3 चाँद का कुरता
हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला, “सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला।
सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ,
ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।
आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का,
हो अगर तो ला दो कुरता ही कोई भाडे का।"
बच्चे की सुन बात कहा माता ने, “अरे सलोने !
कुशल करें भगवान, लगें मत तुझको जादू-टोने।
जाड़े की तो बात ठीक है, पर मैं तो डरती हूँ,
एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।
कभी एक अंगुल-भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा,
बड़ा किसी दिन हो जाता है और किसी दिन छोटा।
घटता-बढ़ता रोज किसी दिन ऐसा भी करता है,
नहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पड़ता है।
अब तू ही तो बता, नाप तेरी किस रोज लिवाएँ,
सी दें एक झिंगोला जो हर रोज बदन में आए?”
-रामधारी सिंह 'दिनकर'
बातचीत के लिए
1. आकाश आपको कब-कब बहुत सुंदर दिखाई देता है और क्यों?
2.
चाँद को ठंड लगती है इसलिए वह झिंगोला माँग रहा है। सूरज क्या कहकर अपनी माँ से कपड़े माँगेगा?
3.
आपने आकाश में क्या-क्या परिवर्तन होते देखे हैं?
4. जब आप अपने अभिभावक के साथ नए कपड़े खरीदने जाते हैं तब किन-किन बातों का ध्यान रखते हैं?
कविता से
नीचे दिए गए प्रश्नों में चार विकल्प हैं। इनमें एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।
सही विकल्प पर चाँद का चित्र () बनाइए -
1. चाँद की माँ उसे झिंगोला क्यों नहीं दे पा रही है?
(क) चाँद के पास पहले से ही बहुत से झिंगोले हैं। ( )
(ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है। ( )
(ग) चाँद अपने वस्त्र सँभालकर नहीं रखता है। ( )
(घ) चाँद की माँ अभी कोई नया वस्त्र नहीं सिलवाना चाहती है।( )
2. कविता में चाँद के बदलते आकार का वर्णन करने के लिए किन शब्दों का प्रयोग किया गया है?
(क) एक अंगुल-भर चौड़ा ( )
(ख) एक फुट मोटा ( )
(ग) किसी दिन बड़ा
( )
(घ) किसी दिन छोटा ( )
3
. कविता में ठंड के मौसम का वर्णन करने के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग किया गया है?
(क) ऊन का मोटा झिंगोला ( )
(ख) सन-सन चलती हवा ( )
(ग) ठिठुर-ठिठुरकर यात्रा ( )
(घ) भाड़े का कुरता ( )
सोचिए और लिखिए
1.
कविता की किन पंक्तियों से पता चलता है कि चाँद किसी एक दिन बिलकुल दिखाई नहीं देता है?
2.
सर्दी से बचने के लिए चाँद, माँ से ऊन के झिंगोले के अतिरिक्त और कौन-से कपड़े माँग सकता है?
3.
जाड़े के मौसम में चाँद को क्या कठिनाई होती है?
4. चाँद किस यात्रा को पूरा करने की बात कर रहा है?
अभिभावक और आप
जब नीचे दी गई बातें एवं घटनाएँ होती हैं तब आपके अभिभावक क्या-क्या कहते या करते हैं? अपने-अपने अनुभव कक्षा में साझा कीजिए।
- जब आप ठंडी रात में सोते समय अपने पैरों से कंबल या रजाई उतार फेंकते हैं।
- जब आप ठंड में आइसक्रीम खाने का हठ करते हैं।
- जब आप दूध पीने, हरी सब्जियाँ और फल आदि खाने से कतराते हैं।
- जब आप देर तक सोते हैं।
- जब कोई आपके घर आपकी शिकायत करने आता है।
- जब आपके अच्छे कामों के लिए आपकी प्रशंसा होती है अथवा पुरस्कार मिलता है।
अनुमान और कल्पना
1. आप अपनी माँ से चाँद का दुखड़ा कैसे बताएँगे?
2. गरमी और वर्षा से बचने के लिए चाँद अपनी माँ से क्या कहेगा? वह किस प्रकार के कपड़ों एवं वस्तुओं की माँग कर सकता है?
3
. चाँद ने माँ से कुरता किराए पर लाने के लिए क्यों कहा होगा?
4.
यदि माँ ने चाँद का कुरता सिलवा दिया होता तो क्या होता?
भाषा की बात
1
. “सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ।" कविता की इस पंक्ति में 'भर' शब्द का प्रयोग किया गया है। अब आप 'भर' की सहायता से पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए, जैसे – पानी गिलास भर है, उसने दिन भर पढ़ाई की आदि।
2.
नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यान से पढ़िए -
- (क) “ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।"
- (ख) “ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।"
- 3.नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया पहचानकर उन्हें दिए गए स्थानों में लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए
| पंक्ति | संज्ञा | सर्वनाम | विशेषण | क्रिया |
|---|---|---|---|---|
| हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला। | हठ, चाँद, दिन, माता | यह | एक | कर बैठा, बोला |
| आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का। | ||||
| सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला। | ||||
| ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ। |
चाँद का झिंगोला
1.
मान लीजिए कि चाँद, झिंगोले के लिए माँ, कपड़े के दुकानदार और दर्जी से संवाद करता है। बातचीत के कुछ अंश नीचे दिए गए हैं। आप इन्हें आगे बढ़ाइए। आप संवाद अपनी मातृभाषा में भी लिख सकते हैं।
चाँद और माँ का संवाद
चाँदः माँ, मुझे बहुत ठंड लगती है। मेरे लिए एक मोटा झिंगोला सिलवा दो !
माँ: तुझे सच में ठंड सताती होगी लेकिन एक समस्या है।
चाँदः समस्या? कैसी समस्या, माँ?
माँ: तेरा आकार तो प्रतिदिन बदलता रहता है। कभी छोटा, कभी बड़ा, कभी एकदम गायब! मैं कैसे नाप लूँ?
चाँदः (सोचकर) अरे हाँ! लेकिन फिर भी कोई उपाय तो होगा?
माँ:....................................................
चाँदः....................................................
माँ: ....................................................
चाँदः ....................................................
चाँद और कपड़े का दुकानदार
चाँदः
दुकानदार जी, मुझे एक गरम कपड़ा चाहिए जिससे मेरी सर्दी दूर हो जाए।
दुकानदारः अवश्य, कितने मीटर चाहिए?
चाँदः यही तो समस्या है! मैं कभी छोटा होता हूँ, कभी बड़ा। आप ही बताइए... कितने मीटर लूँ?
दुकानदारः (हँसकर) अरे छोटू चाँद ! जब आपका नाप ही तय नहीं तो कपड़ा कैसे दूँ? पहले नाप तो तय करके आओ!
चाँदः ....................................................
दुकानदारः ....................................................
चाँदः ....................................................
दुकानदारः ....................................................
चाँदः ....................................................
चाँद और दर्जी का संवाद
चाँदः दर्जी जी, मेरे लिए एक कुरता सिल दीजिए।
दर्जी: बिलकुल ! लेकिन पहले नाप तो दो।
चाँदः यही तो समस्या है! कभी मैं छोटा, कभी बड़ा हो जाता हूँ।
दर्जी: (हँसते हुए) तो फिर ऐसा करो, प्रतिदिन मेरे पास आओ और मैं प्रत्येक दिन तुम्हारे नाप का नया कुरता सिल दूँगा!
चाँदः (प्रसन्न होते हुए) फिर तो मुझे प्रतिदिन नए कपड़े मिलेंगे! लेकिन माँ मानेंगी नहीं !
दर्जी: ....................................................
चाँदः ....................................................
दर्जी: ....................................................
चाँदः ....................................................
2. अब आप इन संवादों पर कक्षा में शिक्षक की सहायता से अभिनय कीजिए।
कविता से आगे
1
. क्या चाँद की तरह आप भी अपनी माँ से किसी वस्तु के लिए हठ करते हैं? आप अपनी माँ को इसके लिए कैसे मनाते हैं?
2. आपकी माँ आपको किसी काम के लिए कैसे मनाती हैं?
3
. गरमी, सर्दी या वर्षा से बचने के लिए आपकी माँ आपको क्या कहती अथवा क्या-क्या करती हैं?
सोचिए, समझिए और बताइए
1.
कविता में चाँद अपनी माँ से बातें कर रहा है। मान लीजिए कि चाँद बोल नहीं सकता। अब वह अपनी माँ को अपनी बात कैसे बताएगा?
2.
मान लीजिए कि चाँद का एक मित्र है जो देख नहीं सकता। चाँद उसे अपने बदलते हुए आकार के बारे में कैसे समझाएगा?
पढ़िए और समझिए
1. चाँद के लिए कुरता सिलना एक कठिन कार्य है। इसलिए चाँद की माँ ने उसका कुरता सिलवाने के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। इसे पढ़िए और इसका प्रचार-प्रसार कर चाँद की माँ की सहायता कीजिए -
विज्ञापन
चाँद की माँ की विशेष घोषणा !
क्या आप हैं सबसे कुशल दर्जी?
क्या आप सिल सकते हैं ऐसा कुरता जो प्रतिदिन बदलते आकार में भी फिट आए?
समस्याः मेरा बेटा चाँद कभी एक अंगुल-भर छोटा तो कभी एक फुट मोटा हो जाता है। उसके लिए एक ऐसा कुरता चाहिए जो हर दिन उसके शरीर में फिट बैठ सके।
आवश्यकता
ऐसा कुरता जो अपने-आप छोटा-बड़ा हो सके
ऊन का मोटा झिंगोला ताकि ठंड से बच सके
यदि कुरता नहीं बन सकता तो भाड़े का भी चलेगा!
पुरस्कार
जो भी दर्जी इस अद्भुत कुरते को सिलने में सफल होगा, उसे मिलेगा विशेष पुरस्कार !
स्थानः चाँद की माँ का घर
संपर्क करें: आकाशवाणी से संदेश भेजें
शीघ्र आवेदन करें क्योंकि चाँद ठंड से ठिठुर रहा है।
2. अब एक रोचक विज्ञापन तैयार कीजिए जिसमें आप अपने लिए कोई वस्तु मँगवा रहे हों।
आपकी कलाकारी
आइए, चाँद के लिए एक कुरता बनाएँ।
सामग्री: रंगीन कागज, गोंद, कैंची, ग्लिटर, कपड़े के छोटे टुकड़े
बनाने की विधि
- चाँद का एक बड़ा चित्र बनाइए।
- अब अलग-अलग रंगीन कागज या कपड़े के टुकड़ों से चाँद के लिए सुंदर कुरता तैयार कीजिए।
- ग्लिटर या सितारों की आकृति बनाकर उसे सजाइए।
- अब तैयार कुरते को कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
1. पुस्तकालय में चाँद, सूरज, तारे, आकाश आदि पर बहुत-सी रोचक, मनोरंजक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें अवश्य उपलब्ध होंगी। उन पुस्तकों को ढूँढ़कर पढ़िए और उनके बारे में कक्षा में भी चर्चा कीजिए।
2. अपने शिक्षक, पुस्तकालय प्रभारी और मित्रों की सहायता से चाँद तथा सूरज की बदलती स्थितियों की और भी जानकारी प्राप्त कीजिए। यह भी पता लगाइए कि चंद्र ग्रहण एवं सूर्य ग्रहण कब-कब और क्यों होते हैं। आप अपने माता-पिता या अभिभावक से भी इनके बारे में बात कर सकते हैं।
बूझो तो जानें
तन है मेरा हरा-भरा,
रस से रहता सदा भरा।
भीतर से हूँ मैं लाल,
प्यास बुझाकर पूहूँ हाल।
हम दोनों हैं पक्के मित्र,
करते रहते काम विचित्र।
पाँच-पाँच सेवक हैं साथ,
लेकिन करते कभी न बात।
जागो प्यारे
उठो लाल, अब आँखें खोलो।
पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।
बीती रात कमल-दल फूले।
उनके ऊपर भौंरे झूले।
चिड़ियाँ चहक उठीं पेड़ों पर।
बहने लगी हवा अति सुंदर।
नभ में न्यारी लाली छाई।
धरती ने प्यारी छवि पाई।
भोर हुआ सूरज उग आया
। जल में पड़ी सुनहरी छाया।
ऐसा सुंदर समय न खोओ।
मेरे प्यारे अब मत सोओ।
– अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'