इकाई 2
हमारे परिवेश में जीवन
इकाई के विषय में
प्रकृति विभिन्न प्रकार के पौधों, पशुओं, पक्षियों और कीटों का आवास है। ये सभी हमारे संसार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अवलोकन और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थी विभिन्न पौधों और जंतुओं की विशेषताओं का अन्वेषण करेंगे एवं उनकी पारस्परिक निर्भरता को समझेंगे तथा पर्यावरण के प्रति गहन समझ विकसित करेंगे। अवलोकन, अनुभव और देखभाल के माध्यम से विद्यार्थी 'वसुधैव कुटुम्बकम्' अर्थात "संपूर्ण विश्व एक परिवार है" की भावना को आत्मसात करेंगे।
यह इकाई प्रकृति एवं संस्कृति के मध्य संबंधों को प्रकट करती है, यह दिखाते हुए कि पारंपरिक रीतियाँ कैसे प्रकृति के विभिन्न पहलुओं से जुड़ी हैं। इसमें विद्यार्थी पशुओं एवं पौधों के अध्ययन से जनजातीय कला एवं औषधीय पौधों की खोज करने तक के अर्थपूर्ण अनुभवों को प्राप्त करेंगे, जो जीवन में संरक्षण एवं स्थायित्व को प्रोत्साहन देते हैं। उत्सवों तथा खेलों जैसी संवादात्मक गतिविधियाँ विद्यार्थियों को प्रकृति में समरसता को पहचानने और उसे संरक्षित करने में उनकी भूमिका समझने में सहायता करेंगी।
शिक्षकों के लिए
प्रकृति पर आधारित इस इकाई अध्याय प्रकृति की पाठशाला और अध्याय 4 - प्रकृति की गोद में मिलित है। इन अध्यायों में प्रस्तुत प्रमुख अवधारणाएँ निम्नलिखित है-
अध्याय 3
'प्रकृति की पाठशाला' अध्याय विद्यार्थियों को अपने आस-पास के विभिन्न पौधों और पशुओं का अन्वेषण करने और उनकी अनूठी विशेषताओं का अध्ययन करने के लिए मार्गदर्शित करता है। यह पाठ दर्शाता है कि सभी पौधे और जंतु गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इस अध्याय में विद्यार्थी पशु-पक्षियों तथा पत्तियों का अवलोकन करेंगे और 'जीवन-तंतु' खेल खेलेंगे ताकि प्रकृति और समाज की पारस्परिक निर्भरता को समझ सके।
अध्याय 4
'प्रकृति की गोद में' अध्याय यह दर्शाता है कि प्रकृति एवं संस्कृति हमारे भोजन से लेकर परंपराओं तक हमारे दैनिक जीवन में कैसे गहराई से जुड़ी हुई हैं। विद्यार्थी वृक्षों, पुष्पों, जनजातीय कला एवं औषधीय पौधों की कुछ अनूठी विशेषताओं की खोज करेंगे; साथ ही संधारणीय जीवन के तरीकों और साधनों के बारे में जानेंगे। विद्यार्थी कुछ रोचक गतिविधियों और सुरक्षा पाठों के माध्यम से विभिन्न पौधों के औषधीय गुणों के विषय में भी जानेंगे, जिससे उनमें पर्यावरण के प्रति गहन समझ और पर्यावरण के संरक्षण का भाव विकसित होगा।
सुगमकर्ता के रूप में शिक्षक-
विद्यार्थियों के साथ प्रकृति से विभिन्न नमूने, जैसे- पत्तियाँ, बीज, फूल आदि एकत्र करेंगे और उनका विभिन्न गतिविधियों में उपयोग करेंगे।
प्रकृति भ्रमण, भूमिका-निर्वहन (रोल-प्ले) और 'जीवन-तंतु' जैसे खेलों की व्यवस्था के साथ अवलोकन पत्रक तैयार करेंगे तथा इन पशु-पक्षियों के पदचिह्नों तथा उनकी गतिविधियों और पौधों के विवरणों का अभिलेखन करने में विद्यार्थियों की सहायता करेंगे।
प्राकृतिक रंग बनाने, पारंपरिक घरों के प्रतिरूप (मॉडल) तैयार करने और खाद्य संग्रहण गतिविधियों व प्रकृति प्रेरित शिल्पों हेतु विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देंगे।
प्राकृतिक उद्यानों, खेतों या पौधशालाओं के भ्रमण का आयोजन करेंगे तथा विद्यार्थियों से संवाद के लिए समुदाय विशेषज्ञों या किसानों को आमंत्रित करेंगे ताकि विद्यार्थी संरक्षण और पारंपरिक अभ्यासों के बारे में सीख सकें।
पाठ - 3
प्रकृति की पाठशाला
क्या आपने कभी वट-वृक्ष को देखा है, जिसकी लटकती हुई जड़ें भूमि को स्पर्श कर रही हों?
एक रंग-बिरंगा पक्षी, जो पानी में गोता लगा रहा हो?
एक मकड़ी, जो अपना जाला बुन रही हो?
फूलों के चारों ओर तितलियाँ उड़ रही हों?
प्रकृति अद्भुत जंतुओं और पौधों से भरी हुई है। आइए, इनके विषय में और अधिक जानें!
रोमांचक यात्रा का आरंभ
विद्यार्थी, अपने शिक्षक के साथ मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में प्रकृति भ्रमण के लिए तैयार हैं।
शिक्षण संकेत
विद्यार्थियों को भारत के मानचित्र पर मध्य प्रदेश को ढूंढने के लिए प्रोत्साहित कीजिए।
जैसे ही विद्यार्थी संरक्षित वन मंडल के प्रवेश द्वार पर पहुँचे, वे ऊँचे-ऊँचे पेड़ों और चहचहाते पक्षियों को देखकर उत्साहित हो गए।
आभा: पचमढ़ी में आपका स्वागत है!
शिक्षक : ये आभा दीदी हैं। ये एक प्रकृति वैज्ञानिक हैं और पेड़-पौधों तथा जीव-जंतुओं का अध्ययन करती हैं। ये जंगल के विषय में जानकारी हेतु हमारा मार्गदर्शन करेंगी।
विद्यार्थी :आभा दीदी ! क्या रास्ते में हमें बंदर, हिरण, साँप, बाज और बाघ आदि जीव-जंतु दिखाई देंगे?
आभा : यही तो हमें पता लगाना है! हमें यह भी सुनिश्चित करना है कि हम जंगल के पेड़-पौधों और जंतुओं को हानि न पहुँचाएँ।
लिखिए
1. क्या आप उन नियमों के बारे में सोच सकते हैं, जिनका चिड़ियाघर अथवा जंगल में हमें पालन करना चाहिए?
उदाहरण के लिए -
(क) हमें पक्षियों को कुछ भी नहीं खिलाना चाहिए।
(ख)...............................................
(ग)................................................
(घ)................................................
अब नीचे दिए गए सुरक्षा नियमों को देखिए और अपनी सूची से मिलाइए। क्या आपने इनमें से कोई नियम छोड़ दिए हैं?
सुरक्षा नियम
क्या करें और क्या न करें?
1. कृपया नए स्थान पर सावधान रहें।
2. कृपया पशुओं को परेशान न करें।
3. कृपया पशुओं को खाना न खिलाएँ।
4. कृपया वृक्षों और फूलों को क्षति न पहुँचाएँ।
5. कृपया अपने साथ पालतू पशु, बंदूक या अन्य किसी भी प्रकार के शस्त्र न लाएँ।
6. कृपया पॉलीथीन की थैलियाँ न लाएँ।
7. कृपया सार्वजनिक संपत्ति को हानि न पहुंचाएँ।
8. कृपया जंगल में कचरा न फेंके।
चर्चा कीजिए
इन नियमों का पालन करना क्यों आवश्यक है?
विद्यार्थी जीप में सवार हो गए। जैसे ही उन्होंने जंगल में प्रवेश किया, उन्हें पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की विविध प्रजातियाँ दिखाई देने लगी।
गतिविधि (1)
जंगल में जंतु
इस चित्र को ध्यान से देखिए और जंतुओं को पहचानिए। आप अपने शिक्षक की सहायता भी ले सकते हैं।
इन्हें दो श्रेणियों में विभाजित कीजिए -
1. भूमि पर रहने वाले पशु
...................
2. आकाश में उड़ने वाले पक्षी
...................
लिखिए
कुछ पशु-पक्षियों के नाम लिखिए। इनमें से प्रत्येक की एक विशेषता लिखिए।
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जंतु का नाम |
विशेषता |
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हाथी |
खाना और पानी ग्रहण करने के लिए लंबी सूँड़ |
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गौरैया |
बीजों को तोड़ने के लिए छोटी और कठोर चोंच |
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भारतीय विशाल (मालाबार) गिलहरी, लाल रंग की एक बड़ी गिलहरी है, जो पचमढ़ी और कुछ अन्य स्थानों पर पाई जाती है।
लिखिए
भारतीय विशाल (मालाबार) गिलहरी की विशेषताओं की तुलना अपने क्षेत्र में दिखाई देने वाली गिलहरी से कीजिए।
...............................
...............................
क्या आप जानते हैं?
चश्मेदार बंदर (स्पेक्टेकल्ड मंकी) त्रिपुरा का राज्य पशु है। इसकी आँखों के चारों ओर के सफेद घेरों से ऐसा प्रतीत होता है, जैसे वह बंदर चश्मा पहने हुए है।
जीपों का अगला पड़ाव एक तालाब के पास था, जहाँ विद्यार्थी और अधिक जीव-जंतुओं को देखकर उत्साहित हो रहे थे।
वहाँ गौर को देखो, वे भैंसों जैसे दिखते हैं, परंतु उनके सींग छोटे तथा शरीर अधिक हष्ट-पुष्ट होता है।
आर्या : मैं सोचती हूँ कि और कौन-कौन से अन्य जंतु यहाँ पानी पीने आते होंगे। कीचड़ में ये पदचिह्न देखिए। ये किस जंतु के पदचिह्न हो सकते हैं?
सार्थक :संभवतः किसी हिरण या बाघ के? या फिर खरगोश के हो सकते हैं। मुझे वहाँ एक खरगोश घास खाते हुए दिखाई दे रहा है!
शिक्षण संकेत
विद्यार्थियों से ऐसे जंतुओं के बीच के अंतर स्पष्ट करने पर चर्चा कीजिए जो एक जैसे दिखते हैं जैसे- कबूतर और फाख्ता, मगरमच्छ और घड़ियाल आदि।
गतिविधि 2
1. पदचिह्नों को देखिए और अनुमान लगाइए कि कौन-कौन से जंतु तालाब पर पानी पीने आए होंगे -
..................
2. किसी जंतु के पदचिह्नों को देखिए और नीचे दिए गए स्थान में उसका चित्र बनाइए-
सार्थक एक पक्षी के विषय में जानना चाहता था। उसकी पूँछ लंबी थी और चोंच बड़ी एवं मुड़ी हुई थी। वह पास के पेड़ पर बैठा हुआ था।
आभा : वह धनेश पक्षी (हॉर्नबिल) है। इसके माथे से सींग (हॉर्न) जैसी एक संरचना निकलती है, इसलिए इसे धनेश (हॉर्नबिल) कहते हैं। कुछ पक्षी जैसे मोर रंग-बिरंगे होते हैं, जबकि कुछ अन्य पक्षियों में दूसरी अलग-अलग विशेषताएँ होती हैं, जैसे उल्लू की दृष्टि तेज होती है जो उन्हें रात के समय देखने में सहायता करती है।
लिखिए
नीचे दिखाए गए पक्षियों के नाम लिखिए -
गतिविधि 3
अलग-अलग खाद्य पदार्थ, जैसे अनाज, सरस फल (बेरी), फल, गिरियाँ आदि लीजिए। इन खाद्य पदार्थों को चम्मच, टूथपिक या एक जोड़ी चॉपस्टिक की सहायता से उठाने का प्रयास कीजिए। नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक खाद्य पदार्थ को उठाकर खाने के लिए उपयुक्त साधन का नाम लिखिए -
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खाद्य पदार्थ |
उपयुक्त साधन |
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अनाज |
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सरस फल |
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गिरियाँ |
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फलों के टुकड़े |
यह जानना रोचक है कि पक्षियों की चोंच और पंजे होते हैं, जो उन्हें खाने और अन्य गतिविधियों में सहायता करते हैं। एक बाज की नुकीली, मुड़ी हुई चोंच और नुकीले पंजे होते हैं, जिससे वह अपने शिकार को पकड़ता है, जबकि शकरखोरा (सनबर्ड) की चोंच लंबी होती है, जिससे वे फूलों से मकरंद पीते है। हम किसी पक्षी की चोंच और पंजों को देखकर उसके भोजन की प्रवृत्तियों का अनुमान लगा सकते हैं।
शिक्षण संकेत
आप स्थानीय रूप से उपलब्ध खाद्य पदार्थों और साधनों का उपयोग कर पक्षियों की विभिन्न प्रकार की चोंचों के आकार से उनकी पहचान कर सकते हैं, जैसे गौरैया की चोच चिमटे या खड़सी जैसी दिखती है।
विभिन्न पक्षियों की चोंच, पंजे और खाने की प्रवृत्तियाँ भिन्न-भिन्न होती हैं।
गतिविधि 4
1. पक्षी दैनंदिनी (डायरी)
(क) किसी पेड़ के समीप जाइए।
(ख) अपनी आँखें बंद कीजिए और भिन्न-भिन्न पक्षियों का स्वर सुनिए।
(ग) अब अपनी आँखें खोलिए और एक बार में एक पक्षी पर ध्यान केंद्रित कीजिए।
(घ) अवलोकन कीजिए कि वह कैसे चलता है, क्या खाता है और कहाँ पर बैठता है।
(ङ) अपने अवलोकनों को पक्षी दैनंदिनी (डायरी) में लिखिए!
प्रत्येक पक्षी के लिए निम्नलिखित बातों को लिखिए -
नाम :................................... दिनांक :.....................................
पक्षी दैनंदिनी
रूप-रंग
सिर का रंग :
पीठ का रंग :
पंखों के रंग :
चोंच का आकार :
गले का रंग :
पैरों का रंग :
रोचक तथ्य
...............
...............
...............
...............
2. उन जंतुओं की सूची बनाइए, जो जलाशयों में और जलाशयों के आस-पास रहते हैं। नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए -
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जंतु का नाम |
गति का तरीका |
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मछली |
तैरती है। |
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केकड़ा |
चलता है। |
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मेंढक |
कूदता है। |
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कछुआ |
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मगरमच्छ |
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साँप |
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जो जंतु पानी में रहते हैं, उनके पास जीवित रहने के लिए विशिष्ट विशेषताएँ होती हैं। मछलियों में तैरने के लिए पंख होते हैं। घड़ियाल, मगरमच्छ परिवार का एक जीव है जो मगरमच्छ की तरह दिखता है, किंतु इसका मुँह लंबा, पतला और नुकीला होता है, जिससे वह मछली पकड़ता है। कछुओं का कवच सख्त होता है जो उन्हें सुरक्षा देता है और उनके पैर झिल्लीदार होते हैं, जिससे वे सरलता से तैर सकते हैं। मेंढक उभयचर होते हैं और वे भूमि तथा जल दोनों में रह सकते हैं।
छोटे जंतु
एक टिड्डा अचानक घास से उछलकर बाहर आया। सब बहुत प्रसन्न हुए।
आर्या :यह एक कीट है। इसके तीन जोड़ी पैर होते हैं और एक जोड़ी एंटीना होता है, जो इसे अपने आस-पास का बोध कराने में सहायता करता हैं। कीटों के दो जोड़ी पंख भी हो सकते हैं, जैसे- मक्खियों तथा टिड्डों आदि में होते हैं।
आभा :टिड्डे की भाँति आपको जंगल में अनेक कीट, जैसे- चींटियाँ, भंग, मधुमक्खियाँ, मक्खियाँ, विनयी कीट (मैंटिस), तितलियाँ आदि मिलेंगे।
लिखिए
1. वे कौन-कौन से कीट हैं जो आपके घर और आस-पास पाए जाते हैं?
...........................
...........................
2. नीचे दिखाए गए कीटों के नाम लिखिए।
जंगल में जंतुओं की अद्भुत विविधता होती है और प्रत्येक जंतु की अपनी अनूठी विशेषताएँ होती हैं।
गतिविधि (5)
1. प्रकृति भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न पौधों की पत्तियाँ एकत्रित कीं। नीचे दिखाई गई पत्तियों के आधार पर पेड़-पौधों की पहचान करने में उनकी सहायता कीजिए।
2. अपने आस-पास विभिन्न पौधों की पत्तियों का अवलोकन कीजिए और नीचे दी गई तालिका को भरिए।
रंग, बनावट और आकार के अतिरिक्त क्या आपने देखा है कि पत्तियों पर रेखाएँ भी अलग-अलग प्रकार की होती हैं? इन रेखाओं को शिरा कहा जाता है। नीचे दिए गए चित्रों में शिराओं की दो अलग-अलग प्रकार की व्यवस्था दिखाई गई है।
गतिविधि(6)
पत्तों से पेड़ की पहचान
एक पत्ती को उसकी खुरदरी शिराओं वाली सतह को ऊपर की ओर रखते हुए, अभ्यास पुस्तिका पर रखिए। इसे एक सादे कागज से ढँक दीजिए। कागज पर एक मोमरंग रगड़िए और देखिए कि कैसे पत्ती की आकृति जादू की तरह उभर कर आती है। अलग-अलग पत्तियों से यह प्रयोग कीजिए और देखिए कि प्रत्येक पत्ती का अपना अलग अनोखा पैटर्न होता है। उस पेड़ या पौधे का नाम बताइए, जिसकी वह पत्ती है।
आइए खेलें 'जीवन-तंतु'
क्या आपने कभी सोचा है कि सभी जीव एक-दूसरे से कैसे जुड़े हुए हैं? चलिए, एक खेल खेलकर इसे जानते हैं। आपको बस यह कल्पना करनी है कि आप प्रकृति का एक अंग हैं- संभवतः कोई पेड़, पक्षी या यहाँ तक कि सूर्य।
शिक्षण संकेत
विद्यार्थियों द्वारा निभाई जाने वाली भूमिकाओं को समझने और उस पर चर्चा करने में उनकी सहायता कीजिए। उन्हें यह पता लगाने में भी सहायता कीजिए कि वे कैसे प्रकृति में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और कैसे एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
कैसे खेलें?
1. प्रत्येक खिलाड़ी को एक कार्ड मिलता है जिसमें किसी पौधे, जंतु या प्राकृतिक तत्व का नाम है।
2. एक खिलाड़ी धागे का गोला पकड़कर खेल आरंभ करता है और सोचता है कि उसका संबंध उन अन्य खिलाड़ियों से कैसे है, जिनके पास एक जैसे कार्ड हैं। उदाहरण के लिए पेड़, पक्षी को भोजन देता है या नदी, मछली का आवास है तो धागा उस खिलाड़ी को आगे बढ़ा दिया जाता है, जबकि पहला खिलाड़ी अभी भी अपने धागे को पकड़े रहता है।
3. जैसे-जैसे और भी संबंध बनते जाते हैं, तंतु बढ़ता जाता है।
4. अब सोचिए कि अगर इस तंतु का एक भाग हट जाए तो क्या होगा? किसी खिलाड़ी को हटाकर देखें, जैसे कि बाघ के लिए हिरण को या जंतुओं के लिए पौधे को।
5. देखिए कैसे यह तंतु कमजोर हो जाता है या गिर जाता है। यह दिखाता है कि किस प्रकार प्रकृति में सब कुछ परस्पर रूप से जुड़ा हुआ है।
आइए विचार करें
1. आप कौन-सा जंतु बनना चाहेंगे? यह आपको कौन-सी विशेष क्षमताएँ प्रदान करेगा?
2. आपको क्या लगता है, अलग-अलग पौधे और जंतु एक-दूसरे पर कैसे निर्भर होते हैं?
3. एक प्रकृति वैज्ञानिक की क्या भूमिका होती है?
4. वर्ग पहेली
वन में छिपी संपदा को पहचानिए-
5. चुनौती
अपने परिवार अथवा मित्रों के साथ निकट के किसी उद्यान भ्रमण की योजना बनाइए। इस भ्रमण में उनका मार्गदर्शक (गाइड) बनने के लिए स्वयं को तैयार कीजिए। इसके लिए कुछ पौधों और जंतुओं की पहचान कीजिए तथा उनके गुणों और रोचक तथ्यों का अध्ययन कीजिए जिन्हें आप भ्रमण के दौरान समझा सकें।
6. गतिविधि
भूमिका निर्वहन - अपनी कक्षा में किसी जंगल का दृश्य बनाइए जहाँ विद्यार्थी पौधों, जंतुओं और आगंतुकों की भूमिकाएँ निभा सकें। नाटक करते समय जंतुओं और पौधों की रक्षा करने में अपनी भूमिका पर ध्यान केंद्रित कीजिए।
7. आइए, कागज का एक कछुआ बनाते हैं! इसके लिए पुराने समाचार पत्र या प्रयुक्त कागज का उपयोग करने का प्रयास कीजिए -
8. पता लगाइए
अपने राज्य के राजकीय पशु, पक्षी और पौधे का नाम लिखिए।
