कठपुतली ;कद्ध बहुत दिन हो गए, मन में कोइर् उमंग नहीं आइर्। ;खद्ध बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता - सी कोइर् बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो। ;गद्ध बहुत दिन हो गए, गाने - गुनगुनाने का मन नहीं हुआ। ;घद्ध बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आइर्। 2.नीचे दो स्वतंत्राता आंदोलनों के वषर् दिए गए हैं। इन दोनों आंदोलनों के दो - दो स्वतंत्राता सेनानियों के नाम लिख्िाएμ ;कद्ध सन् 1857 ;खद्ध सन् 1942 अनुमान और कल्पना स्वतंत्रा होने की लड़ाइर् कठपुतलियों ने वैफसे लड़ी होगी और स्वतंत्रा होने के बाद उन्होंने स्वावलंबी होने के लिए क्या - क्या प्रयत्न किए होंगे? यदि उन्हें पिफर से धागे में बाँधकर नचाने के प्रयास हुए होंगे तब उन्होंने अपनी रक्षा किस तरह के उपायों से की होगी? भाषा की बात 1.कइर् बार जब दो शब्द आपस में जुड़ते हैं तो उनके मूल रूप में परिवतर्न हो जाता है। कठपुतली शब्द में भी इस प्रकार का सामान्य परिवतर्न हुआ है। जब काठ और पुतली दो शब्द एक साथ हुए कठपुतली शब्द बन गया और इससे बोलने में सरलता आ गइर्। इस प्रकार के वुफछ शब्द बनाइएμ जैसेμकाठ ;कठद्ध से बनाμकठगुलाब, कठपफोड़ा हाथμहथ सोनाμसोन मि‘ी - मठ 2.कविता की भाषा में लय या तालमेल बनाने के लिए प्रचलित शब्दों और वाक्यों में बदलाव होता है। जैसेμआगे - पीछे अिाक प्रचलित शब्दों की जोड़ी है, लेकिन कविता में ‘पीछे - आगे’ का प्रयोग हुआ है। यहाँ ‘आगे’ का ‘...बोली ये धागे’ से ध्वनि का तालमेल है। इस प्रकार के शब्दों की जोडि़यों में आपभी परिवतर्न कीजिएμदुबला - पतला, इधर - उधर, ऊपर - नीचे, दाएँ - बाएँ, गोरा - काला, 21लाल - पीला आदि।

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