प्रिय शिक्षको,
बच्चों को नाटक और कहानियाँ बहुत पसंद आती हैं| इस उम्र में उनकी कल्पनाशक्ति तथा रचनात्मकता अद्भुत होती है। यह पाठ्यपुस्तक इसी बात को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसका उद्देश्य यह है कि पूरी प्रक्रिया आनंददायक रहे एवं बच्चों को कुछ याद रखने या रटने का तनाव न हो |
हम खेलों एवं गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को रंगमंच की नई-नई तकनीकों तथा कौशलों से परिचित कराते हैं | शिक्षक के रूप में हमारा कार्य एक सहायक वातावरण प्रदान करना है, जहाँ बच्चे स्वयं खोजबीन कर सकें और उन पर किसी विशेष बात के लिए बल न दिया जाए | आइए, सहभागिता एवं स्वतंत्र कल्पना को प्रोत्साहित करें | सबसे महत्वपूर्ण बात - हम सभी मिलकर आनंद लें!
कुछ महत्वपूर्ण बिंदु ध्यान रखने योग्य -
विदूषक पारंपरिक भारतीय रंगमंच का एक विशेष पात्र है | संस्कृत नाटकों में इस पात्र का उपयोग दृश्यों को जोड़ने के लिए प्रायः हास्य और चंचलता के माध्यम से किया जाता था | यह पात्र परिस्थिति के अनुसार कोई भी रूप धारण कर सकता था तथा उस पर बोल सकता था | यहाँ इसे बच्चों का मित्र माना गया है, जो उन्हें रंगमंच की अवधारणाओं एवं विचारों से परिचित कराता है तथा एक गतिविधि से दूसरी गतिविधि की ओर ले जाते हुए उन्हें आवश्यक जानकारी देता है | बच्चों के लिए महत्वपूर्ण बातें एवं सीख विदूषक के माध्यम से कही जाती हैं |
1. रंगमंच की कक्षाओं के लिए एक हवादार एवं पर्याप्त बड़ा कमरा उपलब्ध कराया जाए, जिससे विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से चलने-फिरने की सुविधा मिले। यह कमरा साफ-सुथरा हो और उसमें कोई भी बाधा या नुकीले किनारे वाली वस्तुएँ न हों, जिससे चोट लगने का भय हो |
2. कक्षा का आरंभ प्रार्थना एवं पिछली कक्षा में जो कुछ सीखा उसकी पुनरावृत्ति से कीजिए। आप तीसरी कक्षा की पाठ्यपुस्तक में दी गई प्रार्थना का उपयोग कर सकते हैं|
| कक्षा व्यवस्था | ||||
|---|---|---|---|---|
| 5 मिनट में प्रार्थना एवं पुनर्कथन | 30 मिनट में कक्षा मे आयोजित गतिविधियाँ | 5 मिनट का सर्कल टाइम | ||
3. शिक्षक को विद्यार्थियों से गतिविधियाँ करवाने से पहले स्वयं करके दिखानी चाहिए |
4. शिक्षक गतिविधियों के लिए केवल उदाहरण दे सकते हैं | यह आवश्यक है कि विद्यार्थी स्वयं सोचें एवं अपनी कल्पनाओं या परिस्थितियों के अनुसार विचार प्रस्तुत करें| गतिविधियों में सहायता हेतु शिक्षक के लिए अनेक उदाहरण क्यूआर कोड में दिए गए हैं|
5. कक्षा की आवश्यकता के अनुसार शिक्षक किसी भी गतिविधि को जितनी बार चाहें दोहरा सकते हैं|
6. विद्यार्थियों को नाटक देखने के लिए प्रोत्साहित कीजिए | अभिभावकों को यह सुझाव दिया जा सकता है कि वे विद्यार्थियों को जीवंत रंगमंच प्रस्तुतियाँ दिखाने ले जाएँ |
7. विद्यार्थियों के नाटक प्रस्तुत करने वाले समूहों को विद्यालय में आमंत्रित करना या नाटक देखने के लिए शैक्षणिक भ्रमण आयोजित करना और कलाकारों से संवाद कराना विद्यार्थियों को प्रेरित करने में सहायक होगा |
रगमच आकलन
रंगमंच बच्चों के लिए हमेशा एक सकारात्मक और आनंददायक अनुभव रहा है | अतः यह आवश्यक है कि जैसे वे कक्षाओं का आनंद लेते हैं, उसी प्रकार आकलन भी आनंदपूर्ण होना चाहिए, न कि आकलन उन्हें परीक्षा से जुड़ा तनाव या चिंता लगने लगे। सभी आकलन गतिविधियों पर आधारित होते हैं | आकलन करते समय
निम्नलिखित बिंदओं का ध्यान रखें-
1. प्राप्त योग्यता एवं कौशल पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए |
2. यहाँ कोई उत्तर सही या गलत नहीं होता |
3. अंतिम निष्कर्ष या प्रस्तुति ही एकमात्र मानदंड नहीं है| इसके साथ-साथ उस प्रस्तुति के पीछे का प्रयास, विचार और प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है, जैसे-
- ज्ञान का उपयोग
-प्रयास और सहभागिता
-रचनात्मकता और प्रस्तुति
– सामूहिक कार्य और सहयोग
4. आत्म-चिंतन को प्रोत्साहित कीजिए और इसे शिक्षकों के लिए एक प्रतिक्रिया के रूप में लीजिए | (रूब्रिक में दिए गए अंतिम स्तंभ के अनुसार)
5. विशेष रूप से संकोची या झिझक अनुभव करने वाले बच्चों के लिए प्रेरक और सहायक वातावरण बनाइए |
6. पुस्तक के आरंभ में दिए गए समय नियोजन और आकलन अनुभाग को ध्यान से पढ़िए, जिससे बेहतर रूप से स्पष्टता मिले |
| रचनात्मक आकलन | योगात्मक आकलन |
|---|---|
| यह एक सतत प्रक्रिया है जो कक्षा की पूरी अवधि के दौरान चलती रहती है | अलग से परीक्षा के लिए दिन निर्धारित नहीं होता | इसमें सम्मिलित हैं- | यह आकलन वर्ष के अंत में एक निर्धारित दिन पर किया जाता है | यह पूरी तरह गतिविधि आधारित होता है | प्रश्न-पत्र और लिखित परीक्षा से बचा जाना चाहिए | |
| 1. सर्कल टाइम - विद्यार्थी अपनी बातें स्वतंत्र रूप से साझा करते हैं | शिक्षक प्रत्येक विद्यार्थी की बातों को ध्यानपूर्वक सुनते हैं और उन पर टिप्पणी लिखते हैं | | 1. गतिविधियों के उदाहरण पुस्तक के अंत में दिए गए हैं| |
| 2. अध्याय के अंत में दिया गया रूब्रिक- आकलन के लिए इस रूब्रिक का उपयोग किया जाए | | 2. आकलन में रूब्रिक के आधार पर अंक दिए जाएँ| |
| 3. शिक्षक का अवलोकन - कक्षा में बच्चों की गतिविधियों, सहभागिता और व्यवहार को आधार मानकर शिक्षक अवलोकन करें | | 3. समग्र प्राप्तांक में बच्चे के आत्म-चिंतन को भी सम्मिलित किया जाए | |
गत वर्ष आप सभी को रंगमंच की यात्रा पर ले जाना बहुत आनंददायक था | मैं लौटने की प्रतीक्षा नहीं कर सकता! आप में से जो लोग पिछले वर्ष वहाँ नहीं थे, उनके लिए मैं अपना परिचय दे देता हूँ | मेरा नाम है- विदूषक !
मुझे रंगमंच और नाटक बहुत पसंद हैं और मैं अनेक वर्षों से यह काम कर रहा हूँ | आपको रंगमंच की खोज-यात्रा पर मैं अपने अनुभव से आपके साथ कई कहानियाँ साझा करूँगा | आज मैं आपको एक रहस्य बताना चाहता हूँ | अनेक वर्षों से मैंने रंगमंच में जो कुछ भी किया है, उसमें से मेरा सबसे पसंदीदा कार्य बच्चों के साथ काम करना है| यह बहुत रोचक है | यही कारण है कि मैं आपके पास वापस आने की प्रतीक्षा कर रहा था!
इससे पहले कि हम इस वर्ष की रोचक गतिविधियाँ आरंभ करें, मैं जानना चाहता हूँ कि आपने पिछले वर्ष सीखी गई अवधारणाओं के आधार पर क्या किया? मैं आपको अवधारणाएँ याद दिलाने में सहायता करूँगा और आप मुझे बताएँगे कि छुट्टियों के दौरान आपने विद्यालय में या घर पर क्या किया?
हाव-भाव और मुद्राओं को अर्थपूर्ण बनाना (शारीरिक भाषा)

प्रतिदिन की वस्तुओं को नए अर्थ (रचनात्मकता और सुधारात्मक) के साथ

बहुत बढ़िया ! इतने सारे नए विचारों के साथ, हम इस वर्ष की यात्रा आरंभ करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं|
कहानियाँ सुनाना और उनका अभिनय करना
शिक्षक-संकेत
स्वाभाविक रूप से कुछ विद्यार्थी शर्मीले हो सकते हैं या कुछ गतिविधियों में संकोच कर सकते हैं। उन्हें प्रोत्साहित कीजिए और अपनी सुविधानुसार धीरे-धीरे प्रयास करने दीजिए | कुछ विद्यार्थी अतिरिक्त समय भी ले सकते हैं, यहाँ शिक्षक द्वारा निरंतर सकारात्मक सहयोग दिया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है |
हम रंगमंच में हर समय 'अन्वेषण' करते रहते हैं | 'अन्वेषण' का अर्थ है- 'पता लगाना' | हम हमेशा किसी कहानी की प्रस्तुति के विषय में अधिक जानने का प्रयास करते हैं या यह जानना चाहते हैं कि दर्शकों को हमारी प्रस्तुति कैसी लगी | हम यह भी जानना चाहते हैं कि कैसे हम स्वयं में सुधार कर सकते हैं या अपनी प्रस्तुति को उत्तम बनाने के लिए क्या कर सकते हैं | तो चलिए, प्रारंभ करते हैं!
वैयक्तिक एकाग्रता का निर्माण करना
रगमच समूह-कार्य है | इसमे आप सदैव एक-दूसरे के सहयोग से एक समूह में मिलकर कार्य करते हैं | यदि कोई समस्या आती है तो हर कोई उसे हल करने की दिशा में कार्य करता है | अगर सफलता मिलती है तो हर कोई उस आनंद को साझा करता है।
परंतु इसका यह अर्थ नहीं है कि कोई वैयक्तिक प्रयास होता ही नहीं है | समूह के प्रत्येक सदस्य के लिए यह महत्वपूर्ण होता
है कि वह समान योगदान दे तथा समान रूप से परिश्रम करे | यद्यपि आप एक समूह में कार्य कर रहे हैं किंतु यह महत्वपूर्ण है कि आप एकाग्र हों और जो आपको करना चाहिए, उस पर ध्यान केंद्रित करें। दूसरों के कार्यों से अपना ध्यान भटकने न दें |
साथ ही, ध्यान रखें कि यदि आप स्पष्ट नहीं हैं कि आपको क्या करना चाहिए तो आप दूसरों की कठिनाई आने पर सहायता नहीं कर सकते हैं | अतः एकाग्र रहें |
"राम कहता है..."
यह एक मनोरंजक रंगमंचीय खेल है, जिसे समूह में खेला जाता है| यह आपके व्यक्तिगत कौशल का परीक्षण करेगा | इस खेल का नियमित रूप से अभ्यास करने से आप सतर्क और एकाग्र हो जाएँगे |
निर्देश तथा प्रारंभिक अभ्यास
आपको केवल उन्हीं निर्देशों का पालन करना है जहाँ शिक्षक कहें- "राम कहता है.."
उदाहरण के लिए,
जब आप सुनें कि "राम कहता है, गोले में घूमो" तो आप गोले में घूमना आरंभ कर दें |
जब आप सुनें कि "राम कहता है, हाथ ऊपर करो” तो अपने हाथ ऊपर उठाएँ |
जब आप सुनें कि "राम कहता है, ऊपर देखो" तो अपना सिर ऊपर की ओर उठाएँ |
ध्यान रखें कि आप जिस भी निर्देश का पालन करें, उसका आरंभ "राम कहता है” से होना चाहिए |
यदि आप "राम कहता है" के बिना, केवल निदेश सुनते है तो उस निर्देश का पालन न करें और पहले वाली क्रिया करते रहें |
उदाहरण के लिए,
जब आप सुनें कि "राम कहता है, गोले में घूमो" तो आप भी गोले में घूमना आरंभ कर दें |
जब आप सुनें कि "राम कहता है, हाथ ऊपर करो" तो अपने हाथ ऊपर उठाएँ |
जब आप केवल "ऊपर देखो" सुनें तो अपना सिर ऊपर की ओर न उठाएँ |
अपने हाथ तब तक ऊपर उठाए रखें जब तक आप यह न सुन लें कि "राम कहता है..."
शिक्षक सभी विद्यार्थियों को सतर्क रहने के लिए मिला-जुला कर निर्देश देंगे | आपको लगातार "राम कहता है..." के साथ निर्देश मिलेंगे और अचानक एक निर्देश बिना "राम कहता है..." के साथ दिया जाएगा! आपको इसे पहचानने और निर्देश का पालन करने में बहुत सतर्क रहना होगा |
प्रारंभिक स्तर
दी गई गतिविधि के तहत विभिन्न प्रकार के निर्देश दिए जाते हैं, जैसे-"चलना", "कूदना”, “हँसने वाला चेहरा बनाना”, “गुस्से वाला चेहरा बनाना”, “हाथी की तरह चलना", "कुत्ते की तरह सूँघना” आदि और कुछ भी जो शिक्षक रचनात्मक रूप से सोच सकते हैं |
विकसित स्तर
आगे चलकर अधिक जटिल गतिविधियाँ, जैसे- चार/पाँच/छह के समूह में काम करके आयत, त्रिभुज और वृत्त जैसी आकृतियाँ बनाना अथवा हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं के विभिन्न अक्षर बनाना इत्यादि कराई जा सकती हैं |
इसी प्रकार पर्यावरण की कुछ सामान्य परिस्थितियाँ, जैसे – पक्षियों का झुंड दानों पर चोंच मार रहा हो या पंचतंत्र की कहानियाँ, जैसे जंगल में घूमता कछुआ आदि गतिविधियों में निहित मनोरंजन को और बढ़ा सकते हैं |
शिक्षक-संकेत
यदि विद्यार्थी खेल को भली-भाँति सीख रहे हैं तो निर्देश देने का उत्तरदायित्व भी अलग-अलग विद्यार्थियों को एक-एक करके दिया जा सकता है। समूह में समन्वय स्थापित करने के उनके कौशल और जटिल निर्देश देने की उनकी दक्षता पर टिप्पणी लिखें |
- उन बातों को साझा कीजिए, जो गतिविधियों को करते समय आपको सबसे आनंददायक और सबसे जटिल लगीं |
- जब यह जटिल लगीं, तब आपने इसका प्रबंधन कैसे किया?
- इस खेल को और भी रोचक बनाने के लिए हम नया क्या जोड़ सकते हैं?
राम कहता है, “विदूषक, एक मनोरंजक कहानी सुनाओ!"
कई वर्ष पहले एक रंगमंच कार्यशाला में “राम कहता ८० है" मुख्य आकर्षण था | बच्चे अच्छी तरह से तैयार थे और बाहर न निकाले जाने के लिए प्रतिबद्ध थे| शिक्षिका सुनीता निर्देश दे रही थीं। उन्होंने सरल निर्देशों से आरंभ किया | सबसे पहले उन्होंने कहा, “राम कहता है- अपनी नाक छुओ”, “राम कहता है- ऊपर-नीचे कूदो |" अब आगे उन्होंने कुछ मनोरंजक करने का निर्णय लिया |
शिक्षिका ने मुस्कुराते हुए आदेश दिया, "राम कहता है, अपना सिर थपथपाओ और पेट भी रगड़ो |" इससे अव्यवस्था होने लगी | न बच्चे भ्रमित कठपुतलियों की तरह हड़बड़ाहट में थपथपाने और व रगड़ने का प्रयास कर रहे थे |
फिर उन्होंने ऊँची आवाज में कहा, "अब ताली बजाओ!” शीघ्रता से कम-से-कम आधे समूह ने ताली बजाई और फिर उन्हें अपनी गलती का अनुभव हुआ | वास्तव में उन्होंने यह नहीं कहा था, "राम कहता है कि थपथपाना और रगड़ना बंद करो|” वे झेंप गए, लेकिन जिसने सभी को हँसाया, वह था राजू, जो लय बनाए रखने पर इतना केंद्रित था कि शेष सभी के रुकने के पश्चात भी पूरे एक मिनट तक थपथपाता और रगड़ता रहा |
अत: जब उसने देखा कि अन्य विद्यार्थी उसे घूर रहे हैं तो उसने भी हाथ ऊपर उठा दिए | शिक्षिका ने कहा, "वह सही था क्योंकि राम ने रुकने के लिए नहीं कहा था |"
जंगल की सैर और पशुओं की गतिविधियाँ
क्या आप सभी पशुओं और पक्षियों से प्रेम करते हैं? क्या आपने कभी सोचा है कि अपने प्रिय पशु या पक्षी की तरह जीवन जीना कैसा होगा? जंगल में घूमना, अपने भोजन की खोज करना और शाखाओं के नीचे या गुफा में सोना, कैसा होगा? यह रोचक गतिविधि आपको यह सब करने और उससे भी कुछ अधिक करने का अवसर देती है। इसमें आपको जंगल में दूसरे पशुओं से बातचीत करने का भी अवसर मिलता है !
निर्देश तथा प्रारंभिक अभ्यास
अपने प्रिय पशु या पक्षी के बारे में सोचिए और कमरे में अनियमित ढंग से चलिए। जैसे ही शिक्षक ताली बजाएँ, आप जिस पशु या पक्षी के विषय में सोच रहे हैं, उसी की स्थिति में मूर्तिवत (फ्रीज) हो जाएँ। वैकल्पिक रूप से, आप सभी एक-दूसरे के बीच पर्याप्त दूरी बनाकर खड़े हो जाएँ। शिक्षक एक चिट उठाकर एक पशु का नाम लेते हैं और आप सभी उस पशु की तरह चलते हैं। रोचक लगा?
प्रारंभिक स्तर (व्यक्तिगत गतिविधि)
मान लीजिए कि आप एक पशु है लेकिन कक्षा में इसकी घोषणा न करें | उस पशु की शारीरिक गतिविधियों का अनुकरण कीजिए | आपके चलने की गति, खाने का ढंग, सोने का ढंग और अन्य व्यवहार उस पशु के समान होने चाहिए | आपके मित्रों को अनुमान लगाना होगा कि आप कौन-से पशु हैं |उदाहरण के लिए, स्लॉथ सुस्त होता है और कुत्ता अपेक्षाकृत तीव्र होता है |
पंचतंत्र अभ्यास
आप (उसी पशु के रूप में) भोजन की खोज में शेर की गुफा के पास चल रहे हैं। सावधानी से चलें, जिससे शेर जाग न जाए। अचानक एक तीव्र ध्वनि सुनाई देती है और शेर जाग जाता है | भागो !
विकसित स्तर (समूह गतिविधि)
अब आप समूह के साथ जगल में है | आपके साथ आपकी प्रजाति के कुछ और तथा कई अन्य पशु भी हैं। अब आप झुंड में हैं तो आप कैसा व्यवहार करेंगे? आप दूसरे पशुओं के साथ कैसा व्यवहार करेंगे? कुछ आपके मित्र हैं जबकि कुछ नहीं | संकट में होने पर आप अपना बचाव कैसे करेंगे?
पंचतंत्र अभ्यास
कल्पना कीजिए कि आप एक हिरण है और आप शेर के क्रोध से बचने की योजना पर चर्चा कर रहे हैं | आप अपने परिवार के शिशु-हिरण को बचाना चाहते हैं | अन्य पशुओं के साथ एक सरल दृश्य का अभिनय कीजिए |
शिक्षक-संकेत
इन अभ्यासों का उपयोग पशुओं के माध्यम से सुनाई जाने वाली प्रसिद्ध कहानियों से लघु कथाएँ या दृश्य सामने लाने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए- हितोपदेश और राजा सिंह ! |
- आपको किस पशु का हाव-भाव पसंद आया और क्यों?
- आपका किस पशु का प्रदशन पसंद नहीं आया और क्यों?
- कौन-सा पशु आपके साथ अच्छा व्यवहार करता था और सम्मान दिखाता था?
- क्या आपको लगता है कि चलने के लिए कई अंगों का होना अच्छा है या दो पैरों का होना अच्छा है?
| आकलन - अध्याय 5- अन्वेषण ! | ||||
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दक्षताएँ C- 1.1 – नाट्य गतिविधियों में विभिन्न वस्तुओं, लोगों, स्थितियों और अनुभवों को चित्रित करने के लिए उत्साह व्यक्त करते हैं | C-1.2 - नाट्यकला में अपने विचारों और प्रतिक्रियाओं पर सहयोगात्मक रूप से काम करते हए चर्चा करते हैं | |
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| पाठ्यचर्या लक्ष्य | दक्षताएँ | सीखने के प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| 1 | C-1.1 | समूह गतिविधि में अपने कार्य पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम हैं | | ||
| C-1.2 | दृश्य में सुधार करते है और रचनात्मक रूप से जोड़ते हैं | | |||
| C-1.2 | गतिविधियों को बिना किसी रुकावट के करते हैं | | |||
| C - 1.1, 1.2 | सतर्क रहते है एवं सूक्ष्मताओं पर ध्यान देते है। | | |||
| कक्षा में पूर्ण सहभागिता करते हैं | | ||||
विद्यार्थियों की क्षमताओं पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया ................
विकास-क्षेत्रों पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया...............
कोई अन्य अवलोकन ................