इकाई 4
हमारे आस-पास की वस्तुएँ
इकाई के विषय में
इस इकाई का उद्देश्य प्रारंभिक स्तर पर विद्यार्थियों को अपने आस-पास की विभिन्न वस्तुओं से परिचित कराना और उन्हें यह बताना है कि वे कैसे कार्य करती हैं और इनका निर्माण कैसे होता है। कक्षा 3 और 4 में विद्यार्थियों को लट्टू एवं कागज की नावों जैसे स्थानीय खिलौने प्रदान किए गए थे ताकि वे समझ सकें कि वे किस प्रकार कार्य करते हैं। ईंटें, कागज इत्यादि बनाने की प्रक्रिया का अन्वेषण करके उन्होंने यह भी सीखा कि वस्तुओं का निर्माण किस प्रकार होता है।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों से वस्तुओं का निर्माण करते-करते विद्यार्थी सतत विकास की विधियाँ भी सीखते हैं। इसमें अस्वीकार करना, उपयोग को कम करना, पुनरुपयोग करना, नए उपयोग खोजना और पुनर्चक्रण करना सम्मिलित है। ताकि इनसे वे उत्तरदायित्वपूर्ण निर्णय ले सकें। यदि विद्यार्थी अपने हाथों से वस्तुओं का निर्माण
करते हैं तो जिन पदार्थों का उपयोग वे अपने दैनिक जीवन में करते हैं उनके प्रति उनके मन में गहन प्रशंसा का भाव विकसित होता है और वे अपने पर्यावरण से जुड़ना और उसकी देखभाल करना सीखते हैं।
कक्षा 5 में यह इकाई विद्यार्थियों को यह जानने और समझने का अवसर देती है कि उनके दैनिक जीवन में उपयोग की जाने वाली ऊर्जा एवं वस्त्र जैसी वस्तुओं का निर्माण एवं उपयोग कैसे होता है। सरल क्रियाकलापों और स्थानीय उदाहरणों के माध्यम से वे यह सीखते हैं कि ऊर्जा से गति एवं प्रकाश कैसे उत्पन्न होता है, धागे कैसे कपड़ों में परिवर्तित होते हैं और वस्तुओं का पुनरुपयोग एवं स्वच्छ ऊर्जा महत्वपूर्ण क्यों है। यह घर और आस-पास के परिवेश में उपलब्ध उनकी परिचित वस्तुओं के पीछे की अदृश्य प्रक्रियाओं को समझने में भी विद्यार्थियों की सहायता करता है।
शिक्षकों के लिए
इस इकाई में दो अध्याय हैं —अध्याय 7 'ऊर्जा— वस्तुएँ कैसे कार्य करती हैं?' तथा अध्याय 8 'वस्त्र— वस्तुएँ कैसे निर्मित होती हैं?'
अध्याय 7 — ऊर्जा — वस्तुएँ कैसे कार्य करती हैं?
- यह अध्याय विद्यार्थियों को प्रतिदिन के अनुभवों से जोड़ते हुए उनका परिचय ऊर्जा की संकल्पना से करवाता है। वे घर और समाज में प्रयुक्त होने वाले ऊर्जा के विभिन्न रूपों के विषय में ज्ञान प्राप्त करते हैं। हाथ से किए जाने वाले क्रियाकलापों एवं उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थी यह अन्वेषण करते हैं कि वस्तुएँ ऊर्जा द्वारा कैसे कार्य करती हैं और वे स्वच्छ एवं दक्ष ऊर्जा के महत्व को पहचानते हैं। सरल और स्वयं किए जाने वाले क्रियाकलाप विद्यार्थियों को खेल-खेल में ऊर्जा तथा उसके संभावित उपयोगों के विषय में सीखने में सहायता करते हैं।
अध्याय 8 — वस्त्र — वस्तुएँ कैसे निर्मित होती हैं?
- इस अध्याय के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया गया है कि वस्त्र कैसे बनाए जाते हैं। प्राकृतिक प्रतिरूपों, जैसे — पक्षियों के घोंसले बनाने से लेकर मनुष्यों के वस्त्र या धागे कातने, बुनाई करने और सिलाई करने की विधियों से इसका आरंभ होगा। स्वयं किए जाने वाले क्रियाकलापों और समग्र भारत से एकत्रित की गई कहानियों के माध्यम से विद्यार्थी सीखते हैं कि धागों से कपड़ा कैसे बनता है और वे कढ़ाई एवं हथकरघों जैसी स्थानिक परंपराओं का पता लगाते हैं तथा पुनरुपयोग, पुनर्चक्रण और प्रतिदिन के पदार्थों में सृजनशीलता के महत्व को समझते हैं।
ऊर्जा क्या है?
रसोईघर में हम विविध क्रियाकलाप होते हुए देख सकते हैं।
आइए, हम कुछ समय के लिए रसोईघर का अवलोकन करते हैं। अपने अवलोकन और मन में आए हुए प्रश्नों को नीचे दी गई तालिका में भरिए।
| मेरा अवलोकन | मेरी जिज्ञासा |
|---|---|
| भोजन पक रहा है | यह कैसे पकाया जा रहा है? |
इसी प्रकार हम प्रकृति और समाज में विभिन्न प्रकार के क्रियाकलाप होते हुए देखते हैं।
अपने अवलोकन के आधार पर कम से कम तीन ऐसी बातें बताइए जो आपने अनुभव की हों।
- गति करना
- प्रकाश प्रदान करना
- ध्वनि उत्पन्न करना
- वस्तुओं को ठंडा करना
- वस्तुओं को गर्म करना
चर्चा कीजिए
वस्तुएँ किस कारण से गति करती हैं, चमकती हैं, ध्वनि उत्पन्न करती हैं और ठंडी अथवा गर्म होती हैं?
जैसा कि आपको ज्ञात है कि सूर्य हमें प्रकाश एवं ऊष्मा प्रदान करता है। हमारे आस-पास वस्तुएँ गति करती हैं, प्रकाशित होती हैं, ध्वनि उत्पन्न करती हैं और गर्म या ठंडी होती हैं। जिस कारण से यह सब होता है उसे हम ऊर्जा कहते हैं।
ऊर्जा वह है जिसके कारण वस्तुएँ गति करती हैं, प्रकाशमान होती हैं, ध्वनि उत्पन्न करती हैं, कार्य करती हैं और ताप परिवर्तित करती हैं।
ऊर्जा को हम प्रतिदिन अनेक प्रकार से उपयोग में लाते हैं — वस्तुओं को गति देने, ध्वनि उत्पन्न करने, कार्य करने आदि। कभी-कभी इस ओर हमारा ध्यान भी...
नहीं जाता। आइए, कुछ सरल और मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से पता लगाएँ कि ऊर्जा किस प्रकार कार्य करती है।
गतिविधि 1
- एक गुब्बारा लीजिए और पूरा फूल जाने तक इसमें हवा भरिए।
- इसे कसकर पकड़िए।
- फिर गुब्बारे के मुँह को छोड़ दीजिए और अवलोकन कीजिए कि क्या होता है?
जब हवा गुब्बारे से बाहर निकलती है तो यह गुब्बारे को आगे की ओर धकेलती है। इस प्रकार वायु की गति ऊर्जा उत्पन्न करती है।
विस्तारित गतिविधि — हवा भरे गुब्बारे से बना रॉकेट
- गुब्बारे में हवा भरिए और इस पर एक स्ट्रॉ को टेप की सहायता से चिपका दीजिए।
- स्ट्रॉ में से एक धागा आर-पार निकालिए। धागे को तानकर इसके दोनों छोर आमने-सामने की दीवारों में लगी कीलों से बाँध दीजिए। अब गुब्बारे को छोड़ दीजिए और इसे डोरी पर चलता हुआ देखिए।
विचार कीजिए
खिलौने की गति तीव्र या मंद करने के लिए आप इस गतिविधि में क्या परिवर्तन करेंगे?
गतिविधि 2
रबर बैंड से बना गिटार
- गत्ते के बक्से के ऊपरी सतह पर एक छेद बनाइए।
- छेद के ऊपर बक्से पर कई रबर बैंड तानिए।
- रबर बैंडों को ऊपर उठाने के लिए बक्से पर इनके नीचे एक पेंसिल या मापक रखिए।
- रबर बैंड को खींचकर छोड़ें और इससे उत्पन्न ध्वनियों को सुनिए।
रबर बैंडों को खींचकर छोड़ने से वे कंपन करने लगते हैं और ध्वनि उत्पन्न करते हैं। यह ध्वनि ऊर्जा कहलाती है।
विचार कीजिए
यदि आप पतले या मोटे रबर बैंडों का उपयोग करते हैं तो क्या होता है? क्या उनसे उत्पन्न ध्वनि भिन्न होती है?
गतिविधि 3
सौर ऊर्जा चालित जल ऊष्मक
- दो प्यालों में पानी भरिए।
- एक प्याले को धूप में और दूसरे प्याले को छाया में रखिए।
- 15—20 मिनट तक प्रतीक्षा कीजिए और दोनों प्यालों के जल को स्पर्श कीजिए। आपने क्या अनुभव किया?
धूप में रखा जल आपको गर्म लगेगा क्योंकि सूर्य इसे गर्म कर देता है। यह दर्शाता है कि सूर्य का प्रकाश कैसे हमें ऊष्मा ऊर्जा प्रदान करता है।
क्या आप जानते हैं?
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के कुछ स्थानों पर लोग प्रायः अपने मवेशियों को अपने घर की निचले तल पर रखते हैं जबकि परिवार के लोग उसके ऊपर के तल पर रहते हैं। जानवरों से उत्पन्न ऊष्मा सर्दी के समय कमरों को गर्म रखने में सहायता करती है। यह ठंडे क्षेत्रों में अतिरिक्त लकड़ी अथवा बिजली का उपयोग किए बिना घर को गर्म बनाए रखने की एक अच्छी विधि है।
ऊर्जा के स्रोत
शिक्षक ने कक्षा में पूछा, "क्या आप सभी ने आज प्रातः अल्पाहार (नाश्ता) किया है?" सभी विद्यार्थियों ने उत्तर दिया, "जी, हाँ!"
फिर शिक्षक ने कहा, "आइए, हम एक क्रियाकलाप करते हैं। आप सभी खड़े हो जाइए और अपनी भुजाओं को फैला लीजिए। अब कूदिए! अपने-अपने स्थान पर दौड़िए।"
उन्होंने प्रश्न किया, "आप हिल-डुल पाने में कैसे समर्थ हो पाते हैं?"
सभी विद्यार्थियों ने उत्तर दिया, "हम गति करने में ऊर्जा के कारण समर्थ हो पाते हैं।"
शिक्षक ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा, "जब आप भूखे होते हैं तो आप कैसा अनुभव करते हैं? जब हम खाना नहीं खाते हैं तो हमें थकान का अनुभव होता है और जब हम खाना खा लेते हैं तो हम स्वयं में ऊर्जा का अनुभव करते हैं और खेलने के लिए तैयार होते हैं। आपको क्या लगता है इसका क्या कारण हो सकता है? ऐसा इसलिए है क्योंकि जो खाना हम खाते हैं वह हमें ऊर्जा प्रदान करता है।"
क्या आप जानते हैं?
जब हम बैठे हों, सो रहे हों या सोच रहे हों उस समय भी हमारा मस्तिष्क ऊर्जा का उपयोग करता है।
आइए अब पशुओं के संबंध में विचार करें। दौड़ता हुआ कुत्ता, उड़ता हुआ पक्षी... हमारी ही तरह इन सभी को भी चलने, उड़ने, तैरने, दौड़ने, भोजन ढूँढ़ने और अपनी रक्षा करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
परंतु इस ऊर्जा को वे कहाँ से प्राप्त करते हैं? वे भी भोजन से ही ऊर्जा प्राप्त करते हैं। भोजन सभी जीवित प्राणियों के लिए ऊर्जा का स्रोत है।
ईंधन से ऊर्जा
हम अपनी भीड़-भाड़ वाली सड़कों पर वाहनों को गति करते हुए देखते हैं।
विचार कीजिए
कारों एवं स्कूटरों को अपनी गति करने के लिए किस वस्तु की आवश्यकता होती है?
जिस प्रकार भोजन हमारे लिए ऊर्जा का स्रोत है उसी प्रकार पेट्रोल, डीजल जैसे ईंधन वाहनों के लिए ऊर्जा के स्रोत के रूप में कार्य करते हैं।
लिखिए
आपके घर में भोजन किस प्रकार पकाया जाता है?
हम अपने घरों में भी ईंधन का उपयोग करते हैं। भोजन पकाने की गैस एक ईंधन है। कुछ स्थानों पर लोग भोजन पकाने के लिए लकड़ियों अथवा कोयलों का उपयोग करते हैं, किंतु लकड़ी या कोयला जलाने से धुआँ होता है जिससे प्रदूषण फैलता है, इसलिए इनका उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए।
चर्चा कीजिए
- घर में भोजन पकाने के लिए आप किस प्रकार के ईंधन का उपयोग करते हैं?
- लकड़ियों या कोयलों का बहुत अधिक उपयोग करने में क्या समस्याएँ हैं?
गतिविधि 4
आइए समझें कि ईंधन किस प्रकार कार्य करते हैं
- किसी समतल सतह पर दो दीपक रखिए।
- एक दीपक में बिना तेल के रूई की बाती रखिए और दूसरे दीपक में रूई की बाती रखकर उसमें तेल डालिए।
- किसी बड़े व्यक्ति की देख-रेख में दोनों दीपकों की बातियों को प्रज्वलित कीजिए।
- अवलोकन कीजिए कि दोनों दीपकों का क्या होता है।
- (क) कौन-सा दीपक अधिक देर तक जलता रहा? ऐसा क्यों हुआ?
- (ख) यहाँ ईंधन की तरह व्यवहार करने वाला पदार्थ क्या है?
यहाँ ईंधन तेल है। हम अपने दैनिक जीवन में भोजन पकाने, दीपक जलाने, वाहन चलाने जैसी अनेक गतिविधियों के लिए विभिन्न प्रकार के ईंधनों का उपयोग करते हैं।
विद्युत
आपके घर में कौन-सी ऐसी वस्तुएँ हैं जिनके संचालन के लिए विद्युत की आवश्यकता होती है?
गतिविधि 5
अपने घर या अपनी कक्षा में चारों ओर देखिए। ऐसी पाँच वस्तुएँ पहचानिए जो विद्युत से चलती हों। नीचे दी गई तालिका में लिखिए—
| क्र.सं. | यंत्र | यह क्या करता है? | इसे क्या चाहिए? (प्रकाश / ध्वनि / ऊष्मा / गति / शीतलन / अन्य) |
|---|---|---|---|
| 1. | पंखा | हवा देता है | गति |
| 2. | |||
| 3. | |||
| 4. | |||
| 5. | |||
| 6. |
उपर्युक्त उदाहरण से क्या आप समझ सके कि विद्युत का उपयोग गति और ध्वनि, प्रकाश एवं ऊष्मा उत्पन्न करने के लिए किया जा सकता है?
विचार कीजिए
यदि विद्युत न हो तो आपका दिन कैसा व्यतीत होगा?
विद्युत के कारण हमारा जीवन कितना सरल हो गया है। न केवल हमारे घरों और विद्यालयों में अपितु अनेक उद्योगों में भी मशीनों को चलाने के लिए विद्युत का उपयोग होता है। यह ऐसी अनेक वस्तुएँ बनाने में हमारी सहायता करती है जिनकी हमें आवश्यकता होती है, जैसे — वस्त्र, खिलौने, पुस्तकें, भोजन, स्कूटर और कार आदि।
विद्युत अत्यंत उपयोगी है किंतु यदि सावधानीपूर्वक से इसका उपयोग न किया जाए तो यह संकट भी उत्पन्न कर सकती है।
क्या आप जानते हैं?
ऊर्जा दक्षता से अभिप्राय है एक ही कार्य करने में कम ऊर्जा का उपयोग करना। इससे संसाधनों की बचत करने और अपशिष्टों को कम करने में सहायता मिलती है। उदाहरण के लिए, तापदीप्त (इनकैंडेसेंट) बल्बों अथवा प्रतिदीप्त (फ्लोरोसेंट) बल्बों के स्थान पर प्रकाश उत्सर्जक डायोड (एल.ई.डी.) बल्बों के उपयोग से प्रकाश तो उतना ही मिलता है परंतु विद्युत की खपत कम होती है।
विद्युत का सुरक्षित उपयोग
- वैद्युत यंत्रों के भागों अथवा परिपथ में जुड़े विद्युत तारों को अनावश्यक रूप से न छुएँ।
- विद्युत सॉकेटों में अपनी उँगली अथवा पैन, छड़ी जैसी वस्तुएँ न डालें।
- यदि आप कहीं टूटे हुए तार अथवा गिरे हुए विद्युत स्तंभ को देखें तो उनसे दूर रहें और तुरंत इसकी सूचना किसी वयस्क व्यक्ति को दें!
- विद्युत के बक्सों अथवा ट्रांसफार्मरों के निकट न खेलें।
- यदि कुछ भी असुरक्षित अथवा विचित्र लगे तो कभी भी उसे स्वयं ठीक करने का प्रयास न करें, सदैव किसी वयस्क को इसके विषय में बताएँ।
हम जिस विद्युत का उपयोग करते हैं उसका अधिकांश भाग कोयले जैसे ईंधनों को जलाने से प्राप्त होता है। यद्यपि कोयले के जलने से अत्यधिक धुआँ और हानिकारक गैसें उत्पन्न होती हैं जो वायु को प्रदूषित करती हैं। यह प्रदूषित वायु हमारे स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए हानिकारक है।
फिर भी ऐसे अन्य स्रोत हैं जो प्रदूषण नहीं करते हैं जिनका उपयोग करके हम बिजली उत्पन्न कर सकते हैं। क्या आप पता लगा सकते हैं कि ये स्रोत कौन-से हैं?
सूर्य, पवन और जल से ऊर्जा उत्पन्न करना
विचार कीजिए
एक छोटे गीले कपड़े के टुकड़े को धूप में रखिए। एक दूसरे गीले कपड़े को छाया में रखिए। आपके अनुसार इनमें से कौन-सा कपड़ा पहले सूखेगा? ऐसा क्यों होता है?
आइए कुछ और उदाहरण देखें। निम्नलिखित गतिविधियों को करने के लिए आप अपने बड़ों अथवा शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
गतिविधि 6
फिरकी
- कागज का एक चौकोर टुकड़ा लीजिए।
- मापक की सहायता से इसकी दो विकर्ण रेखाएँ खींचें।
- अब आपके पास चार समान भाग हैं।
- चारों रेखाओं के ऊपर से आधी दूरी तक काटिए।
- प्रत्येक कोने को मोड़िए और चित्र में दर्शाए अनुसार एक पिन से इसे एक डंडी से जोड़िए।
- अब इस फिरकी को चलती हवा के सामने लाइए। यदि हवा नहीं चल रही है तो इसे ऊँचा उठाकर साथ लेकर दौड़िए।
क्या आपकी फिरकी घूमती है?
गतिविधि 7
सूर्य के प्रकाश को केंद्रित करना
- एक कागज का टुकड़ा और एक आवर्धक लेंस (magnifying lens) लीजिए.
- कागज को इस प्रकार रखिए कि सूर्य का प्रकाश उस पर सीधा पड़े और आवर्धक लेंस का उपयोग करके प्रकाश को कागज पर केंद्रित कीजिए.
3. आपके कागज का क्या होता है?
गतिविधि 8
जल-चक्रिका (Water Wheel)
- कागज का एक खाली कप और पाँच चम्मच लीजिए.
- कप में एक ही समतल में समान दूरी पर पाँच छिद्र कीजिए और इसमें चम्मचों के अग्रभाग को जोड़िए.
- फिर कप की तली के केंद्र से एक पेंसिल या स्ट्रॉ आर-पार कराइए.
- अवलोकन कीजिए कि क्या कप पेंसिल या स्ट्रॉ के चारों ओर एक पहिए की तरह घूमता है.
- अपने पहिए को किसी खाली डिब्बे पर संतुलित कीजिए जैसा चित्र में दर्शाया गया है.
- अब अपने पहिए पर पानी उड़ेलिए.
7. क्या पानी के कारण पहिया घूमने लगता है?
क्या आप जानते हैं?
प्राचीन जहाजों में विशाल पाल का उपयोग होता था जो दूर तक फैले समुद्रों की यात्रा करने के लिए पवन ऊर्जा का उपयोग करते थे। पहले के समय में गुजरात और तमिलनाडु जैसे स्थानों के व्यापारी पवन ऊर्जा का उपयोग करके अफ्रीका, अरेबिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाल-नौकाओं से यात्रा किया करते थे।
फिरकी का घूमना, कागज का जलना तथा जल-चक्रिका का घूमना आदि गतिविधियाँ हमें दर्शाती हैं कि पवन, सूर्य और जल ऊर्जा के स्रोत हैं जिनके कारण वस्तुएँ कार्य करती हैं।
विचार कीजिए
क्या आपने कभी धूप में पापड़ या कपड़े सूखते हुए देखे हैं?
लिखिए
क्या आप कुछ और उदाहरण सोच सकते हैं जहाँ हम ऊर्जा प्राप्त करने हेतु सूर्य, पवन या बहते हुए जल का उपयोग करते हैं?
अगले पृष्ठ पर दिए गए चित्र में दर्शाया गया है कि हम अपने दैनिक जीवन में बिना किसी अन्य ऊर्जा स्रोत से जुड़े सूर्य, पवन और बहते हुए जल की ऊर्जा का उपयोग करते हैं।
सौर पैनल सूर्य का प्रकाश ग्रहण करते हैं और इसे विद्युत में परिवर्तित करते हैं। पवनचक्कियाँ हवा में घूमती हैं और विद्युत उत्पन्न करती हैं। तीव्र गति से प्रवाहमान नदियाँ अथवा ऊपर से गिरते हुए जल का उपयोग भी विद्युत उत्पन्न करने के लिए किया जा सकता है।
पवन, जल और सौर ऊर्जा जैसे प्राकृतिक स्रोतों का उपयोग करके उत्पन्न की गई विद्युत हमारे ग्रह को धुएँ या अपशिष्ट से प्रदूषित नहीं करती। इसलिए इसे स्वच्छ ऊर्जा कहा जाता है।
क्या आप जानते हैं कि हमारे वाहन भी विद्युत से चल सकते हैं?
लिखिए
हमारे चारों ओर ऊर्जा
ऊपर दिए गए चित्र में दर्शाई गई गतिविधियों की सूची बनाइए और नीचे दी गई तालिका में लिखिए—
| गतिविधि | ऊर्जा स्रोत |
|---|---|
| बस्ता ले जाता हुआ विद्यार्थी | भोजन |
गतिविधि 9
ऊर्जा प्रवाह खेल
- ऊर्जा स्रोतों के चित्र अथवा उनके नामों वाली कागज की पर्चियाँ बनाइए, जैसे— सूर्य, पवन, जल, भोजन, ईंधन और विद्युत।
- कागज की दूसरी पर्चियों पर ऊर्जा के प्रकार, जैसे— ऊष्मा, प्रकाश, गति और ध्वनि इत्यादि अंकित कीजिए।
- कागज की अंतिम पर्चियों में ऐसे उदाहरण दीजिए जिसमें उनके उपयोग या ऊर्जा का उपयोग स्पष्ट होता हो, जैसे — वस्त्रों का सूखना, बल्ब जलाना, टर्बाइन का घूमना, भोजन पकाना, दौड़ना आदि।
चरण 1 — भूमिका निर्धारण
प्रत्येक विद्यार्थी को एक पत्रक (कार्ड) दीजिए जिसमें वह निम्नलिखित में से किसी एक भूमिका का निर्वहन करेगा—
- ऊर्जा का कोई स्रोत (सूर्य, पवन आदि)
- ऊर्जा का प्रकार (ऊष्मा, प्रकाश आदि)
- उपयोग (पौधों की वृद्धि में सहायक है, कार को गति प्रदान करना आदि)
चरण 2 — इधर-उधर घूमिए और अपना साथी ढूँढ़िए
विद्यार्थी कक्षा में दो ऐसे अन्य विद्यार्थियों को ढूँढ़ेंगे जो उनकी ऊर्जा शृंखला को पूरा करेंगे।
उदाहरणार्थ—
चरण 3 — कक्षा में प्रस्तुति
शृंखला संपूर्ण होने पर (स्रोत—प्रकार—उपयोग) प्रत्येक समूह शीघ्रता से अपने समूह की व्याख्या को कक्षा के सम्मुख प्रस्तुत करेगा। उदाहरण के लिए, “हम सूर्य की ऊष्मा हैं और हम वस्त्र सुखाने में सहायता करते हैं”।
हमारा शरीर भविष्य में उपयोग हेतु ऊर्जा संचित करता है। यदि हम एक समय भोजन न खाएँ तब भी दौड़-भाग कर सकते हैं क्योंकि हमारा शरीर संचित ऊर्जा का उपयोग कर लेता है। क्या आपने कभी टॉर्च अथवा बैटरी से चलने वाले खिलौने का उपयोग किया है? बैटरियों में ऊर्जा संचित रहती है।
ऊर्जा ही हमारी दुनिया को क्रियाशील और जीवंत बनाती है। मानव और पशु गति के लिए भोजन का उपयोग करते हैं वहीं वाहनों में ईंधन और हमारे घरों को प्रकाशित करने के लिए विद्युत का उपयोग होता है। इन सभी स्थानों पर ऊर्जा कार्य करती है। सूर्य, पवन और जल से हमें स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त होती है जो न तो हमारी पृथ्वी को हानि पहुँचाती है और न ही इसे प्रदूषित करती है।
अब हम समझ गए हैं कि ऊर्जा कहाँ से प्राप्त होती है और यह हमारी किस प्रकार सहायता करती है। हमारा कर्तव्य है कि हम इसका उपयोग बुद्धिमत्तापूर्वक और विवेकपूर्वक करें तथा यथासंभव इसकी बचत करें। जब भी संभव हो स्वच्छ ऊर्जा के स्रोत को ही उपयोग के लिए चुनें।
वास्तुशास्त्र स्थापत्य और अभिकल्पन की प्राचीन भारतीय पद्धति है। यह प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण भवन योजना बनाने में सहायता करती है। यह सूर्य के प्रकाश, पवन और ऊष्मा जैसे प्राकृतिक ऊर्जा के सर्वोत्तम उपयोग के लिए कक्षों, द्वारों और खिड़कियों के स्थान निर्धारण करने में मार्गदर्शन प्रदान करती है। खुले स्थान जैसे आँगन और दीवारों में उचित स्थान पर बनाई गई खुली जगहें, घरों को प्रकाशयुक्त और हवादार बनाए रखने तथा विभिन्न ऋतुओं में ऊर्जा के उपयोग को कम करने में सहायता करते हैं।
आइए विचार करें
- यदि आपके घर में किसी दिन विद्युत न रहे तो क्या होगा?
- कोयले के स्थान पर सौर अथवा पवन ऊर्जा का उपयोग अधिक अच्छा क्यों होता है?
- ऐसे दो उदाहरण बताइए जहाँ आप ऊर्जा को संचित होते हुए देखते हैं।
- ऐसा कौन-सा कार्य है जो आप ऊर्जा बचाने के लिए अपने घर में कर सकते हैं?
- पता लगाइए कि कोई वाहन प्रति लीटर पेट्रोल या डीजल में कितने किलोमीटर यात्रा कर सकता है। विभिन्न वाहनों के विषय में यह जानकारी प्राप्त कीजिए। आप उनकी तुलना किस प्रकार करेंगे?
- अपने घर या कक्षा में चारों ओर देखिए। ऐसी तीन वस्तुओं की सूची बनाइए जो ऊर्जा का उपयोग करती हों और उनके द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले ऊर्जा के स्रोत का भी उल्लेख कीजिए।
उदाहरण के लिए—>; वस्तु → पंखा ; ऊर्जा स्रोत —> विद्युत
- सृजन करें और साझा करें—>
- (क) “एक स्वच्छ ऊर्जा घर” की सरल योजना अथवा चित्र बनाइए जो सौर, पवन या किसी अन्य प्रकार की स्वच्छ ऊर्जा स्रोत का उपयोग करता हो।
- (ख) एक दिन के लिए “मेरी ऊर्जा दैनंदिनी” बनाइए, अभिलेखित कीजिए कि आपने विद्युत, ईंधन आदि का उपयोग कितनी बार किया है।