मिलकर पढ़िए
19 -आउट
छुट्टी का दिन था। जीत और बबली सुबह से खेल रहे थे।
उन्होंने कई सारे खेल खेले।
दोनों ने रस्सी कूदी।

फिर छुपन-छुपाई खेली।
उसके बाद गिल्ली-डंडा खेला।
बबली ने क्रिकेट खेलने के लिए कहा। जीत गेंद फेंकने के लिए तैयार हो गया।
जीत ने गेंद फेंकी। बबली ने ज़ोर से बल्ला
घुमाया। गेंद मोहित के आँगन में चली गई।
मोहित के घर ताला लगा हुआ था। जीत और बबली का खेल रुक गया।
बबली बोली कि उसे गेंद बनानी आती है। उसने जीत से कपड़े, कागज़ और
पन्नी लाने को कहा। वह खुद भी ये सब ढूँढ़ने लगी। दोनों ने खूब सारी कतरनें
और पन्नियाँ इकट्ठी कर लीं। बबली सुतली का टुकड़ा भी ले आई।
बबली ने उन सबको मिलाकर एक
गोला बनाया।
गोले को सुतली से कस दिया।
दोनों की पसंद की गेंद बन गई।
खेल फिर से शुरू हो गया। इस बार बबली
ने गेंद उठाई। जीत ने बल्ला उठाया।
बबली ने गेंद फेंकी।
जीत ने ज़ोर से बल्ला
घुमाया। गेंद खुलकर
हवा में फैल गई।
बबली ने उछलकर एक कपड़ा पकड़ लिया। बबली उछल-उछलकर
आउट-आउट चिल्लाने लगी।
वह हाथ में कपड़ा लेकर
आउट-आउट कहते हुए दौड़ी।

बातचीत के लिए
बातचीत के बाद इन प्रश्नों के उत्तर अपनी कॉपी में लिखिए -
- 1. जीत और बबली ने कौन-कौन से खेल खेले?
- 2. आप कौन-कौन से खेल खेलते हैं और किसके साथ खेलते हैं?
- 3. बबली ने गेंद बनाने में कौन-कौन सी वस्तुओं का उपयोग किया?
- 4. अगर आप अंपायर होते तो क्या जीत को आउट देते?
शब्दों का खेल
1. कहानी की घटनाओं को देखिए। उन्हें सही क्रम से लगाने के लिए अंकों को शब्दों में लिखिए
-
2. नीचे दिए गए खेलों के बारे में जानकारी इकट्ठी कीजिए और लिखिए -
| खेल का नाम | आप किस नाम से जानते हैं? |
| कबड्डी | .............. |
| छुपन-छुपाई | .............. |
| पिट्ठु | .............. |
| गिल्ली-डंडा | .............. |
| कंचा | .............. |

खोजें-जानें
अखबार में से खोजकर अपनी पसंद के किन्हीं दो खिलाड़ियों के चित्र काटकर नीचे दी गई जगह पर चिपकाइए। घर में किसी बड़े व्यक्ति से इन खिलाड़ियों के बारे में पूछकर आइए और कक्षा में इन खिलाड़ियों के बारे में बताइए -
खेल गीत
पोषम पा भई पोषम पा,
सारे गा मा सारे गा
आओ मिलकर खेलें खेल
छुपन-छुपाई छुक-छुक रेल
हँसना है मुस्काना है
फूलों-सा खिल जाना है
- साभार, एकलव्य
खेलों के नाम को उनके लिए आवश्यक वस्तुओं से मिलाइए-
| बैडमिंटन | ![]() |
| गिल्ली-डंडा | ![]() |
| कंचा | ![]() |
| क्रिकेट | ![]() |
| फुटबॉल | ![]() |
मिलकर पढ़िए
खेल सन्ध्या
सन्ध्या को हम खेलने जाते,
मित्रों संग आनन्द मनाते ।
कभी दौड़ना और उछलना,
कभी गेंद के खेल खेलना।
कभी कबड्डी, खो-खो खेलें,
गुट्टे, आँख-मिचौनी खेलें।
गिल्ली-डंडा सबको भाता,
सतोलिया भी मज़ा दिलाता।
या फिर पेड़ों पर जा चढ़ना,
या हँस हँस के बातें करना।
जब अंधेरा होने लगता,
सबको कुछ डर लगने लगता।
तब हम घर को वापस आते,
कल खेलेंगे यह कह जाते।
- राकेश चन्द्र
चित्र और बातचीत
मित्रों के साथ




