अध्याय - 6
निर्भरता एक - दुसरे पर
चर्चा कीजिए
• क्या चित्र में मौजूद कोई भी पक्षी, पशु, कीट और पौधे आपके साथ आपके घर में रहते हैं?
• क्या आप और आपका परिवार इनका ध्यान रखते हैं?
पता लगाइए
• क्या आपने कुछ और भी पशु, पक्षी और कीट देखे हैं जो दिए गए चित्र में नहीं हैं?
• उनके नाम जानने की कोशिश कीजिए और उन्हें नीचे दी गई तालिका में लिखिए। एक उदाहरण आपके लिए दिया गया है।
| पशु/पक्षी/कीट का नाम | वह स्थान, जहाँ आपने इन्हें देखा है। |
| बंदर | पेड़ |
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कुछ पौधों और जानवरों को हम अपने घर में लाते हैं, जबकि कुछ अपने आप ही आ जाते हैं। कभी-कभी हम उन्हें अपने घर में प्रसन्नतापूर्वक रहने देते हैं, लेकिन कभी-कभी हम उन्हें अपने घरों में पसंद नहीं करते।
• अपने परिवार में बड़ों से बातचीत कीजिए कि जब वे छोटे थे तो उन्होंने कौन-से पौधों और जानवरों को अपने घर में रखा था। इन पौधों और जानवरों के बारे में उनसे कुछ बातें बताने के लिए कहिए।
शिक्षक संकेत
सभी बच्चों से यह जानकारियाँ एकत्र करके एक सूची बनाएँ। इस सूची का सार तैयार करें और बच्चों को इस विषय में बातचीत करने के लिए प्रेरित करें।चर्चा कीजिए
दो-दो की जोड़ी में चर्चा कीजिए
• वे कौन-कौन से पशु-पक्षी और कीट हैं जो बिना बुलाए चले आते हैं?
• आपको क्या लगता है कि वे आपके घर में क्यों आते होंगे?
• अपने घर में उनकी उपस्थिति से आपको कैसा लगता है?
• आप उनमें से किसको पसंद करते हैं?
• यदि आप उन्हें पसंद नहीं करते, तो आप क्या करते हैं?
हम अपने घरों में भोजन, पानी और रहने का स्थान देकर कुछ पशु-पक्षियों और पौधों का ध्यान रखते हैं।
शिक्षक संकेत
बच्चों से इस बात पर जोर दें कि जानवरों से डर लगने या उन्हें पसंद न करने पर भी हमें उन्हें मारना नहीं है। आमतौर पर जानवर हमें तब तक नुकसान नहीं पहुंचाते, जब तक कि वे हमसे खतरा महसूस नहीं करते।
आम का पेड़
एक दिन की बात है। एक छोटा लड़का शंभु अपने पिता के साथ जंगल से जा रहा था। चलते-चलते वे आम के एक विशाल पेड़ की छाया में बैठ गए। आम का यह पेड़ पक्षियों, गिलहरियों, बंदरों और बहुत से जीवों का घर था। शंभु ने देखा कि एक बंदर आम खाकर उसकी गुठली फेंक रहा था। उसने यह बात अपने पिता को बताई।
पिता ने कहा, “शंभु! क्या तुम जानते हो कि इस गुठली से एक नया पौधा उगेगा?” इस तरह से पशु-पक्षी और पौधे एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
तभी पेड़ से एक आम गिरा और शंभु उसे उठाने के लिए दौड़ा। उसने कहा, "देखिए! मुझे भी एक आम मिला।"
शंभु के पिता ने बताया, "हमें पौधों से केवल फल ही नहीं, बल्कि सब्जियाँ और बहुत-सी अन्य वस्तुएँ भी मिलती हैं।"
"अरे हाँ, मुझे अब याद आया। आपने मुझे पहले भी बताया था। हमें दवाइयाँ, वस्त्रों के लिए रेशे और घर बनाने के लिए लकड़ियाँ भी पेड़-पौधों से ही मिलती हैं।"
चर्चा कीजिए
• हम पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों पर किस तरह निर्भर हैं?
• पेड़-पौधे किस तरह से पशु-पक्षियों की सहायता करते हैं?
• पशु-पक्षी किस तरह से पौधों की सहायता करते हैं?
• आप अपने आस-पास के स्थानों पर पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों का ध्यान कैसे रखते हैं?
• पशु-पक्षी और पेड़-पौधे हम पर किस तरह निर्भर हैं?
क्या आप जानते हैं?
हजारों ऐसे पेड़ हैं, जो अनजाने में ही गिलहरियों द्वारा लगाए गए हैं। दरअसल, गिलहरियाँ अपने भोजन के लिए बीज, मेवे आदि जमीन में दबाकर रखती हैं। बाद में वे भूल जाती हैं कि इन्हें कहाँ छिपाकर रखा था। इस तरह, बहुत से पशु-पक्षी और पेड़-पौधे विभिन्न तरीकों से प्रकृति में सामंजस्य बनाकर रखते हैं।
हमें एक-दूसरे की जरूरत है
हम जिस तरह से पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों को सुरक्षा, भोजन और रहने के लिए स्थान देते हैं, उसी तरह हम उनसे बहुत कुछ लेते भी हैं।
उदाहरण के लिए, गाय, भैंस और बकरियों से हमें दूध और उनका प्यारा साथ मिलता है। हम इन पशु-पक्षियों का सम्मान करते हैं और उनके साथ दया, देखभाल और करुणा भरा व्यवहार करते हैं।
पशु-पक्षी और पेड़-पौधे भोजन एवं आवास के लिए एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं। पशु-पक्षी बीजों को एक जगह से दूसरी जगह बिखेरने में पेड़-पौधों की सहायता करते हैं। वे अपनी विष्ठा से भूमि को उपजाऊ बनाते हैं। इससे पौधों को दूर-दूर तक यहाँ-वहाँ उगने और पनपने में सहायता मिलती है। हम भी भोजन, आवास, वस्त्र और साथ पाने के लिए पशु-पक्षियों और पौधों पर निर्भर रहते हैं।
शिक्षक संकेत
सभी विचार बिंदुओं को समेकित करते हुए सरल शब्दों में उनका सार प्रस्तुत कीजिए।
गतिविधि 1
किसी पशु-पक्षी के बारे में जानना
• अपने आस-पास के पशु-पक्षियों को ध्यान से देखिए।
• इनमें से किसी एक पशु, जैसे- बकरी, गाय, कुत्ता, बिल्ली या किसी पक्षी, जैसे – कौआ, कबूतर, गौरेया, तोता या बत्तख को चुनिए जिन्हें आप प्रायः देखते हैं।
• जब भी अवसर मिले, इन्हें बहुत ही ध्यान से देखिए। आप इनके लिए किसी कटोरे में पानी और अनाज के दाने भी रख सकते हैं।
लिखिए
किसी पशु या पक्षी का संक्षिप्त विवरण लिखिए -
• आपने जिस पशु या पक्षी का चयन किया है, उसका नाम और उसके बारे में लिखिए।
• आपने सबसे पहली बार उसे कब और कहाँ देखा था?
• क्या यह अकेला था या अपने मित्रों के साथ था?
• इसके चलने-फिरने, उड़ने आदि के बारे में लिखिए।
• यह कैसी आवाजें निकालता है?
• क्या आपने इसे खाते हुए, सोते हुए, अपने मित्रों से बातें करते या कभी-कभार झगड़ते हुए देखा है?
• क्या इसने कभी कुछ ऐसा किया है जिसे देखकर आप आश्चर्यचकित रह गए हों या फिर बहुत हँसे हों?
• कक्षा में अपने सहपाठियों के साथ ये अनुभव साझा कीजिए।
गतिविधि 2
हमेशा व्यस्त चतुर चीटियाँ!
आप यह गतिविधि अपने मित्र पौधे के पास, अपनी कक्षा में या अपने घर में कर सकते हैं। अपनी रसोई से निम्नलिखित तीन तरह की खाने की वस्तुएँ बहुत कम मात्रा में लेकर आइए -
• कुछ मीठा, जैसे- चीनी या गुड़;
• कुछ तला हुआ, जैसे- पापड़ या मुरक्कू;
• कुछ उबला या पका हुआ, जैसे- डबलरोटी (ब्रेड), चपाती, इडली, चावल या रागी।
इन तीनों तरह की खाने की वस्तुओं को खुले स्थान पर एक-एक फुट की दूरी बनाते हुए सीधी रेखा में रखिए।
अनुमान लगाइए
• इन्हें खाने कौन आएगा?
• उपर्युक्त वस्तुओं में उनका प्रिय भोजन क्या होगा?
• क्या चींटियाँ खाने की इन वस्तुओं के पास आएँगी?
• वे कहाँ से आएँगी?
• क्या सभी चींटियाँ दिखने में एक जैसी होंगी?
• खाने की किस वस्तु के पास वे सबसे पहले जाएँगी?
• कुल कितनी चींटियाँ खाने के लिए आएँगी?
• खाने की इन वस्तुओं का वे क्या करेंगी?
अपने मित्र पेड़ से मिलना
जब कभी आप बहुत उदास या परेशान हों या आपको गुस्सा आ रहा हो, तो आप अपने मित्र पेड़ के पास जा सकते हैं और उसे बता सकते हैं कि इस समय आप कैसा महसूस कर रहे हैं।
शिक्षक संकेत
छोटे बच्चों को पेड़ों के साथ मित्रता करने के लिए प्रोत्साहित करें। यह दूसरों के प्रति संवेदनशीलता उत्पन्न करने का बहुत ही सशक्त और प्रभावशाली तरीका है। शांत और अपने में रहने वाले अंतर्मुखी बच्चों के लिए यह गतिविधि अपनी भावनाएँ साझा करने में बहुत सहायक है।
आप अपने मित्र पेड़ के साथ अपनी खुशियाँ भी साझा कर सकते हैं।
अपने मित्र पेड़ के साथ अपनी भावनाएँ साझा करके आपको कैसा लगा?
पेड़ों को हमारी देखभाल और सहायता की आवश्यकता होती है और पशु-पक्षियों को भी। हम सब एक-दूसरे की सहायता कर सकते हैं।
गतिविधि 3
अनुमान लगाइए मैं कौन हूँ'
दो-दो के जोड़े में बैठिए। जोड़े में से कोई एक किसी पशु, पक्षी, कीट या पेड़ का नाम सोचेगा और अपने साथी के कान में वह नाम फुसफुसाकर धीमे से कहेगा। ध्यान रहे कि आपको जोर से नहीं बोलना है। अब आपके साथी को शेष सहपाठियों के सामने उस पशु, पक्षी, कीट या पेड़ की तरह अभिनय करना होगा। इस अभिनय को देखकर बाकी बच्चे अनुमान लगाएँगे कि किसका अभिनय किया जा रहा है। इसके बाद आप जोड़े के अपने दूसरे साथी से भूमिकाएँ बदल सकते हैं।
उदाहरण के लिए-
• गोपा के मित्र अली ने उसके कान में फुसफुसाकर 'मेंढक' कहा। आप सोचकर बताइए कि गोपा ने क्या किया होगा?
• सुखिया के मित्र सूर्य ने उसके कान में फुसफुसाकर 'पीपल का पेड़' कहा। आप सोचकर बताइए कि सुखिया ने किस तरह से पीपल के पेड़ का अभिनय किया होगा?
आइए, मंथन करें।
(क) चर्चा कीजिए
1. हम पेड़-पौधों तथा पशु-पक्षियों पर किस तरह से निर्भर हैं?
2. हमें अपने परिवेश में मौजूद पेड़-पौधों व पशु-पक्षियों की देखभाल किस प्रकार से करनी चाहिए?
3. पेड़-पौधे और पशु-पक्षी हम पर किस तरह निर्भर हैं?
(ख) लिखिए
1. नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों या कीटों के नाम लिखिए -
(i) मुझे_______ को देखना बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि ______________
(ii) _______ से मिलकर मुझे बहुत हँसी आती है, क्योंकि_______________________
(iii) मेरे मित्र को _______ पसंद है, क्योंकि______________
(iv) मैं _______ क्योंकि का ध्यान रखना चाहूँगी/चाहूँगा, क्योंकि______________
2. (i) आपने ऊपर जिन पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों और कीटों की सूची बनाई है, उनमें से कौन आपको सबसे प्रिय है?
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(ii) आप उसे क्यों पसंद करते हैं?
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(iii) सबसे छोटे से लेकर सबसे बड़े तक जिन पशु-पक्षियों और कीटों को आपने देखा या जाना है, उनके बारे में लिखिए।
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(ग) चित्र बनाइए
1. उन पशुओं, पक्षियों और कीटों के नाम लिखिए और चित्र बनाइए जिनके -
(i) दो पैर होते हैं।
(iii) छह पैर होते हैं।
(ii) चार पैर होते हैं।
(iv) आठ पैर होते हैं।
क्या आप जानतेहैं?
एक सच्ची कहानी
यह कहानी तमिलनाडु के वल्पराई नामक एक बहुत ही छोटे से नगर की है। पूरे वर्ष वल्पराई के सभी स्कूलों में बच्चे और शिक्षक नगर में आने वाले पक्षियों की तलाश करते हैं और उनके आँकड़े जुटाते हैं। वे वर्षा ऋतु के तुरंत बाद सर्दियों के महीनों में इन पक्षियों के विशेष स्वागत की तैयारी करते हैं। इन पक्षियों का नाम है- ग्रे वाग्टेला स्थानीय भाषा में इन पक्षियों को सामान्यतः वालट्टी कुरुवी कहते हैं।
शीतऋतु में ग्रे वाग्टेल पर्वतीय क्षेत्रों से भारत के गर्म प्रदेशों में आती हैं और कुछ महीनों के लिए यहीं रुकती हैं। वल्पराई में जब पहली ग्रे वाग्टेल पहुँचती है, तो बच्चे व शिक्षक इन पक्षियों के स्वागत में बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर उनके आगमन का उत्सव मनाते हैं और एक-दूसरे को मिठाई बाँटते हैं।
• क्या आप जानते हैं कि इन पक्षियों को वाग्टेल क्यों कहा जाता है? पता लगाइए।
• आप इस कहानी को क्या शीर्षक देना चाहेंगे?
