अध्याय-6
चतुर चित्रकार
चित्रकार सुनसान जगह में, बना रहा था चित्र,
इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र।
उसे देखकर चित्रकार के, तुरंत उड़ गए होश,
नदी, पहाड़, पेड़, पत्तों का, रह न गया कुछ जोश।
फिर उसको कुछ हिम्मत आई, देख उसे चुपचाप,
बोला सुंदर चित्र बना दूँ, बैठ जाइए आप।
उकडू-मुकडू बैठ गया वह, सारे अंग बटोर, बड़े ध्यान से लगा देखने, चित्रकार की ओर।
चित्रकार ने कहा – हो गया, आगे का तैयार,
अब मुँह आप उधर तो करिए, जंगल के सरदार।
बैठ गया पीठ फिराकर, चित्रकार की ओर,
चित्रकार चुपके से खिसका, जैसे कोई चोर।
बहुत देर तक आँख मूँदकर, पीठ घुमाकर शेर,
बैठे-बैठे लगा सोचने, इधर हुई क्यों देर?
झील किनारे नाव थी, एक रखा था बाँस,
चित्रकार ने नाव पकड़कर, ली जी भर के साँस।
जल्दी-जल्दी नाव चलाकर, निकल गया वह दूर,
इधर शेर था धोखा खाकर, झुंझलाहट में चूर।
शेर बहुत खिसियाकर बोला, नाव जरा ले रोक,कलम और कागज तो ले जा, रे कायर डरपोक।
चित्रकार ने कहा तुरंत ही, रखिए अपने पास, चित्रकला का आप कीजिए, जंगल में अभ्यास।
रामनरेश त्रिपाठी
बातचीत के लिए
- 1. चित्रकार की कौन-सी विशेषता आपको सबसे अधिक अच्छी लगी और क्यों?
- 2. शेर ने चित्रकार को 'कायर-डरपोक' कहा। क्या आपको लगता है कि चित्रकार वास्तव में कायर और डरपोक था या वह चतुर और समझदार था? अपने उत्तर का कारण बताइए।
- 3. आपके अनुसार ऐसे कौन-कौन से कार्य हैं जिनका निरंतर अभ्यास करने से उनमें कुशलता बढ़ जाती है?
- 4. यदि झील के किनारे नाव न होती तो चित्रकार शेर से अपनी जान बचाने के लिए क्या उपाय करता?
पाठ से
- नीचे दिए गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तरों पर तारे का चित्र (*) बनाइए
- 1. चित्रकार ने जंगल के किस स्थान पर चित्र बनाना शुरू किया?
- (क) नदी के किनारे ( )
- (ख) सुनसान जगह ( )
- (ग) पेड़ों के नीचे ( )
- (घ) पहाड़ की चोटी पर ( )
- 2. यमराज का मित्र किसे कहा गया है?
- (क) शेर को ( )
- (ख) चित्रकार को ( )
- (ग) नाविक को ( )
- (घ) शिकारी को ( )
- 3. चित्रकार ने शेर से अपने प्राण कैसे बचाए?
- (क) धैर्य और चतुराई से ( )
- (ख) क्रोध और शक्ति से ( )
- (ग) डर और घबराहट से ( )
- (घ) अहंकार और गर्व से ( )
- 4. चित्रकार ने शेर को पीठ फेरकर बैठने के लिए क्यों कहा?
- (क) ताकि वह शेर की पीठ का चित्र बना सके। ( )
- (ख) ताकि वह भागने की योजना पूरी कर सके। ( )
- (ग) ताकि शेर आराम से बैठ सके। ( )
- (घ) ताकि शेर के साथ आँख-मिचौनी खेल सके। ( )
सोचिए और लिखिए
- नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए -
- 1. चित्रकार जिस वातावरण में चित्र बना रहा था, उसका वर्णन कीजिए।
- 2. चित्रकार ने शेर को जंगल में चित्रकला का अभ्यास करने के लिए क्यों कहा होगा?
- 3. आपको इस कविता की कौन-सी घटना सबसे रोचक लगी?
- 4. चित्रकार ने शेर से बचने के लिए क्या किया?
अनुमान और कल्पना
- 1. चित्रकार ने शेर को 'जंगल के सरदार' नाम से क्यों पुकारा होगा?
- 2. यदि चित्रकार जंगल में रुक जाता और शेर से मित्रता करने का प्रयत्न करता तो क्या होता?
- 3. यदि शेर को भी चित्रकला में रुचि होती तो वह कौन-से चित्र बनाना पसंद करता?
- 4. यदि चित्रकार के स्थान पर आप होते तो शेर से बचने के लिए क्या करते?
भाषा की बात
- 1. कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इनमें छिपे मुहावरे पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए
- (क) “उसे देखकर चित्रकार के तुरंत उड़ गए होश।"
- (ख) “नदी, पहाड़, पेड़, पत्तों का, रह न गया कुछ जोश।”
- (ग) “चित्रकार ने नाव पकड़कर, ली जी भर के साँस।”
- (घ) “इधर शेर था धोखा खाकर, झुंझलाहट में चूर।”
- 2. अब इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए अपने मन से नए-नए वाक्य बनाइए।
- 3. नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए -
- इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र।
- चित्रकार चुपके से खिसका, जैसे कोई चोर।
- जल्दी-जल्दी नाव चलाकर, निकल गया वह दूर।
- 'आ गया' शब्द का प्रयोग अचानक आने को दर्शाने के लिए किया गया है।
- 'खिसका' शब्द 'धीरे-धीरे हटने' या 'बिना किसी को पता लगे' जाने का भाव प्रकट करता है।
- 'निकल गया' शब्द तेजी से दूर जाने का संकेत देता है।
'आने' और 'जाने' के कार्य को बताने के लिए इसी प्रकार के अनेक क्रिया शब्दों का प्रयोग किया जाता है। आगे दिए गए ऐसे ही क्रिया शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए ー
| आने के लिए क्रिया शब्दों | जाने' के लिए क्रिया शब्दों |
|---|---|
| आना - वह मेरे पास आया। | निकल पड़ना - मैं साहसिक यात्रा के लिए निकल पड़ा। |
| पहुँचना -.................... | रवाना होना -.............................................. |
| दाखिल होना -........................ | उड़ना -................................... |
| प्रवेश करना -.......................... | फिसलना -............................. |
| उपस्थित होना -............................... | खिसकना -.......................................... |
4."फिर उसको कुछ हिम्मत आई, देख उसे चुपचाप” उपर्युक्त पंक्ति को ध्यान से देखिए। यहाँ जिन शब्दों को रेखांकित किया गया है, वे शब्द संज्ञा शब्दों क्रमशः 'चित्रकार' और 'शेर' के लिए प्रयुक्त हुए हैं। आप जानते ही होंगे कि संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले ऐसे शब्दों को 'सर्वनाम' कहते हैं।
- अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित संज्ञा शब्दों को हटाकर उचित सर्वनाम शब्दों का प्रयोग कीजिए -
- (क) फिर शेर को चुपचाप देखकर चित्रकार को कुछ हिम्मत आई। फिर उसे चुपचाप देखकर उसको कुछ हिम्मत आई।
- (ख) चित्रकार जल्दी-जल्दी नाव चलाकर दूर निकल गया। → ..................जल्दी-जल्दी नाव चलाकर दूर निकल गया।
- (ग) चित्रकार नाव में बैठ गया। → .......................नाव में बैठ गया।
- (घ) शेर बहुत गुस्से में था। → .....................बहुत गुस्से में था।
- (ङ) चित्रकार और शेर ..............के बीच वार्तालाप हुआ।→ के बीच वार्तालाप हुआ।
कविता से कहानी
- 1. 'चतुर चित्रकार' कविता में आपने शेर और चित्रकार की कहानी का आनंद लिया। अब इस कहानी को अपने शब्दों में लिखिए।
- 2. इस कहानी के अंत में चित्रकार नाव में बैठकर दूर चला जाता है। अपनी कल्पना से इस कहानी का अंत बदलकर लिखिए। उदाहरण के लिए
चित्रकार शेर से मित्रता कर लेता है।
शेर चित्र बनाने में चित्रकार की सहायता करता है।
.............................................................................................................
.....................................................
बातचीत
नीचे दी गई शेर और चित्रकार के मध्य बातचीत को अपनी कल्पना से पूरा कीजिए -
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अरे जंगल के राजा! आप चुपचाप क्यों बैठे हैं? |
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.............................................. |
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तुलना
चित्रकार और शेर की विशेषताओं की तुलना कीजिए और उचित स्थान पर सही (√) या गलत (x) का चिह्न लगाइए
| गुण | चित्रकार | शेर |
|---|---|---|
| बुद्धिमान | ✓ | |
| शक्तिशाली | ||
| डरपोक | ||
| चतुर | ||
| डरावना | ||
| साहसी | ||
| भोला | ||
| जिज्ञासु |
पाठ से आगे
- 1. चित्रकार अपनी चतुराई का प्रयोग करके संकट से बच गया था। क्या कभी आपने किसी संकट का सामना करने के लिए अपनी चतुराई दिखाई है? उस अनुभव को कक्षा में साझा कीजिए।
- 2. क्या आपने कभी किसी की संकट में सहायता की है? बताइए कि आपने कैसे सहायता की थी।
चित्रकार का विद्यालय
- 1. कल्पना कीजिए कि चित्रकार ने जंगल में एक चित्रकला विद्यालय खोला है। आप इस विद्यालय का कोई नाम सुझाइए और इसके बारे में कुछ वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
- 2. इस विद्यालय के बारे में एक
- आकर्षक विज्ञापन बनाइए जिसे पढ़कर जंगल के पशु-पक्षियों में इस विद्यालय में प्रवेश लेने की इच्छा जाग जाए।
- (जैसे – प्रवेश जारी है। एक अनोखा विद्यालय, आपके पड़ोस में, आइए और सीखिए...)
खोजबीन
अपने अभिभावकों के साथ पशु-पक्षियों से संबंधित भारतीय वृत्तचित्र (डॉक्युमेंट्री) देखिए और उससे प्राप्त जानकारी कक्षा में साझा कीजिए।
जंगल में शांति और सुरक्षा
मान लीजिए, शेर और चित्रकार अच्छे मित्र हैं। वे चाहते हैं कि जंगल में सुख-शांति रहे। आप उन्हें जंगल में शांति के लिए क्या उपाय सुझाएँगे? कम से कम तीन सुझाव अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
(संकेत – ऐसे उपाय सोचिए जिनसे जंगल के पेड़-पौधे, हवा-पानी और पशु-पक्षी सुरक्षित रहें।)
पुस्तकालय से
पुस्तकालय से अपने शिक्षक की सहायता से पंचतंत्र अथवा हितोपदेश में से उन कहानियों को ढूंढ़िए जिनमें पशु-पक्षियों और मनुष्यों के मध्य संवाद हों।
आज की पहेली
- 1. चित्रकार जिस जंगल में गया था, वहाँ कौन-कौन से पेड़ हो सकते थे? आइए इस पहेली से पता लगाते हैं। इस पहेली को इसी कविता के कवि ने रचा है। अपने समूह में मिलकर पहेली बूझिए
- बाबूलाल मदन मुरलीधर इलाचंद्र हुबलाल।
- गिरिजाशंकर बेनीमाधव दंडपाणि यशपाल ।।
- गणपति काशीराम कलापी टहलराम घनश्याम।
- लेकर गए एक से दूने, कितने थे कुल आम?
- 2. ऊपर दी गई कविता में 12 पेड़ों के नाम छिपे हैं। उन नामों को ढूंढ़िए, जैसे – गण प ति, कलापी और टहलराम शब्दों में से 'पीपल' निकलता है। कोई एक अक्षर कई नामों के लिए भी प्रयुक्त हो सकता है।
उत्तर-1. 16383 आम
2. पेड़ के नाम - आम,पीपल,नीम,शीशम,जामुन,बबूल,कटहल,महुआ,बेल,इमली,बरगद,कदंब
दो मेंढकों की यात्रा
(जापानी लोककथा)
कई वर्ष पूर्व जापान में दो मेंढक रहते थे। उनमें से एक मेंढक ओसाका के पास एक खड्ड में रहता था जबकि दूसरा मेंढक क्योटो के पास बहने वाली एक नदी में निवास करता था।
एक दिन उन दोनों मेंढकों के दिमाग में एक साथ एक विचार आया। उन्होंने सोचा, 'इस जगह पर रहते हुए हमें बहुत दिन हो गए हैं। अब हमें यहाँ से निकलकर बाहर का संसार भी देखना चाहिए।'
यह संयोग ही था कि क्योटो के पास रहने वाले मेंढक ने ओसाका जाने का निश्चय किया जबकि ओसाका में रहने वाले मेंढक ने क्योटो जाने का निर्णय किया।
अगले ही दिन दोनों मेंढकों ने अपनी-अपनी यात्रा प्रारंभ कर दी। क्योटो और ओसाका शहरों को जोड़ने वाला एक ही मार्ग था। दोनों ही मेंढक उसी मार्ग पर अपनी-अपनी मंजिल की ओर चल दिए।
मार्ग में एक स्थान पर दोनों मेंढकों की भेंट हो गई। उन्होंने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और फिर आपस में बातचीत करने लगे। तभी ओसाका के मेंढक ने क्योटो के मेंढक से पूछा, "तुम कहाँ जा रहे हो, मित्र?” क्योटो के मेंढक ने उत्तर दिया, “मैं ओसाका जा रहा हूँ।”
यह सुनते ही ओसाका का मेंढक प्रसन्न होकर बोला, "क्या बात है! मैं क्योटो जा रहा हूँ।"
दोनों ही मेंढक चलते-चलते बहुत थक चुके थे इसलिए उन्होंने थोड़ा आराम करने का निश्चय किया। फिर वे पास ही स्थित एक बड़ी चट्टान की छाया में जा बैठे।
तभी ओसाका का मेंढक बोला, “कितना अच्छा होता, अगर हमारा आकार थोड़ा बड़ा होता।” क्योटो के मेंढक ने आश्चर्य से पूछा, "आकार बढ़ने से क्या होता?”
ओसाका के मेंढक ने उत्तर दिया, "तब हम आसानी से किसी पहाड़ पर चढ़कर उन शहरों को देख लेते, जहाँ हम जा रहे हैं। फिर हमें यह भी पता लग जाता कि वे शहर देखने लायक हैं भी या नहीं!"
यह सुनकर क्योटो का मेंढक बोला, "इसमें कौन-सी बड़ी बात है। यह कार्य तो हम अभी भी कर सकते हैं।” “वह कैसे?” ओसाका के मेंढक ने आश्चर्य से पूछा। क्योटो के मेंढक ने उसे समझाते हुए कहा, “यह कार्य तो बहुत आसान है। यदि हम पास के पहाड़ पर चढ़कर एक-दूसरे का सहारा लेते हुए अपने पिछले पैरों पर खड़े हो जाएँ तो फिर हम आसानी से उन शहरों को देख सकेंगे, जहाँ हम जाना चाहते हैं।"
ओसाका का मेंढक क्योटो की झलक देखने के लिए इतना उत्सुक था कि वह दौड़कर पास के पहाड़ पर चढ़ने लगा। यह देखकर क्योटो का मेंढक भी उसके पीछे दौड़ा। फिर वे दोनों उछलते-उछलते पास में ही स्थित एक पहाड़ के शिखर पर जा पहुँचे। दोनों मेंढक अपनी लंबी यात्रा के कारण बहुत थका हुआ अनुभव तो कर रहे थे लेकिन उन्हें इस बात की खुशी भी थी कि वे उन शहरों को देख सकेंगे जिन्हें देखने के लिए वे लंबी यात्रा करके वहाँ तक आए थे।
पहाड़ के शिखर पर पहुँचने के बाद ओसाका के मेंढक ने उछलकर अपने अगले पैरों को अपने मित्र के कंधों पर रख दिया। क्योटो के मेंढक ने भी ऐसा ही किया। अब दोनों मेंढक अपने पिछले पैरों पर खड़े थे और उनके अगले पैर एक-दूसरे के कंधों पर थे। उन्होंने एक-दूसरे को कसकर पकड़ रखा था ताकि वे पहाड़ से नीचे न गिर जाएँ। लेकिन उन दोनों ने एक बात की ओर ध्यान ही नहीं दिया था। उन्होंने अपनी पीठ उन्हीं शहरों की ओर कर रखी थी, जिन्हें वे देखना चाहते थे।
इस प्रकार दोनों मेंढकों के गलत तरीके से खड़े होने के कारण ओसाका से आया हुआ मेंढक ओसाका को ही देख रहा था जबकि क्योटो के मेंढक की नजर क्योटो पर ही पड़ रही थी। इस प्रकार दोनों ही मेंढक अपने प्रिय शहरों को नहीं देख पा रहे थे।
तभी ओसाका का मेंढक बोला, "ओह! लगता है, मैंने यहाँ तक आकर अपना समय ही नष्ट किया है। क्योटो तो बिल्कुल ओसाका की तरह ही दिखता है।"
क्योटो से आए मेंढक को भी अनुभव हो रहा था कि ओसाका भी क्योटो की तरह ही है। फिर दोनों मेंढक अपने-अपने घर लौट गए।

