पृथ्वी — हम सबका घर
नीला ग्रह
“पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखने पर पहला विचार मन में यह आता है कि यह पूरी तरह एक है। इसकी कोई सीमा बाहर से दिखाई ही नहीं देती है। ऐसा लगता है ना तो सीमा अस्तित्व में हैं और ना ही कोई राज्य अथवा देश। हम सभी मानवता का हिस्सा हैं, पृथ्वी हमारा घर है और हम सभी इसमें एक साथ मिल-जुलकर रहते हैं।”
ये प्रेरणादायक शब्द अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुँचने वाले पहले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के हैं जो उन्होंने प्रधानमंत्री से कहे थे।
अंतरिक्ष की ऊँचाई से हमें पृथ्वी छोटी-सी दिखाई देती है और लघु स्थान जैसे कि हमारा शहर या गाँव इत्यादि दिखाई नहीं देते हैं। हमें अपने नीले ग्रह पर केवल बड़े आकार वाले भू-भाग और समुद्र दिखाई देते हैं।
गतिविधि 1
हम सभी इस ग्रह पर रहते हैं और हममें से प्रत्येक के पास अपना पता है। अपना पता नीचे दिए गए स्थान पर लिखिए।
1. मेरा पता
2. निम्नलिखित का पता लगाने के लिए ग्लोब का प्रयोग कीजिए—
(क) क्या पृथ्वी के सभी महासागर आपस में जुड़े हुए हैं?
(ख) ग्लोब पर भारत कहाँ स्थित है?
जब हम पृथ्वी को बहुत ऊपर से देखते हैं तो हमें देशों के मध्य कोई सीमा या रेखा दिखाई नहीं देती। प्रकृति की अपनी कोई सीमा नहीं है। अतः वायु, जल, बादल और यहाँ तक कि बीज और पशु-पक्षी पूरी दुनिया में स्वतंत्र रूप से घूमते हैं।
पूरे विश्व के लोग आपस में अनेक माध्यमों से जुड़े हुए हैं। जैसे पूरे भारत में लोगों द्वारा नदियाँ, उत्सव और फल इत्यादि एक-दूसरे के साथ साझा किए जाते हैं, वैसे ही पूरे विश्व के लोग साझा की जाने वाली वस्तुओं के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। हम जो वस्त्र पहनते हैं, जो भोजन करते हैं तथा जिन खिलौनों से खेलते हैं, वे विश्व के अलग-अलग भागों से आए हुए हो सकते हैं। विचार, भोजन, संगीत, कहानियाँ तथा आविष्कार भी विभिन्न देशों द्वारा साझा किए जाते हैं।
यह सब कुछ प्रकृति, व्यापार, यात्रा और पृथ्वी के प्रति हमारी संवेदनशीलता एवं देखभाल से जुड़ा हुआ है। पृथ्वी हमारा एक साझा घर है।
यह हम कुछ कहानियों के माध्यम से अधिक गहराई से समझेंगे।
कहानी 1— प्रवासी पक्षी
क्या आपने कभी बड़े समूहों में काले और गुलाबी पक्षी देखे हैं? ये गुलाबी मैना या गुलाबी सारिका होते हैं। ये प्रत्येक सर्दियों में रूस के दक्षिणी भाग, मंगोलिया और आस-पास के देशों से यात्रा करते हुए हजारों किलोमीटर दूर भारत में आते हैं।
ये पक्षी यहाँ आकर गर्म मौसम का आनंद लेते हैं और टिड्डे-टिड्डियों तथा कीड़ों-मकौड़ों को खाकर किसानों की सहायता करते हैं क्योंकि ये कीट फसलों को क्षति पहुँचाते हैं। क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि ये छोटे-छोटे से पक्षी इतनी लंबी यात्रा करते हैं और इतने सहायक होते हैं? जब पशु स्वतंत्र रूप से और सुरक्षित विचरण करते हैं तो यह दर्शाता है कि समस्त विश्व में प्रकृति कितनी गहनता से जुड़ी हुई है।
लिखिए
1. क्या गुलाबी मैना आपके क्षेत्र में आती है? इसे आपकी स्थानीय भाषा में क्या कहते हैं?
2. यह कहानी प्रकृति के विषय में क्या बताती है?
गतिविधि 2
- 1. आप अपने क्षेत्र में आने वाले पाँच पक्षियों का पोस्टर बनाइए। यह जानने का प्रयास कीजिए कि वे कहाँ से आते हैं।
- 2. एक धागे की सहायता से गुलाबी मैना की यात्रा को ग्लोब पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक दर्शाइए। इनकी रूस या मंगोलिया से भारत तक की यात्रा को दर्शाइए।
- 3. कल्पना कीजिए कि आप एक पक्षी हैं जो विश्व की यात्रा कर रहे हैं। एक छोटा-सा पोस्टकार्ड या संदेश लिखिए जिसमें आप यह बताएँगे कि रास्ते में आपने क्या-क्या देखा है और यात्रा के दौरान आपकी कौन-कौन सहायता करता है (हवा, समुद्री धाराएँ, गर्म मौसम)। इसे अपने साथियों के साथ भी साझा कीजिए।
लिखिए
‘प्रकृति की कोई सीमा नहीं होती’ इस कथन से आप क्या समझते हैं?
कहानी 2 — योग — विश्व को भारत का उपहार!
प्राचीन काल से ही भारत के लोग शारीरिक स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति के लिए योगाभ्यास करते आ रहे हैं। यह स्वयं और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने का एक माध्यम था। क्या आप जानते हैं कि भारत में 3000 से भी अधिक वर्षों से योगाभ्यास किया जा रहा है।
समय बीतने के साथ-साथ भारत के यात्रियों, विद्वानों और शिक्षकों ने इसे विश्व के अन्य भागों तक पहुँचाया। धीरे-धीरे अन्य देशों में रहने वाले लोगों ने भी योग सीखा और इसका अभ्यास करना आरंभ किया। वर्तमान में लगभग सभी देशों में योगाभ्यास किया जाता है।
आपके अनुसार विभिन्न देशों में योग के लोकप्रिय होने के क्या कारण हो सकते हैं?
क्या आप किसी योगासन का नाम बता सकते हैं जिसका अभ्यास आपने किया है अथवा किसी को करते देखा है? आपके अनुसार इस योगाभ्यास के क्या लाभ हैं?
कहानी 3 — मिर्च — एक मसाला जिसने हमारा जीवन बदल दिया!
वर्षों पहले मिर्च के पौधे भारत से बहुत दूर दक्षिण अमेरिका में पाए जाते थे। यद्यपि लगभग 400 से 500 वर्ष पूर्व पुर्तगाली यात्री अपने साथ मिर्च लेकर दक्षिण अमेरिका से भारत आए। मिर्च को नई भूमि, नई मिट्टी और नई जलवायु प्राप्त हुई और इस प्रकार यह भारतीय रसोईघरों तक पहुँची।
सोचिए फिर क्या हुआ होगा? भारत के लोगों ने इसे इतना पसंद किया कि आज हम अपना भोजन मिर्च के बिना सोच भी नहीं सकते! मिर्च के भारत में आगमन से पूर्व हम भोजन को मसालेदार बनाने के लिए काली मिर्च का उपयोग करते थे।
यह कितना रोचक है कि मिर्च की यात्रा इस बात का बहुत अच्छा उदाहरण है कि किस प्रकार सुदूर क्षेत्रों से लाए गए पौधे हमारी संस्कृति और खानपान का अभिन्न अंग बन गए हैं।
1. क्या होगा यदि हमारी रसोई में से मिर्च एक सप्ताह के लिए गायब हो जाए?
2. अपने माता-पिता से ऐसे व्यंजनों के नाम पूछकर लिखिए जिनमें लाल मिर्च के स्थान पर काली मिर्च का उपयोग किया जाता है।
- 1. रंगीन धागे की सहायता से ग्लोब पर मिर्च की यात्रा को दक्षिण अमेरिका से भारत तक अंकित कीजिए।
- 2. आलू, टमाटर, मूँगफली, काजू और अन्य खाद्य पदार्थों की भी ऐसी ही कहानी है। इन खाद्य पदार्थों ने भारत तक पहुँचने के लिए एक लंबी यात्रा की है और अब हम अपने प्रतिदिन के भोजन में इनका आनंद लेते हैं। इनमें से किसी एक की कहानी के विषय में पता करके लिखिए।
कहानी 4 — शक्कर की मीठी कहानी!
जिस प्रकार मिर्च यात्रा करके भारत तक आई, ठीक उसी प्रकार शक्कर ने भी भारत से अन्य देशों की यात्रा तय की है।
प्राचीन समय में विश्व के लोग शक्कर के विषय में नहीं जानते थे। भोजन को मीठा बनाने के लिए इसके स्थान पर वे शहद और अन्य प्राकृतिक रूप से मीठे पदार्थों का उपयोग करते थे।
पदार्थों का उपयोग करते थे। सर्वप्रथम भारत में गन्ने के रस से गुड़ बनाने की विधि खोजी गई थी। कालांतर में हमने गुड़ से चीनी बनाने की विधि की खोज की।
यह ज्ञान तकनीकी यात्रा और व्यापार के माध्यम से विश्व के अन्य भागों में पहुँचा।
क्या आप जानते हैं कि चावल, आम और केले जैसे फल भी भारत से दूसरे देशों तक पहुँचे हैं? आज पूरे विश्व के लोग इन उपहारों का आनंद लेते हैं किंतु नहीं जानते कि इनकी यात्रा भारत से ही आरंभ हुई थी।
हमारा भोजन विश्व के एक यात्री की भाँति है जिसमें पूरे विश्वभर के विभिन्न क्षेत्रों का स्वाद और कहानियाँ सम्मिलित हैं। यह हमें बताता है कि विश्व में हम कितनी गहनता से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
कहानी 5 — मैक्सिको के गेंदे के फूल का भारत आगमन!
क्या आप जानते हैं कि गेंदे का फूल मैक्सिको का है? मैक्सिको की संस्कृति में गेंदे के फूल त्योहारों में उपयोग लाए जाने वाले विशेष फूल हैं। वहीं से गेंदा विश्व के अन्य स्थानों की यात्रा करते हुए भारत पहुँचा, जहाँ उसे नया घर मिला। संभवतः इसके नारंगी और पीले रंग हमें बहुत पसंद आए क्योंकि इसने हमें सौहार्द, उत्सव और आध्यात्मिकता का स्मरण दिलाया। आज गेंदा भारत में मंदिरों, घरों, विवाहों से लेकर दीपावाली जैसे पर्वों में प्रत्येक स्थान पर देखने को मिलता है।
क्या यह तथ्य अद्भुत नहीं है कि एक छोटा-सा फूल इतनी लंबी यात्रा के पश्चात हमारे उत्सवों का प्रमुख भाग बना?
1. आपके अनुसार भारत और मैक्सिको की संस्कृति में उत्सवों के अवसर पर गेंदे का प्रयोग क्यों किया जाता है?
2. आपके अनुसार विभिन्न देशों के लोग उत्सवों में फूलों का उपयोग क्यों करते हैं?
कहानी 6 — गाय का ब्राजील पहुँचना!
वर्षों पहले पुर्तगाली व्यापारी भारत से कुछ गायें अपने साथ ब्राजील ले गए थे। ये गायें हृष्ट-पुष्ट थीं और अच्छा दूध देती थीं। इन गायों ने ब्राजील के मौसम के साथ सामंजस्य बिठा लिया।
समय के साथ इन गायों की संख्या भी बढ़ती चली गई। आज ब्राजील के दूध का तीन चौथाई से भी अधिक भाग भारतीय नस्लों की गाय — गिर, कांकरेज और ओंगोल पर ही निर्भर है।
ये गायें ब्राजील में इतनी महत्वपूर्ण हो गई हैं कि अब इनके चित्र टिकट और सिक्कों पर भी पाए जाते हैं!
यह कहानी पशुओं के एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने के विषय में क्या बताती है?
- 1. अपने शिक्षक या किसी बड़े की सहायता से गायों की कम से कम पाँच नस्लों के नाम पता कीजिए।
- 2. अपने घर या विद्यालय की कुछ ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए जो संभवतः विश्व के किसी अन्य भाग से आई हों। पता लगाइए कि वे मूल रूप से कहाँ से आईं।
| वस्तुएँ | नाम | मूल स्थान |
|---|---|---|
| वस्त्र | जींस | अमेरिका |
| भोजन | ||
| खेल | ||
| वाद्ययंत्र | ||
| वृक्ष |
परस्पर जुड़ा हुआ जीवन
ये कहानियाँ केवल पक्षियों, पौधों या वस्तुओं के विषय में नहीं हैं, ये कहानियाँ लोगों, यात्राओं, साझेदारी और संस्कृतियों के मेल-जोल की हैं। हम भिन्न-भिन्न भाषाएँ बोलते हैं अथवा भिन्न-भिन्न खेल खेलते हैं किंतु हम सभी एक-दूसरे से कुछ न कुछ सीखते हैं और प्रेरित होते हैं।
महाद्वीपों को पार करने वाला या एक पक्षी, नई भूमि में उगता बीज या फिर विश्व के हर कोने में किया जा रहा योगाभ्यास यह सब एक शाश्वत सत्य की स्मृति कराते हैं कि हम सभी परस्पर जुड़े हुए हैं।
हमारी पृथ्वी, भूमि और जल से कहीं व्यापक है। यह जीवन का एक जीवित संजाल है जिसमें सभी मनुष्य, पशु, पौधे और विचार यात्रा करते हैं, मेल-जोल करते हैं और एक साथ विकास करते हैं।
हम एक-दूसरे के साथ सीखते, समझते एवं साझा करते हुए अपने ग्रह का संरक्षण भी करते हैं और इस प्रकार परस्पर संबद्धता का भाग बनते हैं।
- 1. अपने दादा-दादी, नाना-नानी या पड़ोसी का साक्षात्कार लीजिए— उनसे व्यंजन, वस्तुओं, किसी गीत या किसी रीति-रिवाज, परंपरा या अभ्यास के विषय में चर्चा कीजिए जो उनके बचपन में प्रचलन में नहीं थी किंतु आज प्रचलन में है। पता लगाइए कि यह कहाँ से आया?
- 2. आपने जो कहानियाँ पढ़ीं उनके आधार पर उन वस्तुओं की सूची बनाइए जो अन्य देशों से भारत आईं और भारत की वे वस्तुएँ जो यात्रा करके अन्य देशों में पहुँँची। इसके पश्चात दो रंगीन धागों की सहायता से इन्हें मानचित्र पर दर्शाने का प्रयत्न कीजिए।
पृथ्वी एक परिवार!
प्राचीन भारत की एक बहुत ही सुंदर कहावत है— “वसुधैव कुटुम्बकम्” जिसका अर्थ है ‘पूरा विश्व एक परिवार है।’
समस्त मानव जाति, पशु, वनस्पति, नदियाँ और यहाँ तक कि वायु और आकाश इसी परिवार का अंग हैं।
पृथ्वी केवल हमारा घर ही नहीं है। यह हमारे लिए एक उपहार है जिसका संरक्षण हमें स्वयं, अन्य व्यक्तियों और भविष्य के लिए अनिवार्य रूप से करना चाहिए।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का प्रतीक चिह्न प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन को दर्शाता है। यह हमें स्मरण कराता है कि मानव और प्रकृति परस्पर संबद्ध हैं और उनमें पारस्परिक सामंजस्य अनिवार्य है। साथ ही यह प्रतीक चिह्न हमें यह भी सिखाता है कि पर्यावरण की देखभाल करना ही स्वयं की देखभाल करना है।
1. ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा हमें क्या सिखाती है?
2. ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा को अपने शब्दों में लिखिए।
3. प्रत्येक व्यक्ति के भिन्न होते हुए भी हम एक बड़े परिवार की तरह कैसे रह सकते हैं?
1. कोई एक विचार चुनकर उसके विषय में लिखिए कि किस प्रकार इसने कई वर्ष पूर्व एक स्थान से दूसरे स्थान तक की यात्रा की होगी? सोचिए कि यह कैसे लोगों के जीवन या चिंतन को परिवर्तित करने में सहायक रहा होगा?
2. पृथ्वी के संरक्षण या देखभाल का कोई एक उपाय लिखिए।
3. किसी एक ऐसी वस्तु का पता लगाइए जिसने भारत से अन्य देशों तक यात्रा की है और उसके विषय में लिखिए।
यह आपकी अपनी विशेष पत्रिका है जो आपको छोटे जासूस की भाँति संसार को जानने और समझने में सहायता करेगी! यदि आप गाँव, नगर, जंगल अथवा समुद्र तट के समीप रहते हैं तो आप प्रकृति का अवलोकन कर सकते हैं। अपने परिवेश को ध्यानपूर्वक देखिए, जैसे— आपका आँगन, विद्यालय प्रांगण, गाँव के खेत या समीप का कोई उपवन।
संपूर्ण वर्ष के प्रत्येक सत्र में एक बार चार प्रविष्टियाँ तैयार कीजिए। प्रत्येक प्रविष्टि के लिए एक ही स्थान का अवलोकन कीजिए और आगे दिए गए पाँच विषयों के संबंध में अपने अवलोकन लिखिए। आपको बड़े वाक्य नहीं लिखने, केवल छोटे-छोटे बिंदु लिखने हैं। चित्र अथवा जो वस्तु वहाँ मिली हो, उसे चिपका सकते हैं।
यह आपकी अपनी पत्रिका है। इसे रंगीन, रोचक, अनोखी और आनंददायी बनाइए!
I
| विषय | मेरा अवलोकन |
|---|---|
वनस्पति जीवन
|
वृक्षों या पौधों का अवलोकन कीजिए या किसी एक वृक्ष को चुन लीजिए। क्या इस पर फूल अथवा फल आते हैं? क्या इसकी पत्तियाँ गिरती हैं? क्या इसके रंग में कोई परिवर्तन होता है? कौन-कौन से पक्षी, तितलियाँ या मधुमक्खियाँ इसके पास आती हैं? क्या लोग इसके फूल, फल या पत्तियाँ एकत्र करते हैं? क्या कोई नया पौधा उगा या कोई पौधा मुरझाया? |
पक्षी और पशु
|
कौन-कौन से पशु-पक्षी, जंतु या कीट दिखे? वे क्या कर रहे थे (उदाहरण के लिए उड़ रहे थे, घोंसला बना रहे थे, भोजन कर रहे थे, विश्राम कर रहे थे)? क्या कोई घोंसला या नन्ही चिड़ियाँ अथवा पशु-पक्षियों के बच्चे दिखाई दिए? क्या आस-पास बहुत-से कीट दिखाई दे रहे थे? कोई ऐसा विशेष या नया पशु जो सामान्यतः आपको नहीं दिखता है? क्या वे समूहों में थे? |
वायु, ताप और प्रकाश
|
उस समय का मौसम कैसा था (धूप, वर्षा, बादल या कोहरा)? आपको तापमान कैसा अनुभव हुआ? वायु कैसी प्रतीत हो रही थी (गर्म, ठंडी, स्वच्छ या आर्द्र)? सूर्य किस समय उदित और अस्त हुआ? आकाश में कौन-कौन से रंग दिखाई दिए? |
जल और जल निकाय
|
क्या जल स्वच्छ, गंदा, बहता हुआ अथवा स्थिर था? जल-स्तर ऊपर गया या नीचे आया? क्या पिछले कुछ समय में वर्षा हुई थी? क्या आपने कहीं पानी के गड्ढे देखे? घर अथवा विद्यालय में पर्याप्त जल था? क्या आपको जल के सूखने या जल स्तर कम होने के कोई संकेत मिले? |
मानव गतिविधियाँ
|
लोगों का पहनावा क्या है (ऊन के वस्त्र, सूती वस्त्र, वर्षा-वस्त्र या रेनकोट)? लोग अधिकांश समय घर में व्यतीत कर रहे हैं अथवा बाहर? कोई विशेष मौसमी व्यंजन बनाया गया या मौसमी फल अथवा सब्जियाँ खाई गईं? क्या लोगों ने कोई पर्व या उत्सव मनाया? क्या कोई फसल बोई गई अथवा काटी गई? |
| विषय | मेरा अवलोकन |
|---|---|
वनस्पति जीवन
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पक्षी और पशु
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वायु, ताप और प्रकाश
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जल और जल निकाय
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मानव गतिविधियाँ
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| विषय | मेरा अवलोकन |
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वनस्पति जीवन
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पक्षी और पशु
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वायु, ताप और प्रकाश
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जल और जल निकाय
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मानव गतिविधियाँ
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| विषय | मेरा अवलोकन |
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वनस्पति जीवन
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पक्षी और पशु
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वायु, ताप और प्रकाश
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जल और जल निकाय
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मानव गतिविधियाँ
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| विषय | मेरा अवलोकन |
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वनस्पति जीवन
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पक्षी और पशु
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वायु, ताप और प्रकाश
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जल और जल निकाय
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मानव गतिविधियाँ
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वनस्पति जीवन
पक्षी और पशु
वायु, ताप और प्रकाश
जल और जल निकाय
मानव गतिविधियाँ