अध्याय 15
नृत्य के विभिन्न रंगों में मेरी दिनचर्या
प्रिय शिक्षक,
1. कृपया विद्यार्थियों के लिए विशाल एवं हवादार स्थान उपलब्ध कराएँ।
2. शिक्षणशास्त्र निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित है-
- क्षेत्रीय प्रथाओं के अनुसार विभिन्न नृत्य सीखना।
- देश के अन्य क्षेत्रों के नृत्यों के विषय में सीखना।
- भावनाओं को व्यक्त करना और उन्हें व्यक्त करने में सहज होना सीखना।
- अंग संचालन से गति और भावना को समझना।
- संचालन के अभ्यास में सामंजस्य के महत्त्व को समझना।
- नृत्य के विभिन्न तत्वों को एक साथ लाने के लिए रचनात्मकता का प्रयोग करना।
3. आकलन के लिए आगे दिए गए पाठ्यचर्या लक्ष्यों, दक्षताओं और अधिगम प्रतिफलों पर ध्यान दीजिए।
4. विद्यार्थियों के प्रयासों, नवीन अवधारणाएँ सीखने के प्रति उनके दृष्टिकोण, भावनाओं और अभिव्यक्तियों के साथ सहानुभूति प्रदर्शित करने, साझा करने और सहयोग करने की इच्छा पर ध्यान केंद्रित कीजिए।
पाठ्यचर्या लक्ष्य और दक्षताएँ निम्नलिखित हैं।
CG-1 मानवीय अनुभवों को समझने के लिए आत्मविश्वास विकसित करते हैं और कला के माध्यम से उसे व्यक्त करते हैं।
C-1.1 जिन नृत्यों और गतियों से वे परिचित हैं, उनका अभ्यास और प्रदर्शन करने के लिए उत्साह प्रकट करते हैं।
C-1.2 समूह में कार्य करते हुए विचारों और प्रतिक्रियाओं पर चर्चा करते हैं।
CG-2 कला में स्वतंत्र रूप से कल्पना और रचनात्मकता को व्यक्त करते हैं।
C-2.1 दैनिक क्रियाकलापों और व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित नृत्यों और गतियों के क्रम बनाते हैं और उनका अभ्यास करते हैं।
C-2.2 कक्षा में सिखाए गए विविध नृत्यों और गति शैलियों, तालों, मुद्राओं, प्रसंगों और अभिव्यक्तियों में तुलना एवं अंतर करते हैं।
CG-3 कला में मूल प्रक्रियाओं, सामग्रियों और तकनीकों को समझने का प्रयास करते हैं।
C-3.1 नृत्य एवं गति में प्रयुक्त पद गति, वाद्ययंत्रों, वेशभूषा एवं व्यवस्थाओं को सीखते हुए रुचि संवर्धित करते हैं।
C-3.2 प्रस्तुति के लिए नृत्य एवं गतियों के क्रम को चुनते समय अपने विचार साझा करते हैं और पूर्वाभ्यास में सहभागिता करते हैं।
CG-4 अपने परिवेश में सौंदर्य को जानने-समझने का प्रयास करते हैं और स्थानीय कलारूपों और सांस्कृतिक परंपराओं में रुचि विकसित करते हैं।
C-4.1 नृत्य और गतियों के तत्वों के स्वरूप और कलात्मक गुणों को पहचानकर वर्णन करते हैं।
C-4.2 स्थानीय कलारूपों और संस्कृति के प्रति जिज्ञासा प्रकट करते हैं।
अध्याय 15 नृत्य के विभिन्न रंगों में मेरी दिनचर्या
आशा है कि नृत्य अब आपके जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया होगा और आपको प्रत्येक दिन कुछ नया सीखने में आनंद आ रहा होगा। आपने पिछली कक्षाओं में अनेक विधियों से नृत्य सीखा है, जहाँ आपने नृत्य की गतियों को दैनिक जीवन की गतिविधियों के साथ जोड़कर देखा।
गतिविधि 15.1 आइए नृत्य करें
छुट्टियों के बाद आप वापिस आ रहे हैं तो चलिए एक स्वागत नृत्य की परिकल्पना हो जाए। ऐसा संगीत या गाना बजाइए, जो आपकी रुचि का हो और आप सभी कक्षा के साथियों के साथ उस पर नृत्य कर सकें। इस नृत्य में आप पिछली कक्षाओं में सीखे गए उपयुक्त पद संचालन, हस्त-मुद्राएँ (हस्तक) और गतियों को सम्मिलित कीजिए।
इस गतिविधि को पूर्ण करने के बाद आप कैसा अनुभव कर रहे हैं? क्या यह उससे भिन्न है जो आप प्रायः करते हैं?
गतिशीलता और स्थिरता
दैनिक क्रियाकलापों में कुछ ऐसी गतिविधियाँ होती हैं जिनमें आप गति करते हैं और कुछ गतिविधियाँ ऐसी होती हैं जिनमें आप गति नहीं करते। आपकी गतिविधि एक स्थिर बिंदु से मिलकर बनती है जहाँ से आप गति करना प्रारंभ करते हैं और फिर रुकने की मुद्रा में वापस आ जाते हैं। आइए आनंददायी गतिविधियों से आरंभ करें और देखें कि वे नृत्य की गतियों से कैसे जुड़ती हैं।
गतिविधि 15.2 मूर्ति खेल (स्टैचू गेम)
क्या आप मूर्ति का खेल खेलने के लिए तैयार हैं? आप पहले जिन गतियों, स्थिरता और भावों का अभ्यास कर चुके हैं, आइए उन्हें एक साथ जोड़ते हैं।
आपको संगीत की धुन पर नृत्य करना है। जैसे ही आपको शिक्षक से ध्वनि संकेत प्राप्त हो वैसे ही आप नृत्य मुद्रा में मूर्ति बन जाइए। यदि कोई विद्यार्थी नृत्य मुद्रा में मूर्ति ना बन पाए तो उसे शिक्षक से एक पर्ची लेनी होगी जिस पर एक भाव लिखा होगा। विद्यार्थी को उस भाव को अभिनय द्वारा दर्शाना होगा।
गतिविधि 15.3 दैनिक जीवन में हस्त-मुद्राएँ
जाने-अनजाने में आप अपनी दैनिक गतिविधियों में नृत्य से संबंधित हस्त-मुद्राओं का उपयोग करते हैं। आप पशुओं से संबंधित हस्त-मुद्राओं से भी परिचित हैं। आइए, अब नृत्य में उपयोग की जाने वाली अन्य हस्त-मुद्राओं के विषय में जानें जो सामान्यतः दैनिक जीवन में देखी या उपयोग की जाने वाली विभिन्न वस्तुओं का प्रतीक हैं।
पिछले पृष्ठ पर दिखाई गई हस्त-मुद्राओं को देखिए। नृत्य में उपयोग की जाने वाली विभिन्न हस्त-मुद्राएँ संवाद करने एवं कहानियों के अर्थ व्यक्त करने की प्रभावशाली विधियाँ हैं। विचार कीजिए कि आप इन हस्त-मुद्राओं का उपयोग कहाँ कर सकते हैं? संभवतः जब आप नृत्य करते हैं, अपने मित्रों के साथ खेलते हैं या दैनिक गतिविधियों में मौज-मस्ती के लिए हस्त-मुद्राओं का उपयोग करते हैं। हस्त-मुद्राओं के उपयोग के लिए नीचे दिए गए उदाहरणों को देखिए।
निम्नलिखित हस्त-मुद्राओं का उपयोग आप दैनिक जीवन में किस प्रकार करेंगे -
◆शिखर ———◆अर्धचंद्र ———
◆सूची ———
◆चतुरा ———
◆संपुटा ———
◆पुष्पपुता ———
◆शिवलिंग ———
◆चक्र ———
◆ शंका ———
अब आप में से प्रत्येक विद्यार्थी सीखी हुई हस्त-मुद्राओं में से कम से कम एक हस्त-मुद्रा का उपयोग करते हुए एक वाक्य बनाइए और देखिए कि क्या आपके सहपाठी अनुमान लगा पाते हैं कि आप क्या कह रहे हैं।
गतिविधि 15.4
नृत्य में हाथों की स्थिति
क्या आपने देखा है कि नृत्य में हाथ विभिन्न प्रकार से घूमते हैं? ये क्षैतिजक, लंबवत, अर्ध वृत्ताकार, वृत्ताकार और विकर्णाकार संचालित हो सकते हैं।
अब आप नीचे दिए गए चित्रों में दर्शाए अनुसार अपने हाथों को ज्यामितीय आकारों में घुमाने का प्रयास कीजिए।
वृत्ताकार संचलन - दोनों हाथों को नीचे से ऊपर की ओर घुमाकर वृत्ताकार आकृति बनाइए, जैसे कि आप एक बड़ा वृत्त बना रहे हो।
अर्ध-वृत्ताकार संचलन - एक हाथ को नीचे से ऊपर की ओर गोलाकार तरीके से घुमाएँ, जैसे कि आप अक्षर C लिख रहे हों।
क्षैतिजिक संचलन
(क) आगे बढ़ें और अपनी भुजाओं को एक सीधी रेखा में सामने से दोनों ओर फैलाएँ।
(ख) अपनी भुजाओं को सीधी रेखा में दोनों ओर फैलाएँ जिससे वक्र आकार बन जाए।
विकर्णाकार संचलन
विकर्ण आकार बनाने के लिए अपनी भुजाओं को विपरीत दिशाओं में फैलाएँ- एक ऊपर की ओर तथा एक नीचे की ओर।
लंबवत संचलन दोनों भुजाओं को सीधी रेखा में नीचे और ऊपर ले जाएँ।
क्या आप नृत्य करते समय अपनी भुजाओं के अन्य रचनात्मक उपयोग पर विचार कर सकते हैं? अपनी भुजाओं से विशेष मुद्राएँ बनाकर उन्हें प्रदर्शित कीजिए।
नेत्र और भौंहें
नेत्रों का उपयोग नृत्य करने और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए भी किया जाता है। क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि आप बात करते समय, नृत्य करते समय और भावनाओं को व्यक्त करते समय जब आप नेत्रों का उपयोग करते हैं तब एक साथ भौंहों का भी उपयोग करते हैं।
गतिविधि 15.5
नृत्य में नेत्रों की मुद्राएँ
आइए, हम काल्पनिक रेखाओं का अनुसरण करते हुए नेत्रों को घुमाने का प्रयास करें।
नेत्र गतियों के अभ्यास से नेत्रों की मांसपेशियाँ भी सुदृढ़ होती हैं।
स्तर 1 पूर्व में हाथों के लिए बताई गई गतियों को नेत्रों की गतियों के साथ करें।
स्तर 2 अब नेत्रों, हाथों और पैरों की गतियों को एक साथ करें और समान सरगम का उपयोग कर स्वयं की गतियाँ बनाएँ।
आकलन
| अध्याय 15 – नृत्य के विभिन्न रंगों में मेरी दिनचर्या | ||||
|---|---|---|---|---|
| पाठ्यचर्या लक्ष्य | दक्षताएँ | अधिगम प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| CG-1 | C-1.1 | संगीत की लय पर उत्साहपूर्वक नृत्य करते हैं। | ||
| CG-1 | C-1.1 | हस्त-मुद्राओं से ज्यामितीय स्वरूप को समझते हैं। | ||
| CG-1, CG-2 | C-1.1, C-2.1 | नेत्रों की गति की विभिन्न पद्धतियों को समझते हैं। | ||
| CG-2 | C-2.1 | स्थिरता से उभरने वाली गति की अवधारणा को समझते हैं। | ||
| CG-2 | C-2.1 | कार्यों के लिए कल्पनाशील ढंग से हस्त-मुद्राओं का उपयोग करते हैं। | ||
शिक्षक-अवलोकन
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