ऐसा वर दो
भगवन हमको ऐसा वर दो,
जग के सारे सद्गुण भर दो।
हम फूलों जैसे मुस्काएँ,
सब पर प्रेम-सुगंध लुटाएँ,
हम परहित कर खुशी मनाएँ,
ऐसे भाव हृदय में भर दो,
भगवन हमको ऐसा वर दो।
दीपक बनें, लड़ें हम तम से,
ज्योतिर्मय हो यह जग हमसे,
कभी न हम घबराएँ गम से,
तन, मन सबल हमारे कर दो,
भगवन हमको ऐसा वर दो।
सत्य-मार्ग पर बढ़ते जाएँ,
सबको ही सन्मार्ग दिखाएँ,
सब मिलकर जीवन फल पाएँ,
ऐसे ज्ञान, बुद्धि से भर दो,
भगवन हमको ऐसा वर दो।
– त्रिलोक सिंह ठकुरेला
1 चिड़िया का गीत
सबसे पहले मेरे घर का अंडे जैसा था आकार तब मैं यही समझती थी बस इतना-सा ही है संसार।
फिर मेरा घर बना घोंसला सूखे तिनकों से तैयार तब मैं यही समझती थी बस इतना-सा ही है संसार।
फिर मैं निकल गई शाखों पर हरी-भरी थीं जो सुकुमार तब मैं यही समझती थी बस इतना-सा ही है संसार।
आखिर जब मैं आसमान में उड़ी दूर तक पंख पसार तभी समझ में मेरी आया बहुत बड़ा है यह संसार।
- निरंकार देव 'सेवक'
बातचीत के लिए
1. पशु-पक्षियों के लिए घर आवश्यक है या नहीं? कारण भी बताइए।
2. आपके परिवार के सदस्य घर से बाहर क्यों जाते हैं?
3. जब परिवार के सदस्य बाहर जाते हैं या बाहर से आते हैं तो आपको कैसा लगता है और क्यों?
4. जब कोई अतिथि आपके घर आता है या आप किसी संबंधी के यहाँ जाते हैं तो आपको कैसा लगता है?
5. क्या आपको लगता है कि पक्षियों की तरह हम भी धीरे-धीरे बड़े होते हैं और फिर उनकी तरह ही संसार देखते हैं? अपने अनुभव साझा कीजिए।
कविता की बात
1. नीचे दिए गए प्रश्नों में चार विकल्प दिए गए हैं। प्रश्नों के उत्तर में एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं
क. घोंसले से संबंधित उपयुक्त वाक्य को चिह्नित कीजिए -
- घोंसला पक्षियों का घर होता है।
- घोंसला सूखे तिनकों से बनाया जाता है।
- पक्षियों का घोंसला केवल पेड़ों पर होता है।
- कुछ पक्षियों का घोंसला हमारे घरों में भी होता है।
ख. कविता में 'अंडे जैसा था आकार' का प्रयोग निम्नलिखित में से किसके लिए किया गया है -
- संसार
- आकाश
- घर
- घोंसला
ग. 'तब मैं यही समझती थी
बस इतना-सा ही है संसार'
इन पंक्तियों में 'इतना-सा' का अर्थ है -
- बहुत छोटा
- बहुत बड़ा
- बहुत लंबा
- रंग-बिरंगा
2. नीचे दी गई कविता की पंक्तियों का मिलान उनके नीचे दी गई उपयुक्त पंक्तियों से कीजिए -
| फिर मेरा घर बना घोंसला सूखे तिनकों से तैयार | आखिर जब मैं आसमान में उड़ी दूर तक पंख पसार | फिर मैं निकल गई शाखों पर हरी-भरी थीं जो सुकुमार | सबसे पहले मेरे घर का अंडे जैसा था आकार |
| तब मैं यही समझती थी बस इतना-सा ही है संसार। | तभी समझ में मेरी आया बहुत बड़ा है यह संसार। |
सोचिए और लिखिए
1. चिड़िया को यह संसार कब-कब छोटा लगा?
2. खुले आकाश में उड़ते समय चिड़िया ने क्या-क्या देखा होगा जिससे उसे लगा कि संसार बहुत बड़ा है?
3. प्रायः सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट (कलरव) सुनाई देती है। ऐसा क्यों होता है?
समझ और अनुभव
1. जब कोई शिशु चिड़िया घोंसले से बाहर आती है तो उसे लगता है कि संसार बहुत बड़ा है। क्या आपको भी घर से बाहर निकलते समय ऐसा ही अनुभव होता है और क्यों?
2. एक शिशु पक्षी की तरह आप भी धीरे-धीरे बड़े हो रहे हैं। अब तक आपमें भी कई परिवर्तन आए हैं। नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार अपने अंदर आए परिवर्तनों को लिखिए-
| शारीरिक परिवर्तन | रुचियों में परिवर्तन | समझ में परिवर्तन |
| खान-पान में परिवर्तन | चित्रकारी | खेल |
| गीत-संगीत | पढ़ना-लिखना | नृत्य और अभिनय |
इनके अतिरिक्त यदि आपको किसी अन्य परिवर्तन की अनुभूति होती है तो उसे भी कक्षा में साझा कीजिए।
3. पहले चिड़िया को लगता था कि यह संसार बहुत छोटा है परंतु सच्चाई कुछ और ही थी। उस समय आपको कैसा लगा जब आपने इनमें से किसी एक को पहली बार देखा -
| रेलगाड़ी | मेट्रो ट्रेन |
| मॉल | समुद्र |
| पहाड़ | वायुयान |
| जलयान | जंगल |
| चार या छह वीथियों वाली सड़कें | खेत |
| रेगिस्तान या मरुस्थल | नदी |
इनके अतिरिक्त, आपके कुछ और अनुभव हो सकते हैं, उन्हें भी कक्षा में अवश्य साझा कीजिए।
चित्रों की भाषा
नीचे दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए। चित्र से मेल खाती कविता की कुछ पंक्तियाँ उदाहरण के रूप में दी गई हैं। अब कविता की उपयुक्त पंक्तियों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
| आखिर जब मैं आसमान में उड़ी दूर तक पंख पसार तभी समझ में मेरी आया बहुत बड़ा है यह संसार। |
| _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ |
अनुमान और कल्पना
1. कविता की पंक्ति है - "आखिर जब मैं आसमान में, उड़ी दूर तक पंख पसार।” चिड़िया ने अंततः इतनी दूर तक उड़ान क्यों भरी होगी?
2. पक्षी खुले आकाश में बहुत दूर तक उड़ते हैं। लंबी दूरी, हजारों पेड़ों और सैकड़ों घोंसलों के बीच पक्षी अपना घोंसला कैसे ढूँढ़ते होंगे?
3. पक्षियों ने आकाश में उड़कर जाना कि संसार बहुत बड़ा है। हमारे पूर्वजों को यह बात कैसे पता चली होगी?
4. जब आप कहीं बाहर जाते हैं तो घर के बड़े-बूढ़े आपको कुछ निर्देश देकर भेजते हैं। क्या पक्षियों के माता-पिता भी उन्हें उड़ने के पूर्व कुछ निर्देश देते होंगे? यदि हाँ, तो वे निर्देश क्या-क्या हो सकते हैं?
कल्पना की उड़ान
हर कोई पक्षी बनकर आकाश में उड़ना चाहता है। कल्पना कीजिए कि आप सभी खुले आकाश में पंख फैलाकर उड़ रहे हैं। कोई पहाड़ों के ऊपर उड़ रहा है, कोई समुद्र के ऊपर, कोई क्रिकेट मैच देखते हुए उड़ रहा है तो कोई विवाह के भोज का आनंद लेते हुए उड़ रहा है। आपको कल्पना करके कक्षा को बताना है कि आप ऊपर से नीचे क्या-क्या देख रहे हैं। आप अपनी प्रस्तुति को उसी तरह सुना सकते हैं जैसे खेलों में आँखों देखा हाल सुनाया जाता है, यथा- मैं पहाड़ों के ऊपर से उड़ रहा/रही हूँ। मुझे चारों ओर ऊँचे पेड़, झरने और सरोवर दिखाई दे रहे हैं। ठंडी हवा अच्छी लग रही है। अरे वाह ! अब तो बर्फ भी दिखने लगी है। यह एक सफेद चादर की तरह लग रही है। मैं इसका भरपूर आनंद ले रहा/ रही हूँ आदि।
उड़ान की परिस्थितियाँ, जैसे – पहाड़, समुद्र और उसका किनारा, जंगल, रेगिस्तान, मैदान, गाँव, नगर, बरात, विभिन्न खेल प्रतियोगिताएँ, विद्यालय, मेला, बाज़ार, चिकित्सालय, चिड़ियाघर, स्थानीय त्योहार आदि हो सकती हैं। शिक्षक बच्चों को उनके पिछले अनुभव और स्थानीयता को ध्यान में रखते हुए अन्य परिस्थितियाँ भी दे सकते हैं।
अनुमान और कल्पना
कविता में 'अंडे जैसा था आकार' का उल्लेख है। नीचे कुछ और चित्र दिए गए हैं जो अलग-अलग आकृतियों के हैं। चित्रों के नीचे उनके नाम लिखिए। इस कार्य में आप अपने शिक्षक की सहायता भी ले सकते हैं।
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
| _ _ _ _ _ | _ _ _ _ _ | _ _ _ _ _ | _ _ _ _ _ |
भाषा की बात
1. "फिर मैं निकल गई शाखों पर, हरी-भरी थीं जो सुकुमार", कविता की इस पंक्ति में 'सुकुमार' शब्द आया है। यह 'सु' और 'कुमार' के मेल से बना है जिसका अर्थ है - कोमल या कोमल अंगों वाला। आप भी इसी प्रकार कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ खोजिए। -
| सु | कुमार | सुकुमार | कोमल अंगों वाला |
| सु | योग्य | _ _ _ | _ _ _ |
| सु | यश | _ _ _ | _ _ _ |
| सु | _ _ _ | सुकर्म | अच्छे कर्म |
| सु | वास | _ _ _ | _ _ _ |
| सु | _ _ _ | सुदर्शन | _ _ _ |
2. नीचे दिए गए वाक्यों में कुछ रिक्त स्थान हैं और कुछ शब्द रेखांकित किए गए हैं। उन शब्दों से वाक्यों को पूरा कीजिए जो रेखांकित शब्दों के विपरीत अर्थ रखते हैं -
(क) सूखा और _ _ _ _ _ कचरा अलग-अलग डिब्बों में डालें।
(ख) दिल्ली मेरे घर से _ _ _ _ _ है लेकिन गुवाहाटी पास में है।
(ग) अनवर कब _ _ _ _ _ और कब गया, पता ही नहीं चला।
(घ) कोई भी काम न तो बड़ा होता है और न ही _ _ _ _ _ ।
3. आइए, अब एक रोचक संवाद पढ़ते हैं -
![]() |
![]() |
इतना-सा, उतना-सा, जितना-सा और कितना-सा का वाक्यों में प्रयोग कीजिए और उनके अर्थ भी समझाइए। फिर आपको राजू जितने रुपये मिल जाएँगे।
अब नीचे दिए गए शब्दों से वाक्य बनाकर सलमा की सहायता कीजिए -
इतना-सा __________________
उतना-सा __________________
जितना-सा __________________
कितना-सा __________________
पाठ से आगे
पक्षी भोजन की खोज में घोंसले से बाहर उड़ते हैं। यह जानना रोचक होगा कि कौन-सा पक्षी क्या खाता है। नीचे कुछ पक्षियों के नाम दिए गए हैं। पता कीजिए कि वे क्या खाते हैं -
| पक्षियों के नाम | पक्षियों का भोजन |
| बाज | __________________ |
| हंस | __________________ |
| तोता | __________________ |
| बगुला | __________________ |
| कबूतर | __________________ |
| उल्लू | __________________ |
कलाकारी
चित्र बनाना, गाना और नृत्य करना सभी को पसंद होता है। घोंसले से झाँकता हुआ शिशु पक्षी, हरे-भरे पेड़ की शाखाओं पर बैठा पक्षी, नीले आकाश में पंख फैलाकर उड़ता पक्षी आदि बहुत प्यारे लगते हैं। अब आप भी नीले आकाश में उड़ते हुए पक्षियों का चित्र बनाइए। जब चित्र तैयार हो जाए तो आप चित्र को पकड़कर एकल या सामूहिक नृत्य कर सकते हैं या अपने मनभावन गीत पर भाव नृत्य कर सकते हैं। आप सभी इन चित्रों को कक्षा या गलियारे में प्रदर्शित कर सकते हैं।
अभिभावकों/शिक्षकों/मित्रों की सहायता से नीचे दिए गए गीत को खोजिए और समूह में गाइए।
सूरज एक, चंदा एक, तारे अनेक,
एक तितली, अनेक तितलियाँ,
एक गिलहरी, अनेक गिलहरियाँ,
एक चिड़िया, अनेक चिड़ियाँ...
आनंदमयी गतिविधि
1. नीचे दिए गए अक्षर जाल में पक्षियों के नाम खोजिए और उनके बारे में जानकारी एकत्रित कीजिए।
| नीलकंठ | -------- | -------- |
| -------- | -------- | -------- |
| -------- | -------- | -------- |
2. जब शिशु पक्षी चहचहाते हैं तो एक मधुर ध्वनि सुनाई देती है। आइए, हम भी शिशु पक्षियों की तरह चहचहाएँ।
सभी बच्चे अपनी एक हथेली अपने होठों पर रखें। सभी मिलकर चीं-चीं की ध्वनि निकालें। आपको लगेगा कि आप ही पेड़ की शाखाओं से शिशु पक्षी बनकर यह ध्वनि निकाल रहे हैं। बस पक्षियों की चहचहाहट सुनिए और आनंद लीजिए।
पक्षियों की ध्वनियों को निकालना और सुनना सभी को रुचिकर लगता है। आइए, अब हम बारी-बारी से किसी भी पक्षी की ध्वनि निकालें और तालियों की गड़गड़ाहट से उसका स्वागत करें।
3.नीचे पशु-पक्षियों से संबंधित कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। पहेलियों का उपयुक्त चित्रों से मिलान कीजिए -
| पंखों में नाखून हूँ रखता, रात अँधेरे में ही उड़ता। दिन में न मैं भोजन पाऊँ, उल्टा होकर के सो जाऊँ। |
![]() |
| पत्तों जैसा उसका रंग, कुतर-कुतर खाने का ढंग। घरों में भी पाला जाता, नाम बताओ उसका ज्ञाता। |
![]() |
| नीड़ नहीं वह कभी बनाती, बागों की रानी कहलाती। काला रंग है उसका भैया, सबके दिल को खूब लुभाती। |
![]() |
| दिनभर सूरत नहीं दिखाता, रात कुलाँचे भरता। और समझता ऐसा जैसे, सूरज उससे डरता। |
![]() |
बोलिए फटाफट
नीचे कुछ रोचक और चुनौतीपूर्ण पहेलियाँ दी गई हैं, शीघ्रता से उनका उत्तर दीजिए -
| परिवार हरा, हम भी हरे, एक थैली में तीन-चार भरे। |
-------- |
| एक लाठी की अजब कहानी उसके भीतर मीठा पानी। |
-------- |
| एक पक्षी ऐसा, जिसकी दुम पर पैसा। |
-------- |
| लाल डिबिया, पीले खाने, भीतर रखे मोती के दाने। |
-------- |
| जाती हूँ मैं हर जगह, पर हिलती नहीं किसी भी तरह। |
-------- |
मति की उड़ान
आइए मिलते हैं भारत की पहली महिला पायलट सरला ठकराल से। इन्हें प्यार से 'मति' कहा जाता था। इनका जन्म सन् 1914 में दिल्ली में हुआ था। सरला ठकराल मात्र 21 वर्ष की आयु में पायलट का लाइसेंस पाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने सन् 1936 में पहली बार लाहौर में जिप्सी मॉथ नाम का दो सीट वाला विमान अकेले उड़ाया था। वे साड़ी पहनकर विमान उड़ाने वाली पहली महिला थीं। उन्होंने वायुयान का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए 1,000 घंटे की उड़ान का कठिन अभ्यास किया था।










