2 बगीचे का घोंघा
ऊपर दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
- यह कौन-सा जीव है?
- आपने इसे कहाँ देखा है?
- आपने इसे किस मौसम में अधिक देखा है?
- आपको अपने घर और विद्यालय में कौन-कौन से जीव दिखाई देते हैं?
- घोंघा उन जीवों से किस बात में भिन्न है?
बहुत समय पहले की बात है। एक बगीचे में एक घोंघा रहता था। जानते हो घोंघा कैसा होता है?
बगीचा बहुत छोटा और सुंदर था। घोंघे ने अपना सारा जीवन उसी बगीचे में बिताया था। उसे बगीचे के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुँचने में पूरे दो दिन लगते थे। इतने समय तक वहाँ रहने के कारण घोंघा बगीचे का कोना-कोना पहचान गया था।
पर कभी-कभी घोंघे को लगता था, इस बगीचे के बाहर क्या होगा? कैसी होती होगी बाहर की दुनिया?
बगीचे की दीवार में एक छेद था। घोंघा प्रतिदिन उस छेद को देखता था। उसे याद आता था कि उसकी माँ उससे कहा करती थीं, "वहाँ कभी मत जाना। वह दुनिया हमारी दुनिया से बहुत अलग है।"
घोंघा कुछ और दिन सोचता रहा। फिर उसने तय कर लिया, “मैं बाहर जाकर देखूँगा कि दुनिया कैसी है।"
यह सोचकर उसने अपना सामान अपने शंख में बाँध लिया। अगले दिन सूरज निकलने के पहले ही घोंघा निकल पड़ा। बगीचा पीछे छोड़ दिया।
घोंघा छेद में घुसा और जल्दी ही बाहर निकल आया। बाहर आते ही घोंघा चकित रह गया। जितनी दूर तक उसकी आँखें देख सकती थीं, उतना उसने देखा। उसके सामने बहुत बड़ा, लंबा और चौड़ा-सा मैदान था।
वास्तव में वह बच्चों के खेलने की जगह थी। पर घोंघे ने तो सोचा ही नहीं था कि इतनी बड़ी जगह भी हो सकती है। "वाह! दुनिया सचमुच कितनी बड़ी है”, घोंघे ने कहा।
उसी समय खड़-खड़ की ध्वनि आई। घोंघे को लगा कि पूरा आकाश ढँक गया है। वह डर के मारे जोर से चिल्लाया, "उई!" फिर वह अपने ऊपर हँसने लगा। उसने देखा कि एक सूखा पत्ता उसके ऊपर आ गिरा था।
"वाह! दुनिया तो कितनी मज़ेदार है”, घोंघे ने कहा। वह उस सूखी-भूरी पत्ती के नीचे से बाहर निकल गया।
थोड़ा आगे एक बड़ा-सा पत्थर पड़ा हुआ था। घोंघे को लगा यह कोई पहाड़ होगा। वह झट से उस पर चढ़ गया और देखने लगा।
घोंघे ने अपने जीवन में पहली बार लाल चींटों को देखा। वे अपने लंबे-पतले पाँवों से इधर-उधर आ-जा रहे थे।
उसने देखा कि एक गिलहरी फुदक-फुदककर एक पेड़ पर चढ़ गई। उसने देखा कि दूर एक गेंद लुढ़कती हुई जा रही है और एक कुत्ता उसके पीछे भाग रहा है।
“वाह! दुनिया में सब कुछ कितनी तेज़ी से चलता है”, घोंघे ने कहा। “बगीचे में तो सबकुछ धीरे-धीरे चलता था।”
तभी अचानक उसने एक ऐसी चीज़ देखी जिससे उसका सर चकरा गया। अभी तक तो घोंघे ने पौधे या छोटे पेड़ ही देखे थे। पर यहाँ पर तो एक ऐसा लंबा पेड़ था जो पूरे आसमान तक जाता था। बेचारे घोंघे ने कभी खजूर का पेड़ नहीं देखा था।
वहाँ एक और पेड़ था जो इतना बड़ा था कि घोंघा उसके एक छोर से दूसरे छोर तक भी नहीं देख पाता था। बड़ के पेड़ से जो उसका पाला पड़ गया था, इसलिए। घोंघे की आँखें आश्चर्य से और भी खुल गईं। उसने कहा, "वाह, सचमुच दुनिया कितनी अद्भुत है!” घोंघे ने तय कर लिया कि अब तो वह इस दुनिया में ही रहेगा।
- एकलव्य प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'छींका-छींक' से साभार
बातचीत के लिए
- 1. घोंघे को बगीचे (उद्यान) के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुँचने में दो दिन क्यों लगते थे?
- 2. आप अपने विद्यालय कैसे जाते हैं और आपको कितना समय लगता है?
- 3. घोंघा उद्यान से बाहर क्यों जाना चाहता था?
- 4. आपका कहाँ-कहाँ जाने का मन करता है?
- 5. आप घूमने के लिए कहाँ-कहाँ जाते हैं और किसके साथ जाते हैं?
पाठ के भीतर
नीचे दिए गए प्रश्नों के सटीक उत्तर के सामने सूरज का चित्र (☼) बनाइए -
1. घोंघा उद्यान से बाहर क्यों जाना चाहता था?
- (क) उसे उद्यान में अच्छा नहीं लगता था।
- (ख) वह बाहर का जीवन देखना चाहता था।
- (ग) उसे उद्यान सुंदर नहीं लगता था।
- (घ) उसे उद्यान बहुत छोटा लगता था।
2. घोंघे को बड़ा-सा पत्थर पहाड़ जैसा क्यों लगा होगा?
- (क) पत्थर पहाड़ की तरह बहुत ही बड़ा था।
- (ख) घोंघे ने उद्यान में पत्थर जैसी बड़ी वस्तु कभी नहीं देखी थी।
- (ग) घोंघे को पत्थर पर चढ़कर दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था।
- (घ) पत्थर की आकृति पहाड़ जैसी थी।
3. घोंघे ने अपने जीवन में पहली बार क्या देखा?
- (क) अपने लंबे-पतले पाँवों से आ-जा रहे लाल चींटें
- (ख) अपना शंख
- (ग) पीपल का पेड़
- (घ) हरी-हरी घास
4. घोंघे की आँखें आश्चर्य से क्यों खुली रह गईं?
- (क) उसके ऊपर एक बड़ा पत्ता गिरा।
- (ख) वह उद्यान में एक नए कीट से मिला।
- (ग) उसने पहली बार एक तालाब देखा।
- (घ) उसने बड़ का एक पेड़ देखा।
5. छेद से बाहर निकलते ही घोंघे का जिन वस्तुओं से सामना हुआ, उनमें से कुछ वस्तुएँ छूट गई हैं। उन्हें पूरा कीजिए -
| मैदान | .......... | पत्थर |
| .......... | गिलहरी | गेंद |
| कुत्ता | .......... | "बड़ का पेड़ |
सोचिए और लिखिए
- 1. उद्यान की दीवार में छेद देखकर घोंघे को कौन-सी बात याद आती थी?
- 2. छेद के दूसरी ओर जाते ही घोंघा चकित क्यों रह गया?
- 3. घोंघे ने ऐसा क्यों कहा होगा कि उद्यान में सब कुछ धीरे-धीरे चलता है?
- 4. घोंघे की तरह आपको अपने घर, विद्यालय तथा आस-पास क्या-क्या अद्भुत लगता है और क्यों?
- 5. घोंघे ने उद्यान के भीतर और बाहर क्या-क्या देखा? नीचे लिखिए -
| उद्यान के भीतर | उद्यान के बाहर |
| ------------------- | ------------------- |
| ------------------- | ------------------- |
| ------------------- | ------------------- |
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भाषा की बात
1. कहानी में आए निम्न शब्दों के आधार पर वाक्य बनाकर लिखिए -
- आश्चर्य - ...........................
- अद्भुत - ...........................
- अचानक - ..........................
- छोर - ...........................
2. जब घोंघे के ऊपर सूखा पत्ता गिरा, तब उसने 'वाह!' न कहकर 'उई!' कहा। आपके मुँह से कब 'वाह' और 'उई' जैसे शब्द निकलते हैं?
वाह! कितना सुंदर फूल है। ..............
...................................................
...................................................
3. घोंघे ने अपने शंख में कौन-कौन सा सामान बाँधा होगा?
फल, पत्ता, ....................................
मिलान कीजिए
नीचे लिखी बातें घोंघे ने कब-कब कहीं? मिलान कीजिए -
| घोंघे का कथन | कब कहा? |
| "वाह! दुनिया में सब कुछ कितनी तेज़ी से चलता है।" | जब उस पर सूखा पत्ता गिरा। |
| "वाह! दुनिया सचमुच कितनी बड़ी है।" | जब उसने बड़ का पेड़ देखा। |
| "वाह! दुनिया तो कितनी मज़ेदार है।" | जब उसने लुढ़कती गेंद के पीछे कुत्ते को भागते हुए देखा। |
| "वाह! सचमुच दुनिया कितनी अद्भुत है।" | जब उसने बच्चों के खेलने का स्थान देखा। |
विभिन्न ध्वनियाँ
"उसी समय खड़-खड़ की ध्वनि आई।" यहाँ सूखे पत्तों के गिरने की ध्वनि 'खड़-खड़' जैसी है। इनकी ध्वनियाँ कैसी होंगी -
| बादलों का गरजना | पानी का बरसना |
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| नल से बूँदों का गिरना | मेंढक का बोलना |
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| घंटी का बजना | हवा का बहना |
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अपनी-अपनी विशेषताएँ
घोंघे ने उद्यान से बाहर आकर जो भी देखा, वह किसी-न-किसी रूप में विशेष था। पाठ के आधार पर उनकी विशेषताएँ लिखिए -
| जो देखा | उसकी विशेषता |
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बहुत बड़ा, लंबा-चौड़ा |
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अनुमान और कल्पना
इतने समय तक वहाँ रहने के कारण घोंघा उद्यान का कोना-कोना पहचान गया था।
- 1. अनुमान लगाकर बताइए कि घोंघा उद्यान में कब से रह रहा होगा।
- 2. घोंघे को उद्यान के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में दो दिन लगते थे और उसे वापस लौटने में 48 घंटे लगते थे। ऐसा क्यों?
- 3. आप अपने विद्यालय में कितने वर्षों से पढ़ रहे हैं? आपने वहाँ अब तक क्या-क्या देखा है?
- 4. आपको अपनी कक्षा से पेयजल के स्थान और विद्यालय के मुख्य द्वार तक जाने में कितना समय लगता है?
घोंघे से आपकी भेंट
घोंघे को सबसे पहले बच्चों के खेलने का स्थान दिखाई दिया। कल्पना कीजिए कि बच्चों ने घोंघे को देखा और उससे बातें कीं।
- बच्चे - अरे! आप कौन?
- घोंघा – मुझे नहीं पहचानते ! मैं घोंघा, नहीं तो और कौन?
- बच्चे - ..........................
- घोंघा - ..........................
- बच्चे - ..........................
- घोंघा - ..........................
- बच्चे - ..........................




