Skip to content



Screenshot 2025-04-11 123730

Screenshot 2025-04-25 101739 खेल गीत

7 - टिल्लू जी





Screenshot 2025-04-11 123751

टिल्लू जी स्कूल गए,

बस्ता घर पर भूल गए।



रस्ते भर थे डरे-डरे,

पहुँचे गेट पर अरे अरे।


Screenshot 2025-04-11 123800



छुट्टी का नोटिस चिपका,

देख खुशी से फूल गए।



दोनों बाँहें माँ के,

डाल गले में झूल गए।

-नरेश सक्सेना

Screenshot 2025-04-11 141122

पढ़िए, समझिए और मिलाइए 


मित्रों/सहेलियों को देखकर शिक्षक को देखकर
मैं खुश होता/होती हूँ
माँ को देखकर ....... को देखकर ....... को देखकर



Screenshot 2025-04-11 141131

शब्दों का खेल 



अं       ————>

 
गूर अंगूर
जीर
........
 डा
........
दर
........
बर
........



Screenshot 2025-04-11 141122

मिलकर पढ़िए 




नटखट दिवाकर 

दिवाकर पाँच वर्ष का नटखट लड़का है। सारे दिन ठिठोली करता है

और सबकोहँसाता है। 

Screenshot 2025-04-11 123900

उसे गणित सीखने की बहुत लगन है। उसकी बड़ी बहिन मीना उसे संख्याओं को जोड़ना सिखाती है और दिवाकर ध्यान से सीखता है। 

दिवाकर कहता है, "एक और दो. तीन!"  मीना कहती है, "सपेरा बजाता बीन !” दिवाकर  कहता है, "तीन और चार, सात!" मीना कहती है, "लाओ कलम दवात!" 

दिवाकर दौड़कर कलम दवात ले आता है और मीना उसे संख्याओं के जोड़ लिखना सिखाती है। 1+2=3   3+4=7 

Screenshot 2025-04-11 123912

आज इतवार का दिन है। दादाजी ने आज कुल्फ़ी बनाने के लिए बहुत सारा दूध मँगाया था। दादी ने सवेरे 9 बजे कढ़ाई में दूध उबालने के लिए रख दिया। दूध को कभी माँ और कभी चाचाजी थोड़ी-थोड़ी देर में चमचे से चलाते रहे।


10 बजे तक दूध गाढ़ा हो गया और माँ ने उसे ठंडा होने के लिए रख दिया। दिवाकर बड़ी उत्सुकता से सब देख रहा था। 

Screenshot 2025-04-11 123935

11 बजे चाचाजी बाज़ार से बरफ़ ले आए और उसे कूटकर मटके में भर दिया। उसमें नमक भी मिला  दिया। दादी और माँ ने गाढ़े दूध में चीनी, केसर तथा पिस्ते और बदाम काट कर डाले। फिर कुल्फ़ी के तिकोनों में दूध भरकर मटके में डाल दिए। 

तब तक 1 बज गया था। दिवाकर ने दादाजी से पूछा,"दादाजी, कुल्फ़ी कब तक बनेगी?" दादाजी ने कहा, "बेटा, 5 बजे तक बनेगी।" 

दिवाकर मीना के साथ खेलने चला गया। कुछ देर बाद दिवाकर ने दादाजी के पास जाकर पूछा, "दादाजी, क्या बजा है?" दादाजी ने अपने कमरे में लगे घंटे की ओर देखकर कहा, "बेटा, 2 बजे हैं।" दिवाकर बेचैनी से 5 बजने की प्रतीक्षा करता रहा। 

कुछ समय बाद वह फिर दादाजी के पास गया और पूछा, "दादाजी, अब क्या  बजा है?" दादाजी ने फिर घंटे की ओर देखा और बोले, "बेटा, 3 बजे हैं।" 

Screenshot 2025-04-11 123956

दिवाकर ने भोलेपन से खुश होकर कहा, "दादाजी, 2 और 3, 5 होते हैं- तो अब 5 बज गए। इसलिए कुल्फ़ी खा सकते हैं!" 

दादाजी हँस पड़े। उन्हें दिवाकर की कुशाग्र बुद्धि पर बहुत आनंद आया। 

— मालती देवी


 शिक्षण-संकेत – यह पाठ पढ़ने के आनंद को बनाए रखने के उद्देश्य से लगाया गया है।