चतुर गीदड़
एकांकी
(पहला दृश्य)
(स्थान – तालाब का किनारा)
मगरमच्छ – (तालाब की ओर देखते हुए, अपने आप से) तालाब की सारी मछलियाँ तो मैं धीरे-धीरे चट कर गया। अब क्या खाऊँ ? कई दिन से खाने को कुछ भी नहीं मिला। मुझुे बहुत भुख लगी है। आज वह गीदड़ भी तालाब पर पानी पीने नहीं आया।
कछुआ – कहो भाई मगरमच्छ, क्या हाल है? सब ठीक तो है? इतने उदास क्यों हो?
मगरमच्छ – क्या बताऊँ मित्र। भुख के मारे मेरे प्राण निकल रहे हैं।
कछुआ – क्यों, क्या आज खाने के लिए मछलियाँ नहीं मिलीं?

मगरमच्छ – मछलियाँ तो कब की समाप्त हो चुकीं। सोचा था कि गीदड़ मिलता तो आज का काम चलता। पर वह तो ऐसा चतुर है कि पकड़ में ही नहीं आता।
कछुआ – हाँ, गीदड़ को पकड़ना तो बहुत कठिन है।
मगरमच्छ – मित्र! कोई ऐसा उपाय करो कि वह पकड़ में आ जाए। उसे खाकर आज मैं अपनी भुख मिटा लूँगा। मै तुम्हारा बहुत उपकार मानूँगा|
कछुआ – अच्छा! तुम कहते हो तो चला जाता है। किसी तरह गीदड़ को इधर लाने का प्रयत्न करता हु। (कुछ सोचकर) लेकिन इसके पहले तुम एक काम करो। (कान में कुछ कहता है।)
मगरमच्छ – ठीक है, ठीक है। मैं ऐसा ही करूँगा।
(दूसरा दृश्य)
(एक ओर मगरमच्छ साँस रोके मरा हुआ सा पड़ा है और कछुआ पास खड़ा है।)
कछुआ – (दर से गीदड़ को आते हए देखकर) हाय! अब मैं क्या करूँ! मेरे प्यारे मित्र को न जाने क्याहो गया! अचानक उसके प्राण निकल गए। अब तो मैं बिलकुल अकेला रह गया।
(गीदड़ का प्रवेश)
गीदड़ – क्या है भाई कछुए? क्यों रो रहे हो?
कछुआ – मेरा प्यारा मित्र मगरमच्छ स्वर्ग सिधार गया। अब दुनिया में मेरा कोई नहीं रहा।
गीदड़ – क्या कहा? मगरमच्छ मर गया? (अपने आप से) अब तो मैं निश्चिंत होकर तालाब का पानी पी सकता हु। उसके डर से मैं कई बार प्यासा ही रह जाता था।
कछुआ – क्या कहा, क्या कहा?
गीदड़ – नहीं, कुछ नहीं, कुछ नहीं, यह तो बड़े दुःख की बात है। मैं तुमहारी क्या सहायता कर सकता हु?

कछुआ – आओ, उस पर कुछ सखे पत्ते डालकर उसे ढाँप दें। देखो, मरा पड़ा है।
गीदड़ – (डरते-डरते कुछ पास जाकर, धीमे स्वर से) अरे, यह तो बिलकुल शांत है। नहीं, नहीं (ऊँचे स्वर में) यह तो साँस ले रहा है। भाई कछुए! क्या यह सचमच मर गया है?
कछुआ – हाँ हाँ! देखते नहीं, यह मरा पड़ा है।
गीदड़ – पर भाई, मैंने तो सुना है कि मर जाने पर मगरमच्छ की पूंछ हिलती रहती है। लगता है, अभी यह पूरी तरह नहीं मरा।

कछुआ – नहीं भाई, यह बिलकुल मर गया है।
(तभी मगरमच्छ अपनी पूंछ हिलाने लगता है।)
गीदड़ – (भागकर दुर जाते हुए) ओह! अपने मित्र को देखो, अपने मित्र को देखो।
कछुआ – (ऊँचे स्वर में) खोल दो आँखें। भाग गया गीदड़। तुम बिलकुल मुर्ख हो। तुम उस चतुर गीदड़ की चाल में आ ही गए। अब उसे पकड़ना कठिन है
बातचीत के लिए
सोचिये और लिखिए
कहानी से
1. नीचे कहानी से जुड़े कुछ चित्र और बातें हैं। उनका आपस में मिलान कीजिए —
भाषा की बात
1.कहानी में पशुओ के लिए तालाब ही पानी का स्रोत है। नीचे दी गई वर्ग पहेली से पानी के अन्य स्रोतों को ढूढ़ँकर लिखिए—
2. सही वाक्य बनाइए—
3. कहानी में आए शब्दों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए—
4. एक मछली, अनेक मछलियाँ। नीचे दिए गए शब्दों के एक और अनेक रूप लिखिए—
पता कीजिए और लिखिए
मेरी सोच
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मेरी कलाकारी

ठहाके



मछली
चूड़ी
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लड़की
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ककड़ी