एक तिनका घमंडों में भरा ऐंठा हुआ, एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ा। आ अचानक दूर से उड़ता हुआ, एक तिनका आँख में मेरी पड़ा। मैं झिझक उठा, हुआ बेचैन - सा, लाल होकर आँख भी दुखने लगी। मूँठ देने लोग कपड़े की लगे, ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी। जब किसी ढब से निकल तिनका गया, तब ‘समझ’ ने यों मुझे ताने दिए। ऐंठता तू किसलिए इतना रहा, एक तिनका है बहुत तेरे लिए। ऽ कविता से 1.नीचे दी गइर् कविता की पंक्ितयों को सामान्य वाक्य में बदलिए। जैसेμएक तिनका आँख में मेरी पड़ाμमेरी आँख में एक तिनका पड़ा। मूँठ देने लोग कपड़े की लगेμलोग कपड़े की मूँठ देने लगे। ;कद्ध एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ाμ ;खद्ध लाल होकर आँख भी दुखने लगीμ ;गद्ध ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगीμ ;घद्ध जब किसी ढब से निकल तिनका गयाμ .......................................2.‘एक तिनका’ कविता में किस घटना की चचार् की गइर् है, जिससे घमंड नहीं करने का संदेश मिलता है? 3.आँख में तिनका पड़ने के बाद घमंडी की क्या दशा हुइर्? 4.घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए उसके आसपास लोगों ने क्या किया? 5.‘एक तिनका’ कविता में घमंडी को उसकी ‘समझ’ ने चेतावनी दीμ ऐंठता तू किसलिए इतना रहा, एक तिनका है बहुत तेरे लिए। इसी प्रकार की चेतावनी कबीर ने भी दी हैμ तिनका कबहूँ न निंदिए, पाँव तले जो होय। कबहूँ उडि़ आँख्िान परै, पीर घनेरी होय।। अनुमान और कल्पना 100 एक तिनका ऽ भाषा की बात ऽ 101

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