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24 - गिरे ताल में चंदा मामा


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गिरे ताल में चंदा मामा,

सबने देखा सबने देखा,

फँसे जाल में चंदा मामा,

सबने देखा सबने देखा।

सबने देखा एक अचंभा,

मछुआरे ने जाल समेटा,

कहीं नहीं थे चंदा मामा,

कहाँ गए जी चंदा मामा।

- राजेश जोशी


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शब्दों का खेल





  • 1. कविता में 'अचंभा' शब्द आया है। कविता पढ़कर अनुमान लगाइए कि इस शब्द का अर्थ क्या हो सकता है?
  • 2. नीचे दिए हुए किस वाक्य में 'अचंभा' शब्द का सही प्रयोग हुआ है?
  • यह देखकर अचंभा हुआ कि सूरज प्रकाश देता है।
  • यह देखकर अचंभा हुआ कि चाँद रात में दिखता है।
  • यह देखकर अचंभा हुआ कि आधे मैदान में बारिश हुई और आधा मैदान सूखा था।
  • 3. इस कविता में चंदा मामा की जगह पर सूरज दादा कहकर इस कविता को पढ़िए। अपनी नई कविता को कॉपी में लिखिए।

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    मिलकर पढ़िए







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    चाँद की रोटी,

    पानी में आई,

    मछली फिर भी,

    खा न पाई।

    मोहम्मद साजिद खान

    सोचिए और लिखिए -

    1. 1. चाँद की रोटी किसे कहा गया है?
    2. 2. मछली चाँद की रोटी क्यों नहीं खा पाई होगी?
    शिक्षण-संकेत- बच्चे 'अचंभा' का जो भी अर्थ बताएँ, उस पर बच्चों से बातचीत कीजिए।