Skip to content


Screenshot 2026-01-20 141755

अध्याय 3

कथाओं का चित्रांकन

हम प्रतिदिन अनेक व्यक्तियों के संपर्क में आते हैं। प्रत्येक व्यक्ति के चलने, बोलने, हँसने, वार्तालाप करने और अपने भाव व्यक्त करने की एक भिन्न शैली होती है। आपने यह भी अवश्य ही देखा होगा कि प्रत्येक मनुष्य की छाया भी भिन्न होती है। Screenshot 2026-01-20 142522

अपने प्रिय व्यक्तियों के विषय में सोचें और यह भी विचार कीजिए कि आपको उनके साथ रहना क्यों अच्छा लगता है। उनकी प्रत्येक छोटी-बड़ी बात पर ध्यान दें, जैसे- उनका मुख, मुस्कान, केश, वस्त्र, स्वर, हाव-भाव तथा उनकी दिनचर्या के कार्य।

इस अध्याय में आप व्यक्तियों के क्रियाकलापों और उनके आस-पास की वस्तुओं को ध्यानपूर्वक देखना सीखेंगे। छाया-खेल और इमोजी के माध्यम से आप व्यक्तियों और उनके जीवन की कहानियों को चित्रित करने के नए विकल्प खोजेंगे।

गतिविधि 3.1 छाया अनुरेखन

आपने धूप में चलते समय अपनी छाया को अवश्य देखा होगा। किंतु क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि रात में सड़क पर लगी लाइट के नीचे चलते समय आपकी छाया कैसे परिवर्तित हो जाती है?

जब कोई वस्तु या जीव-जंतु किसी प्रकाश-स्रोत के सम्मुख आता है तब सतह पर उसकी छाया बनती है। कभी-कभी छाया उस वस्तु या जीव-जंतु से भिन्न दिखाई देती है जिससे वह बनी होती है।

छाया से जीव-जंतु बनाइए

◆ युग्मों में अथवा लघु समूहों में कार्य कीजिए।

◆ धूप वाले दिन बाहर जाइए।

◆ अपने हाथ फैलाकर उड़ते पक्षी की तरह झूलिए।

◆ घुटनों पर बैठकर अपने हाथों से हाथी की सूँड बनाइए।

विचार कीजिए कि आप शरीर से मोर की या रेंगते साँप की आकृति कैसे बना सकते हैं।

जब आपकी छाया किसी रोचक आकार में बने तो कुछ क्षण स्थिर रहें।

◆ इस स्थिति में आपके सहपाठी उँगलियों से, लकड़ियों से या कंकड़ों से आपकी छाया का अनुरेखन कर सकते हैं।

Screenshot 2026-01-20 151416

गतिविधि 3.2
छाया चित्रित कीजिए

नीचे दिए गए स्थान में आपके द्वारा बनाई गईं छायाओं का चित्रण कीजिए।














गतिविधि 3.3
छाया में कहानियाँ

Screenshot 2026-01-20 151513

इस पृष्ठ पर प्रदर्शित हाथों की छाया बनाने का प्रयास करें।

क्या आपने कभी रंग-बिरंगी छाया देखी है?

Screenshot 2026-01-20 152311

आप इन्हें छाया-पुत्तलिका नाटक में देख सकते हैं। यह एक प्राचीन कला है जो वर्तमान में भी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र में प्रचलित है। इन पुत्तलियों को पारंपरिक रूप से चमड़े से बनाया जाता था किंतु वर्तमान समय में इन्हें अन्य सामग्रियों से भी बनाया जाने लगा है। प्रस्तुति के समय जब प्रकाश पुत्तलियों के आर-पार जाता है तो रंगीन छायाएँ उभरती हैं जो हिलती हैं और कहानियाँ सुनाती हैं।

Screenshot 2026-01-20 152344

यदि संभव हो तो छाया-पुत्तलिका की सीधी मंच प्रस्तुति देखें। यदि यह संभव न हो तो छाया-पुत्तलिका का वीडियो देखने का प्रयास करें। निम्न बिंदुओं पर ध्यान दें और चर्चा करें-

Screenshot 2026-01-20 152750

◆ मानव शरीर को छाया-पुत्तलिका के रूप में किस प्रकार प्रस्तुत किया गया है?

Screenshot 2026-01-20 152821

◆पुत्तलियों के विभिन्न भागों को किस प्रकार जोड़ा गया है?

पूर्व में की गई गतिविधि में आपने देखा कि कैसे आप अपने शरीर से विभिन्न जीवों की छाया बनाते हैं। अब उन्हें वास्तविक चरित्रों में परिवर्तित कीजिए और एक कहानी की रचना कीजिए।

Screenshot 2026-01-20 152918

◆ पूर्व में बनाए गए छायाचित्रों को एकत्रित कीजिए।

◆उन्हें चरित्रों के रूप में विकसित कीजिए और एक छोटी कहानी बनाइए।

◆लगभग 100 शब्दों में एक कहानी की रचना कीजिए और उसे अपने मित्रों के साथ साझा कीजिए।



नीचे दिए गए स्थान में अपनी कहानी का कोई एक दृश्य चित्रित कीजिए।























गतिविधि 3.4
इमोजी बनाना

हमारी मुखाकृति हमारी भावनाओं का झरोखा है। केवल किसी की मुखाकृति को देखकर ही आप उसके मनोभावों का अनुमान लगा सकते हैं।

हँसता हुआ चेहरा आनंद का लोकप्रिय प्रतीक है। आपने भी कभी इसका उपयोग किया होगा।

इमोटिकॉन्स (Emoticons) ऐसे साधारण चित्र या चिह्न होते हैं, जो भावनाएँ व्यक्त करते हैं। आप सामान्य विराम चिह्नों का उपयोग करके इन्हें बना सकते हैं। उदाहरण के लिए, चिह्न :-) को देखिए। अब अपनां सिर बाईं ओर थोड़ा झुकाकर देखें – यह एक मुस्कुराती हुई मुखाकृति है। इसी प्रकार-

Screenshot 2026-01-20 154649 दुःखी मुखाकृति दिखाता है।

Screenshot 2026-01-20 154830 आँख मारती हुई मुखाकृति दिखाता है।

Screenshot 2026-01-20 155044जीभ निकालती हुई मुखाकृति दिखाता है।

अब नीचे दिए गए गोल घेरों में कुछ अन्य इमोटिकॉन्स बनाइए- Screenshot 2026-01-20 154628 Screenshot 2026-01-20 155149

इमोजी इमोटिकॉन्स की तुलना में अधिक व्यापक होते हैं। प्रायः ऑनलाइन संवाद में इनका प्रयोग किया जाता है।

अपने व्यक्तिगत इमोजी बनाइए-

◆एक ऐसे भाव का चयन कीजिए जो पहले से उपलब्ध इमोजी में नहीं मिलता।

◆ यह भावों का मिश्रण भी हो सकता है, जैसे - आप रुष्ट हैं किंतु हँसने ही वाले हैं; या आप मुस्कुराते हुए रो भी रहे हैं।

◆ इसमें कोई विशिष्ट हाव-भाव या क्रिया भी सम्मिलित हो सकती है जो आप किसी भावना को व्यक्त करते समय करते हैं।

आपके व्यक्तिगत इमोजी आपके व्यक्तित्व और विशिष्ट शैली को दर्शाएँगे।

Screenshot 2026-01-20 155836 नीचे दिए गए स्थान में अपने व्यक्तिगत इमोजी बनाइए।













गतिविधि 3.5
कथापट्ट का निर्माण

कथापट्ट का उपयोग किसी कहानी के भिन्न-भिन्न प्रसंगों को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह चित्रकथा (कॉमिक) के समान होता है और नाटक, ऐनिमेशन, विज्ञापन या फिल्म के छायांकन की योजना बनाने में प्रयुक्त होता है।

हम प्रतिदिन कई भावनाओं का अनुभव करते हैं। तुलना कीजिए और बताइए कि आप कैसा अनुभव करते हैं जब-

◆आप विद्यालय के लिए प्रातः शीघ्र उठते हैं।

◆ मध्याह्न भोजन में अपनी रुचि के व्यंजन देखते हैं।

◆आप परीक्षा के लिए अध्ययन करते हैं।

◆ आप मित्रों के साथ खेलते हैं।

ध्यान दीजिए, अन्य व्यक्तियों की दिनचर्या आपकी दिनचर्या से भिन्न हो सकती है। आइए एक ऐसा कथापट्ट बनाइए जो किसी अन्य व्यक्ति के दिन के चार कार्यों को दर्शाए।

◆ किसी ऐसे व्यक्ति का चयन कीजिए जिनसे आप परिचित हैं या जिन्हें आप प्रतिदिन विद्यालय जाते समय देखते हैं। वह कोई शिक्षक, परिवार का सदस्य, सब्जी विक्रेता, सुरक्षाकर्मी, बस कंडक्टर या कोई अन्य व्यक्ति भी हो सकता है।

◆कल्पना कीजिए कि उनके दिन की चार भिन्न-भिन्न गतिविधियाँ क्या हो सकती हैं। ऐसा करते समय स्मरण करें कि नृत्य और रंगमंच में शरीर कैसे विभिन्न भावनाओं को व्यक्त करता है।

अग्रिम पृष्ठ पर दिए गए प्रारूप का उपयोग करके अपना कथापट्ट तैयार कीजिए।

◆ चारों दृश्यों के लिए गतिविधियों और भावों का लेखन कीजिए।

◆ प्रत्येक दृश्य को अग्रभूमि, मध्यभूमि और पृष्ठभूमि में विभाजित कीजिए।

◆एक व्यक्ति को केंद्र में रखें और उसकी शारीरिक भंगिमाएँ, गतिविधियों अथवा क्रियाकलापों और मुखाकृति के भाव दर्शाइए।

◆ आपके द्वारा निर्मित कलाकृति में रंग भरिए।

Screenshot 2026-01-20 142328

आकलन
अध्याय 3 - कथाओं का चित्रांकन
पाठ्यचर्या लक्ष्य दक्षताएँ अधिगम प्रतिफल शिक्षक स्वयं
CG-1 C-1.1 मुखाकृति के भावों और शारीरिक मुद्राओं के माध्यम से भावनाओं और मनोभावों को दर्शाने वाली कलाकृतियाँ तैयार करते हैं।
CG-2 C-2.1 छाया खेल के माध्यम से अपनी कल्पनाओं और दृश्यों को दर्शाने वाले चित्र बनाते हैं।
CG-3 C-3.2 प्रत्येक दृश्य को क्रमबद्ध रूप से विकसित करते हुए कथापट्ट बनाते हैं।
कक्षा में पूर्ण सहभागिता करते हैं।


शिक्षक-अवलोकन

—————————

—————————

—————————

अन्य टिप्पणियाँ

—————————

—————————

—————————