व्यक्तियों द्वारा की जाने वाली गतिविधियाँ
वह समय याद कीजिए जब आप किसी भीड़ वाले स्थान पर थे और आपके आस-पास सभी लोग भिन्न दिशाओं में जा रहे थे | प्रत्येक व्यक्ति की मुद्रा या हाव-भाव और उनका अंग-विन्यास हमें अनूठा लग सकता है |
अध्याय 1 में नंदलाल बोस की दी गई कलाकृतियों में लोगों की विभिन्न मुद्राओं और गतियों को देखा जा सकता है |
इस अध्याय में आप ज्यामितीय आकृतियों का उपयोग कर लोगों को अलग-अलग गतियों में या काम करते हुए दर्शा पाएँगे |
पारंपरिक भारतीय खिलौनों से प्रेरित होकर आप खेलने के लिए अनेक त्रि-आयामी (3डी) ज्यामितीय खिलौने भी बनाएँगे, जैसे कि एक नृत्य करती गुड़िया।
अब आप कल्पना करने, कुछ नया रचने और आनंद लेने के लिए तैयार हो जाइए |
दृश्य पत्रिका
पत्रिका अथवा पुस्तिका में आप अपने विचार और टिप्पणियाँ लिख सकते हैं | इसमें आप चित्रण भी कर सकते हैं |
कागज के कुछ पृष्ठ तैयार रखिए |
आइए एक खेल खेलें-
अपने किसी एक मित्र से कहिए कि वह कक्षा में सामने जाकर खड़ा हो जाए |
उससे दैनिक क्रियाओं जैसे कि स्नान करना, खेल खेलना, भोजन करना आदि का अभिनय करने के लिए कहिए |
जब वह यह क्रिया कर रहा हो तो देखिए कि उसका शरीर किस प्रकार से हिलता और मुड़ता है |
जैसे ही आपको कोई मुद्रा रोचक लगे, आप तभी बोलें – “स्टैचू”!
एक मिनट में रेखाचित्र बनाने का प्रयास कीजिए | यह आवश्यक नहीं है कि आपका रेखाचित्र पूरी तरह से सही हो। यदि वह अधूरा या असामान्य प्रतीत होता है तो चिंता मत कीजिए |
नीचे दिए गए स्थान पर एक मिनट में कोई रेखाचित्र बनाइए।
शारीरिक गतिविधियों का चित्रण
जब लोग चल रहे हो या किसी भी कार्य में लगे होने के कारण गतिमान हों तो आप उनका चित्र कैसे बनाएँगे?
जब आप ध्यानपूर्वक किसी व्यक्ति के शरीर को देखते हैं तो आप पाते हैं कि यह गोलाकार और बेलनाकार आकृतियों से बना हुआ है |
इस पृष्ठ पर दिखाए गए चित्रों को ध्यानपूर्वक देखिए। पूर्ण शरीर को अपूर्ण वृत्तों और अंडाकार आकृतियों का उपयोग करके चित्रित किया गया है |
लोगों की शारीरिक मुद्राओं को ध्यानपूर्वक देखिए और उन्हें बनाइए |
ऐसी आकृतियों का उपयोग करके उनकी मुद्राओं और गतियों को दर्शाइए |
नृत्य में आप जिन स्थितियों और मुद्राओं का अभ्यास करते हैं, उन्हें बनाइए |
जितना संभव हो, उतने कार्यों का रेखाचित्र बनाने का प्रयास कीजिए |
आकृतियाँ बनाने के लिए स्थान
खिलौने
भारत के प्रत्येक क्षेत्र में खिलौने बनाने की अपनी अनोखी परंपरा रही है। ये खिलौने मिट्टी, ऊन, कपड़े, जूट, ताड़ के पत्ते, धातु अथवा लकड़ी से बनाए जाते हैं |
उन खिलौनों के विषय में चर्चा कीजिए, जिनके साथ आप खेले हों। यह भी बताइए कि उन्हें निर्मित करने में किस-किस सामग्री का उपयोग किया गया होगा |
क्या आप जानते हैं?
चन्नापटना, कर्नाटक में स्थित एक प्रसिद्ध नगर है जिसे खिलौनों के शहर के नाम से भी जाना जाता है |
यहाँ लकड़ी के रंगीन खिलौने बनाने की परंपरा है|
इनमें सामान्यतः बेलनाकार, गोलाकार, घनाकार और घनाभ जैसी सरल आकृतियों के खिलौने होते हैं |
भारत के अलग-अलग भागों में मिलने वाली
भिन्न-भिन्न प्रकार की गुड़िया देखिए |
गुड़िया बनाने की सामग्री को ध्यान से देखिए एवं चर्चा कीजिए |
खिलौनों की भूमिका पर चर्चा कीजिए |
उनसे कहानियाँ बनाइए |
आप उनसे किस प्रकार खेलेंगे?
नृत्य करती कागजी गुड़िया
सामग्री
- एक पतली लकड़ी अथवा झाड़ू की सींक
- सादा अथवा रंगीन ए5 आकार का कागज लगभग ए4 का आधा
- गोंद
- पेन या स्केच पेन
- मोम रंग (क्रेयॉन)/पानी वाले रंग (वाटर कलर)
(यह वैकल्पिक है)
नीचे दिए गए चरणों का पालन करते हुए अपने खेलने के लिए एक नृत्य करने वाली गुड़िया बनाइए |
चरण 1- कागज पर आवश्यक आकार की आकृतियाँ बनाइए। आप चाहें तो इन्हें बड़ा भी बना सकते हैं |
चरण 2- यदि आप सादा कागज उपयोग कर रहे हैं तो आकृतियों में रंग भरिए |
चरण 3– आकृतियों को काट लीजिए। अब प्रत्येक आकृति से शरीर के अंग बनाइए |
चरण 4– छोटे आयत को शंकु (कोन) के आकार में लपेटकर उसके किनारे को चिपकाइए और गुड़िया का सिर बनाइए। आँखें, नाक, मुँह और शेष चेहरे को भी बनाइए |
चरण 5- बड़े आयत को बेलनाकार (सिलेंडर) में लपेटकर गुड़िया का धड़ बनाइए | किनारों को गोंद की सहायता से चिपका लीजिए |
चरण 6– परिधान (कॉस्ट्यूम) बनाने के लिए इन चरणों का पालन कीजिए। परिधान के संग हाथों और पैरों की स्थिति में भी परिवर्तन कीजिए, जिससे कि प्रत्येक गुड़िया अन्य से अलग दिखे |
चरण 7- गुड़िया को लकड़ी पर जोड़ लीजिए।
प्रत्येक पैर के एक सिरे को लकड़ी पर लपेटिए तथा चिपका लीजिए। इसके बाद इसे सजाइए |
धड़ के ऊपर परिधान इस प्रकार रखिए, जिससे वह पैरों को ढक लें। इसके बाद इसे सजाइए |
धड़ पर हाथ चिपकाइए | कंधों, कोहनियों एवं कलाइयों पर मोड़ बनाइए |
गुड़िया के मुख को जोड़िए और उसे सजाइए |
अब आप गुड़िया से नृत्य कराइए और उसके साथ खेलिए |
| आकलन - अध्याय 2- प्रकति में बनावटें | ||||
|---|---|---|---|---|
| पाठ्यचर्या लक्ष्य | दक्षताएँ | सीखने के प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| 1 | C-1.2 | मूल आकृतियों का उपयोग करके विभिन्न मुद्राओं और क्रियाओं में मानव शरीर को चित्रित करते हैं | | ||
| 2 | C-2.2 | कागज से सरल त्रि-आयामी आकृतियाँ बनाते हैं। (शंकु, बेलनाकार आदि) | | ||
| 3 | C-3.1 | कागज की गुड़िया बनाने हेतु निर्देशों का क्रम से पालन करते हैं | | ||
| कक्षा में पूर्ण सहभागिता करते हैं | | ||||
विद्यार्थियों की क्षमताओं पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया......................
विकास-क्षेत्रों पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया ............
कोई अन्य अवलोकन ................
योगात्मक आकलन
| आकलन हेतु गतिविधि (उदाहरण) | आकलन हेतु मापदंड | |
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| व्यक्तिगत |
अपनी कल्पना से एक चित्र बनाइए, जो किसी भीतरी या बाहरी दृश्य को दर्शाता हो। इस चित्र में निम्नलिखित में से किन्हीं दो का संयोजन अवश्य होना चाहिए-
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| समूह |
अपनी कक्षा के एक भाग को सजाने एवं प्रदर्शित करने के लिए चुनिए|
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