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13 हमारा आदित्य

(कक्षा में अध्यापक का आगमन और सभी विद्यार्थियों द्वारा अभिवादन)

सभी विद्यार्थी- सुप्रभात अध्यापक जी !

अध्यापक - सुप्रभात बच्चो ! पिछली कक्षा में हमने चाँद और चंद्रयान के बारे में जाना था। आज हम सूर्य के बारे में कुछ बातचीत करेंगे। क्या आप लोग जानते हैं कि सूर्य क्या है?

वाणी - अध्यापक जी! मैंने सुना है कि सूर्य सात घोड़ों के रथ पर आकाश में यात्रा करने वाला एक राजा है।

गौरव - हाँ, मैंने भी कुछ ऐसा ही सुना है।

राहुल - नहीं, सूर्य तो आग का एक गोला है !

सुमन - अध्यापक जी! सूरज एक ग्रह है।

रवि - नहीं, यह तो एक तारा है।

अध्यापक - उत्तम ! सूर्य एक तारा है। यह बहुत अधिक गरम भी है, इसलिए इसे लोग आग का गोला भी कहते हैं।

सभी विद्यार्थी - (आश्चर्य से) जी अध्यापक जी, यह बहुत गरम होगा!

ज्योति - सूरज पृथ्वी से बहुत दूर है, फिर भी कितनी गरमी देता है!

भास्कर - मुझे गरमी के मौसम में सूर्य बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता।

सुमन- मुझे भी। पर सर्दियों में तो धूप से उठने का मन ही नहीं करता। मेरी नानी तो पूरे दिन धूप में रहती हैं। उन्हें बहुत सर्दी लगती है न, इसलिए!

अध्यापक - सूर्य इतना गरम क्यों है? क्या आप सबने कभी यह सोचा है?

दिनेश - सूर्य पर हमेशा आग जलती रहती है, इसलिए।

रवि - अगर ऐसा है तो वहाँ आग किसने जलाई होगी?

धरा - आप दोनों ठीक नहीं सोच रहे हैं। सूर्य पर गरमी आग के जलने से नहीं होती बल्कि सूर्य ऐसी गैसों से बना है जो बहुत गरम होती हैं। मुझे मेरी मौसी ने एक बार बताया था।

अध्यापक - सही कहा! सूर्य मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम नाम की गैसों का एक विशाल गोला है।

साहिल - कितने बड़े नाम हैं! बोलने में भी कठिनाई हो रही है। हाई... ड्रजन... हेलम... (कुछ विद्यार्थी हँसते हैं।)

रवि - तो क्या हम चाँद की तरह सूर्य पर भी जा सकते हैं? (अध्यापक की ओर अचरज से देखते हुए)

सुमन - वहाँ कैसे जाएँगे? जो जाएगा, वह जल नहीं जाएगा!

दिनेश - सूर्य तो बहुत गरम होगा, बहुत अधिक! तभी तो वह चमकता रहता है। (आँखें बड़ी करके कहते हुए)

अध्यापक - हाँ, सूर्य तक पहुँचना आसान नहीं है। वह चंद्रमा की तरह हमारी पृथ्वी से पास नहीं है बल्कि बहुत दूर है। उसके भीतर हर समय आग जल रही है। वह कभी बुझती ही नहीं। जैसे चंद्रमा के रहस्य हैं, ठीक उसी प्रकार सूर्य के भी रहस्य हैं। इन्हीं रहस्यों का उद्घाटन करने के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल 1 का निर्माण किया है।

कुछ विद्यार्थी - (एक साथ कौतूहल से) आदित्य-एल 1!

भास्कर - यह क्या है अध्यापक जी?

अध्यापक - आदित्य तुम ही तो हो। (मुस्कुराते हुए)

भास्कर - मैं कुछ समझा नहीं, अध्यापक जी।

अध्यापक - समझाता हूँ। आदित्य का अर्थ है- सूर्य। क्या आपको पता है, इसका एक अन्य नाम 'भास्कर' भी है। इसी तरह इस कक्षा में दो और आदित्य हैं। क्या आप लोग बता सकते हैं, मैं किनकी बात कर रहा हूँ?

राहुल - जी 'दिनेश' और 'रवि'।

अध्यापक - बहुत अच्छा ! आइए, आज हम लोग आदित्य-एल 1 से मिलते हैं।

वाणी - अध्यापक जी! क्या यह चंद्रयान के प्रकार का ही तो नहीं है?

अध्यापक - हाँ, आदित्य-एल 1 चंद्रयान के प्रकार का ही एक यान है। इसका कार्य सूर्य के बारे में जानकारी जुटाना है, जैसे- यह किस समय कैसा होता है, इसके भीतर जलने वाली आग का ताप कितना है, इस ताप का प्रभाव आस-पास कैसा होता है या इसका प्रभाव हमारी पृथ्वी पर भी पड़ता है अथवा नहीं...।

पूर्वा - क्या यह सूर्य पर पहुँच गया है?

अध्यापक - सूर्य पर तो नहीं किंतु सूर्य से पर्याप्त दूरी पर रुककर इसने सूर्य के कुछ अद्भुत चित्र भेजे हैं जिन्हें यदि आप लोग देखेंगे तो देखते ही रह जाएँगे।

सुमन - अध्यापक जी, फिर भी यह सूर्य के पर्याप्त पास पहुँचकर चित्र कैसे भेज रहा है? उसकी इतनी गरमी से जल नहीं रहा?

अध्यापक - नहीं, सूर्य से आदित्य-एल 1 को कोई हानि नहीं पहुँच सकती क्योंकि यह एक सुरक्षित दूरी पर स्थित है और वह अपने स्थान से समय-समय पर उसके विभिन्न चित्र लेता रहता है।

भास्कर - यह तो एक अनन्य प्रकार का यंत्र है जो अपने को जलने भी नहीं दे रहा और इतने गरम सूर्य के चित्र भी ले रहा है!

अध्यापक - एल 1 का अर्थ है - लगरांज 1...

रवि - अध्यापक जी! लगरांज 1 क्या होता है?

अध्यापक - एल 1 अर्थात् लगरांज 1 बिंदु अंतरिक्ष का एक विशिष्ट स्थान होता है जो सूर्य और पृथ्वी के केंद्रों को जोड़ने वाली रेखा पर होता है। इस बिंदु पर सूर्य और पृथ्वी की आकर्षण शक्तियाँ इस प्रकार संतुलित होती हैं कि इस स्थान पर प्रक्षिप्त कोई भी वस्तु पृथ्वी के साथ-साथ ही सूर्य की परिक्रमा करती जाती है। हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य अंतरिक्ष यान को इसी बिंदु पर प्रक्षिप्त कर दिया है जहाँ से वह सूर्य के चारों ओर घूमता हुआ सूर्य के चित्र खींचता रहता है

दीपक - अध्यापक जी, यह तो आपने बहुत ही रोचक बात बताई परंतु इस 'लगरांज' शब्द का क्या अर्थ है?

अध्यापक - वास्तव में 'लगरांज' 18वीं सदी में इटली का एक गणितज्ञ था जिसने इस विशिष्ट बिंदु के विषय में बताया था। इसीलिए इस बिंदु को उसके नाम से जाना जाता है। उसने इस प्रकार के चार और बिंदुओं का पता लगाया था, इसलिए इन पाँच बिंदुओं को एल 1, 2, 3, 4, 5 – इन पाँच नामों से जाना जाता है।

सुमन - अच्छा, अब मैं समझ गई कि क्यों 'आदित्य' के नाम के अंत में एल 1 लगाया गया है। पर यह अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में कब भेजा गया था?

अध्यापक - आदित्य-एल 1 का प्रक्षेपण 2 सितंबर 2023 को हमारे देश के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने किया था। लगरांज बिंदु पर स्थित यह अंतरिक्ष यान लगभग 5 वर्ष तक सूर्य के चारों ओर घूमता हुआ उसके विभिन्न चित्र खींचता रहेगा जिनका अध्ययन करके हमारे वैज्ञानिक सूर्य के रहस्यों का पता लगाएँगे।

दीपक - बहुत अच्छा अध्यापक जी, इतनी मनोरंजक बातें सुनकर मुझे बहुत कौतूहल हो रहा है कि सूर्य कैसा दिखता होगा। आदित्य-एल 1 ने जो चित्र खींचे हैं, वे बहुत अच्छे होंगे। मैंने आज तक सूर्य का चित्र नहीं देखा।

अन्य विद्यार्थी - हमने भी नहीं देखा।

रफ़त - चाँद का देखा है... पृथ्वी का देखा है... चंद्रयान का देखा है... अपने बचपन का चित्र देखा है पर सूरज का तो मैंने कभी नहीं देखा।

दिनेश - मैंने तो अपने माता-पिता के बचपन के चित्र भी देखे हैं पर सूर्य का भी चित्र होता है, मुझे तो पता ही नहीं था। पिताजी ने सूर्य की ओर देखने के लिए मना किया है।

अध्यापक - सही कहा आपके पिताजी ने। सूर्य को कभी भी प्रत्यक्ष देखने का प्रयास मत करना बच्चो। यह आँखों के लिए ठीक भी नहीं है लेकिन आदित्य-एल 1 ने आप सभी की यह इच्छा सुन ली है। इसने सूर्य के ग्यारह रंगों के चित्र भेजे हैं जो देखने में बहुत सुंदर हैं। मैं उनका रंगीन चित्र भी आप सबके लिए लाया हूँ। (अध्यापक कक्षा में टैब/मोबाइल पर भिन्न-भिन्न समय पर लिए गए सूर्य के ग्यारह रंगों वाले चित्र दिखाते हैं।)

आदित्य-एल 1 द्वारा भेजे गए सूर्य के ग्यारह रंगों वाले चित्र (इसरो से साभार)

सिल्विया - ये तो सचमुच बहुत अद्भुत चित्र हैं। आदित्य यान इतने अच्छे चित्र लेता है, यह एक चमत्कार-सा लगता है। अध्यापक जी, चित्र लेने के अतिरिक्त आदित्य-एल 1 और क्या-क्या करेगा?

अध्यापक - बहुत अच्छा प्रश्न पूछा। सूर्य पर गैसों की टकराहट से बहुत विशाल विस्फोट होते हैं। इनसे बहुत सारी ऊर्जा निकलती है। जैसे धरती पर आँधियाँ आती रहती हैं, वैसे ही सूर्य की ऊर्जा से भी आती रहती हैं। सूर्य पर आने वाली आँधियों और उससे पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में आदित्य-एल 1 में लगे उपकरणों द्वारा हमें जानकारी मिलेगी।

कुछ विद्यार्थी - यह तो सचमुच बहुत अच्छा यंत्र है। (कक्षा में बातचीत होने लगती है।)

दीपक - अध्यापक जी, मुझे तो ये सब अद्भुत बातें जानकर बहुत आनंद आ रहा है। मैं तो बड़ा होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनूँगा और दूर-दूर के तारों के विषय में पदूँगा और वहाँ अंतरिक्ष यान भेजूंगा।

सुमन - अध्यापक जी, मैं भी बड़ी होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनूँगी। मुझे आज के पाठ में बहुत आनंद आया। मैं तो ऐसा अंतरिक्ष यान बनाऊँगी जिसमें बैठकर मैं एल 1 बिंदु से सूर्य को स्वयं जाकर देख सकूँ।

अन्य विद्यार्थी - हम भी ऐसा ही अंतरिक्ष यान बनाएँगे !

अध्यापक - आप सब लोग बड़े मेधावी हैं। आप बहुत अच्छे वैज्ञानिक बनेंगे, मुझे पूरा विश्वास है। पर बच्चो, अपने अंतरिक्ष यान में मुझे ले जाना मत भूलना।

बातचीत के लिए

  1. 1. आपने आकाश में अनेक तारे देखे होंगे। ऐसा कौन-सा तारा है जो हमें सुबह-सुबह जगाने का काम करता है? हमें इस तारे से कौन-से लाभ होते हैं?
  2. 2. भारत में मनाए जाने वाले ऐसे त्योहारों या मेलों के बारे में अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए जिनका संबंध सूर्य अथवा चंद्रमा से है।
  3. 3. आपने कक्षा तीन की पाठ्यपुस्तक 'वीणा, भाग 1' में चंद्रयान पर पाठ पढ़ा है न! अपने सहपाठियों को चंद्रयान के बारे में कुछ याद करके बताइए।
  4. 4. चंद्रयान-3 की सफलता के बाद सूर्य का अध्ययन करने वाले यान आदित्य-एल 1 के विषय में आपने जो भी सुना, पढ़ा या देखा है, बताइए।
  5. 5. नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और बताइए कि -
    1. (क) इसमें क्या दिखाया गया है?
    2. (ख) क्या आपने इसे कभी देखा है? इसमें कितने रंग होते हैं? अपनी लेखन-पुस्तिका में उन रंगों के नाम क्रम से लिखिए।
    3. (ग) आकाश में ऐसा कब और कैसे होता है?

पाठ के भीतर

निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर पर सूर्य का चित्र (4) बनाइए। यहाँ एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।

1. सूरज मुख्य रूप से किन गैसों का एक विशाल गोला है?

  1. (क) हाइड्रोजन
  2. (ख) नाइट्रोजन
  3. (ग) ऑक्सीजन
  4. (घ) हीलियम

2. राहुल के अनुसार सूर्य एक गोला है -

  1. (क) रुई का
  2. (ख) ऊन का
  3. (ग) आग का
  4. (घ) बर्फ का

3. आदित्य-एल 1 ने सूर्य के कितने रंगों के चित्र भेजे हैं?

  1. (क) आठ
  2. (ख) सात
  3. (ग) दस
  4. (घ) ग्यारह

4. आदित्य-एल 1 मिशन का कार्य कौन-सी जानकारी जुटाना है?

  1. (क) सूर्य किस समय कैसा होता है
  2. (ख) सूर्य के भीतर जलने वाली आग का ताप कैसा है
  3. (ग) चाँद के रहस्य जुटाना
  4. (घ) सूर्य के ताप का प्रभाव कैसा होता है

सोचिए और लिखिए

1. पाठ से बनी समझ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

  1. (क) हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल 1 का निर्माण क्यों किया?
  2. (ख) “आदित्य-एल 1 चंद्रयान के प्रकार का ही एक यान है।" अध्यापक ने ऐसा अपने विद्यार्थियों से क्यों कहा?
  3. (ग) आदित्य-एल 1 में 'एल 1' क्या है और उसका क्या कार्य है?
  4. (घ) “अध्यापक जी! मैंने सुना है कि सूर्य सात घोड़ों के रथ पर आकाश में यात्रा करने वाला एक राजा है।" वाणी ने अध्यापक से ऐसा क्यों कहा होगा?
  5. (ङ) निम्नलिखित वाक्यों में नीचे दिए गए शब्दों का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
  6. ओर, भी, ही, और, बहुत
  1. i. हम ........... बड़े होकर वैज्ञानिक बनेंगे।
  2. ii. रवि अध्यापक की ............. अचरज से देखता है।
  3. iii. आदित्य-एल 1 ने सूर्य के कुछ अद्भुत चित्र भेजे हैं, उन्हें यदि आप लोग देखेंगे तो देखते ................ रह जाएँगे।
  4. iv. भारत के ओडिशा के पुरी जिले में सूर्य देवता का एक ............... बना हुआ है। सुंदर मंदिर
  5. v. अध्यापक ने भास्कर से कहा कि इस कक्षा में दो ................. आदित्य हैं।

2. 'आदित्य' का अर्थ सूर्य होता है। इसी प्रकार आदित्य के कुछ नाम आप भी खोजकर लिखिए। नीचे एक नाम दिया गया है, शेष नाम आप लिखिए -

  1. दिनेश ....... ........ ....... ......... ....... ....... .......

अनुमान और कल्पना

1. कल्पना कीजिए कि आप वैज्ञानिक बन गए हैं और आपको सूर्य के रहस्य जानने के लिए भेजा जा रहा है, आप

  1. (क) सूर्य की गरमी से बचने के लिए किस तरह की व्यवस्था करेंगे?
  2. (ख) सूर्य से जुड़े कौन-से रहस्यों को खोजने का प्रयास करेंगे?

2. यदि आपको विद्यालय में आदित्य-एल 1 के वैज्ञानिकों से मिलने का एक अवसर मिलता है तो आप उनसे कौन-से प्रश्न पूछना चाहेंगे? कोई चार प्रश्न लिखिए -

  1. (क) .....................................
  2. (ख) .....................................
  3. (ग) .....................................
  4. (घ) .....................................

भाषा की बात

1. निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम चिह्न लगाइए-

  1. (क) यदि ऐसा है तो वहाँ आग किसने जलाई होगी ..........
  2. (ख) अध्यापक जी ........ लगरांज 1 क्या होता है ...........
  3. (ग) अच्छा .......... तभी इसका नाम आदित्य-एल 1 रखा गया है ...........
  4. (घ) जी अध्यापक जी ............... यह बहुत गरम है .............

2. शब्द-पिटारा में दिए गए शब्दों को नीचे दिए गए उनके संबंधित परिवार में लिखिए -

संज्ञा सर्वनाम विशेषण
आदित्य मुझे गरम
....... ....... .......
....... ....... .......
....... ....... .......
....... ....... .......
....... ....... .......
....... ....... .......

3. पाठ में आए 'प्रभाव', 'अभियान', 'विशाल', 'सुप्रभात' शब्दों में 'प्र', 'अभि', 'वि' और 'सु' शब्दांश उपसर्ग का कार्य कर रहे हैं तथा 'भाव', 'यान', 'शाल' एवं 'प्रभात' मूल शब्द हैं।

सरस
सचित्र

उपर्युक्त उदाहरण में 'स' उपसर्ग का प्रयोग करते हुए दो नवीन शब्द बनाए गए हैं। आप इसी प्रकार निम्नलिखित उपसर्गों की सहायता से दो-दो शब्द बनाइए -

प्र
.......
.......


अभि
.......
.......


वि
.......
.......


सु
.......
.......

4. पाठ में आया 'अध्यापक' शब्द पुल्लिंग है तथा 'नानी' शब्द स्त्रीलिंग है। इसके अतिरिक्त पाठ में आए अन्य कोई दो-दो पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्द खोजकर नीचे लिखिए -

पुल्लिंग शब्द

..............

..............

स्त्रीलिंग शब्द

..............

..............

5. नीचे दिए गए शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्द वर्ग पहेली में से ढूँढ़कर उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए -

बहुत - ....................

वाक्य - ..........................................

पुराना - ....................

वाक्य - ..........................................

प्रकाश - ....................

वाक्य - ..........................................

दूर - ....................

वाक्य - ..........................................

बड़ा - ....................

वाक्य - ..........................................

6. पाठ में 'सूर्य' शब्द का प्रयोग हुआ है। इस शब्द के अनेक नाम आपने पढ़े और सुने होंगे। इस शब्द का प्रयोग अलग-अलग प्रकार से होता है, जैसे -

  • 'सूर्य' की किरणों से हमें विटामिन डी मिलता है।
    इस वाक्य में 'सूर्य' एक तारा है।
  • 'सूर्य' हमारी कक्षा में पढ़ता है।
    इस वाक्य में 'सूर्य' एक विद्यार्थी है।

अब 'जल' तथा 'कर' शब्दों से जुड़े अलग-अलग अर्थों वाले वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

आदित्य-एल 1 और सूर्य की भेंट

यहाँ पर आदित्य-एल 1 और सूर्य के बीच बातचीत हो रही है। आप इस बातचीत को आगे बढ़ाइए -

पाठ से आगे

  1. 1. इस चित्र में क्या दिखाया गया है? अपने घर या आस-पड़ोस में आपने कभी किसी को ऐसा करते देखा है? कक्षा में अपने-अपने अनुभव साझा कीजिए।
  2. 2. सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से शरीर को कौन-से लाभ होते हैं? सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
  3. 3. दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए। यह चित्र सौर ऊर्जा का है। सौर ऊर्जा, सूर्य के प्रकाश से प्राप्त अक्षय (जो समाप्त नहीं होती) ऊर्जा है। शिक्षक के दिशा-निर्देश में कक्षा को चार समूहों मे विभाजित कीजिए। सौर ऊर्जा के बारे में जानकारी प्राप्त कर कक्षा में चार्ट पेपर पर प्रस्तुत कीजिए।
  4. 4. दिए गए चित्र को ध्यान से देखकर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
  5. (क) इस चित्र में पाँच लगरांज बिंदु दिखाए गए हैं। आपके विचार से हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य यान के स्थापन के लिए एल 1 बिंदु को क्यों चुना होगा?
  6. (ख) चित्र देखकर बताइए कि कौन-कौन से लगरांज बिंदु पृथ्वी की कक्षा (ऑर्बिट) पर हैं?

पुस्तकालय या अन्य स्रोत से

  1. 1. विद्यालय के पुस्तकालय से सूर्य के विषय में और अधिक जानकारी प्राप्त कीजिए।
  2. 2. सूर्यग्रहण क्यों लगता है? इस अवसर पर कहाँ-कहाँ मेले लगते हैं? इस विषय में अपने विद्यालय के पुस्तकालय, अभिभावकों और अन्य स्रोतों से जानकारी प्राप्त कर सहपाठियों से साझा कीजिए।

मेरी चित्रकारी

भविष्य में जब आप वैज्ञानिक बनकर किसी ग्रह की यात्रा करेंगे तो आपका यान कैसा होगा? उसका एक चित्र अपनी कल्पना से तैयार कीजिए और उसमें रंग भरिए -

हम सब सुमन एक उपवन के

हम सब सुमन एक उपवन के। एक हमारी धरती सबकी जिसकी मिट्टी में जन्मे हम, मिली एक ही धूप हमें है सींचे गए एक जल से हम। पले हुए हैं झूल-झूलकर पलनों में हम एक पवन के।

सूरज एक हमारा, जिसकी किरणें उर की कली खिलातीं, एक हमारा चाँद, चाँदनी जिसकी हम सबको नहलाती। मिले एक-से स्वर हमको हैं भ्रमरों के मीठे गुंजन के।

रंग-रंग के रूप हमारे अलग-अलग है क्यारी-क्यारी, लेकिन हम सबसे मिलकर ही है उपवन की शोभा सारी। एक हमारा माली, हम सब रहते नीचे एक गगन के।

काँटों में खिलकर हम सबने हँस-हँसकर है जीना सीखा, एक सूत्र में बँधकर हमने हार गले का बनना सीखा। सबके लिए सुगंध हमारी हम श्रृंगार धनी-निर्धन के।

- द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी