24 - गिरे ताल में चंदा मामा
गिरे ताल में चंदा मामा,
सबने देखा सबने देखा,
फँसे जाल में चंदा मामा,
सबने देखा सबने देखा।
सबने देखा एक अचंभा,
मछुआरे ने जाल समेटा,
कहीं नहीं थे चंदा मामा,
कहाँ गए जी चंदा मामा।
- राजेश जोशी
शब्दों का खेल
3. इस कविता में चंदा मामा की जगह पर सूरज दादा कहकर इस कविता को पढ़िए। अपनी नई कविता को कॉपी में लिखिए।
मिलकर पढ़िए
चाँद की रोटी,
पानी में आई,
मछली फिर भी,
खा न पाई।
मोहम्मद साजिद खान
सोचिए और लिखिए -
- 1. चाँद की रोटी किसे कहा गया है?
- 2. मछली चाँद की रोटी क्यों नहीं खा पाई होगी?
शिक्षण-संकेत- बच्चे 'अचंभा' का जो भी अर्थ बताएँ, उस पर बच्चों से बातचीत कीजिए।