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चींटी
आनंदमयी कविता

हर पल चलती जाती चींटी,
श्रम का राग सुनाती चींटी।
कड़ी धूप हो या हो वर्षा,
दाना चुनकर लाती चींटी।
सचमुच कैसी कलाकार है,
घर को खुब सजाती चींटी।

छोटा तन, पर बड़े इरादे,
नहीं कभी घबराती चींटी।
नन्हे-नन्हे पैर बढ़ाकर,
पर्वत पर चढ़ जाती चींटी।
काम बड़े करके दिखलाती,
जहाँ कहीं अड़ जाती चींटी।
मेहनत ही पुजा है प्रभू की,
हमको यही सिखाती चींटी।
– प्रकाश मन
बातचीत के लिए
1. आपने अपने आस-पास, घर और विद्यालय में कौन-कौन से जीव-जंतु देखे हैं?
2. आपने सबसे छोटा कौन-सा कीट देखा और कहाँ देखा है?
3. अापने चींटी के अतिरिक्त और कौन-कौन से श्रम करने वाले जीव
देखे हैं?
4. नन्ही चींटी के बारे में अपना कोई अनभव बताइए
कविता से आगे
1. नीचे कुछ वस्तुओ के चित्र बने हैं। बताइए, चींटियाँ किसे खाना चाहेंगी? उस पर का चिह्न बनाइए—
2. निम्नलिखित पंक्तियो को पूरा कीजिए—
क) घर को ................................
(ख) पर्वत पर ..............................
(ग) दाना चुनकर .........................
(घ) श्रम का राग ..........................
3. कविता के अनुसार चींटी हमको क्या-क्या करना सिखाती है? लिखकर बताइए—

भाषा की बात
1. कविता में चींटी को क्या-क्या कहा गया है—
कलाकार -------------
----------- -------------
2. कितनी बार आई चींटी?
‘चींटी’ कविता में ‘चींटी’ शब्द कितनी बार आया है? इन्हें गिनिए और
उतनी चींटियाँ बनाकर पंक्ति को पूरा कीजिए—

3. आइए, ‘चींटी’ कविता को आगे बढ़ाते हैं—
4. शब्दों की तुकबंदी—
चींटी से भेंट
5. आपके घर के कई कोनों में चींटी आती-जाती है। एक दिन वह आपको रोककर आपसे कुछ कहती है। आपके और उसके बीचक्या-क्या बातें हुई होंगी, लिखिए—
आप –
नमस्ते चींटी! आज आप अकेली आई हैं?
चींटी – ........................................................
आप – ........................................................
चींटी – ........................................................
चींटी और हाथी की छुपन-छुपाई
चींटी और हाथी छुपन-छूपाई खेल रहे
हैं। चींटी को एकदम पता चल जाता है
कि हाथी कहाँ छुपा है। हाथी का शरीर
बड़ा है न!

जब चींटी एक मदिं र के भीतर छिपती
है तो हाथी भी उसे एकदम ढूँढ़ लेता
है। बताइए, हाथी को कैसे पता
चला कि चींटी मदिंर में
छिपी है?






