अपने आस-पास का वस्तुआ से आप सदैव बहुत से विचार और प्रेरणाएँ पा सकते हैं | आप सबसे पहले अपने आस-पास के लोगों के साथ आरंभ कर सकते हैं | विभिन्न परिस्थितियों और चरित्रों की विविधता से आप कई रोचक कहानियाँ बना सकते हैं |
इसके बाद आप पशुओं को देख सकते हैं | उनका व्यवहार एवं गतिविधियाँ, कहानियों एवं प्रस्तुतियों में समाहित करने हेतु बहुत रोचक होती हैं, जैसा कि आपने अध्याय 5 में पहले ही ऐसा प्रयास कर चुके हैं | क्या कोई ऐसा पशु है जिससे आप गहरा जुड़ाव अनुभव करते हैं? उस पशु की कौन-सी विशेषताएँ आपको पसंद हैं?
यदि आपको उस पर कोई कहानी बनानी हो तो आप क्या कहानी बनाना चाहेंगे?
आइए, अब हम इंसानों और पशुओं से आगे देखें | हमारे पास क्या है? सुंदर प्रकृति ! पेड़, नदियाँ, पहाड़, बहती हवाएँ... क्या ये सब आपको प्रसन्नता और शांति अनुभव नहीं कराते?
क्या आप जानते हैं?
प्राचीनकाल में आज से लगभग 2600 वर्ष पूर्व जब सभागार (ऑडिटोरियम) नहीं थे, तब नाटक खुले मैदानों में पेड़ों और पहाड़ों के बीच खेले जाते थे | क्या आप पेड़ों के बीच बैठकर नाटक देखना पसंद करेंगे या आप आज के वातानुकूलित सभागारों को अधिक पसंद करते हैं?
हम सभी को नदी में खेलना या हरी घास पर चलना बहुत अच्छा लगता है | आइए, अब एक रोचक गतिविधि करें, जिसमें हम ये सुंदर वस्तुएँ यहीं कक्षा में रचें | यही है रंगमंच का जादू !
निर्देश
आपको 4 या 5 विद्यार्थियों के समूहों में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक समूह को शिक्षक द्वारा दिए गए विषय पर आधारित एक कहानी बनानी होगी। ये विषय प्रकृति से संबंधित होंगे |
ये प्रकृति से जुड़ी स्थितियाँ हो सकती हैं, जैसे-आँधी-तूफान, मरुस्थल, सूखा, नदी आदि | आप अपनी कहानी में पक्षी, मछलियाँ, कीट या अन्य पशु आदि सम्मिलित कर - सकते हैं |
समूह के सदस्य दिए गए विषय के आधार पर एक सरल कहानी बनाते हैं और उस दृश्य का अभिनय करते हैं |
उदाहरण के लिए, यदि दिया गया विषय 'आँधी-तूफान' है तो कहानी यह हो सकती है कि कई दिनों से मूसलाधार बारिश हो रही थी | एक छोटा-सा पिल्ला बारिश में फँस गया था | तीन छोटे लड़के या लड़कियाँ बारिश में साहसपूर्वक उस पिल्ले को बचाते हैं और अपने घर ले आते हैं |
याद रखें !
समूह को तेज़ बारिश और हवा के चलने की आवाज स्वयं तैयार करनी होगी | आप मेज, कुर्सी या शरीर की ताल (जो आपने संगीत की कक्षा में सीखी हो) का उपयोग कर सकते हैं | अपनी वाणी को बदलने का प्रयास कीजिए और पिल्ले की तरह बोलिए। इसे ही 'वाणी का उतार-चढ़ाव' (वॉइस मॉडुलेशन) कहते हैं |
क्या यह दृश्य पंचतंत्र की कहानी के लिए उपयुक्त स्थिति जैसा नहीं लगता? एक कहानी बनाने का प्रयास कीजिए | इस पुस्तक के आरंभ में जो कहानी दी गई है, उसे पढ़ने के बाद आप निश्चित रूप से यह काम कर सकते हैं | महान पंडित विष्णु शर्मा आपको प्रसन्नतापूर्वक रहने का आशीर्वाद देंगे |
अब कक्षा के विद्यार्थी आपस में यह साझा कर सकते हैं
कि प्रत्येक समूह ने अपना प्रदर्शन कैसे किया | जिन बिंदुओं पर विचार किया जा सकता है, वे निम्नलिखित हैं-
क्या दी गई स्थिति कहानी में अच्छी तरह सम्मिलित की गई थी?
(क्या दी गई थीम कहानी का केंद्रीय विचार थी या केवल कहानी का एक छोटा-सा भाग?)
क्या प्रत्येक चरित्र कहानी के लिए आवश्यक था?
(क्या प्रत्येक चरित्र ने कहानी में कुछ जोड़ा या कुछ चरित्र बिना किसी योगदान के ही सम्मिलित थे?)
समूह ने प्रकृति से संबंधित विषय को कैसे प्रस्तुत किया?
(क्या ध्वनि प्रभावों और वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग करके विषय का प्रभाव दिखाया गया?)
क्या पूरी प्रस्तुति सुस्पष्ट थी?
(क्या चरित्रों के आने-जाने और कहानी के क्रम में कोई भ्रम था?)
- क्या हम अपनी कहानियों और क्रियाओं के माध्यम से प्रकृति की महिमा को पुनः रच सकते हैं?
- क्या इसका उपयोग प्रकृति के प्रति जागरूकता प्रदर्शित करने में किया जा सकता है?
- क्या आपको लगता है कि अगर प्रकृति बोल सकती तो अच्छा होता? आप उससे क्या-क्या पूछते?
आइए, अपने देश को देखें
हमने इस अध्याय का आरंभ यह कहकर किया था कि मनुष्य, पशु और प्रकृति ये सभी कला सृजन की महान प्रेरणाएँ हैं | यदि यह सत्य है तो ऐसे अनेक कला रूप होंगे, जो प्रकृति या पशुओं पर आधारित होंगे | आइए, जानते हैं-
हुली वेशा/पिली वेशा
यह एक नाटकीय प्रदर्शन है जो बाघ और उसकी चाल-ढाल पर आधारित होता है | कलाकार का शरीर पीले और काले रंग से बाघ की धारियों जैसा रंगा होता है और चेहरा बाघ के मुखौटे से ढका होता है | पूरे प्रदर्शन में ढोल की तीव्र थाप और लयबद्ध कदमों का साथ होता है | यह प्रस्तुति एकल और समूह दोनों रूपों में की जाती है |
इसे देवी दुर्गा के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है क्योंकि वे सदैव बाघ पर सवारी करती हुई दिखाई देती हैं | कलाकार इस नृत्य में बाघ की ऊर्जा, उग्रता और शक्ति को प्रकट करते हैं | यह देखने में सचमुच अद्भुत लगता है! यह नृत्य मुख्यतः कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में प्रसिद्ध है |
हुली वेशा/पिली वेशा
इसे 'पशु मुखौटा नृत्य' भी कहा जाता है | यह साधारणतः विशेष अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता है | इसमें दो कलाकार पशुओ जैसा दिखने के लिए रंग-बिरंगे नाटकीय वस्त्र पहनकर नृत्य करते हैं | यह वास्तविक पशु से कहीं बड़ा और सजावटी रूप में होता है और इसके साथ तीव्र और उत्साहपूर्ण संगीत धुनें बजती हैं | इस नृत्य में विभिन्न पशुओं का रूप दिखाया जाता है | यह नृत्य स्थानीय वन देवी के प्रति श्रद्धा स्वरूप भी प्रस्तुत किया जाता है| यह कला रूप ओडिशा राज्य में बहुत लोकप्रिय है |
रंगमंच संबंधी रोचक तथ्य - ओलंपिक में कला !
वर्ष 1912 से 1948 तक कलाकारों ने भी ओलंपिक में भाग लिया था | इसमें वास्तुकला, साहित्य, संगीत, चित्रकला और मूर्तिकला की प्रतियोगिताएँ सम्मिलित थीं | आधुनिक ओलंपिक के संस्थापक बैरन पियरे दे कुर्बतें का मानना था कि खेल से प्रेरित सभी कला रूपों को इसमें भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए। ये प्रतियोगिताएँ वैध पदक स्पर्धाएँ थीं और इनमें कुल 150 से अधिक पदक दिए गए | इस विषय में आप क्या सोचते हैं? क्या आपको लगता है कि हमें ओलंपिक में कला प्रतियोगिताएँ पुनः सम्मिलित करनी चाहिए?
| आकलन - अध्याय 8- आस-पास देखें | ||||
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दक्षताएँ C- 4.1 –-- नाटक और गति के तत्वों को प्रकृति में पहचानना और उनके कलात्मक गुणों का वर्णन करना | C- 4.2 - - स्थानीय कला रूपों और संस्कृति के प्रति जिज्ञासा प्रदर्शित करना | |
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| पाठ्यचर्या लक्ष्य | दक्षताएँ | सीखने के प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| 4 | C-4.1 | प्रकृति में देखे गए तत्वों का सूक्ष्मता से अनुकरण करते हैं | | ||
| C-4.1 | किसी अज्ञात स्थिति में कल्पना के माध्यम से अपनी भूमिका को जोड़ते हैं | | |||
| C-4.1 | विषयवस्त और तकनीक के आधार पर दसरों के अभिनय पर प्रतिक्रिया देते हैं | | |||
| C-4.2 | लोककला रूप के मूल विचार को पशुओं की अवधारणा के रूप में समझते हैं | | |||
| C - 4.2 | लोककथा में निहित कहानी से जुड़ते हैं और प्रश्न पूछते हैं | | |||
| C - 4.2 | पशुओं से जुड़े अन्य लोककला रूपों के उदाहरण साझा करते है या अपना स्वय का कला रूप तैयार करने का प्रयास करते हैं | | |||
| कक्षा में पूर्ण सहभागिता करते हैं | | ||||
विद्यार्थियों की क्षमताओं पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया...........................
विकास-क्षेत्रों पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया............................................
कोई अन्य अवलोकन..................................
रंगमंच योगात्मक आकलन
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आकलन हेतु गतिविधि (उदाहरण) |
आकलन के मानदंड |
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| व्यक्तिगत |
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| समूह |
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इस तरह, हमने एक और वर्ष नए खेल खेलने, नई सामर्थ्य का विकास करने एवं नई अवधारणाओं को सीखने में पूरा किया | वाह! यह वर्ष मेरी कल्पना से अधिक आनंददायक और मनोरंजक रहा | इसका कारण है- आप !
मुझे लगता है कि आपने हर गतिविधि को आनंददायक बनाया | मुझे कुछ शब्दों में बताइए कि आप इस वर्ष की रंगमंच गतिविधियों के विषय में क्या सोचते हैं-
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इन गतिविधियों को जारी रखें और छुट्टियों के दौरान इन खेलों को खेलना स्मरण में रखें| इससे आपको कक्षा 5 में अगले चरण पर जाने में सहायता मिलेगी | मूल बात यह है कि आप आनंदपूर्वक सीखें हम
अगले वर्ष फिर मिलेंगे, लघु नक्षत्र, नमस्ते !