शिक्षक के लिए दिशा-निर्देश
1. कृपया बच्चों के लिए एक बड़ा और हवादार क्षेत्र उपलब्ध कराएँ |
2. अधिगम निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित है—
- क्षेत्रीय प्रथाओं के अनुसार नृत्य के पाठों को सीखना |
- देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित नृत्यों के बारे में जानना |
- भावनाओं को व्यक्त करना सीखना और भावों को व्यक्त करने में सहज होना |
- गतिविधियों और भावों को व्यक्त करने के लिए शरीर के विभिन्न अंगों के उपयोग को समझना |
- अंग संचालन के अभ्यास में सहभागिता के महत्व को समझना |
- नृत्य के विभिन्न तत्वों को रचनात्मकता से समझना |
3. कृपया अपने आकलन के लिए नीचे दिए गए पाठ्यचर्या लक्ष्यों, दक्षताओं और सीखने के प्रतिफलों पर ध्यान दें |
4. बच्चों द्वारा किए गए प्रयास, नई अवधारणाओं को सीखने के प्रति उनके दृष्टिकोण, भावों और अभिव्यक्तियों के साथ सहानुभूति दिखाने, साझा करने और सहयोग करने की इच्छा पर ध्यान दें |
पाठ्यचर्या के लक्ष्य और दक्षताओं
पाठ्यचर्या के लक्ष्य और दक्षताएँ नीचे सूचीबद्ध हैं, जिन्हें पाठ्यपुस्तक के माध्यम से पूरा किया गया है | प्रत्येक अध्याय के लिए आकलन एवं सीखने के प्रतिफल, दिशानिर्देशों के साथ तालिकाओं में सूचीबद्ध हैं |
CG-1— कला के माध्यम से मानवीय अनुभव का अन्वेषण, चित्रण और उसका आनंद लेने का आत्मविश्वास विकसित कराना है |
- C-1.1— नृत्य और अंग संचालन की विभिन्न संरचना को बनाने और प्रदर्शन के लिए उत्साहित करना, जिनसे वे परिचित हैं |
- C-1.2— नृत्य और अंग संचालन में परस्पर काम करते हुए विचारों और प्रतिक्रियाओं को साझा करना है |
- CG-2— कला में अपनी कल्पना और रचनात्मकता का स्वतंत्र रूप से उपयोग करना है |
- C-2.1— दैनिक क्रियाकलापों और व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर नृत्य और अंग संचालनों के अनुक्रम को बताना और उनका अभ्यास कराना है |
- C-2.2— कक्षा में सिखाई गई विभिन्न नृत्य शैलियों में ताल, लय, मुद्राओं, विषयों और अभिव्यक्तियों की तुलना और व्यतिरेक से परिचित कराना है |
- CG-3— नृत्य कला में मूलभूत प्रक्रियाओं, सामग्रियों और तकनीकों का पता लगाना है |
- C-3.1— नृत्य में प्रयुक्त अंग संचालनों, ताल, लय, उपकरणों, वेशभूषा और व्यवस्थाओं के साथ काम करते समय उनकी पसंद का चुनाव करना है |
- C-3.2— परस्पर अभ्यास के दौरान विभिन्न प्रकार के नृत्य और अंग संचालनों के अनुक्रमों का चयन कर प्रक्रिया में भाग दिलवाना है |
- CG-4— अपने आस-पास की सुंदरता का पता लगाना और विभिन्न स्थानीय कला रूपों तथा सांस्कृतिक प्रथाओं में रुचि विकसित करना है |
- C-4.1— प्रकृति में नृत्य और गति के तत्वों को पहचानना और उनके कलात्मक गुणों का वर्णन करना |
- C-4.2— स्थानीय कला रूपों और संस्कृति के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न कराना |
अध्याय 14
मेरा शरीर और नृत्य
नृत्य के संसार में आपका एक बार पुनः स्वागत !
प
S
आशा करता हूँ कि पिछली कक्षा में आपने अपने मित्रों और शिक्षकों के साथ नृत्य का भरपूर आनंद उठाया होगा| साथ ही नृत्य के संग अंग संचालनों, हस्त मुद्राओं, लोक तथा पारंपरिक शैलियों के बारे में भी सीखा होगा|
इस वर्ष आप सभी कला रूपों से जुड़ी पंचतंत्र की एक कहानी से आरंभ करेंगे | आप भी इसके साथ नृत्य करेंगे| आप पशुओं की भाँति चहलकदमी कर और चिड़ियों की भाँति उड़ने लगेंगे | लेकिन आइए, पहले नृत्य आरंभ करें |
गतिविधि 14.1
आइए किसी त्योहार के गीत पर नृत्य करें
हमारे देश में विभिन्न त्योहार मनाने की परंपरा रही है | आपका मनपसंद त्योहार कौन-सा है? आप इसे कैसे मनाते हैं? क्या आप इस समय गायन और नृत्य करते हैं?
क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि एक ऐसा त्योहार है, जो संपूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाता है | सबसे रोचक बात यह है कि कई राज्यों में नृत्य को नवरात्रि समारोह का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है | देश के विभिन्न भागों में देखे जाने वाले विविध नृत्यों की झलकियाँ यहाँ उदाहरण सहित दी गई हैं| क्या आपके पास किसी त्योहार के लिए कोई विशेष नृत्य है?
अपने मनपसंद त्योहार के गीत की लय पर नृत्य करें|
कोलाता - कर्नाटक
गरबा - नवरात्रि, गुजरात
धुनुचा-दुगा पूजा, पश्चिम बंगाल
शिक्षक-संकेत
अपने क्षेत्र के किसी लोकप्रिय त्योहार गीत को चुनें तथा विद्यार्थियों से नृत्य और उनकी रचनात्मक गतियों को अनुभव करने के लिए कहें |
गतिविधि 14.2
दैनिक जीवन का संचालन
अब दैनिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करें |
इन्हें स्वयं करके देखें|
उदाहरण के लिए -
श्रीनिवास की माँ अपने कार्यालय जाने के लिए कैसे तैयार होती हैं? वे अपने कानों में झुमके पहनती हैं और भोजन का डिब्बा भी तैयार करती हैं|
सोनाली के चाचा रात का भोजन कैसे बनाते हैं?
क्या आपने कभी देखा और समझा है कि जब आप इस प्रकार की गतिविधियों को करते हैं तो शरीर के विभिन्न अंग किस प्रकार से गतिमान हो जाते हैं? किसी भी परिस्थिति को चुनें या दिए गए उदाहरणों में से एक का चयन करें और उसमें हाथों के संचालन, हाथों की विभिन्न मुद्राओं और अन्य अंग संचालनों को समाहित कर उसका अभिनय करें | इन गतिविधियों को करते समय उपर्युक्त संचालनों से उत्पन्न मात्राओं (बीट्स) को गिनने का प्रयास करें | अब आप पाएँगे कि आपका शरीर संगीत पर नृत्य कर रहा है |
लय एवं मात्राएँ
क्या आपको कक्षा 3 में सिखाई गई दो या चार मात्राओं की पैरों की थापें याद हैं?
बोल हैं— तक धिमी तक झुनू / ना धिन धिन ना / ता थई थई तत। आप क्रमशः ता ता ता ता / त दिन त दिन / धि मी धि मी इन बोलों का भी उपयोग कर सकते हैं |
लय की सही गणना सुनिश्चित करने के लिए बोल या गिनती (1 - 2 - 3 - 4) का उपयोग कीजिए |
क्या आप अब त कि ट / धा धि न तीन मात्राओं को ढूँढ़ सकते हैं?
आप बोलों का उच्चारण करते समय ताली, चुटकी और पैरों से ताल देते हुए घूमने का प्रयास कीजिए |
ताल, अंग संचालन तथा हस्त मुद्राओं के साथ विभिन्न परिस्थितियों के बारे में सोचें और ताल की मात्राओं के साथ आनंद लीजिए |
पौधा लगाते समय नृत्य करें
अब बाहर ऐसी और गतिविधियों की खोज कीजिए। उदाहरण के लिए, आप मिट्टी में पौधा कैसे लगाएँगे? नीचे दिए गए चित्रों का अनुसरण करें और अपनी गतिविधियों में ताल और लय को जोड़ें |
यह गतिविधि हमारा अद्भुत संसार पाठ्यपुस्तक के अध्याय 4 से संबंधित हो सकती है |
1. ता ता ता ता (4 मात्राएँ)— ऐसे नाचें जैसे कि आप मिट्टी की खुदाई कर रहे हों |
2. धिं धिं धिं धिं (4 मात्राएँ)— बीज या फूल का पौधा उगाने का अभिनय करें |
3. ता ता ता ता (4 मात्राएँ)— मिट्टी से ढकें |
4. धिं धिं धिं धिं (4 मात्राएँ)— पानी देने वाले डिब्बे से पानी डालें |
बाँसुरी • कक्षा 4
★ गतिविधि 14.3 — सिर, गर्दन एवं आँखों का संचालन
क्या आपको कक्षा 3 में सिखाए गए शरीर के छोटे-छोटे अंग संचालनों से संबंधित सीख याद है? अब इस गतिविधि में आप अंग संचालन को सिर और गले पर केंद्रित करेंगे।
स्वयं को सिर, गर्दन एवं आँखों से अभिव्यक्त करें
क्या आप केवल अपने सिर और गले से संवाद कर सकते हैं? क्या आप 'नहीं' कहने के लिए अपना सिर 'इधर-उधर' हिलाते हैं, 'हाँ' कहने के लिए अपना सिर 'ऊपर से नीचे' हिलाते हैं, नीले आकाश को आश्चर्य से देखते हैं, झील में तैरते प्लास्टिक को देखकर दुखी मन से 'नीचे' देखते हैं या सड़कों पर फेंके गए कूड़े को देखकर क्रोध और घृणा से अपना सिर 'हिलाते-डुलाते' हैं? क्या मनुष्य की भाँति पशु भी अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए सिर और गले का उपयोग करते हैं? सिर और गर्दन की और नई गतिविधियों की कल्पना करें तथा शरीर का रचनात्मक तरीके से उपयोग करना सीखें।
आइए, अपने सिर और गर्दन को खींच कर देखें कि सिर और गर्दन को किस-किस प्रकार से हिलाया जा सकता है।
आप तारों को आश्चर्य से कैसे देखते हैं?
क्या आप निराश होने पर अपना सिर नीचे की ओर झुका लेते हैं?
क्या आप इंद्रधनुष के पथ पर चल सकते हैं, जो आपको आनंदित कर देता है?
क्या आप कभी इस तरह आइसक्रीम के लिए मना करते हैं?
एक चिड़िया अपनी गर्दन को कैसे घुमाती है?
शेर की तरह अपनी गर्दन को सिकोड़ें |
I
अपना सिर गाय की तरह हिलाइए |
आइए, अब हम अपनी गतिविधियों और भावनाओं का मिलान उन सभी प्राप्त अनुभवों से करने का प्रयत्न करें, जो आपने पूर्व की कक्षाओं में सीखा है।
कार्यपत्रिका— निम्नलिखित सिर और गर्दन की गतिविधियों का उपयुक्त भावों से मिलान कीजिए।
सिर और गर्दन की गतिविधियाँ — भाव
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1. एक शेर अपना प्रतिबिंब देख रहा है।

क. आश्चर्य

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2. साफ आसमान में तारों को देखते हुए।

ख. वीरता

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3. जानवर शेर के सामने नहीं जाना चाहते।

ग. गुस्सा

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4. झील में प्लास्टिक की बोतलों को देखते हुए।

घ. डर

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5. खरगोश शेर के पास जा रहा है।

ङ. प्रसन्नता

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6. शेर के कुएँ में छलाँग लगाने के बाद जानवर प्रसन्न होते हैं।

च. उदासी

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★ गतिविधि 14.4 — पशुओं के अंग संचालन
आपने अनुभव किया होगा कि विभिन्न पशुओं के अंग संचालन के अलग-अलग प्रकार होते हैं (जैसे— टहलना, चढ़ना, सोना, चेहरे के हाव-भाव आदि) | इसी प्रकार, पंचतंत्र की कहानियों में वर्णित पशुओं के चरित्रों की गतियाँ भी अनोखी हैं | हमारे देश में पशुओं की गतिविधियों एवं अंग संचालन पर आधारित बहुत से नृत्य हैं, जिन्हें ‘पशु नृत्य’ कहते हैं | उदाहरण के लिए, ‘बाघ नृत्य’ और ‘मयूर नृत्य’ |

पुरुलिया छऊ — सिंह नृत्य

पुलिक्कली — बाघ नृत्य

मईलट्टम — मयूर नृत्य
Reprint 2026-27
पशुओं को दर्शाने हेतु हस्त मुद्राएँ
पशुओं के अंग संचालन के विषय में बात आरंभ करने से पहले, क्या आप जानते हैं कि हाथों की अनेक मुद्राएँ होती हैं, जो विभिन्न पशुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं? नीचे हस्त संचालन के कुछ उदाहरण दिए गए हैं—

मत्स्य (मछली)

कुर्म (कछुआ)

वराह (सूअर)

गरुड़ (गरुड़)

नागबंधक (साँप)

बेरुंदा (बाज का सिर)

मयूर (मोर)

हंसस्य (तितली)

ताम्रचूड़ (पक्षियों का सिर)

कपित्त (पक्षी)

सर्पशीर्ष (साँप का सिर)

सिंहमुख (हिरण, गाय)

भ्रमरी (मधुमक्खी)

व्याघ्र (बाघ)
विभिन्न पशुओं को दर्शाने के लिए अलग-अलग काल्पनिक रचनात्मक हस्त मुद्राओं को बनाने का प्रयास कीजिए | पशुओं से जुड़ी हस्त मुद्राओं के उदाहरण नीचे दिए गए हैं—
मयूर नृत्य
मयूर हस्त


बाघ नृत्य
व्याघ्र हस्त


हिरण की गतियाँ
सिंहमुख हस्त


अब आपकी बारी है, आप अपने मनपसंद पशुओं की तरह गति कीजिए |
पंचतंत्र की कहानी से शेर और खरगोश जैसे जानवरों की गतियों और हाव-भावों का अभिनय कीजिए | अलग-अलग जानवर कैसे व्यवहार करते हैं, उसका अनुभव करें | चार मात्राओं की लय के साथ-साथ हाथ और गर्दन की विभिन्न गतियों का उपयोग कर उसका अनुकरण करें| आप स्वयं जानवरों की कहानी पर आधारित एक नृत्य की तैयारी करें | प्रत्येक जानवर के लिए विशेष हस्त मुद्राओं का उपयोग कीजिए \
शिक्षक-संकेत
शिक्षक-संकेत: बच्चों को जानवरों की अलग-अलग गतिविधियों व अंग संचालन के बारे में सुझाव दें| अगर संभव हो तो चार मात्राओं की ताल या संगीत उपलब्ध कराएँ |
| आकलन— अध्याय 14— मेरा शरीर और नृत्य |
| दक्षताएँ— CG 1 – C-1.1; CG 2 – C-2.1, C-2.2 |
| सीखने के प्रतिफल |
शिक्षक |
स्वयं |
| लय का उपयोग करते हुए पूरी उत्सुकता के साथ नृत्य करते हैं| |
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| कल्पनाशील विधि से अभिनय में हस्त मुद्राओं का उपयोग करते हैं| |
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| गर्दन और सिर के उपयोगों को समझते हैं| |
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| क्या भावों को अभिव्यक्त करने में सहज हैं| |
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विद्यार्थियों की क्षमताओं पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया ............................................................
विकास-क्षेत्रों पर शिक्षकों की प्रतिक्रिया ............................................................................
कोई अन्य अवलोकन ........................................................................................................