इकाई 5: हरी-भरी दुनिया
आनंदमयी कविता
अध्याय- 17
हवा
ऊपर-नीचे दाएँ-बाएँ,
हवा चली साँय-साँय ।
मुन्नी को छेड़कर,
चढ़ गई पेड़ पर।
हाथ नहीं आऊँगी,
दूर मैं उड़ जाऊँगी।
मुन्नी बोली हँसकर,
हवा रानी बस कर।
पकड़ तुझे मैं लाऊँगी,
फुग्गे में ले जाऊँगी।
- शिवचरण सरोहा
चित्रकारी
मान लीजिए कि मुन्नी ने हवा से भरे फुग्गे आपको दे दिए। आप उन फुग्गों से क्या करेंगे? सोचिए, चित्र बनाइए और कुछ शब्द भी लिखिए -
कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं, आप उनमें से भी शब्द चुन सकते हैं।
हवा, फुग्गा, गुब्बारा, खेल, मुन्नी
चित्र में देखकर बताइए कि मुन्नी के बाईं ओर, दाईं ओर, उसके आगे और उसके पीछे क्या-क्या दिख रहा है -
मुन्नी के दाईं ओर - ....................... , ..................
मुन्नी के बाईं ओर - ....................... , ..................
मुन्नी के आगे - ....................... , ..................
मुन्नी के पीछे - ....................... , ..................
भूल-भुलैया
घोड़े को जंगल तक पहुँचाइए। यह घोड़ा केवल 'ओ' के रास्ते पर ही चलता है और अन्य अक्षरों पर रुक जाता है।
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ओ |
औ |
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क |
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ज |
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ओ |
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