अध्याय- 8
समय, समूह और तकनीक
अब हम प्रस्तुति की तैयारी आरंभ करते हैं। अब तक आपने अलग-अलग अध्यायों, अवधारणाओं और साझा-प्रतिक्रिया के आधार पर कक्षा में प्रस्तुति दी है।
विशाल दर्शक समूह के सामने प्रस्तुति देने के क्रम में अब आपको सीखी गई तकनीकों को एक साथ उपयोग में लाने के लिए उचित योजना और प्रक्रिया बनाने की आवश्यकता है।
चरण 1- कथापट्ट और पटकथा लेखन
विभिन्न परिस्थितियों का उपयोग करके अब तक आपने कहानी बनाना सीख लिया होगा। अब आपको एक ऐसी कहानी का चयन करना है जिसे आप इस वर्ष के अंत में अभिनीत कर सकें। कक्षा में चर्चा कीजिए और एक ऐसी कहानी बनाइए जो-
कक्षा में सभी को मनोरंजक लगे। यदि यह आपको मनोरंजक नहीं लगती है तो इससे दर्शकों का मनोरंजन भी नहीं हो पाएगा।
कहानी सरल एवं संक्षिप्त होनी चाहिए। समय-सीमा पाँच से आठ मिनट की हो सकती है। सहज मंच-सामग्री तथा वेशभूषा का उपयोग करना चाहिए।
इस प्रक्रिया को रचनात्मक बनाइए। कहानी के अनुरूप ही संगीत कक्षा में अभ्यास किए हुए किसी गीत या किसी नृत्य को प्रस्तुति में समाहित करने का प्रयास कीजिए।
इसमें सभी विद्यार्थियों को सम्मिलित कीजिए। कुछ विद्यार्थी अभिनय कर सकते हैं तथा कुछ विद्यार्थी कहानी पर या मंच-सामग्री पर कार्य कर सकते हैं।
कुछ वर्ष पूर्व एक विद्यालय में एक रोचक घटना घटित हुई। आइए, मैं आपको वह कहानी सुनाता हूँ। सुनने के उपरांत बताइए कि आपने इससे क्या शिक्षा प्राप्त की?
एक बार कक्षा 5 (ख) में विद्यार्थियों के एक समूह ने 'जंगल की साहसिक यात्रा' नामक एक भव्य नाटक प्रस्तुत करने का निर्णय लिया। इसमें सब कुछ था - बोलने वाले पेड़, नाचते हुए बंदर और एक जासूस गिलहरी। वे सभी बहुत उत्साहित थे। इतने उत्साहित कि हर कोई मंच पर भूमिका निभाना चाहता था।
“मैं शेर बनूँगा”, आदित्य ने कहा। मीरा ने अपने पानी वाले नृत्य का अभ्यास करते हुए कहा, “मैं नदी बनूँगी"। निशा ने कहा, "मैं कथावाचक और तोता बनूँगी और संभवतया झरना भी बनूँगी", स्पष्ट रूप से वह किसी तरह का विश्व रिकॉर्ड तोड़ने का प्रयास कर रही थी। एक सप्ताह के मनोरंजक पूर्वाभ्यास के बाद उन्होंने सोचा कि वे तैयार हैं।
प्रस्तुति से तीन दिन पहले उनके शिक्षक ने पूछा, "प्रकाश, संगीत और मंच की व्यवस्था कौन कर रहा है? आपकी वेशभूषा कैसी रहेगी?” अचानक सन्नाटा छा गया।
वे नेपथ्य (बैकस्टेज) का सारा कार्य भूल गए थे। "जब गिलहरी को कोष मिल जाएगा तो संगीत कौन बजाएगा?” "हम पर्दे के पीछे किसी की उपस्थिति के बिना जंगल के पेड़ को कैसे परिवर्तित कर सकते हैं?”, किसी ने फुसफुसाते हुए कहा।
उन्होंने एक-दूसरे की ओर देखा। प्रत्येक के पास अभिनय करने के लिए कोई न कोई भूमिका थी। कोई भी उसे छोड़ना नहीं चाहता था।
लंबी चर्चा और वाद-विवाद के बाद उन्होंने कक्षा 5 (क) से सहायता लेने का निर्णय लिया।
पहले तो कक्षा 5 (क) ने उन्हें थोड़ा चिढ़ाते हुए कहा, “ओह, प्रसिद्ध अभिनेता भूल गए कि उन्हें किसी और समूह की भी आवश्यकता है!” अंततः वे सहायता करने के लिए तैयार हो गए।
उन्होंने सभी आवश्यकताओं और उनके समय-निर्धारण के विषय में सीखा। पर्दे खींचना, जंगल की ध्वनियाँ बजाना, मंच-सामग्री को सँभालना और बार-बार बंदर की पूँछ गिरने पर उसे ठीक करके वे प्रस्तुति के वास्तविक नायक बन गए।। प्रस्तुति के दिन जंगल की साहसिक यात्रा सफल रही। दर्शकों ने प्रसन्नता से तालियाँ बजाईं और वे बहुत हँसे। इस बार सभी ने नेपथ्य दल के लिए भी तालियाँ बजाईं।
उस दिन के बाद से कक्षा 5 (ख) के अभिनेता कभी नहीं भूले कि "मंच पर एक नाटक केवल पर्दे के पीछे के सितारों के कारण ही चमकता है।"
इससे हमने क्या सीखा? कार्य के सभी क्षेत्रों में योजना बनाना महत्त्वपूर्ण है।
चरण 2- योजना-निर्माण आइए, एक नाटक प्रस्तुत करने के लिए किए जाने वाले कार्यों की सूची बनाएँ।1.——————
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1. रूप सज्जा2.वेशभूषा
3. मंच-सज्जा
4. मंच-सामग्री
5. संगीत
6. 7.
आपके द्वारा निर्मित सूची की तुलना अन्य विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई सूचियों से कीजिए और देखिए कि क्या आपकी सूची में कुछ छूट तो नहीं गया है। प्रत्येक क्षेत्र में कार्य के प्रकार के आधार पर अपने मित्रों में उत्तरदायित्वों को बाँटिए। प्रत्येक समूह में विद्यार्थियों की संख्या कार्य की मात्रा पर आधारित होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि प्रत्येक दृश्य के लिए बहुत-सी मंच-सामग्री की आवश्यकता है तो उस समूह में अधिक सदस्यों की आवश्यकता होगी। आप उस समूह में चार या पाँच सदस्य रख सकते हैं। यदि आपके पास बहुत ही सरल और आधारभूत रूपसज्जा है, जिसे अभिनेता घर पर स्वयं भी कर सकते हैं तो आप सहायता के लिए केवल एक या दो सदस्य रख सकते हैं इत्यादि। इसी प्रकार अन्य उत्तरदायित्वों को भी बाँटिए।
आपके संदर्भ के लिए नीचे एक सूची दी गई है-
| क्रम संख्या | समूह | नाम | |
|---|---|---|---|
| 1. | कहानी एवं पटकथा लेखन | 1. 2. 3. |
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| 2. | मंच-सज्जा | 1. 2. 3. |
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| 3. | मंच-सामग्री | 1. 2. 3. |
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| 4. | रूपसज्जा | 1. | |
| 5. | वेशभूषा | 1. | |
| 6. | संगीत एवं ध्वनि-प्रभाव | |
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| 7. | अभिनय एवं नृत्य |
चरण 3- समय-सीमा
समय-सीमा योजना का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण भाग है। योजना और तैयारी के लिए उचित समय देने से प्रस्तुति की सफलता सुनिश्चित होती है। यदि आपको उचित समय-सीमा न दी जाए तो क्या होगा?
नाटक-प्रस्तुति की तिथि समीप है- पूर्वाभ्यास के लिए समय नहीं मिलेगा। वस्त्र-सज्जा और मंच-सामग्री लेने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलेगा। अभिनेता बिना अभ्यास के संवाद भूल सकते हैं।
नाटक-प्रस्तुति की तिथि दूर है-समूह की रुचि और उत्साह कम हो सकता है। बहुत अधिक पूर्वाभ्यास इसे नीरस बना सकता है। इसके साथ ही कई अन्य समस्याएँ भी आ सकती हैं, जैसे- किसी अभिनेता को नगर से बाहर जाना पड़ सकता है, कोई अस्वस्थ हो सकता है, विद्यालय में कोई नया कार्यक्रम आ सकता है जिसकी तैयारी में सभी विद्यार्थी सम्मिलित हो सकते हैं आदि। अतः न केवल प्रस्तुति के लिए ही अपितु प्रत्येक चरण के लिए समय-सीमा की सावधानीपूर्वक योजना बनानी चाहिए।
उपर्युक्त दी गई समय-सीमा मात्र एक उदाहरण है। कहानी के आधार पर आपकी सारणी में दिनों की संख्या भिन्न-भिन्न हो सकती है। योजना बनाते समय स्मरण रखें कि कम से कम 15-20 दिन पश्चात नाट्य प्रस्तुति हो। यदि प्रस्तुति की अवधि आपके विद्यालय या शिक्षक द्वारा पूर्व निर्धारित है तो आपको 20 दिन पहले से ही इस पर कार्य करना आरंभ कर देना चाहिए।
चरण 4– पूर्वाभ्यासप्रक्रिया का यह भाग सर्वाधिक समय लेता है और इसमें समूह द्वारा कठिन परिश्रम भी किया जाता है। नाट्य के पूर्वाभ्यास में एक निश्चित क्रम का पालन करना होता है जिसका विवरण निम्नलिखित है-
◆ पटकथा लेखन एवं पठन- पूरा समूह एक साथ बैठता है और प्रत्येक विद्यार्थी क्रम से कुछ पंक्तियाँ पढ़ता है। इसे अनेक बार दोहराया जाता है।
◆ चरित्र-चयन -अभिनेताओं को भूमिकाएँ सौंपना।
◆ दृश्य-रचना - प्रत्येक दृश्य के लिए कलाकारों की स्थिति और गतिविधि का निर्धारण करना।
◆ संवाद और भाव-भंगिमाओं के साथ अभ्यास -दृश्य के क्रमानुसार।
◆ पूर्ण नाटक – प्रारंभ से अंत तक अबाधित पूर्वाभ्यास। इन चरणों के लिए एक अलग समय-सीमा का निर्धारण किया जाना उपयोगी सिद्ध होगा। इससे प्रत्येक चरण समय पर सम्पन्न किया जा सकेगा।
मंच-सामग्री - मंच की साज-सज्जा के लिए गत्तों से आवश्यक वस्तुएँ बनाएँ अथवा आप अपने किसी सहपाठी अथवा मित्र की सहायता से इनकी व्यवस्था कर सकते हैं। कक्षा 3 और 4 से 'वस्तु के अन्य उपयोग अभ्यास' का स्मरण कीजिए। आशुरचना कौशल का उपयोग करें।
वेशभूषा- आपके पास उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए संभावित वस्त्रों की योजना बनाइए। आप गत्तों से मुकुट जैसी सामग्री बना सकते हैं या आप अपने किसी सहपाठी अथवा मित्र की सहायता से इनकी व्यवस्था कर सकते हैं। अपनी योजना इस प्रकार बनाइए कि वेशभूषा खरीदने या किराए पर लेने की आवश्यकता न हो।
संगीत - गत दो वर्षों में आपने जो कुछ सीखा है, उसका उपयोग आप ध्वनि-प्रभाव रचना के लिए कर सकते हैं या आवश्यकतानुसार गीतों का गायन भी कर सकते हैं।
शिक्षक-संकेत - दृश्य-निर्धारण तथा पात्र-चयन में शिक्षक की सहायता एवं सहयोग की आवश्यकता हो सकती है। जहाँ तक संभव हो विद्यार्थियों को स्वयं करने के लिए प्रोत्साहित कीजिए। शिक्षक केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही हस्तक्षेप करें।
चरण 5– प्रस्तुति आरंभ करें
जैसे-जैसे प्रस्तुति का दिन पास आता है वैसे-वैसे सभी में उत्सुकता और कहीं न कहीं घबराहट भी बढ़ती जाती है और ऐसा होना स्वाभाविक भी है। वास्तव में अनेक वर्षों से अभिनय कर रहे व्यावसायिक अभिनेता भी मंच पर आने से पहले घबरा जाते हैं। मनोविज्ञान कहता है कि यह घबराहट कभी-कभी अभिनेताओं के उत्तम प्रदर्शन में सहायक होती है। अतः आपको निरंतर कठिन परिश्रम करना है और यह सुनिश्चित करना है कि आप अपनी पंक्तियों और गतिविधियों से भली-भाँति परिचित हैं।
प्रस्तुति के दौरान घबराहट दूर करने और आत्मविश्वास बनाए रखने हेतु कुछ सुझाव -
1. पूर्वाभ्यास
घबराहट से बचने का सबसे शक्तिशाली शस्त्र पूर्वाभ्यास है। आप नाटक के प्रत्येक विवरण से जितना अधिक परिचित होंगे, नाटक उतना ही उत्तम होगा। इसलिए पूर्वाभ्यास के लिए समय निकालें। कभी समूह के साथ और कभी स्वयं ही पूर्वाभ्यास करें। इसमें अंतिम पूर्वाभ्यास भी सम्मिलित होना चाहिए है। अंतिम पूर्वाभ्यास नाटक की अंतिम प्रस्तुति की तरह होता है। घोषणा से लेकर सभी पहलुओं, जैसे – मंच-सामग्री, वेशभूषा, ध्वनि-प्रभाव, संगीत, नृत्य और नाटक की प्रत्येक वस्तु को अंतिम पूर्वाभ्यास में सम्मिलित किया जाता है। यह एक परीक्षण है। इस प्रकिया से आपको यह समझने का अवसर मिलेगा कि क्या त्रुटि हो सकती है और आपको कहाँ सुधार
करने की आवश्यकता है। आप वास्तविक दर्शकों के सामने अपनी प्रस्तुति से पूर्व अपने कुछ शिक्षकों के समक्ष प्रस्तुति देकर उन्हें स्वयं की प्रतिक्रिया और सुझाव देने के लिए कह सकते हैं।
सभी कलारूप तनाव से मुक्ति दिलाने में सहायता करते हैं। जो कला आपके चित्त को शांत रखने के लिए सहायक है, उसका चयन कीजिए। आप संगीत, नृत्य, रंगमंच और दृश्य कला सीख रहे हैं। ये सभी एक-दूसरे के पूरक हैं एवं आपके लिए लाभदायक हैं। इनमें विश्राम, तनाव व दबाव से मुक्ति, एकाग्रता एवं रचनात्मकता में वृद्धि जैसे अनेक सकारात्मक गुण विद्यमान हैं। इसके अतिरिक्त ये मन को प्रेरणा और स्फूर्ति भी प्रदान करते हैं। आइए, देखें कि हम अपनी परिस्थितियों में इनका किस प्रकार सार्थक उपयोग कर सकते हैं।
संगीत - कोई सुखद धुन गुनगुनाना या किसी आनंदमयी गीत का गायन आपको शांति दे सकता है।
नृत्य - कूदने, हाथ झटकने और नृत्य करने से घबराहट दूर होती है।
रंगमंच - अपनी आँखें मूंदकर सभी विवरणों सहित अपने दृश्यों की कल्पना कीजिए। ऐसा करने से आपके भीतर आत्मविश्वास आएगा।
दृश्य-कला - अपने कार्यों और दृश्यों के रेखाचित्र बनाइए। आपके मस्तिष्क में आने वाले विचारों को चित्रित करने के लिए आप विभिन्न रंगों का उपयोग कर सकते हैं।
ये कलारूप न केवल आपको उत्साहित रहने में सहायता करते हैं अपितु आपकी एकाग्रता में भी वृद्धि करते हैं। इसके परिणामस्वरूप एक भव्य प्रस्तुति होती है।
3. समूह संलग्नताएक-दूसरे के हाथों को पकड़कर वृत्ताकार बैठिए। धीरे-धीरे गहरी श्वास लीजिए। नाक से श्वास अंदर लीजिए और मुँह से श्वास बाहर छोड़िए। कल्पना कीजिए कि आप एक शांत कछुआ हैं। यह गतिविधि आपके हृदय की धड़कन को धीमा और मस्तिष्क को शांत करने में सहायता करती है। इसे दो से तीन बार दोहराइए। जब आप स्वयं को शांत और एकाग्र अनुभव करें तो साथ में प्रार्थना कीजिए।
नीचे दी गई प्रार्थना उपनिषद से लिया गया एक श्लोक है जो एक साथ कार्य करने के लाभ और सफलता के विषय में बताता है।
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्य करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
अर्थ-
1. हम सब मिलकर आगे बढ़ें और प्रगति करें।
2. हम सब मिलकर रसास्वादन करें और आनंद लें।
3. हम सब मिलकर उत्साह (एकाग्रता और ऊर्जा) के साथ कार्य करें।
4. हमारे द्वारा किया गया कार्य ज्ञान की ओर ले जाने वाली चमक से भरा हो और शत्रुता उत्पन्न न होने दे।
5. ॐ शांति, शांति, शांति।
इससे समूह में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होगी। स्मरण रखें कि आपके मित्र आपके साथ हैं। आप सभी मिलकर यह कार्य कर रहे हैं और प्रत्येक विद्यार्थी चाहता है कि वह सफल हो। अपने समूह पर विश्वास बनाए रखें।
4. प्रस्तुति से पूर्व ध्यान देने योग्य बिंदुअत्यधिक भोजन करने से पेट में समस्या हो सकती है। आपको भारीपन जैसा लग सकता है और नींद भी आ सकती है। जंक फूड खाने या सोडा पीने से भी प्रस्तुति के समय समस्या उत्पन्न हो सकती है। अतः प्रस्तुति से पूर्व हल्का और पौष्टिक आहार लें।
विलंब न करें
जल्दबाजी करने से आप अधिक घबरा सकते हैं। कार्यक्रम स्थल जल्दी पहुँचें और सुनिश्चित करें कि आपकी सभी वस्तुएँ व्यवस्थित हैं। स्वयं को ध्यान केंद्रित करने के लिए पर्याप्त समय दें।
कोई वीडियो गेम नहीं खेलें
स्क्रीन आपका ध्यान भटका सकती है या आपको थका हुआ अनुभव करा सकती है। कोई भी वस्तु जो आपका ध्यान भटकाती है, वह अच्छी नहीं है। आपको संपूर्ण प्रस्तुति के समय अपना ध्यान बनाए रखना होगा।
प्रस्तुति से पूर्व रात्रि को अच्छी नींद लें
प्रस्तुति के दिन अपनी शारीरिक और मानसिक ऊर्जा के स्तर को ऊँचा रखने के लिए अच्छी नींद लेना महत्त्वपूर्ण है। अच्छी नींद लेने से आपका ध्यान और स्मरणशक्ति बनी रहती है। यदि आपने अच्छी नींद नहीं ली तो आप अपनी पंक्तियाँ भी भूल सकते हैं।
यदि आपने पूरी निष्ठा से प्रयास किया है तो इसका प्रभाव अंतिम परिणाम में अवश्य दिखेगा। पूरी तैयारी और कठिन परिश्रम के साथ प्रस्तुति सफल होगी। लगभग 1000 वर्ष पूर्व सोमदेव ने अपनी लोककथाओं की पुस्तक कथासरित्सागर में कहा था-
अप्राप्यं नाम नेहास्ति धीरस्य व्यवसायिनः।
"साहसी और परिश्रमी व्यक्ति के लिए कुछ भी अप्राप्य नहीं है।"
आपके लिए कौन-सा चरण सबसे अधिक आनंददायी था और कौन-सा चरण सबसे अधिक कठिन था?
क्या आप और आपके मित्र अपनी बनाई योजना पर दृढ़ रहे ?
आपको योजना में कौन-से परिवर्तन करने पड़े और क्यों?
क्या नेपथ्य का कार्य और मंच पर अभिनय, दोनों एक जैसे हैं? किस कार्य में अधिक परिश्रम और प्रयास की आवश्यकता होती है?
आकलन
| अध्याय 8 – समय, समूह और तकनीक - | ||||
|---|---|---|---|---|
| दक्षताएँ
C-3.1 - नाट्य कला में प्रयुक्त सामग्री, उपकरण और तकनीकों के साथ कार्य करते समय चयन करना। C-3.2- व्यक्तिगत और सहयोगात्मक रूप से नाटक बनाते समय योजना बनाने, क्रियान्वयन करने और प्रस्तुति करने के चरणों का अभ्यास करना। | ||||
| पाठ्यचर्या लक्ष्य | दक्षताएँ | अधिगम प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| CG-2 | C-3.1 | कहानी में संगीत और नृत्य को सम्मिलित करने की संभावनाओं का पता लगाते हैं। | ||
| C-3.1 | योजना और समय-सीमा में विचार की स्पष्टता प्रदर्शित करते हैं। | |||
| C-3.2 | नेपथ्य के तत्वों को महत्त्व देते हैं। | |||
| C-3.1, 3.2 | नियोजन चरणों के लिए सहमति पर पहुँचने हेतु समूह के साथ चर्चा करते हैं। | |||
| C-3.2 | विभिन्न कलाकारों और तकनीकी समूह के साथ पूर्वाभ्यास की योजना बनाने पर कार्य करते हैं। | |||
| C-3.2 | दृश्य को वास्तविक बनाने के लिए सहज रूप से मंच-सामग्री, ध्वनि आदि का उपयोग करते हैं। | |||
| C-3.2 | कक्षा में पूर्ण सहभागिता करते हैं। | |||
शिक्षक-अवलोकन
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अन्य टिप्पणियाँ———————
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