शांति के माता-पिता अपनी गर्मी की छुट्टियों की योजना बनाने में अधिक व्यस्त लग रहे थे। शांति ने पूछा, "क्या हम इस वर्ष कुछ अलग कर रहे हैं?" "संभवतः हम एक ही स्थान पर रहने की अपेक्षा किन्हीं और स्थानों पर जा सकते हैं? अब मैं बड़ी हो रही हूँ और वास्तव में मैं अपने देश के और अधिक स्थानों को देखना चाहती हूँ।"
अप्पा (पिताजी) और अम्मा (माताजी) मुस्कुराए, "शांति! चलो तुम्हारी इच्छा पूरी करते हैं। इस बार हमारी योजनाएँ बड़ी हैं, भारत के सबसे दक्षिणी छोर से आरंभ करके कुछ अलग-अलग स्थानों की यात्रा करेंगे।"
विश्व के जंगली बाघों में से लगभग 75 प्रतिशत बाघ भारत में हैं।
“कन्याकुमारी से?”, शांति ने पूछा।
“नहीं, शांति!”, अप्पा ने उसे आश्चर्यचकित करते हुए कहा।
पता लगाइए
भारत के सबसे दक्षिणी बिंदु के लिए मानचित्र देखिए।
शांति को मानचित्र देखने से पता चला कि ‘इंदिरा पॉइंट’ भारत का सबसे दक्षिणी छोर है। यह द्वीपों की एक लंबी श्रृंखला है जिसे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के नाम से जाना जाता है।
क्या आप जानते हैं?
द्वीप वह भूमि होती है जो चारों ओर जल से घिरी होती है। भारत के आस-पास के समुद्रों में एक हजार से अधिक द्वीप हैं जो हमारे देश के भाग हैं।
पता लगाइए
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह किस समुद्र में स्थित हैं?
- उन अन्य द्वीपों के नाम बताइए जिनसे आप परिचित हैं।
भारत के द्वीप
शांति और उसके माता-पिता ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी श्री विजयपुरम से यात्रा आरंभ की। उनकी स्थानीय मार्गदर्शिका (गाइड) रानी उन्हें वन में ले गई।
रानी ने कहा, “कई वृक्ष अद्वितीय हैं और मात्र इन्हीं द्वीपों पर ही पाए जाते हैं।” शांति उस वृक्ष की बड़ी जड़ों को देखकर उत्सुक हो गई जो नीचे से मिलकर चारों ओर फैली हुई थीं और वृक्ष को सहारा दे रही थीं।
किसी समाचार-पत्र का या पुराने कागज का एक आयताकार टुकड़ा लीजिए और उसे एक पतली नली के चारों ओर घुमाकर लपेटिए। किनारों को गोंद से चिपका दीजिए जिससे वह खुले नहीं। फिर उसे एक सपाट सतह पर सीधा खड़ा कर दीजिए। क्या वह खड़ा रहता है?
अब मोटे कागज से 3–4 छोटे त्रिकोण काटिए। त्रिकोणों को उस कागज से लपेटी गई नली के निचले भाग पर समान रूप से चिपकाइए। कागज को फिर से एक सपाट सतह पर रखिए। क्या वह कागज अब सीधा खड़ा रहता है?
यह कागज से लपेटी गई नली के आधार को वैसे ही सहारा देता है जैसे जड़ें वृक्ष को सीधा खड़ा रखती हैं।
प्रकृति की रचनाएँ प्रायः सर्वश्रेष्ठ होती हैं।
रानी ने कहा, “यहाँ के वन अनेक अनूठे पशुओं, रंग-बिरंगे पक्षियों, तितलियों और कीटों के घर हैं। अंडमान धवर (वुड पिजन) और अंडमान धनेश (हॉर्नबिल) जैसे पक्षी केवल अंडमान में ही पाए जाते हैं। अतः ये वन हमारे लिए अत्यंत विशेष हैं और इनका संरक्षण महत्वपूर्ण है।
अरुणाचल प्रदेश की अपातनी जनजाति किसी भी प्रकार की मशीन एवं खाद का उपयोग किए बिना एक ही खेत में धान भी उगाती है और साथ ही मछलीपालन भी करती है।
अंडमान धनेश (हॉर्नबिल)
अंडमान धवर (वुड पिजन)
आपको क्या लगता है कि कुछ पक्षी और पशु केवल इन्हीं द्वीपों पर ही क्यों पाए जाते हैं?
तत्पश्चात वे पास के एक द्वीप पर जाने के लिए नाव पकड़ने गए।
नाव पर सवार होने से पहले उन्हें सुरक्षा-संबंधी निर्देश दिए गए। सभी को जीवन रक्षक जैकेट (लाइफ जैकेट) पहनना अनिवार्य है, भले ही आपको तैरना आता हो। यदि आप पानी में गिर भी गए तो जीवन रक्षक जैकेट आपको पानी में डूबने नहीं देगी।
1. अपनी मनपसंद मछली या अन्य समुद्री जंतु का चित्र बनाइए अथवा उसके विषय में लिखिए।
- समुद्र में पाए जाने वाले कम से कम तीन सजीवों की सूची बनाइए।
रानी उन्हें समुद्री व्याख्या केंद्र ले गई। चित्रों, निर्देशों और सूचनाओं के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली कि कैसे छोटे-छोटे प्रवाल (कोरल) कई जीवों को आश्रय देते हैं। उन्होंने समझा कि समुद्री जीवन न केवल समुद्र के लिए अपितु संपूर्ण पृथ्वी के लिए कितना महत्वपूर्ण है?
- आपको क्यों लगता है कि समुद्र के नीचे का जीवन भी वनों के जीवन के समान ही महत्वपूर्ण है?
- आपके अनुसार प्रवाल भित्ति इन मछलियों और अन्य समुद्री जीवों की किस प्रकार सहायता करती है?
द्वीप छोड़ने से पहले उन्होंने उत्तर सेंटिनल द्वीप के विषय में सुना। रानी ने हमें बताया, “यहाँ के लोग प्राचीन आखेटक-संग्राहकों की तरह रहते हैं।” रानी ने कहा, “वे आगंतुकों को नहीं आने देते हैं। अतः किसी को भी वहाँ जाने की अनुमति नहीं है।” 2004 में इस क्षेत्र में सुनामी आई थी किंतु वे संभवतः वायु, समुद्र और जंतुओं के व्यवहार में परिवर्तन जैसे प्राकृतिक संकेतों पर ध्यान देने के कारण जीवित बच गए। प्रकृति के साथ उनके घनिष्ठ जुड़ाव के कारण ही उन्हें सुरक्षित रहने में सहायता मिली होगी।
आपके विचार से उत्तरी सेंटिनल द्वीप के लोगों को उनके ज्ञान के कारण सुरक्षित रहने में किस प्रकार सहायता मिली होगी?
शिक्षण संकेत
शिक्षक चित्रों के माध्यम से प्रवाल को समुद्र में पाए जाने वाले रंग-बिरंगे जीवित प्राणियों के रूप में समझाएँगे।
महाराष्ट्र में वर्ली चित्रकारी में चावल के आटे के घोल का उपयोग करके दैनिक जीवन, पशुओं और खेती का चित्रण किया जाता है।
इस यात्रा से पहले शांति ने द्वीपों को केवल टेलीविजन पर ही देखा था। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह घूमने के बाद उसने बहुत कुछ सीखा। द्वीप आश्चर्यों से भरे होते हैं और उन्हें हमारी देखभाल और सम्मान की आवश्यकता होती है।
अम्मा ने बताया कि वे श्री विजयपुरम से जलयान द्वारा कोलकाता जाएँगे और वहाँ से सुंदरवन जाएँगे।
अम्मा ने कहा, “सुंदरवन एक अलग तरह का वन है। यह कुछ इस प्रकार का वन है जो आपने पहले कभी नहीं देखा होगा।” यह सुनकर शांति इतनी उत्सुक हो गई कि वह वहाँ जाने के लिए प्रतीक्षा ही नहीं कर पा रही थी।
सुंदरवन— मैंग्रोव का घर
कोलकाता में कुछ देर रुकने के बाद वे सुंदरवन पहुँच गए। सुंदरवन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है। यह वन वहाँ दिखाई देता है जहाँ गंगा नदी समुद्र से मिलती है। यहाँ की भूमि दलदली और लवणीय है। इस आर्द्र और लवणीय भूमि में मैंग्रोव नामक विशेष वृक्ष उगते हैं।
- मैंग्रोव वन में आपको क्या दिखाई देता है? किन्हीं तीन के नाम लिखिए।
- आपके अनुसार कौन-सी विशेषता इस स्थान को अन्य वनों से भिन्न बनाती है?
“अप्पा, पानी से ये छोटी-छोटी छड़ी जैसी वस्तुएँ क्या निकल रही हैं?”, शांति ने पूछा।
उन्होंने उत्तर दिया, “ये मैंग्रोव की जड़ें हैं जो उन्हें दलदल युक्त लवणीय जल में श्वास लेने में सहायता करती हैं।”
मैंग्रोव महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उनकी जड़ें मिट्टी को एक साथ बाँधे रखती हैं और लहरों द्वारा मिट्टी को बहाकर ले जाने से रोकने में सहायता करती हैं। यहाँ बहुत-से लोग वन के समीप रहते हैं और अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए वन पर ही निर्भर हैं। पीढ़ियों से वे प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके रहते आए हैं।
सुंदरवन के लोग किस प्रकार मैंग्रोव वनों पर निर्भर रहते हैं?
सुंदरवन में एक ऐसे संसार की अनुभूति हुई जहाँ पृथ्वी, जल और वन्यजीव सब एक साथ रहते हैं। सुंदरवन जैसे मैंग्रोव हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
आपको ऐसा क्यों लगता है कि सुंदरवन जैसे स्थानों की उपयुक्त देखभाल करने की आवश्यकता है?
अपने आस-पास देखिए। क्या आपको कोई ऐसा जीव दिखाई देता है जिसके पास कुछ ऐसी विशेषता है जिससे उसे वहाँ रहने में सहायता मिलती है। वह क्या है?
“कोई अपने सिर के पीछे मुखौटा क्यों पहनेगा?” शांति ने उत्सुकता से पूछा।
अप्पा ने बताया, “मैंने सुना है कि इसका संबंध बाघों द्वारा अपने शिकार पर पीछे से हमला करने के तरीके से है। बाघ मुखौटा देखकर भ्रमित हो सकते हैं।”
पूर्वोत्तर भारत — हरी-भरी पहाड़ियाँ और महान परंपराएँ
सुंदरवन में निकलने के बाद शांति और उसका परिवार भारत के पूर्वोत्तर की ओर अपनी यात्रा पर निकल पड़े।
अप्पा ने पूछा, “क्या आप जानते हैं कि ‘सात बहनें’ कहे जाने वाले सात राज्य सिक्किम राज्य के साथ मिलकर पूर्वोत्तर भारत बनाते हैं?” “हाँ, हाँ! मुझे स्मरण है। मैंने कक्षा में पढ़ा था”, शांति ने उत्साहपूर्वक उत्तर दिया।
क्या आप पूर्वोत्तर के सात राज्यों के नाम बता सकते हैं?
1. चित्र देखिए। बाज़ार में बिक रही किन्हीं तीन वस्तुओं को पहचानिए?
2. ऊपर दिए गए चित्र में मनाए जा रहे पर्व की पहचान कीजिए?
3. विचार कीजिए कि बाँस की संरचना वाले घर क्यों बनाए जाते हैं?
4. इस चित्र में आपको कौन-कौन से पशु दिखाई दे रहे हैं?
5. इस चित्र से आपको भारत के पूर्वोत्तर में प्रकृति के साथ रहने वाले व्यक्तियों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?
भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र रंगों, रचनात्मकता और जीवन से परिपूर्ण है। यहाँ के लोग प्रकृति के साथ घनिष्ठ रूप से रहते हैं। यह क्षेत्र हरे-भरे जंगलों, बहती नदियों और अद्भुत पशु-पक्षियों का घर है। बुनाई और शिल्प से लेकर संगीत, नृत्य और पर्वों तक — जीवन का प्रत्येक पहलू आस-पास की पहाड़ियों, जंगलों और वन्य जीवन से जुड़ा हुआ है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ संस्कृति और प्रकृति एक साथ विकसित होते हैं।
भूत जोलोक्रिया (घोस्ट पेपर) दुनिया की सबसे तीखी मिर्चों में से एक है। यह पूर्वोत्तर भारत में उगती है और इसका उपयोग अचार, चटनी और यहाँ तक कि फसलों से हाथियों को दूर रखने के लिए भी किया जा जाता है।
महिलाओं के एक समूह को देखकर शांति ने पूछा, "वे क्या कर रही हैं?"
अम्मा ने कहा, "वे हरगिला पक्षी गरुड़ की रक्षा में सहायता कर रहे हैं। महिलाएँ बच्चों को उनके घोंसलों की रक्षा करना सिखा रही हैं।"
शांति भी उस समूह में सम्मिलित हो गई और उसने जाना कि कैसे सभी के सहयोग से हरगिला पक्षियों की संख्या बढ़ रही है।
छोटे-छोटे समूहों में चर्चा कर अपने आस-पास के किसी ऐसे पशु अथवा पक्षी का चयन करें जिसे संरक्षण की आवश्यकता हो। आप उसकी सहायता कैसे कर सकते हैं? उनके संरक्षण के लिए एक योजना बनाइए और उसे अपनी कक्षा के साथ साझा कीजिए।
छोटे-छोटे समूहों में अपने आस-पास उपलब्ध टहनियाँ, पत्तियाँ और रूई अथवा कागज जैसी मुलायम वस्तुएँ एकत्रित कीजिए।
इन सामग्रियों से एक छोटी-सी चिड़िया का घोंसला बनाइए। एक अच्छा घोंसला कैसे बनता है? अंडों को सुरक्षित रखने के लिए घोंसले में क्या-क्या होना आवश्यक है?
शांति ने अपने नए मार्गदर्शक चंदन से पूछा, "ये क्या हैं? ये कैसे बनते हैं?"
चंदन ने कहा, "ये वृक्षों की सजीव जड़ों से बने सेतु हैं। इन वृक्षों की जड़ें इतनी सुदृढ़ हैं कि इन पर चलकर नदी के पार जा सकते हैं। अब हमें केवल इनकी अच्छे से देखभाल करनी है।"
कक्षा में ‘जड़-पुल चुनौती’ का प्रयास कीजिए। क्या आप दो कुर्सियों को डोरी या डंडियों से इस प्रकार जोड़ सकते हैं कि उस पर एक छोटा-सा खिलौना रखा जा सके।
द्वीपों और पूर्वोत्तर की यात्रा करते हुए उन्होंने अनेक अद्भुत पादप और जंतु देखे। शांति ने पूछा, “अप्पा, ये स्थान इतने विशेष क्यों हैं?” अप्पा मुस्कुराए और बोले, “यहाँ पाए जाने वाले अनेक पादप और जंतु विश्व में और कहीं नहीं पाए जाते हैं! पूर्वोत्तर की इसी विशेषता के कारण यह स्थान प्रकृति के विशेष स्थानों में से एक है—एक प्रकार से प्रकृति का जैव विविधता केंद्र है। अब मैं आपको हमारे देश के एक और जैव विविधता केंद्र पर ले चलता हूँ।”
“क्या आपको स्मरण है कि आपने कक्षा 4 में भारतीय विशाल गिलहरी के विषय में पढ़ा था? यह पश्चिमी घाट पर भी रहती है, जहाँ अब हम जा रहे हैं।”
पश्चिमी घाट
अप्पा ने कहा, “अब हम एक अन्य पर्वत श्रृंखला – पश्चिमी घाट की ओर जा रहे हैं। यह वनाच्छादित पहाड़ियों की एक लंबी श्रृंखला है और अपनी समृद्ध वनस्पति और जंतु जीवन के लिए जानी जाती है।”
शिक्षक भारत के भौतिक मानचित्र में पश्चिमी घाट को दर्शाएँगे।
1. मानचित्र पर पश्चिमी घाट को देखिए और उन छह राज्यों के नाम बताइए जिनसे होकर यह गुजरता है।
2. वन में आप कौन-कौन से पशुओं को देख सकते हैं?
3. नीचे दिए गए चित्र में व्यक्ति क्या कर रहे हैं?
4. विचार कीजिए कि किले समतल भूमि की अपेक्षा पहाड़ियों की चोटियों पर क्यों बनाए जाते थे?
अप्पा ने बताया, “शेर-पूँछ वाले मकाक केवल यहीं पाए जाते हैं।” द्वीपों की तरह कुछ पशु और पक्षी केवल इसी क्षेत्र में ही पाए जाते हैं।
अप्पा ने कहा, “क्या आप जानते हैं कि भारत की अनेक नदियाँ इन्हीं पहाड़ियों से निकलती हैं?”
पश्चिमी घाट से निकलने वाली तीन नदियों के नाम बताइए।
इन पहाड़ियों में अनके ऐसे पौधे हैं जिनका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है। इनमें से बहुत-से पौधे केवल इसी क्षेत्र में उगते हैं। अनेक आदिवासी समुदाय और अन्य वनवासी लोग पीढ़ियों से यहाँ रहते आए हैं। वे भोजन, औषधि और अपनी आजीविका के लिए जंगलों और जंगल के पौधों पर निर्भर हैं।
तभी शांति ने एक वृक्ष के नीचे विद्यार्थियों के एक समूह को लेखन-पुस्तिका और कैमरा लिए देखा। उसने पूछा, “वे क्या कर रहे हैं?”
“ये विद्यार्थी एक सर्वेक्षण का भाग हैं। हमने विद्यालयों, किसानों और विशेषज्ञों की सहायता से पश्चिमी घाट में 200 से अधिक प्रकार के आमों को ढूँढा और अभिलेखित किया है! अब हम कटहल और जामुन पर भी विचार कर रहे हैं”, विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे एक शोधकर्ता सतीश ने बताया।
शांति चकित थी।
उसने सोचा, “क्या मैं अपने यहाँ के पेड़ों और फलों के लिए भी ऐसा कुछ कर सकती हूँ?”
अपने राज्य में उगने वाले किसी फल या सब्जी का चयन कीजिए। इसकी विभिन्न प्रकार की किस्में हो सकती हैं। अपने शिक्षकों या बड़ों की सहायता से स्थानीय स्तर पर ज्ञात फलों एवं सब्जियों के अनेक प्रकार एवं किस्मों की सूची बनाइए।
पश्चिमी घाट की यात्रा संपन्न होने वाली थी किंतु शांति का मस्तिष्क प्रश्नों एवं विचारों से भरा हुआ था।
अप्पा ने कहा, “मैं आपको ‘साइलेंट वैली’ राष्ट्रीय उद्यान के विषय में भी बताता हूँ। यह केरल में स्थित अद्भुत वर्षावन है जहाँ अनेक दुर्लभ पौधे और जीव-जंतु पाए जाते हैं। अन्य वर्षावनों के विपरीत जहाँ अत्यधिक वर्षा होती है।
और सामान्यतः झींगुर (सिकाडा) की ध्वनि से जंगल गुंजायमान रहते हैं; वहीं यह वर्षावन शांत हैं, इस कारण इस घाटी का नाम शांत घाटी (साइलेंट वैली) पड़ा।”
अप्पा ने आगे कहा, “बहुत समय पूर्व यहाँ एक बाँध बनाने की योजना बनाई गई थी जिससे यह विशेष जंगल जलमग्न हो जाता। किंतु सभी व्यक्तियों, जैसे— ग्रामीण, विद्यार्थी, वैज्ञानिक आदि ने ‘साइलेंट वैली बचाओ आंदोलन’ में भाग लिया। प्रकृति के प्रति उनके प्रेम ने बाँध निर्माण को रोकने में सहायता की। आज साइलेंट वैली एक संरक्षित वन है जो दर्शाता है कि जब लोग एकजुट होकर कार्य करते हैं और जंगल की देखभाल करते हैं तो वे जंगलों को बचा सकते हैं।”
हमारी पहाड़ियाँ आश्चर्यों, कहानियों और जीवन से भरी हुई हैं। छोटी-छोटी जड़ी-बूटियों से लेकर विशाल नदियों तक और दुर्लभ पशुओं से लेकर व्यक्तियों तक सभी कुछ परस्पर संबंधित है। हमें इन स्थानों और उनके संबंधों को समझने तथा उनकी रक्षा करने की आवश्यकता है।
संरक्षित क्षेत्र विशेष स्थान होते हैं, जैसे— जंगल, नदियाँ और पहाड़ आदि जिन्हें सरकार पशुओं, पौधों और प्रकृति की रक्षा के लिए सुरक्षित रखती है। लोगों को इन क्षेत्रों में वृक्ष काटने या पशुओं को हानि पहुँचाने की अनुमति नहीं है। पश्चिमी घाट में 50 से अधिक संरक्षित क्षेत्र हैं, जैसे— वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य। ये क्षेत्र शेर-पूँछ वाले मकाक, बाघ, हाथी और धनेश जैसे दुर्लभ पशु-पक्षियों की रक्षा करने और वनों को हरा-भरा रखने तथा नदियों को स्वच्छ रखने में सहायता करते हैं।
पश्चिमी घाट के तीन संरक्षित क्षेत्रों की सूची बनाइए।
शांति और उसका परिवार अंडमान द्वीपसमूह में रुके थे और अब वे कन्याकुमारी जा रहे थे। कन्याकुमारी भारतीय मुख्य भूमि का दक्षिणी बिंदु है; यहाँ तीन समुद्र आपस में मिलते हैं।
समुद्र में प्रवाल भित्तियों से लेकर पहाड़ियों में जड़ों से बने सेतुओं और घाटों के मसालों से भरे वनों तक प्रत्येक स्थान हमें कुछ न कुछ विशेष सिखाता है। प्रत्येक क्षेत्र अपने वन्य जीवों, वृक्षों, लोगों और प्रकृति के आश्चर्यों का घर है। लोग विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न प्रकार से रहते हैं परंतु प्रत्येक स्थान पर वे प्रकृति पर निर्भर हैं और अपने तरीके से उसकी रक्षा अथवा देखभाल करते हैं।
उनकी यात्रा ने हमें दिखाया कि हमारा देश वास्तव में कितना समृद्ध, सुंदर और परस्पर जुड़ा हुआ है। यदि हम चाहते हैं कि ये आश्चर्य भविष्य के लिए भी बने रहें तो हम सभी को धरती जिसे हम अपना घर कहते हैं, उसके विषय में सीखकर, उसका सम्मान और उसकी रक्षा करके अपनी भूमिका निभानी होगी।
- इस भारत-भ्रमण यात्रा में देखे गए स्थानों में से आपको सबसे अधिक किस बात ने चकित किया?
- आप सबसे अधिक किस स्थान पर जाना चाहेंगे और वहाँ क्या करेंगे?
- आपका क्षेत्र कहानी में बताए गए स्थानों में से किस प्रकार मिलता-जुलता है अथवा भिन्न है?
4. निम्नलिखित जलीय जंतुओं का उनकी विशेषताओं से मिलान कीजिए।








- मैंग्रोव क्यों महत्वपूर्ण है?
- विभिन्न क्षेत्रों के लोग प्रकृति के साथ किस प्रकार सामंजस्य बैठाकर रहते हैं?
- जीवंत भारत को दर्शाते हुए चित्रों को चिपकाकर एक कोलाज बनाइए।