अध्याय 18
नृत्य द्वारा भावाभिव्यक्ति एवं कथावाचन
गतिविधि 18.1 भावनाएँ व्यक्त करना
जब आप कक्षा में आते हैं और अपने मित्रों से मिलते हैं तो क्या आप उनके मुख पर अलग-अलग भाव-भंगिमाएँ देखते हैं? कक्षा 4 में आपने विभिन्न भावों के विषय में पढ़ा और उन्हें व्यक्त करना सीखा है। हमने यह भी देखा कि विभिन्न परिस्थितियों में विभिन्न प्रकार के भावों का अनुभव होता है – चाहे वे परिस्थितियाँ सकारात्मक हों अथवा अवांछनीय। आप प्रायः वांछनीय अथवा अवांछनीय परिस्थितियों को नृत्य के माध्यम से विभिन्न भावों में व्यक्त कर सकते हैं। नृत्य आपको मनोभावों का अनुभव करने और उन्हें व्यक्त करने का माध्यम बनता है।
गतिविधि 18.2
नेत्रों एवं भौंहों द्वारा भावाभिव्यक्ति
क्या आप यह मानते हैं या अनुभव करते हैं कि हमारे नेत्र हमारी भावनाओं का दर्पण हैं? नेत्रों एवं भौंहों की गतिविधियों को हस्त-मुद्राओं के साथ समायोजित करते हुए अग्रलिखित भावों को व्यक्त करने का प्रयास कीजिए।
क्रोध में नेत्र फैलाते हुए – “दूर जाओ” कहने के लिए 'सुचि' हस्त-मुद्रा का उपयोग।
◆हर्ष में नेत्र चमकदार हो जाते हैं -'पुष्पपुट' हस्त-मुद्रा में सुंदर फूलों को पकड़ना।
◆ दुःख में नेत्र सिकुड़ जाते हैं – गले लगने की अभिलाषा के लिए 'उत्संग' मुद्रा का उपयोग।
◆ कनखियों से देखना - 'सम्पुट' हस्त-मुद्रा में कुछ छुपाते हुए चोरी-छिपे देखना।
गतिविधि 18.3
दो विपरीत भावों को व्यक्त करना
अपने साथी का चुनाव कर एक सुखद भाव पर तथा एक ऐसे भाव पर चर्चा करें जो आपको व्याकुल कर रहा हो। अभिनय के माध्यम से भावों का उपयोग करते हुए अपने मित्र को आपकी स्थिति को समझाने का प्रयास कीजिए।
सजग रहें और अपने नेत्रों व हस्त-मुद्राओं का उपयोग करें। उन इंद्रियों की पहचान करें जिनका उपयोग भाव-विशेष के लिए किया गया है। अब आप अन्य मित्रों के साथ मिलकर उन स्थितियों तथा व्यक्त किए गए भावों पर एक रचनात्मक कथा का निर्माण कीजिए।
कक्षा में उपर्युक्त गतिविधियों पर विचार-विमर्श कीजिए तथा अपने भावों को चित्रित कर कक्षा में साझा कीजिए।
उदाहरण - आप बोतलों के ढक्कनों को एकत्रित कर उन पर अपने भाव (इमोजी) को चित्रित कर सकते हैं। इस प्रकार बनाए गए भाव प्रदर्शित करने वाले ढक्कनों को अपने मित्रों के साथ साझा करें तथा इन ढक्कनों को एक-दूसरे के साथ परिवर्तित करें।
गतिविधि 18.4
नृत्य में प्रयुक्त मंच-सामग्री
दुपट्टे का उपयोग मोरपंख के रूप में किया जाता है।
रबर बैंड का उपयोग कठपुतलियों की तरह नृत्य करने के लिए किया जाता है।
देश के विभिन्न नृत्य रूपों में मंच-सामग्री का उपयोग किया जाता है। मंच-सामग्रियों में गुजरात के 'गरबा' नृत्य में डांडियाँ और मिजोरम के 'चेराव' नृत्य में बांस के डंडे उल्लेखनीय हैं। पहले की गई गतिविधियों में आपने विभिन्न क्षेत्रों के नृत्यरूपों में ऐसी मंच-सामग्रियों का उपयोग होते अवश्य देखा होगा। मंच-सामग्रियों का उपयोग नृत्य संरचना में भी किया जाता है।
गतिविधि 18.5
काल्पनिक मंच सामग्रियाँ
मोहिनीअट्टम के पंथट्टम गेंद के साथ खेलते हुए कलाकार
क्या आप कृष्ण और उनके मित्रों के गेंद खेलने की कहानी जानते हैं?
◆ ऐसी गतिविधियाँ कीजिए जिनका उपयोग आप काल्पनिक गेंद खेलते हुए दिखाने के लिए कर सकते हैं।
◆ फिर इन गतिविधियों को नृत्य के चरणों के साथ जोड़िए तथा हस्त-मुद्राओं का उपयोग करके कृष्ण और उनके मित्रों द्वारा गेंद खेलते हुए दिखाने के लिए नृत्य की रचना कीजिए।
◆ क्या चार तालों वाला मधुर बाँसुरी संगीत इस नृत्य के अनुकूल हो सकता है?
आप काल्पनिक मंच-सामग्रियों का भी उपयोग कर सकते हैं। कई भारतीय नृत्य शैलियों में ऐसे दृश्य होते हैं जिनमें नर्तक व नर्तकियों को काल्पनिक गेंद के साथ खेलते हुए दिखाया जाता है। उदाहरण के लिए, मोहिनीअट्टम का पंथट्टम या मणिपुरी का कंदुक खेल।
शिक्षक-संकेत- शिक्षक सरलता से उपलब्ध किसी भी बाँसुरी संगीत का उपयोग कर सकते हैं।
गतिविधि 18.6
पाँच इंद्रियों द्वारा अभिव्यक्ति
क्या आप पाँच इंद्रियों के विषय में जानते हैं? ये पाँच इंद्रियाँ दृष्टि, श्रवण, गंध, स्वाद और स्पर्श हैं। आप इन इंद्रियों का उपयोग सदैव करते हैं।
आइए इन इंद्रियों को ऋतुओं, क्रियाओं और नृत्य की भाव-भंगिमाओं से जोड़ें। अपने क्षेत्र की किसी एक कहानी या प्रकृति गीत को चुनें। अब अपने भावों को इंद्रियों के माध्यम से उस कहानी द्वारा व्यक्त कीजिए।
प्रश्नों के उत्तर नीचे दिए गए स्थान में लिखिए-
◆आपने क्या देखा?
◆आपने क्या सुना?
◆आपने कैसी सुगंध का अनुभव किया?
◆आपने कैसा स्वाद अनुभव किया?
◆आपके शरीर ने क्या अनुभव किया?
अब उपर्युक्त नृत्य-चरणों को हाथों की गतियों, उचि हस्त-मुद्राओं, नेत्राभिनय और मुख के भावों के साथ जोड़िए ताकि आप उपर्युक्त सभी इंद्रियों को नृत्य के माध्यम से व्यक्त कर सके
गतिविधि 18.7
कथावाचन नृत्य
अब इस कहानी को नृत्य के विभिन्न चरणों, जैसे- उछलना, हस्त-मुद्राएँ, पैरों एवं हाथों की गति, भावों, नेत्रों एवं भौंहो की अभिव्यक्ति आदि के साथ प्रस्तुत करें। इसके लिए संगीत का भी चयन करें। आप चाहें तो अपनी कहानी के लिए एक गीत तैयार कर सकते हैं जिसमें आप संगीत-कक्षा में सीखी गई स्वरलिपियाँ या ढोलक अथवा लकड़ी की छड़ियों से उत्पन्न तालाघातों का उपयोग कर सकते हैं।
आकलन
| अध्याय 18 – नृत्य द्वारा भावाभिव्यक्ति एवं कथावाचन | ||||
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| पाठ्यचर्या लक्ष्य | दक्षताएँ | अधिगम प्रतिफल | शिक्षक | स्वयं |
| CG-2 | CG-2.1 | विभिन्न भावो को सरलता से व्यक्त करते हैं। | ||
| CG-2 | CG-2.1 | रचनात्मक रूप से नेत्रों, भौंहों और हस्त-मुद्राओं के माध्यम से भावों को व्यक्त करते हैं। | ||
| CG-2 | CG-2.2 | कहानी सुनाने के लिए विभिन्न भावों का उपयोग करते हैं। | ||
| CG-3 | CG-3.1 | वास्तविक और काल्पनिक सामग्री का उपयोग कर रचनात्मकता प्रदर्शित करते हैं। | ||
| CG-4 | CG-4.1 | नृत्य के माध्यम से पाँचों इंद्रियों को प्रस्तुत करने के प्रति उत्सुकता प्रदर्शित करते हैं। | ||
शिक्षक-अवलोकन
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अन्य टिप्पणियाँ———————
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