
16 कल्पना करें
अभिनय 2 दृश्य 3 - परिस्थितिजन्य धारणाएँ
गतिविधि 7 जादू का गड्ढा (परिस्थिति)
आइए, हम एक घेरे में बैठें। इसके बाद सबकी गिनती कर लेंगे। शिक्षक कोई भी एक अंक बोलेंगे। यदि आपका अंक बोला जाए तो आपको घेरे के मध्य में जाना होगा। जहाँ अदृश्य जादुई गड्ढा प्रदर्शित है। पिछली बार की तरह किसी वस्तु को चुनने के बजाय आप किसी परिस्थिति में कूद पड़ें और ऐसा व्यवहार करें जैसे आप उस परिस्थिति का भाग हो। अन्य बच्चे परिस्थिति का अनुमान लगाएँगे। आपस में बात न करें।
सुझाव
जब कुछ क्रियाओं को एक साथ किया जाता है, तब परिस्थितियाँ निर्मित होती हैं।
स्तर 1
तैयार होकर विद्यालय आना, गिर जाना और चिकित्सक के पास जाना।
स्तर 2
दो छात्र एक परिस्थिति का अभिनय करते हैं, एक छात्र उस परिस्थिति को आरंभ करता है और दूसरा छात्र उसमें सम्मिलित होता है। उदाहरण के लिए गिरने पर चिकित्सक के पास जाना। यहाँ एक रोगी और दूसरा चिकित्सक है।
आइए, कुछ अलग व्यक्ति बनें और नई रोमांचक परिस्थितियों में उतरकर एक नई दुनिया बनाएँ! यह सब कैसे होता है? आपके मस्तिष्क के माध्यम से! आप जो सोचते हैं, यह वास्तविकता बन जाती है!
आप सीखेंगे
आंगिक भाषा, आत्मविश्वास, रचनात्मकता, संचार, कल्पना करना और सुनने की क्षमता को विकसित काना आदि।
आइए, घेरा बनाएँ
चर्चा एवं प्रतिक्रिया
• क्या आप परिस्थितियाँ बनाने में सक्षम थे? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
• क्या परिस्थितियाँ आपके अनुभव पर आधारित थीं (देखी गई या घटित हो रही) या काल्पनिक थीं?
• क्या आप अपनी अन्य पाठ्यपुस्तकों के पाठों से प्रेरित होकर परिस्थितियाँ बना सकते हैं?
घेरा समय की टिप्पणियाँ
अब आप समझने लगे हैं कि क्रिया (आंगिक भाषा) और अभिव्यक्ति को मिलाकर 'संचार' को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। इसके लिए 'स्चनात्मकता' और 'कल्पनाशीलता' की आवश्यकता होती है। आप देख रहे हैं कि किस प्रकार आप न केवल इन शब्दों को समझ रहे हैं जो रंगमंच के मूल तत्व हैं, अपितु आपके भीतर इन कौशलों का विकास भी हो रहा है।
इन दोनों परिस्थितियों में क्या हो रहा है?
इनको गतिविधियों (आंगिक भाषा) और भावों को बारोको से देखें और वर्णन करें।
गतिविधि 8 वस्तु के अन्य उपयोग
निर्देश- शिक्षक एक बच्चे को बुलाकर एक वस्तु देता है (कोई भी कक्षा की वस्तु, जैसे- पेन, डस्टर, चॉक का टुकड़ा आदि), उस वस्तु का उपयोग इसके मूल कार्य के अतिरिक्त किसी अन्य वस्तु के रूप में किया जाना चाहिए। अन्य बच्चे उस पूर्व कल्पित वस्तु का अनुमान लगाएँ। फिर वही वस्तु अगले बच्चे को दे दी जाएगी। वह इसका उपयोग किसी अन्य वस्तु के रूप में करेगा और दूसरे बच्चे अनुमान लगाएँगे। इसके बाद अगला बच्चा इस वस्तु का उपयोग किसी अन्य रूप में करेगा (दूसरों ने जो कुछ किया, उसे दोहराया नहीं जा सकता)।
याद रखें- अभिनय की गई वस्तु का आकार मूल वस्तु के आकार के समान होना चाहिए। उदाहरण के लिए कलम को टूथब्रश या कंघी के रूप में दर्शाया जा सकता है क्योंकि इनका आकार समान है। इसका उपयोग किताब, हेलमेट या जूते आदि के रूप में नहीं किया जा सकता, क्योंकि ये वस्तुएँ आकार में बहुत अलग हैं।
यह लड़की बोतल का उपयोग इस प्रकार कर रही है
यह लड़का पेंसिल का उपयोग इस प्रकार कर रहा है-
स्तर 1
पेन, चॉक, डस्टर आदि।
स्तर 2
पुस्तक, बैग आदि (कुछ ऐसा जो स्तर । में दी गई वस्तुओं से बड़ा हो)।
सुझाव
आंगिक भाषा के साथ भावों का उपयोग करने से संचार सुगम होगा।
आइए, घेरा बनाएँ
चर्चा एवं प्रतिक्रिया
• आपको गतिविधि के किस भाग में सबसे अधिक आनंद आया? और क्यों?
• किसी वस्तु के पुनः उपयोग की कल्पना करना सरल था या कठिन?
• आपने कितनी वस्तुओं का सही अनुमान लगाया?
• गतिविधि में आप कोई अन्य चीज जोड़ना चाहेंगे?
घेरा समय की टिप्पणियाँ
| अभ्यास | ||
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| वस्तु - पेंसिल बॉक्स | वस्तु - रूमाल | वस्तु - पानी की बोतल |
| लैपटॉप | ||
| खजाने का बक्सा | ||
| दरवाजा खोलना | ||
दृश्य 4 - ध्वनि का अनुभव
आवश्यकताएँ- लोक वाद्ययंत्र- तमटे, ताल वाद्य, घंटियाँ, रिकार्ड किया गया वाद्य संगीत (कोई स्वर या गीत का उपयोग नहीं किया जाएगा)।
निर्देश- शिक्षक ध्वनि बजाएँगे। आप अपनी आँखें बंद कर लें और ध्वनि को पूरे ध्यान से सुनें।
आप जिन भावनाओं का अनुभव कर रहे हैं उनका अवलोकन करें। आपके ध्यान में क्या-क्या चित्र आ रहे हैं? अब अपनी आँखें खोलें और रचनात्मक तरीके से उन्हें व्यक्त करें। (आप जो अनुभव करते हैं उसे नृत्य, आंगिक गति और प्रतिक्रिया द्वारा अभिव्यक्त करें। आपस में बात न करें)।
अब हम अगले स्तर 'ध्वनि' पर पहुँच गए हैं। ध्वनि में विचारों और भावनाओं को सामने लाने का गुण होता है। जब आप पक्षियों के चहचहाने की ध्वनि सुनते हैं तो आपको कैसा अनुभव होता है? आप नदी के बहने या समुद्र की लहरों की ध्वनि के बारे में क्या अनुभव करते हैं? प्रत्येक ध्वनि का अलग-अलग व्यक्ति के लिए अलग-अलग अर्थ हो सकता है। आइए, देखें कि आप जो सुनते हैं उसे आप कैसे अर्थ दे सकते हैं। प्रत्येक संगीत अंश आपको क्या संकेत दे रहा है?
गतिविधि 9 ध्वनि के अन्य उपयोग
स्तर 1
स्थानीय ढोलों की लय, मुँह से बजने वाली सीटी की धुन आदि। अलग-अलग मनोदशाओं और भावनाओं को प्रस्तुत करने के लिए सितार, बाँसुरी, वायलिन आदि द्वारा रिकार्ड किए गए संगीत का प्रयोग किया सकता है।
स्तर 2
पहली गतिविधि व्यक्तिगत है परंतु यहाँ प्रतिक्रियाएँ समूह में दर्शानी है। आप जो ध्वनियाँ सुनते हैं उस मनोदशा के लिए एक सरल दृश्य बनाते हैं। उदाहरण के लिए त्यौहार को मनाने के लिए एक जीवंत संगीत अंश की परिकल्पना की जा सकती है; ढोल की गहरी ध्वनि को रहस्यात्मक दृश्य के रूप में दर्शाया जा सकता है।
आइए, घेरा बनाएँ
चर्चा एवं प्रतिक्रिया
• क्या ध्वनियाँ आपको सहज अभिनय के लिए प्रेरित करती हैं?
• आप ध्वनि के अनुसार अभिनय करने को सरल मानते हैं या कठिन?
• क्या आप कक्षा की किसी वस्तु के माध्यम से कोई ध्वनि उत्पन्न कर सकते हैं?
• आपने स्वयं के बारे में कौन - सी नई बात सीखी?
घेरा समय की टिप्पणियाँ
अब तक आपने इन ध्वनियों को कई बार सुना होगा, परंतु आप इसके भीतर छिपे अर्थ को नहीं जान पाए होंगे। । हमने हमने अभी अभ जो कुछ किया, उसे ही 'ध्यान से सुनना' कहते हैं। यह साधारण सुनने से अलग है।
जब आप ध्वनि या बोले गए शब्द को समझते, ग्रहण करते और साथ ही साथ उस पर सही प्रतिक्रिया देते हैं तो इसे 'ध्यान से सुनना' कहते हैं। आप प्रतिदिन कक्षा में कई प्रकार की ध्वनियाँ सुनते हैं, लेकिन जब शिक्षक कुछ बोलते हैं तब आप 'ध्यान से सुनते' हैं।
क्या यह देखना अद्भुत नहीं है कि हम बिना बोले या भाषा के उपयोग किए, संचार से जुड़ी गतिविधियाँ कर रहे हैं। सामान्यतया हम बोलने को ही संचार समझ लेते हैं। यहाँ तक कि हम कहानियाँ सुनाने में भी दृश्य निर्मित करने के लिए चेहरा, शरीर, ध्वनि का उपयोग करते हैं। क्या हमें भाषा की आवश्यकता पड़ती है? इसके बारे में सोचिए, पर अभी हम भाषा का उपयोग करना प्रारंभ करते हैं।