आपने संगीत की विभिन्न शैलियों, जैसे-हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, बाउल गान, हिप-हॉप, बॉलीवुड आदि में से कुछ के विषय में सुना होगा |
अलग-अलग तरह के संगीत की ध्वनि अलग-अलग होती है |
उनकी शैली, पैटर्न, उत्पत्ति, वाद्ययंत्र और उद्देश्य की अलग-अलग विशेषताएँ होती हैं |
संगीत शैली एक श्रेणी है, जो साझा विशेषताओं, ध्वनियों या पैटर्न के आधार पर संगीत को समूहीकृत करती है |
क्या आप संगीत की कुछ शैलियों के नाम बता सकते हैं, जिन्हें आपने सुना हो? इसमें क्या विशेष बात है?
हम संगीत को आमतौर पर चार श्रेणियों में वर्गीकृत करते हैं-
1. लोक संगीत
2. शास्त्रीय संगीत - हिंदुस्तानी और कर्नाटक
3. अन्य पारंपरिक शैलियाँ - भक्ति संगीत, रबिंद्र संगीत, उपशास्त्रीय आदि
4. लोकप्रिय या रचनात्मक संगीत- फिल्मी गाने, पॉप गाने आदि
शैली की पहचान करें
निम्नलिखित संगीतों को ऑनलाइन सुनें और पहचानें कि वे
किस शैली से संबंधित हैं-
1. हरिप्रसाद चौरसिया द्वारा राग भूपाली
2. ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे
3. कनिका बंद्योपाध्याय द्वारा रबिंद्र संगीत
4. मांगणियार संगीतज्ञों द्वारा केसरिया बालम
संगीत क्यों?
क्या आपने कभी हमारे जीवन में संगीत की भूमिका के विषय में सोचा है?
हरिप्रसाद चौरसिया द्वारा राग भूपाली
ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे
संगीत कहानियाँ सुनाता है, भावों को अनुभव कराता है और परंपराओं का उत्सव मनाता है | हमारे यहाँ कई संस्कृतियों और भाषाओं में त्योहारों व विशेष दिवसों के लिए विशेष गीत होते हैं | कभी-कभी एक ही अवसर को अलग-अलग लोगों के समूहों द्वारा अलग-अलग तरीके से मनाया जा सकता है |
फसल उत्सव पूरे भारत में मनाया जाता है लेकिन इसके कई अलग-अलग नाम हैं | आपके क्षेत्र में इसे क्या कहा जाता है?
कनिका बंद्योपाध्याय द्वारा रबिंद्र संगीत
मांगणियार संगीतज्ञों द्वारा केसरिया बालम
नीचे पंजाब के फसल उत्सव बैसाखी के विषय में एक गीत दिया गया है-
देशभर के कुछ फसल उत्सवों के नाम बताइए-
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पंजाबी—बैसाखी गीत
पारंपरिक लोक गीत
आई बैसाखी, आई बैसाखी चल्लो पाईये भंगड़ा
मुक गई खेतां दी राखी, रल के पाईये भंगड़ा
बापू बेचनी कनक ते खीसां नोटां दे नाल भर्यां
मां ने सीता सूट सोहणा गोटे दे नाल जड़ेयां
आओआ सहेलियों, आओआ हाणियों सारे पाईये भंगड़ा
सारे पाईये भंगड़ा!
आई बैसाखी
सारे मारो ताल्लियां ते फिर में बोली पावां
बोली पा के गोरी नु में गिद्धे विच नचावां
नच्चे गोरी मटक-मटक के असी विह पाईये भंगड़ा!
असी विह पाईये भंगड़ा!
आई बैसाखी
हां जी पाईये भंगड़ा
चल्लो पाईये भंगड़ा!
देश के किसा दूसर भाग से काइ एसा गात ढूढ़, जा फसल के मौसम का उत्सव मनाता हो।| उसे सुनें, उसके बोल लिखें और उसे गाना सीखें | क्या यह गाने एक जैसे लगते हैं या
संगीत शैलियाँ
आइए, दो प्रकार के गीत सीखें – एक लोरी और दूसरा देशभक्ति गीत |
लोरी - ऐन्नाम्मा थोज्ही
भाषा - तमिल
पारंपरिक लोक गीत
ऐन्नम्मा थोज्ही बोय्या कानुम
नान ऐन्ना सेय्या पोरेन
ऐन्नम्मा थोज्ही बोय्या कानुम
नान ऐन्ना सेय्या पोरेन
थालाई वारी पिन्नी
पोकल वयथु पुधु चत्तते पोट्टु विट्टु
ल्यप्सरी मासम कावेरी स्नानं
बोमाय वानगी बंधें
गीत का लिंक— https://tinyurl.com/Ennamma-Thozhi
देशभक्ति गीत
गीत हमारे देश के प्रति प्रेम को व्यक्त करने एवं लोगों को एकजुट करने का एक उत्तम तरीका है | हमारे यहाँ कई अद्भुत देशभक्ति गीत हैं जिन्हें आप एक समूह में गा सकते हैं |
नीचे कुछ लोकप्रिय देशभक्ति गीत दिए गए हैं | यह गीत ऑनलाइन ढूँढ़ें और उन्हें एक समूह में गाना सीखें |
1. नन्हा मुन्ना राही हूँ
संगीतकार - नौशाद
गीतकार - शकील बदायुनी
नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ,
बोलो मेरे संग जय हिंद, जय हिंद जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद
2. आओ बच्चो, तुम्हें दिखाएँ
संगीतकार – हेमंत कुमार
गीतकार - कवि प्रदीप
आओ बच्चो, तुम्हें दिखाएँ, झाँकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो, यह धरती है बलिदान की
वंदे मातरम्, वंदे मातरम् !
वंदे मातरम्, वंदे मातरम् !
अपनी भाषा में एक देशभक्ति गीत ढूंढ़िए। इसे सीखें और अपनी कक्षा के साथ साझा करें।
एकता का गीत
संगीत एक अद्भुत शक्ति का स्रोत है, जिसने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है | भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय गीतों ने जनसाधारण को सामान्य रूप से संघर्ष करते हुए उन्हें एक साथ लाने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य किया |
श्री बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय|
श्री बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय
'वंदे मातरम्' श्री बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया था, जिन्होंने इस कविता में भारत माता की महिमा का वर्णन किया है | 'वंदे मातरम्' आमतौर पर राग-देश में गाया जाता है, इसके कई अन्य संस्करण रह चुके हैं और यह इतिहास में सबसे व्यापक रूप से रिकॉर्ड किए गए गीतों में से एक है ||
'वंदे मातरम्' सबसे प्रसिद्ध गीतों में से एक है, जो स्वतंत्रता सेनानियों और देश के लोगों के बीच देशभक्ति की भावना को जागृत करता है| आज भी यह एक ऐसा गीत है जो हमें एकजुट करता है और हमारा उत्थान करता है| 'जन-गण-मन' राष्ट्रीय गान है, 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रीय गीत के रूप में जाना जाता है| इस गीत को एक समूह में गाना सीखें|
वंदे मातरम्
लिखित - श्री बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्
सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम्,
शस्यश्यामलाम् मातरम्
वंदे मातरम्
शुभ्र ज्योत्स्ना पुलकित यामिनिम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनिम्,
सुहासिनिम् सुमधुर भाषिणिम्,
सुखदाम् वरदाम् मातरम्
वंदे मातरम्
| आकलन - अध्याय 11 -गीत और कहानियाँ | ||||
|---|---|---|---|---|
| दक्षताएँ | सीखने के प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं | |
| C-3.2 | संगीत शैलियों की अवधारणा को समझते हैं | | |||
| C-4.2 | विभिन्न प्रकार के गीतों के बीच अंतर स्पष्ट करने में सक्षम हैं | | |||
| इतिहास और परंपरा में संगीत की भूमिका को समझते हैं | | ||||
| C-4.2 | विभिन्न प्रकार के लोकसंगीतों को ढूँढ़ने के लिए उत्सुक हैं | | |||
विद्यार्थियों की क्षमताओं पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया...................
विकास-क्षेत्रों पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया.................................
कोई अन्य अवलोकन....................