रहीम के दोहे हि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, तेइर् साँचे मीत।।1।। जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह। रहिमन मछरी नीर को, तउफ न छाँड़ति छोह।।2।। धरती की - सी रीत है, सीत घाम औ मेह। जैसी परे सो सहि रहे, त्यों रहीम यह देह।।5।। दोहे से 1.पाठ में दिए गए दोहों की कोइर् पंक्ित कथन है और कोइर् कथन को प्रमाण्िात करनेवाला उदाहरण। इन दोनों प्रकार की पंक्ितयों को पहचान कर अलग - अलग लिख्िाए। 2.रहीम ने क्वार के मास में गरजनेवाले बादलों की तुलना ऐसे निधर्न व्यक्ितयों से क्यों की है जो पहले कभी धनी थे और बीती बातों को बताकर दूसरों को प्रभावित करना चाहते हैं? दोहे के आधार पर आप सावन के बरसने और गरजनेवाले बादलों के विषय में क्या कहना चाहेंगे? 84 रहीम के दोहे दोहांे से आगे ऽ नीचे दिए गए दोहों में बताइर् गइर् सच्चाइयों को यदि हम अपने जीवन में उतार लें तो उनके क्या लाभ होंगे? सोचिए और लिख्िाएμ ;कद्ध तरुवर पफल...................सच¯ह सुजान।। ;खद्ध धरती की - सी...................यह देह।। भाषा की बात 1.निम्नलिख्िात शब्दों के प्रचलित ¯हदी रूप लिख्िाएμ जैसेμपरे - पड़े ;रे, डे़द्ध बिपति बादर मछरी सीत 2. नीचे दिए उदाहरण पढि़एμ ;कद्ध बनत बहुत बहु रीत। ;खद्ध जाल परे जल जात बहि। ऽ उपयुर्क्त उदाहरणों की पहली पंक्ित में ‘ब’ का प्रयोग कइर् बार किया गया है और दूसरी में ‘ज’ का प्रयोग। इस प्रकार बार - बार एक ध्वनि के आने से भाषा की सुंदरता बढ़ जाती है। वाक्य रचना की इस विशेषता के अन्य उदाहरण खोजकर लिख्िाए। 85

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