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7 लय का अनुभव करें - त क त कि ट


संगीत में लय सबसे आवश्यक है। पड़ी की टिक-टिक, नल से टपकते पानी की बूंद, चिड़ियों के कलरव आदि का अनुभव करें-
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• आपके आस-पास और क्या है जो एक स्थिर लय बनाता है?

• ऐसी कौन-सी वस्तुएँ हैं जिनकी ध्वनियाँ स्थिर नहीं है? पेड़-पत्तों की सरसराहट, प्रेशर कुकर की सीटी ओर यातायात में हार्न का बजना, ये सारी ध्वनियाँ ऐसी हैं जिनकी लय स्थिर नहीं है।

क्या आपको स्थिर ध्वनि अच्छी लगती है या अस्थिर? इसके अतिरिक्त कौन-से अन्य उदाहरण हो सकते हैं, इस पर विचार करिए?

गतिविधि 1 एक दो तीन चार !


नीचे विभिन्न क्रियाओं (ताली बजाना, चुटकी बजाना, लयबद्ध पैरों की थाप लगाना) को दर्शाया गया है जिन्हें करने पर अनेक प्रकार की ध्वनियों निकलती है। ऐसी चार अन्य लयबद्ध ताल बनाएँ और आनंद लें।
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गतिविधि 2 बोलने और प्रतिक्रिया का मानचित्र


हम अपने शरीर से इस प्रकार लय बना सकते हैं
• ताली बजाकर
• चुटकी बजाकर
• पैरों की थाप लगाकर
• मुँह से ध्वनि निकालकर

आइए, नीचे दी गई क्रियाओं को संख्या दें-

ताली - 1
चुटकी - 2
पैरों की थाप - 3
मुँह से आवाज निकालना - 4

अपने शरीर का प्रयोग कर कुछ क्रियाओं द्वारा विभिन्न लयों की स्वयं रचना करें। अब, ऐसी लयों को बनाते रहें।
(क) 1 2 3 4 (ख) 2 3 1 4 (ग) (घ) (ङ) (च)

गतिविधि 3 आइए, एक प्रेरणादायक गीत सुनें और सीखें


आइए, एक लोकप्रिय गाने को सीखें जिसे दुनिया के कई भागों में अलग-अलग भाषाओं में गाया जाता है।

हम होंगे कामयाव
हम होंगे कामयाब, 
हम होंगे कामयाब 
हम होंगे कामयाब एक दिन। 
हो हो मन में है विश्वास. 
पूरा है विश्वास, 
हम होंगे कामयाब एक दिन।
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अग्रेजी
वी शैल ओवरकम, 
वी शैल ओवरकम, 
वी शैल ओवरकम सम है। 
ओहा डीप इन माय हार्ट.
आई डू बिलीव, 
दैट वी शैल ओवरकम सम डे।

कन्नड़
नाबु गेडे गेल्तीवि, 
नावु गेडे गेल्तीवि 
नायु गेद्दे गेल्तीवि ओन्दु दिना। 
ओहो मनदलि विश्वासा, 
पूर्ति विश्वासा 
नायु गेढे गेल्तीवि ओन्दु दिना।

गतिविधि 4 आइए, वाद्ययंत्रों के साथ लय को सीखें


हम होंगे कामयाब इस गीत की लय को सुनिए। डाँडीया की काठी, मंजीरा, खरताल, मेराकस, डफली या पैपरू- कोई भी सरल वाद्ययंत्र के प्रयोग द्वारा इस गीत की लय को बजाएँ। इन वाद्ययंत्रों द्वारा लय देते हुए जब आप इस गीत को गाएँगे तो एक अलग आनंद की अनुभूति होगी।
क्या आप जानते है
ताल का उल्लेख सबसे पहले सामवेद में मिलता है। 16वीं शताब्दी तक उत्तर एवं दक्षिण भारत को ताल प्रणालियों में कोई अंतर नहीं था।

गतिविधि 5 आइए, शरीर के अंगों के साथ लय को सीखें


अपने शरीर के अंगों, जैसे- हाथ, पैर, मुख से ध्वनि निकाला पैर की भाप से गिनें या हाथ से ताली बजाएँ और गिनें। लय बनाए रखने के लिए अलग-अलग तरह से तालियाँ बनाएँ कभी दाएँ, कभी बाएँ और कभी ऊपर बजाएं। उदाहरण के लिए- 
1,2,3 ताली: 5.6, 7 ताली; 1, 2, 3 दाएँ ताली, 5, 6, 7 बाएं ताली,
1.2.3 सिर के ऊपर वाली; 5, 6, 7. शांति। 
लय का यह अनुभव कैसा लगा? आप इस गतिविधि को अलग- अलग प्रकार से कक्षा में सहपाठियों के साथ मिलकर करें। 5-10 मिनट बाद आप को सम्मिलित लय या ध्वनि सुनाई देगी। अब आगे बढ़ें। इस लय में कुछ तबले के बोल को जोड़े, जैसे- 
धा गे न ति (1,2,3,4) न क धि न (5,6,7,8) कभी धीमी गति से तो कभी द्रुत गति में इन बोलों का बोलते रहे या त क धी मी, त क झुँ न बोलें। 
'धा गे न ति न क धि न' कहरवा ताल के नाम से जानी जाती है और इसी तरह 8 अक्षर काल (आठ मात्राएँ) होती है। 
‘त क धी मी — त क झ नु’
यह आदि ताल के नाम से जानी जाती है। इस लय का आनंद लें। हम होंगे कामयाब गीत को इसी ताल से गाकर देखते हैं।

गतिविधि 6 संगीत में स्वर सीखें


भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ विश्व के कई अन्य संगीत के प्रकार में भी सात स्वर होते हैं
सा रे ग म प ध नि .....
ऊपर दिए गए स्वरों के बाद 'सा' स्वर को ऊँचे स्वर में गाएँ। इन सात स्वरों को 'सप्तक' कहा जाता है। 
आइए, हम सात स्वरों को आरोह एवं अवरोह में गाएँ।
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क्या आप जानते है?
नाट्यशास्त्र भरतमुनि का लिखा हुआ प्राचीन भारतीय ग्रंथ है। इसमें संगीत, नृत्य और नाट्य का वर्णन है। क्या आप जानते है कि नाट्यशास्त्र में संगीत के प्रत्येक स्वर अलग-अलग भाव से संबंधित है? इसका अर्थ यह है कि आप जो भी गाते हैं वह स्वरों के अनुसार अलग-अलग भाव प्रदान करता है।

गतिविधि 7 आइए, गीत गाएँ - सिर, कंधे, घुटने और पैर


आइए, एक मनोरंजक गतिविधि करें। अपने सिर, कंधों, घुटनों और पैरों को छूते हुए यह गीत गाएँ। इससे आपका समन्वय कौशल बेहतर होगा और आपको पंजाबी भाषा से भी परिचित कराएगा।
क्या आप जानते है?
लय संगीत में ताल या गति को इंगित करता है। यह हृदय की धड़कन के समान है, जैसे दौड़ते समय हृदय की धड़कन तेज हो जाती है और सोते समय धीमी, उसी प्रकार अलग-अलग रचनाओं में लय भी अलग-अलग हो सकती है।

बोल
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सिर, मोडे, गोडे, पैर, गोडे, पेर सिर, मोडे, गोडे, पैर, गोडे, पैर नाले आँख, नाले कान, नाले मुँह, नाले नाक सिर, मोड, गोडे, पैर, गोडे पैर
भाषा - पंजाबी

हिंदी अनुवाद
सिर, कंधे, घुटने और पैर, सिर, कंधे, घुटने और पैर, साथ में आँख और कान, साथ में मुँह और नाक सिर, कंधे, घुटने और पैर, घुटने और पेर
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अब आप समझ गए हैं कि इस गाने को दो भाषाओं में किस तरह गाना है। क्या आप इसे अन्य किसी भाषा में गा सकते हैं? 
इस गीत को अलग-अलग लय और गति (तेज और धीमी) में गाने का प्रयास करें।

गतिविधि 8 जन्मदिवस का गीत सीखिए !


जन्मदिवस हर किसी के लिए महत्वपूर्ण दिवस होता है। आइए, एक जन्मदिवस का गीत सीखो
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क्या आप अपना मनपसंद मीत मा सकते हैं। ताली बजाते हुए लय बनाने का प्रयास करें।

बोल
जन्मदिनं इद आधी प्रिय सखे 
शान्तनों तु ते सर्वदा मुदग 
प्रार्थयामहे भव शतायुषी 
ईश्वरः सदा स्वं च रक्षतु 
पुण्य कर्मणा कीर्तिमार्जय
जीवनं तय भवतु सार्थकम्

अर्थ
प्रिय मित्र, जन्मदिन की बधाई। आनंद और अच्छी वस्तुएं आपके पास आती रहें। 
हम आपके स्वस्थ जीवन की कामना करते है। आप दीर्घायु हों, ईश्वर आपकी रक्षा करें। 
आप अपने अच्छे कार्यों के लिए पहुंचाने जाएं। आपका जीवन उद्देश्यपूर्ण हो।

रचनाकार- यामी तेजोमयानद
भाषा — संस्कृत
शिक्षक संकेत 
कक्षा में बच्चे का जन्मदिनम गीत, नृत्य और सुभकामना मंदेश के कार्ड बराकर मनाणे इस गतिविधि द्वारा स्वाभाविक रूप से कला का समावश होगा।

गतिविधि 9 एक रोचक कहानी


प्राचीन भारतीय ग्रंथों के अनुसार विभिन्न पशु-पक्षी ऐसी ध्वनियों द्वारा संचार करते हैं जो विभिन्न स्वरों के अनुरूप होती है। प्राचीन संस्कृत ग्रंथ नारदीय शिक्षा विभिन्न पशु-पक्षी की ध्वनियों पर आधारित है। आइए, यह गीत सीखें।
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बोल 
सा मोर के लिए जो बहुत रंगीन है। 
रे बैल के लिए जो वास्तव में मजबूत है। 
बकरी के लिए जो इधर-उधर दौड़ती है। 
बगुले के लिए जो सफेद एवं लंबा है। 
कोयल के लिए जो प्यारी एवं मीठी है। 
घोड़े के लिए जो तेज दौड़ता है। 
नि हाथी के लिए जो विशालकाय है।
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यह हमें फिर से सा पर ले आएगा- 
सा रे ग म प ध नि सां । 
सां नि ध प म ग रे सा प सा ॥
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गतिविधि 10 पशु-पक्षियों की श्रुति या स्वर


ऐसे पशु-पक्षियों के स्वरों की नकल करें जिनके स्वर ऊँचे और मंद ध्वनि वाले हो?

उन पशु-पक्षियों के नामों की सूची बनाइए जिनकी ध्वनि आपको अपने आस-पास सुनाई देती है। आप अपने मित्रों और परिवार के सदस्यों को भी इन ध्वनियों की नकल करके सुना सकते हैं।
टिप्णी







गतिविधि 11 सरगम या अलंकार गाने की विधि


जिस तरह एक घर बनाने के लिए ईंटों का सहारा लिया जाता है उसी तरह संगीत को भी स्वरों द्वारा निर्मित किया जाता है। सात स्वर तो आपको याद ही होंगे जो आपने पहले सीखे हैं? आइए, उन्हें सुनें और एक बार साथ मिलकर गाएँ। अब और कुछ सरगम या अलंकार सीखें। अलंकार यानी आभूषण, संगीत में स्वर इन आभूषणों के समान हैं।

सासा रेरे गग ममपप धधनिनि सांसां ।।
सांसां निनि घच पपमम गगरेरे सासा ।। 
सारेग रेगम गमप मपध पधनि धनिसां । 
सांनिध निधप पमग मगरे गरेसा ।।

इस अभ्यास में आप कितनी पंक्तियों को गा सके? यदि आप इन सभी पंक्तियों को नहीं गा सके तो कोई बात नहीं! अभ्यास करते रहें।



गतिविधि 12 स्वर द्वारा अलंकार या सरगम - गाएँ और याद करें

क्या आप जानते है?
हम स्वरमान (पिच) शब्द का उपयोग यह समझाने के लिए करते हैं कि कोई स्वर कितना ऊँचा और नीचा है। सुर में गाना कैसे सीखें, यह समझने के लिए हम तंबूरा या तानपूरा नामक वाद्ययंत्र का उपयोग करते हैं। तंबूरा एक लंबी गर्दन वाला तार मुक्त वाघ है। लेकिन अब 'इलेक्ट्रॉनिक तंबूरा और यहाँ तक कि 'तंबूरा ऐप्स भी उपलब्ध है। भारतीय संगीत का अभ्यास करते समय, अपने स्वरमान से मेल खाने के लिए तंबूरा का उपयोग करना बहुत सहायक होता है।
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तानपूरा

कंठ अभ्यास
(i) 
सा ग सा ग
सा ग म ग रे सा
रे ग रे ग,
रे ग प म ग रे
सा सा सा

अब कुछ शब्दों को ताली के साथ ऊपर दिए गए स्वरों के अनुसार गाएँ-
आओ आओ
खुशियाँ मनाएँ
गाओ गाओ,
सब मिल गाएँ

(ii) आइए, एक और सरगम या अलंकार गाएँ।
सा सा सा रे
रे रे रे ग
ग ग ग म
म म म प
ऊपर दिए गए अलंकार या सरगम को आगे बढ़ाते हुए खाली स्थान में पूरा करें और गाए।
------------------
नि नि नि सां
(विशेष- जब 'सा' के ऊपर बिंदु होता है तो इसका अर्थ है कि आपको सां' को ऊँचे स्वर में गाना है।)

गतिविधि 13 तालम् या ताल को सीखें


आपने सीखा कि तालम् या ताल एक लय का स्वरूप (पैटर्न) है। संगीत में हम ताल का उपयोग लय बनाए रखने के लिए करते हैं। प्रत्येक तालम् या ताल की मात्रा (बीट्स) एक निश्चित संख्या होती है जो दोहराई जाती है। यह ताल चक्र कहलाता है। आदि ताल और कहरवा तो आपने सीख लिया जिसमें आठ इकाइयों है।
एक और ताल जो छह मात्रा का है. जिसका नाम दादरा है। आइए, इसको बोलते हैं-
धा धि ना / था ति ना


गतिविधि 14 यह गीत सुनें और उसके साथ ताल देने का प्रयास करें


श्यामले मीनाक्षी
बोल
श्यामले मीनाक्षी 
सुन्दरेश्वर साक्षी 
शंकरी गुरुगुह 
समुद्भवे शिवेव 
पामर मोचनी 
पंकज लोचनी 
प‌द्मासना वाणी 
हरि लक्ष्मी विनुले शाम्भवी 
श्यामले मीनाक्षी

गीत के बारे में
यह देवी मीनाक्षी का गीत है। वे शिव की पत्नी हैं और सन्मुख की माता है।
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संयोजक - मुडुल्यानि दीक्षितर
भाषा - संस्कृत 
रागम- शंकराभरणम् 
तालम् — आदि‍


कुछ संगीत संबंधी शब्दावली

संगीत में हम निम्नलिखित शब्दावली का उपयोग करते हैं।
ताल या तालम
निश्चित नियमित (रिदमिक साइकल) बोल
लय या लयम्
गति (टेम्पो)
सम् या सामम्
ताल की पहली मात्रा (बीट) जिस इकाई से ताल की शुरुआत होती है।
आवर्तन या आवर्तनम्
ताल का एक चक्र
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