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इकाई 5

हमारा अद्भुत ग्रह

इकाई के विषय में

प्रारंभिक स्तर के अंत तक विद्यार्थी विभिन्न भू-आकृतियों, जीवन और उनके आस-पास की विविध गतिविधियों के विषय में सीखते हैं। वे सूर्य, चंद्रमा, तारों और विश्वभर के आश्चर्यों के विषय में भी जानते हैं। यह इकाई प्रकृति और दैनिक जीवन के बीच के घनिष्ठ संबंध को जानने के लिए प्रोत्साहित करती है।

कक्षा 5 में यह इकाई विद्यार्थियों को पृथ्वी पर जीवन को आकार देने वाली प्राकृतिक लय और...

घनिष्ठ संबंधों को जानने-समझने में सहायता करती है। यह इकाई विद्यार्थियों को ऋतुओं, कहानियों, पक्षियों, भोजन और विचारों की यात्राओं के माध्यम से प्रकृति, लोगों और संस्कृतियों के पारस्परिक संबंधों को समझाती है। दैनंदिनी लेखन (पत्रिका या डायरी लेखन) और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से वे अपने परिवेश से जुड़ते हैं और समझते हैं कि पृथ्वी हम सबका साझा जीवंत ग्रह है।

Children playing in nature with animals

शिक्षकों के लिए

इस इकाई में अध्याय 9 ‘प्रकृति की लय’ और अध्याय 10 ‘पृथ्वी— हम सबका घर’ सम्मिलित हैं।

अध्याय 9 — प्रकृति की लय

  • यह अध्याय विद्यार्थियों को अपने आस-पास की दुनिया में होने वाले परिवर्तनों की प्राकृतिक लय को देखने और समझने में सहायता करता है— समय के साथ दिन और रात, ऋतुओं, पौधों, पशुओं, लोगों और स्थानों में कैसे परिवर्तन होते हैं। दैनंदिनी लेखन, गतिविधियों और चिंतन के माध्यम से यह विद्यार्थियों को अपने स्थानीय पर्यावरण से घनिष्ठता से जुड़ने और प्रकृति में दोहराए जाने वाले क्रम पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।

अध्याय 10 — पृथ्वी — हम सबका घर

  • यह अध्याय विद्यार्थियों को पृथ्वी को एक जुड़े हुए जीवंत ग्रह के रूप में देखने में सहायता करता है जहाँ लोग, पशु, पौधे और विचार एक साथ यात्रा करते हैं; घुलते-मिलते हैं; और बढ़ते हैं। यह अध्याय कहानियों के माध्यम से यह दर्शाता है कि हम प्रकृति, ज्ञान और संस्कृति को सीमाओं के पार भी कैसे साझा करते हैं। यह ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के विचार को जीवंत करता है और हमारे साझा ग्रह के प्रति देखभाल, सम्मान और अपनेपन की भावना को प्रोत्साहित करता है।

9

प्रकृति की लय

अपनी सखी अपर्णा को गले लगाते हुए सबा ने आनंदित होकर कहा, “अरे वाह! तुमसे मिलकर कितनी प्रसन्नता हो रही है! तुम तो मुझसे लंबी हो गई हो और तुम्हारे बाल भी छोटे हो गए हैं।”

अपर्णा हँसी, “हाँ और तुमने भी तो गिटार सीखना आरंभ कर दिया है! इस एक वर्ष में कितना कुछ बदल गया।”

दोनों सहेलियों ने अपनी कक्षा की पुरानी खट्टी-मीठी स्मृतियों, प्रिय खेलों और विद्यालय परिसर में लगाए गए नए पौधों के विषय में बातचीत की।

Two friends hugging

✍️लिखिए

उस समय का स्मरण कीजिए जब आप कक्षा 3 और 4 में थे। आपने अपने मित्रों, विद्यालय, वातावरण और स्वयं के अंदर जो भी परिवर्तन देखे उनके विषय में सोचिए और लिखिए।


कक्षा 3 कक्षा 4 कक्षा 5
आप और आपके मित्र
विद्यालय
आस-पास का परिवेश

हमारे आस-पास के वातावरण और परिवेश में निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं। कुछ परिवर्तन वर्षों में होते हैं तो कुछ परिवर्तन कुछ दिनों या मिनटों में भी हो जाते हैं। क्या आपने ध्यान दिया है कि आपके आस-पास की वस्तुएँ कैसे परिवर्तित होती हैं? इस विषय पर विचार कीजिए। आप प्रतिवर्ष पहले से लंबे हो जाते हैं, वृक्षों से पत्तियाँ झड़ती हैं और पुनः उगती हैं, फूल खिलते हैं, मुरझाते हैं और बार-बार खिलते-मुरझाते रहते हैं, आकाश का रंग बदलता है, सूर्य प्रतिदिन उगता और डूबता दिखाई देता है।

Trees showing seasonal changes
✍️

लिखिए

  1. क्या आप ऐसी किसी वस्तु के विषय में सोच सकते हैं जिसके परिवर्तन में लंबा समय अर्थात अनेक वर्ष लगते हैं?

2. ऐसे कौन-से परिवर्तन हैं जो कुछ ही वर्षों में घटित हो जाते हैं?

3. ऐसे कौन-से परिवर्तन हैं जो प्रतिवर्ष बार-बार होते हैं?

4. क्या आप ऐसे परिवर्तनों के नाम बता सकते हैं जो मात्र कुछ मिनटों और क्षणों में घटित हो जाते हैं?

हमारे आस-पास एक दिन में होने वाले परिवर्तन (दिन और रात)

जिस प्रकार हम बड़े होते हैं और हमारे भीतर शारीरिक परिवर्तन होते हैं, उसी प्रकार हमारे आस-पास का संसार भी परिवर्तित होता रहता है। दिन रात में परिवर्तित हो जाता है और रात दिन में परिवर्तित हो जाती है।

रात और दिन होने का क्या कारण है?

सूर्य पूर्व दिशा में उदित और पश्चिम दिशा में अस्त होता हुआ प्रतीत होता है तो क्या सूर्य निरंतर घूम रहा है?

Boy waking up in the morning and sleeping at night

आइए एक सरल खेल के माध्यम से इसे समझते हैं।

🚀 गतिविधि 1

एक निश्चित दूरी पर खड़े दो विद्यार्थियों में से एक विद्यार्थी को ‘सूर्य’ और दूसरे विद्यार्थी को ‘पृथ्वी’ बनने के लिए कहिए। ‘सूर्य’ बना हुआ विद्यार्थी केंद्र में खड़ा होगा।

‘पृथ्वी’ बनने वाला विद्यार्थी धीरे-धीरे अपने अक्ष पर घूर्णन करेगा (घूमेगा)। जितने समय तक पृथ्वी बने हुए विद्यार्थी को ‘सूर्य’ बना विद्यार्थी दिखाई देता रहेगा, वह निरंतर “दिन...दिन...दिन”, कहता रहेगा। जैसे ही वह विद्यार्थी सूर्य को देखना बंद करेगा वह “रात...रात...रात” कहने लगेगा।

अब इस गतिविधि को टॉर्च और ग्लोब की सहायता से कीजिए।

कार्यात्मक प्रदर्शन — दिन और रात

चरण 1— एक ग्लोब को मेज पर रखिए और ग्लोब के एक ओर टॉर्च से प्रकाश डालिए। यहाँ टॉर्च सूर्य का प्रतीक है। ग्लोब का वह भाग जहाँ प्रकाश पड़ रहा है, वहाँ दिन है और जहाँ प्रकाश नहीं पड़ रहा है, वहाँ रात है।

चरण 2— घूर्णन— टॉर्च को स्थिर रखते हुए ग्लोब को धीरे-धीरे घुमाइए।

Teacher and students doing globe and torch activity

चरण 3— ग्लोब के घूर्णन करने पर इसके विभिन्न भागों पर पड़ने वाले प्रकाश का अवलोकन कीजिए।

टॉर्च की ही तरह सूर्य भी अपने स्थान पर स्थिर रहता है और पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है।

क्या आपने ध्यान दिया है कि किस प्रकार टॉर्च के प्रकाश ने ग्लोब के एक भाग में दिन कर दिया और दूसरे भाग में रात।


क्या आप जानते हैं?

ग्लोब एक प्रतिरूप (मॉडल) है जो पृथ्वी को दर्शाता है। यह ठीक पृथ्वी की तरह ही गेंद के आकार का होता है। ग्लोब का नीला भाग समुद्र और महासागरों को दर्शाता है जो हमारी पृथ्वी का तीन चौथाई भाग है। सामान्यतः समुद्र महासागरों की तुलना में छोटे होते हैं और भूमि से घिरे होते हैं जबकि महासागर अधिक विशाल और खुले जलक्षेत्र होते हैं। ग्लोब का अन्य भाग स्थलखंड दर्शाता है जहाँ सभी देश स्थित हैं।

A model of the globe
🔍

पता कीजिए

ग्लोब का अध्ययन कीजिए और नीचे दिए गए स्थान पर लिखिए कि जब भारत में दिन होता है तब किन देशों में रात होती है?

एक वर्ष में हुए हमारे आस-पास के परिवर्तन (ऋतुएँ)

ऋतुओं पर आधारित पत्रिका

सबा और अपर्णा अपने विद्यालय के उद्यान में बैठकर अपनी ऋतुओं पर आधारित पत्रिकाओं को देख रही हैं।

आपने भी वर्षभर में अपने आस-पास के संसार में होने वाले परिवर्तनों का निकटता से अनुभव किया होगा और आपके ध्यान में आए बिंदुओं को अपनी पत्रिका में लिखा होगा।

Two girls reading books in a park

Illustration of diverse animals and plants

अब समय आ गया है कि आप अपने अवलोकनों को अपनी पत्रिका में लिखें। आइए इसे सबा और अपर्णा की भाँति मिलकर करें।

कक्षा की गतिविधि — ऋतुओं का आरेख

वर्षभर आप प्रकृति, पौधों, पशु-पक्षियों, सूर्य के प्रकाश, जल और मानव गतिविधियों के जिज्ञासु अन्वेषक बने रहे। अब समय आ गया है कि इन सभी शिक्षाप्रद अनुभवों को एक साथ जोड़ा जाए और वर्षभर में होने वाले इन परिवर्तनों तथा इनके क्रम को समझा जाए।

चरण 1— कक्षा के लिए एक आरेख बनाना

आइए हम अपनी पत्रिका से अवलोकनों को ध्यान में रखते हुए कक्षा की दीवार के लिए एक आरेख बनाना आरंभ करें। इसमें हम अपनी पत्रिका की टिप्पणियाँ लिख सकेंगे। इसकी सहायता से हम सभी के अवलोकनों को एक ही स्थान पर देख सकेंगे ताकि हम पूरे वर्ष के दौरान हुए अवलोकनों को एक साथ देख सकें।

आरेख में अप्रैल—जून, जुलाई—सितंबर, अक्टूबर—दिसंबर और जनवरी—मार्च तक की समय अवधियों को स्तंभों में बाँटा जाएगा। पंक्ति में पौधों का जीवन; पशु और पक्षी; वायु, उष्मा और प्रकाश; जल और जल निकाय; तथा मानव गतिविधियाँ लिखी जाएँगी।


आरेखीय प्रारूप

विषय अप्रैल—जून जुलाई—सितं. अक्टू.—दिसं. जन.—मार्च
पौधों का जीवन
पशु और पक्षी
वायु/प्रकाश
जल निकाय
मानव क्रियाएँ

चरण 2— प्रारूप भरिए

प्रत्येक बक्से के लिए अपनी पत्रिका में लिखी गई टिप्पणियाँ और अनुभव कक्षा में साझा करें। टिप्पणियों पर चर्चा की जाएगी और मुख्य टिप्पणियाँ आरेख में लिखी जाएँगी।


Students filling a chart in class

अगला विद्यार्थी इसी प्रकार अगले बक्से को भरने के लिए उठ सकता है। इस प्रकार आपके सभी अवलोकन बिंदु कक्षा के आरेख में सम्मिलित हो जाएँगे। अब सभी विद्यार्थी आरेख को देख सकते हैं और इससे सीख सकते हैं।

चरण 3— वर्षभर में हुए परिवर्तनों का अध्ययन

अब समय आ गया है कि हम वर्षभर में हुए परिवर्तनों के क्रम को समझें और उनका गहनता से अध्ययन करें।

आइए हम सभी विद्यार्थी पाँच समूहों में बँट जाएँ। प्रत्येक समूह प्रस्तुत आरेख में से एक विषय का चुनाव करेगा और विभिन्न समय अवधियों में हुए परिवर्तन क्रम का अध्ययन करेगा।

  • 🍃 समूह 1 — पौधों का जीवन
  • 🐦 समूह 2 — पशु और पक्षी
  • ☀️ समूह 3 — वायु, उष्मा और प्रकाश
  • 💧 समूह 4 — जल और जल निकाय
  • 🚶 समूह 5 — मानव गतिविधियाँ

कल्पनाशीलता और रचनात्मकता का उपयोग करते हुए आप अपने विषय पर पोस्टर बनाइए तथा उसमें वर्षभर होने वाले परिवर्तनों को दर्शाइए।

उदाहरण के लिए:

🍃

समूह 1 यह दिखाएगा कि पौधों में अलग-अलग महीनों में किस प्रकार परिवर्तन होता है, जैसे— पत्ते, फूल या फल।

💧

समूह 4 दर्शा सकता है कि अलग-अलग महीनों में तालाब, गड्ढे अथवा वर्षा में किस प्रकार परिवर्तन होता है।

पोस्टर तैयार करने के पश्चात इसे अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।


चरण 4— पूरे वर्ष का एक साथ अवलोकन

जब सभी समूह अपनी प्रस्तुतियाँ कर लें तो नए समूह बनाइए। परंतु ध्यान रहे कि प्रत्येक नए समूह में प्रत्येक विषय से एक विद्यार्थी होना चाहिए। अब प्रत्येक समय अवधि के लिए चार नए समूह बनाइए—

  • समूह 1 — अप्रैल—जून
  • समूह 2 — जुलाई—सितंबर
  • समूह 3 — अक्टूबर—दिसंबर
  • समूह 4 — जनवरी—मार्च

अब प्रत्येक समूह अपनी चुनी हुई समय अवधि के लिए आरेख पर दर्शाए गए सभी पाँच विषयों के अवलोकनों का विश्लेषण करेगा।

इन अवलोकनों की सहायता से अपनी समय अवधि (उदाहरण के लिए, जनवरी—मार्च) के विषय में जो आपने प्रकृति में देखा, उसे लोगों के जीवन में घटित होने वाले परिवर्तनों से जोड़ते हुए एक संक्षिप्त कहानी लिखिए। इसे कक्षा में पढ़कर सुनाइए।

ऋतुओं के विषय में पता लगाना

हमने देखा कि वर्षभर में पौधों में किस प्रकार परिवर्तन होता है, पशु कैसे व्यवहार करते हैं, हवा कैसी लगती है, जल के साथ क्या होता है और वर्षभर लोग क्या करते हैं।

अब आपको यह समझ में आ गया होगा कि प्रकृति में वर्षभर धीरे-धीरे परिवर्तन होते रहते हैं। मौसम पहले कम गर्म होता है इसके पश्चात गर्मी बढ़ती जाती है इसके पश्चात वर्षा होती है और इसके पश्चात मौसम धीरे-धीरे ठंडा होने लगता है और सर्दी की ऋतु आती है। इसके पश्चात मौसम पुनः धीरे-धीरे गर्म होने लगता है।

ये परिवर्तन एक निर्धारित क्रम में एक प्राकृतिक लय के साथ प्रत्येक वर्ष घटित होते हैं। प्रकृति में दोहराए जाने वाले इस क्रम को ही हम ‘ऋतुएँ’ कहते हैं।

आपके क्षेत्र में ऋतुओं को क्या कहते हैं?


क्या आप जानते हैं कि भारत में कितनी ऋतुएँ होती हैं? भारत में हम कुछ महीनों के अंतराल में प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों के आधार पर छह ऋतुओं का अनुभव करते हैं।

ऋतु वर्ष के महीने
वसंत
ग्रीष्म
वर्षा
शरद
हेमंत
शिशिर

लिखिए

जब ऋतु परिवर्तित होती है तो आप कैसा अनुभव करते हैं? क्या आप चाहेंगे कि वर्षभर केवल एक ही ऋतु बनी रहे? अपने दिए गए उत्तर के लिए कारण भी बताइए।

चर्चा कीजिए

केरल की शीत ऋतु कश्मीर की शीत ऋतु से अलग होती है। असम की वर्षा ऋतु राजस्थान की वर्षा ऋतु से अलग होती है। आपको क्या लगता है, ऐसा क्यों होता है?

ऋतुओं का उत्सव

भारत में ऋतुओं से जुड़े कई गीत गाए जाते हैं। क्या आप ऐसे किसी गीत के विषय में जानते हैं? कुछ गीतों के विषय में पता कीजिए।

किसान अलग-अलग ऋतु में फसलें उगाते हैं। कुछ फसलों की पैदावार शीत ऋतु में तो कुछ फसलों की पैदावार ग्रीष्म ऋतु में अच्छी होती है। वहीं कुछ फसलें वर्षा ऋतु में बोई जाती हैं क्योंकि उन्हें बढ़ने के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है।

अपने शिक्षक की और बड़ों की सहायता से यह जानने का प्रयास कीजिए कि आपके क्षेत्र में ग्रीष्म ऋतु और शीत ऋतु में उगने वाली फसलें कौन-सी हैं?

ग्रीष्मकालीन फसलें शीतकालीन फसलें

हमारे बहुत-से पर्व ऋतुओं से संबंधित हैं। आइए देखते हैं कि क्या आप इन पर्वों का उन ऋतुओं से मिलान कर सकते हैं जिनमें उन्हें मनाया जाता है?

क्र. पर्व ऋतु
1. पोंगल, मकर संक्रांति (घ) शीत
2. होली (क) वसंत — जब फूल खिलते हैं
3. दीपावली (ख) शरद — जब उपज प्राप्त होती है
4. बैसाखी, बिहू, आदि (ग) नव वर्ष और उपज का उत्सव

प्रत्येक ऋतु अपने साथ कुछ विशेष गुण लेकर आती है और उसका अपना एक अलग चमत्कारिक प्रभाव होता है। ऋतुएँ मात्र मौसम का परिवर्तन नहीं होतीं अपितु वे हमारे पूरे परिवेश को प्रभावित करती हैं। हमने देखा है कि ऋतुओं से हमें यह समझने में सहायता मिलती है कि पौधे कैसे बढ़ते हैं, पशु कैसे जीते हैं, लोग क्या खाते, पहनते और करते हैं। हम जो फसलें काटते हैं, पर्व मनाते हैं, सब पर ऋतुओं का प्रभाव होता है। ऋतुएँ हमारे जीवन में एक लय लाती हैं और हमें स्मरण कराती हैं कि यह परिवर्तन स्वाभाविक और आवश्यक है।

इस प्रकार ऋतुएँ केवल हमारी कार्यप्रणाली को ही निर्धारित नहीं करतीं अपितु हमें जीवन-चक्र के विषय में भी सिखाती हैं। जब हम ऋतुओं को समझते हैं तो हम यह भी समझ पाते हैं कि जीवन किस प्रकार चक्रों में आगे बढ़ता है। प्रत्येक दिन जब आप बाहर निकलते हैं तो प्रकृति की इस लय और धीरे-धीरे हो रहे ऋतु परिवर्तन को देखते हैं।

💡

आइए विचार करें

1. ऋतुओं में आए परिवर्तनों के विषय में अपने अनुभव बताइए।

2. अपने परिवार के सदस्यों से ऋतुओं के विषय में चर्चा कीजिए और उनके अनुभवों को लिखिए। क्या आपको ऋतुओं के क्रम या उनमें होने वाले परिवर्तनों में कोई बड़ा अंतर दिखाई दिया? आपके अनुसार इन परिवर्तनों के क्या कारण हो सकते हैं?

3. ऋतुओं के स्थानीय नाम पता कीजिए। नीचे अपनी भाषा और क्षेत्र-विशेष के अनुसार उनके नाम लिखिए।

  • (क) वसंत ....................................................................
  • (ख) ग्रीष्म ....................................................................
  • (ग) वर्षा ....................................................................
  • (घ) शरद ....................................................................
  • (ङ) हेमंत ....................................................................
  • (च) शीत ....................................................................

ऋतु भोजन वस्त्र पर्व प्रकृति
वसंत
ग्रीष्म
वर्षा
शरद
हेमंत
शिशिर
विषय समय अवधि
अप्रैल-जून जुलाई-सितं. अक्टू.-दिसं. जन.-मार्च
पौधों का जीवन
पशु और पक्षी
वायु/उष्मा
जल निकाय
मानव क्रियाएँ