
20 कला-विधाओं का एकीकरण
क्या आप जानते है
बाँसुरी
आपकी पाठ्यपुस्तक का नाम बाँसुरी है। बाँसुरी जादुई और मधुर ध्वनि वाला एक संगीत वाद्ययंत्र है। यह प्रत्येक व्यक्ति को अच्छी लगती है। क्या आप जानते है कि बाँसुरी बाँस से बनाई जाती है? आप इसे स्वयं भी बना सकते हैं और बजा सकते हैं। जब आप किसी मेले में जाते है तो वहाँ सदैव कोई न कोई खिलौने बेचता और बाँसुरी बजाते हुए मिल जाता है और आप सभी इसकी ध्वनि से आकर्षित हो जाते है। वही बाँसुरी नृत्य प्रदर्शन में बजाई जाती है और नाटक में सामग्री के रूप में उपयोग की जा सकती है। बाँसुरी को कागज, मिट्टी या बाँस से बनाया जा सकता है। आप मैदान या जंगल में किसी व्यक्ति का बाँसुरी बजाते हुए चित्र भी बना सकते हैं।
सभी कलाएँ एक-दूसरे से भिन्न हैं, साथ ही उन सभी में बहुत-सी सामान्य विशेषताएँ भी हैं और वे एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। उदाहरण के लिए सभी कलाएँ, जैसे- संगीत, नृत्य, रंगमंच और दृश्य कला स्वर, लय, भाव और ताल से संबंधित हैं। इन सभी के पास अपनी गति, लय और वार्तालाप हेतु अपनी एक भाषा है। आप अपनी भावनाएँ कला के माध्यम से व्यक्त कर सकते हैं। यहाँ हमारे पास कुछ गतिविधियाँ हैं जो सभी कला-विधाओं को एक साथ जोड़ती हैं। आप इन सभी गतिविधियों को कर सकते हैं और इनका आनंद ले सकते हैं।
गतिविधि 1 कला-विधाओं का एकीकरण
यहाँ पर चार पंक्ति का उदाहरण दिया गया है जो कि संस्कृत भाषा में नंदिकेश्वर द्वारा रचित है। जिसका वर्णन हजार वर्ष पहले लिखे गए ग्रंथ अभिनय दर्पण से लिया गया है। प्रायः कलाकार अपनी प्रस्तुति आरंभ करने से पहले इसको सुनाते हैं। आप इसे ऊँचे स्वर में हाव-भाव के साथ पढ़ सकते हैं। आप क्यू.आर. कोड को स्कैन करके वीडियो भी देख सकते हैं।
आङ्गिकं भुवनं यस्य, वाचिकं सर्व वाङ्गयम्।
आहार्य चन्द्र तारादि, तं वन्दे सात्त्विकं शिवम् ॥
अर्थ- जहाँ भौतिक शरीर ब्रह्मांड है, वाणी या गीत सभी ध्वनियों का सार है, अलंकार चंद्रमा और सितारे हैं, मैं उस परम दिव्य परमेश्वर को नमन करता हूँ।
यह उन सभी चार कला विधाओं को एक साथ जोड़ता है जिन्हें आप सीख रहे हैं-
आंगिक - संचलन, क्रिया और अभिव्यक्ति के माध्यम से शारीरिक प्रस्तुतीकरण।
वाचिक - भाषण, संवाद, गीत और शब्द।
आहार्य - वेशभूषा, आभूषण, मूर्तिकला और चित्रकला।
सात्विक - कलाकारों और दर्शकों के लिए गहरी भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभूति।
गतिविधि 2 बाँसुरी
आप बाँसुरी बना सकते हैं जिसके लिए आपको केवल मोटे चार्ट पेपर, गोंद, कैंची और कुछ रंगों या रंग भरी पेंसिल की आवश्यकता होगी।
• एक चार्ट पेपर पर एक बाँसुरी का एक चित्र बनाएँ। पेपर को बेलनाकार मोड़ें और किनारों को गोंद से चिपकाएँ। इसमें छोटे-छोटे छेद करें। लीजिए, आपकी बाँसुरी तैयार है।
• आप बाँसुरी पर चित्र आदि भी चिपका या बना सकते हैं। इसके चारों ओर कई अन्य सामग्री भी जोड़ सकते हैं, जैसे- व्यक्ति, जंगल, फूल और जानवर आदि का चित्र।
• अब बाँसुरी को विषयवस्तु बनाकर उसके ऊपर बने चित्रों का प्रयोग करते हुए एक कहानी बनाएँ और कक्षा में प्रस्तुत करें।
• आप कहानी सुनाने के लिए अपने आस-पास की किसी भी वस्तु का उपयोग कर सकते हैं और उसे बाँसुरी के रूप में तैयार कर सकते हैं। बाँसुरी को आप वस्तु के रूप में प्रयोग कर सकते हैं।
• आप अपने आपको वाद्ययंत्र बाँसुरी के रूप में कल्पना करें और अभिनय करें।
• बाँसुरी में गीत या धुन बजाते हुए सरल गतिविधियाँ कर सकते हैं।
शिक्षक संकेत
बच्चों को बाँसुरी की ध्वनि सुनाएँ। उन्हें निम्नलिखित कल्पना करने के लिए कहें- भगवान श्रीकृष्ण खेतों में गायों के झुंड के साथ बाँसुरी बजा रहे हैं। वे इस विषयवस्तु पर एक लोक गीत भी सीख सकते हैं। सभी गतिविधियों को करते समय पूरी कक्षा को 4-5 विद्यार्थियों के समूहों में विभाजित करें और सभी बच्चों को इसमें सम्मिलित करें।
गतिविधि 3 प्रकृति के निकट
हम सभी प्रकृति से प्रेम करते हैं और इसे अनुभव करने का प्रयास करते हैं। हम प्रकृति के निकट रहते हैं और विभिन्न प्रकार की ध्वनियों, रंगों और हरियाली का आनंद लेते हैं। आप सभी कक्षा में जंगल का चित्र बनाने का प्रयास कर सकते हैं।
• पृष्ठ के बीच में एक फूल बनाएँ। आपके समूह से प्रत्येक विद्यार्थी उस फूल के आस-पास कुछ न कुछ जोड़ें और किसी बगीचे या जंगल का चित्र बनाएँ।
• ऐसी कहानी बनाएँ जिसमें फूल, पक्षी, पेड़ और जानवर आदि सम्मिलित हों।
• ऐसे घूमें जैसे आप किसी जंगल में चल रहे हों।
• क्या आप उत्साहित और जिज्ञासु हैं?
• आप जो कल्पना करते हैं, उस पर प्रतिक्रिया करें (आपका पसंदीदा जानवर, फूलों की सुगंध, बड़ी चट्टानें आदि)।
• आप किस प्रकार की ध्वनियाँ जंगल या बगीचे में सुनना चाहेंगे (पक्षी चहचहाते हुए, पानी बहते हुए आदि)? उन ध्वनियों को निकालने का प्रयास करें।
• ऐसा अनुभव करें कि आप किसी जंगल या पार्क जैसे प्राकृतिक परिवेश में हैं।
शिक्षक संकेत
बच्च्चे जानवरों, पक्षियों, प्रकृति आदि पर एक गीत सीख सकते हैं। उपर्युक्त सभी गतिविधियों को चार से पाँच विद्यार्थियों के समूह बनाकर किया जा सकता है और पूरी कक्षा को इसमें सम्मलित किया जा सकता है।
गतिविधि 4 त्यौहारों को मनाना
हम सभी विभिन्न त्यौहार मनाते हैं। हमें सामान्यतया बड़े त्यौहारों के लिए अवकाश मिलता है, वे हमारे जीवन में उत्साह और रंग लाते हैं। कोई भी त्यौहार, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, उसे मनाने से हमें प्रसन्नता मिलती है क्योंकि उस समय हम नए कपड़े खरीदते हैं, अच्छा खाना खाते हैं, मित्रों और प्रियजनों से मिलते हैं, घर की साफ-सफाई करते हैं और उन्हें सजाते हैं।
शिक्षक संकेत
इस गतिविधि के पीछे मुख्य विचार विभिन्न कला विधाओं के बीच संबंध निर्मित करना है।
> बच्चे त्यौहार का गीत सीख सकते हैं।
> गतिविधियों को विद्यालय की प्रार्थनासभा में विशेष अवसरों पर प्रस्तुत किया जा सकता है। कक्षा को विषय (थीम) के अनुसार विभिन्न कला विधाओं के आधार पर समूहों में बॉईजा सकता है। इससे बच्चों को दर्शकों का सामना करने और कला विधाओं के बीच परस्पर संबंध और समझ बनाने का अवसर मिलेगा।
• कोई ऐसा त्यौहार चुनें जिसे हम साथ मिलकर मनाते हैं।
• आप अपने समूह में चर्चा करें कि किस त्यौहार को किस प्रकार मनाते हैं और उसके लिए क्या- क्या तैयारियों की आवश्यकता है? कौन-से विशेष व्यंजन या भोजन तैयार किए जाते हैं? आप अपने घर को कैसे सजाते हैं और कौन-से गीत और नृत्य उस त्यौहार से संबंधित हैं?
विभिन्न समूह निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं-
• किसी विशेष त्यौहार के लिए रंगोली या कागज के टुकड़ों से अन्य सजावट के सामान बनाएँ।
• उस त्यौहार पर आधारित एक गीत सीखें।
• इसे रसोई के बर्तनों का उपयोग करते हुए गाएँ।
• किसी त्यौहार को मनाते समय घटी हुई घटना को साझा करें।
• त्यौहार से संबंधित किसी एक कहानी को साझा करें और उससे संबंधित अभिनय करें।
• संगीत में ध्वनि के लिए रसोई के बर्तनों का उपयोग करें औरत्यौहार गीत के अभिनय के लिय सरल एवं सहज मुद्राओं का उपयोग करें।
• इस अवसर पर पहने जाने वाले पारम्परिक वस्त्रों का चित्र बनाएँ।