पाठ - 4
प्रकृति की गोद में
जंगल से होकर यात्रा
रीना और अमित अपनी पारिवारिक यात्रा को लेकर बहुत उत्साहित थे। वे अपने गाँव जा रहे थे जो जंगल के निकट था। यह फसल कटाई का समय था। यह एक विशेष अवसर भी था। उस दिन उनका गाँव पूरी तरह से सौर ऊर्जा से प्रकाशित होने वाला गाँव बनने जा रहा था। वे पूरे गाँव को प्रकाश में जगमगाते देखने और इस उत्सव का आनंद लेने के लिए आतुर थे।
गाँव में आपका स्वागत है!
जब वे गाँव में पहुँचे तो बच्चों ने चमकीले नारंगी-लाल फूलों से भरे पेड़ देखे। रीना ने पूछा, "ये फूल कौन-से हैं?" उसके पिताजी मुस्कुराए और बोले, "यह पलाश का पेड़ है। जब इस पेड़ पर फूल खिलते हैं तो पूरा जंगल दूर से नारंगी-लाल दिखाई देता है, इसलिए पलाश को 'अग्निपुष्प या जंगल की ज्वाला' भी कहा जाता है।"
गतिविधि (1)
अपने क्षेत्र में पाए जाने वाले पाँच रंग-बिरंगे फूलों के नाम लिखिए, उदाहरण के लिए पलाश को गुजरात में 'केसुदा' कहा जाता है।
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फूल का नाम |
स्थानीय नाम |
अपनी पसंद के फूल का चित्र बनाइए और उसमें रंग भरिए |
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शिक्षण संकेत
शिक्षक, विद्यार्थियों के साथ यह चर्चा करें कि सौर विद्युत उत्पन्न करने के लिए सौर पैनलों का उपयोग किस प्रकार किया जाता है, जिससे पंखा, बल्ब आदि उपकरण चलाए जा सकते है।
उत्सव के लिए गाँव को सजाया गया था।
अमित: वाह! ये घर शहर के घरों से कितने अलग दिखते हैं। दीवार पर की गई सजावट तो बहुत ही सुंदर है!
माँ: अमित ! ये घर मिट्टी, घास, गोबर और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से बनाए गए हैं। देखो, यह चित्र तुम्हारी दादी ने बनाया है। उन्होंने चावल के आटे और पानी को मिलाकर रंग बनाया है।
शिक्षण संकेत
शिक्षक, प्राकृतिक सामग्री से बने परों के लाभों पर चर्चा कर सकते हैं।
गतिविधि 2
प्राकृतिक वस्तुओं, जैसे- मिट्टी, लकड़ी, सूखी घास, दूब, पत्ती आदि का उपयोग करके एक घर का प्रतिरूप (मॉडल) बनाइए। इसे अपनी रुचि की किसी कला शैली से सजाइए।
रीना और अमित घर के अंदर खेलने लगे। उन्होंने देखा कि उनकी दादी एक कपड़े पर चित्र बना रही थीं। अमित ने रंगों के विषय में पूछा। दादी ने बच्चों को बताया कि ये रंग फूलों, पत्तियों और रंगीन पत्थरों के पाउडर से बनाए गए हैं।
क्या आप जानते हैं?
'गोंड कला' दीवारों पर प्राकृतिक रंगों से की जाने वाली एक चित्रकला है। कलाकार इसमें पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्यों के चित्र बनाते हैं।
गतिविधि 3
आइए, हम एक प्राकृतिक रंग तैयार करें।
चरण 1: कुछ फूल, पत्तियाँ, छालें और जड़ें एकत्र करें, जैसे कि गेंदे के फूल, गुड़हल और चुकंदर जिनमें रंग देने के गुण होते हैं।
चरण 2: इनमें से किसी भी एक पौधे के किसी भाग को लगभग 1-2 लीटर पानी में 30 मिनट से 1 घंटे तक उबालिए। पात्र को एक थाली से बैंक दीजिए। (इस गतिविधि में अपने शिक्षक या किसी बड़े व्यक्ति की सहायता लीजिए।)
चरण 3: उबाले गए मिश्रण को छानिए ताकि पौधों के भाग हट जाएँ और I केवल प्राकृतिक रंग बच जाए।
अब इस रंग का उपयोग करके एक कपड़े के टुकड़े, जैसे हल्के रंग के रुमाल अथवा तौलिए पर चित्र बनाइए। ध्यान दीजिए कि कपड़े को रातभर भिगोकर रखना है और फिर अगली सुबह उसे निचोड़कर सुखा लेना है।
बच्चे खेती और शहद निकालने के लिए उपयोग किए जाने वाले औजारों को देखने के लिए उत्सुक थे। घर में अनाज को संगृहीत करने के लिए मिट्टी के बर्तन और बाँस की टोकरियाँ थीं। मिट्टी के बर्तनों के अंदर नीम की पत्तियाँ बिछाई गई थीं। बाँस की टोकरियों के बाहर गोबर की परत लगाई गई थी। इस विधि से संगृहीत अनाज कीटों से सुरक्षित रहते हैं।
शिक्षण संकेत
शिक्षक, स्थानीय समुदाय के कारीगरों या कलाकारों को विद्यालय में आभक्ति कर सकते हैं ताकि वे अपने कौशल का प्रदर्शन कर सके और विद्यार्थियों से इस पर चर्चा कर सके। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्थानीय कलाकयों का महत्व बताना है।
क्या आप जानते हैं?
'जेणु कुरुबा' कर्नाटक की एक जनजाति है। इनका नाम 'जेणु' शब्द से आया है, जिसका अर्थ 'शहद' होता है। जब ये लोग मधुमक्खियों के छत्तों से शहद इकट्ठा करते हैं तो मधुमक्खियों से क्षमायाचना करते हुए गीत गाते हैं। यह उनके प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
गतिविधि (4)
अपने क्षेत्र में अनाज और साग-सब्जियों को संरक्षित करने की कुछ पारंपरिक विधियों का पता लगाइए और नीचे दी गई तालिका को भरिए। एक उदाहरण नीचे दिया गया है।
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नाम |
किस राज्य में प्रचलित है |
पात्र का विवरण |
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तुमड़ी |
उत्तराखंड |
गोल या अंडाकार सूखी लौकी के छिलकों से बनाई जाती है। |
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रीना और अमित उत्सव के लिए तैयार हो गए। उनके दादाजी ने डिब्बे से एक तरल पदार्थ की बोतल निकाली।
दादाजी : यह नीम के तेल से निर्मित एक मिश्रण है। यदि आप इसे अपने हाथों और पैरों पर लगाओगे तो मच्छर नहीं काटेंगे।
रीना: दादाजी, क्या यह एक प्राथमिक उपचार पेटी (फर्स्ट-एड बॉक्स) है? मैंने भी एक प्राथमिक उपचार पेटी तैयार की है। हम उसमें कुछ दवाइयाँ और बाजार से खरीदी हुई मच्छर भगाने की क्रीम रखते हैं।
गतिविधि (5)
अपने परिवार के बड़ों से चर्चा कीजिए और नीचे दी गई तालिका में पौधे और उसके भागों का नाम तथा उसका उपयोग लिखिए।
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पौधे का नाम |
पौधे का भाग |
उपयोग |
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तुलसी |
पत्तियाँ |
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अजवाइन |
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चर्चा कीजिए
1. प्राथमिक उपचार पेटी में कौन-कौन सी वस्तुएँ रखनी चाहिए?
2. आपके अनुसार यदि किसी को चोट लग जाए तो उन्हें प्राथमिक उपचार देना आवश्यक क्यों है?
जहाँ प्रकाश होता है, वहाँ जीवन में आनंद होता है
शाम को पूरा गाँव रंग-बिरंगे प्रकाश से जगमगा उठा। सभी लोग एक बड़े मैदान में एकत्रित हुए। लोग पारंपरिक कपड़े और आभूषण पहने हुए थे। उत्सव आंरभ होने 'से पहले ईश्वर और प्रकृति माँ की प्रार्थना की गई। ढोल और नगाड़ों की ध्वनि से वातावरण गूंज उठा। उत्साही धुनों ने सबको थिरकने पर विवश कर दिया। अमित और रीना भी इसमें सम्मिलित हुए और उन्होंने पारंपरिक नृत्य का आनंद लिया।
गतिविधि (6)
अपने क्षेत्र के पारंपरिक नृत्य और गीतों का पता लगाइए। अपने सहपाठियों और शिक्षकों की सहायता से अपने विद्यालय के वार्षिक दिवस पर एक पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कीजिए।
चर्चा कीजिए
कल्पना कीजिए कि आपके क्षेत्र में दो दिनों तक कोई प्रकाश नहीं है। आपके जीवन में क्या परिवर्तन आएँगे?
रीना और अमित अपने गाँव के व्यक्तियों और प्रकृति के मध्य सुंदर संबंधों को देखकर अचंभित रह गए। उन्होंने विचार करना आरंभ किया कि वे प्रकृति के लिए क्या कर सकते हैं और किस प्रकार प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त कर सकते हैं।
क्या आप जानते हैं?
'पवित्र उपवन' वन के छोटे-छोटे भाग होते हैं जिन्हें स्थानीय समुदायों द्वारा संरक्षित किया जाता है। इनके भीतर के पेड़ और वन्यजीव सुरक्षित रहते हैं। ये ऐसे महत्वपूर्ण स्थान होते हैं, जहाँ समुदाय के लोग एकत्रित होकर पूजा करते हैं और प्रकृति की सुंदरता का उत्सव मनाते हैं।
गतिविधि (7)
अपने बड़ों से बात कीजिए और जानिए कि आपके क्षेत्र में जंतुओं और पौधों से जुड़ी कौन-कौन सी परंपराएँ और पर्व मनाए जाते हैं। नीचे कुछ उदाहरण दिए गए हैं।
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पर्व का नाम |
संबधित पौधा/जंतु |
गतिविधि |
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वट सावित्री |
वट (बरगद) का वृक्ष |
पूजा |
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हरि जिरोती |
फल देने वाला वृक्ष |
वृक्षारोपण |
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काजीरंगा हाथी महोत्सव |
हाथी |
जागरूकता अभियान |
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हमारे देश के विभिन्न भागों में हम पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की पूजा करते हैं। यह प्रक्रिया हमारे द्वारा प्रकृति का सम्मान और उसकी रक्षा करने की समृद्ध परंपरा को दर्शाती है।
हमारे आस-पास के पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की देखभाल करने के कुछ तरीके यहाँ दिए गए हैं-
- कागज को व्यर्थ न करें।
- प्लास्टिक का उपयोग न करें।
- पौधों को बचाने के बारे में जागरूकता फैलाएँ।
पक्षियों के लिए खाना और पानी रखें
वृक्ष लगाएँ
स्वच्छता अभियान आयोजित करें
आइए विचार करें
1. वे कौन-कौन सी वस्तुएँ हैं, जो हम अपने दैनिक जीवन की आवश्यकताओं हेतु प्रकृति से प्राप्त करते हैं?
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दैनिक आवश्यकताएँ |
प्रकृति से प्राप्त वस्तुएँ |
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भोजन |
फल |
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वस्त्र |
कपास |
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स्वास्थ्य सुरक्षा |
नीम |
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अन्य |
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2. प्राकृतिक संसाधनों के अधिक उपयोग से कौन-सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं? उदाहरण के लिए, यदि हम लकड़ियों का अधिक उपयोग करते हैं तो हमारे जंगल समाप्त हो सकते हैं।
पानी : ..................................................
मिट्टी : ..................................................
समुद्री उत्पाद : ...................................
अन्य : .................................................
3. हम अपने चारों ओर के प्राकृतिक वातावरण की रक्षा कैसे कर सकते हैं?
घर पर
विद्यालय में
उद्यानों में
अपने आस-पास के क्षेत्र में
4. अपना औषधीय उद्यान तैयार कीजिए।
नीचे आपके अपने औषधीय उद्यान के लिए एक स्थान दिया गया है। उद्यान के विभिन्न भागों में अपनी पसंदीदा औषधीय जड़ी-बूटियों के चित्र बनाइए और उनके नाम लिखिए। क्या कुछ ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं जो आपको कम पसंद हैं? उन्हें भी बनाइए!
