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अध्याय 10
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संगीत बनाना
  • भारतीय शास्त्रीय संगीत एक बहुत प्राचीन परंपरा है, जिसका प्रारंभ वेदों से माना जाता है |
  • बाद में यह दो मुख्य शैलियों में विकसित हुआ – कर्नाटक या दक्षिण भारतीय संगीत और हिंदुस्तानी या उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत |
  • भारतीय शास्त्रीय संगीत को प्रायः मौखिक परंपरा द्वारा ही आगे बढ़ाया जाता है, जहाँ विद्यार्थी (शिष्य) अपने गुरु के साथ कई वर्ष व्यतीत करते हैं और एक बहुत विशेष संबंध विकसित करते हैं|
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राग क्या है?

भारतीय शास्त्रीय संगीत में राग एक मधुर शैली होती है जो स्वरों के एक समूह पर आधारित होती है | ऊपर जाने वाले स्वरों के क्रम को 'आरोहण' या 'आरोह' (आरोही सप्तक) कहा जाता है और नीचे आने वाले स्वरों के क्रम को 'अवरोहण' या 'अवरोह' (अवरोही सप्तक) कहा जाता है |

ताल क्या है?

ताल एक लय चक्र है जिसका उपयोग भारतीय शास्त्रीय संगीत में समय मापने के लिए किया जाता है| सामान्य तौर पर यह संगीत के पूरे भाग में लय का एक स्थिर रूप प्रदान करता है |

कर्नाटक और हिंदुस्तानी संगीत दोनों की अपनी राग और ताल प्रणालियाँ हैं। जब आप कोई भारतीय शास्त्रीय रचना सीखते हैं तो आपको राग और ताल का ज्ञान आवश्यक होता है| किसी भी रचना का गायन आरंभ करने से पहले राग के आरोहण या आरोह और अवरोहण या अवरोह को गाएँ और ताल की गिनती करते रहें|

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कर्नाटक संगीत

गीत - वंदे मीनाक्षी

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रचनाकार- मुत्तुस्वामि दीक्षितर

रचनाकार- मुत्तुस्वामि दीक्षितर (1775-1835) तमिलनाडु के तंजावुर क्षेत्र के एक संगीतकार थे और कर्नाटक संगीत के त्रिमूर्ति में से एक थे
वर्तमान में उनके द्वारा रची 500 कृतियाँ संस्कृत में पाई जाती हैं|
राग — शंकरा भरण
आरोहण — सा रे₂ ग₃ म₁ प ध₂ नि₃ सां
अवरोहण — सां नि₃ ध₂ प म₁ ग₃ रे₂ सा
ताल — एक

क्या आप जानते हैं?

लाकाप्रय बगाला कविता 'इदा बिदा शिदा' का धुन 'वंदे मीनाक्षी' से मिलती-जुलती है | इस कविता को ऑनलाइन ढूँढ़े और समानता को सुनें |

सा, ग, सा, ग, सा, ग, म, ग, रे, सा||
वं दे मी ना क्षी त्वां स र सि ज||

नि, रे, नि, रे, नि, रे, नि, रे, सा, नि||
वकु त्र पं दु गें नत सु रा||

सा, ग, सा, ग, सा, रे, ग, म, प,,,||
वंदे श तले गु रु गु ह प||

म, ग, रे, सा, ग, रे, सा, नि, सा,,,,||
लि नी जल रह च र णे||

सां, नि, ध, प, म, ग, म, प, ध, नि||
सुं द र प उड्य नं दे मा ये||

सां, नि, ध, प, म, प,,,,,||
सू रि ज ना धा रे||

सां, नि, ध, प, प, म, ग, म, म, प, ध,||
सुं द र रा जसहो द री गौ री||

म, ग, रे, सा, ग, रे, सा, नि, सा,,,,||
शु भ क री स त त म हम

ताल को जानें!

इस गाने में एक ताल में 4 मात्राओं का चक्र है|
गीत का लिंक -http://tinyurl.com/Vande-Meenakshi

गीत - श्री गण नाथ

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रचनाकार- पुरंदर दास

पुंददर दास (1470–1564) कर्नाटक के रचनाकार, संगीतकार और हरिदास दार्शनिक थे | उन्हें कर्नाटक संगीत का जनक माना जाता है |

राग— मल्हारी
आरोहण— सा रे₁ म₁ प धा सां
अवरोहण— सां ध प म₁ ग₃ रे₁ सा
ताल— रूपक

अपना ताल जानें!

कर्नाटक संगीत के रूपक ताल में छह मात्राओं का ताल चक्र होता है|

म प | ध सां सां रें || रें सां | ध प म प ||
श्री | गण नाथ || सिं धु | रा वर्ण ||

रे म | प ध म प || ध प | म ग रे स ||
क रु णा स गर || क रि | व द न ||

सा, | रे म ग रे || सा रे | ग रे सा, ||
लं | बो द र || ल कु | मि कर ||

रे म | प ध म प || ध प | म ग रे सा||
अं | बा सुत || अ म | र विनु त ||

सा, | रे म ग रे || सा रे | ग रे सा, ||
लं, | बो द र || ल कु | मि कर ||

म प | ध सां सां रें || रें सां | ध प म प ||
सिद्ध | चारण गण | गण | से वि त||

रे म | प ध म प || ध प | म ग रे सा||
सिद्ध | विनायक ते | नमो नमो ||

सा | रे म ग रे || सा रे | ग रे सा, ||
लं, | बो द र || ल कु | मि कर ||

म प | ध सां सां रें || रें सां | ध प म प ||
सक | ल वि द्या || आ दि | पू जित ||

रे म | प ध म प || ध प | म ग रे सा||
स | वां तम || ते | नमो नमो ||

सा, | रे म ग रे || सा रे | ग रे सा, ||
लं | बो द र || ल कु | मि कर ||

लय की भाषा

कोनाक्कोल क्या है?

आपको पिछले वर्ष की बात का स्मरण होगा कि हम लय को बोलने के लिए कुछ विशेष वर्णों का उपयोग कर सकते हैं| कर्नाटक संगीत में ताल वाद्य की इस भाषा को 'कोनाक्कोल' कहा जाता है। इसी तरह हिंदुस्तानी संगीत में ताल वाद्य की भाषा को 'बोल' कहा जाता है |

नीचे आपके लिए कोनाक्कोल के तीन वाक्यांश प्रस्तुत हैं-
1. ता की ता
2. ता का धी मी
3. ता का धी मी ता का झुनु
जब आप वाक्यांशों को दोहराते हैं (जैसे- ता, की, ता, ता, की, ता, ता, की, ता) तो आपके पास एक कोनाक्कोल पैटर्न होता है। कौन-सा कोनाक्कोल पैटर्न पूर्व पृष्ठ पर दिए गानों से मेल खाता है?

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क्या आप कक्षा में कुछ विद्यार्थियों के साथ कोनाक्कोल, अन्य विद्यार्थियों के साथ गीत और शेष के साथ ताल बजाते हुए प्रदर्शन कर सकते हैं? तंबूरा या ऐप का उपयोग करना न भूलें |

हिंदुस्तानी संगीत

बंदिश

हिंदुस्तानी संगीत में किसी विशेष राग और ताल पर आधारित रचना को 'बंदिश' कहा जाता है |

राग भूपाली

आइए, राग भूपाली में एक बदिश सीख, जिसके आरोह और अवरोह में पाँच स्वर होते हैं |
सबसे पहले राग भूपाली का सप्तक गाएँ |
आरोह - सारे ग प ध सां
अवरोह - सांध प ग रे सा

तीनताल
मात्रा -16
विभाग - 4

ताल चिह्न X 2 0 3
मात्रा 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16
बोल धा धिं धिं धा धा धिं धिं धा धा तिं तिं ता ता धिं धिं धा

यह बंदिश तीनताल में निबद्ध है, जो 16 मात्राओं की है। आइए, तीनताल सीखें |

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ताली - 1, 5, 13 मात्रा
खाली - 9वीं मात्रा

बंदिश - नमन कर चतुर -

तीनताल
रचना - पंडित विष्णु नारायण भातखंडे

मात्रा 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16
बोल धा धिं धिं धा धा धिं धिं धा धा तिं तिं ता ता धिं धिं धा
स्वर सां सां रे सां रे
शब्द रू
स्वर सा सा रे रे - सां सां सां
शब्द श्री रु नि
स्वर सां रे सा -
शब्द णा
- सां
जो जो ध्या सां
स्वर सां सां सां सां सां रे सां सां सां सां गं रे सां सां
शब्द शु पा दु
स्वर सां सां रे सा -
शब्द नि स्त जा


आकलन - अध्याय 10- संगीत बनाना
दक्षताएँ सीखने के प्रतिफल शिक्षक स्वयं
C-2.2 राग, ताल जैसे संगीत तत्वों को समझते हैं |
C-1.1 सरल कोनाक्कोल पैटर्न सीखते और सुनते हैं |
C-2.2 किसी राग के आरोहण और अवरोहण (आरोह और अवरोह) को गाने में सक्षम हैं |
C-1.1 गाना सुनते समय ताल/टैप की लय बनाए रखने में सक्षम हैं |
C-3.1 नए गाने और संगीत के नए रूप सीखने के लिए उत्सुक हैं |

विद्यार्थियों की क्षमताओं पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया ................
विकास-क्षेत्रों पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया.......................................
कोई अन्य अवलोकन................................................................