क्या आपने कभी किसी वृद्ध व्यक्ति की तरह छड़ी लेकर चलने का प्रयास किया है? या संभवतः आपने कभी अपनी माँ की तरह हैंडबैग पकड़कर खड़े होने या बैठने का प्रयास किया होगा। आपने किसी पशु के चलने, कूदने या सूँघने के तरीके का अनुकरण भी किया होगा | क्या किसी और की तरह व्यवहार करना मनोरंजक नहीं है? क्या आप जानते हैं कि यह रंगमंच की बहुत महत्वपूर्ण तकनीक है! इसे अनुकरण कहा जाता है |
रंगमंच में अनुकरण करना एक आधारभूत तकनीक है, जिसमें अभिनेता दूसरों की क्रिया, आवाजों या चेहरे के भावों को देखकर उनका अनुकरण करते हैं, जिससे विश्वसनीय चरित्रों का निर्माण किया जा सके | इसके लिए वास्तविक जीवन के लोगों, पशुओं या यहाँ तक कि वस्तुओं तक का गहन अध्ययन करने एवं उनके गुणों को मंच पर जीवंत करने की आवश्यकता होती है | आइए, हम एक सरल खेल खेलें, जिससे हम समझ सकें कि अनुकरण करना कैसा लगता है?
दर्पण अभ्यास
इस खेल का सबसे रोचक भाग यह है कि इसमें कोई वास्तविक दर्पण नहीं है! आप स्वयं दर्पण बनते हैं और उसी के समान व्यवहार करते हैं! गतिविधि के दौरान आप सभी को एक-दूसरे के सामने जोड़े में खड़े होना है | एक को दर्पण बनने के लिए व दूसरे को मनुष्य बनने के लिए चुना जाएगा | मनुष्य जो भी कार्य करेगा, दर्पण उसका अनुकरण करेगा | कुछ समय बाद भूमिकाएँ बदल जाएँगी |
प्रारंभिक स्तर
निर्देशानुसार स्थिर खड़े हो जाएँ | मनुष्य अपने हाथ-पैर हिला सकता है, बैठने और खड़े होने जैसी क्रियाएँ कर सकता है जबकि दर्पण लगातार मनुष्य की नकल करेगा | कुछ समय बाद भूमिकाएँ बदलें |
शिक्षक-संकेत
बच्चों द्वारा अनुकरण करना स्वाभाविक है | रंगमंच अवलोकन और प्रतिबिंबन के माध्यम से रचनात्मकता को अभिव्यक्त करने की एक संरचित विधि प्रदान करता है | ये कौशल हमें समानुभूति और आत्मविश्वास विकसित करने में सहायता करते हैं |
याद रखें !
आप एक-दूसरे को स्पर्श नहीं कर सकते | सभी क्रियाएँ एक-दूसरे से एक हाथ की दूरी पर करनी होंगी |
यदि आपने ध्यान दिया हो तो संभवतः जब मनुष्य ने अपना दाहिना हाथ उठाया होगा तब आप में से कुछ लोगों ने (दर्पण की भूमिका निभाते हुए) अपना दाहिना हाथ उठाने की भूल की होगी | यद्यपि आप उसका अनुकरण सही कर रहे हैं, लेकिन दर्पण प्रायः इसके विपरीत दर्शाता है | वास्तविकता में जो आपका बायाँ है, वही दर्पण का दायाँ है | इस अवधारणा को समरूपता कहा जाता है | समरूपता तब होती है जब बीच में खींची गई रेखा के सापेक्ष दोनों पक्ष समान दिखते हैं |
विकसित स्तर
निर्देशानुसार स्थिर खड़े हो जाएँ | अब मनुष्य विभिन्न प्रकार के चेहरे के भाव एवं गतिविधियाँ कर सकते हैं | यदि संभव हो तो सरल रंगमंचीय सामग्री को भी जोड़ा जा सकता है | उदाहरण के लिए, दाँत साफ करना, विद्यालयी बस्ते को तैयार करना आदि |
पंचतंत्र अभ्यास
याद रखें कि खरगोश शेर को कुएँ के पास ले जाता है और शेर को यह विश्वास दिलाता है कि जो प्रतिबिंब वह देख रहा है, वह दूसरे शेर का है | अब अपने दर्पण अभ्यास को जारी रखते हुए, आप में से एक असली शेर होगा और दूसरा उसका प्रतिबिंब होगा | आप शेर के बगल में खरगोश को भी जोड़ सकते हैं | चूँकि पूरी बातचीत प्रतिबिंब के माध्यम से होती है इसलिए दर्पण अभिनय को अपना प्रतिबिंब बनाकर दृश्य को निभाएँ!
- दर्पण बनने का आपका अनुभव कैसा रहा?
- क्या इस गतिविधि को करते समय अपनी हँसी को नियंत्रित करना आसान था?
- कौन-सी भूमिका अधिक रोचक थी— दर्पण की भूमिका निभाना या मनुष्य की?
दर्पण खेल के सभी रूपों को खेलने के बाद आपको सही ढंग से अनुकरण करने के लिए अच्छे अवलोकन के महत्व का अनुभव हो गया होगा | रंगमंच में अनुकरण का अर्थ मात्र नकल करना नहीं है| यह अवलोकन को रचनात्मक स्पर्श के साथ व्यक्तिगत प्रदर्शन में बदलने के विषय में है|
भूमिका निर्वाह - नई चुनौतियाँ
रंगमंच में भूमिका निर्वाह एक विशेष चरित्र को अपनाने, स्थिति को समझने, संभावनाओं की कल्पना करने और एक चरित्र विशेष के रूप में अभिनय करने की प्रक्रिया है | इसका उपयोग आमतौर पर कहानियाँ सुनाने के लिए किया जाता है | साथ ही 'करके सीखने' या 'समस्या-समाधान' में भी इसका उपयोग किया जाता है |
रंगमंच गतिविधि - स्मरण (कक्षा 3)
गत वर्ष आपको पुलिस और चोर या राजा और मंत्री जैसे सरल चरित्र दिए गए थे, जिनके लिए आपको बातचीत करनी थी | आपको इसके लिए योजना बनाने और तैयारी करने के लिए कुछ समय दिया गया था | आपने तेनालीराम जैसी कहानियों के साथ भी इस गतिविधि को करने का प्रयास किया था |
चुनौती 1– संवादात्मक
अब हम उसी भूमिका को निभाने के साथ प्रारंभ करेंगे, जिससे आप परिचित हैं| आप में से कोई दो विद्यार्थी स्वेच्छा से भूमिकाएँ निभाते हैं| शिक्षक द्वारा चरित्र दिए जाते हैं, उदाहरण के लिए, एक चिकित्सक और एक रोगी| दोनों चरित्र इस बारे में बातचीत आरंभ करते हैं कि रोगी चिकित्सक के पास क्यों जा रहा है| जब वे लगभग 4-5 पंक्तियाँ बोल चुके होते हैं तब शिक्षक उन्हें 'रुकने' के लिए कहते हैं|
अब यह दर्शकों (कक्षा के अन्य विद्यार्थियों) पर निर्भर करता है कि वे तय करें कि आगे क्या होगा | दोनों अभिनेताओं को वही करना है जो उन्हें बताया जाए| दर्शक चुन सकते हैं-
- एक नई रंगमंच सामग्री जोड़ें
- एक नया चरित्र जोड़ें
- एक नई समस्या जोड़कर कहानी की दिशा बदलें
अब हम उसी भूमिका को निभाने के साथ प्रारंभ करेंगे, जिससे आप परिचित हैं| आप में से कोई दो विद्यार्थी स्वेच्छा से भूमिकाएँ निभाते हैं| शिक्षक द्वारा चरित्र दिए जाते हैं, उदाहरण के लिए, एक चिकित्सक और एक रोगी| दोनों चरित्र इस बारे में बातचीत आरंभ करते हैं कि रोगी चिकित्सक के पास क्यों जा रहा है| जब वे लगभग 4-5 पंक्तियाँ बोल चुके होते हैं तब शिक्षक उन्हें 'रुकने' के लिए कहते हैं|
मान लीजिए, दर्शक कहते हैं कि रोगी ने चिकित्सक के कमरे में अचानक एक बिल्ली को देखा | अब चाहे पहले कोई भी बातचीत हो रही हो, उन्हें कमरे में बिल्ली को देखकर प्रतिक्रिया देनी होगी | उनके पास तैयारी के लिए समय नहीं है, उन्हें त्वरित होना होगा | कुछ आगे बढ़ने के बाद, शिक्षक फिर से 'रुकने' के लिए कहते हैं
अब विद्यार्थी कुछ नया प्रस्तुत करते हैं | (ध्यान दें कि उनके पास तैयारी के लिए समय नहीं है | उन्हें सतर्क और तैयार रहना है) | मान लीजिए कि विद्यार्थी कहते हैं-
"इस रोगी के नाम से ही एक और रोगी आता है | जाँच करने पर उन्हें पता चलता है कि पहला रोगी वास्तव में एक पुलिसवाला था!” अब दृश्य में एक नया अभिनेता जुड़ जाता है | पुलिसवाला क्यों आया है और उसके आने से क्या हुआ है, यह अभिनेता को तुरंत व्यक्त करना होता है |
यह तब तक चलता रहेगा जब तक कि शिक्षक अभिनेताओं और स्थिति को बदलने का निर्णय नहीं ले लेते |
यदि कक्षा में सभी ने यह चुनौती पूरी कर ली है तो अगली चुनौती के लिए तैयार हो जाइए!
चुनौती 2– बदलना
भूमिका निर्वाह हमेशा की तरह आरंभ होता है, जिसमें दो विद्यार्थी शिक्षक द्वारा सुझाए गए चरित्र निभाते हैं | चलिए, चिकित्सक और रोगी का ही उदाहरण लेते हैं |
क्रमशः दोनों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है| जब शिक्षक को लगता है कि वे अपने चरित्र में डूबे हुए हैं तो एक महत्वपूर्ण बिंदु पर शिक्षक बदलने को कहते हैं | अब चिकित्सक की भूमिका निभाने वाला बच्चा रोगी बन जाता है और रोगी की भूमिका निभाने वाला बच्चा चिकित्सक बन जाता है | बातचीत निरंतर चलती रहती है | उन्हें यह सोचने के लिए कि क्या बोलना है, कोई समय अंतराल नहीं दिया जाता | यह त्वरित होना चाहिए |
विकसित स्तर
चुनौती के अगले स्तर में तीन या चार चरित्रों को रखना है | जब शिक्षक बदलने के लिए कहते हैं, जैसा कि दिए गए उदाहरण में है, चिकित्सक रोगी 1 बन जाता है, रोगी 1 रोगी 2 बन जाता है और रोगी 2 चिकित्सक बन जाता है | जब दूसरा 'बदलना' होता है तो वे तीसरे चरित्र में बदल जाते हैं|
इस तरह प्रत्येक बच्चे को तीनों चरित्र निभाने का अवसर मिलता है | चार अभिनेताओं के साथ दृश्य की कठिनाई का स्तर और भी बढ़ाया जा सकता है |
शिक्षक-संकेत
जो चरित्र दिए जाते हैं, वे परिचित और अनोखे दोनों हो सकते हैं | कुछ चरित्र उनके दैनिक जीवन से हो सकते हैं (जैसे कि पहले दिए गए चिकित्सक के उदाहरण में) | अन्य पूरी तरह से काल्पनिक चरित्र हो सकते हैं, जैसे बाहरी अंतरिक्ष से आया कोई एलियन या उत्तरी ध्रुव से उड़कर आया कोई बात करने वाला पक्षी | इससे बच्चों को अपने अनुभव से सीखने और तीव्र कल्पनाशक्ति विकसित करने का अवसर मिलता है, जिससे रचनात्मकता विकसित करने में भी सहायता मिलती है |
- कौन-सी चुनौती अधिक रोचक थी और क्यों?
- यदि आपको कोई नई चुनौती जोड़नी हो तो आप क्या जोड़ेंगे?
- क्या आप चुनौतियों के साथ या चुनौतियों के बिना भूमिका निभाना पसंद करेंगे? क्यों?
पंचतंत्र अभ्यास
पंचतंत्र की कहानी के माध्यम से दोनों चुनौतियों का सामना किया जा सकता है-
चुनौती 1- संवादात्मक- कहानी का कोई भी भाग चुनें
और उसमें दो चरित्र जोड़ें |
उदाहरण - एक हिरण और एक बंदर शेर की समस्या का
समाधान ढूँढ़ने का प्रयास कर रहे हैं | दर्शक कलाकारों को आगे बढ़ने के लिए कोई चरित्र या कोई अन्य वस्तु जोड़ने जैसे बदलाव का सुझाव देते हैं |
उदाहरण - यदि वह शेर की
जगह मगरमच्छ होता तो क्या होता?
चुनौती 2- बदलना - इसी उदाहरण में जब शिक्षक 'बदलने'
के लिए कहते हैं तो हिरण, बंदर बन जाता है और बंदर, हिरण के रूप में बोलता है | समाधान निकालने के लिए खरगोश को दृश्य में जोड़ा जा सकता है |
| आकलन - अध्याय 6- कल्पना | ||||
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दक्षताएँ C- 3.1 –-- रंगमंच कला में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों, उपकरणों और तकनीकों के साथ काम करते समय चुनाव करना | C-3.2 - - व्यक्तिगत और सहयोगात्मक रूप से नाटक तैयार करते समय योजना, क्रियान्वयन और प्रस्तुति के चरणों का अभ्यास करना | |
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| पाठ्यचर्या लक्ष्य | दक्षताएँ | सीखने के प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| 2 | C-3.1 | क्रियाओं और हाव-भाव में संभावनाओं की खोज करते हैं | | ||
| C-3.1 | अनुकरण/दर्पण प्रतिबिंबन करते समय सूक्ष्मताओं (छोटी-छोटी बातों) पर ध्यान देते हैं | | |||
| C-3.1 | दर्पण प्रतिबिंबन के दौरान रंगमंच सामग्री, चेहरे के हाव-भाव और सूक्ष्म क्रियाओं का उपयोग करते हैं | | |||
| C-3.1,3.2 | बिना किसी हिचकिचाहट के नई चुनौतियों को स्वीकार करते हैं | | |||
| C - 3.2 | दृश्य में दर्शक के रूप में सम्मिलित होते हैं और नवाचारी सुझाव देते हैं | | |||
| C - 3.2 | दृश्य को यथार्थवादी बनाने के लिए त्वरित रूप से रंगमंच सामग्री, ध्वनि आदि का उपयोग करते हैं | | |||
| कक्षा में पर्ण सहभागिता करते हैं | | ||||
विद्यार्थियों की क्षमताओं पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया ..............
विकास-क्षेत्रों पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया...................................
कोई अन्य अवलोकन.................................................