कक्षा पाँच की यह पाठ्यपुस्तक बच्चों को सशक्त और प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है जिससे वे सृजनकर्ता, सहयोगी एवं कलाकार के रूप में रंगमंच का अन्वेषण कर सकें।
इस पाठ्यपुस्तक का लक्ष्य विद्यार्थियों को नाटक के अंतिम चरण तक स्वतंत्र रूप से कार्य करने हेतु प्रेरित करना है। इसके साथ ही इसका प्रयोजन विद्यार्थी में नेतृत्व को प्रोत्साहित करना है जहाँ विद्यार्थी विचार-उत्पत्ति के प्रथम चरण से लेकर प्रस्तुति के अंतिम चरण तक की प्रक्रिया में कुशलता प्राप्त कर सकें। इसमें आपकी भूमिका सुविधाप्रदाता, सहयोगी और मार्गदर्शक के रूप में है। आपका यह दायित्व है कि आप उन्हें सही दिशा में बने रहने हेतु आवश्यकतानुसार सहायता प्रदान करें तथा एक सुरक्षित एवं रोचक वातावरण प्रदान करें जहाँ वे स्वयं को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त कर सकें।
उन्हें एक दल के रूप में पटकथा-लेखन, चरित्र, वेशभूषा, मंच एवं निर्देशन का निर्णय लेने के लिए प्रेरित करें। त्रुटि होना भी सीखने की प्रक्रिया का एक भाग है। विद्यार्थियों को स्वयं नाटक संरचना एवं प्रस्तुति के लिए प्रेरित करें और समस्याओं को सुलझाते हुए उन्हें स्वयं ही प्रस्तुति के जादू को ढूँढ़ने दीजिए। शिक्षक से अपेक्षा है कि वे तब ही आगे आएँ जब विद्यार्थियों को मार्गदर्शन की आवश्यकता हो अन्यथा नेपथ्य (बैकग्राउंड) में रहकर विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को निखरने एवं पल्लवित होने का समुचित अवसर प्रदान करें।
यह प्रक्रिया रंगमंच-कौशल के अतिरिक्त जीवन-कौशल का भी निर्माण करती है, जैसे- संचार, समूह में कार्य करना, सहानुभूति और नेतृत्व।
आइए विद्यार्थियों के साथ इस यात्रा का आनंद लें और प्रत्येक चरण में उनके विकास को प्रोत्साहित करें !
ध्यान रखने योग्य कुछ बिंदु-
◆ विदूषक पारंपरिक भारतीय रंगमंच का एक अनूठा पात्र है। संस्कृत रंगमंच ने इस पात्र का उपयोग हास्य एवं हास्यात्मक परिस्थितियों वाले दृश्यों को प्रस्तुत करने के लिए किया है। यह पात्र विद्यार्थियों के लिए एक मित्र जैसा है। यह उन्हें रंगमंच में अवधारणाओं और विचारों के साथ जुड़ने में सहयोग देता है तथा उन्हें एक गतिविधि से दूसरी गतिविधि में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सूचनाओं के साथ मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। विदूषक विद्यार्थियों के लिए महत्त्वपूर्ण पाठ एवं सीख के विषय में बात करता है। रंगमंच-कक्षाओं के लिए स्वतंत्र रूप से घूमने-फिरने की सुविधा हेतु एक विशाल हवादार कक्ष होना चाहिए। यह स्वच्छ होना चाहिए और इसमें ऐसी कोई भी नुकीली व ऐसी वस्तु नहीं होनी चाहिए जिससे चोट लग सकती हो या बाधा उत्पन्न हो।
◆ कक्षा का आरंभ प्रार्थना से कीजिए और पिछली कक्षा में जो कुछ किया गया था उसका पुनरावलोकन कीजिए। प्रस्तावित प्रार्थना कक्षा 4 की पाठ्यपुस्तक में दी गई है।
| कक्षा की प्रस्तावित संरचना | ||
|---|---|---|
| 5 मिनट प्रार्थना और संक्षिप्त पुनरावलोकन | 30 मिनट कक्षा गतिविधियाँ | 5 मिनट घेरा समय |
आकलन
रंगमंच विद्यार्थियों के लिए सदैव एक सकारात्मक एवं आनंददायक अनुभव रहा है। अतः जिस प्रकार से वे कक्षा में गतिविधियों का आनंद लेते हैं आकलन भी उसी के अनुकूल होना चाहिए। आकलन की प्रक्रिया परीक्षा से जुड़े तनाव से मुक्त होनी चाहिए।
सभी आकलन गतिविधियों पर आधारित हैं। आकलन के दौरान स्मरण रखने योग्य कुछ मूलभूत बिंदु निम्नलिखित हैं-
◆ अर्जित योग्यता और कौशल पर ध्यान केंद्रित करना है।
◆ रचनात्मकता में कोई भी उत्तर सही या गलत नहीं होता है।
◆ अंतिम परिणाम या प्रस्तुति ही एकमात्र मापदंड नहीं है। गतिविधि में प्रयास, विचार और प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, साथ ही-
- ज्ञान-अनुप्रयोग
- प्रयास एवं सहभागिता
- रचनात्मकता और प्रस्तुति
- समूह में कार्य तथा सहयोग
◆ शिक्षक विद्यार्थियों में आत्म-चिंतन को विकसित करने के लिए प्रयास करें और इसे आकलन का बिंदु समझें। (रूब्रिक्स में अंतिम कॉलम दिया गया है)।
◆एक प्रेरणादायी और सहयोगी वातावरण की संरचना कीजिए, विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए जो संकोची हैं।
अत्यधिक स्पष्टता के लिए पुस्तक के आरंभ में समय आवंटन और आकलन-संबंधी अनुभाग पढ़िए।
| रचनात्मक आकलन | योगात्मक आकलन |
|---|---|
| यह एक सतत प्रक्रिया है जो संपूर्ण कक्षा-अवधि के दौरान निरंतर सक्रिय है। इसमें अलग से परीक्षा-दिवस का कोई प्रयोजन नहीं है।
1. "आइए घेरा बनाएँ।" (विद्यार्थी स्वतंत्र रूप से विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। शिक्षक प्रत्येक विद्यार्थी के विषय में समीक्षा करते हैं) 2. अध्याय के अंत में रूब्रिक दिए गए हैं। 3. शिक्षक का अवलोकन। | यह पूर्ण रूप से गतिविधि-आधारित होगा एवं वर्ष के अंत में एक निर्दिष्ट दिवस पर आयोजित किया जाना है। प्रश्न-पत्र आधारित लिखित परीक्षा का प्रावधान न हो। 1. पुस्तक के अंत में गतिविधि के उदाहरण दिए गए हैं। 2. स्तरीकरण (ग्रेडिंग) रूब्रिक्स पर आधारित होगा। 3. विद्यार्थियों के आत्म-चिंतन को समग्र अंक में सम्मिलित कीजिए। |
वाह! हमने पिछले दो वर्षों में नाट्यकला के अनेक पहलुओं पर अध्ययन किया है। अब हम तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। अब आप और अधिक अनुभवी हो गए हैं। अतः आपने अभी तक जो कुछ भी सीखा है उसे एक साथ मिलाकर आप स्वयं ही एक नाटक तैयार करेंगे।
मुझे विश्वास है कि आप ऐसा करने में सक्षम हैं और निश्चिंत रहिए मैं भी पग-पग पर आपकी सहायता, समर्थन और मार्गदर्शन करने के लिए आपके साथ रहूँगा। विदूषक आपकी सेवा में है!
शताब्दियों से हम यह मानते आए हैं कि विद्यार्थियों में अपार क्षमताएँ होती हैं। वे हमारे इतिहास, उपनिषदों और पुराणों का एक महत्त्वपूर्ण भाग हैं। क्या आपको नचिकेता, ध्रुव, लव और कुश के बारे में पता है? वे सभी आपकी आयु के थे।
यह वर्ष आपको ही समर्पित है। इस वर्ष आप अपने मित्रों के साथ मिलकर एक कहानी रच कर, नाटक का अभ्यास करेंगे, अपनी वेशभूषा और रंगमंच की सामग्री की व्यवस्था करेंगे, पूर्वाभ्यास कर प्रस्तुति देंगे और यह सब कुछ आप स्वयं ही करेंगे। आइए आरंभ करें !
अध्याय 6
दृश्य की परिकल्पना
हम सभी किसी नाटक या फिल्म के किसी विशेष भाग के दृश्यों के विषय में बात करते हैं। हम यह भी कहते हैं कि “वाह! क्या दृश्य बनाया है।” जब सड़क, विद्यालय या किसी अन्य स्थान पर कुछ विशेष घटित होता है तो उस दृश्य का नाट्यकरण कैसा होना चाहिए?
दृश्य नाटक का वह भाग है जो -
◆कहानी को आगे बढ़ाता है।
◆ एक विशिष्ट स्थान और समय पर घटित होता है।
◆ कुछ रोचक या नाटकीय होता है।
जैसा कि विदूषक ने कहा कि आप इस वर्ष एक नाटक की प्रस्तुति देंगे और आपको स्वयं ही दृश्य बनाने के अवसर भी प्राप्त होंगे। कक्षा 3 और 4 में की गई गतिविधियों के आधार पर आप इसके कुछ बिंदुओं को पहले ही सीख चुके हैं। नीचे एक सूची दी गई है। यदि आप तालिका के प्रथम स्तंभ में दी गई कुछ गतिविधियाँ पुनः करना चाहते हैं तो आपके शिक्षक कक्षा 3 और 4 की पाठ्यपुस्तकों के आधार पर आपको उन्हें करने में सहायता करेंगे।
| आप पहले सीख चुके हैं | आप क्या सीखेंगे |
|---|---|
भूमिका निभाना वार्तालाप स्थापित करना एक दृश्य की कल्पना करना - प्रवेश एवं प्रस्थान दृश्य में रंगमंच सामग्री और अभिनेताओं का समायोजन | मंच पर क्या करें और क्या न करें इसके आधारभूत विषय स्थान-निर्धारण समय-निर्धारण चरित्र-निर्धारण |
आइए, सबसे पहले मंचन के समय ध्यान रखने योग्य मूलभूत बिंदुओं पर दृष्टि डालें। ये बिंदु दर्शकों के सम्मुख आपकी प्रस्तुति में सहायता करेंगे।
मंच पर निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए
1. स्पष्ट और उच्च स्वर में बोलें - ऐसा करने से उपस्थित सभी दर्शक, यहाँ तक कि अंतिम पंक्ति में बैठे दर्शक भी आपको स्पष्ट रूप से सुन सकें।
2. भूमिका में बने रहें - यदि आप मंच पर हैं तो आप उसी पात्र की भूमिका में बने रहें जिसे आप निभा रहे हैं। यह विषय तब और अधिक ध्यान में रखा जाना चाहिए जब आप बोल नहीं रहे हों। आपका प्रवेश और प्रस्थान भी आपकी भूमिका के अनुरूप ही होना चाहिए।
3. अपने सह-कलाकारों का सम्मान करें - बोलने के लिए अपने अवसर की प्रतीक्षा करें एवं मंच पर अन्य कलाकारों का सहयोग करें। इस विषय में स्पष्ट रहें कि आपको किस स्थिति में खड़ा होना है और कहाँ चलना है, यह अन्य कलाकारों को प्रभावित किए बिना किया जाना चाहिए।
मंच पर क्या नहीं करना चाहिए
1. दर्शकों की ओर पीठ न करें - दर्शकों के सम्मुख उपस्थित होने पर थोड़ा-सा मुड़कर खड़े हों। यदि आपको पीछे की ओर जाना है तो भी दर्शकों की ओर अपनी पीठ न करें और जाते समय बोलने से बचें।
2. नेपथ्य में बात न करें - यदि आप मंच पर आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं या आपने अभी-अभी अपनी भूमिका का निर्वहन किया है तो शांत बैठें। आपके बात करने या चर्चा करने से मंच पर उपस्थित अन्य कलाकारों का ध्यान भटक सकता है।
3. दूसरे कलाकारों का दृश्य अवरुद्ध न करें - यह सुनिश्चित करें कि जब आप खड़े हों तो अन्य सभी कलाकार दर्शकों को दिखाई दे रहे हों। यह भी ध्यान रखें कि आपके समक्ष कोई ऐसा व्यक्ति या वस्तु नहीं हो जिससे आप दर्शकों को न दिखें।
यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण है कि आप भविष्य में किसी भी प्रस्तुति के लिए मंच पर 'क्या करें और क्या न करें' इन बातों का सदैव ध्यान रखें। इन्हें 'मंच शिष्टाचार' कहा जाता है। ये प्रारंभिक व्यवहार-नियम हैं जो अभिनेताओं और दर्शकों के लिए एक सुखद अनुभव बनाते हैं। इन्हें स्मरण रखते हुए विचार कीजिए कि आप एक दृश्य कैसे बना सकते हैं।
किसी दृश्य की मूल आवश्यकता होनी चाहिए कि वह दर्शकों के लिए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दे-
नाटक देखते समय दर्शकों के मन में उपर्युक्त प्रश्न अवश्य आते होंगे। आइए, अब यह समझते हैं कि हम उनका उत्तर कैसे दे सकते हैं जिससे वे कहानी को भली-भाँति समझ सकें।
1. कहाँ - स्थान-व्यवस्थापन
सबसे सरल विधि यह है कि आप अपने मंच और मंच सामग्री को इस प्रकार से व्यवस्थित करें कि वह उपयुक्त स्थान का चित्रण कर सके।
उदाहरण के लिए, कुछ कुर्सियाँ और मेज एक घर का दृश्य दर्शाएँगी। फाइलें, दस्तावेज अथवा लैपटॉप वाली टेबल एक कार्यालय का दृश्य दर्शाएँगी। वेशभूषा का उपयुक्त प्रयोग भी इसमें और गहनता लाएगा। कार्यालय के लिए औपचारिक वस्त्र होंगे जबकि उद्यान के लिए आरामदायक वस्त्र होंगे। यदि आप सभी मंच-सामग्री की व्यवस्था नहीं कर सकते तो आप क्या करेंगे? ऐसे में अभिनेताओं और उनके व्यवहार को इसका प्रतिनिधित्व करना होगा। आपकी सहायता के लिए आगे कुछ उदाहरण दिए गए हैं-
एक सब्जी बाजारआप मंच पर बड़ी गाड़ियाँ और दुकानें नहीं ला सकते। इसलिए सबसे उत्तम विधि यह है कि आप अभिनेताओं को चटाई और टोकरियाँ लेकर बैठाएँ तथा वे सब्जियों और फलों के नाम एवं उनके मूल्य बोलकर बताएँ। आप कुछ अन्य अभिनेताओं को भी इसमें सम्मिलित कर सकते हैं जो उनसे सब्जी खरीद रहे हों और पैसे दे रहे हों। अपने समूह के अनुसार आप अन्य लोगों को भी इसमें जोड़ सकते हैं, जैसे – फलवाला, गुब्बारेवाला आदि।
गतिविधि 6.1
सोचिए-कहाँ?
निर्देश - छह-सात सदस्यों के समूह बनाइए। प्रत्येक समूह को एक अलग स्थान दीजिए। आपको इसे अभिनय और कक्षा में उपलब्ध मंच-सामग्री के साथ चित्रित करना होगा। आपको 'वस्तु-के अन्य उपयोग अभ्यास' स्मरण होगा जहाँ आपने भिन्न-भिन्न दृश्यों को दिखाने के लिए एक वस्तु का उपयोग किया था। यहाँ इसका उपयोग कीजिए। आप अपने विद्यालय के बस्ते को सब्जी की बोरी में बदल सकते हैं अथवा फली और भिंडी दर्शाने के लिए पेंसिल का उपयोग कर सकते हैं। एक समूह को दिया गया स्थान दूसरों के समक्ष उजागर नहीं किया जाता। जब एक समूह प्रस्तुति करता है तो दूसरा समूह उस स्थान का अनुमान लगाता है। इसके साथ ही इसे और अधिक समृद्ध बनाने के साधनों पर चर्चा कर सकते हैं।
आधारभूत स्तर - रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप, उद्यान, कार्यालय आदि परिचित स्थानों का अभिनय किया जा सकता है।आप उस स्थान को चित्रित करने के लिए अभिनय, साधारण वेशभूषा और वार्तालाप का उपयोग कर सकते हैं। विकसित स्तर – आपको वही प्रक्रिया दोहरानी होगी परंतु इस बार आपको बिना बोले ऐसा करना होगा। आप शारीरिक भाषा, हाव-भाव और मंच-सामग्री का उपयोग कर सकते हैं।
कल्पनाशक्ति विकसित करने के लिए जंगल, समुद्र आदि जैसे अपरिचित स्थानों का भी उपयोग किया जा सकता है।
2. कब- समय-निर्धारण
किसी दृश्य में दर्शकों की रुचि के लिए समय-अवधि जैसे विवरण महत्त्वपूर्ण होते हैं। समय को दो स्तरों पर दर्शाया जाता है-
काल - ऐतिहासिक, वर्तमान या भविष्य। इसे मुख्य रूप से वेशभूषा, रंगमंच-सामग्री और भाषा का उपयोग करके दर्शाया जाता है।
समय - प्रातःकाल, संध्याकाल या रात्रिकाल की गतिविधियों को संवाद के माध्यम से दर्शाया जाता है।
आइए एक उदाहरण देखते हैं और सही विकल्प पर चिह्न लगाते हैं।
यदि आप शीघ्रता में अल्पाहार करते हुए विद्यालय में विलंब से पहुँचने की बात करते हैं तो समय है— प्रातःकाल, संध्याकाल या रात्रिकाल।
यदि आप कहते हैं कि आपका दिन बहुत थकावट भरा रहा है और बोलते समय आपको जम्हाई आती है तो समय है- प्रातःकाल, संध्याकाल या रात्रिकाल।
गतिविधि 6.2 समय का अनुमान
स्थान का चित्रण करने के लिए आपने जिस समूह के साथ कार्य किया था, उसी समूह के साथ इस गतिविधि को कर सकते हैं। अब आपको भिन्न-भिन्न समय विकल्प और परिस्थितियाँ दर्शानी हैं और दूसरे समूह आपके द्वारा दिखाए जा रहे समय का अनुमान लगाएँगे।
स्मरण रहेदृश्य रात्रि का है या संध्याकाल का आदि ऐसी सूचनाएँ दर्शकों से सीधे संवाद द्वारा या घोषणा द्वारा नहीं दी जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त यह दृश्य का ही एक भाग होना चाहिए और चरित्रों को इसे गतिविधियों या संवादों के माध्यम से प्रकट करना चाहिए।
रमेश - अरे राधा ! तुम इतनी सुबह-सुबह कहाँ जा रही हो?
यामाँ - राजू ! रात के 9 बज गए हैं। तुम्हारे पिताजी अभी तक नहीं आए हैं।
3. कौन - चरित्र-निर्धारण
मंच पर अभिनेता द्वारा ही सर्वाधिक ध्यान आकर्षित किया जाता है। अतः भूमिकाओं का निर्वहन कुशलतापूर्वक किया जाना अत्यंत आवश्यक है। चरित्र की मूल छवि वेशभूषा और मंच-सामग्री के माध्यम से दिखाई जाती है। किंतु वेशभूषा से परे भूमिका के विषय में और भी बहुत कुछ बताना आवश्यक है। दाहिनी ओर नीचे के स्थान पर दिए गए चित्र को देखिए। आप चित्र देखकर सरलता से बता सकते हैं कि यह एक व्यावसायिक महिला है जो कठिन परिश्रम करती है। कहानी के लिए यह बताना आवश्यक है कि यह महिला व्यस्त होते
हुए भी बहुत दयालु है और सदा दूसरों की सहायता करने के लिए तत्पर रहती है। आप इसके व्यक्तित्व की ये विशेषताएँ कैसे दर्शा सकते हैं? यह एक चरित्र का वास्तविक चित्रण है।
विकल्प 1- दो अन्य पात्रों के पारस्परिक संवाद में उस महिला के विषय में बात करवाएँ। उदाहरण - उसके पड़ोसी चर्चा कर रहे थे कि उसने कैसे उनके बेटे की गणित की परीक्षा हेतु सहायता की।
विकल्प 2– उसे सड़क पर एक घायल कुत्ते का उपचार करते हुए दिखाएँ।
विकल्प 3- (आप इस चरित्र को चित्रित करने का कोई अनूठा उपाय सोच सकते हैं।)
भिन्न-भिन्न भूमिकाएँ चुनिए और उन्हें दृश्य में दर्शाने के लिए भिन्न-भिन्न विधियों के विषय में समूह में चर्चा कीजिए। स्मरण रखें कि एक दृश्य में अनेक भूमिकाएँ होंगी। कोई व्यक्तित्व चिड़चिड़ा हो सकता है, कोई बहुत हास्यजनक हो सकता है आदि।
गतिविधि 6.3 वास्तविक दृश्य
आइए अब सीखी गई सभी युक्तियों का उपयोग करते हुए एक संपूर्ण दृश्य बनाते हैं। आप इस अध्याय के प्रारंभ में चयनित समूहों में कार्य करना जारी रख सकते हैं। प्रत्येक समूह एक विषय चुनता है (आपके शिक्षक द्वारा सुझाया जा सकता है), योजना बनाता है और अभ्यास करता है और इसे अन्य समूहों के सामने प्रस्तुत करता है। सुनिश्चित करें कि आपने अपने दृश्य में मंच-शिष्टाचार स्थान, समय और भूमिका-निर्धारण को सम्मिलित किया है।
◆ जिन भागों को आप विश्वसनीय ढंग से दर्शा नहीं पाए, उनमें क्या कठिनाइयाँ थीं?
◆ क्या कक्षा के अन्य विद्यार्थी यह सुझाव दे सकते हैं कि इसे किस प्रकार और अधिक समृद्ध किया जा सकता है?
आकलन
| अध्याय 6 - दृश्य की परिकल्पना | ||||
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दक्षताएँ
C-1.1- नाटक-गतिविधियों में विभिन्न दृश्यों, व्यक्तियों, स्थितियों और अनुभवों को चित्रित करने के लिए उत्साह व्यक्त करते हैं। C-1.2- नाट्यकला में सहयोगात्मक रूप से कार्य करते हुए अपने विचारों और प्रतिक्रियाओं पर चर्चा करते हैं। | ||||
| पाठ्यचर्या लक्ष्य | दक्षताएँ | अधिगम प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| CG-1 | C-1.1 | किसी दृश्य में स्थान, समय और भूमिका को चित्रित करने में सक्षम हैं। | ||
| C-1.2 | अन्य विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों पर प्रतिक्रिया साझा करते हैं। | |||
| C-1.2 | बिना किसी संकोच के गतिविधियों का प्रयास करते हैं। | |||
| C-1.1, 1.2 | सतर्कता और विस्तार पर ध्यान देते हैं। | |||
| कक्षा में पूर्ण सहभागिता करते हैं। | ||||
शिक्षक-अवलोकन
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अन्य टिप्पणियाँ———————
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