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6 जयपुर से पत्र

पूज्य पिताजी,
सादर प्रणाम ! परसों रात को हम सकुशल जयपुर पहुँच गए। हमारी यात्रा बहुत अच्छी रही। अध्यापकों ने हमारा बहुत ध्यान रखा। यहाँ मौसम अच्छा है।

कल सुबह जलपान करके हम सब लोग जयपुर की सैर के लिए निकले। सबसे पहले हमने हवामहल देखा। हवामहल के पास ही जंतर-मंतर है। इस वेधशाला का निर्माण राजा सवाई जयसिंह ने किया था। हमने घूम-घूमकर जंतर-मंतर देखा। इसके बाद हम रामनिवास बाग गए। यहाँ एक अच्छा कला-संग्रहालय है। यह दर्शनीय है। संग्रहालय में जयपुर के राजा-महाराजाओं के कपड़े, अस्त्र-शस्त्र और उनके चित्र रखे हुए हैं।

जयपुर से लगभग चौदह किलोमीटर की दूरी पर आमेर का दुर्ग है। यह बहुत पुराना और बड़ा है। आमेर में शीशमहल देखने योग्य है। शीशमहल के पास ही शिला देवी का मंदिर है। मंदिर में दर्शन करने के बाद हम नगर वापस आए। रात को हमने राजस्थान के लोकनृत्य देखे। फिर राजस्थान का विशेष व्यंजन दाल-बाटी चूरमा खाया। आज दोपहर पश्चात् हम झीलों के नगर उदयपुर जाएँगे। अगला पत्र उदयपुर से लिखूँगा।

माताजी को मेरा प्रणाम और लता बहन को बहुत प्यार।

आपका पुत्र
अमर

बातचीत के लिए

  1. 1. आपको घूमना कैसा लगता है?
  2. 2. अगर आपके आस-पास कोई ऐसा स्थान है जहाँ बाहर से लोग घूमने आते हैं तो उसके विषय में बताइए।
  3. 3. अगर आपको किसी स्थान पर जाने का अवसर मिले तो आप कहाँ जाना चाहेंगे और क्यों?
  4. 4. यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य कहीं पर घूमने गया हो तो उसके विषय
  5. में बताइए।

बातचीत के लिए

नीचे कुछ बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। प्रश्नों के उत्तर में एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं। सही विकल्प के आगे ( 😊 ) बनाइए -

1. शीशमहल है-

  1. (क) शिला देवी मंदिर के पास
  2. (ख) आमेर के दुर्ग में
  3. (ग) हवामहल के पास
  4. (घ) रामनिवास बाग में

2. पत्र -

  1. (क) जयपुर से लिखा गया था।
  2. (ख) यात्रा के बाद लिखा गया था।
  3. (ग) पिता को लिखा गया था।
  4. (घ) अमर ने लिखा था।

3. निम्नलिखित में से किसे सैर (भ्रमण) नहीं कहा जाएगा -

  1. (क) ताजमहल देखने के लिए आगरा जाना
  2. (ख) बीमारी के उपचार के लिए नगर जाना
  3. (ग) पढ़ाई के लिए शिलांग जाना
  4. (घ) भारत दर्शन पर जाना

अपनी बात

अमर के पत्र का एक अंश नीचे दिया गया है। इसे ध्यान से पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी समझ के अनुसार लिखिए -

“परसों रात को हम सकुशल जयपुर पहुँच गए। हमारी यात्रा बहुत अच्छी रही। अध्यापकों ने हमारा बहुत ध्यान रखा। यहाँ मौसम अच्छा है।"

यात्रा में ऐसा क्या-क्या हुआ होगा कि अमर ने अपने पत्र में लिखा-

  1. (क) परसों रात को हम सकुशल जयपुर पहुँच गए।
  2. (ख) हमारी यात्रा बहुत अच्छी रही।
  3. (ग) अध्यापकों ने हमारा बहुत ध्यान रखा।
  4. (घ) यहाँ मौसम अच्छा है।

सोचिए और लिखिए

  1. 1. अमर ने जयपुर में क्या-क्या देखा?
  2. 2. उसने कला-संग्रहालय को दर्शनीय क्यों बताया?
  3. 3. उसने आमेर के दुर्ग को बहुत बड़ा और पुराना क्यों कहा है?

अनुमान और कल्पना

1. निम्नलिखित के बारे में अनुमान लगाइए कि ये क्या और कैसे होंगे?

  1. (क) जंतर-मंतर
  2. (ख) रामनिवास बाग
  3. (ग) शीशमहल
  4. (घ) हवामहल

2. अनुमान लगाकर बताइए कि उदयपुर को झीलों का नगर क्यों कहाजाता है।

खान-पान

अमर ने जयपुर में दाल-बाटी चूरमा खाया। आइए, इस व्यंजन के बारे में जानते हैं।
दाल-बाटी चूरमा एक पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन है। इसमें तीन मुख्य व्यंजन होते हैं -

दाल : यह अरहर, मूंग, चने या मसूर की दाल से बनती है। इसे कई मसालों के साथ पकाकर बनाया जाता है जिससे इसका स्वाद बढ़ जाता है। हरा धनिया इसके स्वाद को और भी बढ़ा देता है।

बाटी : यह गेहूं के आटे से बनी गोल लोइयाँ होती हैं जिन्हें उपले और लकड़ियों की आग में सेंका जाता है। फिर तैयार गरम बाटियों को घी में डुबोया जाता है। उसके बाद इसे खाने के लिए परोसा जाता है। ये बाटियाँ बाहर से कुरकुरी और अंदर से मुलायम होती हैं।

चूरमा : यह थोड़े मोटे आटे से बनता है। इसे बनाने के लिए पहले बाटी अथवा मोटी रोटी बनाई जाती है। फिर इसे मूसल की सहायता से ओखली में कूटा जाता है। जब यह बारीक हो जाता है, तब इसमें घी, सूखे मेवे और बूरा (गुड़ अथवा चीनी से मिलता-जुलता पदार्थ) मिला दिया जाता है। आधुनिक समय में इसे बनाने की विधि में कुछ परिवर्तन आ गए हैं।

आपकी रुचि का व्यंजन

अब आप अपने रुचिकर व्यंजनों में से किसी एक के विषय में बताइए जो आपके घर में विशेष अवसरों पर बनाया जाता है। संक्षेप में बताइए कि यह कैसे तैयार किया जाता है और इसमें क्या-क्या सामग्री डाली जाती है।

उपला, जिसे 'गोइठा' अथवा 'कंडा' भी कहा जाता है गाय या भैंस के गोबर से बना एक पारंपरिक ईंधन है। इसे गोबर को हाथ से आकार देकर और धूप में सुखाकर बनाया जाता है।

इन्हें भी जानिए

डाक पेटी (पोस्ट बॉक्स)

डाक पेटी एक लाल रंग की पेटी होती है। इसका प्रयोग भेजी जाने वाली चिट्ठियों का संग्रह करने के लिए किया जाता है। जब हमें किसी को चिट्ठी भेजनी होती है तो हम उस पर सही पता लिखकर डाक पेटी में डाल देते हैं। फिर डाकघर (पोस्ट ऑफिस) वाले डाकिया भैया/बहना इस डाक पेटी से चिट्ठियाँ निकालकर डाकघर ले जाते हैं। डाकघर से चिट्ठियाँ पते पर लिखे नगरों के डाकघरों को भेजी जाती हैं। उसके पश्चात् डाकिया भैया/बहना उन्हें सही पते पर देने जाते हैं।

पिनकोड

पिनकोड (PIN Code) छह अंकों की संख्या होती है। इसे किसी विशेष क्षेत्र की पहचान के लिए प्रयोग किया जाता है। यह मुख्य रूप से डाक (चिट्ठी और पार्सल) भेजने और प्राप्त करने में सहायता करता है।
उदाहरण के लिए यदि किसी गाँव या नगर में कोई चिट्ठी भेजनी हो तो उस स्थान का पिनकोड डालकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि चिट्ठी सही पते पर पहुँचे। इसका पहला अंक राज्य को बताता है। दूसरा और तीसरा अंक ज़िले को बताता है। अंतिम तीन अंक डाकघर की पहचान बताते हैं।

चिट्ठी आई है

पत्र लिखना एक बहुत पुरानी और आनंददायक कला है। सोचिए कि मोबाइल फोन, ईमेल या व्हाट्सएप आने से पहले लोग एक-दूसरे से कैसे संवाद करते थे। हाँ, वे पत्र लिखते थे! पत्र एक संदेश होता है जिसे कागज पर लिखा जाता है और डाक के द्वारा दूर रहने वाले मित्रों तथा सगे-संबंधियों को भेजा जाता है।

पत्र कैसे लिखें?

प्रारंभ - सबसे पहले आप ऊपर दाईं ओर दिनांक लिखें ताकि पत्र पाने वाले को पता चले कि यह कब लिखा गया था।
संबोधन - संबोधन में पूज्य या आदरणीय माँ अथवा पिताजी या मेरे प्रिय मित्र लिख सकते हैं।
अभिवादन - संबोधन के बाद अभिवादन अवश्य लिखें, जैसे- नमस्ते, प्रणाम, आशीर्वाद आदि।
आपकी बात - अभिवादन के बाद पत्र के माध्यम से आप क्या कहना चाहते हैं, वह लिखें।
अंतिम पंक्ति - घर के अन्य लोगों का अभिवादन करें, जैसे- बड़ों को प्रणाम और छोटों को प्यार।
समापन - अंत में आप, आपका /आपकी प्यारा बेटा /प्यारी बेटी या आपका प्रिय मित्र और फिर अपना नाम लिखें।
पत्र लिखते समय आपको अपनी भावनाओं को कागज पर उतारने का अवसर मिलता है। जब दूसरा व्यक्ति इसे पढ़ता है तो उसे ऐसा लगता है कि आप उसके पास ही बैठे हैं और उससे बातें कर रहे हैं। और हाँ, पत्र को लिफ़ाफ़े में डालना न भूलें। लिफ़ाफ़े पर एक डाक टिकट भी चिपकाएँ और साफ अक्षरों में जिसे पत्र भेज रहे हों, उसका पूरा पता पिनकोड सहित लिखें।
आजकल ऐसे पत्र कम लिखे जाते हैं, फिर भी वे बहुत विशेष होते हैं। तो क्या आप किसी को पत्र लिखने का सोच रहे हैं? इसे लिखें और देखें कि यह प्राप्तकर्ता तक पहुँचता है या नहीं।

अभिवादन

1. अमर ने अपने पिता को पत्र में 'सादर प्रणाम' लिखा है। सोचिए वह क्या लिखता यदि वह -

  1. (क) अपने मित्र को पत्र लिखता -------------------------------------
  2. (ख) अपनी बहन को पत्र लिखता ------------------------------------
  3. (ग) अपनी माँ को पत्र लिखता -------------------------------------
  4. (घ) अपने अध्यापक को पत्र लिखता -------------------------------------

2. आप अपने मित्र को पत्र लिखिए। पत्र में आस-पास के भ्रमण-स्थलों और प्रसिद्ध व्यंजनों के बारे में बताइए।

भाषा की बात

1. नीचे दिए गए उदाहरण को ध्यान से पढ़िए। अब आप भी उसी प्रकार नए शब्द बनाकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए -

उपसर्ग मूल शब्द नया शब्द वाक्य प्रयोग
वि शेष विशेष आज का दिन मेरे लिए विशेष है।
भर पेट ......... .........
......... योग उपयोग .........
प्र ......... ......... .........
अनु शासन ......... .........

2. नीचे दिए गए वाक्य को ध्यान से पढ़िए -

हमने घूम-घूमकर जंतर-मंतर देखा।

अब इन्हें आगे बढ़ाइए -

  • हमने झूम-झूमकर ...................................
  • हमने कूद-कूदकर ...................................
  • हमने उछल-उछलकर ...................................
  • हमने ...........................

3. तालिका को ध्यान से पढ़कर उपयुक्त वाक्य लिखिए -

समय वाक्य
जो कार्य बीते समय में पूरे हो गए हों। हमारी यात्रा बहुत अच्छी थी। ...........................................................................
जो कार्य अभी हो रहे हैं। मैं गीत गा रही/रहा हूँ ...........................................................................
जो कार्य आगे आने वाले समय में होंगे। 'हम सपरिवार कल घूमने जाएँगे। ...........................................................................

4. पत्र में आए शब्दों को वर्ग पहेली से खोजकर लिखिए -

उदयपुर
............
............
............
............
............
............
............
............
............
............
............

5. पत्र में संग्रहालय शब्द आया है। ऐसे और भी शब्द पता कीजिए, जैसे- विद्यालय। उन्हें समझिए और अपनी लेखन-पुस्तिका में उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

विद्यालय

शिक्षण-संकेत - शिक्षक अवसर देखकर विद्यार्थियों को किसी संग्रहालय में ले जाएँ। उन्हें वहाँ रखी सामग्रियों के बारे में बताएँ। साथ ही बच्चों को देश के अन्य संग्रहालयों की जानकारी भी दें।

वेधशाला

वह स्थान जहाँ ग्रहों, तारों और नक्षत्रों को देखने के लिए यंत्र रखे जाते हैं, उसे वेधशाला कहते हैं। इन यंत्रों की सहायता से ग्रहों की गति-स्थिति का निरंतर अध्ययन किया जाता है।

संग्रहालय

संग्रहालय एक ऐसा सार्वजनिक भवन है जहाँ सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, ऐतिहासिक एवं कलात्मक महत्व की वस्तुओं को प्रदर्शित किया जाता है। संग्रहालयों में कई प्रकार की वस्तुएँ रखी जाती हैं जिनमें से कुछ अद्वितीय होती हैं।

पता लगाइए

  1. 1. जंतर-मंतर क्या है? भारत में यह जयपुर के अतिरिक्त और कहाँ-कहाँ स्थित है?
  2. 2. आपके राज्य में कौन-कौन से दर्शनीय स्थल हैं? उनका संक्षिप्त परिचय दीजिए।

कुछ कीजिए

  1. 1. अपने शिक्षक या किसी बड़े सदस्य के साथ डाकघर जाइए। वहाँ क्या-क्या काम किए जाते हैं, इसकी जानकारी एकत्रित कीजिए।
  2. 2. सभी विद्यार्थी चार-चार के समूह में भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों के चित्रों का संग्रह कर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।

पत्र की यात्रा

● प्राचीन काल में संदेश या पत्र भेजने के लिए व्यक्ति-विशेष होते थे जिन्हें दूत कहा जाता था। कम दूरी के लिए दूत पैदल ही जाकर पत्र पहुँचा देते थे।

● लंबी दूरी के लिए पक्षियों, विशेषकर कबूतरों द्वारा पत्र भेजे जाते थे।

● अति आवश्यक पत्राचार के लिए बारी-बारी से दौड़कर दूतों द्वारा पत्र पहुँचाए जाते थे। एक दूत पत्र लेकर कुछ निश्चित दूरी तक दौड़ता था। उसके बाद दूसरे संदेशवाहक को पत्र पकड़ा देता था।

● लंबी दूरी तक संदेश पहुँचाने के लिए अश्वदूत अर्थात् घुड़सवारों द्वारा भी पत्र भेजे जाते थे।

● भारत में डाक विभाग की स्थापना सन् 1854 में हुई। इसके बाद देशभर में डाकघर खोले गए। आज इस यात्रा में स्पीड पोस्ट जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।

शब्दों का फुहारा

फुहारे में दी गई शब्द पहेली को निर्देशों की सहायता से हल कीजिए -

निर्देश -
  1. 1. राजस्थान का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल
  2. 2. महाराष्ट्र की एक प्रसिद्ध गुफा
  3. 3. हैदराबाद में एक प्रसिद्ध मीनार
  4. 4. कोलकाता का एक प्रसिद्ध पुल
  5. 5. दिल्ली का एक प्रसिद्ध किला
  6. 6. आगरा का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

गोलगप्पा


भरा मटर से एक बताशा, मुँह में फूटे फक्क। खट्टा, तीखा और चटपटा, पानी निकले भक्क।


कोई इसको पिचकू बोले, कोई गोलगप्पा। दादा-दादी खाएँ मजे से, खाएँ अम्मा-बप्पा।


मुँह फैलाओ खूब बड़ा-सा, झटपट अंदर रक्खो। बड़ी सावधानी से इसका, स्वाद निराला चक्खो।


चूक गए थोड़ा-सा भी यदि, बिगड़ गया जो ढंग। खाँस-खाँस कर हाल बुरा हो, कपड़े हों बदरंग।


-लायक राम मानव