कल्पना एक बहुत शक्तिशाली उपकरण है। यदि आप व्यापक रूप से कल्पना करने में सक्षम हैं तो यह एक महाशक्ति होने जैसा है। इसकी सहायता से आपको नए विचार आते हैं, आप नई कहानियाँ कह सकते हैं और समस्याओं का समाधान भी कर सकते हैं! क्या आप जानना चाहते हैं कि कैसे? आगे अर्जुन से जुड़ी एक रोचक कहानी दी गई है |
लगभग 500 वर्ष पूर्व चित्रपुर में महाभारत युद्ध पर आधारित एक भव्य नाटक खेला जा रहा था | इसे देखने के लिए गाँव के लोग आए थे। नाटक आरंभ हुआ... जब सबसे रोमांचक भाग आया, जिसमें अर्जुन को मंच पर आना था तो भूमिका निभा रहा अभिनेता मंच के पीछे लड़खड़ा गया | एक नुकीले कोने में फँसकर उसके चमकदार परिधान फट गए | वह रंग-बिरंगा परिधान खराब हो गया | हर कोई तनावग्रस्त और चिंतित था कि परिधान के बिना, अर्जुन कैसे आगे अभिनय कर सकता था?
तभी मंच के पीछे सहायता करने वाले अर्जुन (हाँ, संयोगवश) नाम के एक छोटे लड़के को एक विचार सूझ | उसने कहा, “हम चारों ओर से प्रकृति से घिरे हुए हैं!” उसने अपनी आँखें बंद कीं और कहा, "मुझे लगता है कि हम पत्तों और छाल से एक नया परिधान बना सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे जंगलों में ऋषि-मुनि पहना करते थे | मैं अपने मन में इसे स्पष्ट रूप से देख सकता हूँ |"
इससे पहले कि कोई आपत्ति जताता, वह दौड़कर बड़ी-बड़ी पत्तियाँ, छाल की पट्टियाँ और बेलें इकट्ठी करने लगा | उसने पत्तियों को आपस में बाँधा और बेलों से कपड़े की बेल्ट और बाजूबंद बनाए | उसने युद्ध के रंग के लिए हल्दी पाउडर और राख लगाई और नया परिधान तैयार हो गया !
अभिनेता अपने बदले हुए परिधान में मंच पर आया | लोगों ने आश्चर्य भाव से तालियाँ बजाईं | उन्हें लगा कि प्रकृति के माध्यम से अर्जुन की शक्ति को दिखाना एक अच्छा विचार था | नाटक बहुत अच्छा चला और फटे हुए परिधान को भुला दिया गया | युवा अर्जुन अपनी तीव्र कल्पनाशक्ति और समस्या समाधान के फलस्वरूप नायक बन गया |
समूह में व्यक्तिगत कौशल
आपने देखा कि अर्जुन कैसे हीरो बन गया | यहाँ दो बातें ऐसी हैं जो हम सीख सकते हैं; प्रथम – अच्छी आपने देखा कि अर्जुन कैसे हीरो कल्पनाशक्ति सहायक होती है और द्वितीय - एक समूह में विशिष्ट कौशल होना बहुत अंतर ला सकता है | यद्यपि समूह में सभी मिलकर एक सामान्य लक्ष्य की ओर बढ़ रहे होते हैं लेकिन यह ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक सदस्य के पास क्या-क्या कौशल हैं? उन्हें विकसित करने में सहायता कीजिए | समूह में हर कोई एक जैसा काम नहीं कर सकता | हर किसी को उस कौशल के आधार पर योगदान देना होगा, जिसमें वे अच्छे हैं |
पंचतंत्र अभ्यास
स्वयं को पाँच-पाँच सदस्यों के समूह में बाँटिए। अपने समूह में प्रत्येक सदस्य को एक-एक पशु का चरित्र दे दीजिए। सभी सदस्य स्वयं से संबंधित पशु के गुणों की एक सूची बनाएँ|
अब एक समूह के रूप में कल्पना कीजिए कि आप शेर के क्रोध से बचने के लिए जंगल में एक योजना बना रहे हैं। खरगोश ने जो किया था, उससे अलग सोचिए। चर्चा कीजिए कि प्रत्येक पशु में ऐसा कौन-सा कौशल है जिसका उपयोग शेर से बचने के लिए किया जा सकता है |
आपके समूह का नाम................................
जंगल में शेर से बचने का नया समाधान.........................
प्रत्येक समूह के कलाकार का योगदान..............................
वस्तु आधारित अभ्यास - समूह
आइए, एक रंगमंचीय खेल खेलते हुए समझते हैं कि एक समूह में काम करते हुए भी आप व्यक्तिगत रूप से काम कर सकते हैं| याद कीजिए कि आपने पिछले वर्ष भी 'वस्तु आशु अभ्यास' किया था, याद है? आपने आस-पास की वस्तुओं का अलग-अलग रूपों में उपयोग किया था, जैसे - अपनी पेंसिल बॉक्स को खजाने का डिब्बा या लैपटॉप समझकर उपयोग करना ! यह खेल आप एक बार और खेल सकते हैं जिससे पिछली बार क्या किया था, वह याद आ जाए | इससे उन बच्चों को भी सहायता मिलेगी, जो पिछली बार इस खेल में भाग नहीं ले सके थे |
रंगमंचीय खेल - पुनः स्मरण (कक्षा 3)
शिक्षक कोई एक वस्तु चुनते हैं। प्रत्येक विद्यार्थी उस वस्तु का उपयोग समान उद्देश्य के लिए किंतु मूल उपयोग से अलग रूप में सोचता है। विद्यार्थी बारी-बारी से उस वस्तु को उठाते हैं और उसे किसी दूसरी वस्तु की तरह उपयोग करते हुए अभिनय करते हैं। इसमें दोहराव की अनुमति नहीं होती है |
अब हम इसे समूह के रूप में करेंगे | सबसे पहले, शिक्षक कक्षा में कोई एक वस्तु चुनेंगे | मान लीजिए, शिक्षक ने एक पानी की बोतल चुनी | इसका उपयोग अनेक रूपों में किया जा सकता है, जैसे कि-
बोलने के लिए एक माइक
पुरस्कार के लिए एक ट्रॉफी
एक फोन या ऐसा ही कुछ और
शिक्षक आप में से किसी एक को अनायास एक वस्तु दे देते हैं | विद्यार्थी के अभिनय के आधार पर शिक्षक एक अन्य विद्यार्थी को दृश्य में जोड़ देते हैं | अब दोनों विद्यार्थियों को उस पानी की बोतल पर आधारित काल्पनिक वस्तु पर चर्चा करनी है | जब चर्चा कुछ आगे बढ़ जाती है तो शिक्षक एक और विद्यार्थी को दृश्य में सम्मिलित करते हैं |अब तीनों को पानी की बोतल को केंद्र में रखकर अपनी कल्पना के आधार पर एक दृश्य बनाना है |
शिक्षक-संकेत
शिक्षक विद्यार्थियों को सिर्फ दृश्य में जोड़ते हैं| विद्यार्थी कौन-सी भूमिका निभाएगा और क्या बोलेगा, वह स्वयं तय करता है | शिक्षक विद्यार्थियों को कोई निश्चित भूमिका नहीं देते | विद्यार्थी दृश्य में परिस्थिति के अनुसार स्वयं निर्णय लेते हैं |
याद रखें !
आवश्यक प्रमुख कौशल- कल्पनाशीलता और अवलोकन | आपको अपने कार्यों का प्रदर्शन ऐसे करना है कि सभी को आसानी से समझ में आ जाए | यदि आप अपने कार्य को समझाने में असमर्थ होते हैं तो पूरे दृश्य का कोई अर्थ निकलकर नहीं आएगा |
शिक्षक-संकेत
सुनिश्चित करें कि सभी विद्यार्थियों को दोनों भूमिकाएँ निभाने का अवसर मिले | पहला, जो प्रदत्त वस्तु की कल्पना करता है और दूसरा जो उस दृश्य में कुछ और जोड़ता है | दोनों भूमिकाओं में अलग-अलग प्रकार के कौशल की आवश्यकता होती है, जिन्हें विद्यार्थियों में विकसित करना आवश्यक है |
- किस वस्तु के लिए आप विभिन्न प्रयोग की कल्पना कर सकते हैं?
- कौन-सा दृश्य सबसे अधिक रोचक था, जब वह तैयार किया गया?
- घर पर मिलने वाली पाँच वस्तुओं के लिए तीन-तीन नए उपयोगों की सची बनाइए।
- कौन-सा दृश्य बनाना सबसे कठिन था? क्यो?
आपको समझ आ गया होगा कि कैसे कल्पनाशीलता एक महाशक्ति है जो हमेशा आपकी सहायता करेगी | आइए, समझने का प्रयास करते हैं कि रंगमंच में यह कैसे सहायता करती है | यह दो प्रकार से कार्य करती है-
1. किसी कहानी या विचार के बारे में रचनात्मक रूप से सोचना और उसे विकसित करना |
2. यह कल्पना करना कि मंच पर या दर्शकों के सामने वह कैसा दिखेगा |
पिछली गतिविधि, किसी वस्तु के आस-पास कहानी गढ़ना, बॉक्स में उल्लिखित कल्पना का पहला प्रकार है | याद है न, अर्जुन ने उस दिन अपनी कल्पना से एक नया परिधान बनाकर नाटक को बचाया था! यह कल्पना का दूसरा प्रकार है, जिसे प्रत्यक्षीकरण कहते हैं |
प्रत्यक्षीकरण का अर्थ है- अपने मन में ऐसी तस्वीरें, छवियाँ या दृश्य बनाना, जिन्हें आपने पहले कभी नहीं देखा हो |
उदाहरण के लिए, सोचिए कि आप एक सुपरहीरो हैं| यह प्रत्यक्षीकरण नहीं है| लेकिन जब स्वयं को आकाश में उड़ते हुए, समुद्र पार करते हुए और दुश्मनों को हराते हुए देखते हैं तो यह प्रत्यक्षीकरण है| अगर आप यह देख पाते हैं कि आपने क्या पहना है, जब आप आकाश में उड़ रहे हैं तब आपके आस-पास क्या है, आप दूसरों से कैसे बात करते हैं तब आपकी प्रत्यक्षीकरण की दक्षता बहुत अच्छी है! आइए, अब एक रोचक गतिविधि करते हैं जो आपकी प्रत्यक्षीकरण की दक्षता का निर्माण करेगी|
समूह दृश्य निर्माण
पिछली गतिविधि में आप सभी ने एक वस्तु के आधार पर दृश्य बनाया| इस गतिविधि में अंतर यह है कि अब पहले योजना बनानी है, चर्चा करनी है और तब यह तय करना है कि आप क्या अभिनय करेंगे | आपको शीघ्र एक कहानी बनानी होगी | यह आपको प्रत्यक्षीकरण करने का अवसर देगा | कहानी तय करने के बाद आपको दृश्य के विवरण की कल्पना करनी होगी | नीचे कुछ बिंदु दिए गए हैं जो प्रत्यक्षीकरण करने में आपकी सहायता करेंगे |
किसी दृश्य के प्रत्यक्षीकरण में आपकी सहायता करने वाले बिंद
- जब दृश्य आरंभ होता है तो मंच पर क्या होता है (जैसे- एक मेज और कुर्सी या एक बैग लिए खड़ा अभिनेता)?
- अभिनेता (विद्यार्थी) कब और कहाँ से मंच पर प्रवेश करेगे?
- वे एक-दसरे से कहाँ और कैसे बात करेंगे?
- यह दृश्य कैसे समाप्त होगा और अभिनेता कहाँ से बाहर निकलेगे?
यदि आपका समूह इन बिंदुओं पर चर्चा कर सकता है और इन्हें प्रत्यक्षीकृत कर सकता है तो आप अभिनय के लिए तैयार हैं|
प्रारंभिक स्तर
शिक्षक द्वारा प्रत्येक समूह को दिया गया विषय एक वस्तु होगी | कहानी उसी वस्तु के आधार पर बनाई और प्रस्तुत की जाएगी |
विकसित स्तर
एक वस्तु के अतिरिक्त एक व्यापक विषय दिया जाएगा। इससे कहानी निर्माण में रचनात्मकता और कल्पना को अधिक स्थान मिलता है। उदाहरण के लिए- डर, गुस्सा, प्रकृति, विद्यालय और यात्रा।
शिक्षक-संकेत
कक्षा को चार या पाँच विद्यार्थियों के समूहों में बाँटा जाएगा | विद्यार्थियों को दी गई वस्तु या विषय के आधार पर एक कहानी बनानी होगी | प्रत्येक समूह को योजना बनाने और चर्चा करने के लिए 5 मिनट का समय दिया जाएगा | जब एक समूह प्रदर्शन कर रहा होगा तब अन्य विद्यार्थियों को उसे देखना और उस पर टिप्पणी देना आवश्यक होगा | प्रदर्शन के बाद शिक्षक को सभी समूहों से संक्षिप्त प्रतिक्रिया लेनी होगी, उसके उपरांत अगले समूह की प्रस्तुति होगी|
पंचतंत्र अभ्यास
पंचतंत्र की किसी कहानी का एक भाग किसी समूह द्वारा चुना जा सकता है जिसे वे अलग ढंग (मूल कथा से अलग) से प्रस्तुत कर सकते हैं। दृश्य में पशुओं का चुनाव और उनकी भूमिकाएँ समूह की रचनात्मकता और कल्पना के अनुसार बदली जा सकती हैं।
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प्रतिक्रिया चर्चा के लिए टिप्पणियाँ लिखने हेतु बिंदु |
नहीं समझ पाए |
और अच्छा कर सकते हैं |
अति उत्तम |
|---|---|---|---|
| कहानी का किसी दी गई वस्तु या विषय पर केंद्रित होना | |||
| अभिनेताओं के प्रवेश और निकास में आत्मविश्वास | |||
| प्रस्तुत की जाने वाली कहानी के बारे में स्पष्टता | |||
| सभी समूह सदस्यों की भागीदारी |
- क्या कहानी का प्रभाव तब अलग होता है जब वह किसी वस्तु या विषय पर केंद्रित होती है?
- कहानियों का आरंभ और अंत क्या समान स्वरूप पर हआ है?
- क्या कहानियो में विषय और वस्तु दोनो सम्मिलित हो सकते हैं? अपने खाली समय में इसे करने का प्रयास कीजिए।
| आकलन - अध्याय 6- कल्पना | ||||
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दक्षताएँ C- 2.1 –- कक्षा में विभिन्न चरित्रों, भूमिकाओं, स्थितियों, स्थानों और आधारभूत रंगमंचीय सामग्री को मिलाकर, दैनिक घटनाओं पर आधारित नाटक बनाना और उसका प्रदर्शन करना | C-2.2 - - नाटक के विषयों और तत्वों तथा कक्षा में सृजित संबंधित कलात्मक अभिव्यक्तियों की तुलना और विषमता अभिव्यक्त करते हैं | |
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| पाठ्यचर्या लक्ष्य | दक्षताएँ | सीखने के प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| 2 | C-2.1 | समह में अपने कौशल को सामने लाने में सक्षम होते है | | ||
| C-2.1,C-2.2 | अन्य लोगों के द्वारा अभिनय के दौरान विवरणों का अवलोकन करते हैं तथा उसमें अपनी भूमिका की कल्पना करते हैं | | |||
| C-2.1,C-2.2 | जो पूछा गया है उससे अधिक कार्य करने को उत्सुक रहते हैं | | |||
| C - 2.1 | भूमिका और स्थान को वस्तु के संदर्भ में समझते हैं | | |||
| C - 2.2 | दृश्य तैयार करने के लिए एकल विचार की बजाय सर्वसम्मति से कार्य करते हैं | | |||
| C - 2.2 | दिए गए मानदंडों के अनुसार दूसरों के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया प्रदान करते हैं | | |||
| कक्षा मे पूर्ण सहभागिता करते है | | ||||
विद्यार्थियों की क्षमताओं पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया.............................
विकास-क्षेत्रों पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया......................................
कोई अन्य अवलोकन.........................................