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1. जल - जीवन का आधार

इकाई 1

हमारे आस-पास का जीवन

इकाई के विषय में

प्रारंभिक स्तर पर इस इकाई में पशुओं, पक्षियों और कीटों के पर्यावासों या घर के रूप में प्रकृति की महत्वपूर्ण भूमिका को बताया गया है। विद्यार्थियों ने कक्षा 3 और 4 में मृदा, वायु और जल का अध्ययन किया। उन्होंने यह भी सीखा कि विभिन्न भू-भागों में जीवन का विकास मृदा, वायु, जल और सूर्य के प्रकाश की उपलब्धता पर निर्भर रहते हुए किस प्रकार होता है।

कक्षा 5 की इस इकाई में जीवन और पारिस्थितिक तंत्रों में जल के महत्व को समझाया गया है। इसमें भूमि और सहायक पर्यावासों को आकार देने में जल के विविध रूपों, गतियों और भूमिका के बारे में भी बताया गया है। इस इकाई में बताया गया है कि जल एक विशिष्ट और सीमित संसाधन है तथा पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने में यह कैसे सहायक है।

इसमें उन व्यक्तियों के जीवन से भी उदाहरण दिए गए हैं जो प्रकृति के निकट रहते हैं। ये प्रकृति के निर्मल भण्डार का आनंद लेते हैं और आस-पास के वनों और परिवेश में उपलब्ध विविध प्रकार की सामग्रियाँ विकसित करते हैं। उनकी जीवन-शैली और स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों का उत्पादन यह दर्शाता है कि प्रकृति की गोद में जीवन किस प्रकार आनंदित और रचनात्मक हो सकता है।

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शिक्षकों के लिए

इस इकाई में अध्याय 1 'जल- जीवन का आधार' और अध्याय 2 'नदी की यात्रा' सम्मिलित हैं। इन अध्यायों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं -

अध्याय 1 - जल- जीवन का आधार

  • इस अध्याय में विद्यार्थियों को जल के विभिन्न रूपों और विभिन्न स्रोतों (मीठा पानी और खारा पानी) से परिचित कराया गया है। इसमें समाज की विभिन्न गतिविधियों में जल के महत्व को भी बताया गया है। इस अध्याय में जल-चक्र द्वारा जल के विभिन्न रूपों को और इन रूपों में जल की निरंतर गतिशीलता के विषय में भी बताया गया है। इसमें यह भी समझाया गया है कि जल किस प्रकार भूमि को आकार देता है और मीठे पानी के प्राकृतिक पर्यावासों में रहने वाले जीवों की सहायता करता है। इस इकाई में जल-संरक्षण की आवश्यकता का महत्व बताया गया है।

अध्याय 2 - एक नदी की यात्रा

  • इस अध्याय में गोदावरी नदी की कहानी को बताया गया है। नदी के उद्गम स्थल से लेकर नदीमुख-भूमि (डेल्टा) तक की चर्चा की गई है। इसमें मानचित्रों, कहानियों और उदाहरणों द्वारा गोदावरी की उपनदियों और नदी के जलीय जीवन के विषय में बताया गया है। इसमें विद्यार्थियों को नदी पर निर्मित बाँधों से भी परिचित कराया गया है। विद्यार्थी यह भी जानेंगे कि नदी कैसे प्रदूषित होती है। इस अध्याय में उन प्रकारों को भी बताया गया है जिनसे नदियाँ परितंत्रों, व्यक्तियों और संस्कृति की सहायता करती हैं। इस अध्याय को पढ़ने के बाद विद्यार्थी यह समझ सकेंगे कि जल एक सीमित और साझा संसाधन है जिसका विवेकपूर्वक उपयोग किया जाना चाहिए।
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सुगमकर्ता के रूप में शिक्षक

  • विद्यार्थियों को उनके घर या विद्यालय के आस-पास के जल-निकायों के विषय में सोचने के लिए प्रोत्साहित कीजिए। उन्हें प्रेरित कीजिए कि वे यह जानने का प्रयास करें कि जल कहाँ से आता है और कहाँ जाता है।
  • सरसों के बीज पर आधारित अध्याय 1 की गतिविधि 6 यह दर्शाती है कि नदियाँ ऊँचाई से नीचे की ओर कैसे बहती हैं और किस प्रकार ये भूमि के आकार का अनुसरण करती हैं। भारत के मानचित्र के उपयोग से यह पता लगाएँ कि कौन-सी नदियाँ किस समुद्र में जाकर मिलती हैं और किस प्रकार विभिन्न भू-भाग पर्वत आदि उनकी दिशा तय करते हैं।
  • विद्यार्थियों से चर्चा कीजिए कि उनके विद्यालय या पड़ोस में वर्षा का पानी कहाँ जाता है। शहर और गाँव द्वारा जल-निकास की योजना कैसे बनाई जाती है। इस संबंध में संवाद आरंभ करने के लिए इसका उपयोग करें।
  • उन विभिन्न विधियों की सूची बनाने में विद्यार्थियों की सहायता कीजिए जिनसे जल हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे जल को साझा करने और संरक्षित करने के विचारों से जोड़िए। उन्हें यह सोचने दें कि उनके घरों (टंकियों, पात्रों आदि) में जल कैसे संग्रहित होता है और बाँध किस प्रकार एक बड़ी संग्रहण इकाई की भाँति कार्य करता है।
  • विद्यार्थियों को प्रकृति के पात्रों की भूमिका निर्वहन (रोल-प्ले) में सम्मिलित कीजिए ताकि वे जल की कमी और अधिकता दोनों के विषय में गंभीरता से विचार कर सकें।
  • विद्यार्थियों को प्रोत्साहित कीजिए कि वे अपने माता-पिता या दादा-दादी से नदियों से संबंधित कहानियों, उत्सवों अथवा स्मृतियों पर चर्चा करें जिससे वे समझ सकें कि नदियाँ केवल भौतिक संसाधन मात्र ही नहीं हैं अपितु ये हमारे समुदाय और संस्कृति का अभिन्न अंग हैं।

1. जल - जीवन का आधार

वर्षा हो रही है। आफरीन खिड़की की ओर भागती है जहाँ ज्योति पहले से ही वर्षा के जल की नन्हीं बूँदों को काँच से फिसलकर गिरते हुए देख रही थी। आफरीन पूछती है, "तुम्हें क्या लगता है कि ये जल कहाँ से आता है और फिर कहाँ चला जाता है?"

आइए, हम जल की यात्रा को समझें।

परंतु पहले हम जानेंगे कि पृथ्वी पर कितना जल है।

यद्यपि पृथ्वी की अधिकांश सतह जल से ढकी हुई है किंतु पृथ्वी पर विद्यमान इस जल का अधिकांश भाग लवणीय जल (खारा पानी) है और अलवणीय जल (मीठा जल) की मात्रा बहुत ही कम है। सभी सजीव - व्यक्ति, पशु, पक्षी और पौधे जीवित रहने के लिए मीठे जल पर निर्भर हैं। यह जल पीने, फसल उगाने और दैनिक कार्यकलापों के लिए अनिवार्य है। अनेक पौधे और जंतु मीठे जल में भी रहते हैं। जल के बिना जीवन संभव नहीं है।

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अब कल्पना कीजिए कि यदि पृथ्वी पर विद्यमान संपूर्ण जल इस गिलास में भरा है तो मीठे जल की मात्रा केवल इस चम्मच में आने वाले जल के समान होगी।

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200 मिलीलीटर जल
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5 मिलीलीटर जल
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चर्चा कीजिए

  1. क्या आपको लगता है कि हम महासागर में उपस्थित जल को पी सकते हैं?
  2. महासागरीय जल का उपयोग किस हेतु किया जा सकता है?
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क्या आप जानते हैं?

गुजरात में लवण-पटल (सॉल्ट पेन) के विशाल सपाट स्थल हैं जहाँ समुद्री जल को सुखाकर नमक एकत्रित किया जाता है। यह भारत के सबसे बड़े लवण उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। Image
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गतिविधि 1

हमें पेय जल (मीठा जल) कहाँ मिल सकता है? नीचे दिए गए चित्रों में से मीठे जल के विभिन्न स्रोतों को पहचानिए और उनके नाम लिखिए।
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जल के स्रोत
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ज्योति यह जानने को उत्सुक थी कि क्या वायु में भी जल की उपस्थिति होती है? और क्या बर्फ जल का ही एक रूप है?

जल के विभिन्न रूप

हम पहले से ही जल के विभिन्न रूपों को जानते हैं- द्रव (वर्षा में), ठोस (बर्फ में) और वाष्प के रूप में। आइए, हम एक सरल गतिविधि के द्वारा इसे और अच्छे से समझते हैं।

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गतिविधि 2

स्टील का एक गिलास लीजिए। इसमें बर्फ के कुछ टुकड़े डालिए। गिलास पर दिखाई देने वाले जलकणों को देखिए। Image
  • ये जलकण कहाँ से आए?
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  • बर्फ के टुकड़ों को कुछ समय के लिए गिलास में ही छोड़ देने पर उनका क्या होगा?
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  • यदि हम जल को गर्म करें तो उसका क्या होगा?
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उपर्युक्त गतिविधि में आप जल के कौन-से रूपों को देखते हैं?
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परिवर्तनों का अवलोकन

गतिविधि मेरा अवलोकन
बर्फ का पिघलना
जल का उबलना
तीन दिन तक जल को सूर्य के प्रकाश में रखना

इन प्रयोगों के द्वारा हमने पाया कि जल बर्फ और भाप में परिवर्तित हो सकता है और यह अपने द्रव रूप में वापस भी आ सकता है।

जल-चक्र

आइए, हम समझते हैं कि प्रकृति में यह परिवर्तन किस प्रकार होता है।

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गतिविधि 3

  • एक पारदर्शी थैली लीजिए।
  • चित्र में दर्शाई गई आकृतियों के अनुसार इस थैली पर एक मार्कर पेन से सूर्य, बादल, वृक्ष और तीर के चिह्न बनाइए।
  • इस थैली को जल से एक-तिहाई भर लीजिए।
    सुझाव - आप इसके लिए नीले रंग का अथवा खाद्य रंजक का उपयोग कर सकते हैं।
  • थैली को कसकर बंद कर दें जिससे कोई रिसाव न हो।
  • इसे सूर्य के प्रकाश में रखिए।
  • कुछ घंटों के पश्चात थैली के अंदर होने वाले परिवर्तनों का अवलोकन कीजिए।
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मेरा अवलोकन मैं चकित हूँ इसका कारण है...
जल गर्म हो गया है। जल कैसे गर्म हो गया? सूर्य का प्रकाश
थैली के अंदर जलकण बन गए हैं।

जैसा कि आपने उपर्युक्त गतिविधि में देखा कि सूर्य के ताप के कारण जल वाष्प में परिवर्तित हो गया। जब जलवाष्प ठंडी होती है तो यह थैली के अंदर छोटे-छोटे जल बिंदुकण बनाती है। अंततः ये बिंदुकण नीचे गिर जाते हैं।

इसी प्रकार प्रकृति में ताप विभिन्न स्रोतों, जैसे- महासागरों और नदियों के जल को जलवाष्प में परिवर्तित कर देता है। जलवाष्प से बादल बनते हैं और वर्षा, बर्फ तथा ओलों के रूप में जल पृथ्वी पर बरसता है। यह जल फिर से नदियों, झीलों और महासागरों में चला जाता है।

प्रकृति में जल की ये सतत चक्रीय गति जल-चक्र कहलाती है।

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भूमिगत जल

आइए, पता लगाते हैं कि वर्षा का जल जब पृथ्वी पर आता है तो इसका क्या होता है?

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गतिविधि 4

  • एक पारदर्शी गिलास लीजिए।
  • इसे मृदा से आधा भर लीजिए।
  • अब इस मृदा में एक चम्मच से धीरे-धीरे जल डालिए।
  • ध्यानपूर्वक देखिए कि क्या होता है।
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जब वर्षा होती है तो कुछ जल मृदा द्वारा सोख लिया जाता है। यह जल मृदा और चट्टानों की परतों से होकर नीचे चला जाता है। भूमि के नीचे गहराई में भंडारित होने वाला जल भूमिगत जल कहलाता है। अपने उपयोग के लिए हम खुदाई करके कूप (कुआँ), नलकूप (बोरवेल), ट्यूबवेल और हैंडपंप से जल को निकालते हैं।

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गतिविधि 5

उस चित्र पर सही का चिह्न अंकित कीजिए जो भूमिगत जल का पुनर्भरण करेगा।
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कंक्रीट की सड़क
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हरित बगीचा
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पक्का क्षेत्र

शहरों में सीमेंट का उपयोग करके पक्की की गई भूमि के कारण वर्षा जल सरलता से भूमि के अंदर नहीं जा पाता है जिससे भूमिगत जल का पुनर्भरण रुक जाता है।

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क्या आप जानते हैं?

खुले अनावरित क्षेत्रों से जल रिसकर भूमि के अंदर चला जाता है। शोषक गर्त (सोकपिट), तालाब, मानव निर्मित झीलें और अधिकाधिक वृक्षारोपण वर्षा जल को भूमि में वापस लाने के लिए सहायक हैं।

सतह जल

भूमिगत जल के अतिरिक्त नदियाँ, तालाब, झीलें इत्यादि भी मीठे जल के प्राकृतिक स्रोत हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि नदियाँ कैसे बहती है?

नदियाँ प्रायः अपनी यात्रा का आरंभ ऊँचे पहाड़ों से करती हैं और निचली भूमि की ओर बहती हैं। आइए, हम एक गतिविधि के द्वारा इसे समझते हैं।

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गतिविधि 6

आवश्यक सामग्री - एक पुराना समाचार-पत्र और एक कप सरसों के दाने या कुछ अन्य छोटे बीज ।
कार्यविधि
  • समाचार-पत्र का एक पृष्ठ लेकर उसे मरोड़ लीजिए जिससे उसमें वलन बन जाएँ।
  • एक दूसरा पृष्ठ लीजिए और उसे मुड़े हुए पत्र के ऊपर रखिए।
  • उसे थोड़ा दबाइए जिससे हल्के ढाल बन जाएँ।
  • अब प्याले से सरसों के दाने लेकर धीरे-धीरे ढाल के उच्चतम बिंदु से उड़ेलिए।
  • दानों की गति का अवलोकन कीजिए।
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  1. सरसों के दानों के संबंध में आपने क्या अवलोकन किया?
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  2. क्या ये दाने सीधी रेखा में गति कर रहे हैं या ये विभिन्न दिशाओं में फैल रहे हैं?
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  3. क्या दाने कुछ क्षेत्रों में एकत्रित हो रहे हैं? क्या ये दाने इस प्रकार एकत्रित हो रहे हैं जिस प्रकार झीलों एवं नदियों इत्यादि में पानी एकत्रित होता है?
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जल अपने मार्ग में आने वाली भू-संरचनाओं की आकृति के अनुसार बहता, रुकता अथवा मुड़ता है। जल का प्रवाह भू-आकृतियों को भी परिवर्तित कर सकता है।

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चर्चा कीजिए

सरसों के दानों पर की गई गतिविधि 6 के आधार पर चर्चा कीजिए कि क्यों कुछ नदियाँ अरब सागर की ओर बहती हैं जबकि कुछ बंगाल की खाड़ी की ओर बहती हैं।

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क्या आप जानते हैं?

राजस्थान में अरावली पर्वत श्रृंखला से उद्गमित लूणी नदी एकमात्र ऐसी प्रमुख भारतीय नदी है जो सागर में नहीं गिरती है। यह गुजरात में कच्छ के रण की दलदली भूमि में जाकर समाप्त हो जाती है।

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गतिविधि 7

नदियों के प्रवाह-पथ को देखिए !

मानचित्र में आप देख सकते हैं कि नदियाँ भिन्न-भिन्न दिशाओं में बहती हैं। कुछ नदियाँ बंगाल की खाड़ी में और कुछ अरब सागर में जाकर मिलती हैं।
अवलोकन कीजिए और तालिका में लिखिए।

नदी का नाम बंगाल की खाड़ी की ओर बहती है अरब सागर की ओर बहती है
गोदावरी
नर्मदा
गंगा


शिक्षण संकेत

शिक्षक मानचित्र पर बंगाल की खाड़ी या अरब सागर की ओर नदियों के प्रवाह का अवलोकन करने और उसका पता लगाने में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर सकते हैं।

जल में जीवन

आफरीन ने देखा कि विद्यालय के समीप का तालाब वर्षा के जल से भर गया है। उसने ज्योति को आवाज दी, "यहाँ आकर देखो।" उन्होंने वहाँ देखा कि जल में नन्ही-नन्ही मछलियाँ तैर रही हैं और एक छोटा मेंढ़क कमल की पत्ती पर बैठा है।

जल में रहने वाले विविध प्रकार के पौधों और जंतुओं को देखना अद्भुत है! ये स्थल पर रहने वाले जीवों से किस प्रकार अलग हैं?

अपने साथियों के साथ स्थल पर रहने वाले जंतुओं और जल में रहने वाले जंतुओं की विशेषताओं पर चर्चा कीजिए और आगे दी गई तालिका को पूरा कीजिए।

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स्थल पर रहने वाले जंतु जल में रहने वाले जंतु
ये जल में श्वास नहीं ले सकते हैं। इनमें तैरने के लिए मीनपक्ष (गलफड़े) होते हैं।
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सूचना-पत्र

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व्याध पतंग (ड्रेगन फ्लाई)

यह तेजी से उड़ती है और जल के निकट अंडे देती है। यह मच्छरों को खाती है।

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जलीय बिच्छ

इन कीटों में पिन्सर (चिमटे जैसे पैर) होते हैं। ये जल के अंदर रहते हैं और पुच्छ नलिका द्वारा श्वास लेते हैं।

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बगुला

यह लंबे पैरों वाला एक पक्षी है जो मछली पकड़ने के लिए लंबे समय तक स्थिर खड़ा रहता है।

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मीठे पानी का कछुआ (टर्टल)

यह नरम कवच वाला कछुआ है जो तालाबों और नदियों में रहता है।

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जलीय सर्प

यह सर्प जहरीला नहीं होता है। यह मछलियों और मेंढ़कों को खाता है।

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नरकुल (एज प्लांट्स)

ये तालाबों के किनारों पर उगते हैं। ये लंबे होते हैं और घास के समान होते हैं।

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कमल और कुमुद (जलबद्ध प्लवी)

ये पुष्प जल पर तैरते हैं और इनकी जड़ें तालाब के संस्तर पर रहती हैं।

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जलकुंभी (मुक्त प्लवी)

यह शीघ्रता से बढ़ने वाला पौधा है जो जल पर तैरता है और फैलता जाता है।

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गतिविधि 8

आप अपने शिक्षक अथवा माता-पिता के साथ किसी स्थानीय जल-निकाय, जैसे - तालाब, झील अथवा जल-जीवशाला को देखने जाइए और जल-निकाय के अंदर और आस-पास के जीवन का अवलोकन कीजिए।
1. अपने अवलोकनों के आधार पर निम्नलिखित तालिका को पूरा कीजिए।
पक्षी या जंतु का नाम मुख या चोंच पैर, पाद, मीनपक्ष के द्वारा गति चित्र
मछली गोल मुख, ऊपर की ओर मीनपक्ष Image
तालाब का बगुला लंबी एवं नुकीली चोंच पतले पैर Image
2. भ्रमण के समय आपने जिन पौधों को देखा है उनके चित्र बनाइए। उनके स्थानीय नामों के साथ उनका नामांकन कीजिए।
प्रकार नाम स्थानीय नाम
प्लवन करते पौधे (जल के ऊपर) लिली
जल के अंदर रहने वाले पौधे
ऐसे पौधे जिनकी जड़ें जल संस्तर पर होती हैं किंतु वे जल के ऊपर दिखाई देते हैं

शिक्षण संकेत

सुनिश्चित कीजिए कि विद्यार्थियों के साथ वयस्क भी हों। सुरक्षा-संबंधी सभी सावधानियाँ रखें और विद्यार्थियों को निर्देशित कीजिए कि वे भ्रमण के समय किसी भी पौधे या जंतु को स्पर्श न करें और न ही उनके साथ कोई छेड़छाड़ करें।
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गतिविधि 9

  1. एक कागज का टुकड़ा लीजिए और उस पर जल की एक बूँद डालिए। अवलोकन कीजिए।
  2. कागज पर मोम के रंगों (क्रेयॉन) से रंग भरिए। अब इस पर जल की बूँद डालिए। क्या आपको कोई परिवर्तन दिखाई देता है?
  3. Image अपने अवलोकन लिखिए।
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पत्तियों पर मोमीय आलेपन उन्हें जलरोधी बना देता है और पौधे के अंदर अत्यधिक पानी को जाने से रोकता है। यह पौधे को स्वस्थ रहने में और क्षतिग्रस्त होने से बचाने में सहायक है।

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गतिविधि 10

कौन किसे खाता है? एक नदी की आहार-श्रृंखला का खेल
  • विद्यार्थियों को कागज की पर्चियाँ वितरित कीजिए। प्रत्येक विद्यार्थी लिखेगा कि वह क्या बनना चाहता है (उदाहरण के लिए- छोटी मछली, बड़ी मछली, मेंढ़क, पक्षी, मनुष्य, मगरमच्छ, ऊदबिलाव इत्यादि)
  • विद्यार्थियों से कहिए कि वे विचार करें कि वे क्या खाते हैं और उन्हें कौन खाता है।
  • एक रस्सी के द्वारा उन विद्यार्थियों को संबद्ध करें जो भोजन के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
  • चर्चा कीजिए कि यदि श्रृंखला में से एक जंतु लुप्त हो जाए तो क्या होगा (उदाहरण के लिए यदि सभी मछलियाँ लुप्त हो जाएँ तो क्या होगा?)

जल में रहने वाले पौधों के प्रकार

इस गतिविधि से हमने मीठे पानी के पर्यावासों में रहने वाले पौधों और जंतुओं की पर्याप्त विविधता का पता लगाया है। इन सजीवों में विशिष्ट विशेषताएँ होती हैं, जैसे - प्लवी पत्तियाँ, मीनपक्ष अथवा लंबी जड़ें जो उन्हें जल में जीवित रहने में और वृद्धि करने में सहायता करती हैं। यह हमें स्मरण कराता है कि पृथ्वी पर जीवन के निर्वहन के लिए पेयजल कितना आवश्यक है।

इस अध्याय में हमने सीखा कि जल विभिन्न रूपों, जैसे- बर्फ, जल और वाष्प के रूप में पाया जाता है। हमने देखा कि जल किस प्रकार जल-चक्र के द्वारा निरंतर गति करता रहता है। वायु, स्थल और आकाश से होकर जल अपनी यात्रा के समय अपने रूप परिवर्तित करता है। हमने यह भी पता लगाया कि जलीय पौधे और जंतु किस प्रकार जल के अंदर और जल के आस-पास रहते हैं और जीवित रहने के लिए जल पर निर्भर होते हैं।

आइए विचार करें

  1. निम्नलिखित को समेलित कीजिए-
    (i) महासागरीय जल (क) जल का ठोस रूप
    (ii) बफे (ख) जल का वाष्प रूप
    (iii) वाष्प (ग) पीने के लिए अनुपयुक्त
    (iv) वर्षा जल (घ) पेय जल
  2. आपके विचार से पृथ्वी पर पाया जाने वाला अधिकांश जल पीने हेतु अथवा कृषि हेतु उपयोग में क्यों नहीं लाया जा सकता है?
  3. ऐसा क्यों है कि जलीय निकायों के आस-पास बड़ी संख्या में सजीव प्रजातियाँ निवास करती हैं?
  4. यदि आपके क्षेत्र में दो वर्ष तक वर्षा नहीं हो तो क्या होगा?
  5. आपके अनुसार शहर की तुलना में वन में वर्षा जल का क्या होता है?
  6. क्या आप एक ऐसे घर या विद्यालय की आकृति बना सकते हैं जिसमें जल का विवेकपूर्वक संरक्षण हो? इसमें क्या-क्या सम्मिलित होगा?
  7. आइए, हम कागज के टुकड़े को मोड़कर एक मछली बनाएँ।
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