अध्याय 9
देखें और समीक्षा करें
रंगमंच कलाकार के रूप में आप किसी भी क्षेत्र में कार्य करने में रुचि रख सकते हैं, जैसे- पटकथा लेखन, वेशभूषा तैयार करना, अभिनय इत्यादि। आप चाहे जो भी कार्य करें, नाटक एवं अन्य प्रस्तुतियाँ देखना अत्यंत आवश्यक है। चूँकि अब आप स्वयं योजना बना सकते हैं और प्रस्तुति दे सकते हैं, अत: अन्य व्यक्तियों की प्रस्तुतियाँ देखकर आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।
आप न केवल यह ज्ञात कर सकते हैं कि उन्होंने मंच-सामग्री, रूप-सज्जा, वेशभूषा, संगीत और अभिनय के तकनीकी पहलुओं की योजना कैसे बनाई है अपितु विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं, ऐतिहासिक नायकों आदि के विषय में भी और अधिक सूचनाएँ प्राप्त कर सकते हैं।
अगले पृष्ठ पर हमारे देश भर में प्रचलित कुछ लोक नाट्य-परंपराओं की सूची दी गई है। आपके नगर या कस्बे में जब भी इन लोक नाट्यों का आयोजन हो तो इन्हें देखना न भूलें।
विदुषक के साथ छुट्टियाँ
◆ भवई (गुजरात) - मुक्ताकाशी मंच में किए जाने वाले नाट्य कार्यक्रम हैं जो सामाजिक मुद्दों को दर्शाते हैं।
◆तमाशा (महाराष्ट्र) - यह गायन, नृत्य और हास्य का मिश्रण है। यह लावणी के लिए प्रसिद्ध है।
◆ गरबा रंगमंच (गुजरात)- नवरात्रि के समय नृत्य-आधारित प्रस्तुतियाँ हैं, कभी-कभी इनमें नाटकीय कहानियाँ भी होती हैं।
◆ यक्षगान (कर्नाटक)- यह महाकाव्यों पर आधारित शास्त्रीय संगीत, संवाद और नृत्य का मिश्रण है।
◆ थेरुकुथु (तमिलनाडु)- इसका शाब्दिक अर्थ है 'नुक्कड़ नाटक'। इसमें कहानी सुनाने और नृत्य का प्रयोग किया जाता है।
कुटियट्टम (केरल)- यह प्राचीन संस्कृत रंगमंच रूप है। इसे पारंपरिक रूप से मंदिरों में शैलीगत अभिनय के साथ प्रस्तुत किया जाता है।
◆नौटंकी (उत्तर प्रदेश) - यह कहानी, संगीत और नृत्य का मिश्रण है जो अस्थायी मंचों पर प्रस्तुत किया जाता है।
◆ स्वांग (हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश)- अनुकरण, संवाद, हास्य एवं गायन के आधार पर इसे प्रस्तुत किया जाता है।
◆भांड पाथेर (कश्मीर) - भांड समुदाय द्वारा नृत्य, नाटक और मूकाभिनय का प्रयोग करते हुए प्रस्तुत किया जाता है।
◆ जात्रा (पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम)- यह नाटकीय कथानक और सीधी संगीत प्रस्तुति के साथ यात्राशील रंगमंच है।
◆अंकिया नाट (असम)- यह नृत्य और संगीत पर आधारित भक्तिपूर्ण एकांकी नाटक है।
◆ छऊ (ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल) – यह युद्ध कला और कहानियों के साथ अर्ध-शास्त्रीय प्रस्तुति है।
गतिविधि 9.1
नाट्य विधाओं का मानचित्रण
विदूषक अखिल भारतीय यात्रा पर है। आइए, हम भी उनके साथ यात्रा करें और भारत के सभी रंगमंच रूपों के विषय में सीखें।
रंगमंच के स्वरूप का नाम उसके राज्य के नाम से मिलाइए और उसे मानचित्र पर लिखिए। संकेत – रंगसूत्र का पालन कीजिए। अपने राज्य के रंगमंच स्वरूपों के और अन्य नाम सम्मिलित कीजिए।
जब आप कोई प्रस्तुति देखते हैं तो क्या करते हैं? आपके मन-मस्तिष्क में क्या विचार आते हैं? क्या ये विचार अधिकतर कहानी और भूमिकाओं के विषय में होते हैं या आप यह भी सोचते हैं कि उन्होंने इस प्रस्तुति के लिए किस प्रकार पूर्वाभ्यास और तैयारी की होगी?
रंगमंच के विद्यार्थी के रूप में आप न केवल प्रस्तुति करते हैं अपितु अन्य प्रस्तुतियों के लिए अच्छे दर्शक भी बनते हैं। प्रतिक्रिया और समीक्षा साझा करने की विधि के विषय में नीचे कुछ संकेत दिए गए हैं-
ध्यानपूर्वक देखिए-प्रस्तुति के समय पूर्ण रूप से एकाग्रचित्त रहें। मंच पर उपस्थित छोटी से छोटी मंच-सामग्री से लेकर वस्त्र, संगीत और अभिनय तक प्रत्येक छोटी-बड़ी सूचना पर ध्यान दें।
कहानी और कथानक को समझिए - यदि आप कहानी को नहीं समझते हैं तो शेष पक्षों का भी कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। आपको कहानी और कथानक को समझना होगा और एक संक्षिप्त सारांश भी लिखना होगा।
दर्शकों की प्रतिक्रिया पर ध्यान दीजिए-
क्या आपके साथ अन्य दर्शक भी नाटक पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं? क्या हास्य के दृश्य में वे हँसते हैं? जब अच्छी प्रस्तुति होती है तो क्या वे ताली बजाते हैं या फिर नाटक के समय पूरी तरह से ऊब जाते हैं?
विशिष्ट बिंदुओं की सूची - आपने जो कुछ भी देखा उनके विशिष्ट बिंदुओं की सूची बनाइए। प्रस्तुति के पश्चात आप उन्हें विस्तार में लिख सकते हैं। यदि आप इन्हें शीघ्र नहीं लिखेंगे तो आप बाद में उसे भूल सकते हैं या ये बिंदु आपसे छूट भी सकते हैं। अतः सदैव एक नोटपैड और एक पेंसिल साथ रखें।
आपका विचार -प्रत्येक प्रस्तुति के सकारात्मक और नकारात्मक बिंदु होते हैं। प्रस्तुति के विषय में अपने अनुभव साझा कीजिए। आपमें से प्रत्येक के विचार भिन्न-भिन्न हो सकते हैं और यह स्वाभाविक है। किंतु अपने विचार सावधानीपूर्वक साझा करें। सकारात्मक बिंदुओं को प्रशंसा के साथ साझा करें और नकारात्मक बिंदुओं को इस प्रकार साझा करें कि इनसे कलाकार की भावनाएँ आहत न हों अपितु उन्हें अगली बार और अधिक उत्तम प्रस्तुति के लिए प्रेरित करें। यह मनोरंजक खेल आपको अपने समीक्षा कौशल को और अधिक उत्तम बनाने में सहायता करेगा।
गतिविधि 9.2
समीक्षा कोना
तीन से पाँच सदस्यों के छोटे-छोटे समूह बनाइए। (यदि कक्षा में 30 विद्यार्थी हैं तो आपके पास लगभग 6 समूह बनेंगे)। प्रत्येक समूह को अपनी रुचि की एक सरल स्थिति पर तीन
मिनट की प्रस्तुति तैयार करनी है। उदाहरण के लिए, समूह 1 को दुकानदार के साथ एक रोचक घटना प्रस्तुत करनी है, समूह 2 पड़ोस में पानी की समस्या की स्थिति बता सकता है इत्यादि।
प्रत्येक समूह बारी-बारी से प्रस्तुति देता है। जब एक समूह अपनी प्रस्तुति देता है तो अन्य पाँच समूह विशिष्ट नामों से चिह्नित पाँच भिन्न-भिन्न स्थानों पर समूहों में बैठते हैं।
प्रत्येक समूह के सदस्य केवल निर्धारित क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हैं और उस पर टिप्पणी प्रस्तुत करते हैं। प्रस्तुति देने वाला समूह प्रस्तुति की समाप्ति के बाद समूह-1 में बैठता है और अन्य समूह अगले समूह की ओर स्थानांतरित हो जाते हैं। प्रत्येक समूह प्रस्तुति करने वाले समूह के साथ अपनी समीक्षा भी साझा करता है।
इस गतिविधि के प्रतिफल◆प्रत्येक समूह को विभिन्न क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने और समीक्षा करने का अवसर मिलता है।
◆ प्रत्येक समूह यह समझता है कि उनकी प्रस्तुति का दर्शकों पर क्या प्रभाव पड़ा।
◆ इस गतिविधि से यह समझ प्राप्त होती है कि प्रशंसा कैसे की जाए और आलोचनात्मक पहलुओं को सकारात्मक रूप से कैसे प्रस्तुत किया जाए।
आपने जो सीधी प्रस्तुति देखी है, उसके लिए भी यही अभ्यास कीजिए। यद्यपि आपके सामने प्रस्तुति नहीं है, फिर भी आप वही श्रेणियाँ बना सकते हैं और प्रस्तुति के समय आपके द्वारा लिखी गई टिप्पणियों के आधार पर अपने विचार और सुझाव लिख सकते हैं।
क्या आप जानते हैं? 'आइए घेरा बनाएँ' गतिविधि एक प्रकार का समीक्षा अभ्यास है। आप सभी इस पर सदैव कार्य करते रहे हैं और अब आप इसका उपयोग कर सकते हैं।
तुलना करें और सीखें
तुलना सामान्यतः दो समान वस्तुओं के बीच की जाती है। हम शिमला के सेबों की तुलना कश्मीरी सेबों से कर सकते हैं। यद्यपि हम सेबों की तुलना संतरों से नहीं कर सकते।
जैसा कि आप सभी ने स्वयं नाटक प्रस्तुत करने का अनुभव किया होगा और किसी दूसरे समूह की प्रस्तुति को
देखा भी होगा तो क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि इन दोनों प्रस्तुतियों की तुलना की जा सकती है? आइए, पहले समझते हैं कि दोनों प्रस्तुतियाँ कितनी सामान्य या भिन्न थीं।
फिर आप इस विषय में एक लेख लिख सकते हैं कि आपने क्या अनुभव किया और क्या सीखा।
| समानताएँ | असमानताएँ |
|---|---|
| (उदाहरणार्थ) हास्यस्पद | कहानी (पुराणों पर आधारित वर्तमान समय की प्रस्तुति) |
| (उदाहरणार्थ) नृत्य | अभिनेताओं की संख्या (अन्य समूह-5; हम-12) |
आकलन
| अध्याय 9- देखें और समीक्षा करें | ||||
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दक्षताएँ
C-4.1- प्रकृति में नाटक और गति के तत्वों को पहचानते हैं और उनकी कलात्मकता का वर्णन करते हैं। C-4.2- स्थानीय कलारूपों और संस्कृति के प्रति जिज्ञासा प्रदर्शित करते हैं। |
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| पाठ्यचर्या लक्ष्य | दक्षताएँ | अधिगम प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| CG-4 | C-4.1 | एक दर्शक के रूप में अपनी भूमिका से संबंधित विभिन्न तत्वों की पहचान कर सकते हैं। | ||
| C-4.1 । | सामग्री और तकनीक के आधार पर दूसरों के कार्यों पर प्रतिक्रिया देते हैं | |||
| C-4.2 | अपने राज्य के परिचित लोकरूपों को पहचानते हैं। | |||
| C-4.2 | अन्य कलारूपों को जानने में जिज्ञासा प्रदर्शित हैं। | |||
| C-4.2 | अपने नाटक और देखे गए नाटक के बीच समानताएँ एवं असमानताएँ सूचीबद्ध करते हैं। | |||
| कक्षा में पूर्ण सहभागिता करते हैं। | ||||
शिक्षक-अवलोकन
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अन्य टिप्पणियाँ———————
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योगात्मक आकलन| आकलन के लिए गतिविधि (उदाहरण) | आकलन के लिए मापदंड | |
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| व्यक्तिगत | विद्यार्थियों को तीन स्थितियाँ अवगत कराने के लिए कहा जाएगा। इन्हें जोड़कर एक सार्थक कहानी का निर्माण करना है और गतिविधियों और भावों के साथ इस कहानी को सुनाना है। | संचार (मौखिक और गतिविधि), आत्मविश्वास, रचनात्मकता त्वरितपरता प्रदर्शित करते हैं। |
| सामूहिक | एक नाटक चार सप्ताह में प्रस्तुत करने के लिए एक स्थिति दी जाती है। समूह कथापट्ट से लेकर अंतिम प्रस्तुति तक एक स्पष्ट चरण-दर-चरण योजना तैयार करते हैं। | आयोजन, विचार की स्पष्टता और सहयोग करते हैं। |
हम एक और वर्ष के अंत तक पहुँच चुके हैं!
जब आपने तीन वर्ष पूर्व आरंभ किया था तो आप संकोची और जिज्ञासु थे और सोचते थे कि रंगमंच का अर्थ केवल रोचक वेशभूषा धारण करना और ऊँची आवाजें निकालना है। किंतु अब आप वास्तविक कलाकारों की तरह अपनी अभिव्यक्ति कर सकते हैं, चल सकते हैं, बोल सकते हैं और सुन सकते हैं। आपने त्रुटियाँ की हैं परंतु साथ ही आनंदित भी हुए हैं और यही इसकी सार्थकता है। भले ही आप खिलाड़ी बनें, चिकित्सक बनें या मेरी तरह विदूषक (बहुत प्रतिष्ठित नौकरी, ध्यान रहे!)
बनें, स्मरण रखें कि संसार आपका मंच है और आपका हृदय आपकी पटकथा है।
नन्हे सितारों। प्रणाम स्वीकार करो।
पर्दा गिर गया... यद्यपि आपकी प्रस्तुति आरंभ हो गई!
आइए हम अपनी रंगमंच यात्रा को प्रतिदिन जारी रखें।
शुभं भूयात्।
