अध्याय 11
कण-कण में संगीत
आपने कक्षा में संगीत और ध्वनि के विषय में बहुत कुछ सीखा है और आपने बहुत से गीत भी सीखे हैं। आइए अब यह जानने का प्रयास करते हैं कि संगीत हमारे दैनिक जीवन का एक भाग कैसे है।
गतिविधि 11.1 क
कण-कण में संगीत सारणी
अपनी दैनिक गतिविधियों की एक सारणी बनाइए। उन स्थानों और समय को चिह्नित कीजिए जहाँ आपका विभिन्न ध्वनियों और संगीत से साक्षात्कार होता है। आपकी सुविधा के लिए एक उदाहरण दिया गया है। आप चाहें तो उसे और अधिक रचनात्मक बना सकते हैं।
गतिविधि 11.1ख सारणी साझा कीजिए
अपनी सारणी को अपने किसी सहपाठी के साथ साझा कीजिए और उनकी सारणी को भी देखिए। पता लगाइए कि दोनों सारणियों में क्या समानताएँ हैं।
क्या आप प्रतिदिन संगीत सुनते हैं? क्या ऐसा कोई स्थान है जहाँ आप संगीत सुनना चाहेंगे?
| समय | प्रातः 7 बजे ![]() |
प्रातः 7:15 बजे ![]() |
| स्थान | बिस्तर | घर |
| आयोजन | घंटी | रेडियो पर प्रार्थनाएँ |
| ध्वनि या संगीत | ध्वनि | संगीत |
| यह मुझे कैसा अनुभव कराता है | चिड़चिड़ा | शांत |
सांगीतिक शब्दावली
नीचे कुछ संगीत से संबंधित शब्द दिए जा रहे हैं जो आपको ध्वनि और संगीत को भली-भाँति वर्णित करने में सहायता करेंगे।
तारता - यह दर्शाता है कि ध्वनि ऊँची है या धीमी।
राग - कुछ स्वरों द्वारा व्यवस्थित क्रम से बनी धुन।
ताल - गति की व्यवस्थित संरचना को ताल कहते हैं।
लय – यह सांगीतिक कृति की चाल होती है जो धीमी या तीव्र होती है और समय को नापते हुए गायी जाती है।
हारमनी – वह ध्वनि जो विभिन्न स्वरों को एक साथ गाने या बजाये जाने पर उत्पन्न होती है।
नाद की जाति - किसी विशेष ध्वनि की गुणवत्ता तथा वह गुण जो एक स्वर या वाद्य को एक-दूसरे से भिन्न बनाता है।
गतिविज्ञान - यह ध्वनि की तीव्रता को दर्शाता है- कोई वस्तु तीव्रता से बज रही है या धीरे से।
गतिविधि 11.2
अपने आस-पास की ध्वनि रिकॉर्ड करना
अपनी सारणी और अपने सहपाठी की सारणी देखकर ज्ञात कीजिए कि आपने अपने आस-पास कितनी बार ध्वनि और संगीत को सुना।
यदि संभव हो तो अपने आस-पास की कुछ ध्वनियाँ रिकॉर्ड कीजिए।आपने संगीत से संबंधित जो शब्द सीखे हैं, उनका उपयोग इन ध्वनियों की विशेषताओं को बताने के लिए करें।
प्रसंग के लिए गीत
आगे दिए गए दोनों गीत भारत के विभिन्न भागों से संबंधित हैं। आइए, इन्हें गाकर सीखें-
रचनाकार - महाकवि वल्लथोल नारायण मेनन
भाषा - मलयालम
पोरा पोरा नालील दूरा-दुरा मुयारहे
भारथाक्षमा देवियूडे त्रीप्पाथाककल
अकाशा पोइकाईल पुतुताकुम अलयीलाकट्टे।
लोका बंधु गतिकूट्टा मार्गम काट्टट्टे
एकी भविचोरूंगी एकोदरा जातर नम्मल।
कैई कज़ुकी तुड़ाक्कूकि कोडियेडूक्कान
नम्मल नूट्टा नूलूक्कोंडुम नम्मल नेईता
वस्त्रम कोंडुम
निर्मिता मिता नीतीक्कोरंन्ध्यावरणम्
कृतृस्तारा नम्मुडेयी निथ्या स्वतान्द्रालता
सत्याकोडिमरत्तिमेल समशोभिक्कट्टे।
गीत का सारांश-
'पोरा पोरा' गीत ध्वज का वर्णन करता है। इस गीत में वल्लथोल अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं कि हमारा ध्वज सदैव ऊँचा रहे। वल्लथोल एक देशभक्त थे और उन्होंने कई राष्ट्रवादी कविताएँ भी लिखीं। इनकी कविताओं ने हजारों भारतीयों को भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित किया था।गीत - चंबा कितनी दूर पारंपरिक भाषा - हिमाचली
माए नि मेरीए शिमले दी राहें,
चम्बा कितनी दूर हाय
माए नि मेरीए शिमले दी राहें,
चम्बा कितनी दूर
शिमले नि वसना, कसौली नि वसना
शिमले नि वसना, कसौली नि वसना,
चम्बा जाणा जरुर चम्बा जाणा जरुर
लाईयां मोहब्बतां दूर दराजे
लायां मोहब्बतां दूर दराजे
अखियों तो होया कसूर हाय
अखियों तो होया कसूर
चम्बा जाणा जरुर हाय चम्बा जाणा जरुर
गीत का सारांश -
यह प्रकृति और प्रेम पर आधारित हिमाचल प्रदेश का पहाड़ी लोकगीत है।
आकलन
| अध्याय 11 - कण-कण में संगीत | |||
|---|---|---|---|
| दक्षताएँ | अधिगम प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| C-4.1 | तारता और लय जैसी शब्दावली का उपयोग करके संगीत का वर्णन करते हैं। | ||
| C-2.2 | विभिन्न गीतों के विषय और भावों को समझते हैं। | ||
| C-2.1 | एकल और समूह में विभिन्न गीतों का अभ्यास और प्रदर्शन करते हैं। | ||
शिक्षक-अवलोकन
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अन्य टिप्पणियाँ———————
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