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अध्याय 7

योग का अभ्यास (योग साधना)

योग 6

परिचय

अभी तक हमने ‘यम’ एवं ‘नियम’ का अध्ययन किया है, जो कि हमें विनम्र बनने और अच्छी आदतों को विकसित करना सिखाते हैं। आइए, योग की अपनी यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाते हुए अष्टांग योग के तीसरे चरण अर्थात आसन के बारे में समझने का प्रयास करते हैं। क्या आपने कभी पशु-पक्षी, पर्वत , पेड़ इत्यादि का अवलोकन किया है? क्या कभी उनके आकार-प्रकार पर ध्यान दिया है? उन्हीं के आकार-प्रकार को हम अपने शरीर से बनाकर देखते हैं, तो बहुत आनंद आता है।

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चित्र के अनुसार अपने दोनों हाथ व दोनों पैरों को भूमि पर रखकर कमर के भाग को ऊपर उठाते हुए अपने शरीर से पर्वत की भाँति आकृति बनाते हैं।
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थोड़ा और ऊँचा उठने की कोशिश करते हैं व पेड़ के समान सशक्त बनते हैं। एक पैर पर खड़े होकर अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर जोड़ लीजिए और दूसरे पैर को पहले पैर के घुटने के थोड़ा ऊपर के स्थान पर रख लीजिए।

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एक तितली के समान बनने की कोशिश करते हुए, दोनों पैरों के पंजों को इस प्रकार से जोड़ें जैसे तितली के पंख होते हैं।

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अतं में एक मगरमच्छ की तरह आराम करने की कोशिश करें |

क्या आपको इन आसनों में आनंद आया? इनमें से आपको कौन-सा आसन सबसे अधिक पसंद आया?

योग में आपके द्वारा किए गए उपरोक्त आसनों के समानही और भी कई आसन हैं, जिससे हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है और हम स्वस्थ रह पाते हैं।

योग 7

प्रारंभिक अभ्यास

आइए, ऊर्जा से ऊर्जावान होने के लिए और योग आसनों के अभ्यास के लिए हम स्वयं को तैयार करें। उससे पहले थोड़ा आनंद लेते हैं और अपने पैर की एड़ियों के बल चलने की कोशिश करते हैं। क्या आपको एड़ियों के बल चलने में और सामान्य चलने में कोई अंतर महसूस हो रहा है?

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अब हम मेंढक की भाँति चारों ओर कूदने का प्रयास करते हैं।

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शिक्षकों के लिए निर्देश—

बच्चों को कुछ और आराम देने वाले अभ्यास, जैसे— विभिन्न प्रकार से चलना, जिसमें पंजों के बल, पैर के  अंदरूनी भाग की ओर भार देते हुए चलना अथवा बाएँ भाग की ओर भार देते हुए चलना, सामान्य रूप से कूदना, आगे व पीछे झुकना, गर्दन को घुमाना आदि सिखाए जा सकते हैं।

योग 8


मूलभूत आसन

शरीर की स्थिति के अनुसार सामान्यतया चार प्रकार के आसन होते हैं, जैसे—खड़े होकर, बैठकर, पेट के बल लेटकर और पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसन। प्रत्येक आसन की दो प्रारंभिक अवस्थाएँ होती हैं, प्रारंभिक अवस्था को ‘स्थिति’ व अंतिम अवस्था को ‘विश्रांति’ कहते हैं।

1. खड़े होकर किए जाने वाले आसन

स्थिति— ताड़ास
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विश्रांति — शिथिल ताड़ासन
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2. बैठकर किए जाने वाले आसन

स्थित— दंडासन
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विश्रांति — शिथिल दंडासन
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3. पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसन

स्थिति— पेट के बल लेट जाएँ।
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विश्रांति— मकरासन
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4. पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसन

स्थिति — पीठ के बल लेट जाइए।
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विश्रांति — शवासन
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शिक्षकों के लिए निर्देश—
बच्चों को अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने के लिए प्रोत्साहित करें तथा इसका महत्व समझाएँ। बच्चों को प्रोत्साहित करें कि वे चारों आसनों में स्थिति व विश्रांति की अवस्था में निपुणता प्राप्त करें तथा विश्रांति की अवस्था में उनकी समस्त पेशि‍याँ तनावमुक्त रहें और विद्यार्थीपूर्ण आराम की अवस्था में हों।

योग 9

आसन अभ्यास

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शिक्षक के मार्गदर्शन में कक्षा 3 में हम निम्नलिखित आसन करेंगे—

  1. वृक्षासन
  2. सुखासन
  3. वज्रासन
  4. भुजंगासन
  5. पवनमुक्तासन
बताए गए चरणों के अनुसार प्रत्येक आसन को करने का प्रयास कीजिए।

1. वृक्षासन


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स्थिति— ताड़ासन  

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प्रथम चरण बाएँ पैर को उठाते हुए दाएँ पैर की जाँघ, जहाँ से शुरू हो रही है, वहाँ लगा लीजिए।

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द्वितीय चरण दोनों हाथ ऊपर उठाते हुए हथेलियों को जोड़ लीजिए।

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तृतीय चरण दोनों हाथों को नीचे लाएँ।

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चतुर्थ चरण पैर को धीरे से नीचे लाएँ।

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विश्रांति की स्थिति में खड़े हो जाएँ।

दूसरे पैर से भी इसी आसन का अभ्यास करें। जिसमें दायाँ पैर बाएँ पैर की जाँघ, जहाँ से शुरू हो रही है वहाँ लगे।

शिक्षकों के लिए निर्देश—
विद्यार्थी जब आसन के दूसरे चरण में पहुँच जाएँ तब शारीरिक संतुलन बनाए रखने के लिए एक बिंदु पर कुछ सेकंड़ के लिए ध्यान केंद्रित करने की सलाह दें।

2. सुखासन

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स्थिति— दंडासन

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प्रथम चरण चित्र के अनुसार दाएँ पैर को मोड़ते हुए बाएँ पैर के नीचे रखें।

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द्वितीय चरण बाएँ पैर को मोड़ते हुए दाएँ पैर की जाँघ के नीचे रखें। कमर सीधी रखें।

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तृतीय चरण बाएँ पैर को सीधा करते हुए पूर्व स्थिति में लाएँ।

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चतुर्थ चरण दाएँ पैर को सीधा करें एवं पूर्व स्थिति में लाएँ।

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विश्रांति की स्थिति में शिथिल दंडासन की अवस्था में बैठ जाएँ।

3. वज्रासन

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स्थिति— दंडासन

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प्रथम चरण चित्र के अनुसार दाएँ पैर को मोड़ते हुए एड़ी को नितंबों के नीचे रखें।

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द्वितीय चरण बाएँ पैर को मोड़ते हुए एड़ी को नितंबों के नीचे रखें।

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तृतीय चरण दाएँ पैर को सीधा करके पूर्व स्थिति में लाएँ।

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चतुर्थ चरण बाएँ पैर को सीधा करके पूर्व स्थिति में लाएँ।

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विश्रांति की स्थिति में शिथिल दंडासन की मुद्रा में बैठें।
शिक्षकों के लिए निर्देश—
रीढ़ की हड्डी को तना हुआ और सीधा रखा जाना महत्वपूर्ण है। बच्चों को प्रोत्साहित करें कि वह कक्षा में अथवा घर पर भी बैठते समय कमर को सीधे रखने का अभ्यास करें।

4. भुजंगासन

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स्थिति— पेट के बल लेट जाएँ।

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प्रथम चरण चित्र के अनुसार हाथों को सीने के बराबर में बाहर की ओर, हथेलियाँ भूमि की ओर रखें। माथा भूमि से लगा रहे।

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द्वितीय चरण नाभि‍ से आगे के शरीर को ऊपर की ओर उठाएँ और आसमान की ओर देखें।

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तृतीय चरण शरीर को मस्तिष्क के साथ भूमि पर वापस लाएँ।

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चतुर्थ चरण चित्र के अनुसार दोनों हाथों को सिर के आगे की ओर लाएँ।

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विश्रांति — मकरासन की स्थिति में लेट जाएँ।

शिक्षकों के लिए निर्देश—
बच्चों को अपनी दाेनों जाँघें भूमि पर रखते हुए शरीर को ऊपर उठाने में सहायता करें। यह सुनिश्चित करें कि सभी क्रियाएँ बहुत धीरे-धीरे और सहजता के साथ हों। शरीर को ऊपर की ओर उठते समय कोहनियाँ शरीर से चिपकी हुई और भूमि को छूनी चाहिए। दोनों पंजे साथ-साथ होने चाहिए। छाती फूली हुई रहनी चाहिए।

5. पवनमुक्तासन

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स्थिति— पीठ के बल लेट जाएँ।

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प्रथम चरण दोनों पैर से 90° का कोण बनाते हुए ऊपर उठाएँ।

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द्वितीय चरण दोनों घुटनों को मोड़ते हुए चित्रानुसार दोनों हाथों से घुटनों को कसकर पकड़ें और ठुड्डी अथवा मस्तक को घुटने के ऊपरी भाग से छूने का प्रयास करें।

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तृतीय चरण सि‍र को भूमि पर रखें।

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चतुर्थ चरण दोनों हाथों को पैरों से अलग करें। और चित्रानुसार हाथों को सि‍र के ऊपर की ओर सीधा रखें।

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विश्रांति — शवासन का अभ्यास कर |

योग 10

प्राणायाम / श्वास-प्रश्वास अभ्यास

श्वास की अनुभूत
अपनी तर्जनी अँगुली को नाक के नीचे रखिए। क्या आप श्वास को अनुभव कर पा रहे हैं?

क्या अापने अपने अंदर जाते और बाहर आते श्वास को अनुभव किया है? आप अपनी बाई अथवा दाई किस नासि‍का से श्वास ले रहे हैं अथवा नासि‍का के दोनों छिद्रों से श्वास ले रहे हैं। 

अपनी ही श्वास की अनुभूति होना प्राणायाम की पहली स्थिति है जो कि‍ अष्टांग योग का चौथा चरण है।

मुद्रा का उपयोग करते हुए श्वसन जागरूकता की विधि
  1. दाएँ हाथ की तर्जनी अँगुली के ऊपरी सिरे को उसी हाथ के अँगूठे के ऊपरी सिरे पर चित्र के अनुसार रखें। यही क्रिया बाएँ हाथ से भी करें। अँगुलियों और हथेलियाें की इस स्थिति को चिन-मुद्रा कहा जाता है।
  2. दाएँ हाथ की हथेली को पेट पर रखें। बाएँ हाथ को चिन मुद्रा में रखें।
  3. प्रत्येक श्वास के साथ बाहर व अंदर की ओर गति कर रहे पेट पर ध्यान केंद्रित करें।

योग 11


‘ऊँ’ (ओम) का उच्चारण

मानव शरीर के आंतरिक तंत्र को सक्रिय करने के लिए एवं मन की शांति के लिए हम ‘ऊँ ’ का उच्चारण करते हैं। ‘ओम’ तीन प्रकार की ध्वनियों से बना है— अ, ऊ, म 

आइए, इसका अभ्यास करते हैं... 

अ, ऊ, म का उच्चारण

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  1. गहरी सांस लें एवं श्वास को बाहर निकालते हुए ‘अकार’ का उच्चारण करें।
  2. पेट के निचले हिस्से में स्पंदन को महसूस करें।
  3. गहरी सांस लें एवं श्वास को बाहर निकालते हुए ‘उकार’ का उच्चारण करें।
  4. सीने के आस-पास स्पंदन का अनुभव करें।
  5. पुन: गहरी सांस लें एवं श्वास को बाहर निकालते हुए ‘मकार’ का उच्चारण करें।
  6. मस्तिष्क के विविध स्थानों पर स्पंदनों का अनुभव करें।
इस अभ्यास को पाँच बार दोहराएँ।
क्या आपने अपने शरीर के विविध स्थानों पर स्पंदन को अनुभव किया है?

शिक्षकों के लिए निर्देश—
बच्चों को पीठ सीधी रखने का सुझाव दें। चिन-मुद्रा के समय अँगुली द्वारा अँगुठे को धीरे से दबाने हेतु प्रोत्साहित करें। सांस लेते समय स्पंदनों का अनभुव करते रहें और अभ्यास के उपरांत आपको जैसा महसूस हुआ, उस पर चर्चा करें।

योग 3

आँखों का व्यायाम

आँखों को स्वस्थ रखने के लिए हमें क्या करना चाहिए? आइए, कुछ सामान्य व्यायामों का नियमित अभ्यास करते हैं।
  1. अपनी हथेलियों से आँखों को आराम देनेे का प्रयास करें।
  2. आँखों की पुतलियों को दाएँ से बाएँ लेकर जाएँ।
  3. आँखों की पुतलियों को ऊपर और नीचे लेकर जाएँ।
  4. आँखों की पुतलियों की वक्र (तिरछी) गति करें।
  5. आँखों की पुतलियों को गोल-गोल घुमाएँ।

1. हथेलियाें के माध्यम से आँखों को आराम दीजिए

हम आँखों से लगातार देखते रहते हैं, जिसके कारण उनमें भी थकान हो जाती है, इसलिए हमें आँखों को निरंतर आराम देते रहना चाहिए।

हथेली से किए जाने वाले सामान्य व्यायाम
  1. हथेलियाेंको एक-दूसरे से तब तक मसलते रहें, जब तक वह गर्म ना हो जाएँ।
  2. हथेलियाें से कटोरी जैसा आकार बनाकर उनको धीरे से आँखों के ऊपर से रखें। ध्यान रखें कि पुतलियों पर दबाव नहीं डालना है।
  3. आँखों को कुछ देर बंद रखें।
  4. हथेलियाें को आँखों के ऊपर 10 से 15 सेकंड रखने के बाद धीरे से हाथों को हटा लें।

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2. आँखों की पुतलियों की दाएँ से बाएँ गति।

  1. आँखों को धीरे से बंद करें व कुछ क्षणों पश्चात उन्हें खोलें।
  2. आँखों की पुतलियों को दाएँ से बाएँ तथा बाएँ से दाएँ घुमाएँ और इस क्रिया को पाँच बार दोहराएँ।
  3. व्यायाम के बाद पूर्व वर्णित प्रकिया अनुसार हथेलियाें से आँखों को विश्राम दें।
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3. आँखों की पुतलियों की ऊपर से नीचे की ओर गति

  1. आँखों को धीरे से बंद करें उसके बाद धीरे से खोलें।
  2. आँखों की पुतलियों को पूर्ण रूप से नीचे की ओर ले जाएँ तथा उसके बाद पूरा ऊपर की ओर देखें। इस क्रिया को पाँच बार दोहराएँ।
  3. व्यायाम के बाद पूर्व वर्णित प्रकिया अनुसार हथेलियाें से आँखों को विश्राम दें।

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4. आँखों की पुतलियों की वक्र (तिरछी) गति

  1. आँखों को धीरे से बंद करें और धीरे से खोलें।
  2. आँखों की पुतलियों को दाएँ कोने से बाएँ कोने की ओर लेकर जाएँ। इसका तीन बार अभ्यास करें।
  3. धीरे से आँखें खोलें और बाएँ से दाएँ कोने की ओर ले जाएँ। इसका तीन बार अभ्यास करें।
  4. व्यायाम के बाद पूर्व वर्णित प्रकिया अनुसार हथेलियाें से आँखों को विश्राम दें।
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5. आँखों की पुतलियों की गोलाकार गति।

  1. आँखों को धीरे से बंद करें और खोलें।
  2. आँखों की पुतलियों को दाएँ ओर से नीचे की ओर लाते हुए बाएँ ओर से ऊपर की ओर ले जाते हुए एक चक्धूपर्ण करें। इस चक्र को पाँच बार करें।
  3. हथेलियों से आँखों को विश्राम दें।
  4. अब आँखों को विपरीत दिशा में गोलाकार घुमाएँ। पुतलियों को पूर्ण रूप से बाएँ ओर से ऊपर की ओर ले जाते हुए दाएँ ओर ले जाएँ तथा नीचे की ओर से होते हुए उन्हें बाएँ ओर ले जाकर चक्र पूरा करें। इस चक्र को पाँच बार करें।
  5. कुछ क्षणों के लिए आँखें बंद करें और धीरे-धीरे खोलें।
  6. हथेलियों से आँखों को विश्राम दें।
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शिक्षकों के लिए निर्देश—
विद्यार्थि‍यों को अपनी पीठ सीधी रखने के लिए प्रोत्साहित करें तथा इस व्यायाम को करते समय उन्हें बताएँ कि गर्दन को बिना हिलाए केवल आँखों की पुतलियों का ही व्यायाम करना है।

योग 12

क्रीड़ा योग

क्या आपको मित्रों के साथ खेलने में आनंद आता है? यहाँ आपके खेलने के लिए कुछ खेल हैं। इन खेलों को हम योग की विभिन्न क्रियाओं के माध्यम से खेलेंगे।

नामों की माला
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कैसे खेलें?

  • सभी विद्यार्थी एक गोल घेरे में बैठेंगे और स्वयं का नाम ऊँचे स्वर में उच्चारित करेंगे, अपने नाम के साथ ही अपने से पहले स्थान पर बैठे हुए विद्यार्थि‍यों के नाम को भी उच्चारित करेंगे।
  • पहला विद्यार्थी अपना नाम लेगा। दूसरा विद्यार्थी अपने पहले विद्यार्थी का नाम लेते हुए फिर अपना नाम लेगा और यह क्रम चलता रहेगा। यह खेल तब तक चलता रहेगा जब तक समस्त विद्यार्थि‍यों की बारी ना आ जाए।
शिक्षकों के लिए निर्देश—
इस खेल का उद्देश्य स्मृति , सजगता तथा सतर्कता में वृद्धि करना है। इस खेल को अन्य कई प्रकारों से भी खेला जा सकता है।
  • पने नाम के अतिरिक्त फल अथवा सब्जियों के नाम भी बोले जा सकते हैं।
  • नाम को उल्टे क्रम में भी बोला जा सकता है।
  • आँखें बंद करके भी नाम बोले जा सकते हैं।

दिमागी खेल

कैसे खेलें?

  • विद्यार्थी एक घेरे में बैठेंगे और एक से शुरू करके क्रमवार संख्या ऊँचे स्वर में बोलेंगे, 5 अथवा उसकी गणित संख्या (जैसे— 10, 15, 20...) आने पर विद्यार्थी को अकं के स्थान पर ‘भारत’ बोलना होगा।
  • जिस विद्यार्थी ने अपना क्रम आने पर ‘भारत’ का उच्चारण नहीं किया अथवा अंको का उच्चारण किया, वह खले से बाहर माना जाएगा।
  • यह खेल तब तक चलता रहेगा जब तक समस्त विद्यार्थी उसको खेलते रहने के लिए तत्पर रहेंगे।
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शिक्षकों के लिए निर्देश—
इस खेल का उद्देश्य एकाग्रता और जागरूकता की क्षमता का संवर्धन करना है। इस खेल में भी तरह-तरह के रुचिकर परिवर्तन किए जा सकते हैं।
  • जैसे कि‍ पाँच के अतिरिक्त अन्य संख्याओं का चयन अथवा अन्य नाम का चयन।

योग 13

जप-तप

कैसे खेलें?

  • विद्यार्थी गोल घेरे में या वर्ग में बैठेंगे और शिक्षक का अनुसरण करेंगे।
  • शिक्षक के ‘जप’ कहने पर सभी बच्चे अपनी हथेली ऊपर की ओर करेंगे तथा शिक्षक के ‘तप’ कहने पर हथेली नीचे की ओर करेंगे।
  • शिक्षक के ‘जप’ और ‘तप’ बोलने पर विद्यार्थी क्रिया का अनुसरण करेंगे, जो विद्यार्थी क्रिया का गलत अनुसरण करेगा, वह खले से बाहर हो जाएगा ।
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शिक्षकों के लिए निर्देश—
खले में विविधता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • मुट्ठी बनाना और खोलना।
  • हाथों को मोड़ना और खोलना।
  • जप-तप के स्थान पर ‘लव-कुश’ या ‘नल-नील’ का उपयोग कर सकते हैं।

श्वास की शक्ति

कैसे खेलें?

  • समस्त विद्यार्थी एक गोल घेरे में बैठेंगे।
  • पहला खिलाड़ी एक गहरी सांस लेगा और घेरे के बाहर से ‘ओम’ का उच्चारण करते हुए दौड़ना शुरू करेगा और जब तक उच्चारण चलता रहेगा, खिलाड़ी दौड़ता रहेगा। जैसे ही उच्चारण रुकेगा, वह उसी स्थान पर दौड़ना भी रोक देगा।
  • उक्त स्थान पर बैठा हुआ दूसरा खिलाड़ी खड़ा होगा और इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए गहरी सांस भर कर ‘ओम’ का उच्चारण करते हुए दौड़ना शुरू करेगा यह प्रक्रिया तब तक चलती रहेगी, जब तक समस्त खिलाड़ी इसमें भाग ना ले लें।
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शिक्षकों के लिए निर्देश—
इस खेल का उद्देश्य वाणी का संवर्धन तथा श्वास ग्रहण करने की क्षमता का विकास करना है। इस खेल को विभिन्न प्रकार के नाम अथवा ध्वनियों का उच्चारण करते हुए भी खेला जा सकता है।

योग 14

ऋषि पतंजलि कहते हैं

कैसे खेलें?

  • समस्त विद्यार्थी एक गोल घेरे में खड़े होंगे और शिक्षक के दिए हुए दिशानिर्देशों का अनुसरण करेंगे।
  • शिक्षक, पतंजलि के नाम के साथ कुछ दिशानिर्देश देंगे, जिस दिशानिर्देश में ‘ऋषि पतंजलि कहते हैं’ जुड़ा हुआ होगा उन्हीं दिशानिर्देशों का पालन खिलाड़ियों को करना होगा।
  • यदि बिना नाम के दिए गए दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है तो वह खिलाड़ी बाहर माना जाएगा।
शिक्षकों के लिए निर्देश—
खले में विविधता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए
  • पंतजलि की जगह नेताजी आदि शब्दों का प्रयोग किया जा सकता है।
  • आँखों को खाेलने व बंद करने जैसे व्यायाम किए जा सकते हैं।
  • ताड़ासन, उत्कटासन, पादहस्तासन जैसे व्यायाम करवाए जा सकते हैं।

योग 15

शब्द ग्राह

कैसे खेलें?

  • विद्यार्थी एक गोला बनाकर बैठेंगे। एक विद्यार्थी जिसकी आँखों पर पट्टी बंधी होगी, उसे गोले के केंद्र में खड़ा होने के लिए कहा जाएगा।
  • गाेले में बैठा हुआ कोई भी एक विद्यार्थी ताली बजाएगा तथा पट्टी बंधे हुए खिलाड़ी को जिसने ताली बजाई है, उसे ताली की आवाज से पहचानना होगा।
  • प्रत्येक विद्यार्थी को 10 अवसर दिए जाएँगे अधिकतम बार नाम पहचानने वाला विद्यार्थी विजेता होगा।
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शिक्षकों के लिए निर्देश—
खेल में विविधता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। शिक्षक निर्देशित कर सकते हैं कि खिलाड़ी ताली के अतिरिक्त किसी और प्रकार की ध्वनि भी निकाल सकते हैं।

सदुंर उत्तम

कैसे खेलें?

  • विद्यार्थी एक गोल घेरे में बैठेंगे। शिक्षक कहेंगे ‘ सुंदर-सुंदर-सुंदर है।’ इसके उत्तर में विद्यार्थी ऊँचे स्वर में बोलेंगे ‘उत्तम-उत्तम-उत्तम है।’
  • शिक्षक सुंदर शब्द को कई बार दोहरा सकते हैं। जैसे— एक, दो, तीन, चार, पाँच, छह आदि साथ ही ऊँचे स्वर में बोलने अपनी शैली में भी परिवर्तन कर सकते हैं।
  • विद्यार्थियों को शिक्षक की संख्या और शैली का मिलान करना होगा। जब शब्द बोलने की ध्वनि और शैली अपने सबसे निचले स्तर पर आ जाए तो तालियाें की गड़गड़ाहट से खले समाप्त किया जा सकता है।

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शिक्षकों के लिए निर्देश—
खले में विविधता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

टिप्प्णी

सत्र का स्वरूप और शिक्षकों के लिए सुझावात्मक वार्षिक कार्यवृत्त

सत्र का स्वरूप और शिक्षकों के लिए वार्षिक कार्यवृत्त योजना

विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 ने शारीरिक शिक्षा व आरोग्य को एक आवश्यक पाठ्यचर्या क्षेत्र मानते हुए कम से कम 90 घटे (लगभग 135 जो कि‍ 40 मि‍न‍ट के होंगे) का समय, समय-सारणी में निर्धारिता किया है।

कक्षा 3 की पाठ्यपुस्तक खेल योग को इस प्रकार से तैयार किया गया है कि विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूप रेखा 2023 में निर्ष्दि‍ट दक्षताओं का भली-भाँति‍ विकास किया जा सके । पुस्तक में 3 इकाई व 7 अध्याय हैं। आधारभूत गत्यात्मक क्रियाएँ, हमारे परंपरागत खेल व योग सत्रों को समानांतर रूप से सतत व निरंतर विकास हेतु वर्षभर नियोजित किया जाएगा।

समस्त गतिविधियों के प्रभावी संचालन हेतु सुझावात्मक सत्रों का स्वरूप व वार्षिक कार्यवृत्त निम्नलिखित हैं। शिक्षक आवश्यकतानुसार इनमें परिवर्तन कर सकते हैं।

कक्षाओं का संचालन व स्वरूप

  • यह पुस्तक 3 इकाइयों में विभक्त है तथा प्रत्येक इकाई में अध्याय व गतिविधियाँ हैं।
  • विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 ने 150 कालांशों की अनुशंसा की है। उसी अनुरूप समय-सारणी में 40 मि‍न‍ट के प्रति सप्ताह कम से कम 5 कालांश अपेक्षित हैं।
  • विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 के अनुसार संयुक्त कालांशों की भी अनुशंसा की गई है, जिसमें 2 कालांश एक साथ होने से शारीरिक शिक्षा व आरोग्य की गतिविधियाँ सुचारु रूप से संचालित हो सकेंगी।
  • समय-सारणी में 2 प्रकार के कालांशों की विवेचना इस प्रकार है—
प्रथम प्रकार: प्रति सप्ताह 5 एकल कालांश
द्वितीय प्रकार: दो संयुक्त कालांश प्रति सप्ताह दो बार गत्यात्मक कौशल व हमारे परंपरागत खेलों के लिए व पाँचवा कालांश योग के लिए।

प्रथम प्रकार— सीमि‍त समय के प्रभावी व सर्वोत्तम उपयोग के दृष्टिगत तथा अपेक्षित अधिगम उत्पाद पाने के लिए प्रथम प्रकार को तीन तरीकों से संचालित किया जा सकता है |

प्रयोग 1— खेल अभ्यास को अधिकतम समय देकर।

प्रयोग 2— विचारने व सामाजिक व संवेगात्मक पक्ष के संवर्धन हेतु मुक्त चिंतन के लिए अधिक समय देकर।;

प्रयोग 3— विशिष्ट कौशल के अधिक विकास हेतु उसके खेल अभ्यास पर अधिक समय देकर।

एक 40 मि‍न‍ट की कालांश का ‘प्रतिरूप’ समय समस्त प्रयोगों हेतु निम्नलिखित है—

सत्र की गतिविध‍ प्रयोग 1
 प्रयोग 2  प्रयोग 3
ऊष्मीकरण 5 5 5
खेल गतिविधि समय 25 15 25
शीतलीकरण 5 5 5
मुक्त चिंतन 5 15 5

द्वितीय प्रकार – (उच्च रूप से अनुशंसित) 80 मि‍न‍ट का एक संयुक्त कालांश खेल अभ्यास, गत्यात्मक क्रियाएँ व मुक्त चिंतन का प्रभावी रूप से विस्तारण कर सकता है

प्रयोग 4— विशिष्ट कौशल के विकास हेतु खेलों वाली गत्यात्मक क्रियाएँ (दो दलों के बीच परस्पर छोटे-छोटे खेल)

प्रयोग 5— एक संयुक्त कालांश में दो खेल खेले जा सकते हैं।


प्रयोग 4


संयुक्त कालांश खेल आधारित ऊष्मीकरण
खेल समय
 खेल क्रिया या छोटे खेल
शीतलीकरण मुक्त चिंतन
समय मि‍न‍ट में 5 30 20 5 20

प्रयोग 5

संयुक्त कालांश खेल आधारित ऊष्मीकरण
दो खेल खेल समय  
  शीतलीकरण  
मुक्त चिंतन
समय मि‍न‍ट में 5 50 5 20

ऊष्मीकरण व शीतलीकरण

शारीरिक व्यायाम व खेलों में ऊष्मीकरण व शीतलीकरण एक आवश्यक तत्व है। ऊष्मीकरण के माध्यम से प्रदर्शन के समग्र विकास, शरीर को खेल गतिविधि के लिए तैयार करना, हृदय दर को धीरे-धीरे बढ़ाना व सधिंयों का तनाव कम करना आदि किया जाताहै। ऊष्मीकरण व शीतलीकरण की क्रियाओं को सही प्रकार से करने पर शारीरिक गतिविधियों को सुरक्षित और प्रभावी रूप से संपन्न किया जा सकता है। इसकी सहायता से शरीर को तनाव मुक्त किया जा सकता है व व्यायाम के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास किया जा सकता है। शीतलीकरण की क्रियाओं से हृदय की दर को धीरे-धीरे कम करना, मांसपेशियों को जकड़न से बचाना और आराम की अवस्था को पाया जा सकता है।

ऊष्मीकरण व शीतलीकरण व्यायाम आयु के अनुरूप होने चाहिए। उन व्यायामों का चयन विद्यार्थियों के फिटनेस के स्तर व शारीरिक क्रिया की प्रवृत्ति के आधार पर होना चाहिए। ऊष्मीकरण व शीतलीकरण के सामान्य रूप से कि‍ए जाने वाले कुछ व्यायाम निम्नलिखित हैं। शिक्षक इन व्यायामों तथा शारीरि‍क क्रियाओं को विद्यार्थियों के स्तर के अनुरूप चयनित कर सकते हैं।

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गर्दन का ऊपर से नीचे की ओर खिंचाव करना

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गर्दन को दाएँ-बाएँ घमुाना

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गर्दन का दाएँ-बाएँ झुकाकर खिंचाव करना

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कंधों को घमुान

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बाँहों को घुमाना

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पैरों के पंजों को बारी-बारी से स्पर्श करना

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टखने को घुमाना

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बाँहों को मध्य रेखा के आर-पार कंधे से खिंचाव करना

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कंधे के ब्लेड में खिंचाव करना

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कलाई का विस्तारण के साथ खिंचाव

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कलाई का संकुचन के साथ खिंचाव

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आगे और पीछे की ओर झुकना

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पार्श्व की ओर झुकना


Screenshot 2024-07-24 101530
पार्श्व दिशा में घूमाना

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आगे की ओर पैर मोड़कर पीछे का पैर खींचना

योग सत्र की संरचना

योग के प्रत्येक सत्र का प्रारंभ नीचे दी गई प्रार्थना से करें। यह प्रार्थना विद्यार्थी और शिक्षक के बीच के पवित्र संबंध के संदर्भ में है। वे दोनों मिलकर अपने जीवन-पथ को दैवीय सुरक्षा और बौद्धिक ज्ञान के पोषण से पल्लवित करने के लिए प्रार्थना करते हैं। वे सर्वत्र और सभी के लिए शांति की कामना करते हैं।

आरंभिक प्रार्थना
ॐ सह नाववतु | सहनौभुनक्तु |
सह वीर्यं करवावहैै |
तेजस्विनावधितमस्तु
मा विद्विषावाहै ||
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ||
प्रार्थना का अर्थ
हम दोनों (गुरु और शिष्य) की रक्षा हो। हम दोनों का पोषण हो, हम बहुत उत्साह और ऊर्जा के साथ अभ्यास करें। हमारी पढ़ाई फलदायी और ज्ञानवर्धक हो। हम वित्रीष्णा के साथ न जिएँ।

आरंभिक प्रार्थना के बाद सत्र-योजना के अनुसार गतिविधियाँ संचालित करें। इसमें प्रारंभिक अभ्यास, आसन, नेत्र व्यायाम और क्रीड़ा योग सम्मिलित हैं।

प्रत्येक योग सत्र को नीचे दी गई प्रार्थना के साथ समाप्त करें। समापन प्रार्थना विद्यार्थियों को ज्ञान को आत्मसात करने और दिन को सकारात्मकता और ख़ुशी के साथ पूर्ण करने में सहयोग करती है।


आरंभिक प्रार्थना
ॐ सर्वेे भवन्तु सुखिनः |
सर्वेे संतु निरामयाः |
सर्वेे भद्राणि पश्यन्तु |
मा कश्चिददुखभाग्भवेत् ||
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ||

प्रार्थना का अर्थ
सभी सुखी रहें। सभी रोगमुक्त हों। सभी शुभ देखें। किसी को दुख ना हो। सर्वत्र शांति हो।

योग सत्र शुरू करने और समाप्त करने के लिए सामान्य निर्देश

  • आरामदायक सुखासन मुद्रा में बैठें।
  • पीठ सीधी रखें, आँखें बंद रखें और चेहरे पर हल्की मुस्कान रखें।
  • अपने हाथों को चिन-मुद्रा में रखें और अपनी श्वास की अनुभुति करें। कुछ क्षण के लिए श्वास पर ध्यान लगाएँ, फिर गहरी श्वास लें और श्वास छोड़ते हुए ओम का जाप करें।
  • धीरे से अपने हाथों को नमस्कार मुद्रा में रखें और प्रार्थना का जाप करें।
  • जप के बाद परिवर्तन देखें।
  • हथेलियों को धीरे-धीरे रगड़ें और उनको कटोरी का आकार देते हुए आँखों पर रखें।

24 सत्रों के लिए प्रस्तावित सत्र-योजना


पहला महीना
तीसरा कालांश
छठा कालांश
नौवां कालांश
12वां कालांश
दैनिक जीवन के लिए योग
योग का परिचय सुख साधन (15 मि‍नट)
अहिंसा की कहानी और गतिविधि (15 मि‍नट)
स्वास्थ्य साधन (15 मि‍नट)
दैनिक जीवन में अहिंसा (15 मि‍नट)
योग साधना
नामों की माला स्मृति खेल (15 मि‍नट)  
पतंजलि कहते हैं क्रिया में एकाग्रता के लिए खेल (15 मि‍नट)  
आँखों के व्यायाम (15 मि‍नट)  
शब्दग्राही ध्वनि ध्यान के लिए खेल (15 मि‍नट)  

दूसरा महीना
15वां कालांश
18वां कालांश
21वां कालांश
24वां कालांश
दैनिक जीवन के लिए योग
उत्तम साधन (15 मि‍नट)
नियम— शौच कहानी (15 मि‍नट)
शौच सं बं धी गतिविधि (15 मि‍नट)
दैनिक जीवन में स्वच्छता (15 मि‍नट)
योग साधना
आँखों के व्यायाम (15 मि‍नट)
ध्वनि के खेल श्वास शक्ति संचय खेल (15 मि‍नट)
आँखों के व्यायाम (15 मि‍नट)
उद्घोष ध्वनि और गति सजगता के लिए खेल

तीसरा महीना
27वां कालांश
30वां कालांश
33वां कालांश
36वां कालांश
दैनिक जीवन के लिए योग
खान-पान की अच्छी आदतें (15 मि‍नट)

अच्छी नींद की आदतें (10 मि‍नट)
आकलन
योग साधना
मुद्रा के साथ श्वास की अनुभूति गतिविधि (15 मि‍नट)
क्रिया सहित आसनों का परिचय (15 मि‍नट)
एड़ी चाल और मेंढक कूद (10 मि‍नट)
जप-तप ध्वनि-क्रिया सजगता के लिए खेल (15 मि‍नट)
‘ओम’ का जाप– अ, उ, म (10 मि‍नट)

चौथा महीना
39वां कालांश
  42वां कालांश
45वां कालांश
48वां कालांश
योग साधना  
आधारभूत आसन ताड़ासन और शिथिल ताड़ासन (15 मि‍नट)
दंडासन और शिथिल दंडासन (15 मि‍नट)
पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसन और मकरासन (15 मि‍नट)
पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसन और शवासन (15 मि‍नट)
योग साधना  
खड़े होकर किए जाने वाले आसन का परिचय वृक्षासन (15 मि‍नट)
सुखासन का परिचय (15 मि‍नट)
भूजंगासन का परिचय (15 मि‍नट)
पवनमुक्तासन का परिचय (15 मि‍नट)

पाँचवा महीना
51वां कालांश
   54वां कालांश
  57वां कालांश
60वां कालांश
योग साधना
आसन अभ्यास  वृक्षासन (20 मि‍नट)
आसन अभ्यास वज्रासन (20 मि‍नट)
आसन अभ्यास पवनमुक्तासन और शवासन (20 मि‍नट)
आसन अभ्यास भुजंगासन और शवासन (20 मि‍नट)
‘ओम’ का जाप– अ, उ, म (10 मि‍नट)
  ध्वनि का खेल (15 मि‍नट)
‘ओम’ का जाप– अ, उ, म (10 मि‍नट)
संख्या और ताली बौद्विक सजगता खेल (10 मि‍नट)

छठा महीना
63वां कालांश
66वां कालांश
69वां कालांश
72वां कालांश
दैनिक जीवन के लिए योग
यम और नियम पुनरावृत्ति (15 मि‍नट)
सभी 5 आसनों की पुनरावृत्ति (30 मि‍नट)
शुभ सभा (30 मि‍नट)
आकलन
योग साधना
नेत्र व्यायाम कीपुनरावृत्ति (15 मि‍नट)

वार्षिक सत्र-योजना

नीचे दी गई तालिका पूरे वर्ष के लिए दी गई 150 कालांशों में नियोजित गतिविधियों का क्रम दर्शाती है। आवश्यक दक्षताओ के प्रभावी विकास के लिए इस क्रम का पालन करना अावश्यक है। पाठ्युपुस्तक में आसान संदर्भ के लिए सत्र का प्रकार और गतिविधि संख्या तालिका में दी गई है।

नोट— एक संयुक्त कालांश के लिए, लगातार दो कालांशों की गतिविधियों को संयुक्त रूप से करें। जहाँ भी संयुक्त कालांश की आवश्यकता होती है, हमारे खेल और योग के कालांश पहले से ही संयुक्त किए जा सकते हैे।


‍वार्षिक सत्र योजना
कालांश इकाई कौशल प्रकार गतिविधि का ना‍म गतिविधि संख्या गिनती करना
1 इकाई 1 फेंकना और पकड़ना प्रकार 3 लपकना फेंकना आ.ग.क्रि-1 1
2 इकाई 1 उठयाकर फेंकना प्रकार 2 उठाओ और फेंको आ.ग.क्रि-2 2
3 इकाई 1 फेंकना और पकड़ना प्रकार 3 लपकना फेंकना आ.ग.क्रि-1 3
4 इकाई 1 उठाओ और फेंको प्रकार 2 उठाओ और फेंको आ.ग.क्रि-2 4
5 इकाई 3 योग योग अभ्यास खुश रहना योग-1 1
6व 7 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 सात पत्थर ह.खे.-1 2
8 इकाई 1 पकड़ना प्रकार 3 रिले कैचिंग आ.ग.क्रि-5 5
9 इकाई 1 फेंकना प्रकार 3 लक्ष्य भेदन आ.ग.क्रि-3 6
10 इकाई 1 पकड़ना प्रकार 3 ररले कै वचंग आ.ग.क्रि-5 7
11 इकाई 1 फेंकना प्रकार 3 लक्ष्य भेदन आ.ग.क्रि-3 8
12व 13 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 गोलाप टोगोर ह.खे.-2 4
14 इकाई 3 योग योग अभ्यास यम योग-2 3
15 इकाई 1 पकड़ना प्रकार 1 दीवार पर प्रहार आ.ग.क्रि-6 9
16 इकाई 1 फेंकना प्रकार 2 उठाओ और फेंको आ.ग.क्रि-2 10
17 इकाई 1 फेंकना प्रकार 1 शंकु दस्तक आ.ग.क्रि-4 11
18 इकाई 1 पकड़ना प्रकार 1 दीवार पर प्रहार आ.ग.क्रि-6 12
19 इकाई 1 फेंकना प्रकार 2 उठाओ और फेंको आ.ग.क्रि-2 13
20 इकाई 1 फेंकना प्रकार 1 शंकु दस्तक आ.ग.क्रि-4 14
21व 22 इकाई 3 योग योग अभ्यास आँखों कया अभ्यास योग-3 4
23 इकाई 1 फेंकना प्रकार 1 शंकु दस्तक आ.ग.क्रि-4 15
24व 25 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 पकड़म-पकड़ाई ह.खे.-3 6
26 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 गेंद पास कराना आ.ग.क्रि-7 16
27 इकाई 2 किकिंग प्रकार 3 बीच का बन्दर आ.ग.क्रि-11 17
28 इकाई 3 किकिंग प्रकार 3 गेंद पास कराना आ.ग.क्रि-7 18
29 इकाई 4 किकिंग प्रकार 3 बीच का बन्दर आ.ग.क्रि-11 19
30व 31 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 शृंखला (सांकली) ह.खे.-4 8
32 इकाई 3 योग योग अभ्यास आँखों कया अभ्यास योग-3 5
33 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 शैडो बॉल आ.ग.क्रि-8 20
34 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 गेंद उछालना आ.ग.क्रि-9 21
35 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 शैडो बॉल आ.ग.क्रि-8 22
36 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 गेंद उछालना आ.ग.क्रि-9 23
37 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 बक्से में उछालना आ.ग.क्रि-10 24
38 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 बक्से में उछालना आ.ग.क्रि-10 25
39 इकाई 3 योग योग अभ्यास नियम योग-4 6
40व 41 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 आँख वमचौली ह.खे.-5 10
42 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 बीच का बन्दर आ.ग.क्रि-11 26
43 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 बक्से में उछालना आ.ग.क्रि-10 27
44 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 बीच का बन्दर आ.ग.क्रि-11 28
45 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 बीच का बन्दर आ.ग.क्रि-11 29
46 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 बक्से में उछालना आ.ग.क्रि-10 30
47 इकाई 1 किकिंग प्रकार 3 बीच का बन्दर आ.ग.क्रि-11 31
48 इकाई 3 योग योग अभ्यास गतिविधि योग-5 7
49व 50 इकाई 3 योग योग अभ्यास योग साधना योग-6 9
51व 52 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 बित्ता कूद ह.खे.-6 12
53 इकाई 1 प्रहार प्रकार 3 गुब्बारे परव यार करें आ.ग.क्रि-13 32
54 इकाई 1 प्रहार प्रकार 1 शरीर और गुब्बारा आ.ग.क्रि-14 33
55 इकाई 1 प्रहार प्रकार 3 गुब्बारे पर वार करो आ.ग.क्रि-13 34
56 इकाई 1 प्रहार प्रकार 1 शरीर और गुब्बारा आ.ग.क्रि-14 35
57व 58 इकाई 3 योग योग अभ्यास प्रारंभिक अभ्यास योग-7 11
59व 60 इकाई 3 योग योग अभ्यास मूलभूत आसन योग-8 13
61व 62 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 आँख मिचौली ह.खे.-5 14
63 इकाई 1 प्रहार प्रकार 2 गेंद पर नियंत्रण आ.ग.क्रि-15 36
64 इकाई 1 प्रहार प्रकार 3 पास का अभ्यास आ.ग.क्रि-16 37
65 इकाई 1 प्रहार प्रकार 1 वर्ग में स्कूप आ.ग.क्रि-17 38
66 इकाई 1 प्रहार प्रकार 2 गेंद पर नियंत्रण आ.ग.क्रि-15 39
67व 68 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 हॉपसकॉच ह.खे.-7 16
69 इकाई 1 प्रहार प्रकार 3 पास का अभ्यास आ.ग.क्रि-16 40
70 इकाई 1 प्रहार प्रकार 1 वर्ग में स्कूप आ.ग.क्रि-17 41
71 इकाई 1 समन्वय प्रकार 2 बैठक और उठक आ.ग.क्रि-12 42
72 इकाई 3 योग योग अभ्यास आसन अभ्यास योग-9 14
73-81 अर्ध-वार्षिक आकलन संसारिक मूल्यांकन ‍मु.-1 9
82व 83 इकाई 3 योग योग अभ्यास आसन अभ्यास योग-9 16
84व 85 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 हॉपस्कॉच ह.खे.-7 18
86 इकाई 1 समन्वय प्रकार 1 चलते रहो आ.ग.क्रि-20 43
87 इकाई 1 समन्वय प्रकार 3 स्टिक से गेंद रि‍सीव (प्राप्त) करना आ.ग.क्रि-18 44
88 इकाई 1 समन्वय प्रकार 1 चलते रहो आ.ग.क्रि-20 45
89 इकाई 1 समन्वय प्रकार 3 स्टिक से गेंद रि‍सीव (प्राप्त) करना आ.ग.क्रि-18 46
90 इकाई 3 योग योग अभ्यास आसन अभ्यास योग-9 17
91व 92 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 स्कंध द्वंद्व ह.खे.-8 20
93 इकाई 1 समन्वय प्रकार 2 छड़ी को संतुलित करना आ.ग.क्रि-19 47
94 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 3 संतुलन साधना आ.ग.क्रि-21 48
95 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 3 प्लैंक आ.ग.क्रि-22 49
96व 97 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 कुमीर डेंगा ह.खे.-9 22
98 इकाई 1 समन्वय प्रकार 2 छड़ी को संतुलित करना आ.ग.क्रि-19 50
99 इकाई 1 टीकाकरण प्रकार 2 वैक्सीन विजयते आ.ग.क्रि-27 51
100 इकाई 3 योग योग अभ्यास प्राणायाम योग-10 18
101 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 3 संतुलन साधना आ.ग.क्रि-21 52
102 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 1 चोर-पुलिश आ.ग.क्रि-24 53
103 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 3 प्लैंक आ.ग.क्रि-22 54
104 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 1 घर में प्रवेश आ.ग.क्रि-23 55
105व 106 इकाई 3 योग योग अभ्यास ऊँ का उच्चारण योग-11 20
107व 108 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 कुमीर डेंगा ह.खे.-9 24
109 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 1 चोर-पुलिस आ.ग.क्रि-24 56
110 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 3 शटल रन आ.ग.क्रि-25 57
111 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 1 वैक्सीनन विजयते आ.ग.क्रि-27 58
112 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 3 शटल रन आ.ग.क्रि-25 59
113 इकाई 3 योग योग अभ्यास क्रीडा योग योग-12 21
114व 115 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 हम पुष्प मयागया पर चलते हैं ह.खे.-10 26
116व 117 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 चकमा गेंद ह.खे.-11 28
118व 119 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 चम्मच दौड़ ह.खे.-12 30
120 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 3 चकमा, बचना और घर पहुँचना आ.ग.क्रि-26 60
121 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 3 शटल रन आ.ग.क्रि-25 61
122व 123 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 गद्दा मार ह.खे.-13 32
124 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 3 चकमा, बचना और घर पहुँचना आ.ग.क्रि-26 62
125 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 3 शटल रन आ.ग.क्रि-25 63
126 इकाई 3 योग योग अभ्यास जप-तप योग-13 22
127 इकाई 1 टीकाकरण प्रकार 2 वैक्सीन विजयते आ.ग.क्रि-27 64
128 इकाई 3 योग योग अभ्यास ऋषि पतंजली कहते हैं योग-14 23
129 इकाई 1 व्यक्तित्व लक्ष्य प्रकार 3 वैक्सीन विजयते आ.ग.क्रि-27 65
130 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 रस्सा-कस्सी ह.खे.-14 33
131 इकाई 3 योग योग अभ्यास शब्दग्राही योग-15 24
132 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 तीन पैरों से दौड़ (त्रिपद दौड़) ह.खे.-15 34
133 इकाई 1 समन्वय प्रकार 1 चलते रहो आ.ग.क्रि-20 66
134 इकाई 1 किकिंग प्रकार 1 बक्से में उछालना आ.ग.क्रि-10 67
135व 136 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 अन्दर और बाहर ह.खे.-16 36
137 इकाई 1 समन्वय प्रकार 1 चलते रहो आ.ग.क्रि-20 68
138 इकाई 1 किकिंग प्रकार 1 बक्से में उछालना आ.ग.क्रि-10 69
139व 140 इकाई 2 हमारे खेल प्रकार 4/5 धूप और छाँव ह.खे.-17 38
141-150 आकलन ‍वाश्षिक आकलन ‍मु.-2 19
योग 24
ह‍मारे खेल 38
आधारभूत गत्यात्मक क्रियाए
69
आकलन 19
कुल 150